Relationship & Romance

अपनी लाइफ पार्टनर में ख़ूबसूरती ही नहीं, ये खूबियां भी चाहते हैं पुरुष (Not only Beauty, Men also look for these qualities in their life partner)

हर पुरुष की दिली ख़्वाहिश होती है कि उसकी पत्नी बेहद ख़ूबसूरत हो, मगर ख़ूबसूरती के साथ ही पुरुष पत्नी…

पहला अफेयर… लव स्टोरी: छोटी-सी मुलाक़ात! (Pahla Affair… Love Story: Chhoti-Si Mulaqat)

“आप मेरी सीट पर बैठे हैं मिस्टर… “  “जी शशिकांत… यही नाम है मेरा और हां, सॉरी आपकी विंडो सीट है आप यहां बैठ जाइए , मैं अपनी साइड सीट पर बैठजाता हूं!” “शुक्रिया” “वेल्कम मिस…?” “जी नेहा नाम है मेरा…” पता नहीं क्यों उस मनचले टाइप के लड़के से मैं भी फ़्रेंडली हो गई थी. मैं बस के रास्ते से मसूरी जारही थी और उसकी सीट भी मेरी बग़ल में ही थी, रास्तेभर उसकी कमेंट्री चल रही थी…  “प्रकृति भी कितनी ख़ूबसूरत होती है, सब कुछ कितना नपा-तुला होता है… और एक हम इंसान हैं जो इस नाप-तोल को, प्रकृति के संतुलन को बस बिगाड़ने में लगे रहते हैं… है ना नेहा… जी” मैं बस मुस्कुराकर उसकी बातों का जवाब दे देती… मन ही मन सोच रही थी कब ये सफ़र ख़त्म होगा और इससे पीछाछूटेगा… इतने में ही बस अचानक रुक गई, पता चला कुछ तकनीकी ख़राबी आ गई और अब ये आगे नहीं जा सकेगी… शाम ढल रही थी और मैं अकेली घबरा रही थी…  “नेहा, आप घबराओ मत, मैं हूं न आपके साथ…” शशि मेरी मनोदशा समझ रहा था लेकिन था तो वो भी अनजान ही, आख़िर इस पर कैसे इतना भरोसा कर सकती हूं… ऊपर से फ़ोन चार्ज नहीं था…  “नेहा आप मेरे फ़ोन से अपने घरवालों को कॉल कर सकती हैं, वर्ना वो भी घबरा जाएंगे…” शशि ने एक बार फिर मेरे मनको भांप लिया था…  मैंने घर पर बात की और शशि ने भी उनको तसल्ली दी, शशि फ़ौज में था… तभी शायद इतना ज़िंदादिल था. किसी तरहशशि ने पास के छोटे से लॉज में हमारे ठहरने का इंतज़ाम किया.  मैं शांति से सोई और सुबह होते ही शशि ने कार हायर करके मुझे मेरी मंज़िल तक पहुंचाया…  “शुक्रिया दोस्त, आपने मेरी बहुत मदद की, अब आप अंदर चलिए, चाय पीकर ही जाना…” मैंने आग्रह किया तो शशि नेकहा कि उनको भी अपने घर जल्द पहुंचना है क्योंकि शाम को ही उनको एक लड़की को देखने जाना है रिश्ते के लिए…  “कमाल है, आपने पहले नहीं बताया, मुबारक हो और हां जल्दी घर पहुंचिए…” मैंने ख़ुशी-ख़ुशी शशि को विदा किया.  “नेहा, बेटा जल्दी-जल्दी फ्रेश होकर अब आराम कर ले, शाम को तुझे लड़केवाले देखने आनेवाले हैं…” मम्मी की आवाज़सुनते ही मैं भी जल्दी से फ्रेश होकर आराम करने चली गई. शाम को जब उठी तो देखा घर में एक अजीब सा सन्नाटा पसरा था…  “मम्मी-पापा क्या हुआ? आप लोग ऐसे उदास क्यों बैठे हो?” “नेहा, पता नहीं बेटा वो लड़केवाले अब तक नहीं आए और उनके घर पर कोई फ़ोन भी नहीं उठा रहा…” पापा ने कहा तोमैंने उनको समझाया, “इतनी सी बात के लिए परेशान क्यों हो रहे हो, नेटवर्क प्रॉब्लम होगा और हो सकता है किसी वजहसे वो न आ पाए हों… कल या परसों का तय कर लेंगे…” ये कहकर मैं अपने रूम में आ गई तो देखा फ़ोन चार्ज हो चुकाथा. ढेर सारे मैसेज के बीच कुछ तस्वीरें भी थीं जो पापा ने मुझे भेजी थीं… ओपन किया तो मैं हैरान थी… ये तो शशि कीपिक्स हैं… तो इसका मतलब शशि ही मुझे देखने आनेवाले थे… मैं मन ही मन बड़ी खुश हुई लेकिन थोड़ी देर बाद ही येख़ुशी मातम में बदल गई जब शशि के घर से फ़ोन आया कि रास्ते में शशि की कैब पर आतंकी हमला हुआ था जिसमें वोशहीद हो गए थे…  मेरी ख़ुशियां मुझे मिलने से पहले ही बिछड़ गई थीं… मैंने शशि के घर जाने का फ़ैसला किया, पता…

