gazal

काव्य- एक-दूसरे के मौन में… (Kavya- Ek-Dusare Ke Maun Mein…)

कभी-कभी मैं कुछ नहीं भी कहती हूं तुम तब भी सुन लेते हो.. कैसे! कभी-कभी मैं कुछ कहती हूं तुम…

कविता- तेरे लिए… (Kavita- Tere Liye…)

* गुज़र जानी थी ये उम्र किसी बेनाम कहानी की तरह कि बियाबान में फैली ख़ुशबू और उसकी रवानी की…

काव्य- बारिश और मन (Kavya- Barish Aur Maan)

बारिश की बूंदों ने आज फिर दिल को गुदगुदाया है रिमझिम फुहारों ने मौसम को आशिक़ाना बनाया है ठंडी बयार…

काव्य- सब प्रतीक्षारत हैं… (Kavay- Sab Pratiksharat hain…)

लॉकडाउन पर विशेष... सब प्रतीक्षारत हैं बैठे हैं वक़्त की नब्ज़ थामे कि कब समय सामान्य हो और रुके हुए…

कविता- क्यों रखा उसको पराश्रित ही… (Kavita- Kyon Rakha Usko Parashrit Hi…)

सुनो कवि.. पहाड़ी के उस पार वो स्त्री.. रोप रही है नई-नई पौध सभ्यताओं की और उधर.. गंगा के किनारे…

काव्य- हार गए तुम… (Kavya- Haar Gaye Tum…)

जिस दिन तमन्ना बड़ी और हौसला छोटा हो जाए समझना कि हार गए तुम जिस दिन राजनीति बड़ी और दोस्ती…

ग़ज़ल- तस्तीक़ (Gazal- Tastik)

अब न कोई शक़-ओ-शुबा है, हर ढंग से तस्तीक़ हो गई निराशाओं से लड़ने की, मेरी बीमारी ठीक हो गई…

कविता- हर प्रलय में… (Kavita- Har Pralay Mein…)

आज के हालातों में हर कोई 'बचा' रहा है कुछ न कुछ पर, नहीं सोचा जा रहा है 'प्रेम' के…

काव्य- काश! एहसास के साथ… (Kavya- Kaash! Ehsaas Ke Sath…)

काश कि कभी तुमने अपने स्कूल के बस्ते को घर लौटते वक़्त मेरे कंधे पर रक्खा होता काश कि मैंने…

कविता- बरखा रानी (Kavita- Barkha Rani)

बरखा रानी लगता है तुम, युगों के बाद आई हो धरती की प्यास बुझाने, कितनी ठंडक लाई हो मीठी यादें,…

काव्य- आईने के एहसास (Kavya- Aaine Ke Ehsaas)

मैं ख्वाब देखता थातुम ख्वाब हो गए उम्मीद के शहर में तुम प्यास हो गए उम्र मेरी एक दिन लौट…

© Merisaheli