Relationship

40 बातें जो हैप्पी-हेल्दी रिलेशनशिप के लिए ज़रूरी हैं (40 Tips for maintaining a happy and healthy relationship)

ख़ुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी का लुत्फ़ उठाने के लिए ज़रूरी है पति-पत्नी का एक-दूसरे को समझना, एक-दूसरी का ख़्याल रखना आदि,…

पहला अफ़ेयर: सुरों में ढला प्रेम… (Pahla Affair… Love Story: Suron Mein Dhala Prem)

पत्थर की मुंडेर पर बैठी मैं तालाब की ओर देख रही थी. दूर तक फैली जलराशि पर अलसाई-सी अंगड़ाइयां लेती हुई एक के बाद एकलहरें चली आ रही थीं. हवा में अजीब-सी खनक थी. शहर के कोलाहल को चुप कराता यह तालाब और इसके किनारे  बना यहसांस्कृतिक भवन जहां संगीत, साहित्य और कला की त्रिवेणी का संगम होता रहता था, इसकी खुली छत पर बैठ मैं घंटों ढलती शाम केरंगों को अपने सीने में समेटते बड़े तालाब को देखती रहती. आज भी मैं लहरों संग डूब-उतरा रही थी कि अचानक एक रूमानी गीत कामुखड़ा हौले से आकर कानों में गुनगुनाने लगा. जाने उस आवाज़ में ऐसी क्या कशिश थी कि मैं उसमें भीगती गई. शाम अचानक सेसुरमई हो उठी. तालाब के उस पार बनी सड़क की स्ट्रीट लाइटों की रौशनी तालाब के पानी में झिलमिलाने लगी. ऐसा लग रहा था जैसेमन के स्याह कैनवास पर किसी ने जुगनुओं को उतार दिया हो. मैं धीमे-धीमे उस आवाज़ के जादू में बंधती जा रही थी. एक-एक शब्द प्रेम जैसे तालाब की लहरों पर तैरता हुआ मुझ तक आ रहा था. सुरों में भीगी उन लहरों पर मैं जैसे बहती चली जा रही थी. बहिरंग में शायद संगीत का कोई कार्यक्रम था. जब भी दिल ने कोई दुआ मांगी, ख्यालों में तुम ही रहे छाए… जब भी दिल ने इश्क को सोचा, ख्वाबों में बस तुम ही आए... जाने कब उस आवाज़ की कशिश मुझे बहिरंग की ओर खींच कर ले गई. पैर अपने आप ही चल पड़े. मुक्ताकाश के मंच पर गायक और उसके सहायक वादक बैठे थे. सामने सीढ़ियों पर श्रोताओं की भीड़ बैठी गाना सुन रही थी. मैं भी उनके बीच जगह बनाती एक कोने मेंसीढ़ियों पर बैठ गई. सिर्फ़ आवाज़ में ही नहीं, उसके चेहरे में भी ग़ज़ब की कशिश थी. कला की साधना में तपा एक परिपक्व गौरव सेदीप्त चेहरा. गर्दन तक लहराते घुंघराले बाल. गाते हुए घुंघराली लटें लापरवाह-सी माथे और गालों पर झूल रही थीं. आंखें बंद कर जब वह आलाप-ताने लेता तो ऐसा लगता मानों साक्षात कोई गन्धर्व संगीत साधना कर रहा हो. मद्धिम पीले उजास में डूबे लैम्प की छाया मेंढलती सांझ के रंग भी घुल कर उसके चेहरे पर फैल रहे थे. मेरे दिल की कश्ती सुरों के समंदर में डोल रही थी और उस रूमानी आवाज़का जादू डोर बनकर उस कश्ती को और गहराई तक खींच कर ले जा रहा था. मंत्रमुग्ध श्रोताओं पर से बेपरवाही से फिसलती उसकी दृष्टि अनायास ही मेरे चेहरे पर ठिठक गई. हमारी आंखें मिली, मेरा दिल धड़कगया. फिर तो जैसे मेरा चेहरा उसकी आंखों का स्थायी मुकाम हो गया. आते-जाते उसकी दृष्टि मुझपर ठहर जाती, जिस तरह तेज़ धूपसे त्रस्त कोई मुसाफिर किसी घने पेड़ की छांव में ठहर जाता है और मुखड़े की पंक्तियां ‘जब भी दिल ने इश्क को सोचा, ख्वाबों में बसतुम ही आए’ गाते हुए उसकी गहरी नज़र जैसे आंखों के रास्ते मेरे दिल का हाल जानने को बेताब होती रही. ढाई घंटे बाद जबऔपचारिक रूप से कार्यक्रम खत्म हो गया, तो लोगों की भीड़ उसके चारों ओर उमड़ पड़ी, लेकिन वह न जाने किसे तलाश रहा था औरवो जिसे तलाश रहा था वो तो खुद ही उसके सुरों में पूरी तरह भीग चुकी थी. आते हुए देख आई थी 'अनुराग' यही नाम था उसका. तभीउसके सुरों में इतना प्रेम भरा था. अगले दो दिन भी उसका कार्यक्रम था. मैं पहले ही पीछे वाली सीढ़ियों पर भीड़ में छुपकर बैठ गई. आजफिर उसकी आंखें अपना ठिकाना तलाश रही थीं, मगर हर बार मायूस हो जातीं. कल वाली खुशगवार खुमारी आज आंखों में नहीं थी. मैंथोड़ा खुले में बैठ गई. जैसे ही उसकी नज़रें मुझपर पड़ीं, वह खिल उठा. उसके चेहरे की रंगत ने उसके दिल का हाल खुल कर कह दियाथा. दिल कर रहा था कि वो यूं ही गाता रहे और मैं रात भर उसके सुरों की कश्ती में सवार हो प्रेम के दरिया में तैरती रहूं. तीसरे दिन मन बहुत उदास था. आज उसके गाने का आखरी दिन था. कार्यक्रम के बाद मैं भीड़ में सबसे पीछे खड़ी थी. उसे घेरकर लोगबधाइयां दे रहे थे, लेकिन वह भीड़ को चीरते हुए धीरे-धीरे मेरी तरफ आया, एक भरपूर नज़र से मुझे देखा और चुपचाप अपना फोन नम्बर लिखा हुआ कागज़ मुझे थमा दिया. आज सत्रह बरस हो गए हम प्रेम की कश्ती में सवार हो इकट्ठे सुरों के दरिया में तैर रहे हैं. मेरा चेहरा उसकी आंखों  का स्थाई ठिकानाबन चुका है और मुझे देखकर उसकी बेतरतीब घुंघराली लटें शरारत से गुनगुना उठती हैं- ‘जब भी दिल ने इश्क को सोचा…ख्वाबों में बस तुम ही आये’ वो ख्वाब जो हकीकत में बदल चुका है. विनीता राहुरीकर