पहला अफेयर… लव स्टोरी: ये मेघ सदा हमारे प्रेम के साक्षी होंगे (Pahla Affair… Love Story: Ye Megh Hamare Prem Ke Sakshi Honge)

इतने वर्षों बाद आज फ़ेसबुक पर तुम्हारी तस्वीर देख हृदय में अजीब सी बेचैनी होनी लगी. उम्र के साठवें बसंत में भी चेहरे पर वही मासूमियत, वही कशिश, वही ख़ूबसूरती और वही कज़रारी आंखें जिसने वर्षों पहले मुझे तुम्हारी ओर तरह खींच लिया था. तुम्हारी फूल सी मासूमियत का कब मैं भंवरा बन बैठा मुझे पता ही नहीं चला था. आज जीवन में भले ही हम अपने-अपने परिवारों में व्यस्त हैं, ख़ुश है और संतुष्ट भी हैं, पर कुछ ख़लिश भी है… मेरे अधूरे प्रेम की ख़लिश. मैंने तुम्हारे प्रेम की लौ को कभी बुझने नहीं दिया. वो आज भी मेरे हृदय के एक कोने में अलौकिक है. मैं बार-बार एक अल्हड़ से प्रेमी की तरह फ़ेसबुक पर तुम्हारी तस्वीर निहार रहा था. उस दिन की तरह आज भी बाहर आकाश काले मदमस्त बादलों से घिर गया था. ठंडी-ठंडी बयार चल रही थी, जिसके झोंके मुझे अतीत की तरफ़ खींच रहे थे, जब मैंने पहले बार तुम्हें स्कूल के रास्ते में अपनी साइकल की चेन ठीक करते देखा था. बार-बार की कोशिशों के बावजूद तुम साइकल की चेन ठीक करने में असफल हो रहीं थीं. जब तुमसे मदद करने के लिए पूछा तो तुमने मना करने के लिए जैसे ही निगाहें ऊपर उठाई, मेरी निगाहें तुम्हारे चेहरे पर टिक गयी थीं. गुलाब के फूल की तरह एकदम कोमल चेहरा, आंखों में गहरा काजल और लाल रिब्बन से बंधी दो लम्बी चोटियां. उसी क्षण मेरा दिल तुम्हारे लिए कुछ महसूस करने लगा था. पता नहीं क्या कशिश थी तुम्हारे मासूम चेहरे में कि तुम्हारे बार-बार मना करने के बाद भी मैं वहीं खड़ा रहा.  आसमान को अचानक काले-काले बादलों ने अपने आग़ोश में ले लिया था. ठंडी-ठंडी हवा चलने लगी थी. ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे बरखा पूरे ज़ोर-शोर से बरसने को आतुर है. अचानक करवट लिए मौसम और स्कूल लेट होने की परेशानी तुम्हारे चेहरे पर साफ़ झलक रही थी, लेकिन फिर भी तुमने मेरी मदद लेने को साफ़ इनकार कर दिया. तभी बादलों ने गरजना शुरू कर दिया और हार कर तुमने मेरी मदद ले ही ली. हम दोनों ने अपनी-अपनी साइकल घसीटते हुए, बातें करते हुए कब स्कूल का सफ़र तय कर लिया पता ही नहीं चला. बातों-बातों मे पता चला कि तुम मुझसे एक साल बड़ी हो. मैं ग्यराहवीं में था और तुम बारहवीं में.तुम्हारा स्कूल में ये अंतिम वर्ष था, ये सोचकर मैं बेचैन हो जाता था. बस फिर मैं अकसर तुम्हारी कक्षा और तुम्हारे आस-पास मंडराने के बहाने खोजने लगा. मैं किसी भी क़ीमत पर ये एक साल व्यर्थ नहीं करना चाहता था. हमारी दोस्ती धीरे-धीरे गहरी होने लगी. मेरे दिल की हालत से बेख़बर तुम मुझे सिर्फ़ एक अच्छा दोस्त समझती थी, पर मैं तो तुम्हारे प्रेम के अथाह सागर में गोते लगा रहा था. उस ज़माने में लड़कियों और लड़कों की दोस्ती का चलन नहीं था, इसलिए हमारी मित्रता सिर्फ़ स्कूल तक ही सीमित थी. उस दिन बारहवीं क्लास के स्टूडेंट्स का स्कूल में अंतिम दिन था. सभी स्टूडेंट्स…

