कृष्ण की माखनचोरी हो, गर्भावस्था में मंत्रों का प्रभाव या पीपल के पेड़ की पूजा… जानें ऐसी 10 मान्यताओं के पीछे क्या हैं हेल्थ व विज्ञान से जुड़े कारण! (10 Amazing Scientific Reasons Behind Hindu Traditions)

खड़ाऊ पहनें और स्वस्थ रहें... खड़ाऊ हमारी संस्कृति का हिस्सा है, लेकिन इसके हेल्थ बेनीफिट्स भी हैं. खड़ाऊ से रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है, पैरों केएक्युप्रेशर पॉइंट्स पर प्रेशर पड़ता है, जिससे रक्त संचार संतुलित रहता है. साथ ही यह पैरों की मांसपेशियों को भीरिलैक्स करता है.  क्या आप जानते हैं पैरों में बिछिया पहनने से बढ़ती है फर्टिलिटी यह नसों व प्रेशर पॉइंट्स को दबाती है, जिससे यूटेरस, ब्लैडर व आंतों में रक्त प्रवाह तेज़ होता है. इससे मासिक धर्म भीनियमित होता है और प्रजनन क्षमता भी बढ़ती है.  एक गोत्र में विवाह न करने के पीछे छिपा है सेपरेशन ऑफ जींस का विज्ञान! हिंदू धर्म में एक गोत्र में शादी करना वर्जित है, ताकि जींस विभाजित रहें. जेनेटिक व कई गंभीर रोगों से बचना है, तो साइंसकहता है सेपरेशन ऑफ जींस ज़रूरी है. यही वजह है कि हिंदू धर्म में नज़दीकी रिश्तेदारों में शादी नहीं की जाती, ताकिसेपरेशन ऑफ जींस का सिद्धांत बना रहे.  गर्भावस्था के दौरान मंत्रों का प्रभाव... मंत्रों को सुनना गर्भस्थ शिशु के विकास में काफ़ी सहायक होता है. 23वें हफ़्ते के बाद गर्भस्थ शिशु कुछ आवाज़ों परप्रतिक्रिया भी करना शुरू कर देते हैं. ऐसे में मंत्रों को सुनने से व भक्तिमय वंदना से शिशु के मस्तिष्क का विकास तेज़ी सेहोता है.  कानों में छेद करवाने से बौद्धिक क्षमता व बोलने की शक्ति का होता है विकास... हिंदू धर्म में लड़कियों के ही नहीं, लड़कों के भी कानों को छिदवाने का रिवाज़ था. इससे कानों से होकर मस्तिष्क तकजानेवाले नस का रक्त संचार नियंत्रित रहता है, जिससे सोचने की शक्ति व बोलने की क्षमता बेहतर होती है.  ज़मीन पर बैठकर भोजन करना होता है स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद पालथी मारकर बैठना एक तरह का योगासन माना जाता है, जिससे मस्तिष्क शांत व पाचन क्रिया बेहतर होती है.  भोजन से पहले तीखा, अंत में मीठा क्यों? धार्मिक अनुष्ठानों में भोजन से पहले तीखा और अंत में मीठा खाने की परंपरा है. इससे पाचन तंत्र ठीक से काम करता है. अंत में मीठे से पेट में जलन नहीं होती और एसिड का असर कम होता है.  चम्मच की जगह हाथों से भोजन करना है बेहद फ़ायदेमंद हाथों की उंगलियां पंच तत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं. जब हम हाथों से भोजन ग्रहण करते हैं, तो ये तत्व सक्रिय हो जातेहैं और शरीर में इनका संतुलन बेहतर होता है. पीपल के पेड़ की पूजा का ये है वैज्ञानिक कारण... हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को पूजनीय व पवित्र माना जाता है, क्योंकि पीपल का पेड़ 24 घंटे ऑक्सीजन रिलीज़ करता हैऔर वातावरण शुद्ध करने में अहम् भूमिका निभाता है. अधिकतर पेड़ दिन में कार्बनडाइऑक्साइड लेकर ऑक्सीजनरिलीज़ करते हैं, लेकिन रात के समय यह प्रक्रिया उलट जाती है. श्री कृष्ण की माखनचोरी के पीछे था हेल्थ से जुड़ा यह कारण... श्री कृष्ण को माखनचोर भी कहा जाता है, क्योंकि माखन उनको व तमाम बच्चों को प्रिय था. दरअसल, इसके पीछे कारणयह है कि माखन, दूध व दही आदि बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद ज़रूरी हैं और बचपन से ही उन्हें यह खाना चाहिए, ताकि उनकी सेहत अच्छी हो, इम्यूनिटी बेहतर हो और वो बलशाली बनें! - बिट्टू शर्मा…

खड़ाऊ पहनें और स्वस्थ रहें…

खड़ाऊ हमारी संस्कृति का हिस्सा है, लेकिन इसके हेल्थ बेनीफिट्स भी हैं. खड़ाऊ से रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है, पैरों केएक्युप्रेशर पॉइंट्स पर प्रेशर पड़ता है, जिससे रक्त संचार संतुलित रहता है. साथ ही यह पैरों की मांसपेशियों को भीरिलैक्स करता है. 

