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कामकाजी महिलाओं के लिए हेल्दी स्नैकिंग आइडियाज़ (Healthy Snacking Ideas For Working Women)

Healthy Snacking Ideas, Working Women cooking tips

वर्किंग वीमेन (Working Women) के लिए ज़रूरी है वर्क लाइफ (worklife) और पर्सनल लाइफ (personallife) में बैलेंस बनाते हुए भी अपने हेल्थ को इग्नोर न करना, ऐसी में ये हेल्दी स्नैकिंग (Healthy Snacking) टिप्स (Tips) उनकी मदद करेंगे


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अब वो व़क्त तो रहा नहीं, जब महिलाएं केवल किचन और घर की शोभा बढ़ाती थीं. समय बदलने के साथ-साथ महिलाओं की भूमिका में भी बहुत परिवर्तन आ गया है. फैमिली लाइफ के अलावा आज उसकी सोशल और प्रोफेशनल लाइफ भी है. यही वजह है कि उसके लिए चुनौतियां बढ़ी हैं. घर-परिवार, जॉब और बच्चों की देखभाल… इन सबके बीच उसकी अपनी सेहत काफ़ी प्रभावित होती है. लेकिन अगर वो हेल्दी डायट ले और अपनी हेल्थ को इग्नोर न करे, तो इन सारी चुनौतियों का सामना वो बेहतर तरी़के से कर पाएगी.
लें सही डायट
– काम के बीच अपने लिए कुछ भी ख़ास बनाकर खाना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन अगर आप स्मार्टली स्नैकिंग करें, तो यह आसान हो जाएगा.
– ऑयली और जंक फूड की जगह हेल्दी फूड लें.
– आपके दोपहर के भोजन में कम से कम एक हरी सब्ज़ी, एक हिस्सा ताज़ा सलाद का और एक हिस्सा कैल्शियम से भरपूर डेयरी प्रोडक्ट, जैसे- छाछ, पनीर या दही, का होना चाहिए.
– महिलाओं को वैसे भी कैल्शियम की अधिक ज़रूरत होती है, तो ऐसे में अपनी ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ न करें.
– पानी भरपूर पीएं. अपने डेस्क पर पानी की बोतल भरकर रखें, ताकि हमेशा हाइड्रेटेड रहें.
– काम के तनाव के बीच, देर तक काम करने और डेड लाइन्स पूरी करने के चक्कर में खानपान अनियमित और अनहेल्दी हो जाता है. लेकिन ऐसा जंक फूड न लें, जिनमें न एनर्जी है, न पोषण. बेहतर होगा कि जब भूख लगे, तो फ्रेश फ्रूट या फिर नट्स खाएं.
– एक्सरसाइज़ के लिए समय नहीं मिल पाता, तो बैठे-बैठे कुछ देेर के लिए मेडिटेशन करें. इससे तनाव कम होकर ऊर्जा मिलेगी.
– दिल्ली बेस्ड न्यूट्रिशनिस्ट रितिका समादार के अनुसार, “वर्किंग वुमन को सेहत संबंधी समस्याएं होने की अधिक आशंका रहती है, क्योंकि समय के अभाव के चलते उनकी खाने में हेल्दी फूड और पोषण की कमी रहती है. वो जब भी समय मिलता है, कुछ भी अनहेल्दी खा लेती हैं, जिससे स़िर्फ फैट्स और कैलोरीज़ ही बढ़ती हैं. इससे बचने के लिए स्मार्ट स्नैकिंग की ज़रूरत है.
– रोज़ सुबह रातभर पानी में भिगोए हुए बादाम खाएं, इससे दिनभर एनर्जी बनी रहेगी, क्योंकि यह विटामिन ई, फाइबर, प्रोटीन, राइबोफ्लेविन और अन्य कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है.
– स्नैकिंग के लिए ऐसी हेल्दी चीज़ें सिलेक्ट करें, जिन्हें कैरी करना भी आसान हो.”

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कैसे करें स्मार्ट स्नैकिंग?
– सलाद काटने का समय नहीं हो, तो गाजर, ककड़ी, टमाटर, सेब आदि को आप यूं ही बैग में रख लें और लंच के समय काटकर खाएं.
– जब कभी भूख लगे, तो ऑयली खाने की बजाय एक सेब या कोई अन्य फ्रूट खाएं.
– कभी-कभी भूख दिमाग़ में भी होती है, इसलिए जब भी भूख महसूस हो, तो पहले पानी पीएं. हो सकता है इसी से आपकी भूख शांत हो जाए.
– कोल्ड ड्रिंक्स की बजाय ताज़ा फलों का जूस पीएं.
– ग्रीन टी भी अच्छा ऑप्शन है. यह काफ़ी हेल्दी होती है.
– बहुत अधिक मीठा न खाएं. इससे फैट्स बढ़ेगा.
– अपने खाने में या फिर एक बाउल दही में कुछ क्रश्ड बादाम मिलाकर खाएं. यह बहुत ही हेल्दी ऑप्शन है और इससे पेट भी भरा रहेगा.
– हर 4 घंटे में भूख लगती ही है, ऐसे में अपने डेस्क या ड्रॉअर में ऐसे हेल्दी स्नैक्स रखें, जिनमें 200 से कम कैलोरीज़ हों.
– मल्टीग्रेन बिस्किट्स या क्रैकर्स, पीनट बटर, नट्स, चना, स्प्राउट्स, फ्रूट्स आदि रखें.
– बेहतर होगा कि बादाम का पैकेट लाकर ड्रॉअर में रखें, जब कभी भूख लगे, तो इसे अलग-अलग तरह से खाने में मिलाकर खाएं.
– आप रोस्टेड आल्मंड भी खा सकती हैं. चिप्स और समोसे से यह ऑप्शन बेहतर है.
– फैट फ्री, माइक्रोवेव में भुने पॉपकॉर्न भी एक विकल्प है, क्योंकि यह अधिक समय तक पेट भरे होने का एहसास कराते हैं.
– ऑलिव्स भी बहुत हेल्दी होते हैं और गुणों से भरपूर भी.
– व्हाइट ब्रेड की बजाय ब्राउन ब्रेड लें. पीनट बटर के साथ या अन्य हेल्दी चीज़ों के साथ उसकी सैंडविच बनाकर खाएं.