पति-पत्नी का रिश्ता दोस्ती का हो या शिष्टाचार का? क्या पार्टनर को आपका बेस्ट फ्रेंड होना ज़रूरी है? (Should Husband And Wife Be Friends? The Difference Between Marriage And Friendship)

हर रिश्ते की अपनी खूबसूरती होती है और उसी के साथ-साथ हर रिश्ते की अपनी मर्यादा भी होती है. कहते हैं रिश्ता तभीज़्यादा टिकाऊ होता है जब आप उसमें कुछ छूट यानी स्पेस या आज़ादी देते हैं और वहीं ये भी सच है कि कुछ ज़्यादा हीकैज़ुअल अप्रोच आपके रिश्ते के लिए घातक भी साबित हो सकती है. पति-पत्नी का रिश्ता भी ऐसा ही प्यारा सा रिश्ता है, जिसमें विश्वास, दोस्ती और मर्यादा का समन्वय ज़रूरी होता है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या अपने रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए इसमें दोस्ती का पुट ज़्यादा होना चाहिए या फिर शिष्टाचार का पालन ज़्यादा करना चाहिए? पति-पत्नी के बीच दोस्ताना व्यवहार अच्छा तो है लेकिन सात फेरों के बंधन में बंधने के बाद वो रिश्ता थोड़ा बदलजाता है. इस रिश्ते को सम्मान और लिहाज़ से सींचना पड़ता है.इसमें विश्वास की नींव डालनी पड़ती है. इसमें प्यार और दोस्ती भी निभानी पड़ती है. ऐसे में आप या हम कोई एक दायरा नहीं बना सकते कि क्या कम हो और क्या ज़्यादा, क्योंकि हर कपल अलग होता है. उसकी सोच और अपने रिश्ते से उम्मीद भी अलग ही होती है. हां इतना ज़रूर हम तय कर सकते हैं कि इस रिश्ते में दोस्ती कब और कैसे निभाई जाए और शिष्टाचार का पालन कब और कितना किया जाए.ज़ाहिर से बात है कि अगर आप दोनों दोस्त नहीं बनेंगे तो आपका रिश्ता महज़ औपचारिक बनकर रह जाएगा, जिसमें एक झिझक और संकोच हमेशा बना रहेगा. ऐसे में न खुलकर दिल की बात शेयर कर सकेंगे, न एक साथ मिलकर हंस सकेंगे और न दोस्तों की तरह शिकायतेंकर सकेंगे, इसलिए दोस्ती पहला स्टेप है पति-पत्नी के रिश्ते की बुनयाद को मज़बूती देने की तरफ़. एक दोस्त की तरह उनका दुःख बांटें, उनका विश्वास जीतें. पता है लोग अपने प्रेमी-प्रेमिका या पति-पत्नी से जोबातें शेयर करने से झिझकते हैं वो बातें वो खुलकर अपने दोस्तों के साथ शेयर करते हैं, इसकी वजह जानते हैं? क्योंकि लगभग सभी का ये मानना है कि दोस्त हमें जज नहीं करते, वो हमें और हमारी कमज़ोरियों को बेहतर तरीक़ेसे समझते हैं. यही वजह है कि आपको सबसे पहले अपने पार्टनर को हर बात पर जज करना, परखना बंद करना होगा और उसकीजगह उनको समझना शुरू करना होगा, ताकि आप ही एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त बन जाएं.