एशियन गेम्स- जीत का सिलसिला यूं ही रहे बरकरार (Asian Games- Well Done Indian Team)

एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन रहा. खिलाड़ियों ने बेहतरीन उपलब्धियां हासिल कीं, ख़ासकर जिग्सन जॉनसन, स्वप्ना बर्मन, विकास कृष्ण, विनेश फोगाट, दुती चंद, हिमा दास, पीवी सिंधु आदि का दमदार प्रदर्शन रहा. यह एशियन गेम्स भारत का अब तक का सबसे कामयाब एशियन गेम्स रहा है. सभी खिलाड़ियों ने अपना सौ प्रतिशत दिया.

यह खिलाड़ियों की मेहनत लगन और जीत का जज़्बा ही था कि हर दिन पदक जीतने का सिलसिला चलता रहा. कुश्ती, बैडमिंटन, जैवलिन थ्रो, लॉन्ग जंप, नौकायान, घुड़सवारी, दौड़ आदि में खिलाड़ियों ने कई कीर्तिमान स्थापित किए. इसमें कोई दो राय नहीं कि इस प्रतियोगिता में महिलाओं का काफ़ी दबदबा रहा. पहली बार इस प्रतियोगिता में ब्रिज खेल में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड अपने नाम किया.
उम्मीद के अनुकूल प्रदर्शन ना करने के बावजूद कबड्डी में महिला/पुरुष की टीम ने सिल्वर, हॉकी में महिलाओं ने सिल्वर और पुरुष टीम ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता.
भले ही हम कुछ पदक जीतने से चूक गए, पर इसके बावजूद सभी भारतीय खिलाड़ियों ने लाजवाब खेल का नजारा पेश किया. पदकों के हिसाब से भी इस बार हमारा प्रदर्शन उम्दा रहा. सभी खिलाड़ियों को हमारी ढेर सारी शुभकामनाएं और बधाइयां. साथ ही इसी तरह आनेवाली हर प्रतियोगिताओं में वे अपना लाजवाब प्रदर्शन करते रहें, इसके लिए ऑल द बेस्ट! देशवासियों को सभी खिलाड़ियों पर नाज है. हमारे लिए प्रत्येक भारतीय खिलाड़ी विजेता है!

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कुछ उपलब्धियों की झलकियांं

स्वप्ना/अरपिंदर ने रचा इतिहास
जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में हर रोज़ भारतीय खिलाड़ियोंं ने उपलब्धियां दर्ज कराई. हेप्टाथलोन में स्वप्ना बर्मन ने और ट्रिपल जंप में अरपिंदर सिंह ने तो इतिहास रच दिया. दोनों ही खिलाड़ियों को बहुत-बहुत बधाई. 48 सालों में पहली बार देश को ट्रिपल जंप में स्वर्ण पदक हासिल हुआ. मनिका बत्रा व अचंता शरत कमल ने मिक्स्ड टेबल टेनिस में कांस्य पदक जीता. चीन को सेमीफाइनल में हराकर महिला हॉकी टीम बीस साल में पहली बार हॉकी के फाइनल में पहुंची थी.

नौकायन टीम का संघर्ष व जीत

इंडोनेशिया के जकार्ता-पालेमंबर्ग के 18वें एशियाई खेल में जैसे-जैसे एशियन गेम्स आगे बढ़ता रहा, वैसे-वैसे भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन में भी निखार आता रहा. पहली बार रोइंग टीम ने एक स्वर्ण व दो कांस्य के साथ तीन पदक पर कब्ज़ा किया. दत्तू भोकानाल, स्वर्ण सिंह, ओमप्रकाश व सुखमीत सिंह रोइंग मैन्स टीम ने 6:17:17 के समय के साथ गोल्ड अपने नाम किया. दुष्यंत ने बीमार होने के बावजूद कांस्य पदक जीता. भगवान सिंह व रोहित ने लाइटवेट डबल स्कल्स में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता. रोइंग टीम को बधाई. रोहन बोपन्ना और दिविज शरण की जोड़ी ने डबल्स टेनिस में कज़ाकिस्तान के एलेक्सांद्र बुबलिक व डेनिस येवसेयेव को हराकर गोल्ड अपने नाम किया. अनुभवी निशानेबाज़ हीना सिद्धू ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता. ख़ुशी के साथ थोड़े ग़म भी भारत के हिस्से में आए यानी पहली बार जहां पुरुष कबड्डी टीम को कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा, वहीं महिला कबड्डी टीम ने सिल्वर मेडल जीता.

शार्दुल-अंकिता की सराहनीय जीत

जकार्ता में हर रोज़ देश के युवा खिलाड़ियों ने भी अपना दमख़म दिखाया. 15 साल के शार्दुल विहान ने डबल ट्रैप इवेंट में रजत पदक जीत देशवासियों को ख़ुश कर दिया. इसके अलावा टेनिस के एकल में अंकिता रैना ने कांस्य पदक अपने नाम किया. अंकिता से पहले साल 2006 में सानिया मिर्ज़ा ने रजत व साल 2010 में कांस्य पदक जीता था.

राही का सटीक निशाना

एशियाड खेल में भारतीय खिलाड़ी दिनोंदिन अपने बेहतरीन प्रदर्शन से सुर्खियां बटोरते रहे. 18 अगस्त-2 सितंबर तक चले इस खेल कुंभ में हर रोज़ एक नया कीर्तिमान स्थापित होता रहा. निशानेबाज़ी में राही सरनबोत ने 25 मीटर पिस्टल में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास ही रच दिया. इसके अलावा भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने हांगकांग को 26-0 से हराकर रिकॉर्ड बनाया.

* एथलेटिक्स में भारत में सबसे अधिक पदक यानी कुल १९ पदक जीते.

* मुक्केबाज़ी में अमित पंघाल के स्वर्ण पदक के साथ भारत के पदकों की संख्या कुल 69 हो गई. यह अब तक का भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है.

*  भारत ने १५ स्वर्ण, २४ रजत और ३० कांस्य के साथ ६९ पदकों पर कब्जा किया.

* १९५१ से शुरू हुए एशियाई खेलों में भारत का यह अब तक का बेस्ट परफॉर्मेंस रहा है.

इंडोनेशिया के जर्काता में हुए एशियन गेम्स में बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट, सौरभ चौधरी, लक्ष्य, संजीव राजपूत, अपूर्वी चंदेला, रवि कुमार, अभिषेक वर्मा, दिव्या काकरान के सराहनीय उपलब्धियां रहीं. वैलडन टीम इंडिया!

– ऊषा गुप्ता

Usha Gupta :
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