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Personal Problems: बच्चे को कितने समय तक ब्रेस्टफीडिंग करानी चाहिए? (How Long You Should Breast Feed Your Baby?)

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दो माह पूर्व ही मेरी डिलीवरी हुई है और मैं अपने बच्चे को स्तनपान कराती हूं. मैं जानना चाहती हूं कि मुझे कितने समय तक बच्चे को स्तनपान कराना चाहिए? मैं एक कामकाजी महिला हूं, इसलिए कृपया यह भी बताएं कि मैं काम पर कब से जा सकती हूं?
– राधिका मेहता, रायपुर.

जन्म के बाद के 4-5 महीनों तक बच्चे के लिए मां का दूध अनिवार्य होता है. यह मां व बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है. इससे बच्चे के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और साथ ही यह सुपाच्य भी है. स्तनपान कराने का फ़ायदा यह है कि इससे आपका वज़न भी जल्दी ही कम हो जाएगा. मां व बच्चे के बीच इससे एक अटूट बंधन का निर्माण होता है. चूंकि आप कामकाजी महिला हैं, इसलिए अपने दूध को सुरक्षित तरी़के से किसी अन्य बर्तन में निकालकर रख सकती हैं, जो आपकी अनुपस्थिति में भी आपके बच्चे को पिलाया जा सकता है. फिर भी आपको सलाह दी जाती है कि कम-से-कम चार माह तक अपने बच्चे को स्तनपान अवश्य कराएं.

 Breast Feeding
मैं 50 वर्षीया महिला हूं और पिछले साल ही मेरे पीरियड्स बंद हुए हैं. पिछले दो महीने से मुझे अक्सर योनि में खुजली व डिस्चार्ज हो रहा है. क्या मुझे डॉक्टर से मिलना पड़ेगा?
– तुलिका कमानी, हैदराबाद.

आपका मेनोपॉज़ हो चुका है और आपके द्वारा बताए लक्षणों से लग रहा है कि आपको इंफेक्शन है. सबसे पहले आपको चेकअप कराना पड़ेगा, ताकि पता चल सके कि आपको किस तरह का इंफेक्शन है, जिससे सही इलाज किया जा सके. इसके अलावा आपको पैप स्मियर टेस्ट और ब्लड शुगर चेकअप (फास्टिंग और पोस्ट लंच) ज़रूर कराना चाहिए.

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 डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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अनहेल्दी लाइफस्टाइल कहीं आपको बीमार तो नहीं बना रही है? (Is Your Unhealthy Lifestyle Making You Sick?)

Is Your Unhealthy Lifestyle Making You Sick

Unhealthy Lifestyle

अनहेल्दी लाइफस्टाइल (Unhealthy Lifestyle) कहीं आपको बीमार (Sick) तो नहीं बना रही है?

ब्रेकफास्ट न करना

इस बारे में डायटीशियन्स व न्यूट्रीशनिस्टस का कहना है कि ब्रेकफास्ट न करने से वज़न बढ़ना, हदय रोग, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग होना, एनर्जी लेवल कम होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह साबित हुआ है कि जो लोग ब्रेकफास्ट नहीं करते हैं, उनमें बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर जल्दी बढ़ता है और रोज़ाना नाश्ता करनेवाले लोगों की तुलना में उन्हें डायबिटीज़ होने की संभावना भी अधिक होती है. जो लोग डायटिंग के नाम पर ब्रेकफास्ट नहीं करते, उन्हें विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखना चाहिए. ब्रेकफास्ट न करने पर दिनभर थकान महसूस होती है, एकाग्रता में कमी आने के साथ-साथ कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है.

खाना चबाकर न खाना

अधिकतर लोगों में खाना अच्छी तरह से चबाकर न खाने की बुरी आदत होती है. शोधकर्ताओं के अनुसार, अच्छे स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है कि खाने को अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाया जाए, लेकिन जो लोग खाने को पूरी तरह से चबाकर नहीं खाते हैं, उनका पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम नहीं करता. पाचन तंत्र के सही ढंग से काम न करने के कारण उन्हें कब्ज़, एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है.

ज़्यादा कॉफी पीना

प्रतिदिन कॉफी पीने के बहुत फ़ायदे होते हैं. कॉफी में ऐसे अनेक एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो हमारी याददाश्त को बढ़ाते हैं, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा कॉफी का सेवन सेहत को हानि पहुंचाता है. औसतन एक व्यक्ति के लिए दो से चार कप कॉफी पीना सामान्य है, लेकिन चार से अधिक कप कॉफी पीने से एंज़ायटी, इंसोम्निया (अनिद्रा) और शरीर में कंपकंपी होने लगती है, जिसके कारण सिरदर्द, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा कॉफी में मौजूद कैफीन नामक तत्व बोन मास डेंसिटी को कम करता है. अधिक मात्रा में कॉफी पीने से हड्डियां कमज़ोर होती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है.

ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना

सही एक्सरसाइज़ आपको फिट और फ्रेश होने का एहसास कराती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना भी आपको बीमार बना देता है. जी हां, ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करने से घुटनों को नुक़सान पहुंचता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस होने का ख़तरा होता है. अधिक एक्सरसाइज़ करने से थकान महसूस होती है. कई बार मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है. एक शोध के अनुसार, ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने की संभावना ब़ढ़ जाती है.

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भारी बैग कैरी करना

हैवी बैग्स उठाने से क्रॉनिक बैक पेन, कंधे और गर्दन में दर्द जैसी समस्याएं होती हैं. हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 5.5 किलोग्राम से लेकर 7 किलोग्राम तक का भारी बैग उठाने से गर्दन, कंधे व पीठ में दर्द शुरू होने लगता है, इसलिए बैग ख़रीदते समय ऐसा बैग ख़रीदें, जिसमें हैवी मटेरियल का इस्तेमाल न किया गया हो. हैवी मटेरियलवाले बैग में सामान भरने के कारण बैग और भी भारी हो जाता है और गर्दन व कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव आने लगता है, जिसके कारण गर्दन, कंधे व पीठ में दर्द होने लगता है. इसके अलावा पतली स्ट्राइप्सवाले बैग से भी ब्लड सर्कुलेशन रुकने का ख़तरा होता है.

