पति को ही नहीं, परिवार को अपनाएं, शादी के बाद कुछ ऐसे रिश्ता निभाएं! (Dealing With In-Laws After Marriage: Treat Your In-Laws Like Your Parents)

शादी सिर्फ़ दो लोगों या दो दिलों का संगम ही नहीं होता, बल्कि ये दो परिवार के एक होने का खूबसूरत सफ़र है. सिर्फ़लड़का लड़की ही नहीं, बल्कि दोनों के परिवार भी शादी के बाद एक हो चुके होते हैं. लेकिन अक्सर इस धारणा को जानतेहुए भी मानते और निभाते बहुत कम लोग ही हैं, क्योंकि लड़की को लगता है कि ससुरालवाले उसके पति के रिश्तेदार हैंऔर लड़कों को तो दामाद होने का टैग मिलने के बाद वो खुद को किसी राजा से कम नहीं समझते और पत्नी के परिवारको पूरी तरह अपना पाते. लड़के के घरवालों को भी यही लगता है कि लड़की के परिवार की ही सब जिम्मेदारियां होती हैं, ऐसे में लड़की के घरवालों की समस्याओं से उन्हें क्या लेना-देना…  लेकिन शादी का असली मतलब तो यही होता है जब ये दो परिवार एक होकर एक-दूसरे का मान-सम्मान करें औरमुश्किल वक़्त में एक-दूसरे के साथ खड़े रहें!  आमतौर पर शादी के बाद लड़कियों को नए घर में एडजेस्ट करना होता है, लेकिन इन दिनों ऐसी सोच ज़्यादा हो गई है किलड़कियां एडजेस्टमेंट के लिए तैयार नहीं होती और उनके लिए शादी की परिभाषा सिर्फ़ पति तक ही सीमित होकर रहजाती है और इसीलिए समस्या आती है… बेहतर होगा कि पति को ही नहीं, परिवार को अपनाएं… तभी आपका भविष्यसुरक्षित और जीवन खुशहाल रहेगा…  सबसे पहले तो दिमाग़ से ये बात निकाल दें कि पति के परिवारवाले आपके लिए ग़ैर हैं.जी नहीं, अब वो भी आपके उतने ही अपने हैं जितने आपके पति के. बेहतर होगा सकारात्मक सोच के साथ आप रिश्तों को देखें. शादी के बाद अब पति पर बस आपका ही हक़ है, उनकी भावनाओं से लेकर उनके पैसों तक पर बस अब आपका हीअधिकार है, इस मानसिकता के साथ आप कभी ख़ुशहाल जीवन नहीं जी पाएंगी.ससुराल की हर बात में कमी निकालना और हर बात मायके वालों से शेयर करना ग़लत है. सास को मां का दर्जा देंगी तो वो भी बेटी का प्यार आपको ज़रूर देंगी. ससुर को पिता स्वरूप मानेंगी तो उनका आशीर्वाद हमेशा सिर पर रहेगा.ननद-देवर को भी भाई-बहन की तरह देखें. अपनी चीज़ें उनके साथ शेयर करने से पीछे न हटें. दोस्ती का रिश्ता बनाएंगी तो खुद को अकेला नाहीं पाएंगी.अधिकांश रिश्तों में दरार पैसों व काम की ज़िम्मेदारी को लेकर ही आती है, लेकिन बेहतर होगा कि आप सबमिलकर अपने घर का बजट तैयार करें, जिसमें अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार सबका योगदान हो. काम और ज़िम्मेदारियों का भी चार्ट बना लें और हंसी-ख़ुशी हर कोई अपने हिस्से का काम सम्भाले. एक-दूसरे को चैलेंज करें कि देखते हैं इस हफ़्ते कौन होगा बेस्ट हाउसमेट… चाहें तो वीकेंड पर सबके काम काजायज़ा लेने दें अपने सास-ससुर को और जिसके एफ़र्ट्स सबसे ज़्यादा हों उसको कोई इनाम भी मिले.कोशिश करें कि एक वक़्त का खाना सब साथ मिलकर खाएं. डिनर के बाद आप एक कॉफ़ी डेट रखें जिसमें सभी अपने दिनभर का अनुभव शेयर करें. सबसे ऐसी बॉन्डिंग बनाने की आपकी कोशिश होनी चाहिए कि अपनी तकलीफ़ और दुःख-दर्द वो आपसे शेयरकरने में हिचकें नहीं.सास-ससुर की हेल्थ से लेकर उनके खाने-पीने का ख़ास ध्यान रखकर आप उनकी फ़ेवरेट बन सकती हैं.घरवालों के लिए कभी कुछ स्पेशल बनाएं या उनके साथ पिकनिक पर जाएं. हर वीकेंड के लिए कुछ न कुछ प्लान करें जिससे आप लोगों का लगाव और भरोसा एक-दूसरे के लिए बढ़े.