पहला अफेयर: अंबाबाई (Pahla Affair: Ambabai)

वो रास्ता अब सुनसान लगता है, वो राहें अब तुझे याद करती हैं… तेरी वो नीली-नीली आंखें… अक्सर जब मेरा पीछा करती थीं, तेरी हर…

वो रास्ता अब सुनसान लगता है, वो राहें अब तुझे याद करती हैं… तेरी वो नीली-नीली आंखें… अक्सर जब मेरा पीछा करती थीं, तेरी हर सांस जैसे मेरा ही इंतज़ार किया करती थी… आज याद आती हैं वो राहें जिन पर तू कभी मेरे आगे तो कभी पीछे चला करती थी… कभी मुझे छूने को तू तरसती थी, घंटों गली के उस मोड़ पर मेरी राह तका करती थी…

लेकिन ज़माने में लोगों को प्यार कहां रास आता है, यूं किसी का साथ कहां भाया है… तुझे लेकर अक्सर मुझे ताने कसे जाते थे, कहा जाता था कि क्यों इसको अपने घर तक आने का मौक़ा देते हैं हम, क्यों इसकी इतनी परवाह किया करते हैं हम… और हम हंसकर टाल दिया करते थे लोगों की बातों को, कहां पता था कि वो हमारे इस निश्छल प्रेम की गहराई को समझ नहीं सकते, हमारा साथ वो बर्दाश्त नहीं कर सकते…

और एक दिन जब तेरी वो नीली आंखें नहीं दिखीं… उस मोड़ पर इंतज़ार करती जब तू भी नहीं दिखी… मन बेचैन था कि कहां गई वो, मुझसे इतना प्यार करती थी जो… दिन बीते, बेचैनी और भी बढ़ी… एक रोज़ छत पर कुछ लोगों ने बताया कि तुम्हारी अंबाबाई अब नहीं रही… किसी ने उसको ज़हर देकर हमेशा के लिए सुला दिया… उसके दो मासूम छोटे-छोटे बच्चे थे उनकी भी कोई खबर नहीं…

मन टूट गया, इतनी प्यारी, इतनी चंचल सी अंबाबाई से किसी को इतनी नफ़रत? फिर याद आया कि क्यों यहां-वहां कोने-कोने में कुछ खाना रखा जाने लगा था… किसी ने बताया उनमें ज़हर डाला जाता था, ताकि अंबाबाई आए और उसके खाकर मर जाए…

लोगों को पसंद नहीं था कि वो आती थी मेरे घर के सामने, कभी खाना तो कभी दूध मांगती थी… और मेरी गलती यही थी कि मैंने उसकी उम्मीद भरी आंखों को नाउम्मीद नहीं होने दिया, वो जब-जब आई उसे खाना और दूध भी दिया…

आज मन रोता है, उसे याद करता है… लोग खुश थे कि उनका पीछा छूटा और हम आज भी उस मोड़ पर उसकी मीठी सी आवाज़ का इंतज़ार करते हैं, पर ये कभी न ख़त्म होनेवाला इंतज़ार था… वो अब कभी वापस नहीं आएगी… अफ़सोस था, उसे आख़री बार न देख पाने का…

अब लगता है कि काश उसे और प्यार कर लिया होता, काश उसे और जी भर के देख लिया होता… ये अफ़सोस हमेशा रहेगा, अलविदा मेरी प्यारी अंबाबाई… लोगों के लिए तुम बस एक बिल्ली थी पर मेरे लिए मेरा प्यार थी… मेरे बाहर जाते ही मेरे पैरों में लिपट जाती थी तुम, खाने के डिब्बे को देख लपक जाती थी तुम, मुझे तुम पर बेहद प्यार आता था, लेकिन दुनिया को तुमसे नफ़रत थी…

आज तुम जहां हो वो यहां से बेहतर जगह होगी, वहां नफ़रत और भूख नहीं, प्यार और वफ़ा होगी… बस इतना ही कहूंगी कि मैं तुमसे बेहद प्यार करती हूं, पहले तुम मेरी राह देखती थी, आज मैं उसी मोड़ पर तुम्हारा इंतज़ार करती हूं!

  • गीता शर्मा
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Geeta Sharma

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