हाई हील पहनना

अधिकतर महिलाएं हाई हील को फैशन एक्सेसरीज़ के तौर पर अपने वॉर्डरोब में ज़रूर रखती है, यह जानते हुए भी कि हाई हील सेहत को नुक़सान पहुंचाती है. हाई हील पहनने से स़िर्फ पैरों में ही दर्द नहीं होता, बल्कि शरीर के अन्य भागों में भी तकली़फें बढ़ जाती हैं. एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 70% महिलाएं हाई हील पहनती हैं, जिनमें से 90% महिलाओं को कंधे, पीठ, घुटने और जोड़ों के दर्द की समस्या होती है. हाई हील पहनने से सबसे ज़्यादा दबाव पैरों पर पड़ता है, जिसके कारण बॉडी पोश्‍चर बिगड़ने लगता है. हाई हील का असर स्पाइन पर भी पड़ता है, जिससे पीठ और पिंडलियों में दर्द बढ़ने लगता है.

रात को सोने से पहले ब्रश न करना

ज़्यादातर लोग रात को सोने से पहले ब्रश करने से कतराते हैं. उनकी यह आदत न केवल उनके स्वस्थ दांतों के लिए हानिकारक है, बल्कि उनके हेल्दी रिलेशिपशिप में भी दूरी का कारण बनती है.

अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के डेंटिस्ट किमबर्ली हाम्स के अनुसार, दांतों की अच्छी सेहत के लिए दिन में दो बार ब्रश ज़रूर करना चाहिए. क्योंकि दिनभर खाते रहने के कारण दांतों पर प्लाक की परत जम जाती है, जिसके कारण दांतों में छिपे बैक्टीरिया एक्टिव हो जाते हैं. इसलिए जब भी आप खाना खाते हैं, तो ये बैक्टीरिया एसिड का उत्पादन करना शुरू कर देते हैं, जिससे दांतों में सड़न और सांसों में दुर्गंध की समस्या होने लगती है. इन समस्याओं से बचने के लिए दिन में 2 बार ब्रश करना ज़रूरी है.

पूरी नींद न लेना

स्लीप नामक पत्रिका में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग 6 घंटे या 6 घंटे से कम नींद लेते हैं, तो उन्हें कार्डियोेवैस्कुलर डिसीज़, जैसे- दिल की बीमारी, लो ब्लड प्रेशर, तनाव, अवसाद जैसी समस्याएं हो सकती हैं. नींद पूरी न होने के कारण पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे खाना पचने में मुश्किल होती है. इनके अलावा एकाग्रता में भी कमी आने लगती है.

यूरिन रोकना

यूरिन रोकना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, यह जानते हुए भी लोगों में यूरिन रोकने की बुरी आदत होती है. यूरिन के ज़रिए शरीर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं. अगर थोड़ा-सा भी यूरिन शरीर में रह जाता है, तो संक्रमण होने का ख़तरा बढ़ जाता है. 2-3 घंटे से अधिक समय तक यूरिन रोकने से किडनी स्टोन और ब्लैडर में सूजन की समस्या हो सकती है. बहुत देर तक यूरिन रोकने से यूटीआई (यूरिन ट्रैक्ट इंफेक्शन) की समस्या हो सकती है, जिसके कारण यूरिनरी ट्रैक में दर्द और यूरिन के साथ-साथ खून भी आने लगता है.

– अभिषेक शर्मा

क्यों एनीमिक होती हैं भारतीय महिलाएं? (Anemia: A Common Problem Among Indian Women)

Anemia, Common Problem, Indian Women

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यूं तो हमारे देश में आर्थिक से लेकर सामाजिक सुधार हो रहे हैं, लेकिन ऐसे में जब इस तरह की ख़बरें सामने आती हैं, तो रुककर सोचने की ज़रूरत पड़ जाती है. यूं तो हमारे देश में आर्थिक से लेकर सामाजिक सुधार हो रहे हैं, लेकिन ऐसे में जब इस तरह की ख़बरें सामने आती हैं, तो रुककर सोचने की ज़रूरत पड़ जाती है. हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई है कि भारत में सबसे अधिक एनीमिक महिलाएं हैं. द ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट के इस सर्वे के मुताबिक़ 15 से लेकर 49 साल तक की 51% भारतीय महिलाएं एनीमिक हैं. वे आयरन डेफिशियंसी झेल रही हैं, वे पोषक आहार नहीं ले रहीं… कुल मिलाकर वे स्वस्थ नहीं हैं. यह 2017 की रिपोर्ट है, जबकि वर्ष 2016 तक 48% महिलाएं एनीमिक थीं यानी यह आंकड़ा अब बढ़ गया है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि 15-49 साल की उम्र यानी युवावस्था, रिप्रोडक्शन की एज में इस तरह का कुपोषण, जिसका सीधा असर आनेवाली पीढ़ी पर पड़ता नज़र आएगा. यदि मां स्वस्थ नहीं, तो बच्चा भी स्वस्थ नहीं होगा.

क्या वजह है?

एक्सपर्ट्स की मानें, तो मात्र कुपोषण ही सबसे बड़ी या एकमात्र वजह नहीं है, बल्कि स्वच्छता की कमी भी एक बड़ा कारण है, क्योंकि पूअर हाइजीन पोषण को शरीर में एब्ज़ॉर्ब नहीं होने देती. इसके अलावा जागरूकता की कमी, अशिक्षा और परिवार के सामने ख़ुद को कम महत्व देना यानी पहले परिवार की ख़ुशी, उनका खाना-पीना, ख़ुद के स्वास्थ्य को महत्व नहीं देना भी प्रमुख कारण हैं.

