बच्चों को बताएं त्योहारों का असली महत्व, मतलब व सही मायने… (Importance Of Celebration: Teach Your Children True Meaning Of Festivals)

कहा जाता है बच्चे गीली मिट्टी की तरह होते हैं, उनको जिस सांचे में ढालोगे वो ढल जाएंगे. वैसे भी आजकल हम ये महसूस कर रहे हैंकि बच्चों में काफ़ी बदलाव आ गया है, उनकी मासूमियत कम हो रही है और वो परिवार व अपनेपन की भावना से दूर हो रहे हैं.ऐसे मेंउन्हें अपने परिवार, अपनी संस्कृति से रूबरू कराना बेहद ज़रूरी है और इसमें सबसे अहम भूमिका निभा सकते हैं हमारे त्योहार.  ऐसा भी देखा गया है कि बच्चों के लिए त्योहारों का भी अर्थ बदल सा गया है, वो त्योहारों के पीछे छिपे असली अर्थ को न समझते हुएबस इतना ही जान पाते हैं कि होली में हड़दंग मचाना है और दिवाली में पटाखे फोड़ना व खाना-पीना. इसीलिए ये और भी ज़रूरी होजाता है कि हम उनको अपने त्योहारों का असली मतलब बताएं और उनको बेहतर इंसान बनाएं.  क्या है त्योहारों के असली मायने? अपने बच्चों को हर त्योहार के पीछे छिपे धार्मिक, सामाजिक, पारिवारिक व वैज्ञानिक महत्व और मायने बताएं. हर त्योहार को मनाने कीख़ास वजह होती है, चाहे वो ऋतु परिर्वतन हो या फिर कोई सामाजिक सीख व शिक्षा- इससे अपने बच्चों को वाक़िफ़ करवाएं. सिर्फ़कर्म-कांड ही नहीं उनके पीछे के वैज्ञानिक पहलुओं के बारे में समझाएं. उनसे जुड़ी कहानियां व कहानियों की सीख के बारे में बताएं. स्वास्थ्य से इनका क्या कनेक्शन है ये भी बताएं, ताकि बच्चे भी उत्सुक होकर त्योहारों को उत्साह के साथ मनाएं.  अपनेपन का सबब होते हैं त्योहार… आजकल माइक्रो फ़ैमिली हो गई है. सिंगल फ़ैमिली कल्चर बहुत बढ़ चुका है जिससे बच्चे अपने सभी परिवार के सदस्यों को न तोपहचानते हैं और न ही उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं. यहां तक कि कोई नाते-रिश्तेदार आ भी जाएं तो बच्चों को बहुत अखरता है. वो न तोउनके साथ घुलना-मिलना चाहते हैं और न ही अपना कमरा व अपनी चीजें शेयर करना चाहते हैं, ऐसे में बच्चों को फ़ेस्टिवल के दौरानअपनों के साथ मेल-मिलाप बढ़ाने का मौक़ा मिलता है. आप बच्चों को रिश्तेदारों के यहां लेकर जाएं या उनको अपने यहां बुलाएं. इससेबच्चों का अकेलापन दूर होगा और उनको फ़ैमिली कल्चर का पता चलेगा. ऐसा भी किया जा सकता है कि आप बच्चों से कहें कि इसबार होली या दिवाली या फिर जन्माष्टमी गांवकी मनाएंगे और आप कहीं और हॉलिडे प्लान करने की बजाए गांव जाकर सभी के साथत्योहार का आनंद उठाएं. बच्चे भी जब अपने बड़ों और अपने कज़िन्स से मिलेंगे तो उनको ख़ुशी होगी और अपनेपन की भावना बढ़ेगी. मिल-जुलकर काम करने की भावना बढ़ाते हैं त्योहार…  फ़ेस्टिवल टाइम में सारा परिवार मिल-जुलकर घर की साफ़-सफ़ाई, कुकिंग, शॉपिंग और अन्य प्लानिंग करते हैं. इसमें बच्चों को भीशामिल करें और कुछ कामों की ज़िम्मेदारी उनको भी सौंपें. इससे वो काम-काज में हाथ बंटाना सीखेंगे. वैसे भी रीसर्च कहता है कि घरका काम करने से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है. बच्चों को भी ये एहसास होगा कि उनको भी घर की ज़िम्मेदारियों में हिस्सेदार बनायाजाता है तो उनमें ज़िम्मेदारी की भावना पनपेगी और त्योहारों के प्रति उनका उत्साह भी बढ़ेगा. आजकल फ़ेस्टिवल को लेकर को ठंडापनऔर दिखावे का कल्चर बढ़ रहा है इससे उनको बचाया जा सकता है.  