shayari

काव्य- नारी (Kavay- Naari)

हे नारी! तू अबला नारी है क्यों हर युग में रही बेचारी है क्यों कभी रावण द्वारा चुराई गई फिर…

ग़ज़ल- कभी हम नहीं मिलते… (Gazal- Kabhi Hum Nahi Milte…)

ढूंढे़ कोई हमें तो सिर्फ़ ठिकानों पर मिलते है ये बंजारापन देख के अब हम घर में नहीं मिलते मुझसे…

काव्य- कार्तिक पूर्णिमा (Kavya- Kartik Purnima)

आई कार्तिक की पूर्णिमा लेकर ख़ुशियां हज़ार प्रतिवर्ष में एक दिन आता है ये पावन त्योहार आज दिन है गंगा…

कविता- शुभ दीपावली (Poetry- Shubh Deepawali)

जगमग जगमग दीप जलाओ शुभ दीपावली आई है सब मिलजुल ख़ुशी मनाओ संग कितनी ख़ुशियां लाई है पाँच दिनों का…

कविता- डर लगता है… (Poetry- Darr Lagta Hai…)

ज़िंदगी का आईना देख कर डर लगता है ऐ ज़िंदगी अब तुझे देख कर डर लगता है डर लगता है…

गीत- हे माँ कृपा इतनी करना… (Geet- Hey Maa Kripa Itni Karna…)

श्रम-निष्ठा जो हो सच्ची, माँ मेरे द्वारे तुम आना, आत्मा को तृप्त करें, वरदान मुझे वो दे जाना। युक्ति की…

गीत- अबकी नवरात्रि कुछ यूं मनाएं… (Geet- Abki Navratri Kuch Yun Manayen…)

बहुत ज़रूरी काम है ये, भाई मेरे मत झुठलाना इक बेटी की हंसी खो गई, कहीं मिले तो बतलाना ओढ़…

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष गीत… (Happy Krishna Janmashtami)

* रँगा अम्बर नील वर्ण में सूरज ने छिटका अबीर गुलाल हरसिंगार से झरा रँग नारंगी झूम उठी महुए की…

काव्य- एक प्याला चाय… (Poem- Ek Pyala Chai…)

चाय में घुली चीनी सी मीठी बातें बिस्कुट सी कुरकुरी आ जाती हैं होंठों पर तैरती रहती हैं कमरे में…

कविता- जब तुम कहीं नहीं हो… (Poetry- Jab Tum Kahin Nahi Ho…)

ये धड़कनें तुम्हारे आस पास ठहरीं माना कि तुम नहीं हो जब सोचता हूं अकेला तस्वीर तुम्हारी उभरी कैसे कह दूं…

कविता- पुल… (Poetry- Pul…)

शहर के कोने पर बहती हुई उस छोटी सी जलधारा पर बना वो पुल जिस पर अनायास आमने-सामने आ गए…

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