सामाजिक व पारिवारिक ढांचा

  •  हमारा समाज आज भी इसी सोच को महत्व देता है कि महिलाओं का परम धर्म है पति, बच्चे व परिवार का ख़्याल रखना.
  •  इस पूरी सोच में, इस पूरे ढांचे में कहीं भी इस बात या इस ख़्याल तक की जगह नहीं रहती कि महिलाओं को अपने बारे में भी सोचना है
  •  उनका स्वास्थ्य भी ज़रूरी है, यह उन्हें सिखाया ही नहीं जाता.
  • यदि वे अपने बारे में सोचें भी तो इसे स्वार्थ से जोड़ दिया जाता है. पति व बच्चों से पहले खाना खा लेनेवाली महिलाओं को ग़ैरज़िम्मेदार व स्वार्थी करार दिया जाता है.
  • बचपन से ही उन्हें यह सीख दी जाती है कि तुम्हारा फ़र्ज़ है परिवार की देख-रेख करना. इस सीख में अपनी देख-रेख या अपना ख़्याल रखने को कहीं भी तवज्जो नहीं दी जाती.
  • यही वजह है कि उनकी अपनी सोच भी इसी तरह की हो जाती है. अगर वे ग़लती से भी अपने बारे में सोच लें, तो उन्हें अपराधबोध होने लगता है.
  • शादी के बाद पति को भी वे बच्चे की तरह ही पालती हैं. उसकी छोटी-छोटी ज़रूरतों का ख़्याल रखने से लेकर हर बात मानना उसका पत्नी धर्म बन जाता है. लेकिन इस बीच वो जाने-अनजाने ख़ुद के स्वास्थ्य को सबसे अधिक नज़रअंदाज़ करती है.
  • वो पुरुष है, तो उसके स्वास्थ्य की ज़िम्मेदारी पत्नी की होती है. उसे पोषक आहार, मनपसंद खाना, उसकी नींद पूरी होना… इस तरह की बातों का ख़्याल रखना ही पत्नी का पहला धर्म है.
  • ऐसे में यदि पत्नी बीमार भी हो जाए, तो उसे इस बात की फ़िक्र नहीं रहती कि वो अस्वस्थ है, बल्कि उसे यह लगता है कि पूरा परिवार उसकी बीमारी के कारण परेशान हो रहा है. न कोई ढंग से खा-पी रहा है, न कोई घर का काम ठीक से हो रहा है.
  • पत्नी यदि अपने विषय में कुछ कहे भी और अगर वो हाउसवाइफ है तब तो उसे अक्सर यह सुनने को मिलता है कि आख़िर सारा दिन घर में पड़ी रहती हो, तुम्हारे पास काम ही क्या है?
  • कुल मिलाकर स्त्री के स्वास्थ्य के महत्व को हमारे यहां सबसे कम महत्व दिया जाता है या फिर कहें कि महत्व दिया ही नहीं जाता.

जागरूकता की कमी और अशिक्षा

  • जागरूकता की कमी की सबसे बड़ी वजह यही है कि बचपन से ही उनका पालन-पोषण इसी तरह से किया जाता है कि महिलाएं ख़ुद भी अपने स्वास्थ्य को महत्व नहीं देतीं.
  • उन्हें यही लगता है कि परिवार व पति की सेवा ही सबसे ज़रूरी है और हां, यदि वे स्वयं गर्भवती हों, तो उन्हें अपने स्वास्थ्य का ख़्याल रखना है, क्योंकि यह आनेवाले बच्चे की सेहत से जुड़ा है.
  • लेकिन यदि वे पहले से ही अस्वस्थ हैं, तो ज़ाहिर है मात्र गर्भावस्था के दौरान अपना ख़्याल रखने से भी सब कुछ ठीक नहीं होगा.
  • गर्भावस्था के दौरान भी आयरन टैबलेट्स या बैलेंस्ड डायट वो नहीं लेतीं.
  • अधिकांश महिलाओं को पोषक आहार के संबंध में जानकारी ही नहीं है और न ही वे इसे महत्व देती हैं.
  • हमेशा से पति व बच्चों की लंबी उम्र व सलामती के लिए उन्हें व्रत-उपवास के बहाने भूखा रहने की सीख दी जाती है.
  • जो महिलाएं शाकाहारी हैं, उन्हें किस तरह से अपने डायट को बैलेंस करना है, इसकी जानकारी भी नहीं होती.
  • बहुत ज़रूरी है कि महिलाओं को जागरूक किया जाए, अपने प्रति संवेदनशील बनाया जाए.
  • इसी तरह से अशिक्षा भी बहुत बड़ी वजह है, क्योंकि कम पढ़ी-लिखी महिलाएं तो जागरूकता से लेकर हाइजीन तक के महत्व को नहीं समझ पातीं.
  • साफ़-सफ़ाई की कमी किस तरह से लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, यह समझना बेहद ज़रूरी है. लोग कई गंभीर रोगों के शिकार हो सकते हैं, जिससे उनके शरीर में पोषक तत्व ग्रहण व शोषित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है.
  • भोजन को किस तरह से संतुलित व पोषक बनाया जाए, इसकी जानकारी भी अधिकांश लोगों को नहीं होती.

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ग़रीबी भी है एक बड़ी वजह

  • आयरन की कमी के चलते होनेवाले एनीमिया की सबसे बड़ी वजह ग़रीबी व कुपोषण है.
  • ग़रीबी के चलते लोग ठीक से खाने का जुगाड़ ही नहीं कर पाते, तो पोषक आहार दूर की बात है.
  • वहीं उन्हें इन तमाम चीज़ों की जानकारी व महत्व के विषय में भी अंदाज़ा नहीं होता.क्या किया जा सकता है?
  • सरकार की ओर से प्रयास ज़रूर किए जा रहे हैं, लेकिन वो नाकाफ़ी हैं.
  • द ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट में इस ओर भी इशारा किया गया है कि बेहतर होगा भारत ग़रीब व आर्थिक रूप से कमज़ोर यानी लो इनकम देशों से सीखे, क्योंकि वे हमसे बेहतर तरी़के से इस समस्या को सुलझा पाए हैं.
  • ब्राज़ील ने ज़ीरो हंगर स्ट्रैटिजी अपनाई है, जिसमें भोजन का प्रबंधन, छोटे किसानों को मज़बूती प्रदान करना और आय के साधनों को उत्पन्न करने जैसे प्रावधानों पर ज़ोर दिया गया है.
  • ब्राज़ील के अलावा पेरू, घाना, वियतनाम जैसे देशों ने भी कुपोषण को तेज़ी से कम करने में सफलता पाई है.

