पहला अफेयर: गुडबाय अप्रतिम (Pahla Affair… Love Story: Goodbye Apratim)

रंगों और ख़ुशियों से सराबोर होली का दिन सबके लिए बेहद रंगीन होता है, लेकिन मेरे लिए ये रंग मेरे पुराने ज़ख्मों कोहरा करने के सिवा और कुछ नहीं… मुझे याद है जब अप्रतिम ने होली के रोज़ ही मुझे आकर गुलाबी रंग से  रंग डाला था. मैं बस देखती ही रह गई थी, न उसे रोका, न टोका.  अगले दिन कॉलेज में मुलाक़ात हुई तो अप्रतिम ने पूछा, “आरोही, तुमको बुरा तो नहीं लगा मेरा इस तरह अचानक आकरतुमको रंग लगाना?” “नहीं, ख़ुशी का दिन था, होली में तो वैसे भी गिले-शिकवे दूर हो जाते हैं…” मैंने जवाब दिया.  अप्रतिम ने फिर मेरी आंखों में झांका और कहा, “अगर मैं ये कहूं कि इसी तरह मैं तुम्हें अपने प्यार के रंग में रंगना चाहता हूं, ताउम्र, तब?” मैं उसकी तरफ़ देखती रह गई, आख़िर कॉलेज की कई लड़कियां उसकी दीवानी थीं. बेहद आकर्षक और सुलझा हुआ थाअप्रतिम.  “तुम्हारी चुप्पी को हां समझूं?” अप्रतिम ने टोका तो मैं भी मुस्कुराकर चली गई वहां से. पहले प्यार ने मुझे छू लिया था, मेरीज़िंदगी में इस होली ने वाक़ई मुहब्बत के रंग भर दिए थे.  कॉलेज पूरा हुआ, अप्रतिम को अच्छी सरकारी नौकरी मिल गई थी और मैं भी अपना पैशन पूरा करने में जुट गई. कमर्शियल पायलेट बनने का बचपन से ही सपना था मेरा. इसी बीच अप्रतिम ने बताया उसकी बहन की शादी तय हो गई है और उसके बाद वो हमारी शादी की बात करेगा घर में.  एक रोज़ मैंने अप्रतिम से कहा कि चलो आज दीदी के ऑफ़िस चलकर उनको सर्प्राइज़ देते हैं, तब अप्रतिम ने बताया किदीदी ने जॉब छोड दिया. वजह पूछने पर उसने बताया कि शादी के बाद वो घर सम्भालेंगी, क्योंकि उनके होनेवाले सास-ससुर व पति भी यही चाहते हैं.  “लेकिन तुमने या दीदी ने उनको समझाया क्यों नहीं, दीदी इतनी टैलेंटेड हैं. हाइली क्वालिफ़ाइड हैं…”  अप्रतिम ने मुझे बीच में ही चुप कराकर कहा कि ये उनका मैटर है और शादी के लिए तो लड़कियों को एडजेस्ट करना हीपड़ता है, इसमें ग़लत क्या है? आगे चलकर उनको ग्रहस्थी ही तो सम्भालनी है.  मुझे बेहद अजीब लगा कि इतनी खुली व सुलझी हुई सोच का लड़का ऐसी बात कैसे कर सकता है? ख़ैर, मुझे भी जॉब मिल गया था और अब मैं आसमान से बातें करने लगी थी. तभी घर में मेरी भी शादी की बात चलने लगीऔर मम्मी-पापा ने अप्रतिम से कहा कि वो भी अपने घरवालों को बुलाकर हमसे मिलवा दे. “अप्रतिम, क्या बात है? तुम संडे को आ रहे हो न मॉम-डैड के साथ? इतने परेशान क्यों हो? उनको भी तो हमारे बारे में सबपता है, फिर तुम उलझे हुए से क्यों लग रहे हो?” मैंने सवाल किया तो अप्रतिम ने कहा कि उसकी उलझन की वजह मेराजॉब और करियर है. वो बोला, “आरोही,  मैं समझता हूं कि ये तुम्हारे लिए सिर्फ़ एक जॉब नहीं, बल्कि तुम्हारा सपना है, लेकिन मेरे पेरेंट्स इसे नहीं समझेंगे. उनका कहना है कि इतना टफ़ काम तुम क्यों करती हो? लकड़ी होकर इसमें करियरबनाने की बजाय तुम कोई दफ़्तर की पार्ट टाइम नौकरी कर लो, ताकि मेरा भी ख़याल रख सको और घर भी सम्भालसको…”  मैंने उसे बीच में टोका, “तुम्हारा ख़याल? तुम कोई बच्चे नहीं हो और न मैं तुम्हारी आया. हम पार्टनर्स हैं, तुमने अपने पेरेंट्सको समझाया नहीं?” “आरोही मैं क्या समझाता, वो भी तो ग़लत नहीं हैं. मैं अच्छा-ख़ासा कमाता हूं. पैसों को वैसे भी कमी नहीं…” “बात पैसों की नहीं है, बात मेरे सम्मान और मेरी राय की भी है न अप्रतिम? उसकी कोई क़ीमत नहीं? हम कर लेंगे न दोनोंमिलकर… तुम तो कहते थे कर कदम पर मेरा साथ दोगे…” मैंने उसे समझाया. “देखो आरोही, मेरी दीदी ने भी तो किया न एडजेस्ट? तुम क्यों नहीं? अंत में तो घर ही सम्भालना है ना? पैशन तो हो गया नपूरा, अपने प्यार की ख़ातिर? मेरी ख़ातिर?” अप्रतिम की बातें मुझे आहत कर रही थीं… वो कहे जा रहा था… “तुमकोअपने पैशन और मेरे प्यार में से एक को चुनना ही होगा… मैं तुम्हारे जवाब का इंतज़ार करूंगा…” मैं रातभर रोती रही, सपने बिखरते नज़र आ रहे थे मुझे, फिर पापा ने समझाया, अपने दिल पर हाथ रखकर जवाब मांगो, सही रास्ता नज़र आ जाएगा… और पापा सही थे. आज मेरे सपने खुली हवा में पंख फैलाकर आकार ले रहे थे. मैं खुश थीअपने निर्णय से. ऐसी सोच वाले व्यक्ति के साथ उम्र भर घुटकर जीने से तो अच्छा है कि मैं अपना सम्मान करूं, क्योंकिअगर वो प्यार करता तो खुद भी एडजेस्ट करके पेरेंट्स को समझा सकता था, लेकिन वो मुझे अपनी ज़िद और सोच केआगे झुकाना चाहता था, इसलिए मैंने उसको अगले ही दिन मैसेज कर दिया था- गुडबाय अप्रतिम, हमेशा के लिए! गीता शर्मा 

