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क्या आप दोनों एक-दूसरे की लिए बासी हो चुके हो? ये स्मार्ट-सिंपल टिप्स आज़माएं, अपने रिश्ते की बोरियत को मिटाएं और उसे रोमांटिक बनाएं! (Spice up Your Relationship: Easy & Romantic Ways To Get The Spark Back In Your Marriage)

समय के साथ हर चीज़ पुरानी, उबाऊ या यूं कहें कि बासी होने लगती है, क्योंकि एक ही ढर्रे पर चल रही ज़िंदगी हमें रूटीन लगने लगती है और फिर उसमें ताज़गी या एक्साइटमेंट जैसा कुछ नहीं लगता. रिश्ते भी धीरे-धीरे रूटीन बन जाते हैं, क्योंकि समय के साथ उनमें ऊर्जा व गर्माहट गायब होने लगती है, ऐसे में रिश्तों पर भी काम करने की ज़रूरत होती है औरख़ुद पर भी ताकि उनमें ताज़गी बनी रहे और आप भी तरोताज़ा रहें. आपका रिश्ता और आप भी एक-दूसरे के लिए कहींबासी न हो जाएं, इसलिए समय रहते उसे व ख़ुद को भी करें रिफ्रेश, वरना रिश्ता टूटने की कगार पर आ सकता है. अगरआपको लग रहा है कि आप दोनों ही एक-दूसरे की तरफ़ न पहले जैसा आकर्षण महसूस करते हो और न ही वो रोमांस, तोसजग हो जाएं और व़क्त रहते ख़ुद को और अपने रिश्ते को समय दें.  ख़ुद पर काम करें: सबसे पहले ख़ुद को देखें. समय के साथ आप कितना बदल गए? आपकी फिटनेस, ज़िंदगी को लेकरनज़रिया? अपने पार्टनर को लेकर नज़रिया आदि... एक लिस्ट बना लें और फिर एक-एक कर उस पर काम करें.  ख़ुद से प्यार करें: जब तक आप ख़ुद से प्यार नहीं करेंगे, कोई दूसरा क्यों करेगा? ख़ुद को ख़ुश रखने के तरी़के सोचें औरफिर अपने पार्टनर को भी उसमें शामिल करें.  कुछ नया करें: जब भी आपको महसूस हो कि रिश्ते रूटीन बनते जा रहे हैं, कुछ नया करें. ऐसा कुछ जिससे सामनेवाले कोभी महसूस हो कि यह तो हमने सोचा ही नहीं था. इससे नए सिरे से आप उन रिश्तों को जीने लगते हैं. ये नयापन किसी भीतरह से आप ला सकते हैं. चाहे तो सरप्राइज़ेस के ज़रिए या अपनी कोई ऐसी बुरी आदत त्यागकर जिससे पार्टनर कोख़ुशी महसूस हो और उसे लगे कि आपने उसके लिए कुछ किया है.  फिटनेस पर ध्यान दें: फिट रहेंगे, तो हेल्दी तो रहेंगे ही, साथ ही अट्रैक्टिव भी लगेंगे और किसी भी रिश्ते में फिटनेस का भीबहुत बड़ा हाथ होता है. न स़िर्फ आप सेहतमंद रहते हैं, आपका रिश्ता भी हेल्दी होता है. एक-दूसरे के लिए फिटनेस चैलेंजलें. साथ में वॉक, जॉग या एक्सरसाइज़ करें. इससे एक-दूसरे के साथ समय भी बिता पाएंगे और हेल्दी भी रहेंगे. मोटापा नबढ़ने दें, ताकि आप फिट और अट्रैक्टिव दिखें. हेल्दी खाने व हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं और आपको देखकर शायदपार्टनर भी मोटिवेट हो यह सब करने के लिए. अपनी हॉबीज़ को फिर से जगाएं: आप न स़िर्फ अपनी हॉबीज़, बल्कि पार्टनर की हॉबीज़ को भी फिर से जगाएं और उसेपूरा करें. इससे आप दोनों की बॉन्डिंग बेहतर होगी और एक नयापन भी लाइफ में महसूस करेंगे.  अपनी ब्यूटी और हाईजीन पर ध्यान दें: समय के साथ अक्सर कपल एक-दूसरे के साथ इतना कंफर्टेबल हो जाते हैं किअपनी शारीरिक ख़ूबसूरती और हाईजीन को इग्नोर करने लगते हैं. लेकिन एक दिन आप पहले की तरह अपने पार्टनर केलिए सजें-धजें और तैयार होकर उनका स्वागत करें, फिर देखें उनका रिएक्शन. इसी तरह हाईजीन हेल्द के लिए भी औरसेक्सुअल लाइफ के लिए भी ज़रूरी है. ऑरल हेल्थ से लेकर पर्सनल हाईजीन पर ध्यान देना फिर शुरू करें.  