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90 के दशक की ये फिल्में, जिनके गाने व डायलॉग्स आज भी लोगों के ज़ुबान पर हैं (Best And Memorable Bollywood Movies From 90’s Era)

आज के समय में जब लोगों की टीवी मोबाइल में सिमट गई है और वेब सीरीज़ के सभी दीवाने हो रहे हैं, उस समय में…

आज के समय में जब लोगों की टीवी मोबाइल में सिमट गई है और वेब सीरीज़ के सभी दीवाने हो रहे हैं, उस समय में भी मुझे 90 के दशक का बॉलीवुड का वो दौर याद आ रहा है, जब एक-एक फिल्म का क्रेज़ कई-कई हफ्तों तक बना रहता था. फिल्मों के डायलॉग्स, गाने और सीन्स पर लोग चर्चे किया करते थे. अगर आप भी 90 के दशक में पैदा हुए हैं, तो आपको भी इन फिल्मों के सीन टु सीन याद होंगे. आइए याद करें, बॉलीवुड के उस सुनहरे दौर को और एक बार फिर जी लें वो हंसता-मुस्कुराता 90 का दशक.

अंदाज़ अपना-अपना

 

‘ये फिरौती की रक़म है या मय्यत का चंदा…’ ‘मैं तेजा हूं मार्क इधर है…’ ‘सब कुछ टाइम पर होना चाहिए…’ ‘क्राइम मास्टर गोगो, आंखें निकालकर गोटियां खेलता हूं…’ आ गई ना आपको भी हंसी. ये डायलॉघ्स हैं ही इतने बेहतरीन की एक बार जो फिल्म देख ले, कभी भूल नहीं सकता. इइ फिल्म की सबसे ख़ास बात यही है कि इसे आप कितनी भी बार देख लें, कभी बोर नहीं होते. हर बार वही गुदगुदी महसूस होती है.

यह फिल्म आज तक की क्लासिक कॉमेडी में सबसे बेहतरीन मानी जाती है. जहां फिल्म का हर डायलॉग पंच हो, गानें इतने पेपी कि ज़ुबान पर चढ़ जाए और डायरेक्शन से लेकर स्क्रीनप्ले तक सब कुछ बेमिसाल हो. आमिर ख़ान, सलमान ख़ान, परेश रावल, शक्ति कपूर, करिश्मा कपूर, रवीना टंडन जैसे कलाकारों ने फिल्म में बेहतरीन अभिनय का प्रदर्शन किया है. महमूद, गोविंदा और जूही चावला का गेस्ट अपीयरेंस भी काफ़ी दिलचस्प है. फिल्म के गाने- ये रात और ये दूरी, ये लो जी सनम हम आ गए… आज भी लोग गुनगुनाते हैं.

आपको बता दें कि तीन करोड़ के बजट में बनी यह फिल्म तीन साल में पूरी हुई थी. इस फिल्म का मुहूर्त शॉट क्रिकेटर सचिन टेंडुलकर ने किया था. राजकुमार संतोषी की इस फिल्म को दोबारा रिक्रिएट करने की बात हो रही है, पर इस फिल्म के जादू को दोबारा क्रिएट करना क्या मुमकिन है?

हम हैं राही प्यार के

‘पल भर में हो जाएगी हर मुश्किल आसान…’ याद आया आपको इस फिल्म का ये टाइटल सॉन्स, जी हां, आप सचमुच 90 के दशक के मनोरंजन प्रेमी हैं. महेश भट्ट के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म आज भी उतना ही हंसाती है, जितने पहली बार देखनेवालों को. ‘घूंघट की आड़ में दिलबर का दीदार अधूरा लगता है… काश कोई लड़का मुझे प्यार करता, वो मेरी नींद मेरा चैन मुझे लौटा… बंबई से गई पूना… आज भी लोगों को ज़बानी याद हैं. इस फिल्म का जादू ही कुछ ऐसा है कि आज भी जब फिल्म टीवी पर आती है, तो आप चैनल बदल नहीं सकते.

