Relationship

प्रियांकाच्या बोल्डलूकवर चाहत्यांची नाराजी, अनेकांनी दिली अनफॉलो करण्याची धमकी (Priyanka Chahar Choudhary Raises Heat With Bold Photoshoot, Fans React Negative)

प्रियांका चहर चौधरीचे फॅन फॉलोअर्स खूप आहे, 'उडारियां'मधून तिला मिळालेली लोकप्रियता बिग बॉसनंतर आणखी वाढली. सोशल मीडियावरही तिची लोकप्रियता खूप…

November 17, 2023

From ‘We’ To ‘I’

Turning single AGAIN in THE late 30s and 40s may come as a shock to many. And unlike what it…

November 1, 2023

What does she want in bed?

Move away, men! The new age Indian woman is taking giant strides in every field, including her sex life. Looking…

October 20, 2023

पहला अफेयर: पीला पत्ता (Pahla Affair… Love Story: Peela Patta)

राधिका ने मोबाइल चेक किया. देव का मैसेज था- आज तीन तारीख है, पेंशन लेने बैंक जा रहा हूं, समय हो तो तुम भी आ जाओ. पेंशन लेने के बाद पास ही के रेस्तरां में टमैटो सूप पीने चलेंगे. प्रेम की खुशबू से भीगे मैसेज में मुलाकात की चाह झलक रही थी. कभी-कभी कोई शख्स बिना किसी रिश्ते या नाम के जिन्दगी कोमुकम्मल बनाने की कोशिश करता है. दोस्ती में रूहानी चाहत जन्म ले लेती है. मैसेज देखकर राधिका का रोम-रोम खिल उठा. वहकिशोरी की तरह मुस्कुरा उठी. मिलने के लिए ये छोटे-छोटे पल उर्जा का काम करते थे. पिछले साल शिक्षक पद से रिटायर्ड हुई थी. रिटायर होने के बाद खालीपन कचोटने लगा. शाम काटने के उद्देश्य से कॉलोनी मे बने पार्कमें टहलने चली जाती थी. वहीं पर पहली बार देव को देखा था. ट्रैक सूट और सिर पर कैप में आकर्षक लग रहे थे. जाने क्यों मन खिंचनेलगा था. मैं अक्सर चोरी-छिपे उन्हें देख लेती थी. देव का व्यक्तित्व ही ऐसा था कि नजर नहीं हटती थी. हालांकि दोस्ती और प्रेम की उम्रनहीं थी, फिर भी दिल तो बच्चा है और जिद्दी भी, मानता कैसे? उस दिन जाने क्या हुआ, देव उसी बेंच पर आ बैठे जिस पर अक्सर मैं बैठा करती थी. बेंच के आसपास अशोक के सूखे पत्ते बिखरे हुएथे, उन्हीं में से एक उठाकर मेरी ओर बढ़ाकर कहा, ‘आज मेरा जन्मदिन है, चाहो तो इसे देकर मुझे विश कर सकती हो.’ मैं देव के इस तरह के आग्रह पर अचकचा गई. ‘नजरें चुरा सकती हो, विश नहीं कर सकती?’ देव ने मेरी आंखों में झांका. उस दिन हम दोनों में दोस्ती हो गई. हम दोनों ढेर सारी बातें करने लगे. एक-दूसरे के सुख-दुख बांटने लगे. अकेलापन दूर होने लगा. हमदोनों के बच्चे विदेश रहते हैं. जीवनसाथी पहले ही साथ छोड़ गए. ऐसे में देव का मिलना मेरे सूने जीवन की नेमत था. बातचीत के सिरेपकड़ते-पकड़ते दोनों एक-दूसरे का दिल बांट चुके थे. मन का रीता कोना अब भीगने लगा था. एक दिन मैंने कहा- ‘देव, उम्र का आखिरी पड़ाव है, न जाने कब ज़िन्दगी की शाख कट जाए. मैं संशय में हूं कि इस उम्र में प्रेम करनाग़लत हो सकता है.’ ‘नहीं, प्रेम किसी भी उम्र में ग़लत नहीं होता. प्रेम तो खुद खुबसूरत शै है जिसमें हर व्यक्ति निखर जाता है. प्रेम को गलत-सही कीपरिभाषा से दूर रखना चाहिए. गलत है तो अपनी भावनाओं को रोकना और उन्हें शक की नजरों से देखना. मेरी एक बात मानोगी, जानेकब सांसें साथ छोड़ दें, क्यों न कुछ दिन इस तरह जी लें जैसे टीनएज में जीते थे. जीवन के उपापोह में जो न कर सके, अब कर लें…’ और उस दिन से सच में हम किशोर उम्र में उतर गए. चुपके-चुपके मैसेज करना, छिप-छिपकर मिलना, एक-दूसरे की पंसद का ख्याल रखना… छोटी-छोटी शरारतें कर एक-दूसरे कामनोरंजन करना… वो सब करते जो एक उम्र में करने से चूक गए थे. दोनों मंद-मंद मुस्कुराते. मैं देव की पंसद की कोई डिश बना लेती तो, वहीं देव कोई प्रेम गीत गुनगुना देते. नीरस जीवन में बहार आ गई थी. एक दिन देव साथ छोड़ गए और मैं अकेली रह गई. मैं उदास-सी खिड़की पर खड़ी होकर देव के साथ बिताए पलों को याद करती. देवमेरे जीवन के तुम वो झरोखा थे जो मेरे जीवन को महका गए. तुम मेरे स्वरों में अंकित हो, आज तुम्हारा जन्मदिन है. अशोक का यहपीला पत्ता उस दिन की याद दिला रहा है, जिस दिन हम दोनों के दिलों में चाहत का बीज पनपा था. जिस प्रेम को इस पत्ते ने संजोयाथा, वह आज भी लहलहा रहा है. मैं इस पौधे के साथ जल्द ही तुम्हारे पास आने वाली हूं… मेरे अंतस की पुकार में, तेरा अस्तित्व महफूज़ है… फिज़ा आज भी बहती है, बस मोगरे ने खुशबू बदल ली है… शोभा रानी गोयल

