Shayeri

कविता- सीमा (Kavita- Seema)

मेरे प्रेम की सीमा कितनी है, क्या है तुम्हें क्या पता है? बहुत छोटी हैं वो मन की रेखाएं नाराज़ होे ...

ग़ज़ल- याद तुम आए बहुत (Gazal- Yaad Tum Aaye Bahut)

जब ज़िक्र फूलों का आया याद तुम आए बहुत चांद जब बदली से निकला, याद तुम आए बहुत कुछ न पूछो किस तरह ...

काव्य- तुम्हारी मैं… (Kavay- Tumhari Main…)

मैं तुम्हारी हर चीज़ से प्यार करती हूं न चाहते हुए भी जैसे तुम्हारे सिगार की महक बिस्तर पर फेंकी ...

काव्य- ज़माने बदल गए… (Kavay- Zamane Badal Gaye…)

नज़रें जो उनकी बदलीं, ज़माने बदल गए मयखाना तो वही है, पैमाने बदल गए तुम पूछते हो उनके, जाने से क्या ...

काव्य- गर तुम होते… (Kavay- Gar Tum Hote…)

लिपटकर रो लेती गर तुम होते ग़म कुछ कम होते गर तुम होते बांहों में सिमट जाते खो जाते गर तुम होते ...

ग़ज़ल (Shayari: Gazal)

दग़ाबाज़ दुनिया हसीं दिख रही है बता साकिया तूने क्या दे दिया है दराज़-ए-उमर की दुआ देने वालों न दो ...

काव्य- कसक (Kavay- Kasak)

बिखरते ख़्वाबों को देखा सिसकते जज़्बातों को देखा रूठती हुई ख़ुशियां देखीं, बंद पलकों से, टूटते ...

काव्य- सावन से पहले चले आना… (Kavay- Sawan Se Pahle Chale Aana…)

सुनो ना… सावन से पहले चले आना बड़ा तरसी है आरज़ू तेरी ख़ातिर इस बरस खुल के बरस जाना मद्धिम हवा को ...

ग़ज़ल- जब भी मैंने देखा है… (Gazal- Jab Bhi Maine Dekha Hai…)

जब भी मैंने देखा है दिलदार तुम्हारी आंखों में चाहत का इक़रार मिला हर बार तुम्हारी आंखों में   ...

काव्य- उम्मीद की ज़रूरत क्या है? (Kavay- Ummeed Ki Zarurat Kya Hai?)

  आईने को आईने की ज़रूरत क्या है दिल हो आईना तो सूरत की ज़रूरत क्या है ज़िंदगी मुश्किल है या आसां ...

ग़ज़ल- बहार का तो महज़… (Gazal- Bahar Ka To Mahaz…)

बहार का तो महज़ एक बहाना होता है तुम्हारे आने से मौसम सुहाना होता है   वाइज़ हमें भी कभी मयकदे का ...

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