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कविता- मत करो विलाप ऐ स्त्रियों… (Poetry- Mat Karo Vilap Ae Striyon…)

मत करो विलाप ऐ स्त्रियों! कि विलापने से कांपती है धरती दरकता है आसमां भी कि सुख और दुख दो…

कविता- मिस करता हूं… (Kavita- Miss Karta Hun…)

तुम्हें एहसास है मैं तुम्हारे साथ गुज़रे लम्हे और वक़्त नहीं मिस करता वे तो एक दिन दूर जाने थे…

ग़ज़ल- थोड़ी सी ज़िंदगी दे दे… (Gazal- Thodi Si Zindagi De De…)

तेरी आंखों से कब राहों का उजाला मांगा अपनी आंखों में बस थोड़ी सी ज़िंदगी दे दे सदियों से इस…

काव्य- लौट आएंगे हम-तुम भी… (Kavya- Laut Aayenge Hum-Tum Bhi…)

जैसे लौट आती हैं चिड़ियां दिनभर की उड़ान के बाद थकी-हारी वापस घोंसलों में जैसे लौट आते हैं बीज ओढ़े…

कविता- यात्रा.. आत्मिक एहसास की… (Kavita- Yatra.. Aatmik Ehsaas Ki…)

यात्रा हो या ज़िंदगी कुछ न कुछ छूट ही जाता है पीछे अधजिया सा फिर.. 'जिए' से ज़्यादा 'अधजिए' को…

कविता- स्त्री का यथार्थ (Kavita- Stri Ka Yatharth)

चाहकर भी कोई कवि कभी नहीं लिख सकेगा शोकगीत स्त्री की उन इच्छाओं की मृत्यु पर जो अभिव्यक्त होने से…

कविता- वक़्त और लम्हे… (Kavita- Waqt Aur Lamhe…)

वक़्त से लम्हों को ख़रीदने की कोशिश की वह मुस्कुराया बोला क्या क़ीमत दे सकोगे मैं बोला अपने जज़्बात दे…

कविता- नव वर्ष की पावन बेला… (Kavita- Nav Varsh Ki Pawan Bela…)

नव वर्ष की पावन बेला मन मेरा तो हर्षित है नए सूर्य की आभा से मानो सब आलोकित है उम्मीद…

कविता- तुम दूर ही अच्छे हो… (Kavita- Tum Dur Hi Achche Ho…)

तुम और मैं मिले तो मुझे अच्छा लगा गुज़रे वक़्त की कसक कुछ कम हुई परंतु मन के डर ने…

कविता- अभिव्यक्ति है आंखें… (Kavita- Abhivyakti Hai Aankhen…)

नेत्र कहूं नयन कहूं या कहूं मैं चक्षु आंखों की भाषा सिर्फ़ नहीं है अश्रु जीवन का दर्पण है आंखें…

कविता- वो पीली सोच वाली कविता… (Woh Peeli Soch Wali Kavita…)

प्रकृति प्रेम… अभी तलाश रही हूं कुछ पीले शब्द कि एक कविता लिखूं पीली सी ठीक उस पीली सोच वाली…

कविता- द्रौपदी का ऊहापोह (Kavita- Draupadi Ka Uhapoh)

द्रौपदी स्वयंवर मैं अग्निसुता, मैं स्वयंप्रभा मैं स्वयं प्रभासित नारी हूं मैं यज्ञ जन्मा, और पितृ धर्मा नहीं किसी से…

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