ऐतिहासिक स्थलों की एक झलक (Historical Places trip)

अगस्त माह में अगर आप कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो देश के ऐतिहासिक जगहों की सैर पर निकल सकते हैं. यही वो महीना है जब हम आज़ाद हुए थे. पुनः उस पल को ताज़ा करने के लिए निकल पड़िए कुछ चुनिंदा जगहों पर जिनका हमारी आज़ादी से है गहरा नाता.लॉन्ग हॉलिडे पर फैमिली के साथ छुट्टी बिताने विदेश के टूर पर तो कई बार आप गए होंगे, लेकिन क्या कभी देश के ऐतिहासिक जगहों की सैर की है? अगर नहीं, तो मौक़ा भी है और दस्तूर भी. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर फैमिली के साथ सैर करें देश के कुछ चुनिंदा ऐतिहासिक जगहों की. पंजाब पंजाब भारत के उत्तर-पश्‍चिम में स्थित है. देश की आज़ादी में पंजाब का बहुत योगदान रहा है. पंजाब के सीने में आज भी आज़ादी के ज़ख़्म के निशां देखे जा सकते हैं. ऐतिहासिक दृष्टि से यहां बहुत-सी जगहें हैं, जहां पर आप पूरी फैमिली के साथ घूमने जा सकते हैं. जलियावाला बाग पंजाब के अमृतसर में ये एक पब्लिक गार्डन है. पूरे साल यहां पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है. इस जगह का नाता भी आज़ादी से है. यही वो जगह है, जहां जनरल डायर के एक आदेश पर 20 हज़ार मासूम लोगों को गोलियों से भून दिया गया था. गोलियों के निशान आज भी दीवारों पर मौजूद हैं. स्वर्ण मंदिर अमृतसर जाएं और स्वर्ण मंदिर न देखें तो जाना व्यर्थ होगा. सिक्खों का ये पवित्र तीर्थ स्थल है. इस मंदिर को कई बार विदेशी आक्रमणों द्वारा क्षति पहुंची, लेकिन हर बार…


अगस्त माह में अगर आप कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो देश के ऐतिहासिक जगहों की सैर पर निकल सकते हैं. यही वो महीना है जब हम आज़ाद हुए थे. पुनः उस पल को ताज़ा करने के लिए निकल पड़िए कुछ चुनिंदा जगहों पर जिनका हमारी आज़ादी से है गहरा नाता.लॉन्ग हॉलिडे पर फैमिली के साथ छुट्टी बिताने विदेश के टूर पर तो कई बार आप गए होंगे, लेकिन क्या कभी देश के ऐतिहासिक जगहों की सैर की है? अगर नहीं, तो मौक़ा भी है और दस्तूर भी. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर फैमिली के साथ सैर करें देश के कुछ चुनिंदा ऐतिहासिक जगहों की.

पंजाब

पंजाब भारत के उत्तर-पश्‍चिम में स्थित है. देश की आज़ादी में पंजाब का बहुत योगदान रहा है. पंजाब के सीने में आज भी आज़ादी के ज़ख़्म के निशां देखे जा सकते हैं. ऐतिहासिक दृष्टि से यहां बहुत-सी जगहें हैं, जहां पर आप पूरी फैमिली के साथ घूमने जा सकते हैं.

जलियावाला बाग
पंजाब के अमृतसर में ये एक पब्लिक गार्डन है. पूरे साल यहां पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है. इस जगह का नाता भी आज़ादी से है. यही वो जगह है, जहां जनरल डायर के एक आदेश पर 20 हज़ार मासूम लोगों को गोलियों से भून दिया गया था. गोलियों के निशान आज भी दीवारों पर मौजूद हैं.

स्वर्ण मंदिर
अमृतसर जाएं और स्वर्ण मंदिर न देखें तो जाना व्यर्थ होगा. सिक्खों का ये पवित्र तीर्थ स्थल है. इस मंदिर को कई बार विदेशी आक्रमणों द्वारा क्षति पहुंची, लेकिन हर बार इसे बनाया गया है. 19वीं शताब्दी में तो अफगान शासकों ने पूरी तरह से इसे नष्ट कर दिया था. यहां पर बारहों महीने सैलानियों का मेला लगा रहता है. दुनियाभर से लोग ख़ासतौर पर इसे देखने आते हैं. तो आप भी इस ऐतिहासिक मंदिर की सैर ज़रूर करें.

यहां भी जाएं
वाघा बॉर्डर
शीश महल
फरीदकोट फोर्ट
पायल फोर्ट
समर पैलेस

गुजरात

देश की आज़ादी का मुख्य स्तंभ महात्मा गांधी का ये जन्म स्थान है. महात्मा गांधी के अलावा ये धरती बहुत से स्वतंत्रता सैनानी की मातृभूमि है. देश की आज़ादी में इस जगह का बहुत योगदान है. एक नज़र गुजरात के चुनिंदा ऐतिहासिक स्थलों पर.