अगर पति को कोई कलीग खूबसूरत और स्टाइलिश लगती है तो वो खुलकर कह सके बिना इस डर के कि आप इसआधार पर उनके चरित्र को जज न करें बल्कि ये सोचें कि ये तो इंसानी फ़ितरत है, आपके पार्टनर आपसे शेयर तोकर रहे हैं.इसी तरह अगर पत्नी भी अपने किसी मेल दोस्त या कलीग की सराहना करती है तो पति को उसे स्पोर्टिंगली लेना चाहिए. आपका रिश्ता ऐसा होना चाहिए जिसमें छोटी-छोटी बातों से आपको परखे जाने का डर न हो. इन बातों से आपके रिश्ते पर असर न हो. इस तरह से दोस्ती का एक रिश्ता आपको क़ायम करना चाहिए. वहीं दूसरी ओर ये भी न हो कि रिश्ते में आप दोनों इतने बेपरवाह हो जाएं कि बस सिर्फ़ दोस्त ही बनकर रह जाएं. शिष्टाचार का मतलब ये न निकालें कि रिश्ते को औपचारिक बना लें. लेकिन हां, एक-दूसरे का सम्मान करें. दूसरों के सामने एक-दूसरे को बेवजह टोकें नहीं. सॉरी, थैंक्यू और प्लीज़ जैसे मैजिक वर्ड्स का इस्तेमाल न स़िर्फ शिष्टता दर्शाता है, बल्कि रिश्ते को मज़बूत भी बनाता है.इसलिए आपसी बातचीत में शब्दों का चयन भी बहुत मायने रखता है.ध्यान रहे आप एक-दूसरे के पार्टनर हैं न कि गार्जियन, इसलिए स्कूलिंग न करें एक-दूसरे की.एक-दूसरे की सलाह लें, हर छोटे-बड़े मसले पर. शेयर करें, केयर करें. पार्टनर की राय का सम्मान करें. एक-दूसरे से परिवार वालों को भी रेस्पेक्ट दें. दूसरों के सामने बहुत ज़्यादा सवाल-जवाब न करें, अगर कहीं कोई संदेह है तो अकेले में बात करें. एक-दूसरे के काम में हाथ बंटाना भी शिष्टाचार है और शादी में ये बहुत ज़रूरी है.अपनों से बात करते वक़्त हम अक्सर अपने शब्दों के चयन पर ध्यान नहीं देते. हम यह सोचते हैं कि अपनों के साथ क्या औपचारिकता करना और इसी सोच के चलते हम अक्सर शिष्टता भूल जाते हैं. चाहे अपने हों या अन्य लोग, तमीज़ से, प्यार से बात करेंगे, तो सभी को अच्छा ही लगेगा. अपनों के साथ तो और भीसतर्क रहना चाहिए, क्योंकि हमारे द्वारा कहा गया कोई भी कटु शब्द उन्हें ज़्यादा हर्ट कर सकता है, जिससे मन-मुटाव हो सकता है. गलती होने पर माफ़ी मांगने से पीछे न हटें. अपने ईगो को एक तरफ़ रखकर यही सोचें कि गलती किसी से भी होसकती है, अगर आपसे भी हुई है तो पार्टनर से माफ़ी मांगें. इसके अलावा खाने-पीने से संबंधित शिष्टाचार भी ज़रूरी है. बहुत ज़्यादा आवाज़ करके या जल्दी-जल्दी न खाएं. पर्सनल हाईजीन यानी खुद को साफ़-स्वच्छ रखना भी शिष्टता में आता है. अपने पार्टनर और रिश्ते के प्रति इतनेबेपरवाह न हो जाएं कि अपनी ओर ध्यान ही न दें. पार्टनर भले ही कहें नहीं लेकिन उनको भी ये पसंद नहीं आएगा, इसलिए पर्सनल हाईजीन से लेकर ओरल हाईजीन का भी ख़याल रखें. कुल मिलाकर दोस्ती और शिष्टाचार के बीच एक सामंजस्य, समन्वय और संतुलन ही रिश्ते की सफलता की चाभी है. हनी शर्मा 