October 19, 2023

Unexpected Arrivals

An unexpected pregnancy may not always bring joy in its wake. Aruna Rathod talks about times when sex results in…

October 9, 2023

कैसे जानें कि लड़की आपको प्यार करती है या नहीं? (How to know whether a girl loves you or not?)

एक ख़ूबसूरत मीठा एहसास है प्यार. किसी नज़र की चाहत भर ही दिल को गुदगुदा देती है. लेकिन प्रॉब्लम तब…

September 13, 2023

पहला अफेयर: चूड़ियों  की खनक (Pahla Affair… Love Story: Choodiyon Ki Khanak)

जीवन में प्रेम जब दस्तक देता है तो उसका एहसास अत्यंत ख़ूबसूरत होता है और वो भी मेरे जैसे नीरस इंसान के लिएजिसके लिए प्रेम और उसका एहसास मात्र लैला-मजनू, हीर-रांझा वाले किताबों के काल्पनिक क़िस्से थे, पर जब तुम्हें पहली बार देखा तो मैं भी प्रेम के एहसास से रु-ब-रु हो गया.  वो काल्पनिक क़िस्से मुझे यथार्थ से लगने लगे थे. मुझे किंचित भी आभास न हुआ कि कब तुम मेनका बन आयी और मेरी विश्वामित्रि तपस्या भंग कर मेरे दिल में समाती चली गईं. उस दिन जब पहली बार तुम्हें मेले में चूड़ियों की दुकान परदेखा था तो मंत्र-मुग्ध-सा तुम्हें देखता ही रह गया. सलोना-सा मासूम चेहरा, कज़रारी आंखें और खुले लम्बे काले बालतुम्हारी सुंदरता में चार चांद लगा रहे थे. तुम्हारे हाथों में ढेर सारी चूड़ियां, उनकी खनखनाहट मेरे कानों में सरगम का रस घोल रहीं थीं. हर बात पर तुम्हारा चूड़ियों का खनखनाना मुझे मंत्रमुग्ध कर रहा था. उस दिन तुम सफ़ेद कलमकारी वाली कढ़ाई वाले सूट में अनछुई चांद की चांदनी लग रही थी. अनिमेश दृष्टि से तुम्हें देखता मैं जड़ चेतन हो गया था. तुम्हारी चूड़ियों की खनक से मैं वापिस यथार्थ के धरातल पर आ गया. मैं भी अपनी बहन के लिए चूड़ियां ख़रीदने आया था, तभी इत्तेफाकन ही हम दोनों ने एक लाल रंग की चूड़ी पर हाथ  लगा कर अपनी पसंद दुकानदार को ज़ाहिर कर दी. तुम्हारे कोमल हाथों के स्पर्श से मैं एकदम सिहर-सा  गया. तुम तो वहां से चली गईं, साथ में मेरा दिल और चैन भी ले गई. मैं मोहब्बत के अथाह सागर की गहराइयों मेंगोते खाने लगा. मुझे तुम्हारा नाम-पता कुछ भी नहीं मालूम था. मैं