फिल्म के डायलॉग्स- ‘कभी-कभी बच्चों को समझने के लिए ख़ुद बच्चा बनना पड़ता है…’ ‘यही तो प्रॉब्लम है आजकल के यंग लोगों के साथ…’ बेहतरीन हैं. मामा को परेशान करते तीन प्यारे बच्चे, घर से भागी हुई एक लड़की और अपने जीजा का बिज़नेस संभालने के लिए स्ट्रगल करनेवाला एक यंग लड़का… कहानी जितनी दिलचस्प है, किरदार उतने ही मज़ेदार… इस फिल्म ने 90 के दशक में हर किसी कोे यकीनन कई सुनहरी यादें दी हैं.

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चाची 420

‘लक्ष्मी चाची’ बनकर कमल हसन ने हर बच्चे का दिल जीत लिया था. अपनी पत्नी को वापस लाने और बेटी के साथ कुछ समय बिताने के लिए एक कोरियोग्राफर किस तरह नैनी बन जाता है, काफ़ी मज़ेदार है. हालांकि फिल्म की कहानी बहुत अलग नहीं थी, पर इसके डायलॉग्स और कॉमेडी क्लासिक है.

यह तमिल फिल्म ‘अवई शानमुघी’ का हिंदी रीमेक है. कमल हसन के अलावा तब्बू, अमरीश पुरी, जॉनी वॉकर, परेश रावल, आयशा जुल्का, नासर और फातिमा सना शेख की ज़बर्दस्त एक्टिंग है. ‘चुपड़ी-चुपड़ी चाची, चुपड़ी-चुपड़ी चाची…, ‘दौड़ा-दौड़ा भागा-भागा-सा…’ डायलॉग्स- ‘लक्ष्मी का पति कौन है?’ ‘क़ानून शादी को तोड़ सकता है, प्यार को नहीं…’ यादगार बन गए हैं.

मिस्टर एंड मिसेज़ खिलाड़ी

‘अकेला है मिस्टर खिलाड़ी, मिस खिलाड़ी चाहिए…’ ‘जब नौकरी मिलेगी तो क्या होगा…’ जैसे गाने आज भी उस दौर की याद दिलाते हैैं. अक्षय कुमार, जूही चावला, कादर ख़ान, सतीश कौशिक, परेश रावल का ज़बर्दस्त अभिनय और डेविड धवन का दमदार डायरेक्शन इस रोमांटिक कॉमेडी फिल्म की जान हैं. इस फिल्म का पेपी सॉन्ग ‘जब तक रहेगा समोसे में आलू…’ किसी आइटम नंबर से कम नहीं हैै.

राजा अपने मामा के कहने में आकर राजा महाराजा बनने के सपने देखने लगता है और सोचता है, जब एक दिन महराजा ही बनना है, तो काम क्यों करूं. एक कामचोर, लापरवाह और ग़ैरज़िम्मेदार व्यक्ति की कहानी हैै, जो अपनी पत्नी को वापस पाने के लिए एक लाख जमा करने का चैलेंज स्वीकार करता है. क्लासिक कॉमेडी फिल्मों में यह फिल्म यकीनन ऊंचे पायदान पर शामिल की जाएगी.

करन-अर्जुन

‘मेरे करन-अर्जुन आएंगे…’ ‘जब मां का दिल तड़पता है ना, तो आसमान में भी दरारें पड़ जाती हैं…’ ‘किस गालों पे नहीं होंठों पे किया जाता है…’ याद हैं आपको ये धमाकेदार डायलॉग्स. मेरे करन-अर्जुन आएंगे, शायद पहला ऐसा डायलॉग होगा, जिसे लोगों ने सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया होगा.

फिल्म के गाने- ये बंधन तो प्यार का बंधन है…’ ‘जाती हूं मैं, जल्दी है क्या…’ ‘एक मुंडा मेरी उम्र का…’ आज भी लोगों को ज़बानी याद हैं. फिल्म का आइटम सॉन्ग- ‘गुप-चुप गुप-चुप, लामा-लामा घूंघट काहे को डाला…’ धमाकेदार है.

राकेश रोशन के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में सलमान ख़ान, शाहरुख ख़ान, राखी, अमरीश पुरी, काजोल, ममता कुलकर्णी, जॉनी लीवर जैसे कलाकारों ने बेहतरीन अभिनय किया है.

– अनीता सिंह

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