पति से हमेशा शिकायत हि न करें, कोशिश हो कि हमेशा कुछ पॉज़िटिव बात आप कहें. पैसों और घर खर्च को लेकर बहुत ज़्यादा कंजूसी या हस्तक्षेप न करें. बेहतर होगा साथ बैठकर ज़रूरी और ग़ैरज़रूरी ख़र्चों को समझ लें. आजकल वैसे भी सास-बहू का रिश्ता बदल रहा है, अब पहले की तरह सास वाली भूमिका नहि रही, बल्कि दोस्तीका रिश्ता ज़्यादा हो गया है, तो सास से अपने मन की बात, परेशनियां शेयर करें. अगर कोई ऐसी दुविधा आ गई हैजिसका हल नहीं मिल रहा तो सास से सलाह लें. उनको भी महसूस होगा कि आप उनकी सलाह को महत्व देती हैं. सास और ससुर से कहें कि उनका अनुभव और सलाह आपको सही रास्ता दिखा सकता है. कभी-कभी अपनी सास और ननद के साथ शॉपिंग या मूवी प्लान करें, जिसमें सिर्फ़ आप लोग हों और घर के पुरुषोंको कहें कि वो आप लोगों के लिए कुछ अच्छा सा सरप्राइज़ या टेस्टी डिनर तैयार करें. इसी तरह कभी-कभी पुरुषों को बाहर एंजॉय करने को कहें और आप लोग घर पर पार्टी करें. ननद और देवर के लिए बर्थडे पर ही नहीं, वैसे भी गिफ़्ट्स ले आए करें.कोशिश करें कि आपके मायकेवालों के साथ ससुराल वालों के संबंध आपके प्रयास से और बेहतर बनें. अगर आप घर की छोटी बहू हैं तो अपनी जेठानी का भी मान रखें. उन्हें प्यार और सम्मान दें, उनके साथ घरेलू कामोंमें मदद करें. उनके सुख-दुःख को जानें, एक सहेली जैसा बर्ताव करें, ताकि वो आप पर विश्वास करके आपकोसहयोग दें.अगर आप वर्किंग हैं तो जेठानी को भी प्रोत्साहित करें कि वो भी अपने गुणों के आधार पर घर बैठे बहुत कुछ करसकती हैं.अगर वो भी वर्किंग हैं तो आपस में वर्क लाइफ़ डिसकस करें, एक-दूसरे से ईर्ष्या करने से बचें.चाहें तो मिलकर हॉबी क्लास जॉइन करें या वर्क आउट करें. घर के बुजुर्गों को बस आपका थोड़ा सा समय चाहिए होता है, उनके साथ बैठकर उनका हाल जानें. उनकी तबियतक दवाओं का ध्यान रखें. ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ लड़कियों की ही ज़िम्मेदारी बनती है, यही बातें लड़कों पर भी लागू होती हैं कि वो अपनेससुराल वालों के लिए दामाद से ज़्यादा एक बेटे की भूमिका निभाएं. बीच-बीच में खुद फ़ोन करके या घर जाकर सबका हाल चाल जान आएं. किसी तरह की मदद हो तो ज़रूर सहयोग करें. ससुराल में ऐसे बनें सबकी फ़ेवरेट… इसके लिए आपको सबसे पहले अपने मन से तमाम बनी-बनाई धारणाएं निकालनी होंगी.सास और ननद तो बुरी ही होती हैं, जेठानी तो जलनेवाली और साज़िश करनेवाली ही होती है- ये राय पहले से नबना लें.सबका दिल जीतने के लिए कुछ एक्स्ट्रा प्रयास करें.सासू मां को शिकायत का मौक़ा न दें और उनकी पसंद-नापसंद जानने की कोशिश करें. उनसे कुछ कुकिंग टिप्स लें. सलाह लेकर ही हर काम करें. उनकी तारीफ़ करें कि आप कैसे ज़िम्मेदारी से सब संभाल लेती हैं, काश मैं भी कर पाती ऐसा.उनसे दोस्ती करके बाक़ी घरवालों की भी पसंद-नापसंद जानने की कोशिश करें.अपनी जेठानी या पति से भूलकर भी सास या घर के अन्य सदस्य की शिकायत या बुराई न करें.शादी के बाद सिर्फ़ पति को ही खुश करने में न लगी रहीं, बल्कि पूरे परिवार को साथ लेकर चलें.सोच यही रखें कि ये आपके ही परिवारवाले हैं और अब इनके साथ ही आपका जीवन और भविष्य है तो ऐसे में क्योंन इनके लिए कुछ ख़ास किया जाए और क्यों न इनके दिल में अपनी ख़ास जगह बनाई जाए.इस तरह रिश्ता निभाएंगी तो ज़रूर शादी और रिश्तों को कामयाब व बेहतर बना पाएंगी.बिट्टू शर्मा  यह भी पढ़ें: 6 रिलेशनशिप गुरु, जो रिश्ते में दे सकते हैं आपको बेस्ट सलाह( 6 Relationship…