सिर्फ़ अपने ही नहीं, अन्य धर्मों के त्योहारों की भी जानकारी व महत्व समझाएं…  बच्चों को हर धर्म का सम्मान करना सिखाएं. आजकल बच्चे दूसरे तो दूर की बात है अपने धर्म का भी सम्मान नहीं करते. उनको सब कुछढकोसला लगता है, लेकिन आप इंटरनेट और सोशल मीडिया की मदद से अपना भी ज्ञान बढ़ाएं और अपने बच्चों को भी अपने व अन्यधर्मों के त्योहारों का असली अर्थ समझाएं.  त्योहारों से जागती है सुरक्षा, प्यार और माफ़ करने की भावना…  फ़ेस्टिवल हमको क़रीब लाते हैं. अगर कोई दोस्त या रिश्तेदार लम्बे समय से नाराज़ है तो त्योहार इस नाराज़गी को दूर करने काबेहतरीन अवसर हमें देते हैं. ये बाद बच्चों को भी सिखाएं कि अगर कोई नाराज़ है तो उससे माफ़ी मांग लें और अगर कोई और माफ़ीमांगे तो उसको माफ़ कर दें. त्योहार हमें अपने बैर दूर करने का मौक़ा देते हैं.  इसके अलावा वो अपनी भावनाएं व प्यार दर्शाने का भी अवसर देते हैं, हम इसी वजह से गिफ़्ट या मिठाई देते हैं. बच्चों को फ़ेस्टिवल केलिए अपने फ़ेवरेट रिश्तेदार या दोस्त के लिए हाथों से ग्रीटिंग कार्ड बनाने या पेंटिंग करने को कहें. क्वालिटी टाइम बिताने और ख़ुश रहने का बेहतरीन अवसर देते हैं त्योहार…  भागदौड़ भरी जीवनशैली में त्योहार ही हैं जो हमको अपनों के साथ वक्त बिताने और वो भी क्वालिटी टाइम सपेंड करने का मौक़ा देते हैं. ये बात बच्चों को ज़रूर समझाएं कि किस तरह इन दिनों सभी लोग ख़ुश रहते हैं, उत्साह के साथ काम करते हैं, हंसी-मज़ाक़ करते हैं, अंताक्षरी खेलते हैं, एक साथ खाना खाते हैं… जिससे सारा स्ट्रेस दूर हो जाता है और हम रिफ़्रेश हो जाते हैं. आप कैसे अपने बचपन में उत्साह से त्योहार मनाया करते थे इस बारे में बताएं…  अपने बचपन के अनुभव बच्चों को बताएं. आपके दिनों में कैसे ये त्योहार मनाए जाते थे इस बारे में बताएं. उस वक्त इंटरनेट और फ़ोननहीं हुआ करते थे लेकिन फिर भी लोगों के दिलों के तार ज़्यादा व बेहतर ढंग से कनेक्टेड थे इसके महत्व को बताएं. आज सब सुविधाएंहैं लेकिन समय नहीं और अपनापन भी कम है तो किस तरह त्योहार ही हमको क़रीब ला सकते हैं ये बताएं…  संस्कृति-संस्कारों से जोड़ते हैं त्योहार और सभ्यता, इंसानियत का पाठ भी पढ़ाते हैं और शेयरिंग-केयरिंग की भावना भी बढ़ाते हैं…  त्योहार हमें हमारी संस्कृति से जोड़ते भी हैं और उसके बारे में बताते भी हैं. बच्चों को बताएं कि यही वजह है हमको ये सिखाया जाता हैकि त्योहार के दिन न किसी के बारे में बुरा बोलना चाहिए, न बुरा सोचना और न बुरा करना चाहिए. ख़ुश व सकारात्मक रहना सिखाते हैंत्योहार. इंसानियत की सीख देते हैं. हम इस दिन अपनों के साथ तो क्या अंजनों के साथ भी मिल-जुलकर ख़ुशियां बांटते हैं. अपने हाथोंसे बना खाना-मिठाई व पकवान आस-पड़ोस में सभी के साथ शेयर करते हैं. यही शेयरिंग व केयरिंग की भावना का विस्तार करते हैंत्योहार और यही हैं हमारे सच्चे व असली संस्कार…  गीता शर्मा 