लाइफ में रोमांस को रिक्रिएट करें: ज़िम्मेदारियां जब बढ़ने लगती हैं, तो एक समय के बाद लाइफ से रोमांस लगभग गायबहो जाता है या यूं कहें कि वो बैकफुट पर चला जाता है. ऐसान  होने दें. रोमांस के लिए ज़रूरी नहीं कि महंगे गिफ्ट्स लानेहैं या महंगी जगह हॉलिडे जाना हो, स़िर्फ भावनाएं काफ़ी होती हैं. आप पार्टनर को यह महसूस करवा सकते हैं कि आपउनसे कितना प्यार करते हैं. कभी ऑफिस से जल्दी आकर, कभी डिनर या मूवी प्लान करके, भी प्यारभरे फोन कॉल्स से, तो कभी उनकी फेवरेट डिश बनाएं, कभी मैसेजेस से आई लव यू के ज़रिए, तो कभी सबसे नज़रें चुराकर बस हल्के से हाथथाम लें.  बात करें और दिल की बात ज़रूर कहें: दिल की बात सहज तरी़के से कह देने से बॉन्डिंग मज़बूत होती है. हर स्तर पर औरहर व़क्त कम्यूनिकेशन ज़रूरी है. अगर कभी कोई बात आपको परेशान कर रही है या आप पार्टनर के लिए कुछ महसूसकर रहे हैं, तो कम्यूनिकेट करें. दिल ही में रखेंगे, तो बात बढ़गी और परेशानियां भी.  क्वालिटी टाइम साथ बिताएं और शेयर करें: रिश्तों में शेयरिंग बेहद ज़रूरी है. इससे एक-दूसरे पर विश्‍वास और बढ़ता है, इसलिए अपनी ख़ुशी, अपने ग़म, अपनी कोशिशे, अपने डर... सब कुछ शेयर करें.  एक-दूसरे के लिए थोड़ा-बहुत ख़ुद को भी बदलें: आपकी कुछ ऐसी आदतें होंगी, तो आपके पार्टनर को पसंद नहीं, तो आपएक-दूसरे को चैलेंज करें कि अपनी-अपनी बुरी आदतों पर काबू पाने की पूरी कोशिश करेंगे. इससे पार्टनर को लगेगा किआप उनकी भावनाओं को सम्मान करना जानते हैं. उनकी पसंद का कुछ करें: कभी पार्टनर की पसंद का कलर या ड्रेस पहनें या उनके साथ उनका फेवरेट शो देखें. इंवॉल्वहोकर करें. या आप पार्टनर की पसंद का खाना मंगवाएं या उनके दोस्तों को घर पर पार्टी के लिए इंवाइट करें.  ज़िम्मेदारियों को अपने रिश्ते पर हावी न होने दें, उन्हें बांट लें: हमेशा बातचीत करके तय करें कि कौन किस बात कीज़िम्मेदारी लेगा, दोनों को एक-दूसरे के कामों में मदद करेंगे, तो इससे काम हल्का होगा और आप थकेंगे नहीं. ख़ुद कोऔर अपने रिश्ते को अधिक टाइम दे पाएंगे.  थकान को हावी न होने दें: तन और मन दोनों जब थकने लगते हैं, तब हम एक-दूसरे के लिए बासी होने लगते हैं. ऐसा न हो, इसलिए पार्टनर को सपोर्ट करें और मन न होने पर भी उनके रोमांटिक मूड में अलग तरह से साथ दें, ताकि उन्हें बुरा न लगे, वरना आप दोनों के बीच किसी तीसरे को आने में देर नहीं लगेगी. ग़ुस्से की बजाय हंसकर या प्यार से उन्हें समझाएं किआज आप ज़्यादा थके हैं या आपकी तबीयत ठीक नहीं.  केयर करें और पार्टनर को हर्ट करने से बचें: केयरिंग हर रिश्ते की बुनियाद होती है. पार्टनर को ठीक नहीं लग रहा, कोईबात उन्हें परेशान कर रही है या वो अपने घरवालों को लेकर फिक्मंद हैं, तो जाकर सहारा दें, बात करें. सहयोग की भावनाहर रिश्ते में ज़रूरी है. इसी तरह से अगर आपको पता है कि आपका व्यवहार या आपकी कोई बात पार्टनर को हर्ट करसकती है, तो उसे करने से बचें. यदि ग़लती से ऐसा कुछ हो भी जाए, तो माफ़ी मांग लें और भविष्य में ग़लती न दोहराने कावादा भी करें. हो सकता है आपके लिए वह बात मामूली हो, पर पार्टनर को अच्छी न लगे.  