वक्त के साथ रिश्ते कमज़ोर न पड़ें, इसलिए अपने रिश्तों को दें वक्त… (Invest In Your Relationship: Spend Some Quality Time With Your Partner)

समय के साथ रिश्ते (relationship) मज़बूत होने चाहिए लेकिन अक्सर होता उल्टा है, वक्त बीतने के साथ-साथ हमारे रिश्ते कमज़ोर पड़ने लगते हैं और जब तक हमें एहसास होता है तब तक देर हो चुकी होती है. बेहतर होगा समय रहते अपने रिश्तों को समय (quality time) दें ताकि वो मज़बूत बने रहें.  वक्त देने का मतलब ये नहीं कि बस आप हाथों में हाथ डाले दिन-रात चिपके रहें, बल्कि जब भी ज़रूरत हो तो सामनेवाले को येभरोसा रहे कि आप उनके साथ हो. रिश्ते में अकेलापन महसूस न हो. अक्सर ऐसा होता है कि किसी के साथ रहते हुए भी हम अकेलापन महसूस करते हैं, क्योंकिरिश्तों से हम जिस सहारे की उम्मीद करते हैं वो नहीं मिलता. ऐसे में मन में यही ख़याल आता है कि ऐसे रिश्ते से तो हम अकेले हीअच्छे थे. इसलिए बेहतर होगा अपने रिश्तों में ऐसा अकेलापन और ठंडापन न आने दें.साथ-साथ होकर भी दूर-दूर न हों. हो सकता है आप शारीरिक रूप से साथ हों लेकिन अगर मन कहीं और है, ख़याल कहीं और हैतो ऐसे साथ का कोई मतलब नहीं. इसलिए जब भी साथ हों पूरी तरह से साथ हों,पास-पास बैठे होने पर भी एक-दूसरे के बीच खामोशी न पसरी हो. क्या आपका रिश्ता उस हालत में आ चुका है जहां आपकेबीच कहने-सुनने को कुछ बचा ही नहीं? ये ख़ामोशी दस्तक है कि आप अपने रिश्तों को अब समय दें और इस ख़ामोशी को तोड़ें.अपनी-अपनी अलग ही दुनिया में मशगूल न हों. आप अपने-अपने कामों और दोस्तों में व्यस्त हैं लेकिन अपनों के लिए ही अपनेसमय का एक छोटा सा हिस्सा भी न हो आपके पास तो दूरियां आनी लाज़मी है. इससे बचें. अपनी दुनिया में अपनों को भीशामिल रखें और उनके लिए हमेशा आपकी दुनिया में एक ख़ास जगह होनी ही चाहिए.अपने कामों में इतना मसरूफ न हों कि रिश्तों के लिए वक्त ही न हो.माना आज की लाइफ़ स्टाइल आपको बिज़ी रखती हैलेकिन क्या आप इतने बिज़ी हैं कि अपने रिश्तों तक के लिए समय नहीं बचता आपके पास? जी नहीं, ऐसा नहीं होता बस हमारीप्राथमिकताएं बदल गई होती हैं. लेकिन ध्यान रखें कि अपने रिश्तों को अपनी प्राथमिकता की सूची में सबसे ऊपर की जगह दें वरना हर तरफ़ से अकेले हो जाएंगे.अपनी डिजिटल दुनिया में अलग सी अपनी दुनिया न बसा लें. सोशल मीडिया पर आपके दोस्त होंगे, उनसे चैटिंग भी होती होगीलेकिन ध्यान रखें कि ये दुनिया एक छलावा है और हक़ीक़त से कोसों दूर. यहां धोखा खाने की गुंजाइश सबसे ज़्यादा होती है. आपको जब ज़रूरत होगी या जब आप मुसीबत में होंगे तो आपके अपने रियल लाइफ़ के रिश्ते ही आपके साथ होंगे न किडिजिटल दुनिया के रिश्ते. इसलिए एक सीमित तक ही डिजिटल दुनिया से जुड़ें.