कहा जाता है बच्चे गीली मिट्टी की तरह होते हैं, उनको जिस सांचे में ढालोगे वो ढल जाएंगे. वैसे भी आजकल हम ये महसूस कर रहे हैंकि बच्चों में काफ़ी बदलाव आ गया है, उनकी मासूमियत कम हो रही है और वो परिवार व अपनेपन की भावना से दूर हो रहे हैं.ऐसे मेंउन्हें अपने परिवार, अपनी संस्कृति से रूबरू कराना बेहद ज़रूरी है और इसमें सबसे अहम भूमिका निभा सकते हैं हमारे त्योहार. 

ऐसा भी देखा गया है कि बच्चों के लिए त्योहारों का भी अर्थ बदल सा गया है, वो त्योहारों के पीछे छिपे असली अर्थ को न समझते हुएबस इतना ही जान पाते हैं कि होली में हड़दंग मचाना है और दिवाली में पटाखे फोड़ना व खाना-पीना. इसीलिए ये और भी ज़रूरी होजाता है कि हम उनको अपने त्योहारों का असली मतलब बताएं और उनको बेहतर इंसान बनाएं. 

क्या है त्योहारों के असली मायने?

अपने बच्चों को हर त्योहार के पीछे छिपे धार्मिक, सामाजिक, पारिवारिक व वैज्ञानिक महत्व और मायने बताएं. हर त्योहार को मनाने कीख़ास वजह होती है, चाहे वो ऋतु परिर्वतन हो या फिर कोई सामाजिक सीख व शिक्षा- इससे अपने बच्चों को वाक़िफ़ करवाएं. सिर्फ़कर्म-कांड ही नहीं उनके पीछे के वैज्ञानिक पहलुओं के बारे में समझाएं. उनसे जुड़ी कहानियां व कहानियों की सीख के बारे में बताएं. स्वास्थ्य से इनका क्या कनेक्शन है ये भी बताएं, ताकि बच्चे भी उत्सुक होकर त्योहारों को उत्साह के साथ मनाएं. 

अपनेपन का सबब होते हैं त्योहार…

आजकल माइक्रो फ़ैमिली हो गई है. सिंगल फ़ैमिली कल्चर बहुत बढ़ चुका है जिससे बच्चे अपने सभी परिवार के सदस्यों को न तोपहचानते हैं और न ही उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं. यहां तक कि कोई नाते-रिश्तेदार आ भी जाएं तो बच्चों को बहुत अखरता है. वो न तोउनके साथ घुलना-मिलना चाहते हैं और न ही अपना कमरा व अपनी चीजें शेयर करना चाहते हैं, ऐसे में बच्चों को फ़ेस्टिवल के दौरानअपनों के साथ मेल-मिलाप बढ़ाने का मौक़ा मिलता है. आप बच्चों को रिश्तेदारों के यहां लेकर जाएं या उनको अपने यहां बुलाएं. इससेबच्चों का अकेलापन दूर होगा और उनको फ़ैमिली कल्चर का पता चलेगा. ऐसा भी किया जा सकता है कि आप बच्चों से कहें कि इसबार होली या दिवाली या फिर जन्माष्टमी गांवकी मनाएंगे और आप कहीं और हॉलिडे प्लान करने की बजाए गांव जाकर सभी के साथत्योहार का आनंद उठाएं. बच्चे भी जब अपने बड़ों और अपने कज़िन्स से मिलेंगे तो उनको ख़ुशी होगी और अपनेपन की भावना बढ़ेगी.