पहला अफेयर: गुडबाय अप्रतिम (Pahla Affair… Love Story: Goodbye Apratim)

रंगों और ख़ुशियों से सराबोर होली का दिन सबके लिए बेहद रंगीन होता है, लेकिन मेरे लिए ये रंग मेरे पुराने ज़ख्मों कोहरा करने के सिवा और कुछ नहीं… मुझे याद है जब अप्रतिम ने होली के रोज़ ही मुझे आकर गुलाबी रंग से  रंग डाला था. मैं बस देखती ही रह गई थी, न उसे रोका, न टोका.  अगले दिन कॉलेज में मुलाक़ात हुई तो अप्रतिम ने पूछा, “आरोही, तुमको बुरा तो नहीं लगा मेरा इस तरह अचानक आकरतुमको रंग लगाना?” “नहीं, ख़ुशी का दिन था, होली में तो वैसे भी गिले-शिकवे दूर हो जाते हैं…” मैंने जवाब दिया.  अप्रतिम ने फिर मेरी आंखों में झांका और कहा, “अगर मैं ये कहूं कि इसी तरह मैं तुम्हें अपने प्यार के रंग में रंगना चाहता हूं, ताउम्र, तब?” मैं उसकी तरफ़ देखती रह गई, आख़िर कॉलेज की कई लड़कियां उसकी दीवानी थीं. बेहद आकर्षक और सुलझा हुआ थाअप्रतिम.  “तुम्हारी चुप्पी को हां समझूं?” अप्रतिम ने टोका तो मैं भी मुस्कुराकर चली गई वहां से. पहले प्यार ने मुझे छू लिया था, मेरीज़िंदगी में इस होली ने वाक़ई मुहब्बत के रंग भर दिए थे.  कॉलेज पूरा हुआ, अप्रतिम को अच्छी सरकारी नौकरी मिल गई थी और मैं भी अपना पैशन पूरा करने में जुट गई. कमर्शियल पायलेट बनने का बचपन से ही सपना था मेरा. इसी बीच अप्रतिम ने बताया उसकी बहन की शादी तय हो गई है और उसके बाद वो हमारी शादी की बात करेगा घर में.  एक रोज़ मैंने अप्रतिम से कहा कि चलो आज दीदी के ऑफ़िस चलकर उनको सर्प्राइज़ देते हैं, तब अप्रतिम ने बताया किदीदी ने जॉब छोड दिया. वजह पूछने पर उसने बताया कि शादी के बाद वो घर सम्भालेंगी, क्योंकि उनके होनेवाले सास-ससुर व पति भी यही चाहते हैं.  “लेकिन तुमने या दीदी ने उनको समझाया क्यों नहीं, दीदी इतनी टैलेंटेड हैं. हाइली क्वालिफ़ाइड हैं…”  अप्रतिम ने मुझे बीच में ही चुप कराकर कहा कि ये उनका मैटर है और शादी के लिए तो लड़कियों को एडजेस्ट करना हीपड़ता है, इसमें ग़लत क्या है? आगे चलकर उनको ग्रहस्थी ही तो सम्भालनी है.  मुझे बेहद अजीब लगा कि इतनी खुली व सुलझी हुई सोच का लड़का ऐसी बात कैसे कर सकता है? ख़ैर, मुझे भी जॉब मिल गया था और अब मैं आसमान से बातें करने लगी थी. तभी घर में मेरी भी शादी की बात चलने लगीऔर मम्मी-पापा ने अप्रतिम से कहा कि वो भी अपने घरवालों को बुलाकर हमसे मिलवा दे. “अप्रतिम, क्या बात है? तुम संडे को आ रहे हो न मॉम-डैड के साथ? इतने परेशान क्यों हो? उनको भी तो हमारे बारे में सबपता है, फिर तुम उलझे हुए से क्यों लग रहे हो?” मैंने सवाल किया तो अप्रतिम ने कहा कि उसकी उलझन की वजह मेराजॉब और करियर है. वो बोला, “आरोही,  मैं समझता हूं कि ये तुम्हारे लिए सिर्फ़ एक जॉब नहीं, बल्कि तुम्हारा सपना है, लेकिन मेरे पेरेंट्स इसे नहीं समझेंगे. उनका कहना है कि इतना टफ़ काम तुम क्यों करती हो? लकड़ी होकर इसमें करियरबनाने की बजाय तुम कोई दफ़्तर की पार्ट टाइम नौकरी कर लो, ताकि मेरा भी ख़याल रख सको और घर भी सम्भालसको…”  मैंने उसे बीच में टोका, “तुम्हारा ख़याल? तुम कोई बच्चे नहीं हो और न मैं तुम्हारी आया. हम पार्टनर्स हैं, तुमने अपने पेरेंट्सको समझाया नहीं?” “आरोही मैं क्या समझाता, वो भी तो ग़लत नहीं हैं. मैं अच्छा-ख़ासा कमाता हूं. पैसों को वैसे भी कमी नहीं…”…

10 उम्मीदें जो रिश्तों में कपल्स को एक- दूसरे से होती हैं, जो उन्हें बनाती हैं परफेक्ट कपल (10 Things Couples Expect In Relationship Which Make Them Perfect Couple)

एक-दूसरे से अलग होते हुए भी स्त्री और पुरुष साथ चलते हैं, परिवार और रिश्ते निभाते हैं, मगर उनकी चाहतें…

क्या आप भी अपने रिश्तों में करते हैं ये ग़लतियां? इनसे बचें ताकि रिश्ते टिकाऊ बनें (Common Marriage Mistakes To Avoid: Simple And Smart Tips For A Healthy And Long-Lasting Relationship)