नेशनल न्यूट्रिशनल एनीमिया प्रोफिलैक्सिस प्रोग्राम (एनएनएपीपी) का रोल?

  • जहां तक भारत की बात है, तो कई ग़रीब देश भी एनीमिया व कुपोषण की समस्या से हमसे बेहतर तरी़के से लड़ने में कारगर सिद्ध हुए हैं, तो हमें उनसे सीखना होगा.
  • भारत में एनीमिया से लड़ने के लिए नेशनल न्यूट्रिशनल एनीमिया प्रोफिलैक्सिस प्रोग्राम (एनएनएपीपी) 1970 से चल रहा है. कुछ वर्ष पहले इस प्रोग्राम के तहत किशोर बच्चों व गर्भवती महिलाओं में आयरन और फोलेट टैबलेट्स बांटने का साप्ताहिक कार्यक्रम शुरू हुआ, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि मात्र दवाएं उन्हें सौंप देना ही कोई विकल्प नहीं है.
  • यह देखना भी ज़रूरी है कि क्या वो ये दवाएं ले रही हैं? एक अन्य सर्वे से पता चला कि बहुत कम महिलाएं ये टैबलेट्स नियमित रूप से लेती हैं.
  • इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि आयरन टैबलेट्स के काफ़ी साइड इफेक्ट्स होते हैं, जैसे- उल्टियां व दस्त और ये गर्भावस्था को और मुश्किल बना देते हैं. यही वजह है कि अधिकतर महिलाएं इन्हें लेना छोड़ देती हैं.
  • जबकि होना यह चाहिए कि उन्हें इन साइड इफेक्ट्स से जूझने का बेहतर तरीक़ा या विकल्प बताना चाहिए.

भारत में गर्भवती स्त्रियां गंभीर रूप से कुपोषण की शिकार हैं- सर्वे

  • न स़िर्फ गर्भावस्था में, बल्कि भारतीय स्त्रियां हर वर्ग में कम स्वस्थ पाई गईं. उनका व उनके बच्चों का स्वास्थ्य व वज़न अन्य ग़रीब देशों की स्त्रियों व बच्चों के मुक़ाबले कम पाया गया. भारत में किशोरावस्था में लड़कियों के एनीमिक होने के पीछे प्रमुख वजह यहां की यह संस्कृति बताई गई, जिसमें लिंग के आधार पर हर स्तर पर भेदभाव किया जाता है.
  • बेटे को पोषक आहार देना और बेटी के स्वास्थ्य को नज़रअंदाज़ करना हमारे परिवारों में देखा जाता है. स़िर्फ ग़रीब तबके में ही नहीं, पढ़े-लिखे व खाते-पीते घरों में भी इस तरह का लिंग भेद काफ़ी पाया जाता है.
  • पोषण की कमी के कारण होनेवाला एनीमिया यानी आयरन और फॉलिक एसिड की कमी से जो एनीमिया होता है, वह परोक्ष या अपरोक्ष रूप से गर्भावस्था के दौरान लगभग 20% मृत्यु के लिए ज़िम्मेदार होता है.
  • दवाओं के साथ-साथ पोषक आहार किस तरह से इस समस्या को कम कर सकता है, कौन-कौन से आहार के ज़रिए पोषण पाया जा सकता है, इस तरह की जानकारी भी महिलाओं व उनके परिजनों को भी देनी आवश्यक है.

 – गीता शर्मा

 

बर्थ डे बॉय जॉन अब्राहम, 45 की एज में भी फिट, देखें ये हॉट तस्वीरें! (Happy Birthday John Abraham)

Happy Birthday John Abraham

Happy Birthday John Abrahamबॉलीवुड के फिटेस्ट ऐक्टर माने जाने वाले जॉन अब्राहम (John Abraham) हो गए हैं 45 साल के. लेकिन जॉन की फिटनेस, उनसे कम उम्र वाले ऐक्टर पर भी भारी है. हैंडसम हंक जॉन की फीमेल फैन फॉलोइंग भी ज़बरदस्त है. 17 दिसंबर 1972 को केरल में जन्मे जॉन ने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की और आज ऐक्टर और प्रोड्यूसर बन गए हैं. बाइक्स के शौक़ीन जॉन फिटनेस को लेकर काफी सीरियस हैं. वो दूसरों को भी फिट रहने की सलाह देते हैं. फिटनेस फ्रीक जॉन जिम जाने का एक भी मौक़ा नहीं छोड़ते हैं. मद्रास कैफे के प्रमोशन के दौरान जॉन का एक छोटा-सा ऐक्सीडेंट हो गया था, लेकिन फिर भी जॉन आराम करने की बजाय अगले दिन जिम में वर्कआउट करने पहुंच गए.

फिलहाल जॉन अपनी अगली फिल्म परमाणु – द स्टोरी ऑफ पोखरण में बिज़ी हैं, जिसमें उनसे साथ डायना पेंटी भी हैं.

मेरी सहेली (Meri Saheli) की ओर से जॉन को ए वेरी हैप्पी बर्थडे.

जॉन का नाम बॉलीवुड के हॉट ऐक्टर्स में शुमार है, आइए देखते हैं उनकी कुछ हॉट पिक्चर्स.

Happy Birthday John AbrahamJohn Abraham

Happy Birthday John Abraham

John Abraham

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आज मैं अपने सपने को जी रही हूं… श्‍वेता मेहता: फिटनेस एथलीट/रोडीज़ राइज़िंग 2017 विनर (I Am Living My Dream: Shweta Mehta- Fitness Athlete/Roadies Rising 2017 Winner)

