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गुड लोन Vs बैड लोन: जानें दोनों में क्या है अंतर? (Good Loan Vs Bad Loan: Know The Difference)

होम लोन, कार लोन, एजुकेशन लोन आदि का नाम आपने बहुत बार-बार सुना होगा, लेकिन क्या आपने गुड लोन और बैड लोन के बारे में सुना है. यदि नहीं, तो चलिए हम आपको बताते हैं क्या होता है गुड लोन व बैड लोन और इनमें क्या फ़र्क होता है?

जब किसी बड़े काम के लिए रुपयों की ज़रूरत पड़ती है, तो हमारे दिलोदिमाग़ में एक ही शब्द कौंधता है लोन. लोन के प्रकार, जैसे होम लोन, कार लोन, एजुकेशन लोन, वेडिंग लोन से लेकर एमरजेंसी तक की सभी ज़रूरतों को पूरा करने में लोन
अहम् भूमिका निभाता है. लोन की वजह से काम तो निबट जाता है, लेकिन बदले में ब्याज के रूप में अच्छी-खासी रकम देनी पड़ती है.

वैसे तो लोन कई प्रकार के होते हैं, लेकिन बता दें कि लोन को 2 भागों में बांटा गया है- पहला गुड लोन, दूसरा बैड लोन. लेकिन अधिकतर लोगों को इन दोनों लोन के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है. आइए हम आपको इसके बारे में बताते हैं-

गुड लोन Vs बैड लोन



गुड लोन
गुड लोन का मतलब है बैंक से लिया जाने वाला वो लोन, जिसे लेने के बाद आपकी नेटवर्थ में इज़ाफ़ा होता है.
उदाहरण - मान लीजिए कि आप घर खरीदना चाहते हैं और घर खरीदने के लिए लोन लेते हैं. हर महीने की ड्यू डेट या उससे पहले अपनी मंथली इंस्टॉलमेंट पे करते हैं, तो यह गुड लोन की श्रेणी आएगा.

बता दें कि होम लोन लेने पर टैक्स छूट भी मिलती है और आपकी एसेट यानि संपत्ति में भी इज़ाफ़ा हुआ है. गुड लोन में मिलने वाले रिटर्न की दर लोन के ब्याज की दर से अधिक होती है.
- वक़्त के साथ-साथ संपत्ति में वृद्धि होती है.
- होम लोन, एजुकेशन लोन और बिजनेस लोन इसके अंतर्गत आते हैं.

बैड लोन
बैड लोन वह लोन होता है, जिसमें लोन की रकम के साथ-साथ उस लोन पर लगने वाले ब्याज के अलावा और भी भुगतान (जैसे पेनल्टी आदि) करने पडते हैं या फिर ऋणदाता लोन को समय पर नहीं चुका पाए तो उस लोन को बैड लोन कहते हैं. इस तरह के लोन में, लोन देने वाले और लोन लेने वाले- दोनों लोगों को नुक़सान उठाना पड़ता है.
उदाहरण: आपने 15 लाख रुपये का कार लोन 5 साल के लिए लिया है. उसकी ब्याज दर 12% है. आप समय पर मंथली किश्त पे करते हैं. लेकिन किसी एमरजेंसी के कारण आप मंथली किश्त नहीं भर पाए, तो आपको लेट पेमेंट देना पड़ेगा. इसी तरह अगर किसी कारण से आप उस लोन को नहीं चुका पाए, तो इसको बैड लोन कहते हैं.

गुड लोन Vs बैड लोन
  • सही समय पर लोन का भुगतान नहीं करने पर भविष्य में लोन मिलना मुश्किल होता है.
  • बैड लोन में ब्याज की दर बहुत ज़्यादा होती है.
  • ऑटो लोन, पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड पर लोन, कन्ज्यूमेबल लोन- ये सभी बैड लोन की कैटेगरी में आते हैं.

    किसी भी तरह का लोन लें, पर इन बातों का ध्यान रखें-
    लोन लेना जितना आसान होता है, उससे ज़्यादा मुश्किल होता है उस लोन को चुकाना. इसलिए लोन लेने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखें-
  • लोन के लिए कितनी रकम की ज़रूरत है और आपको कितना लोन मिल सकता है. सबसे पहले इस बात पर विचार करें. याद रखें लोन को ब्याज सहित चुकाना होता है. अगर लोन की रकम बड़ी होगी, तो ब्याज की राशि भी अधिक होगी.
  • लोन लेते समय डेब्ट टू इनकम रेश्यो का ध्यान रखें. डेब्ट टू इनकम रेश्यो में बैंक मंथली लोन के भुगतान की तुलना मंथली इनकम से करता है, इसलिए यह रेश्यो 30% से कम हो और 40% से अधिक न हो, क्योंकि बैंक कम डेब्ट टू इनकम रेश्यो को महत्व देता है.
  • अपना क्रेडिट स्कोर अच्छा रखें. यदि क्रेडिट स्कोर अच्छा होगा, तो लोन मिलने में आसानी होगी और कम ब्याज दर पर भी लोन मिल सकता है.
  • जल्दी-जल्दी लोन के लिए अप्लाई न करें.
  • जितनी रकम की आवश्यकता है, उतने ही लोन के लिए अप्लाई करें. ज़रूरत से ज़्यादा लोन न लें.
  • लोन की मंथली इंस्टॉलमेंट अपनी आय का 35% तक रखें.
  • बार-बार अनसिक्योर्ड लोन लेने से बचें. अनसिक्योर्ड लोन वो लोन होता है, जिसमें ऋणदाता को लोन लेने के लिए किसी प्रकार के कोलैटरल (संपत्ति) की आवश्यकता नहीं होती. सिक्योरिटी के रूप में ऋणदाता को किसी संपत्ति पर निर्भर
    रहने के बजाय, उसकी साख के आधार पर अनसिक्योर्ड लोन मिलता है. अनसिक्योर्ड लोन के उदाहरण हैं- पर्सनल लोन, स्टूडेंट लोन और क्रेडिट कार्ड.
  • कुछ लोग इनवेस्टमेंट करने के लिए भी लोन लेते हैं, जो कि सही नहीं है. दरअसल, फिक्स डिपॉजिट करवाने पर आपको उतना इंटरेस्ट नहीं मिलता है, जितना आपको चुकाना पड़ता है. दूसरी तरफ अगर आप पैसों को मार्केट से जुड़ी
    इनवेस्टमेंट स्कीम में लगाते हैं, तो यह काफी रिस्की हो सकता है.
  • किसी भी लोन अग्रीमेंट पर साइन करने से पहले सारे नियम और शर्तों को अच्छी तरह से पढ़ें और समझें. ब्याज दर, रीपेमेंट अवधि, देर से भुगतान करने पर जुर्माना और कज़र्र् से जुड़े किसी भी अन्य शुल्क जैसे विवरणों पर ध्यान दें.
  • लेट पेनाल्टी देने से बचें. किसी महीने अगर किश्त का भुगतान करने से चूक जाते हैं, तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें और समस्या को जल्द से जल्द हल करने का प्रयास करें. अधिकांश बैंक विलंबित भुगतान शुल्क लेते हैं और कुछ
    क्रेडिट ब्यूरो को विलंबित भुगतान की रिपोर्ट भी करते हैं, जिससे आपके क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
  • देवांश शर्मा

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