Geet

काव्य- बारिश और मन (Kavya- Barish Aur Maan)

बारिश की बूंदों ने आज फिर दिल को गुदगुदाया है रिमझिम फुहारों ने मौसम को आशिक़ाना बनाया है ठंडी बयार…

काव्य- एक चुप होती हुई स्त्री… (Kavya- Ek Chup Hoti Hui Stri…)

एक चुप होती हुई स्त्री कहती है बहुत कुछ… तुलसी जताती है नाराज़गी नहीं बिखेरती वो मंजरी सारी फुलवारियां गुमसुम…

कविता- प्रेम पत्र… (Kavita- Prem Patra)

लिखा था धड़कते दिल से और दिया था कांपते हाथों से मैंने नजरें ज़मीन में ही गड़ा रखी थी फिर…

काव्य- हार गए तुम… (Kavya- Haar Gaye Tum…)

जिस दिन तमन्ना बड़ी और हौसला छोटा हो जाए समझना कि हार गए तुम जिस दिन राजनीति बड़ी और दोस्ती…

कविता- हर प्रलय में… (Kavita- Har Pralay Mein…)

आज के हालातों में हर कोई 'बचा' रहा है कुछ न कुछ पर, नहीं सोचा जा रहा है 'प्रेम' के…

काव्य- मेरी हस्ती निसार हो जाए… (Kavya- Meri Hasti Nisar Ho Jaye…)

सांस, ख़ुशबू गुलाब की हो धड़कन ख़्वाब हो जाए उम्र तो ठहरी रहे हसरत जवान हो जाए बहार उतरे तो…

कविता- वह स्त्री… (Kavita- Vah Stree…)

वह स्त्री.. बचाए रखती है कुछ 'सिक्के' पुरानी गुल्लक में पता नहीं कब से कभी खोलती भी नहीं कभी-कभार देखकर…

ख़ूबसूरत और चुलबुली दृष्टि धामी हैं लाखों दिलों की धड़कन, आपकी फेवरेट कौन है मधुबाला या गीत? (Lesser Known Facts About Geet Hui Sabse Parayi Fame Drashti Dhami)

टीवी की गीत या मधुबाला का नाम लेते ही दिल में एक प्यारी सी ख़ूबसूरत छवि उभर आती है और…

कविता- बरखा रानी (Kavita- Barkha Rani)

बरखा रानी लगता है तुम, युगों के बाद आई हो धरती की प्यास बुझाने, कितनी ठंडक लाई हो मीठी यादें,…

#विश्‍व पर्यावरण दिवस: कविता- वन संरक्षण (#WorldEnvironmentDay: Kavita- Van Sarakshan)

वृक्षों से ही वन बनते हैं, धरती हरी-भरी करते हैं। वर्षा के कारण हैं जंगल, जिससे होता सबका मंगल। वृक्षों…

काव्य- आईने के एहसास (Kavya- Aaine Ke Ehsaas)

मैं ख्वाब देखता थातुम ख्वाब हो गए उम्मीद के शहर में तुम प्यास हो गए उम्र मेरी एक दिन लौट…

कविता- सीमा (Kavita- Seema)

मेरे प्रेम की सीमा कितनी है, क्या है तुम्हें क्या पता है? बहुत छोटी हैं वो मन की रेखाएं नाराज़…

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