Shweta Mehta, Fitness Athlete, Roadies Rising 2017 Winner

हर नज़र में सवाल था, हर लफ़्ज़ पर ख़ामोशी… मुझसे मेरा वजूद पूछ रहा था, कितनी तन्हा है तू और कितनी है टूटी… मैंने अपने ख़्वाबों की धड़कनों को सुना, तो हर आहट में एक और नया सपना बुना… देखनेवाले देखते रह जाएंगे, मैंने फूलों को नहीं, है कांटों को चुना… हर मोड़ पर उलझी हूं मैं, हर राह पर अपना ही अक्स देखा है मैंने… वजूद मेरा इतना कमज़ोर नहीं, सूरज में तपकर रातों में चलना सीखा है मैंने…
ये पंक्तियां ख़ासतौर से हमने एक ऐसी शख़्सियत के मुकम्मल व्यक्तित्व को बयां करने के लिए लिखी हैं, जो शब्दों से परे है… अपने सपनों को उसने अपने हौसलों से जीवंत किया और आज हर ज़ुबान से उसका नाम बेहद सम्मान और गर्व से लिया जाता है. हम बात कर रहे हैं फिटनेस एथलीट और रोडीज़ राइज़िंग 2017 की विनर (Roadies Rising 2017 Winner) श्‍वेता मेहता (Shweta Mehta) की. क्या कुछ महसूस करती हैं श्‍वेता अपनी इस मुश्किल, लेकिन ख़ूबसूरत जर्नी के बारे में, ख़ुद उनसे ही पूछ लेते हैं…

Shweta Mehta, Fitness Athlete, Roadies Rising 2017 Winner

एक आईआईटी प्रोफेशनल से फिटनेस एथलीट तक का सफ़र ज़ाहिर है आसान नहीं रहा होगा?
जी हां, आसान तो नहीं था और वैसे भी जो आसानी से मिल जाए, उसकी क़ीमत भी कहां समझ पाते हैं हम. अगर मैं अपनी बात करूं, तो एक अच्छी-ख़ासी नौकरी थी, सभी पैरेंट्स की तरह मेरे भी पैरेंट्स चाहते थे कि शादी होकर बेटी सेटल हो जाए. अच्छा घर हो, बेहतर ज़िंदगी हो… लेकिन मुझे यह मंज़ूर नहीं था. मैं कुछ अलग करना चाहती थी. यही वजह है कि आज मैं अपने सपने को जी रही हूं.

क्या आप बचपन से ही फिटनेस फ्रीक थीं?
आप शायद विश्‍वास भी नहीं करेंगे कि मैंने जिम जाना मात्र 3 साल पहले ही शुरू किया था. इस बीच मैंने लगभग 5-6 कॉम्पटीशन्स जीते. आज फिटनेस मेरी पहचान बन चुकी है, वरना एक समय था जब मैं बैक पेन से बेहद परेशान थी और मेरा 12 घंटे का डेस्क जॉब इस दर्द को और बढ़ा रहा था. मुझे एक्सरसाइज़ करने का समय ही नहीं मिलता था, लेकिन मेरे लिए यह ज़रूरी हो गया था कि सेक्योर फ्यूचर, जॉब, सैलरी के मायाजाल से बाहर निकलूं. मैंने हिम्मत की और आज रिज़ल्ट सबके सामने है.

घरवालों की क्या प्रतिक्रिया थी?
ज़ाहिर है कि शुरुआत में तो वो भी थोड़े से परेशान हुए थे. मेरी बिकनी में पिक्चर्स देखकर मॉम को थोड़ा बुरा लगा था, क्योंकि आस-पड़ोसवाले, रिश्तेदार, समाज के लोग उन्हें ताने भी देते थे कि क्या तुम्हारी बेटी नाइट क्लब में काम करती है, जो ऐसे कपड़े पहनती है… लेकिन मैं ख़ुशनसीब हूं कि मेरे पैरेंट्स ने मुझे बहुत सपोर्ट किया, जबकि मैं हरियाणा से हूं और मैंने पहले कभी स्लीवलेस ड्रेस तक नहीं पहना था. पापा को भी स्किन रिवीलिंग कपड़े पसंद नहीं थे. उसके बावजूद भी मेरे पैरेंट्स ने स़िर्फ मुझे सपोर्ट किया, बल्कि लोगों की बहुत-सी बातें मुझ तक पहुंचने तक नहीं दीं कि कहीं मैं निराश न हो जाऊं. यह ज़रूर था कि उन्होंने मुझे एक बात कही थी कि हम अगर तुम्हें सपोर्ट कर रहे हैं, तो तुम्हारी ज़िम्मेदारी बनती है कि तुम कुछ बनकर दिखाओ. फिर रोडीज़ में भी मैं ऑडिशन्स में सिलेक्ट नहीं हुई थी, तो उनका कॉन्फिडेंस थोड़ा हिला हुआ ज़रूर था, लेकिन मेरे भाई को मुझ पर भरोसा था, तो मैंने फिर क़िस्मत आज़माई और मैं न स़िर्फ सिलेक्ट हुई, बल्कि विनर भी बनी.

अब समाज के लोगों की क्या प्रतिक्रिया रहती है?
जो लोग ताने मारते थे, आज वही सम्मान देते हैं. मैंने हिम्मत नहीं हारी, न अपना रास्ता बदला, बल्कि बदले वो लोग, जो मुझे और मेरे परिवार को बातें सुनाते थे. समाज ने अपनी सोच बदली, इसी तरह लोगों को अपना नज़रिया बदलना चाहिए. जब तक वो नहीं बदलेंगे, इसी तरह से चीज़ें चलती रहेंगी.
मेरा निजी अनुभव है, मेरी मम्मी टीचर हैं और वो अक्सर मुझे कहती थीं कि अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर बिकनी की पिक्चर्स डिलीट कर दे… मैं जानती हूं कि उन्हें क्या-क्या नहीं सुनना पड़ता होगा, लेकिन मैं दूसरों के लिए अपने सपने नहीं तोड़ना चाहती थी, मुझे ख़ुद पर भरोसा था, इसलिए इन बातों ने मेरा कॉन्फिडेंस और बढ़ाया.

रोडीज़ का सफ़र कैसा रहा?
सच पूछो, तो रोडीज़ की जर्नी आसान नहीं थी. अलग-अलग तरह के लोगों के साथ रहना, उनके साथ कॉम्पटीशन करना बेहद मुश्किल था, क्योंकि सब अपने आप में बेस्ट थे और मेरी प्रॉब्लम यह थी कि मैं शुरुआत में इतना समझ नहीं पाती थी कि कैसे रिएक्ट करूं, क्या बोलूं, क्योंकि हमारी तहज़ीब और संस्कार यही सिखाते हैं कि जब कोई और बोल रहा हूं, तो बीच में मत बोलो, जब कोई बड़ा बात कर रहा तो बीच में मत टोको… लेकिन वहां तो सब कुछ अलग था… कैमरे के लिए भी बहुत कुछ किया जाता था, छीना-झपटी और लड़ाई-झगड़े… एक व़क्त ऐसा आ गया था, जब मुझे लगा कि मैं गिवअप कर दूंगी… लेकिन फिर मुझे समझ में आया कि ऐसे तो गेम नहीं खेला जा सकता. मैंने गिवअप का आइडिया ड्रॉप किया और बोलना शुरू किया. जहां ज़रूरत महसूस हुई, वहां टोकना शुरू किया. इस तरह मैं गेम को समझ पाई और फिर विनर भी बनी.

