Others

कहानी- अभिनेत्री का पति (Short Story – Abhinetri Ka Pati)

  
– पूनम अहमद
‘कहीं पढ़ा था, हर नारी स्वभाव से एक अभिनेत्री होती है… हां, यह सच ही है. पर यह कितनी बड़ी बात है न! अपने पति, अपने बच्चों की हर बुराई, हर कमज़ोरी, अपनी परेशानियां, अपने दुख दूसरों के सामने प्रकट न होने देना आसान तो नहीं है.’

संडे था, इसलिए मैं आराम के मूड में था. सुबह साढ़े सात बजे उठकर मैं और माया चाय पीते हुए पेपर पढ़ रहे थे. माया का चेहरा उतरा हुआ था. मैंने पूछा, “क्या हुआ? बहुत सुस्त लग रही हो?” “आज तो सुबह से ही कमरदर्द है, पूरा दिन पड़ा है, कैसे कटेगा?”
मुझे दुख हुआ, माया अक्सर कमरदर्द से परेशान रहती है. मैंने कहा, “चाय पीकर थोड़ा आराम कर लो, लेट जाना.”
“नहीं, आराम क्या करना, नाश्ते की तैयारी करनी है.”
“रहने दो, मैं बाहर से कुछ ले आऊंगा.”
“ठीक है, तनु-मनु उठेंगे तो ले आना.” कहकर माया उठ गई. उसकी चाल से ही मुझे समझ में आ रहा था कि वह तकलीफ़ में है. हमारे युवा बच्चे तन्वी और मानव तो संडे को नौ बजे से पहले उठते ही नहीं हैं, सो मैं पेपर पढ़ने लगा. अचानक मेरा मोबाइल बज उठा. अंधेरी में रहनेवाली मेरी बुआ का फोन था, “विनय, हम दो घंटे में आ रहे हैं, बहुत दिन हो गए मिले हुए, आज का संडे तुम लोगों के साथ.”
“अच्छा है, आ जाइए, बहुत दिन हो गए…” मैंने कह तो दिया, पर थोड़ा परेशान हुआ कि माया का क्या होगा? उस पर तो बहुत काम आ जाएगा आज, वैसे ही बेचारी आज सुबह से दर्द से परेशान है. मैं बेडरूम में गया, माया हॉटबैग से कमर की सिंकाई कर रही थी, उसे बुआ के आने का बताया, तो उसके चेहरे का रंग उड़ गया. “ओह! उन्हें भी आज ही आना था. अब दिनभर नचाएंगी मुझे. आप बोल देते कि हमें कहीं बाहर जाना है.”
“उन्होंने हमेशा की तरह मुझे कुछ बोलने का मौक़ा ही कहां दिया.” मेरा भी मूड थोड़ा ख़राब हुआ था. बुआ-फूफाजी जब भी आते हैं, हम लोग पूरा दिन उनके इशारों पर नाचते हैं. इकलौती बुआ हैं, तो बहुत ही नकचढ़ी और ग़ुस्सैल हैं. ऊपर से खाने-पीने के सौ नखरे. तबीयत ठीक हो, तो इंसान ऐसे लोगों को झेल भी ले, पर माया तो ख़ुद ही ठीक नहीं है. माया बिस्तर से खड़ी हो चुकी थी. बोली, “तनु-मनु को उठा दो, नहीं तो बच्चों का लाइफस्टाइल देखकर मुझे चार ताने मारेंगी.”
तनु-मनु उठकर मुंह बनाते हुए नहाने-धोने में व्यस्त हो गए. मैं बाहर से कुछ नाश्ता ले आया, ताकि माया की कुछ मदद हो सके. अभी उसे लंच तैयार करना ही है.
बुआ-फूफाजी आ गए, अचानक माया बहुत ख़ुश और उत्साहित नज़र आने लगी. उनके पैर छूते हुए बोली, “आप लोग इस बार बहुत दिन बाद आए, यह ठीक नहीं है. एक शहर में रहते हुए भी आपने यहां आने का समय नहीं निकाला. हमारा और कौन है यहां आपके सिवा.” बुआ ने माया को गले लगा लिया. “तेरा यही व्यवहार तो हमें खींच लाता है यहां.” माया ने उनके गले में बांहें डाल दीं. “जल्दी-जल्दी आया करो न बुआजी.”
“ठीक है, अब जल्दी आया करेंगे.”  माया उनकी आवभगत में लग गई, हंसती-मुस्कुराती दौड़-दौड़कर काम करती हुई. मैं हमेशा की तरह इस बात पर हैरान ही था. मैंने किचन में जाकर धीरे से कहा, “तुम्हें दर्द है ना? क्यों इतनी चुस्ती-फुर्ती दिखा रही हो? आराम से बैठ जाओ, उन्हें बता देता हूं तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है.”
“नहीं, कोई ज़रूरत नहीं. पिछली बार बताया था तो ठीक था, हर बार थोड़े ही उन्हें अपना दर्द बताती रहूंगी. दूसरों के सामने क्या अपनी तकलीफ़ का ढिंढोरा पीटना. सोचेंगी यह तो बीमार ही रहती है.” मैं बहुत कुछ सोचता हुआ उन लोगों के साथ बातें करता रहा. तनु-मनु तो थोड़ी देर साथ बैठकर अपने रूम में लैपटॉप व फोन पर व्यस्त हो गए. बीच-बीच में आकर शक्ल दिखा जाते. माया का बनाया हुआ शानदार लंच खाकर बुआ वाह-वाह करती रहीं. मैं देख रहा था, माया से चेयर पर बैठा भी नहीं जा रहा है. उसने थोड़ा-सा खाकर किचन में जाकर पेनकिलर लिया. वह कभी बैठ रही थी, कभी खड़ी हो रही थी. अपनी पसंद के पकौड़े और शाम की चाय पीकर बुआ-फूफाजी चले गए.