रंगों और ख़ुशियों से सराबोर होली का दिन सबके लिए बेहद रंगीन होता है, लेकिन मेरे लिए ये रंग मेरे पुराने ज़ख्मों कोहरा करने के सिवा और कुछ नहीं… मुझे याद है जब अप्रतिम ने होली के रोज़ ही मुझे आकर गुलाबी रंग से  रंग डाला था. मैं बस देखती ही रह गई थी, न उसे रोका, न टोका. 

अगले दिन कॉलेज में मुलाक़ात हुई तो अप्रतिम ने पूछा, “आरोही, तुमको बुरा तो नहीं लगा मेरा इस तरह अचानक आकरतुमको रंग लगाना?”

“नहीं, ख़ुशी का दिन था, होली में तो वैसे भी गिले-शिकवे दूर हो जाते हैं…” मैंने जवाब दिया. 

अप्रतिम ने फिर मेरी आंखों में झांका और कहा, “अगर मैं ये कहूं कि इसी तरह मैं तुम्हें अपने प्यार के रंग में रंगना चाहता हूं, ताउम्र, तब?”

मैं उसकी तरफ़ देखती रह गई, आख़िर कॉलेज की कई लड़कियां उसकी दीवानी थीं. बेहद आकर्षक और सुलझा हुआ थाअप्रतिम. 

“तुम्हारी चुप्पी को हां समझूं?” अप्रतिम ने टोका तो मैं भी मुस्कुराकर चली गई वहां से. पहले प्यार ने मुझे छू लिया था, मेरीज़िंदगी में इस होली ने वाक़ई मुहब्बत के रंग भर दिए थे. 

कॉलेज पूरा हुआ, अप्रतिम को अच्छी सरकारी नौकरी मिल गई थी और मैं भी अपना पैशन पूरा करने में जुट गई. कमर्शियल पायलेट बनने का बचपन से ही सपना था मेरा.

इसी बीच अप्रतिम ने बताया उसकी बहन की शादी तय हो गई है और उसके बाद वो हमारी शादी की बात करेगा घर में. 

एक रोज़ मैंने अप्रतिम से कहा कि चलो आज दीदी के ऑफ़िस चलकर उनको सर्प्राइज़ देते हैं, तब अप्रतिम ने बताया किदीदी ने जॉब छोड दिया. वजह पूछने पर उसने बताया कि शादी के बाद वो घर सम्भालेंगी, क्योंकि उनके होनेवाले सास-ससुर व पति भी यही चाहते हैं. 

“लेकिन तुमने या दीदी ने उनको समझाया क्यों नहीं, दीदी इतनी टैलेंटेड हैं. हाइली क्वालिफ़ाइड हैं…” 

अप्रतिम ने मुझे बीच में ही चुप कराकर कहा कि ये उनका मैटर है और शादी के लिए तो लड़कियों को एडजेस्ट करना हीपड़ता है, इसमें ग़लत क्या है? आगे चलकर उनको ग्रहस्थी ही तो सम्भालनी है. 