रिश्तों की डोर काफ़ी नाज़ुक होती है इसमें ज़रा सा ढीलापन या ज़रूरत से ज़्यादा खिंचाव इसे तोड़ सकता है. बेहतर होगाकि हम अपने रिश्तों को संतुलित और सहज रखें. छोटी-छोटी बातों और ग़लतियों को इतना बड़ा ही न बनने दें कि रिश्तेपर आंच आ जाए. फ़ॉलो करें ये टिप्स जिन्हें आप भी जानते-समझते हैं लेकिन बस नज़रअंदाज़ कर देते हैं.  डाउनलोड करें हमारा मोबाइल एप्लीकेशन https://merisaheli1.page.link/pb5Z और रु. 999 में हमारे सब्सक्रिप्शन प्लान का लाभ उठाएं व पाएं रु.…

पहला अफेयर: प्यार की मंज़िल (Pahla Affair… Love Story: Pyar Ki Manzil)

शाम को मैं कॉलेज से आज जल्दी ही निकल गई. आर्ट गैलरी में मेरे पसंदीदा चित्रकार आदित्य के चित्रों की एकल प्रदर्शनी लगी है, तो मैं अपने आप को रोक न सकी. कुछ सालों से मैं आदित्य जी के चित्रों को पत्र-पत्रिकाओं में देखती आ रही हूं और उनके चित्रों ने गहराई तक मेरे मन को प्रभावित किया है. कार आर्ट गैलरी की ओर जा रही थी और मन तीस वर्षपूर्व की ओर भाग रहा था. पता नहीं क्यों आज मुझे अपने पहले प्यार उदय की बहुत याद आ रही है. उन दिनों मैं अपने मामाजी के घर रहकर कॉलेज की पढ़ाई कर रही थी. बचपन में ही मैं अपने माता-पिता को खो चुकी थी. निसंतान मामा-मामी ने ही मुझे पाल-पोसकर बड़ा किया था. उदय नाम का युवक मामाजी के घर के ऊपरी हिस्से में किराए पर रहने आया था. वह कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था. हमारे बीच कोई बातचीत नहीं होती थी, बस आते-जाते नज़रें टकरा जाती थी और हल्की-सी मुस्कान दोनों के चेहरे पर दौड़ जाती थी. उसके गंभीर और शांत चेहरे पर कुछ बात ज़रूर थी, जो मुझे बरबस अपनी ओर खींच रही थी. एक बार देखने के बाद घंटों उसका चेहरा आंखों के सामने घूमता रहता था.  सर्दी के दिन थे. उस दिन कॉलेज की छुट्टी थी. रंग-बिरंगे फूलों से लदी क्यारियों के बीच लॉन में मैं सफेद शाल ओढ़े गुनगुनी धूप में बैठी हुई थी. “रंगीन गुलों के बीच सफेद परी कौन आ गई” आवाज़ सुनकर मैं चौंक गई. पलटकर देखा उदय खड़ा मुसकुरा रहा था. पहली बार उसकी आवाज़ सुनी थी और वह भी गुदगुदाने वाली. मैंने भी मौका नहीं छोड़ा  "कोचिंग से शायरी सीखकर आ रहे हो क्या?" "शायरी कोचिंग में नहीं सिखाई जाती मैडम, वो तो ज़ुबान पर आ ही जाती है." उसकी इस बात पर ठहाका लगाकर हम दोनों ही हंसने लगे. किसी इंटरव्यू की तैयारी करना है कहकर वह तुरंत चला गया. ऐसा लगा हमारे बीच संकोच और झिझक की दीवार अब टूट चुकी है. लेकिन अफसोस कि वही हमारी आखिरी मुलाकात थी. मामाजी ने शायद हमें हंसतेहुए देख लिया था. उसका उन्होंने न जाने क्या अर्थ समझा और उदय से क्या कहा मालूम नहीं, दूसरे दिन सबेरे मुझे पताचला उदय कमरा खाली करके जा चुका है. उसका इस तरह से चले जाना मुझे असह्य पीड़ा दे गया. मैं मन ही मन उसे चाहने लगी थी. वह मेरा पहला प्यार था. उसे मैं कभी भुला नहीं पाई. मेरा मन किसी और से शादी करने को तैयार नहींहुआ. मैंने जीवन भर अविवाहित रहने का फैसला किया.  आर्ट गैलरी के गेट पर जैसे ही कार पहुंची मेरा फ्लैश बैक चलचित्र भी अवरुद्ध हो गया. प्रदर्शनी में चित्रकार आदित्य जीकी एक से बढ़कर एक पेंटिंग लगी हुई थी. हर पेंटिंग मन को लुभा रही थी.  मुझे जब पता चला आदित्य जी थोड़ी देर पहले दर्शकों के बीच यहीं थे और अभी बाहर लॉन में बैठे हैं तो मैं उनसे मिलनेलॉन की ओर गई. आदित्य जी किसी पुस्तिका में डूबे हुए थे. मेरे 'नमस्ते' की आवाज़ सुनकर उन्होंने पुस्तक को बंद कर मेरी ओर नज़र उठाकर देखा.…