जो माया इतनी देर से फिरकी की तरह घूम रही थी, उनके जाते ही बिस्तर पर ढह गई. मैं और बच्चे उसके पास बैठे, तो दर्द के कारण माया सिसक उठी. बच्चे भी उदास हो गए. तनु ने कहा, “मॉम, क्या ज़रूरत थी इतना करने की, कुछ बाज़ार से मंगवाकर खिला देतीं.” माया सुबकते हुए बोली, “वे बाज़ार का कहां कुछ पसंद करते हैं, थोड़ी भी कमी रह जाती, तो चार रिश्तेदारों में बुआजी बुराई करती हैं.”
तनु ने कहा, “मॉम, बस अब आप आराम करना, मैं सब समेट लूंगी, खाना भी बचा है, सब वही खा लेंगे.”
मैंने भी कहा, “हां, बस अब तुम मत उठना.” थोड़ी देर में बच्चे उठकर चले गए. माया आंखें बंद कर चुपचाप लेटी थी. आज मैं उसके बगल में लेटा हुआ बहुत कुछ सोचने लगा… कई बार मुझे लगता है कि मैं एक अभिनेत्री का पति हूं. कितने ही उदाहरण मेरी आंखों के आगे घूमने लगे. पिछले दिनों ही तो माया एक दिन किसी बात पर तनु-मनु को डांट रही थी, तो डांटते हुए रोती भी जा रही थी. अचानक डोरबेल बजी थी, तो फटाफट मुंह धोकर बालों में कंघी फेरकर दरवाज़ा खोलकर मुस्कुराते हुए अपनी पड़ोसन कविता को अंदर लाकर बातें करने लगी थी. तनु-मनु तो हैरान खड़े थे, जब मीठे-से स्वर में माया तनु-मनु से बातें करने लगी थी और कविता को बता रही थी कि दोनों उसका कितना कहना मानते हैं. मैं माया का बदला रूप देखकर हैरान होता रहा था और मेरी वह सहकर्मी सरिता, जिसके उच्छृंखल स्वभाव से माया बुरी तरह चिढ़ती है, किसी मौ़के पर सबके साथ उसके घर आने पर किस तरह उसका हंसी-ख़ुशी स्वागत करती है.
माया स्वभाव से ख़ुशमिज़ाज व मिलनसार स्त्री है. उसकी बहुत-सी सहेलियां हैं, पर उनमें से किसी के खुले स्वभाव के रसिक पति से किस तरह फ़ौरन एक दूरी बनाकर गंभीरता का मुखौटा ओढ़ लेती है… मायके में, ससुराल में कितने ही रिश्तेदारों को नापसंद करने के बावजूद उनसे मिलने पर किस तरह सहजता से व्यवहार रखती है, यह तारीफ़ की बात है!
आज कितनी ही घटनाएं मेरी आंखों के सामने घूम रही हैं… और एक बात याद आ रही है, मैं अपने ऑफिस के किसी काम की टेंशन में बेवजह उस पर चिल्ला पड़ा था. ग़लती मेरी ही थी. उसकी आंखें भर आई थीं. मुझे बहुत दुख हुआ था, मैंने जब ‘सॉरी’ कहा, तो वह रो ही दी थी. उसी समय उसके मोबाइल पर उसकी बड़ी बहन का फोन आया, तो मैं हैरान रह गया, जब उसकी आंखें तो नम थीं, पर वह हंस-हंसकर अपनी बहन से मेरी बात करते हुए चहक उठी थी. मैं हतप्रभ था, अपने ऊपर और शर्म आई थी. सच में ऐसा महसूस हो रहा है कि जैसे मैं किसी अभिनेत्री का पति हूं, जो अक्सर अपने मनोभावों को छुपाकर अपनी इच्छा-अनिच्छा चेहरे पर प्रकट नहीं होने देती. याद आ रहा है… कहीं पढ़ा था, हर नारी स्वभाव से एक अभिनेत्री होती है… हां, यह सच ही है. पर यह कितनी बड़ी बात है न! अपने पति, अपने बच्चों की हर बुराई, हर कमज़ोरी, अपनी परेशानियां, अपने दुख दूसरों के सामने प्रकट न होने देना आसान तो नहीं है. मुझे तो किसी बात पर ग़ुस्सा आ रहा होता है, तो फ़ौरन मेरे चेहरे से पता चल जाता है कि कुछ मेरी इच्छा के बिना हुआ है. पर माया के हंसते चेहरे से तो पता ही नहीं चलता कि वह किस परेशानी में है. आज माया के बारे में सोचते हुए मेरा मन माया जैसी अन्य स्त्रियों के प्रति भी आदर से भर उठा है, जो अपने मनोभावों पर पूरा नियंत्रण रखते हुए अपने सुख-दुख अपने तक ही सीमित रखती हैं, अब तक तो मैं हल्के-फुल्के ढंग से सोचता था कि मैं किसी अभिनेत्री का पति हूं, पर आज तो इस बात पर गर्व हो रहा है.