पार्टनर की सलाह व निर्णय का भी सम्मान करें: पार्टनर की सलाह व निर्णय को अगर आप सम्मान देंगे, तो उनका भरोसाऔर लगाव आपके प्रति बढ़ेगा और रिश्तों में वो पसरा सन्नाटा टूटने लगेगा, इसलिए पार्टनर की सलाह भी लें और अगर वोसही लगती है, तो उस पर अमल भी करें.  बात-बात पर बार-बार टोकें नहीं, कुछ चीज़ो को नज़रअंदाज़ करें: रिश्तों की मज़बूती के लिए बहुत-सी बातों को इग्नोरकरना व एडजेस्ट करना भी ज़रूरी होता है. पार्टनर के अलग व्यक्तित्व को सम्मान दें, उन्हें अपना जैसा बनाने की कोशिशमें निराशा ही हाथ लगेगी. हम सब एक जैसे नहीं होते. हो सकता है पार्टनर की कोई बात आपको पसंद नहीं आती, तो बार-बार उन्हें टोकने से बेहतर है कि नज़रअंदाज़ करें या फिर प्यार से समझाएं.  सेक्स लाइफ को नज़रअंदाज़ न करें, उसमें ऊर्जा बनाए रखें: आपका रिश्ता बहुत हद तक आपकी सेक्स लाइफ पर भीनिर्भर करता है. सेक्स को मशीनी क्रिया न समझकर प्यार के इज़हार का ज़रिया समझें. आपस में बात करें कि आपकोक्या पसंद है, क्या नापसंद है. बेडरूम के डेकोर को चेंज करें, जगह बदलें, ताकि सेक्स लाइफ भी रूटीन बनकर न रहजाए. बेडरूम में तनाववाली बातें करने से बचें. पार्टनर के लिए अट्रैक्टिव सेक्सी ड्रेस पहनें. एरोमा कैंडल्स यूज़ करें. अगरपार्टनर थका हुआ है और परेशान है, तो सेक्स पर ज़ोर न देकर सेक्सी मसाज दें. हो सकता है इससे उनकी थकान दूर होजाए और वो भी मूड में आ जाएं. पर्सनल हाईजीन से लेकर पार्टनर की ज़रूरतों का ख़्याल रखने तक... कुछ भी आपइग्नोर नहीं कर सकते.  भोलू शर्मा 

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रिश्ते जीने का संबल, जीने का सबब, एक सहारा या यूं कहें कि एक साथ... रिश्तों को शब्दों के दायरे में परिभाषित नहींकिया जा सकता, उन्हें तो सिर्फ़ भावनाओं में महसूस किया जा सकता है. लेकिन बात आजकल के रिश्तों की करें तो उनमेंना भावनायें होती हैं और ना ही ताउम्र साथ निभाने का माद्दा, क्योंकि आज रिश्ते ज़रूरतों और स्वार्थ पर निर्भर हो चुके हैं. यही वजह है कि रिश्तों में बेहिसाब बोझ बढ़ते जा रहे हैं और हर रिश्ता बोझिल होता जा रहा है. ऐसे में इनके करणों को जानना बेहद ज़रूरी है. सबसे पहले जानते हैं रिश्तों में आख़िर बोझ क्यों है?  रिश्तों में बोझ होने की सबसे बड़ी वजह है कि रिश्ते अब दिल से नहीं जुड़े हुए हैं.रिश्ते मजबूरी बन चुके हैं. रिश्तों में स्वार्थ सबसे ऊपर हो चुका है.रिश्ते भावनाविहीन हो रहे हैं.मशीनी हो रहे हैं एहसास.संवेदना ग़ायब हो रही है.हम से ज़्यादा मैं की सोच हावी हो रही है. किस तरह के बोझ हैं और क्यों बोझिल हो गए हैं रिश्ते?  ज़िम्मेदारी का बोझ: लोग ज़िम्मेदारियों से डरने लगे हैं और इन्हें निभाने से कतराते हैं. इन्हें लेने से बचते हैं. हर किसीको लगता है कि वो अपनी ज़िम्मेदारी किसी और को दे दे और खुद सिर्फ़ अपने लिए जिए. जहां इस तरह की सोचपनपने लगती है वहां रिश्ते बोझिल ही लगते हैं.