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सीरियल बढ़ो बहू में भी आप नज़र आ रही हैं, तो एक्टिंग की तरफ़ रुझान बढ़ रहा है?
एक्टिंग से मुझे परहेज़ नहीं है, लेकिन रोल ऐसा हो, जो मुझे मेरी फिटनेस से दूर न करे. मुझे ख़ासतौर से इस रोल के लिए अप्रोच किया गया, क्योंकि मेकर्स को लगा कि मेरे अलावा कोई और नहीं कर पाएगा, तो यह सुनकर अच्छा लगा कि मेरी पर्सनैलिटी के अनुरूप रोल मिल रहा है, इसलिए हामी भर दी.

बॉलीवुड भी करना चाहेंगी आप?
क्यों नहीं, हर वो चीज़, जो मेरी फिटनेस के आड़े न आए, मैं करूंगी. आज भी सीरियल की शूटिंग में भी काफ़ी बिज़ी रहती हूं, लेकिन चाहे रात के 11 बज जाएं मैं अपना जिम रूटीन नहीं छोड़ती.
वैसे भी मुझे लगता है कि अगर रियलिटी शो के बाद टीवी सीरियल्स और बॉलीवुड का मौका मिल रहा है, तो करना ही चाहिए, क्योंकि हर जगह के ऑडियंस अलग होते हैं. मुझे अपनी पहचान हर तरह के ऑडियंस में बनानी है, चाहे यंगस्टर्स हों, फैमिली हो या देश की आम पब्लिक. रोडीज़ के ऑडिंस अलग हैं, इसी तरह बढ़ो बहो फैमिली शो है और बॉलीवुड तो देश की जनता की धड़कन है.

आज की लाइफस्टाल में फिटनेस का क्या रोल देखती हैं आप? समय बदल गया है, लोग फिटनेस को लेकर थोड़े अलर्ट हुए हैं, लेकिन संख्या अब भी कम है…
हमारे यहां प्रॉब्लम यह है कि हम समय और परिस्थितियों के अनुसार न ख़ुद को ढालते हैं और न ही अपना डायट बदलते हैं. उदाहरण के तौर पर कोई कहता है कि भई हम तो पंजाबी हैं, हम तो तगड़ा ही खाते हैं, कोई कहता है हम गुजराती हैं, मीठा तो छोड़ नहीं सकते… इसी तरह से हम ट्रेडिशन के नाम पर वही डायट फॉलो करते हैं, जो हमारे दादाजी के समय में खाया जाता था. लेकिन यह भी तो सोचो कि वो समय अलग था, उनका काम अलग था. आज हम सभी डेस्क जॉब करते हैं, कहां से पचेगा तगड़ा खाना…?
बेहतर होगा कि मीठा कंट्रोल करें, ऑयली फूड अवॉइड करें, एक्सरसाइज़ करें. ख़ुद की बॉडी से प्यार करें. तब जाकर आप हेल्दी बनोगे.

आप अपने डायट प्लान के बारे में बताइए
कुछ चीज़ें हम सभी को पता होती हैं, लेकिन हम फॉलो नही करते, जैसे- पानी भरपूर पीएं, ऑयली-फैटी फूड कम खाएं, मीठा ज़्यादा न खाएं, प्रोटीन अधिक लें… आदि… लेकिन हम जानते हुए भी फॉलो नहीं करते.
मैं बस हेल्दी चीज़ें लेती हूं और अनहेल्दी चीज़ें अवॉइड करती हूं, यही है डायट.
मैं अपना खाना ख़ुद बनाती हूं. दिन में 6 बार खाती हूं, 2 बार जिम जाती हूं… मैं अपना ये रूटीन नहीं बदलती और इसीलिए फिट रहती हूं.

फ्यूचर प्लान्स क्या हैं?
मैं रियलिटी शोज़ करना चाहती हूं. मैं दिल से चाहती हूं कि फियर फैक्टर का हिस्सा बनूं. मुझे चैलेंजेस पसंद हैं.
वैसे भी आपको वही करना चाहिए, जो आपको पसंद हो, इसीलिए मेरा यूट्यूब चैनल भी आ रहा है, जिसमें हमारी टैगलाइन यही है- Do what you want to do (डू व्हाट यू वॉन्ट टु डू) यानी आप वही करें, जो आप करना चाहते हैं.

शहर में अपने प्रदेश की कोई ख़ास बात जो आप मिस करती हैं?
जो अपनापन वहां है, वो इन शहरों में नहीं है. एक अलग ही एनर्जी होती है वहां. कोई घर पर आ जाए, तो उसकी मेहमांनवाज़ी में हमें अलग ही ख़ुशी होती है. हमें लगता है कि क्या बनाकर खिला दें, क्या नहीं… कहीं कोई कमी न रह जाए. लेकिन यहां तो कोई पानी भी नहीं पूछता… तो एक चीज़ बहुत मिस करती हूं मैं.

फ्री टाइम में क्या करना पसंद है?
सच पूछो, तो फ्री टाइम मिलता ही कहां है. बाकी जो समय है वो मैं अपने मील्स बनाने में बिताती हूं, मैं ख़ुद को बेटर कैसे कर सकती हूं इसी कोशिश में रहती हूं और हम सभी को यही कोशिश करनी चाहिए.