क्या आप जानते हैं पैरों में बिछिया पहनने से बढ़ती है फर्टिलिटी

यह नसों व प्रेशर पॉइंट्स को दबाती है, जिससे यूटेरस, ब्लैडर व आंतों में रक्त प्रवाह तेज़ होता है. इससे मासिक धर्म भीनियमित होता है और प्रजनन क्षमता भी बढ़ती है. 

एक गोत्र में विवाह न करने के पीछे छिपा है सेपरेशन ऑफ जींस का विज्ञान!

हिंदू धर्म में एक गोत्र में शादी करना वर्जित है, ताकि जींस विभाजित रहें. जेनेटिक व कई गंभीर रोगों से बचना है, तो साइंसकहता है सेपरेशन ऑफ जींस ज़रूरी है. यही वजह है कि हिंदू धर्म में नज़दीकी रिश्तेदारों में शादी नहीं की जाती, ताकिसेपरेशन ऑफ जींस का सिद्धांत बना रहे. 

गर्भावस्था के दौरान मंत्रों का प्रभाव…

मंत्रों को सुनना गर्भस्थ शिशु के विकास में काफ़ी सहायक होता है. 23वें हफ़्ते के बाद गर्भस्थ शिशु कुछ आवाज़ों परप्रतिक्रिया भी करना शुरू कर देते हैं. ऐसे में मंत्रों को सुनने से व भक्तिमय वंदना से शिशु के मस्तिष्क का विकास तेज़ी सेहोता है. 

कानों में छेद करवाने से बौद्धिक क्षमता व बोलने की शक्ति का होता है विकास…

हिंदू धर्म में लड़कियों के ही नहीं, लड़कों के भी कानों को छिदवाने का रिवाज़ था. इससे कानों से होकर मस्तिष्क तकजानेवाले नस का रक्त संचार नियंत्रित रहता है, जिससे सोचने की शक्ति व बोलने की क्षमता बेहतर होती है. 

ज़मीन पर बैठकर भोजन करना होता है स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद

पालथी मारकर बैठना एक तरह का योगासन माना जाता है, जिससे मस्तिष्क शांत व पाचन क्रिया बेहतर होती है. 

भोजन से पहले तीखा, अंत में मीठा क्यों?

धार्मिक अनुष्ठानों में भोजन से पहले तीखा और अंत में मीठा खाने की परंपरा है. इससे पाचन तंत्र ठीक से काम करता है. अंत में मीठे से पेट में जलन नहीं होती और एसिड का असर कम होता है. 

चम्मच की जगह हाथों से भोजन करना है बेहद फ़ायदेमंद

हाथों की उंगलियां पंच तत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं. जब हम हाथों से भोजन ग्रहण करते हैं, तो ये तत्व सक्रिय हो जातेहैं और शरीर में इनका संतुलन बेहतर होता है.

पीपल के पेड़ की पूजा का ये है वैज्ञानिक कारण…

हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को पूजनीय व पवित्र माना जाता है, क्योंकि पीपल का पेड़ 24 घंटे ऑक्सीजन रिलीज़ करता हैऔर वातावरण शुद्ध करने में अहम् भूमिका निभाता है. अधिकतर पेड़ दिन में कार्बनडाइऑक्साइड लेकर ऑक्सीजनरिलीज़ करते हैं, लेकिन रात के समय यह प्रक्रिया उलट जाती है.

श्री कृष्ण की माखनचोरी के पीछे था हेल्थ से जुड़ा यह कारण…

श्री कृष्ण को माखनचोर भी कहा जाता है, क्योंकि माखन उनको व तमाम बच्चों को प्रिय था. दरअसल, इसके पीछे कारणयह है कि माखन, दूध व दही आदि बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद ज़रूरी हैं और बचपन से ही उन्हें यह खाना चाहिए, ताकि उनकी सेहत अच्छी हो, इम्यूनिटी बेहतर हो और वो बलशाली बनें!

– बिट्टू शर्मा

यह भी पढ़ें: समय के महत्व को समझें, क्योंकि गुज़रा हुआ व़क्त लौटकर नहीं आता (Master Your Life Through Time, Lost Time Is Never Found Again)

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Published by
Geeta Sharma

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