रिश्तों को क्वांटिटी की बजाय क्वालिटी टाइम दें. दिन-रात साथ रहने को साथ होना नहीं कहा जा सकता बल्कि जब भी साथ होंतो पूरी तरह से साथ हों. एक-दूसरे को स्पेशल फ़ील कराएं. कुछ स्पेशल करें. यूं ही बैठकर कभी पुरानी बातें याद करें, कभीएक-दूसरे को रोमांटिक गाना गाकर सुनाएं या कभी कोई अपनी सीक्रेट फैंटसीज़ के बारे में बताएं. साथी की फ़िक्र हो, ज़िम्मेदारीका एहसास हो, दूर रहने पर भी कनेक्शन फ़ील हो, हाल-चाल जानों- यही मतलब है क्वालिटी का.दूर होकर भी पास होने का एहसास जगाएं. ऑफ़िस में हों या टूर पर रोमांस और कम्यूनिकेशन कम न हो. आप कैसे और कितनाएक-दूसरे को मिस करते हो ये बताएं. आपकी दोनों एक-दूसरे की लाइफ़ में कितना महत्व रखते हैं ये फ़ील कराएं.फ़ोन पर बात करें या मैसेज करें. माना आप काम में बिज़ी हैं पर फ़ोन करके तो हाई-हेलो कर ही सकते हैं. लंच टाइम में तो कॉलकर ही सकते हैं. फ़ोन नहीं तो मैसेज ही करें पर कनेक्टेड रहें.रात को साथ बैठकर खाना खाएं. दिनभर तो वक्त नहीं मिलता लेकिन रात का खाना तो साथ खाया ही जा सकता है. और खानाखाते वक्त मूड हल्का रखें, पॉज़िटिव मूड के साथ पॉज़िटिव बातें करें. दिनभर की बातें बताएं, शेयर करें. सोने से पहले रोज़ दस-पंद्रह मिनट का वक्त दिनभर की बातें करने, बताने और शेयरिंग के लिए रखें.केयरिंग की भावना जगाएं. प्यार और रोमांस अपनी जगह है लेकिन केयर की अपनी अलग ही जगह होती है रिश्तों में. बीमारी मेंडॉक्टर के पास खुद ले जाना, घर का काम करना, अपने हाथों से खाना खिलाना- ये तमाम छोटी-छोटी चीजें रिश्तों को मज़बूतबनाती हैं.तबीयत का हाल पूछें, कोई परेशानी हो तो उसका सबब जानें. ज़रूरी नहीं कि बीमारी में ही हाल पूछा जाए, कभी यूं ही हल्कासिर दर्द होने पर भी पूछा जा सकता है कि आराम आया या नहीं… फ़िक्रमंद होना ठीक है पर इस फ़िक्र को दर्शाना भी ज़रूरी है.काम और ज़िम्मेदारियां बांटें. रिश्तों में एक-दूसरे का बोझ हल्का करना बेहद ज़रूरी है. वीकेंड को स्पेशल बनाएं. बाहर से खाना मंगावाएं या डिनर पर जाएं. मूवी प्लान करें या यूं ही वॉक पर जाएं. फैमिली हॉलिडेज़ प्लान करें. ये आपको ही नहीं आपके रिश्तों को भी रिफ़्रेश कर देती हैं. ज़रूरी नहीं किसी बड़ी या महंगी जगहपर ही जाया जाए. आसपास के किसी रिज़ॉर्ट या हॉलिडे होम में भी क्वालिटी वक्त बिताया जा सकता है.बात करें, परेशनियां बांटें, राय लें. सामनेवाला परेशान लग रहा है तो खुद अंदाज़ा लगाने से बेहतर है बात करें और उनकी परेशानीया मन में क्या चल रहा है ये जानें और उसे दूर करने में मदद करें.काम की ही तरह अपने रिश्तों को भी अहमियत दें और उनके लिए भी अलग से समय निकालें. धोखा न दें और रिश्तों में झूठ न बोलें. सम्मान दें और ईर्ष्या व ईगो से दूर रहें. सेक्स लाइफ़ को इग्नोर न करें. इसे स्पाइसी बनाए रखने के लिए कुछ नया ज़रूर ट्राई करते रहें. लेकिन सेक्स मशीनी क्रिया नहो, उसमें प्यार और भावनाओं का होना सबसे ज़रूरी है. भोलू शर्मा 

