महिलाओं को क्यों ज़रूरी है लाइफ़ इंश्योरेंस? (Why women need Life Insurance?)


सर्वे बताते हैं, घरेलू महिलाओं में लाइफ़ इंश्योरेंस का प्रतिशत बहुत ही कम है जबकि नौकरीपेशा महिलाओं की भी लगभग यही सोच है. लेकिन कहीं एम्प्लॉयर द्वारा तथा कहीं पर टैक्स बचाने के लिए इंश्योरेंस में किया गया निवेश, उन्हें इंश्योर्ड कर रहा है.

आज महिलाओं में इस बात को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है कि यदि उन्हें भी लाइफ़ इंश्योरेंस पॉलिसी (टर्म इंश्योरेंस) लेनी चाहिए, ताकि यदि कुछ अनहोनी होती है तो उनके बाद भी उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके. इस बाबत ऑप्टिमा इंश्योरेंस ब‘ोकर के सीईओ राहुल अग‘वाल कहते हैं, घरेलू व कामकाजी महिलाओं की सबसे पहली ज़रूरत टर्म इंश्योरेंस है. टर्म इंश्योरेंस लेने के बाद ही व्यक्ति को निवेश संबंधी योजनाओं के बारे में सोचना चाहिए. क्योंकि आज के समय में बीमा लाइफ़ सबसे अहम ज़रूरत है. दरअसल, लाइफ़ इंश्योरेंस, ऐसा रिस्क मैनेजमेंट टूल है, जो आपके परिवार को आकस्मिक घटनाओं से सुरक्षा प्रदान करता है.

इंश्योरेंस से संबंधित महिलाओं की विशेष ज़रूरतों के बारे में बताते हुए टाटा एआईजी लाइफ इंश्योरेंस की वाइस प्रेसिडेंट लीना धनकड़ जोशी कहती हैं, आपको कौन-सा प्लान चाहिए? यह बहुत-सी बातों पर निर्भर करता है, क्योंकि हर औरत की ज़रूरतें, ख़्वाहिशें अलग-अलग होती हैं. ऐसे में, आपके लिए कौन-सा प्लान ज़रूरी है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपने जीवन के कौन-से दौर में है, क्योंकि इंश्योरेंस लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट की श्रेणी में आता है. यह न स़िर्फ लाइफ़ कवर में आता है, बल्कि आपके सपनों को पूरा करने के लिए ज़रूरी एक मुश्त पूंजी इकट्ठा करने में मदद करता है, जिससे आप न स़िर्फ वर्तमान में, बल्कि भविष्य में भी अपनी बेहतर लाइफ़ जी सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले आपको अपने परिवार के लिए जीवन की अलग-अलग अवस्थाओं में वित्तीय सुरक्षा के बारे में जानना होगा.

यदि आप वर्किंग हैं
30 वर्षीया सीमा शर्मा एक एमएनसी में उच्च पद पर कार्यरत हैं और सालाना आमदमी सात लाख रुपए है. शादीशुदा और एक बेटी की मां सीमा की इच्छा है कि वह अपनी बेटी की शिक्षा के लिए बचत करें, तो ऐसे में वह यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) ले सकती हैं. इस प्लान में उन्हें रिस्क कवर तो मिलेगा ही और किया गया निवेश तब तक एक बड़ी रकम बन जाएगी, जब तक उसकी बेटी कॉलेज जाने या कोई प्रो़फेशनल कोर्स करने लायक होगी. चूंकि यूलिप शेयर बाज़ार से जुड़ा इंश्योरेंस प्रोडक्ट है. इसलिए लॉन्ग टर्म में यह निवेशक को अच्छी-ख़ासी रिटर्न देता है. यूलिप में पेपर बेनिफ़िट राइडर भी जोड़ा जा सकता है, ताकि यदि पॉलिसीधारक की असमय मृत्यु हो जाती है, तो भी यह प्लान ज़ारी रह सके और भविष्य में प्रीमियम भरने की ज़िम्मेदारी ख़ुद इंश्योरेंस कंपनी वहन करे. इस तरह मां के न रहने पर भी बच्ची के भविष्य की ज़रूरतें समय पर पूरी होती रहेंगी.