बस तुम्हारी एक झलक पाने के लिए बेचैन-सा रहने लगा था. कहते हैं ना मन की गहरियों से ढूंढ़ो तो भगवान भी मिल जाते हैं, अंतत: मैंने तुम्हारे बारे में पता लगा ही लिया. तुम तो मेरे सामने वाले कॉलेज में पढ़ती थीं और रोज़ बस से कॉलेज जाती थी. इतना नज़दीक पता मिलने से मेरी ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहा. मैं रोज़ तुम्हारी चूड़ियों की खनखनाहट सुनने के लिए बस स्टॉप पर तुम्हारा इंतज़ार करने लगा… और तुम, तुम तोमुझे देख कर भी अनदेखा करने लगी. तुम्हारी अनदेखी मुझे बहुत तकलीफ़ देती थी, लेकिन फिर एक दिन मैंने किसी तरह हिम्मत जुटाई और अपने दिल की बात बताने की ठानी, लेकिन तब तुमसे बात करने की कोशिश में पता  चला ईश्वर ने तुम्हें फ़ुर्सत से गढ़ा था, पर वोतुम्हें आवाज़ देना भूल गया…और यही चूड़ियों की खनक ही तुम्हारी आवाज़ थी…तुम्हारी भाषा थी. तुम्हें डर था कि तुम्हारा यह सचजानकर कहीं मैं तुम्हें छोड़ न दूं, पर कहते हैं न "मोहब्बत कभी अल्फ़ाज़ों की मोहताज नहीं होती, ये तो वो ख़ूबसूरत एहसास है जिसमें आवाज़ की ज़रूरत नहीं होती" मैंने तो तुम्हें मन की गहराइयों से निस्वार्थ प्रेम किया था. और प्रेम तो समर्पण और त्याग की मूरत है और मैं इतना स्वार्थी नहीं था. धीरे -धीरे मैंने भी तुम्हारी और तुम्हारी चूड़ियों  की भाषा सीख ली. तुम्हारी इन चूड़ियों की खनक में सम्पूर्ण जीवनगुज़ारने का एक सुंदर सपना संजोने लगा. समय के साथ कब तुम्हारा कॉलेज पूरा हो गया पता ही नहीं चला. तुम आगेपढ़ना चाहती थीं… एक शिक्षिका बन कर अपने जैसे मूक लोगों के लिए प्रेरणा बन उन्हें राह दिखाकर उन्हें उनकी मंज़िल तक पहुंचाना चाहती थीं. बस फिर क्या था, तुम्हारे इसी हौसले और हिम्मत के आगे मैं नतमस्तक हो गया. एक-एक दिन तुम्हारे इंतज़ार और मिलनेकी आस में काट रहा था और आख़िर तुम्हारा सपना पूरा हो गया. मैंने भी अपने सपने को पूरा कर तुम्हें अपना हमसफ़र बना लिया और तुम्हारी इन चूड़ियों की खनक को हमेशा के लिए अपने जीवन की सरगम बना लिया. "मोहब्बत हमसफ़र बने इससे बड़ी ख़ुशनसीबी नहीं, रूह से रूह का बंधन हो तो इससे बड़ी इबादत नहीं"  कीर्ति जैन 

