Kavya

काव्य- विरही मन… (Kavya- Virahi Mann…)

दुख में भीगे मन के काग़ज़ सूख गयी कलम की स्याही बीच विरह की लंबी रात है कैसे मिलन के…

काव्या ने इस मामले में कोमोलिका को भी छोड़ा पीछे, जीत लिया ये खिताब (Kavya Also Left Komolika Behind In This Matter, Won This Title)

टीवी सीरियल 'अनुपमा' हमेशा टीआरपी की लिस्ट में टॉप पर बना रहता है. सीरियल में लीड रोल प्ले करने वाली…

नज़्म- एहसास (Nazam- Ehsaas)

किसी रिश्ते में वादे और स्वीकारोक्ति ज़रूरी तो नहीं कई बार बिना आई लव यू  कहे भी तो प्यार होता…

काव्य- बहुत ख़ूबसूरत मेरा इंतज़ार हो गया… (Poetry- Bahut Khoobsurat Mera Intezaar Ho Gaya…)

कशमकश में थी कि कहूं कैसे मैं मन के जज़्बात को पढ़ा तुमको जब, कि मन मेरा भी बेनकाब हो…

काव्य- सफ़र है ये, कुछ तो छूटना ही था… (Kavya- Safar Hai Yeh, Kuch Toh Chhutna Hi Tha…)

अलग फ़लसफ़े हैं हमेशा ही तेरे, सुन ऐ ज़िंदगी बटोरकर डिग्रियां भी यूं लगे कि कुछ पढ़ा ही नहीं ये…

काव्य- महिला दिवस… (Kavya- Mahila Diwas…)

कैसे मनाएंगे महिला दिवस? केक कटवाकर गुब्बारे लगाकर ख़ूब हल्ला-गुल्ला शोर मचाकर? या फिर वो शोर ढूंढ़ेंगे जो किसी की…

काव्य- समर शेष है… (Poetry- Samar Shesh Hai…)

और… प्रेम के लिए क्या गया स्त्री का समर्पण ना जाने कब बदल गया समझौते में उपेक्षा तिरस्कार से कुम्हला…

काव्य- ईश्वर की खोज जारी है… (Kavya- Ishwar Ki Khoj Jari Hai…)

मनमुटाव तो शुरुआत से ही रहा इसीलिए खींच दी गई लक्ष्मण-रेखाएं ईश्वर को ढूंढ़ा गया उससे मिन्नतें-मनुहार की फ़ैसला तब…

कविता- झूठ-मूठ का मनुष्यपन… (Kavita- Jhuth-Muth Ka Manushypan)

गर्मी में भी सबसे ज़्यादा खीझ मनुष्य को हुई उसने हवाओं को क़ैद किया बना डाले एसी और.. रही-सही हवा…

कविता- वक़्त और लम्हे… (Kavita- Waqt Aur Lamhe…)

वक़्त से लम्हों को ख़रीदने की कोशिश की वह मुस्कुराया बोला क्या क़ीमत दे सकोगे मैं बोला अपने जज़्बात दे…

काव्य- नए साल का पहला दिन है… (Kavya- Naye Saal Ka Pahla Din Hai…)

जी हां, सही समझा आपने आज एक जनवरी है नए साल का पहला दिन है चारों तरफ़ उमंग और उत्साह…

कविता- नव वर्ष की पावन बेला… (Kavita- Nav Varsh Ki Pawan Bela…)

नव वर्ष की पावन बेला मन मेरा तो हर्षित है नए सूर्य की आभा से मानो सब आलोकित है उम्मीद…

© Merisaheli