परवल के 11 औषधीय गुण (11 Top Health Benefits Of Parwal)

परवल का शाक अन्य सब्ज़ियों की अपेक्षा अधिक पथ्य है, इसीलिए इसे अधिक महत्व दिया जाता है. यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पित्त रोगों की गुणकारी औषधि है. पांडुरोगी के लिए यह पथ्य है, तो पीलिया का दुश्मन पित्त प्रकोप के कारण उत्पन्न पुराना बुखार, शारीरिक सूजन और उदर रोगों में इसका विरेचन देने से पाचन क्रिया में सुधार आता है. कड़वे परवल चटपटे और गर्म होते हैं. ये रक्तपित्त, वायु, कफ़, खांसी, खुजली, कुष्ठ रोग, ज्वर और जलन को दूर करनेवाले होते हैं.

* कड़वे परवल के पत्तों को पीसकर उनका रस निकालें. इसे सिर पर नियमित दो महीने तक लगाएं. इससे बालों का झड़ना रुक जाता है और गंजापन दूर होता है.
* कड़वे परवल, वच और चिरायता सममात्रा में लेकर काढ़ा बनाएं. इसे मरीज़ को सुबह-शाम पिलाने से सभी प्रकार का बुखार दूर होता है. यह काढ़ा कब्ज़ में भी लाभप्रद है.
* कफ़ सूख गया हो, सांस लेने में कठिनाई हो रही हो, तो मीठे परवल की पत्तों सहित टहनी 6 ग्राम और सोंठ 6 ग्राम लेकर काढ़ा बनाएं, फिर उसमें शहद मिलाकर मरीज़ को सुबह दें. इससे कफ़ सरलता से निकलता है तथा कफ़ज ज्वर का भी शमन होता है.

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* कड़वे परवल की जड़ को पीसकर उसको कपड़े से छानकर रस निकाल लें. इसे शक्कर के साथ मिलाकर दिन में तीन बार देने से पित्तज ज्वर में लाभ होता है.
* कड़वे परवल के पत्ते तथा धनिया को लेकर काढ़ा बनाएं तथा रोगी को सुबह पिलाएं, साथ ही उसके पत्ते के रस से रोगी के शरीर पर मालिश करें. इससे शरीर की जलन शीघ्र ही समाप्त हो जाती है तथा पित्त प्रकोप के कारण उत्पन्न ज्वर का भी शमन होता है.
* कड़वे परवल, कड़वा नीम तथा अडूसा के पत्तों को सुखाकर उसका पाउडर बनाएं. इस पाउडर को 2 ग्राम की मात्रा में ठंडे पानी के साथ रोगी को पिलाएं. इससे उल्टी होगी और पित्त विकार दूर होगा.
* कड़वे परवल को पानी के साथ पीसकर पिलाने से उल्टी होती है और पेट में गया विष उल्टी के साथ निकल आता है.

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* पीलिया रोग के शमन के लिए कड़वे परवल का क्वाथ बनाकर सुबह-शाम पीना चाहिए. इससे पीलिया और अन्य उदर विकार भी ठीक हो जाते हैं.
* कड़वे परवल का क्वाथ या कल्क सरसों के तेल में मिलाकर तेल से चार गुना पानी में उबालें. पानी जब जल जाए तो उसे उतार कर छान लें और शीशी में भर कर रख लें. आग से जलने पर इसे घाव पर लगाएं. इससे जलने के कारण होने वाली पीड़ा, स्राव और दाह से राहत मिलती है.
* कड़वे परवल के पत्ते 10 ग्राम और 10 ग्राम धनिया लेकर 100 ग्राम पानी में रात को भिगो दें. सुबह उसे पीस-छानकर तीन हिस्से बनाएं. इसमें शहद मिलाकर मरीज़ को दिन में तीन बार दें. इससे पेट के कीड़े मर जाएंगे.

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* दाद, खाज, खुजली जैसे त्वचा रोगों में भी परवल गुणकारी है. परवल तथा गिलोय के पत्तों को पीसकर उसका रस निकालें. इसे चर्म रोगों पर लगाने या मालिश करने से लाभ होता है.

– रेखा गुप्ता

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Usha Gupta :
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