September 12, 2023

The Singles’ Club

Till about a decade ago, the stereotype of the single woman was a dispirited, antsy, stoic figure.The scenario has undergone…

September 6, 2023

पहला अफेयर: सद्धयः स्नात प्रेम… (Pahla Affair… Love Story: Saddhyah Snaat Prem)

कंपकपाती ठंड से परेशान होकर नाश्ता करने के बाद मैं छत पर चला आया. बाहर गुनगुनी धूप पसरी हुई थी जो बड़ी भली लग रही थी. मैं मुंडेर के पास दरी बिछाकर उस पर लेट गया. धूप चटक थी लेकिन मुंडेर के कारण हल्की सी छांव के साथ सुहावनी लग रही थी. ठंडसे राहत मिलते ही कंपकपी बंद हो गई. धूप की गर्माहट से कुछ ही समय में आंखें उनींदी होने लगी और मैं पलकें मूंदकर ऊंघने लगा. यूंभी पिछले साल भर से किताबों में सर खपा कर मैं बहुत थक चुका था और कुछ दिनों तक बस आराम से सोना चाहता था, इसलिए लॉकी परीक्षा देने के बाद अपनी मौसी के यहां कानपुर चला आया था. अभी हल्की-सी झपकी लगी ही थी कि अचानक मुंह पर पानी की बूंदे गिरने लगी. मैंने चौक पर आंखें खोली, आसमान साफ था. नीलेआसमान पर रुई जैसे सफेद बादल तैर रहे थे. तब मेरा ध्यान गया कि पानी की बूंदें मुंडेर से झर रही हैं. दो क्षण लगे नींद की खुमारी सेबाहर आकर यह समझने में कि पानी किसी के लंबे, घने काले बालों से टपक रहा है. शायद कोई लड़की बाल धोकर उन्हें सुखाने केलिए मुंडेर पर धूप में बैठी थी. एक दो बार खिड़की से झलक देखी थी. एक बार शायद गैलरी में भी देखा था, वह मौसी के पड़ोस वालेघर में रहती थी. उसके भीगे बालों से शैंपू की भीनी-भीनी सुगंध उठ रही थी. मैं उस सुगंध को सांसों में भरता हुआ अधखुली आंखों से उन काले घने भीगेबालों को निहारता रहा. बूंद-बूंद टपकते पानी में भीगता रहा जैसे प्रेम बरस रहा हो, सद्धयः स्नात प्रेम… कितना अनूठा एहसास था वह. भरी ठंड में भी पानी की वह बूंदें तन में एक गर्म लहर बनकर दौड़ रही थी. मेरे चेहरे के साथ ही मेरा मन भी उन बूंदों में भीग चुका था. तभी उसने अपने बालों को झटकारा और ढेर सारी बूंदें मुझ पर बरस पड़ी. मेरा तन मन एक मीठी-सी सिहरन से भर गया. मैं उठ बैठा. मेरेउठने से उसे मेरे होने का आभास हो गया. वह चौंककर खड़ी हो गई. उसके हाथों में किताब थी. कोई उपन्यास पढ़ रही थी वह धूप मेंबैठी. मुझे अपने इतने नज़दीक देखकर और भीगा हुआ देखकर वह चौंक भी गई और सारी बात समझ कर शरमा भी गई. उसे समझ हीनहीं आ रहा था कि इस अचानक आई स्थिति पर क्या बोले. दो पल वह अचकचाई-सी खड़ी रही और फिर दरवाज़े की ओर भागकरसीढ़ियां उतर नीचे चली गई. पिछले पांच दिनों में पहली बार उसे इतने नज़दीक से देखा था. किशोरावस्था को छोड़ यौवन की ओर बढ़ती उम्र की लुनाई से उसकाचेहरा दमक रहा था. जैसे पारिजात का फूल सावन की बूंदों में भीगा हो वैसा ही भीगा रूप था उसका. रात में मैं खिड़की के पास खड़ा था. इस कमरे की खिड़की के सामने ही पड़ोस के कमरे की खिड़की थी. सामने वाली खिड़की में रोशनीदेखकर मैंने उधर देखा. उसने कमरे में आकर लाइट जलाई थी और अलमारी से कुछ निकाल रही थी. उसने चादर निकाल कर बिस्तर पररखी, तकिया ठीक किया और बत्ती बुझा दी. मैं रोमांचित हो गया, तो यह उसका ही कमरा है, वह मेरे इतने पास है. मैं रात भर एकरूमानी कल्पना में खोया रहा. देखता रहा उसके बालों से बरसते मेह को. एक ताज़ा खुशबूदार एहसास जैसे मेरे तकिए के पास महकतारहा रात भर. मैं सोचता रहा कि क्या उसके मन को भी दोपहर में किसी एहसास ने भिगोया होगा, क्या वह भी मेरे बारे में कुछ सोच रहीहोगी? जवाब मिला दूसरे दिन छत पर. जब मैं छत पर पहुंचा, तो वह पहले से ही छत पर खड़ी इधर ही देख रही थी. हमारी नज़रें मिली औरउसने शरमा कर नज़रें झुका लीं. कभी गैलरी में, कभी खिड़की पर हमारी नज़रें टकरा जाती और वह बड़े जतन से नज़रें झुका लेती. उनझुकी नज़रों में कुछ तो था जो दिल को धड़का देता. नज़रों का यह खेल एक दिन मौसी ने भी ताड़ लिया. मैंने उन्हें सब कुछ सच-सच बता दिया. फिर तो घर में बवाल मच गया और मुझेसज़ा मिली. सज़ा उम्र भर सद्धयः स्नात केशों से झरती बूंदों में भीगने की और मैं भीग रहा हूं पिछले छब्बीस वर्षों से, उसके घने कालेबालों से झरते प्रेम के वे सुगंधित मोती आज भी मेरे तन-मन को सराबोर कर के जीवन को महका रहे हैं और हम दोनों के बीच का प्रेमआज भी उतना ही ताज़ा है, उतना ही खिला-खिला जैसा उस दिन पहली नज़र में था, एकदम सद्धयः स्नात. विनीता राहुरीकर