कमिटमेंट का बोझ: लोग कमिटमेंट से बचना चाहते हैं क्योंकि वो खुद नहीं जानते कि इन रिश्तों को वो कब तकनिभा सकेंगे और ना जाने कब वो रस्ता बदल दें. लोगों का स्वार्थ इस हद तक बढ़ चुका है कि वो वही रिश्ते निभानाचाहते हैं जिन रिश्तों से उन्हें किसी तरह का कोई फायदा हो. अगर पार्टनर से कोई फायदा होता नज़र नहीं आता तोवो उसको छोड़ दूसरे का दामन थामने से भी नहीं कतराते. इसी तरह अगर माता-पिता, भाई-बहन से भी लगाव नहीं हैतो वो भी उन्हें बोझ लगने लगते हैं और वो उनसे भी दूरी बनाने लगते हैं.पैसों का बोझ: आर्थिक तंगी भी रिश्तों में बोझ बढ़ाती है और इस वजह से रिश्ते और बोझिल लगने लगते हैं. पैसासबकी ज़रूरत है और पैसों की तंगी से रिश्तों में भी मनमुटाव होने लगते हैं. तनाव बढ़ता है और सारे रिश्ते बोझिल हीलगने लगते हैं.करियर का बोझ: कॉम्पटीशन के इस दौर में करियर को ऊपर ले जाना, वर्क और होम लाइफ को बैलेंस करनाआसान नहीं. जो लोग ऐसा नहीं कर पाते उनके रिश्तों में बोझ बढ़ता जाता है.समाजिक दबाव का बोझ: हम जिस समाज में रहते हैं वहां समाज और आस पास के लोगों के बारे में कुछ ज़्यादा हीसोचा जाता है. ऐसे में हम चाहकर भी अपने मन का नहीं कर पाते क्योंकि हर बात और हर निर्णय पर हमको यहीसमझाया जाता है कि हमारे समाज में ऐसा नहीं चलता या फिर लोग क्या कहेंगे. इस तरह के माहौल में ज़ाहिर हैदम घुटता है और हर बात बोझिल ही लगती है.स्टेटस का बोझ: आज की तारीख़ में कुछ हो ना हो स्टेटस होना बहुत ज़रूरी है. और जबसे सोशल मीडिया कीहमारी लाइफ़ में एंट्री हुई है तबसे तो यह बोझ बढ़ता ही जा रहा है. हर कोई इसी होड़ में रहता है कि हमारी लाइफ़कितनी कूल है, दूसरों को दिखाने के लिए अब हर चीज़ होती है. ब्रांडेड मोबाइल से लेकर हर बात का सेलिब्रेशनजैसे बस दिखावे की चीज़ ही बनकर रह गई. हर वक़्त खुश और हैपनिंग लाइफ़ का टैग लेकर घूमना आज कीसबसे बड़ी ज़रूरत बन गई. ये तमाम चीज़ें रियल लाइफ़ रिश्तों को खोखला बनाती हैं और आप उन्हें भूलकरडिजिटल रिश्तों की नक़ली दुनिया में खोते चले जाते हैं.खुश दिखने का बोझ: आप खुश हों या ना हों लेकिन आज की तारीख़ में आपका खुश दिखना ज़रूरी है, क्योंकिकिसी को फ़ुर्सत भी नहीं आपके दुखों को जानने और समझने की. ऐसे में मन ही मन में घुटने के बाद भी आपको ढोंगकरना पड़ता है कि आप की ज़िंदगी बेहद हसीन है. रिश्तों में बोझ को बढ़ाते हैं यह पहलू पार्टनर या अन्य सदस्य जब साथ ना दें और सारी ज़िम्मेदारी किसी एक पर आ जाए.ज़िम्मेदारी निभाने के बावजूद तारीफ़ या सहयोग ना मिले.अपना दांव कुछ भूलकर भी अपने रिश्तों को सब कुछ देने के बाद भी किसी का सहयोग ना मिले.अर्थिक रूप से आत्मनिर्भर ना होने पर भी बहुत कुछ बर्दाश्त करना पड़ता है जिससे रिश्तों में बोझ बढ़ता है.अपनों से ही सम्मान ना मिलने पर भी बहुत कुछ बदल जाता है.