मैरिड लाइफ में हैप्पीनेस के लिए अपनाएं ये 7 मनी मैनेजमेंट हैबिट्स (7 Money Management Habits That Can Bring Happiness In Married Life)

पैसा ज़िंदगी के लिए बहुत ज़रूरी है, मगर इससे जुड़े मसलों को यदि सही तरी़के से हैंडल न किया जाए,…

भाई-बहन अब बन चुके हैं बेस्ट फ्रेंड्स, बदल रहा है इनके पारंपरिक रिश्तों का ट्रेंड… (From Brother-Sister To Best Friends… The Changing Trends Of Sibling Relationships)

एक वक्त था जब भाई-बहन का रिश्ता लिहाज़, संकोच और शर्म और हल्के से डर के दायरे में रहा करता…

हैप्पी रिश्तों के लिए बनें इमोशनली इंटेलिजेंट कपल, अपनाएं ये 7 आदतें (7 Habits Of Emotionally Intelligent Couple Which Will Make You Happy Couple)

पैसों, गाड़ी या अच्छी जॉब से ही ख़ुशियां मिलें, ये ज़रूरी नहीं. सोशल मीडिया या फिल्मों में भले ही दिखाया…

रिलेशनशिप में स्ट्रेस के बावजूद पार्टनर से नहीं टूटेगा रिश्ता बस फॉलो करें ये आसान टिप्स (If You Will Follow These Tips then You Can Save Your Relationship After Fights)

प्यार का एहसास हर किसी के लिए बहुत ही ज़्यादा ख़ूबसूरत होता है. शुरुआत में तो कुछ सालों तक ये…

अपनी लाइफ पार्टनर में ख़ूबसूरती ही नहीं, ये खूबियां भी चाहते हैं पुरुष (Not only Beauty, Men also look for these qualities in their life partner)