August 21, 2023

Women on Top

What happens when a woman is more successful than her partner? Does it create conflict in her relationship or redefine…

August 2, 2023

Blow Hot, Cold

Have you ever found yourself in a situation where a man who once pursued you vanished into thin air as…

June 28, 2023

पहला अफ़ेयर… लव स्टोरी: उपहार (Pahla Affair… Love Story: Uphaar)

हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह.. यूट्यूब पर चलती ग़ज़ल और उसके शहर से गुज़रता हुआ मैं… दिल में यादों का सैलाब औरआंखों में नमी अनायास उतर आती है. ऐसा नहीं था कि उसके शहर से मेरा कोई राब्ता था या कोई जान-पहचान थी. मानचित्र में दर्ज वहशहर मेरे लिए नितांत अजनबी था. यह इत्तेफाक ही था कि उससे मुलाकात उसके शहर में उसके घर पर हुई. बात नब्बे के दशक की है. मैं आईएएस में सलेक्शन होने के बाद ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद जा रहा था. मैं इतना बेफिक्र और लापरवाह थायह भी नहीं जानता था कि इस हफ्ते मेरी ज़िंदगी एक नया मोड़ लेने जा रही है. नई दुनिया के सतरंगी सपनों की नींद तब टूटी जब ट्रेन नेतेज़ी से हिचकोले खाकर अपनी रफ्तार रोक दी. गहन बीहड जंगल, जहां इंसान दूर-दूर तक नहीं थे, में ट्रेन का रुक जाना दहशत पैदाकर रहा था. भय के इस माहौल में पता चला कि ट्रेन के कुछ पहिये पटरी से उतर गए. कब तक ट्रेन दुरूस्त होगी इसकी जानकारी किसीके पास नहीं थी. एक या दो दिन लग सकते हैं. वक्त काटने के लिए मैं यूं ही टहलता हुआ दूर निकल आया. ढाणियों से आच्छादित यह गांव अपने रंग में रंगा हुआ था. शहर कीआबोहवा से दूर एक ढाणी में ढोल नगाड़े बज रहे थे. मै कौतूहलवश देखने लगा तभी पीछे से पीठ पर थपथपाहट हुई. मुड़कर देखा तो देखता ही रह गया. गुलाबी लहंगा-चुनर ओढ़े, गुलाबी आंखों में गुलाबी चमक लिए और गौर वर्ण हथेलियों में गुलाबीचूड़ियां खनक रही थी. सादगी में सौन्दर्य निखर रहा था. कौन हो बाबू? क्या चाहिए? ऐसे एकटक क्या देख रहे हो… मखमली आवाजेड में वह ढेरों सवाल पूछ रही थी और मैं बेसुध खड़ा सुना रहा था. गांव की लड़कियां शहरी लड़कों के हृदय में प्रेम काअंकुरण करती हैं वैसे ही कुछ मैंने महसूस किया. उसने मुझे