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साबरमती आश्रम
गुजरात के साबरमती नदी के तट पर महात्मा गांधी द्वारा बनाए इस आश्रम की स्वतंत्रता आंदोलन में अहमभूमिका रही है. यहीं से गांधी जी ने सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था. इसी आश्रम से उन्होंने दांडी यात्रा भी शुरू की, और प्रण लिया कि देश जब तक अंग्रेज़ों के चंगुल से मुक्त नहीं हो जाता तब तक वो यहां लौट कर नहीं आएंगे. साबरमती आश्रम से गांधी जी का जुड़ाव कितना गहरा था इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें साबरमती के संत की उपाधि ही दे दी गई थी. वो आश्रम में बच्चोेंं को पढ़ाते थे. आज भी आश्रम में गांधी जी के पत्र और अन्य चीज़ें संजोकर रखी हुई हैं. जो भी सैलानी अहमदाबाद आते हैं वो साबरमती आश्रम जाना नहीं भूलते.

लोथल
सिंधु घाटी की सभ्यता में ये एक मॉडर्न शहर था. अहमदाबाद ज़िले के सरगवाला गांव में ये स्थित है. ये दुनिया के पुराने शहरों में से एक है. किस तरह से गुजरात की धरती आपने आंचल में हज़ारों साल के इतिहास को सहेजकर रखा है, इसका जीता-जागता नमूना लोथल है. आज भी ये उसी तरह है. यहां आने के बाद आपको पता चलेगा कि आपने अपने पीछे कितने इतिहास छोड़ रखे हैं.

यहां भी जाएं
सोमनाथ का मंदिर
द्वारकाधीश मंदिर
सरदार सरोवर बांध
जूनागढ़
चंपानेर

दिल्ली

देश की राजधानी दिल्ली मुग़लों के समय से लेकर देश के आज़ाद होने तक के कई पलों को अपने दिल में समेटे हुए है. पूरा शहर ही ऐतिहासिक है. क्या देखें? आइए, जानते हैं.

इंडिया गेट
राजपथ पर स्थित इंडिया गेट का निर्माण प्रथम विश्‍व युद्ध और अफगान युद्ध में शहीद हुए 90 हज़ार भारतीय सैनिकों की याद में कराया गया. 160 फिट ऊंचे इंडिया गेट को दिल्ली का पहला दरवाज़ा माना जाता है. सभी शहीद सैनिकों के नाम इस पर अंकित हैं. इसके अंदर अखंड अमर ज्योति जलती रहती है. इसके आस-पास हरे-भरे बाग-बगीचे और प्रसिद्ध बोट क्लब ने इसे पिकनिक के लिए बेहतरीन जगह बना दिया है.

लाल किला
मुग़ल शासक शाहजहां के शासन काल में बना लाल किला भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्‍व के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. परिवार के साथ इसे ज़रूर देखें. मुग़ल बादशाह द्वारा बनवाए इस किले पर 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेज़ों ने कब्ज़ा जमा लिया और छावनी की तरह इसका इस्तेमाल किया, लेकिन देश के आज़ाद होते ही ये किला भारतीय सेना के अधिकार में आ गया. देश के आज़ाद होने के बाद पहली बार देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने यहां पर तिरंगा फहराया था. तब से लेकर आज तक ये परंपरा चली आ रही है. हर 15 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री यहां तिरंगा फहराते हैं और लोगों को संबोधित करते हैं.

यहां भी जाएं
राजघाट
पुराना किला
कुतुब मिनार
जंतर-मंतर
तालकटोरा गार्डन

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पश्चिम बंगाल

देश का ये राज्य भी प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों का गढ़ है. कोलकाता यहां की राजधानी है. दिल्ली से पहले भारत की राजधानी होने का गौरव भी कोलकाता को प्राप्त है.

विक्टोरिया मेमोरियल
अंग्रेज़ों के शासन काल में भारत में बहुत-सी इमारतों का निर्माण हुआ. पश्‍चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में विक्टोरिया मेमोरियल इसका बेहतरीन उदाहरण है. स़फेद संगमरमर से बनी ये इमारत बहुत ही ख़ूबसूरत है. इसे महारानी विक्टोरिया की याद में बनाया गया है. इसकी ख़ूबसूरती को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आते हैं.

इंडियन म्यूज़ीयम
यह भारत का सबसे पुराना और बड़ा म्यूज़ीयम है. 1814 में इसका निर्माण हुआ. इसमें प्राचीन वस्तुएं, युद्ध सामग्री, पुराने गहने, कंकाल, ममी, जीवाश्म, मुग़ल पेंटिंग आदि का दुर्लभ संग्रह है.

ज़रूर जाएं
वॉरेन हेस्टिंग्स हाउस
गेट ऑफ ओल्ड फोर्ट
एशियाटिक सोसाइटी
हावड़ा ब्रिज
शांतिनिकेतन

इन सब जगहों के अलावा आप झांसी, इलाहाबाद और अंडमान एंड निकोबार की सेलुलर जेल को भी देखने ज़रूर जाएं. ये वही जेल है जहां स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को अंग्रेज़ बंद कर देते थे. इसे काला पानी की सज़ा भी कहते हैं.

– श्वेता सिंह 

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Shweta Singh

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