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कोरोना कहर से टूटे सोनू सूद, कहा अच्छा हुआ, मेरे मां-बाप ठीक समय पर चले गए (Sonu Sood’s Emotional Break Down Amidst COVID crisis, Actor feels that his parents passed away at the right time)

सोनू सूद कोरोना पैंडेमिक की शुरुआत से लेकर अब तक लगातार लोगों की मदद कर रहे हैं. प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने से लेकर, उनके…

सोनू सूद कोरोना पैंडेमिक की शुरुआत से लेकर अब तक लगातार लोगों की मदद कर रहे हैं. प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने से लेकर, उनके लिए रोजगार, बेड, ऑक्सीजन, हॉस्पिटल या ज़रूरत की हर चीज़ मुहैया कराने तक, सोशल मीडिया पर हर वक्त एक्टिव रहने वाले सोनू सूद लगातार लोगों की मदद में जुटे हुए हैं. वो रोज़ाना सैकड़ों लोगों की मदद कर रहे हैं, फिर भी कई लोग ऐसे हैं, जिन तक वो मदद पहुंचा पा रहे हैं. ऐसे लोगों की मदद न करने पर सोनू सूद टूट रहे हैं. हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सोनू सूद ने कोरोना काल में लोगों की मदद करने और कुछ लोगों तक मदद न पहुंचा सकने के बारे में बात की और ये भी कहा कि अच्छा हुआ कि उनके पेरेंट्स इस समय नहीं हैं.

पैरेंट्स से ही मिला है लोगों की मदद करने का जज़्बा


सोनू सूद ने इंटरव्यू में बताया कि लोगों की मदद करने की प्रेरणा उन्हें अपने पैरेंट्स से ही मिली, “पंजाब में मेरे फादर की शॉप थी. वहां हम फ्री में खाना बांटते थे. तो उस समय लोगों के चेहरों पर जो एक खुशी आती थी न, वो आज तक याद है मुझे. इसके अलावा मेरी मां प्रोफसर थीं, तो वो भी बच्चों को फ्री में बिना फीस के पढ़ाती थीं. आज मैं उनको याद करता हूं. शायद इसी वजह से ये सब कर पाता हूं.”

इससे खराब दौर कभी नहीं आया है न आएगा

सोनू ने कहा ये सच में बहुत बुरा दौर है. वो रोज़ाना हेल्पलेस महसूस करते हैं. एक एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि एक लड़की उनसे मदद मांगी. उन्होंने उसकी मदद भी की, लेकिन फिर भी उनकी मां बच नहीं पाई. उस लड़की ने युवती मां का अंतिम संस्कार किया, फिर दूसरी ओर अपने भाई को ठीक करने के लिए सोनू सूद से दोबारा मदद मांगी. सोनू ने कहा कि इस तरह की घटनाएं उन्हें अंदर तक झगझोर दे रही हैं. उन्होंने बताया कि कई लोगों की मदद की कोशिश में लगे ही होते हैं कि उस व्यक्ति की मौत हो जाती है.

अच्छा हुआ मेरे माता-पिता सही समय पर चले गए


सोनू सूद ने अपने इंटरव्यू में माता-पिता को भी याद किया और कहा, ‘मुझे लगता है कि अच्छा हुआ, मेरे मां-बाप नहीं रहे. वो ठीक समय पर चले गए. अगर मेरे सामने ये हालात होते कि मैं अपने माता-पिता को एक बेड नहीं दिला पाता या ऑक्सीजन नहीं दिला पाता तो शायद बहुत टूट जाता. मैंने हर रोज लोगों को टूटते देखा है, रोते हुए देखा है.’

इस खुशी का कोई रिप्लेसमेंट नहीं है

बता दें कि सोनू सूद पिछले साल से ही 24 घण्टे लोगों की मदद में जुटे हुए हैं. हाल ही में उन्होंने देश के अलग-अलग प्रदेशों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने की पहल भी शुरू की है. उनके साथ उस मदद में कई लोग भी जुड़ गए हैं, जो इस पैंडेमिक के समय दिन रात लोगों की मदद के लिए जुटे हुए हैं. सोनू सूद का कहना है कि लोगों की ज़िंदगी बचाकर जो खुशी मिलती है, वो और किसी चीज से नहीं मिल सकती. इस खुशी का कोई रिप्लेसमेंट नहीं है.

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