पहला अफेयर: अंबाबाई (Pahla Affair: Ambabai)

वो रास्ता अब सुनसान लगता है, वो राहें अब तुझे याद करती हैं… तेरी वो नीली-नीली आंखें… अक्सर जब मेरा…

Valentine Week: जानें दिल की दिलचस्प बातें(Valentine Week: Know Interesting Facts About Your Heart)

शायद ही कोई दिल हो जिसमें मोहब्बत के फूल न खिले हों. प्यार का मौसम सभी को मोहब्बत की बरसात…

सर्द पड़ते रिश्ते गर्म होते मिज़ाज… (Modern Relationship Challenges: Why Do Relationships Fail Nowadays)

माना तो यही जाता है कि रिश्तों की गर्मी बनी रहनी चाहिए तभी वो ऊर्जावान रहते हैं, लेकिन अक्सर होता ये है कि वक़्तऔर बदलते हालात रिश्तों को ठंडा कर देते हैं और हमारे मिज़ाज को गर्म… यही गर्म मिज़ाज रिश्तों को और ठंडा करतेजाते हैं… पर ऐसा होता क्यों है और कैसे अपने ठंडे  पड़ते रिश्तों को अपने गर्म मिज़ाज को ठंडा रखकर बचाया जासकता, इस पर काम करना ज़रूरी है…  सबसे पहले तो ये समझना होगा और उन संकेतों को पहचानना होगा जिनसे पता चले कि आपके रिश्ते सर्द पड़ रहे हैं?  क्या अब आप लोगों में कम्यूनिकेशन कम होता है? आपका शायद ध्यान ही न गया हो इस तरफ़ लेकिन एक दिनबैठकर फुर्सत से सोचें और लिस्ट बनाएं कि पहले के मुक़ाबले अब क्या-क्या बदला है…एक-दूसरे की परवाह तो है पर फिर भी एक-दूजे के प्रति बेपरवाह से हो गए हैं.न पहले की तरह तारीफ़ें होती हैं और न प्यारभरी बातें…सेक्स लाइफ़ में भी अब पहले जैसा आकर्षण और रोमांस नहीं रहा…  ये तो थी पति-पत्नी के बीच की बातें लेकिन ये ठंडापन इन दिनों हर रिश्ते में पनप रहा है…  भाई-बहन में अब पहले जैसा अपनापन नहीं रहा.माता-पिता के साथ कोई रहना नहीं चाहता क्योंकि अब वो बूढ़े हो चले हैं.किसी के पास फुर्सत नहीं कि घर के बुज़ुर्गों के पास आकर दो पल बैठे और उनका हाल-चाल पूछे. दूर के रिश्तेदार हों या करीबी भी फ़ोन पर भी बात करने का समय नहीं निकाल पाते लोग. न पोते-पोतियों को अपनेदादा-दादी से बात करने में दिलचस्पी है, न भतीजा-भतीजी को अपने बुआ का हाल चाल पूछने की ज़रूरत महसूसहोती.इस तरह के तमाम उदाहरण हमें रोज़ देखने-सुनने को मिल जाते हैं.  अब सवाल ये है कि आख़िर रिश्ते सर्द क्यों पड़ रहे हैं…? स्वार्थ अपनेपन पर हावी हो गया है.प्यार की जगह पैसों ने ले ली है.सबके साथ बैठकर फुर्सत के पल गुज़ारने से कहीं ज़्यादा ज़रूरी ऑफ़िस की डेडलाइंस हो गई हैं.सेक्स महज़ मशीनी प्रक्रिया और जिस्म की ज़रूरत बनकर रह गया. पार्टनर की भावनाओं को समझने से ज़्यादा ज़रूरी अब कामयाबी हो गई है… बूढ़ी दादी की बात सुनना तो वेस्ट ऑफ़ टाइम है, समय से दोस्तों की पार्टी में पहुंचना ज़्यादा ज़रूरी है.पिता को दवा तो मां भी दिलाकर ला सकती है, बहूरानी के लिए मॉल की वीकेंड सेल ज़्यादा मायने रखती है.लेकिन क्यों हमारा नज़रिया रिश्तों के प्रति बदल गया या यूं कहें कि इतना कठोर हो गया?  