मिल-जुलकर काम करने की भावना बढ़ाते हैं त्योहार… 

फ़ेस्टिवल टाइम में सारा परिवार मिल-जुलकर घर की साफ़-सफ़ाई, कुकिंग, शॉपिंग और अन्य प्लानिंग करते हैं. इसमें बच्चों को भीशामिल करें और कुछ कामों की ज़िम्मेदारी उनको भी सौंपें. इससे वो काम-काज में हाथ बंटाना सीखेंगे. वैसे भी रीसर्च कहता है कि घरका काम करने से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है. बच्चों को भी ये एहसास होगा कि उनको भी घर की ज़िम्मेदारियों में हिस्सेदार बनायाजाता है तो उनमें ज़िम्मेदारी की भावना पनपेगी और त्योहारों के प्रति उनका उत्साह भी बढ़ेगा. आजकल फ़ेस्टिवल को लेकर को ठंडापनऔर दिखावे का कल्चर बढ़ रहा है इससे उनको बचाया जा सकता है. 

सिर्फ़ अपने ही नहीं, अन्य धर्मों के त्योहारों की भी जानकारी व महत्व समझाएं… 

बच्चों को हर धर्म का सम्मान करना सिखाएं. आजकल बच्चे दूसरे तो दूर की बात है अपने धर्म का भी सम्मान नहीं करते. उनको सब कुछढकोसला लगता है, लेकिन आप इंटरनेट और सोशल मीडिया की मदद से अपना भी ज्ञान बढ़ाएं और अपने बच्चों को भी अपने व अन्यधर्मों के त्योहारों का असली अर्थ समझाएं. 

त्योहारों से जागती है सुरक्षा, प्यार और माफ़ करने की भावना… 

फ़ेस्टिवल हमको क़रीब लाते हैं. अगर कोई दोस्त या रिश्तेदार लम्बे समय से नाराज़ है तो त्योहार इस नाराज़गी को दूर करने काबेहतरीन अवसर हमें देते हैं. ये बाद बच्चों को भी सिखाएं कि अगर कोई नाराज़ है तो उससे माफ़ी मांग लें और अगर कोई और माफ़ीमांगे तो उसको माफ़ कर दें. त्योहार हमें अपने बैर दूर करने का मौक़ा देते हैं. 

इसके अलावा वो अपनी भावनाएं व प्यार दर्शाने का भी अवसर देते हैं, हम इसी वजह से गिफ़्ट या मिठाई देते हैं. बच्चों को फ़ेस्टिवल केलिए अपने फ़ेवरेट रिश्तेदार या दोस्त के लिए हाथों से ग्रीटिंग कार्ड बनाने या पेंटिंग करने को कहें.

क्वालिटी टाइम बिताने और ख़ुश रहने का बेहतरीन अवसर देते हैं त्योहार… 

भागदौड़ भरी जीवनशैली में त्योहार ही हैं जो हमको अपनों के साथ वक्त बिताने और वो भी क्वालिटी टाइम सपेंड करने का मौक़ा देते हैं. ये बात बच्चों को ज़रूर समझाएं कि किस तरह इन दिनों सभी लोग ख़ुश रहते हैं, उत्साह के साथ काम करते हैं, हंसी-मज़ाक़ करते हैं, अंताक्षरी खेलते हैं, एक साथ खाना खाते हैं… जिससे सारा स्ट्रेस दूर हो जाता है और हम रिफ़्रेश हो जाते हैं.

आप कैसे अपने बचपन में उत्साह से त्योहार मनाया करते थे इस बारे में बताएं… 

अपने बचपन के अनुभव बच्चों को बताएं. आपके दिनों में कैसे ये त्योहार मनाए जाते थे इस बारे में बताएं. उस वक्त इंटरनेट और फ़ोननहीं हुआ करते थे लेकिन फिर भी लोगों के दिलों के तार ज़्यादा व बेहतर ढंग से कनेक्टेड थे इसके महत्व को बताएं. आज सब सुविधाएंहैं लेकिन समय नहीं और अपनापन भी कम है तो किस तरह त्योहार ही हमको क़रीब ला सकते हैं ये बताएं… 

संस्कृति-संस्कारों से जोड़ते हैं त्योहार और सभ्यता, इंसानियत का पाठ भी पढ़ाते हैं और शेयरिंग-केयरिंग की भावना भी बढ़ाते हैं… 