शादी सिर्फ़ दो लोगों या दो दिलों का संगम ही नहीं होता, बल्कि ये दो परिवार के एक होने का खूबसूरत सफ़र है. सिर्फ़लड़का लड़की ही नहीं, बल्कि दोनों के परिवार भी शादी के बाद एक हो चुके होते हैं. लेकिन अक्सर इस धारणा को जानतेहुए भी मानते और निभाते बहुत कम लोग ही हैं, क्योंकि लड़की को लगता है कि ससुरालवाले उसके पति के रिश्तेदार हैंऔर लड़कों को तो दामाद होने का टैग मिलने के बाद वो खुद को किसी राजा से कम नहीं समझते और पत्नी के परिवारको पूरी तरह अपना पाते. लड़के के घरवालों को भी यही लगता है कि लड़की के परिवार की ही सब जिम्मेदारियां होती हैं, ऐसे में लड़की के घरवालों की समस्याओं से उन्हें क्या लेना-देना… 

लेकिन शादी का असली मतलब तो यही होता है जब ये दो परिवार एक होकर एक-दूसरे का मान-सम्मान करें औरमुश्किल वक़्त में एक-दूसरे के साथ खड़े रहें! 

आमतौर पर शादी के बाद लड़कियों को नए घर में एडजेस्ट करना होता है, लेकिन इन दिनों ऐसी सोच ज़्यादा हो गई है किलड़कियां एडजेस्टमेंट के लिए तैयार नहीं होती और उनके लिए शादी की परिभाषा सिर्फ़ पति तक ही सीमित होकर रहजाती है और इसीलिए समस्या आती है… बेहतर होगा कि पति को ही नहीं, परिवार को अपनाएं… तभी आपका भविष्यसुरक्षित और जीवन खुशहाल रहेगा… 

