एकतरफ़ा प्यार के साइड इफेक्ट्स… (How One Sided Love Can Affect Your Mental Health?..)

नज़रें मुस्कुराने लगती हैं.. धड़कनें गुनगुनाने लगती हैं.. एकतरफ़ा ही सही मुहब्बत की महफ़िल होती है उस तन्हा दिल में… यक़ीनन एकतरफ़ा प्यार में एक…

नज़रें मुस्कुराने लगती हैं.. धड़कनें गुनगुनाने लगती हैं.. एकतरफ़ा ही सही मुहब्बत की महफ़िल होती है उस तन्हा दिल में…
यक़ीनन एकतरफ़ा प्यार में एक तरफ़ ही सही, प्यार होता है बेशुमार. प्यार, मीठा एहसास.. जीने का सबब.. इंसान को बहुत ख़ूबसूरत बना देता है प्यार. लेकिन जब एकतरफ़ा प्यार की बात होती है, तो स्थितियां बदल जाती हैं. यहां पर दोनों तरफ़ प्यार में बराबरी की बात नहीं रहती है. यह एकतरफ़ा रहता है मतलब एक ही शख़्स जो शिद्दत से चाह रहा है. कई मामलों में इस ज़ज्बात का पता होता है, तो कई बार अगला इससे अनजान भी रहता है. बड़े ही बेदर्दी से टूटते हैं वो दिल, जो एकतरफ़ा प्यार से जुड़ते हैं.

इस तरह के प्यार-एहसास के कई साइड इफेक्ट्स भी देखने को मिलते हैं. इस पर एक नज़र डालते हैं-

  • दिल ये मानने को तैयार ही नहीं होता कि वह मुझे नहीं चाहता/चाहती है. हर पल एक उम्मीद बनी रहती है, जो बाद में नाउम्मीद हो जाती है और निराशा घेरने लगती है.
  • तनाव और अवसाद धीरे-धीरे पैर पसारने लगते हैं. कई बार डिप्रेशन इस कदर बढ़ जाता है कि प्रेम में हारा हुआ इंसान जाने-अनजाने में ग़लत कदम उठाने की तरफ़ भी बढ़ जाता है. ख़ुद का अहित करने से भी नहीं हिचकते.
  • अक्सर टूटे दिलवाले लोग नशे में ग़म को भूलाने की कोशिश करने लगते हैं. शराब, सिगरेट, ड्रग्स आदि लेना शुरू कर देते हैं. ताकि ख़ुद को भुलाए रखें.. उसका ख़्याल ना आए..

यह भी पढ़ें: इस प्यार को क्या नाम दें: आज के युवाओं की नजर में प्यार क्या है? (What Is The Meaning Of Love For Today’s Youth?)

  • एकतरफ़ा प्यार आपके आत्मविश्‍वास पर चोट करता है और उसे बुरी तरह से प्रभावित करता है. जब आप अपने प्यार को नहीं पाते हैं या वह आपको नहीं प्यार करता है.. इस सोच के कारण कहीं-न-कहीं आपका कॉन्फिडेंस लेवल गिरने लगता है.
  • अक्सर ऐसा भी होता है कि उसे पाने की कोशिश में अपने आत्मसम्मान को भी ताक पर रख देते हैं, जिससे आपका स्वाभिमान भी प्रभावित होने लगता है.
  • उपेक्षाओं और अपेक्षाओं के बीच दिल और मन झूलने लगता है. अपने प्यार की उपेक्षा से कहीं-न-कहीं हीनभावना भी पनपने लगती है.
  • प्यार को पाने की कोशिशें असफल होने के कारण कई बार ख़ुद को कम आंकने, नाक़ाबिल समझने की सोच जन्म लेने लगती है.
  • ख़ुदा ना खास्ता जिसे आप चाह रहे और वो किसी और को प्रेम कर रहा या रही है, तब कई बार स्तिथि हिंसक भी हो जाती है. अपने प्यार को पाने का जुनून अक्सर ग़लत भी करवा देता है.
  • अपनों में रहकर भी बेगाने जैसी स्थिति होती है. कुछ भी अच्छा नहीं लगता. अकेले रहने का मन करने लगता है.
  • ज़िंदगी के प्रति बेरुखी-सी हो जाती है. सब कुछ सुना और अधूरा-सा लगने लगता है.
  • किसी काम में मन नहीं लगता. इच्छाएं और ख़ुशी जैसे गुम-सी हो जाती है.
  • बार-बार उस शख़्स का ख़्याल दिलोंदिमाग़ पर हावी रहता है, जिससे कोई भी काम ठीक से नहीं हो पाता. * चाहे ऑफिस हो या बिज़नेस उसे लेकर उतनी गंभीरता नहीं रहती, क्योंकि मन तो अपने प्यार को पाने के जोड़-तोड़ में लगा रहता है.
  • हर घड़ी प्यार के एहसास की लहरें उठती रहती हैं, जिससे किसी भी काम में एकाग्र भी नहीं हो पाते.
  • वैसे इन मामलों में अपवाद भी देखने को मिले हैं यानी कोई टूटकर भी निखर जाता है, तो कोई टूटकर बिखर जाता है.
  • कई बार अपने इस एकतरफ़ा प्यार को प्रेरणा या आदर्श मानते हुए कुछ कामयाबी की बुलंदियों तक पहुंच जाते हैं, तो कुछ असफल होकर दुखी और ग़मगीन ही बने रहते हैं.

सिनेमा में एकतरफ़ा प्यार का दर्द
फिल्मों में भी एकतरफ़ा प्यार को काफ़ी दिखाया गया है. इस फ़ेहरिस्त में देवदास फिल्म को हमेशा याद किया जाता है. देवदास फिल्म में पारो और चंद्रमुखी के बीच देवदास के प्यार को लेकर भले ही खींचतान हो, लेकिन चंद्रमुखी का एकतरफ़ा प्यार इतिहास बन जाता है. लोगों को हमेशा उसके प्रति सहानुभूति से भर देता है. फिल्म ऐ दिल है मुश्किल तो एकतरफ़ा प्यार पर ही आधारित थी. रणबीर कपूर, अनुष्का शर्मा और ऐश्वर्या राय बच्चन की उम्दा अदाकारी फिल्म की जान थी. इसमें एकतरफ़ा प्यार के दर्द, तड़प, अनकहे एहसास, सोच को बख़ूबी दर्शाया गया था. इसके अलावा मुकद्दर का सिकंदर, प्यार तूने क्या किया, मस्ती जैसी फिल्मों में भी एकतरफ़ा प्यार के एहसास को दिखाने की बेहतरीन कोशिश की गई है.

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वैसे देखा जाए तो प्यार में प्रभाव, अभाव, नफ़ा-नुक़सान नहीं होता है. प्यार तो बस प्यार होता है. अब इस एहसास को आप कैसे जीते हैं, कैसे अपनाते हैं, सब कुछ आप पर निर्भर करता है. चाहे तो अपने एकतरफ़ा प्यार को अपना जुनून बनाकर आगे बढ़ जाए या फिर निराशा के गर्त में चले जाएं. ये सब कुछ व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है. तो क्यों ना इसके साइड इफेक्ट्स को पाॅजिटिवनेस में बदलकर मिसाल कायम कर बेमिसाल बना जाए.

– ऊषा गुप्ता

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Usha Gupta

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