 

अधिक शॉर्ट स्टोरीज के लिए यहाँ क्लिक करें – SHORT STORIES

Meri Saheli Team

Share
Published by
Meri Saheli Team
Tags: Story

Recent Posts

लघुकथा- असली विजेता (Short Story- Asli Vijeta)

उनके जाने के बाद उसने दुकान को पूर्ववत ही संभाल रखा था.. साथ ही लेखिका…

April 13, 2024

त्यामुळे वेळीच अनर्थ टळला, सयाजी शिंदेंच्या प्रकतीत सुधारणा ( Sayaji Shinde Share Video About His Health Update)

माझी प्रकृती व्यवस्थित : अभिनेते सयाजी शिंदे सातारआता काळजी करण्यासारखं काही कारण नाही, असे आवाहन…

April 13, 2024

बक्षीसाचे ३० लाख रुपये कुठेयेत ? मनीषा राणीने सांगितलं रिॲलिटी शो ‘झलक दिखला जा ११’जिंकल्यानंतरचा खर्च (Manisha Rani Not Received Winning Prize Of Jhalak Dikhhla Jaa 11 )

मनीषा राणीला 'क्वीन ऑफ हार्ट्स' म्हणूनही ओळखले जाते. तिने आपल्या चाहत्यांची मनंही जिंकून घेतली. तिचा…

April 13, 2024
© Merisaheli