त्योहार हमें हमारी संस्कृति से जोड़ते भी हैं और उसके बारे में बताते भी हैं. बच्चों को बताएं कि यही वजह है हमको ये सिखाया जाता हैकि त्योहार के दिन न किसी के बारे में बुरा बोलना चाहिए, न बुरा सोचना और न बुरा करना चाहिए. ख़ुश व सकारात्मक रहना सिखाते हैंत्योहार. इंसानियत की सीख देते हैं. हम इस दिन अपनों के साथ तो क्या अंजनों के साथ भी मिल-जुलकर ख़ुशियां बांटते हैं. अपने हाथोंसे बना खाना-मिठाई व पकवान आस-पड़ोस में सभी के साथ शेयर करते हैं. यही शेयरिंग व केयरिंग की भावना का विस्तार करते हैंत्योहार और यही हैं हमारे सच्चे व असली संस्कार… 

  • गीता शर्मा 
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Geeta Sharma

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डेली ब्यूटी डोज़: अब हर दिन लगें खूबसूरत (Daily Beauty Dose: Easy Tips To Look Chic And Beautiful Everyday)

खूबसूरत तो हम सभी दिखना चाहते हैं और जब भी कोई त्योहार या बड़ा मौक़ा आता है तो हम कोशिश करते हैं कि अपनी ब्यूटी काख़ास ख़याल रखें. शादी के मौक़े पर भी हम अलग ही तैयारी करते हैं, लेकिन सवाल ये है कि सिर्फ़ विशेष मौक़ों पर ही क्यों, हर दिनखूबसूरत क्यों न लगें? है न ग्रेट आइडिया?  यहां हम आपको बताएंगे डेली ब्यूटी डोज़ के बारे में जो आपको बनाएंगे हर दिन ब्यूटीफुल… स्किन को और खुद को करें पैम्पर फेशियल, स्किन केयर और हेयर केयर रूटीन डेवलप करें, जिसमें सीटीएम आता है- क्लेंज़िंग, टोनिंग और मॉइश्चराइज़िंग.स्किन को नियमित रूप से क्लींज़ करें. नेचुरल क्लेंज़र यूज़ करें. बेहतर होगा कि कच्चे दूध में थोड़ा-सा नमक डालकर कॉटनबॉल से फेस और नेक क्लीन करें.नहाने के पानी में थोड़ा दूध या गुलाब जल मिला सकती हैं या आधा नींबू कट करके डालें. ध्यान रहे नहाने का पानी बहुत ज़्यादा गर्म न हो, वरना स्किन ड्राई लगेगी. नहाने के लिए साबुन की बजाय बेसन, दही और हल्दी का पेस्ट यूज़ कर सकती हैं. नहाने के फ़ौरन बाद जब स्किन हल्की गीली हो तो मॉइश्चराइज़र अप्लाई करें.इससे नमी लॉक हो जाएगी. हफ़्ते में एक बार नियमित रूप से स्किन को एक्सफोलिएट करें, ताकि डेड स्किन निकल जाए. इसी तरह महीने में एक बार स्पा या फेशियल कराएं.सन स्क्रीन ज़रूर अप्लाई करें चाहे मौसम जो भी हो. इन सबके बीच आपको अपनी स्किन टाइप भी पता होनी चाहिए. अगर आपकी स्किन बेहद ड्राई है तो आप ऑयल या हेवी क्रीमबेस्ड लोशन या क्रीम्स यूज़ करें.अगर आपको एक्ने या पिम्पल की समस्या है तो आप हायलूरोनिक एसिड युक्त सिरम्स यूज़ करें. इसी तरह बॉडी स्किन  की भी केयर करें. फटी एड़ियां, कोहनी और घुटनों की रफ़, ड्राई व ब्लैक स्किन और फटे होंठों को ट्रीट करें. पेट्रोलियम जेली अप्लाई करें. नींबू को रगड़ें, लिप्स को भी स्क्रब करें और मलाई, देसी घी या लिप बाम लगाएं. खाने के सोड़ा में थोड़ा पानी मिक्स करके घुटनों व कोहनियों को स्क्रब करें. आप घुटने व कोहनियों पर सोने से पहले नारियल तेल से नियमित मसाज करें. ये नेचुरल मॉइश्चराइज़र है और इससे कालापनभी दूर होता है. फटी एड़िययां आपको हंसी का पात्र बना सकती हैं. पता चला आपका चेहरा तो खूब चमक रहा है लेकिन बात जब पैरों की आईतो शर्मिंदगी उठानी पड़ी. फटी एड़ियों के लिए- गुनगुने पानी में कुछ समय तक पैरों को डुबोकर रखें फिर स्क्रबर या पमिस स्टोन से हल्के-हल्के रगड़ें.