हर पुरुष की दिली ख़्वाहिश होती है कि उसकी पत्नी बेहद ख़ूबसूरत हो, मगर ख़ूबसूरती के साथ ही पुरुष पत्नी…

जैकलीन फर्नांडिस की फिर बढ़ी मुसीबत, ED का बड़ा एक्शन, ज़ब्त की 7.27 करोड़ की संपत्ति, महाठग सुकेश चंद्रशेखर से रिश्ता और गिफ़्ट्स लेना पड़ा भारी! (Jacqueline Fernandez In Big Trouble, ED Seizes Assets Worth Rs 7.27 Crore in Money Laundering Case)

एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही. महाठग सुकेश चंद्रशेखर से अपने रिश्ते को लेकर पिछले दिनों…

पति-पत्नी का रिश्ता दोस्ती का हो या शिष्टाचार का? क्या पार्टनर को आपका बेस्ट फ्रेंड होना ज़रूरी है? (Should Husband And Wife Be Friends? The Difference Between Marriage And Friendship)

हर रिश्ते की अपनी खूबसूरती होती है और उसी के साथ-साथ हर रिश्ते की अपनी मर्यादा भी होती है. कहते हैं रिश्ता तभीज़्यादा टिकाऊ होता है जब आप उसमें कुछ छूट यानी स्पेस या आज़ादी देते हैं और वहीं ये भी सच है कि कुछ ज़्यादा हीकैज़ुअल अप्रोच आपके रिश्ते के लिए घातक भी साबित हो सकती है. पति-पत्नी का रिश्ता भी ऐसा ही प्यारा सा रिश्ता है, जिसमें विश्वास, दोस्ती और मर्यादा का समन्वय ज़रूरी होता है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या अपने रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए इसमें दोस्ती का पुट ज़्यादा होना चाहिए या फिर शिष्टाचार का पालन ज़्यादा करना चाहिए? पति-पत्नी के बीच दोस्ताना व्यवहार अच्छा तो है लेकिन सात फेरों के बंधन में बंधने के बाद वो रिश्ता थोड़ा बदलजाता है. इस रिश्ते को सम्मान और लिहाज़ से सींचना पड़ता है.इसमें विश्वास की नींव डालनी पड़ती है. इसमें प्यार और दोस्ती भी निभानी पड़ती है. ऐसे में आप या हम कोई एक दायरा नहीं बना सकते कि क्या कम हो और क्या ज़्यादा, क्योंकि हर कपल अलग होता है. उसकी सोच और अपने रिश्ते से उम्मीद भी अलग ही होती है. हां इतना ज़रूर हम तय कर सकते हैं कि इस रिश्ते में दोस्ती कब और कैसे निभाई जाए और शिष्टाचार का पालन कब और कितना किया जाए.ज़ाहिर से बात है कि अगर आप दोनों दोस्त नहीं बनेंगे तो आपका रिश्ता महज़ औपचारिक बनकर रह जाएगा, जिसमें एक झिझक और संकोच हमेशा बना रहेगा. ऐसे में न खुलकर दिल की बात शेयर कर सकेंगे, न एक साथ मिलकर हंस सकेंगे और न दोस्तों की तरह शिकायतेंकर सकेंगे, इसलिए दोस्ती पहला स्टेप है पति-पत्नी के रिश्ते की बुनयाद को मज़बूती देने की तरफ़. एक दोस्त की तरह उनका दुःख बांटें, उनका विश्वास जीतें. पता है लोग अपने प्रेमी-प्रेमिका या पति-पत्नी से जोबातें शेयर करने से झिझकते हैं वो बातें वो खुलकर अपने दोस्तों के साथ शेयर करते हैं, इसकी वजह जानते हैं? क्योंकि लगभग सभी का ये मानना है कि दोस्त हमें जज नहीं करते, वो हमें और हमारी कमज़ोरियों को बेहतर तरीक़ेसे समझते हैं. यही वजह है कि आपको सबसे पहले अपने पार्टनर को हर बात पर जज करना, परखना बंद करना होगा और उसकीजगह उनको समझना शुरू करना होगा, ताकि आप ही एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त बन जाएं.