  • सबसे पहले तो दिमाग़ से ये बात निकाल दें कि पति के परिवारवाले आपके लिए ग़ैर हैं.
  • जी नहीं, अब वो भी आपके उतने ही अपने हैं जितने आपके पति के. 
  • बेहतर होगा सकारात्मक सोच के साथ आप रिश्तों को देखें. 
  • शादी के बाद अब पति पर बस आपका ही हक़ है, उनकी भावनाओं से लेकर उनके पैसों तक पर बस अब आपका हीअधिकार है, इस मानसिकता के साथ आप कभी ख़ुशहाल जीवन नहीं जी पाएंगी.
  • ससुराल की हर बात में कमी निकालना और हर बात मायके वालों से शेयर करना ग़लत है. 
  • सास को मां का दर्जा देंगी तो वो भी बेटी का प्यार आपको ज़रूर देंगी. 
  • ससुर को पिता स्वरूप मानेंगी तो उनका आशीर्वाद हमेशा सिर पर रहेगा.
  • ननद-देवर को भी भाई-बहन की तरह देखें. 
  • अपनी चीज़ें उनके साथ शेयर करने से पीछे न हटें. 
  • दोस्ती का रिश्ता बनाएंगी तो खुद को अकेला नाहीं पाएंगी.
  • अधिकांश रिश्तों में दरार पैसों व काम की ज़िम्मेदारी को लेकर ही आती है, लेकिन बेहतर होगा कि आप सबमिलकर अपने घर का बजट तैयार करें, जिसमें अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार सबका योगदान हो. 
  • काम और ज़िम्मेदारियों का भी चार्ट बना लें और हंसी-ख़ुशी हर कोई अपने हिस्से का काम सम्भाले. 
  • एक-दूसरे को चैलेंज करें कि देखते हैं इस हफ़्ते कौन होगा बेस्ट हाउसमेट… चाहें तो वीकेंड पर सबके काम काजायज़ा लेने दें अपने सास-ससुर को और जिसके एफ़र्ट्स सबसे ज़्यादा हों उसको कोई इनाम भी मिले.
  • कोशिश करें कि एक वक़्त का खाना सब साथ मिलकर खाएं. 
  • डिनर के बाद आप एक कॉफ़ी डेट रखें जिसमें सभी अपने दिनभर का अनुभव शेयर करें. 
  • सबसे ऐसी बॉन्डिंग बनाने की आपकी कोशिश होनी चाहिए कि अपनी तकलीफ़ और दुःख-दर्द वो आपसे शेयरकरने में हिचकें नहीं.
  • सास-ससुर की हेल्थ से लेकर उनके खाने-पीने का ख़ास ध्यान रखकर आप उनकी फ़ेवरेट बन सकती हैं.
  • घरवालों के लिए कभी कुछ स्पेशल बनाएं या उनके साथ पिकनिक पर जाएं. 
  • हर वीकेंड के लिए कुछ न कुछ प्लान करें जिससे आप लोगों का लगाव और भरोसा एक-दूसरे के लिए बढ़े.
  • पति से हमेशा शिकायत हि न करें, कोशिश हो कि हमेशा कुछ पॉज़िटिव बात आप कहें. 
  • पैसों और घर खर्च को लेकर बहुत ज़्यादा कंजूसी या हस्तक्षेप न करें. बेहतर होगा साथ बैठकर ज़रूरी और ग़ैरज़रूरी ख़र्चों को समझ लें. 
  • आजकल वैसे भी सास-बहू का रिश्ता बदल रहा है, अब पहले की तरह सास वाली भूमिका नहि रही, बल्कि दोस्तीका रिश्ता ज़्यादा हो गया है, तो सास से अपने मन की बात, परेशनियां शेयर करें. अगर कोई ऐसी दुविधा आ गई हैजिसका हल नहीं मिल रहा तो सास से सलाह लें. उनको भी महसूस होगा कि आप उनकी सलाह को महत्व देती हैं.
  • सास और ससुर से कहें कि उनका अनुभव और सलाह आपको सही रास्ता दिखा सकता है. 
  • कभी-कभी अपनी सास और ननद के साथ शॉपिंग या मूवी प्लान करें, जिसमें सिर्फ़ आप लोग हों और घर के पुरुषोंको कहें कि वो आप लोगों के लिए कुछ अच्छा सा सरप्राइज़ या टेस्टी डिनर तैयार करें. 
  • इसी तरह कभी-कभी पुरुषों को बाहर एंजॉय करने को कहें और आप लोग घर पर पार्टी करें. 
  • ननद और देवर के लिए बर्थडे पर ही नहीं, वैसे भी गिफ़्ट्स ले आए करें.
  • कोशिश करें कि आपके मायकेवालों के साथ ससुराल वालों के संबंध आपके प्रयास से और बेहतर बनें. 
  • अगर आप घर की छोटी बहू हैं तो अपनी जेठानी का भी मान रखें. उन्हें प्यार और सम्मान दें, उनके साथ घरेलू कामोंमें मदद करें. उनके सुख-दुःख को जानें, एक सहेली जैसा बर्ताव करें, ताकि वो आप पर विश्वास करके आपकोसहयोग दें.
  • अगर आप वर्किंग हैं तो जेठानी को भी प्रोत्साहित करें कि वो भी अपने गुणों के आधार पर घर बैठे बहुत कुछ करसकती हैं.
  • अगर वो भी वर्किंग हैं तो आपस में वर्क लाइफ़ डिसकस करें, एक-दूसरे से ईर्ष्या करने से बचें.
  • चाहें तो मिलकर हॉबी क्लास जॉइन करें या वर्क आउट करें. 
  • घर के बुजुर्गों को बस आपका थोड़ा सा समय चाहिए होता है, उनके साथ बैठकर उनका हाल जानें. उनकी तबियतक दवाओं का ध्यान रखें. 
  • ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ लड़कियों की ही ज़िम्मेदारी बनती है, यही बातें लड़कों पर भी लागू होती हैं कि वो अपनेससुराल वालों के लिए दामाद से ज़्यादा एक बेटे की भूमिका निभाएं. 
  • बीच-बीच में खुद फ़ोन करके या घर जाकर सबका हाल चाल जान आएं. 
  • किसी तरह की मदद हो तो ज़रूर सहयोग करें.

