लघुकथा- चेहरा (Laghukatha- Chehra)

"अरे, नहीं मैडम क्यों चलें, आप तो यहां पर आराम से बैठो और अब कुछ देर में आपके शैक्षणिक योगदान…

पहला अफेयर: बरसता सावन… (Pahla Affair… Love Story: Barasta Sawan)

सावन बरस रहा है... मेरा विरही मन जल रहा है.. मुझे याद आ रही है सावन की वो पहली बारिश… उस पहली बारिश की वो की भीगती हुई खूबसूरत शाम और उस शाम का वो हसीन लम्हा... मन सुलग रहा था ...तन मचल रहा था...लजाती खामोश आंखें... जज़्बातों का उफान चरम पर था, हम दोनों अकेले उस कमरे में थे कि अचानक बिजली कड़कने से मैं डरकर तुम्हारे सीने से लिपट गई थी और तुमने मुझे मजबूती से थाम लिया था. मैं झिझक रही थी... लजा रही थी और खुद को तुमसे छुड़ाने का असफल प्रयास कर रही थी. बारिश जब तक थम नहीं गई, तब तक हमारी खामोशियां रोमांचित होकर सरगोशियां करती रहीं... मौन मुखर होकर सिर्फ़ आंखों के रास्ते से एक-दूसरे के दिल को अपने मन का हाल बता रहा था. बारिश में भीगते अरमान मुहब्बत के नग़मे गुनगुना रहे थे… इतना हसीन मंजर था वो कि आज भी याद कर मां रोमांचित हो उठता है… लग रहा था कि ये बारिश ताउम्र यूं ही होती रहे, ये बदल ऐसेही मुहब्बत बरसाते रहें… ये बिजली कौंधकर यूं ही डराती रहे ताकि मैं तुमसे यूं ही लिपटी रहूं… चाहत के ये पल यूं ही थमे रहें…  मन इश्क़ के नशे में डूबा हुआ था कि अचानक बारिश और भी तेज़ हो गई. लग रहा था भगवान ने मेरी सुन ली थी… यूं लग रहा था कि बाहर एक तूफ़ान चल रहा है और यहां अंदर, मन के भीतर भी एक तूफ़ान शुरू हो गया था. तुमने अपने हाथों से मेरे आरक्त चेहरे को उठाकर मेरे सुर्ख और तपते हुए अधरों को अपनी चाहत भरी पावन नज़रों से  निहारा, फिर कहा… "अभी नहीं, अभी पाप है यह" ये कहते हुए तुमने अपनी नज़रों को झुका लिया था. यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: अलविदा! (Pahla Affair… Love…

कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष…गीत- फिर आओ लिए कर बाँसुरिया… (Geet- Phir Aao Liye Kar Bansuriya…)

1 वसुदेव चले शिशु शीश धरे, तट तीर-लता हरषाय रहीं। चम से चमके नभ दामिनियाँ, तम चीरत राह दिखाय रहीं।…

ग़ज़ल (Gazal)

आ गए आपकी मेहरबानी हुई दिल की सरगम बजी शादमानी हुई मिल गई प्यार की सल्तनत अब हमें वो भी…

अकबर-बीरबल की कहानी: हरे रंग का घोड़ा (Akbar-Birbal Tales: The Green Horse)

बादशाह अकबर एक रोज़ अपने घोड़े पर बैठकर शाही बाग में घूमने गए, उनके साथ बीरबल भी था. बाग में…

गीत- ख़ुशहाल ज़िंदगी की तस्वीर… (Geet- Khushhaal Zindagi Ki Tasvir…)

बड़ी चीज़ें कहां मांगता हूं मुझे वक़्त बीतने के बाद भी बस छोटी-छोटी चीज़ों से प्यार है मैं तो बस…

कहानी- बुन गए थे रिश्ते… (Short Story- Boon Gaye The Rishte…)

जीजी ने लंबी पोस्ट लिखी थी जिसे न चाहते हुए भी वह पढ़ता चला गया. एक बार, दो बार और…