इसकी एक बड़ी वजह हैहमारा मिज़ाज… जो अब बदल गया है… गर्म हो गया है… क्यों गर्म हो रहे हैं हमारे मिज़ाज? हम अब एडजेस्टमेंट नहीं करना चाहते अब, क्योंकि हम आज़ादपसंद हो गए हैं.हमारी लाइफ़स्टाइल बदल चुकी है, जीने के तौर-तरीक़े बदल गए हैं.ऐसे में ज़रा सी टोका-टोकी या किसी ने ये भी पूछ लिया कि कहां जा रहे हो… या आज आने में देर कैसे हो गई… हमें बर्दाश्त नहीं होतीं… हमें फ़ौरन ग़ुस्सा आ जाता है.हमारा गर्म मिज़ाज हमको ये सोचने का तर्क ही नहीं दे पाता कि हमारे अपनों को हमारी फ़िक्र है, परवाह है, इसलिएवो फ़िक्रमंद रहते हैं और सवाल करते हैं.काम का स्ट्रेस, आगे बढ़ने की होड़ और इस फ़ास्ट लाइफ़स्टाइल ने हमारे मिज़ाज को और भी गर्म बना दिया औरहमारे रिश्तों को सर्द.काम का प्रेशर, शौहरत और पैसा कमाने का प्रेशर, यंग और फिट दिखने का प्रेशर, लक्ज़री लाइफ़ जीने का प्रेशर, महंगी गाड़ी से लेकर ब्रांडेड कपड़े पहनने का प्रेशर… ये तमाम ख्वाहिशें अब हमारी ज़रूरतें बन चुकी हैं और इनकोपूरा करने में जब हम पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाते तब भी मिज़ाज गर्म रहने लगता है. और अगर ये सब मिल भी जाए तब भी इतना कुछ करते-करते हम अपनी कोमलता खो चुके होते हैं, अपनों से औरअपने रिश्तों से दूर हो चुके होते हैं. इसके अलावा व्यसन, लत, नशा… चाहे पैसों का हो, कामयाबी का हो, शराब या सिगरेट का हो… ये हमारे मिज़ाजको ठंडा होने देता… लेकिन ये नशा रिश्तों को लेकर हम पैदा क्यों नहीं करते…? हमारा खान-पान भी ऐसा हो गया है कि हमें हाइपर एक्टिव बना रहा है. अनहेल्दी लाइफ़स्टाइल से लेकर अनहेल्दीखानपान हमारे मिज़ाज को बिगाड़ रहा है. कैसे बढ़ाएं अपने रिश्तों में गर्मी और कैसे रखें अपना मिज़ाज ठंडा? संतुष्ट और सुकून को पैसे और शौहरत से ज़्यादा महत्व देने का प्रयास करें, कोशिश करेंगे तो कामयाबी ज़रूरमिलेगी.रिश्तों को प्राथमिकता बनाएं.अपनों को वक़्त दें. पैसों के पीछे भागना बंद कर दें. हॉबी डेवलप करें.डायट बदलें.योगा और मेडिटेशन ज़रूर करें, साथ ही लाइट एक्सरसाइज़ या वॉक करें. इससे ब्रेन में हैप्पी होर्मोंस रिलीज़ होंगेऔर आप पॉज़िटिव बनेंगे.ज़िंदगी के प्रति अपना नज़रिया बदलें.पॉज़िटिव सोच के साथ हर काम करें और कोशिश करें कि वर्क लाइफ़ और पर्सनल लाइफ़ में संतुलन बना सकें. पार्टनर की अच्छाइयों और कोशिशों को सराहें. अपनों से कनेक्टेड रहें, चाहे फ़ोन या मैसेज के ज़रिए, इससे मन को सुकून और ज़िंदगी में तसल्ली रहती है.दूसरों की मदद करें, अपनों का दर्द बांटें, क्योंकि एक वक़्त के बाद अपने और ये रिश्ते ही काम आते हैं, वर्ना ऐसा नहो कि ये गर्म मिज़ाजी आपको अपनों से इतना दूर और आपको इतना तनहा कर दे कि कहने को तो आपके पासनाम, पैसा, शौहरत तो हो लेकिन सिर रखने को कोई कंधा न हो, थामने को कोई हाथ न हो और साथ मिलकरहंसने-रोने वाला कोई हमदर्द न हो! बिट्टू शर्मा 

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