ससुराल में ऐसे बनें सबकी फ़ेवरेट…

  • इसके लिए आपको सबसे पहले अपने मन से तमाम बनी-बनाई धारणाएं निकालनी होंगी.
  • सास और ननद तो बुरी ही होती हैं, जेठानी तो जलनेवाली और साज़िश करनेवाली ही होती है- ये राय पहले से नबना लें.
  • सबका दिल जीतने के लिए कुछ एक्स्ट्रा प्रयास करें.
  • सासू मां को शिकायत का मौक़ा न दें और उनकी पसंद-नापसंद जानने की कोशिश करें. 
  • उनसे कुछ कुकिंग टिप्स लें. 
  • सलाह लेकर ही हर काम करें. 
  • उनकी तारीफ़ करें कि आप कैसे ज़िम्मेदारी से सब संभाल लेती हैं, काश मैं भी कर पाती ऐसा.
  • उनसे दोस्ती करके बाक़ी घरवालों की भी पसंद-नापसंद जानने की कोशिश करें.
  • अपनी जेठानी या पति से भूलकर भी सास या घर के अन्य सदस्य की शिकायत या बुराई न करें.
  • शादी के बाद सिर्फ़ पति को ही खुश करने में न लगी रहीं, बल्कि पूरे परिवार को साथ लेकर चलें.
  • सोच यही रखें कि ये आपके ही परिवारवाले हैं और अब इनके साथ ही आपका जीवन और भविष्य है तो ऐसे में क्योंन इनके लिए कुछ ख़ास किया जाए और क्यों न इनके दिल में अपनी ख़ास जगह बनाई जाए.
  • इस तरह रिश्ता निभाएंगी तो ज़रूर शादी और रिश्तों को कामयाब व बेहतर बना पाएंगी.
  • बिट्टू शर्मा 

यह भी पढ़ें: 6 रिलेशनशिप गुरु, जो रिश्ते में दे सकते हैं आपको बेस्ट सलाह( 6 Relationship Gurus, Who Can Give You Best Relationship Advice)

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Published by
Geeta Sharma

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