‘कैटरीना से तुलना कर मुझे फैटरीना कहा जाता था…’ बॉडी शेमिंग पर ज़रीन खान का दर्द! (‘I Was Called Fatrina’ Zareen Khan On Body Shaming)

ज़रीन खान ने जब साल 2010 में फ़िल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था, तो हर जगह ये बात सुर्खियाँ बन गई थीं क्योंकि उनकीतुलना कैटरीना कैफ़ से होने लगी थी. सभी कहते थे ये तो कैटरीना की हमशक्ल है. लेकिन जैसे-जैसे समय बीता तो बातज़रीन के शरीर और वज़न पर आ गई. ज़रीन को मोटीरीना या फ़ैटरीना कहा जाने लगा. वर्ना सलमान खान जैसे सुपर स्टारके साथ लॉन्च होने के बाद और अपने काम के लिए सराहे जाने के बाद भी आख़िर क्यों ज़रीन खान को वो मुक़ाम नहींमिल सका जिसकी वो हक़दार थीं. ज़रीन ने एक वेब पोर्टल को दिए इंटरव्यू में अपना दर्द साझा किया, वो बोलीं- वीर में मुझे वज़न बढ़ाना था क्योंकि वोबीती सदी की कहानी पर आधारित थी और मुझे उस समय की रानी की भूमिका अदा करनी थी. लेकिन मेरे काम पर ध्यानदेने की बजाय लोग मेरे शरीर और वज़न पर ध्यान देने लगे. मुझे ना तो अच्छे रोल्स ऑफ़र हुए ना ही किसी ने मेरे काम केबारे में कुछ ज़्यादा कहा और लिखा. यहां तक कि इवेंट्स में भी जाने पर मेरे बारे में कुछ अच्छा नहीं लिखा जाता था. बहुतनेगटिविटी फैलाई गई. मुझे फ़ैटरीना कहा जाता था. इन बातों ने ज़ाहिर है मुझे प्रभावित किया और मैंने अपने शरीर पर काम करना शुरू किया. मेरा बॉडी स्ट्रक्चर वाइड है औरमैं अपनी बोंस को कट ऑफ़ नहीं कर सकती. लेकिन 40 किलो वज़न कम करने के बाद भी लोग सिर्फ़ बुरी बातें ही लिखतेथे. मैं मानसिक रूप से काफ़ी परेशान थी, लेकिन फिर मैं समझ गई कि ये फ़ितरत है जो नहीं बदलेगी, मैं चाहे खुद कोकितना ही टॉर्चर कर लूं, कितनी ही एक्सरसाइज़ कर लूं, लोग वहीं के वहीं अटके रहेंगे. यही बात मेरा संबल बनी और मैंनेखुद को टूटने नहीं दिया. मैंने यही सोचा कि क्यों किसी के कहने पर मैं अपनी तुलना किसी और से करूं यह भी पढ़ें: शादी के बाद वेडिंग पार्टी में भी रिया कपूर ने चुना वाइट गाउन, न…

झूठ बोलने पर बच्चे को डांटने-धमकाने की नहीं, समझाने की ज़रूरत है… (How To Deal With Your Kids Lying)

ऐसे तमाम माता-पिता हैं, जो अपने बच्चे की झूठ बोलने की आदत से परेशान रहते हैं. बच्चे की इस आदत…

पंचतंत्र की कहानी: धोबी का गधा (Panchatantra Tales: Dhobi ka Gadha)

एक गांव में एक धोबी अपने गधे के साथ रहता था. वह अपनी रोज़ी-रोटी के लिए रोज सुबह अपने गधे…

साइन के साइज़ से बदल लें अपनी क़िस्मत… (Change Your Signature Change Your Luck)

क्या आप में आत्मविश्वास की कमी है? क्या आप दूसरों के सामने अपनी बात सही तरीक़े नहीं रख पाते है?..…

बच्चों के साथ बरसात के मौसम का आनंद लें… (Enjoy The Rainy Season With Children)

रिमझिम बारिश बहुत सुंदर अवसर देती है ख़ुशियां मनाने का. आप इस मौसम में भीतर बंद न रहिए, ना ही…

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