अगर पति को कोई कलीग खूबसूरत और स्टाइलिश लगती है तो वो खुलकर कह सके बिना इस डर के कि आप इसआधार पर उनके चरित्र को जज न करें बल्कि ये सोचें कि ये तो इंसानी फ़ितरत है, आपके पार्टनर आपसे शेयर तोकर रहे हैं.इसी तरह अगर पत्नी भी अपने किसी मेल दोस्त या कलीग की सराहना करती है तो पति को उसे स्पोर्टिंगली लेना चाहिए. आपका रिश्ता ऐसा होना चाहिए जिसमें छोटी-छोटी बातों से आपको परखे जाने का डर न हो. इन बातों से आपके रिश्ते पर असर न हो. इस तरह से दोस्ती का एक रिश्ता आपको क़ायम करना चाहिए. वहीं दूसरी ओर ये भी न हो कि रिश्ते में आप दोनों इतने बेपरवाह हो जाएं कि बस सिर्फ़ दोस्त ही बनकर रह जाएं. शिष्टाचार का मतलब ये न निकालें कि रिश्ते को औपचारिक बना लें. लेकिन हां, एक-दूसरे का सम्मान करें. दूसरों के सामने एक-दूसरे को बेवजह टोकें नहीं. सॉरी, थैंक्यू और प्लीज़ जैसे मैजिक वर्ड्स का इस्तेमाल न स़िर्फ शिष्टता दर्शाता है, बल्कि रिश्ते को मज़बूत भी बनाता है.इसलिए आपसी बातचीत में शब्दों का चयन भी बहुत मायने रखता है.ध्यान रहे आप एक-दूसरे के पार्टनर हैं न कि गार्जियन, इसलिए स्कूलिंग न करें एक-दूसरे की.एक-दूसरे की सलाह लें, हर छोटे-बड़े मसले पर. शेयर करें, केयर करें. पार्टनर की राय का सम्मान करें. एक-दूसरे से परिवार वालों को भी रेस्पेक्ट दें. दूसरों के सामने बहुत ज़्यादा सवाल-जवाब न करें, अगर कहीं कोई संदेह है तो अकेले में बात करें. एक-दूसरे के काम में हाथ बंटाना भी शिष्टाचार है और शादी में ये बहुत ज़रूरी है.अपनों से बात करते वक़्त हम अक्सर अपने शब्दों के चयन पर ध्यान नहीं देते. हम यह सोचते हैं कि अपनों के साथ क्या औपचारिकता करना और इसी सोच के चलते हम अक्सर शिष्टता भूल जाते हैं. चाहे अपने हों या अन्य लोग, तमीज़ से, प्यार से बात करेंगे, तो सभी को अच्छा ही लगेगा. अपनों के साथ तो और भीसतर्क रहना चाहिए, क्योंकि हमारे द्वारा कहा गया कोई भी कटु शब्द उन्हें ज़्यादा हर्ट कर सकता है, जिससे मन-मुटाव हो सकता है. गलती होने पर माफ़ी मांगने से पीछे न हटें. अपने ईगो को एक तरफ़ रखकर यही सोचें कि गलती किसी से भी होसकती है, अगर आपसे भी हुई है तो पार्टनर से माफ़ी मांगें. इसके अलावा खाने-पीने से संबंधित शिष्टाचार भी ज़रूरी है. बहुत ज़्यादा आवाज़ करके या जल्दी-जल्दी न खाएं. पर्सनल हाईजीन यानी खुद को साफ़-स्वच्छ रखना भी शिष्टता में आता है. अपने पार्टनर और रिश्ते के प्रति इतनेबेपरवाह न हो जाएं कि अपनी ओर ध्यान ही न दें. पार्टनर भले ही कहें नहीं लेकिन उनको भी ये पसंद नहीं आएगा, इसलिए पर्सनल हाईजीन से लेकर ओरल हाईजीन का भी ख़याल रखें. कुल मिलाकर दोस्ती और शिष्टाचार के बीच एक सामंजस्य, समन्वय और संतुलन ही रिश्ते की सफलता की चाभी है. हनी शर्मा 

10 उम्मीदें जो रिश्तों में कपल्स को एक- दूसरे से होती हैं, जो उन्हें बनाती हैं परफेक्ट कपल (10 Things Couples Expect In Relationship Which Make Them Perfect Couple)

एक-दूसरे से अलग होते हुए भी स्त्री और पुरुष साथ चलते हैं, परिवार और रिश्ते निभाते हैं, मगर उनकी चाहतें…

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