लघुकथा – वफादार कुत्ता (Short Story- Wafadar Kutta)

"आंटी, राहुल बाबा भी रोज़ सुबह दूध पीते हैं और शैंकी को दूध-रोटी देते समय मेरे मन में भी दूध पीने का लालच आ गया.…

“आंटी, राहुल बाबा भी रोज़ सुबह दूध पीते हैं और शैंकी को दूध-रोटी देते समय मेरे मन में भी दूध पीने का लालच आ गया. रसोई में कोई नही था. मैंने एक ग्लास में दूध निकाला. पीने ही जा रहा था कि अचानक ही मालिक आ गए…”
वो सिर झुकाए ही बोलता जा रहा था.
“ओह!” एक गहरी सांस निकल गई रश्मि के मुंह से.
आंखें भर आईं.

रश्मि जब किसी कार्यवश बाहर जाने को निकली, तो पड़ोस का दरवाज़ा हल्का-सा खुला हुआ था और रोने की आवाज़ें आ रही थी. वो अपनी उत्सुकता न रोक सकी और थोड़ा ओट में होकर माजरा जानने की कोशिश की.
ये दिनेश की आवाज़ थी, “नही मालिक, नही! नही!”
वो हाथ जोड़ कर रोए जा रहा था, “भूख लगी थी…”
“अबे साले! तो हम क्या तुझे भूखा रखते हैं? इल्ज़ाम लगाता है, किस बात की कमी रखी?”
और फिर दो थप्पड़ों की आवाज़.
“तुमसे वफादार तो शैंकी है (घर का पालतू कुत्ता).”
“मालिक अब नही चोरी करूंगा.” दिनेश की आवाज़.
करुणा से भरी रश्मि अपना कार्य करने चल दी.
रास्तेभर और लौट कर भी दिनेश ही उसके दिमाग़ मे छाया रहा.
बेचारा!..
पति से शेयर करने की कोशिश की, पर आधी बात सुनकर ही उन्होंने कहा, “हमारे कहने से कुछ नही होने वाला और जानती तो हो, इन महानगरों में अपने पड़ोसी को भी कोई नही जानता.”
सच ही तो कह रहे थे. कितना जानती थी वो अपने पड़ोस के बारे में?
सिवा इसके कि आमना-सामना होने पर एक प्लास्टिक-सी मुस्कान का आदान-प्रदान.

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उनके घर में एक ऊंचा सा कुत्ता पाला हुआ था और रश्मि को कुत्ते सख्त नापसंद थे. वो हर समय भौंकता रहता.
अगले दिन दिनेश उसे फिर मिल गया
13-14 वर्ष की आयु का दिनेश, उदास सा दुकान से कुछ सामान लेकर लौट रहा था.
“दिनेश!” उसने आवाज़ दी.
“जी आंटी.”
“दिनेश, कल क्या हुआ था?”
“कुछ नही आंटी.”
“बता तो, हो सकता है मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकूं.”
“आंटी, राहुल बाबा भी रोज़ सुबह दूध पीते हैं और शैंकी को दूध-रोटी देते समय मेरे मन में भी दूध पीने का लालच आ गया. रसोई में कोई नही था. मैंने एक ग्लास में दूध निकाला. पीने ही जा रहा था कि अचानक ही मालिक आ गए…”
वो सिर झुकाए ही बोलता जा रहा था.
“ओह!” एक गहरी सांस निकल गई रश्मि के मुंह से.
आंखें भर आईं.
एक हफ़्ता बीत गया और स्थितियां सामान्य होती दिख रही थी, पर आज भी पड़ोस के मकान में हलचल थी. सब भागते-दौड़ते नज़र आए.
दिनेश दिखा. उसने भी जल्दी-जल्दी मेरी ओर मुंह घुमाकर दो-तीन वाक्य बोले और लिफ्ट की ओर भाग लिया.
“आंटीजी, आज मालिक पता नही कैसे शैंकी को खाना देना भूल गए. रोज़ वही देते हैं.
ऐसे में राहुल बाबा उसके पास पहुंच गए और शैंकी ने उसे काट लिया…
अब इंजेक्शन दिलवाने ले जा रहे है…”
“ओह! वफादार कुत्ता शैंकी…” रश्मि के मुंह से निकला.

– रश्मि सिन्हा


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Photo Courtesy: Freepik

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Published by
Usha Gupta

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