नहाने के बाद पैरों और एड़ियों को भी मॉइश्चराइज़र करें. चाहें तो पेट्रोलियम जेली लगाएं. अगर पैरों की स्किन टैन से ब्लैक हो है तो एलोवीरा जेल अप्लाई करें.नेल्स को नज़रअंदाज़ न करें. उनको क्लीन रखें. नियमित रूप से ट्रिम करें. बहुत ज़्यादा व सस्ता नेल पेंट लगाने से बचें, इससे नेल्स पीले पड़ जाते हैं.उनमें अगर नेचुरल चमक लानी है तो नींबू को काटकर हल्के हाथों से नाखूनों पर रगड़ें. नाखूनों को नियमित रूप से मॉइश्‍चराइज़ करें. रोज़ रात को जब सारे काम ख़त्म हो जाएं तो सोने से पहले नाखूनों व उंगलियों परभी मॉइश्‍चराइज़र लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें. इससे  ब्लड सर्कूलेशन बढ़ेगा. नेल्स सॉफ़्ट होंगे और आसपास की स्किनभी हेल्दी बनेगी.क्यूटिकल क्रीम लगाएं. आप क्यूटिकल ऑयल भी यूज़ कर सकती हैं. विटामिन ई युक्त क्यूटिकल ऑयल या क्रीम से मसाज करें.नाखूनों को हेल्दी व स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए नारियल या अरंडी के तेल से मालिश करें. इसी तरह बालों की हेल्थ पर भी ध्यान दें. नियमित रूप से हेयर ऑयल लगाएं. नारियल या बादाम तेल से मसाज करें. हफ़्ते में एक बार गुनगुने तेल से बालों की जड़ों में मालिश करें और माइल्ड शैम्पू से धो लें. कंडिशनर यूज़ करें. बालों को नियमित ट्रिम करवाएं. अगर डैंड्रफ या बालों का टूटना-झड़ना जैसी प्रॉब्लम है तो उनको नज़रअंदाज़ न करें.  सेल्फ ग्रूमिंग भी है ज़रूरी, ग्रूमिंग पर ध्यान दें… रोज़ ब्यूटीफुल दिखना है तो बिखरा-बिखरा रहने से बचें. ग्रूम्ड रहें. नियमित रूप से वैक्सिंग, आईब्रोज़ करवाएं. ओरल व डेंटल हाईजीन पर ध्यान दें. अगर सांस से दुर्गंध आती हो तो पेट साफ़ रखें. दांतों को साफ़ रखें. दिन में दो बार ब्रश करें. कोई डेंटल प्रॉब्लम हो तो उसका इलाज करवाएं.अपने चेहरे पर एक प्यारी सी स्माइल हमेशा बनाकर रखें. अच्छी तरह ड्रेस अप रहें. कपड़ों को अगर प्रेस की ज़रूरत है तो आलस न करें. वेल ड्रेस्ड रहेंगी तो आपमें एक अलग ही कॉन्फ़िडेन्स आएगा, जो आपको खूबसूरत बनाएगा और खूबसूरत होने का एहसास भीजगाए रखेगा. अपनी पर्सनैलिटी और स्किन टोन को ध्यान में रखते हुए आउटफ़िट सिलेक्ट करें. एक्सेसरीज़ आपकी खूबसूरती में चार चांद लगा देती हैं. उनको अवॉइड न करें. मेकअप अच्छे ब्रांड का यूज़ करें, लेकिन बहुत ज़्यादा मेकअप करने से बचें. कोशिश करें कि दिन के वक्त या ऑफ़िस में नेचुरल लुक में ही आप ब्यूटीफुल लगें. फ़ुटवेयर भी अच्छा हो, लेकिन आउटफ़िट व शू सिलेक्शन में हमेशा कम्फ़र्ट का ध्यान भी ज़रूर रखें. आपके लुक में ये बहुतमहत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. 

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