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यदि सिंगल वर्किंग वूमन हैं
38 वर्षीय सोनम कपूर एक फाइनेंशियल फर्म में सीनियर पद पर कार्यरत हैं और अपने परिवार में कमानेवाली अकेली हैं. उस पर दो लोग आश्रित हैं. वह चाहती हैं कि 55 वर्ष के बाद नौकरी से रिटायरमेंट लेकर वह अपनी उन इच्छाओं को पूरा करें, जिसे वह नौकरी व घर की ज़िम्मेदारी के चलते पूरा नहीं कर सकी. ऐसे में सोनम को सबसे पहले अपने आश्रितों को किसी बीमारी या दुर्घटना से बचाना है और इतना पूंजी जमा करनी है कि रिटायरमेंट के बाद भी आमदनी ज़ारी रहे. लिहाज़ा, उसे सबसे पहले लाइफ़ को कवर करने के लिए टर्म इंश्योरेंस और एक अच्छा पेंशन प्लान लेना होगा. ताकि नौकरी के दौरान नियमित रूप से की गई यह बचत रिटायरमेंट के बाद नियमित रूप से इनकम का ज़रिया
बन सके. टर्म इंश्योरेंस व पेंशन प्लान के साथ बेहद ज़रूरी है कि हेल्थ प्लान लिया जाए. यदि आपके पास हेल्थ इंश्योरेंस है तो आप अस्पताल के ख़र्चों तथा इलाज पर होने वाले भुगतान से आप चिंतामुक्त रह सकती हैं और आपके लॉन्ग टर्म गोल भी प्रभावित नहीं होंगे.


यदि होममेकर हैं
जो महिलाएं होममेकर होती हैं, उन्हें हमेशा यह दुख सताता है कि काश, वे भी कमातीं तो घर की वित्तीय ज़रूरतों में योगदान देतीं. महिलाओं की इस कशमकश के बारे में बिरला सनलाइफ़ की सीनियर वीपी अंजना ग‘ेवाल कहती हैं, यदि आप घर की ज़िम्मेदारियों को पूरा करते हुए हर महीने की गई अपनी बचत को सही जगह निवेश करने का गुर जान जाती हैं, उसे अमल में लाती हैं, तो यह तय जानिए कि आपका यह कार्य कमाने जितना ही महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. यदि आपके पति या परिवार का मुखिया काम में अतिव्यस्तता की वजह से बचत को सही जगह निवेश करने की प्लानिंग के लिए व़क़्त नहीं निकाल पाता है, तो बेहतर है कि आप आगे बढ़कर उनके साथ विचार-विमर्श कर अपने पूरे परिवार व भविष्य की वित्तीय ज़रूरतों को पूरा करने के लिए वित्तीय योजना बनाकर सभी को निश्‍चिंतता प्रदान कर सकती हैं. इसलिए होममेकर महिलाओं को भी हेल्थ इंश्योरेंस व वृद्धावस्था में एक स्वतंत्र आय की प्लानिंग ज़रूर करनी चाहिए.

इसके लिए एक अच्छा यूनिट लिंक्ड प्लान आपकी वित्तीय ज़रूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है.
आपको किस तरह का इंश्योरेंस प्लान चाहिए, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी आमदनी का ज़रिया न रहने पर आपके प्रियजनों पर किसी तरह का वित्तीय संकट न आने पाए. इसके अलावा बुढ़ापे में हर किसी को नियमित आमदनी चाहिए और उन सुनहरे दिनों में स्वास्थ्य संबंधी ख़र्च का भुगतान भी आप आराम से कर सकें.


वैसे भी महिलाओं का कामकाजी जीवन पुरुषों के मुक़ाबले अनिश्‍चित होता है. कभी शादी के बाद तो कभी बच्चे के जन्म के बाद महिलाएं अस्थायी या फिर हमेशा के लिए नौकरी छोड़ने का फैसला ले लेती हैं. इसलिए आपको इन निम्न बिंदुओं पर ग़ौर करना चाहिए-
– जितनी जल्दी हो सके अपने लिए फ़ाइनेंशियल प्लानिंग करें, इसके लिए फ़ाइनेंशियल प्लानर की मदद भी ले सकती हैं.
– प्लानिंग करते वक्त अपनी ज़रूरतों और आकांक्षाओं को ध्यान में रखें.
– प्योर इंश्योेरेंस आपकी सकल वार्षिक आमदनी का पांच से दस गुना होना चाहिए.
बुढ़ापे के लिए अलग से प्लानिंग करें, ताकि उन सुनहरे दिनों में नियमित आय के साथ आकस्मिक बीमारियों के ख़र्च की चिंता से भी मुक्त रह सकें.
– अगर आप शादीशुदा हैं, तो फैमिली फ़ाइनेंशियल प्लान बनाएं, ताकि आपकी और आपके प्रियजनों की ख़ास ज़रूरतें आप अपने प्रयासों से सही ढंग से पूरी कर सकें. इस प्रकि‘या में कुछ न कुछ ऐसा इंतजाम भी ज़रूर करें, जिससे आप अपने बच्चों, पति अपने माता-पिता और ख़ुद अपने लिए स्वतंत्र रूप से ख़र्च करने की योग्यता भी पा लें.

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Poonam Sharma :
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