आपको निर्णय लेने की आज़ादी ना हो या आपकी राय को अहमियत ही ना दी जाए तब भी बोझिल लगता है हररिश्ता. क्या किया जाए कि रिश्ते बोझिल ना लगें बात करें: कम्यूनिकेट करना किसी भी रिश्ते के लिए सबसे ज़रूरी और सबसे अहम् है. बात ना करना किसी भीसमस्या का समाधान नहीं. इससे परेशानी और बढ़ेगी. बेहतर होगा कि आपसी बात चीत से मन का बोझ हल्का करें, अपनी परेशानियों को अपनो से साझा करें. उनकी परेशानियों को जाने. स्वार्थी ना बनें: रिश्तों में सिर्फ़ अपने बारे में नहीं सोचा जाता, रिश्तों का मतलब ही है एकजुट होकर सबके लिएसोचना. स्वार्थ की भावना भले ही आपको कुछ समय के लिए ख़ुशी दे देगी लेकिन आगे चलकर आप एकदम अकेलेपड़ जायेंगे. स्वार्थ छोड़कर देखें, आपको अपने रिश्ते ही इतने प्यारे लगेंगे कि बोझ अपने आप हल्का लगने लगेगा.शेयर करें: शेयरिंग की भावना से रिश्ते गहरे और मज़बूत बनते हैं. सुख-दुःख हो, कामयाबी या असफलता सब कुछशेयर करें. इससे आपकी ख़ुशियाँ और हौसला दोनों बढ़ेंगे और रिश्ते बोझ कम संबल अधिक लगेंगे.जिम्मेदारियाँ साझा करें: ज़िम्मेदारियों से भागने की बजाए उन्हें साझा करें. रिश्तों में सबकी जिम्मेदारियाँ बनती हैंऔर जो कुछ भी निभाना होता है मिलकर ही बेहतर तरीक़े से निभाया जा सकता है. सामने से खुद आगे बढ़कर कहेंकि यह काम मुझ पर छोड़ दें, फिर देखिए रिश्तों से बोझ अपने आप कम होगा और रिश्ते बोझिल नहीं प्यारे लगेंगे.काम बांट लें: घर या बाहर दोनों जगह का काम बांट लें. सब मिलकर करेंगे तो ज़िंदगी और रिश्ते दोनों आसान लगनेलगेंगे. जो काम आप बेहतर कर पायें वो आप लें और दूसरों को भी उनकी क्षमता के अनुसार काम दें.आर्थिक ज़िम्मेदारी भी बांटे: रिश्तों में ज़रूरी है कि आर्थिक ज़िम्मेदारियों का भी बंटवारा हो. आप अगर यह सोचरखेंगे कि मैं अपने पैसे बचा लूं और सामने वाला ही अकेला खर्च करे तो यह सही नहीं. आपको कुछ ख़र्चों कीज़िम्मेदारी खुद ब खुद ख़ुशी ख़ुशी लेनी चाहिए. इससे अपनापन बढ़ेगा और रिश्ते बोझ नहीं लगेंगे. दिल को खोल लें: दिल को खुला रखें ताकि ज़िंदगी जी खोल के जी सकें. अगर आपको किसी चीज़ की कमी भीहोगी तो अपनों के साथ वो कमी महसूस नहीं होगी. चाहे पैसों की कमी हो या सुविधाओं की अगर अपने साथ हैं तोज़िंदगी की राह आसान हो जाती है. अगर आप अपने रिश्तों का ख़याल रखेंगे तो बुरे समय में रिश्ते आपका ख़यालरखेंगे.अपनी सोच बदलें, फ़ायदे-नुक़सान के तराज़ू में रिश्तों को ना तोलें: रिश्तों में कभी भी फ़ायदा या नुक़सान की सोचके साथ आगे नहीं बढ़ा जा सकता. रिश्तों को सिर्फ़ प्यार से ही सींचा जा सकता है वर्ना हर रिश्ता बोझ ही लगेगा. किसने क्या किया इस सोच से ऊपर उठकर यह सोचें कि अपनों को कैसे और क़रीब लाया जाए.चीट ना करें, सबको सम्मान दें: सम्मान देंगे तो सम्मान मिलेगा. चीटिंग की रिश्तों में कोई जगह नहीं होती. पार्टनर कोधोखा ना दें. घर में भी सबकी राय को महत्व दें. सबसे राय लें. किसी को कम ना आंके. कई बार एक बच्चा भी बड़ीसे बड़ी समस्या का आसान रास्ता सुझा देता है.ईगो ना रखें: अहंकार हर रिश्ते को मिटा देता है. अपनों से भला कैसा ईगो? खुद को सर्वश्रेष्ठ और दूसरों को मूर्खसमझने की गलती ना करें. आप अकेले रहेंगे तो बोझ बढ़ेगा, बेहतर है सबको साथ लेकर चलें. नकारात्मक सोचऔर भावनाओं को त्याग दें. 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