मुझे बेहद अजीब लगा कि इतनी खुली व सुलझी हुई सोच का लड़का ऐसी बात कैसे कर सकता है?

ख़ैर, मुझे भी जॉब मिल गया था और अब मैं आसमान से बातें करने लगी थी. तभी घर में मेरी भी शादी की बात चलने लगीऔर मम्मी-पापा ने अप्रतिम से कहा कि वो भी अपने घरवालों को बुलाकर हमसे मिलवा दे.

“अप्रतिम, क्या बात है? तुम संडे को आ रहे हो न मॉम-डैड के साथ? इतने परेशान क्यों हो? उनको भी तो हमारे बारे में सबपता है, फिर तुम उलझे हुए से क्यों लग रहे हो?” मैंने सवाल किया तो अप्रतिम ने कहा कि उसकी उलझन की वजह मेराजॉब और करियर है. वो बोला, “आरोही,  मैं समझता हूं कि ये तुम्हारे लिए सिर्फ़ एक जॉब नहीं, बल्कि तुम्हारा सपना है, लेकिन मेरे पेरेंट्स इसे नहीं समझेंगे. उनका कहना है कि इतना टफ़ काम तुम क्यों करती हो? लकड़ी होकर इसमें करियरबनाने की बजाय तुम कोई दफ़्तर की पार्ट टाइम नौकरी कर लो, ताकि मेरा भी ख़याल रख सको और घर भी सम्भालसको…” 

मैंने उसे बीच में टोका, “तुम्हारा ख़याल? तुम कोई बच्चे नहीं हो और न मैं तुम्हारी आया. हम पार्टनर्स हैं, तुमने अपने पेरेंट्सको समझाया नहीं?”

“आरोही मैं क्या समझाता, वो भी तो ग़लत नहीं हैं. मैं अच्छा-ख़ासा कमाता हूं. पैसों को वैसे भी कमी नहीं…”

“बात पैसों की नहीं है, बात मेरे सम्मान और मेरी राय की भी है न अप्रतिम? उसकी कोई क़ीमत नहीं? हम कर लेंगे न दोनोंमिलकर… तुम तो कहते थे कर कदम पर मेरा साथ दोगे…” मैंने उसे समझाया.

“देखो आरोही, मेरी दीदी ने भी तो किया न एडजेस्ट? तुम क्यों नहीं? अंत में तो घर ही सम्भालना है ना? पैशन तो हो गया नपूरा, अपने प्यार की ख़ातिर? मेरी ख़ातिर?” अप्रतिम की बातें मुझे आहत कर रही थीं… वो कहे जा रहा था… “तुमकोअपने पैशन और मेरे प्यार में से एक को चुनना ही होगा… मैं तुम्हारे जवाब का इंतज़ार करूंगा…”

मैं रातभर रोती रही, सपने बिखरते नज़र आ रहे थे मुझे, फिर पापा ने समझाया, अपने दिल पर हाथ रखकर जवाब मांगो, सही रास्ता नज़र आ जाएगा… और पापा सही थे. आज मेरे सपने खुली हवा में पंख फैलाकर आकार ले रहे थे. मैं खुश थीअपने निर्णय से. ऐसी सोच वाले व्यक्ति के साथ उम्र भर घुटकर जीने से तो अच्छा है कि मैं अपना सम्मान करूं, क्योंकिअगर वो प्यार करता तो खुद भी एडजेस्ट करके पेरेंट्स को समझा सकता था, लेकिन वो मुझे अपनी ज़िद और सोच केआगे झुकाना चाहता था, इसलिए मैंने उसको अगले ही दिन मैसेज कर दिया था- गुडबाय अप्रतिम, हमेशा के लिए!

  • गीता शर्मा 
Share
Published by
Geeta Sharma

Recent Posts

फिल्म समीक्षा- रक्षाबंधन/लाल सिंह चड्ढा: भावनाओं और भोलेपन की आंख-मिचोली खेलती… (Movie Review- Rakshabandhan / Lal Singh Chaddha…)

अक्षय कुमार की फिल्मों से अक्सर मनोरंजन, देशभक्ति, इमोशन की अपेक्षा की जाती है और…

तो इस वजह से भारत छोड़कर कनाडा जाना चाहते थे अक्षय कुमार, खुद किया खुलासा (So Because Of This, Akshay Kumar Wanted To Leave India And Go To Canada, Disclosed Himself)

बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार इन दिनों अपनी मच अवेटेड फिल्म 'रक्षा बंधन' को लेकर चर्चा…

कहानी- डिस्काउंट (Short Story- Discount)

अपनी पत्नी का जोश और उसका विश्वास देखकर रघुवर ने सोचा, 'इसमें बुराई ही क्या…

© Merisaheli