झंझोड़ते हुए फिर से अपना सवाल दोहराया, मैं वर्तमान में लौटा. ट्रेन हादसे के बारे में उसे बताया. उसने अपने पिता को मेरीस्थिति समझाई. सरल हृदय के धनी उन लोगों ने मुझे अपने यहां रुकने  का आग्रह किया- ‘जब तक ट्रेन ठीक नहीं हो जाती बाबू तबतक आप यहां आराम से रह सकते हैं. घर में शादी है आप शरीक हों, हमें अच्छा लगेगा.’ न जाने क्यों मैंने उनका आमंत्रण स्वीकार करलिया. शादी की रस्मों में गुलाबी लड़की थिरकती उन्मुक्त-सी उछलती-कूदती कुछ न कुछ गुनगुनाती रहती. मेरा दिल उसे देखकर धड़क जाता. यह लड़की कुछ अलग थी. कुछ बात थी जिसके कारण मेरा दिल मेरा नहीं था. रात के समय जब मै गांव के अंधेरे को निहार रहा था, तो वह मेरे पास आ बैठी. हम दोनों देर तक बातें करते रहे. मैं अपने कॉलेज केकिस्से सुनाता रहा. आगे की ट्रेनिंग के बारे में बताया और वह अपनी ज़िंदगी के अनछुए पहलुओं से अवगत करा रही थी. उसकी बातेंजादू थी, मैं डूब रहा था. अचानक उसने मेरा हाथ थाम लिया. ‘जो सितारे रात में तेज चमकते हैं वे प्रेम में चोट खाए हुए प्रेमी हैं. जाने-अनजाने में जब प्रेम किया और उसे पाने में खुद को असमर्थपाया. प्रेम कह देने में नहीं है बाबू. यह देह की भाषा से परिलक्षित हो जाता है. मैं तुम्हारे लिए नहीं बनी हूं. इसलिए अपनी आंखों में कोईख्वाब मत संजोना. कल मेरी शादी है.’ ‘तुम्हारी शादी… तुम तो दुल्हन जैसी नहीं लग रही.’ पूछ  बैठा उससे. ‘हां बाबू, मुझे नहीं पता मेरा आने वाला समय कैसा होगा, मैं हर पल को जीना चाहती थी. तुम्हारे मन को पढ़ा तो बता देना ज़रूरीसमझा.’ मै आसमां से सीधे ज़मीं पर आ गिरा. अभी तो प्रेम कहानी शुरू भी नहीं हुई थी कि खत्म होने की बात आ गई. ‘एक सवाल पूछने कीहिमाकत कर सकता हूं? क्या तुम भी मुझसे…’ मेरी बात बीच में काटती हुई बोली- ‘उन प्रश्नों का कोई अर्थ नहीं होता जिनका जवाब देने में एक उम्मीद जग जाए, मैं कोई उम्मीद नहींहूं, दरख़्त हूं, तुम्हारे लिए हरी नहीं हो सकती.’ उसकी आंखें छलछला गई. हारा हुआ दिल लेकर मैं दो क़दम पीछे हटकर मुड़ा ही था कि उसकी आवाज़ गूंजी- ‘बाबू मेरी शादी का उपहार नहीं दोगे?’ ‘क्या चाहिए इस अजनबी से, बोलो?’…

June 27, 2023
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