लघुकथा- परफेक्ट रोटी (Short Story- Perfect Roti)

तभी बीच में ऑफिस की एक अन्य सहकर्मी बोली, "चलो! आज देखते हैं किसकी कितनी परफेक्ट रोटी, पूरी या परांठा है." फिर क्या, सभी अपनी-अपनी…

तभी बीच में ऑफिस की एक अन्य सहकर्मी बोली, “चलो! आज देखते हैं किसकी कितनी परफेक्ट रोटी, पूरी या परांठा है.”
फिर क्या, सभी अपनी-अपनी रोटी, पूरी दिखाने लगे. सबसे परफेक्ट रोटी सतीश के लंच बॉक्स से निकली.
और परफेक्ट रोटी का ख़िताब सतीश के टिफिन को गया. सभी सहकर्मी सतीश की पत्नी की तारीफ़ करने लगे.

लंच टाइम पर ऑफिस के सभी सहकर्मी ज़्यादतर साथ बैठकर ही लंच करते थे. आज भी लंच में सभी साथ बैठे थे.
यहां राधा ने जैसे ही लंच बॉक्स से अपनी टेढ़ी-मेढ़ी रोटी निकाली, राहुल उसकी रोटी को देखकर मज़ाकिया अंदाज़ में बोला, “क्या यार! लड़की होकर भी ऐसी टेढ़ी-मेढ़ी रोटियां बनाती हो? हद है यार!”
राधा- “अच्छा! ज़रा आप, अपना टिफिन दिखाना. मैं भी ज़रा देखूं की भाभीजी कितनी परफेक्ट रोटियां बनाती हैं?”

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तभी बीच में ऑफिस की एक अन्य सहकर्मी बोली, “चलो! आज देखते हैं किसकी कितनी परफेक्ट रोटी, पूरी या परांठा है.”
फिर क्या, सभी अपनी-अपनी रोटी, पूरी दिखाने लगे. सबसे परफेक्ट रोटी सतीश के लंच बॉक्स से निकली.
और परफेक्ट रोटी का ख़िताब सतीश के टिफिन को गया. सभी सहकर्मी सतीश की पत्नी की तारीफ़ करने लगे.
“वाह! भाभीजी सच में बहुत अच्छी रोटियां बनाती हैं.”
दूसरे सहकर्मी ने भी पहले की बात का समर्थन करते हुए कहा, “हां! सच्ची में देखो कितनी गोल और पतली रोटी है.”
सतीश- “थैंक्यू दोस्तों! पर तुम लोग ग़लत सोच रहे हो. दरअसल, मेरी वाइफ भी ऑफिस जाती है. वह कामकाजी महिला है. वह रोज़ सिर्फ़ सब्जी बनाती है. रोटी तो मैं ही बनाता हूं हमेशा, क्योंकि ज़रूरी तो नहीं कि परफेक्ट रोटी सिर्फ़ एक औरत ही बनाए, हम पुरुष भी तो ऐसा कर सकते हैं न?”

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सतीश की बात ने उन सबकी सोच पर गहरी चोट की और वहां पर मौजूद सभी सहकर्मी सतीश की बात का तालियों के साथ सम्मान और समर्थन करने लगे.

– पूर्ति वैभव खरे

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Photo Courtesy: Freepik


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Usha Gupta

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