आपके तो लाखों फैंस हैं, आप किसकी फैन हैं?
मुझे ड्वेन जॉनसन पसंद है. हां, अगर बात इंडिया की है, तो एक बंदा है जिसकी मैं ज़बर्दस्त फैन हूं, वो है दिलजीत दुसांज. उनकी स्ट्रगल स्टोरी हमेशा मुझे इंस्पायर करती है. किस तरह एक गांव से निकलर लाखों-करोड़ों की भीड़ में अपनी पहचान बनाई और उसके बाद भी वो इतने सहज हैं, उनके पांव ज़मीन से जुड़े हैं… न कोई घमंड, न एटीट्यूड. वो सच में एक प्रेरणास्रोत हैं.

कहीं आप भी टॉयलेट में फोन तो नहीं यूज़ करते? पड़ सकते हैं बीमार (Don’t Take Your Phone To The Bathroom)

mobile phone use in bathroom

कहीं आप भी अक्सर बाथरूम में अपना मोबाइल फोन तो नहीं ले जाते हैं. अगर ऐसा है तो सावधान हो जाइए, क्योंकि बाथरूम में फोन ले जाना आपकी सेहत के लिए ख़तरनाक हो सकता है.  

mobile phone use in bathroom

एनल्स ऑफ क्लिनिक माइक्रोबायोलॉजी में छपी हुई एक स्टडी में ये बात सामने आई है कि 95 फ़ीसदी हेल्थ केयर वर्क्स के मोबाइल फोन पर बैक्टीरिया के जमा होने के प्रमाण पाए गए हैं. ऐसे बैक्टीरिया से गंभीर इंफेक्शन हो सकता है.

कई लोगों दिन भर के बिज़ी शेड्यूल में अक्सर न्यूज़ या मैसेजेस नहीं पढ़ पाते हैं. ऐसे में घर जाकर आराम से बाथरूम में बैठकर फोन चेक करते हैं. पर ऐसा करके वो जाने अनजाने में कई बीमारियों को दावत दे बैठते हैं.

रेस्टरूम में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस फोन पर चिपक जाते हैं. जो फिर हर उस जगह फैलते हैं, जहां-जहां आप फोन को रखते हैं, जैसे- आपकी जेब में, पर्स में, हाथ में. इसके अलावा जितनी बार आप अपना फोन मैसेज टाइप करने के लिए इस्तेमाल करते हैं, उतनी बार ये बैक्टीरिया आपके कीपैड पर चिपक जाते हैं. एक रिसर्च के मुताबिक़ मोबाइल इस्तेमाल करने वाला हर व्यक्ति अपने फोन को एक दिन में कम से कम 2600 बार टच करता है यानी ढेर सारा इंफेक्शन.

ये हैं ज़्यादा ख़तरे में

इन लोगों को ख़ास ख़्याल रखने की ज़रूरत है.

  • डायबिटिक 
  • कीमोथेरेपी लेने वाले
  • जिसे गंभीर बीमारी हो
  • किसी प्रकार का ट्रीटमेंट लेने वाले मरीज़

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इन बातों का ख़्याल रखें

अगर आप फोन से होने वाली इन बीमारियों को रिस्क को कम करना चाहते हैं, तो इन बातों का ख़ास ख़्याल रखें.

  • फोन टॉयलेट में न ले जाएं.
  • बाथरूम यूज़ करने के बाद या टॉयलेट से आने का बाद हाथ अच्छी तरह से हैंड वॉश से धो लें.
  • बाथरूम की सफ़ाई के बाद भी सीधे फोन को टच न करें. हाथों को अच्छी तरह से धोकर ही फोन यूज़ करें.
  • अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करें.
  • फोन और स्क्रीन का फोन के बनाए गए स्पेशल क्लींज़र से ही क्लीन करें.

टॉयलेट सीट से ज़्यादा बैक्टीरिया

यूनिवर्सिटी ऑफ एरिज़ोना ने भी अपनी रिसर्च में पाया है कि फोन पर टॉयलेट सीट से 10 गुना ज़्यादा बैक्टीरिया पाए जाते हैं.

डायबिटिक महिलाओं की उम्र बढ़ाएगी कॉफी और चाय (Coffee And Tea Could Keep Diabetic Woman living longer)

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यूं तो कैफीनयुक्त पेय का सेवन कम ही करने की सलाह दी जाती है. लेकिन हाल ही में हुए एक रिसर्च में दावा किया गया है कि कॉफी महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद होती है. पुर्तगल में हुए एक रिसर्च में वैज्ञानिकों ने ये दावा किया गया है कि डायबिटिक महिलाएं अगर कॉफी का सेवन करें, तो वो लंबी ज़िंदगी जी सकती हैं. लिस्बन में हुए स्टडी ऑफ डायबिटिज़ एनुअल मीटिंग में इस रिसर्च को प्रेज़ेंट किया गया.

साल 1999 से 2010 तक में 3000 लोगों की लिस्ट बनाई गई, जिसमें उन लोगों को शामिल किया गया, जिनकी मौत कैफीन और डायबिटीज़ की वजह से हुई थी. रिसर्च में पाया गया कि जो डायबिटिक महिलाएं रोज़ाना एक कप कॉफी यानी 100एमजी कैफीन का सेवन करती हैं उनमें कैफीन का सेवन न करने वाली डायबिटिक महिलाओं के मुकाबले मौत का ख़तरा 51% तक कम हो जाता है. जबकि जो महिलाएं 2 कप कॉफी पीती हैं, उनमें मौत का ख़तरा 66% तक कम हो जाता है. इस रिसर्च में शामिल डायबिटिक पुरुषों पर इसका कोई असर नहीं दिखा.

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जो महिलाएं चाय का सेवन अधिक करती हैं, उनमें कैंसर का ख़तरा 80 फीसदी तक कम पाया गया. रिसर्चस का कहना है कि इस दिशा में अभई और रिसर्च करना बाकी है. लेकिन कैफीन की वजह से डायबिटिक महिलाओं की उम्र में इज़ाफा हुआ है ये बात तो तय है.

वेट लॉस टिप ऑफ द डे: 15 आसान-असरदार टिप्स भी घटाते हैं वज़न (Weight Loss Tip Of The Day: 15 Easy Diet Tips For Weight Loss)

Easy Diet Tips

Easy Diet Tips

15 आसान-असरदार टिप्स घटाते हैं वज़न
1. वर्किंग वुमन ऑफिस से आने के बाद इतनी थक जाती हैं कि अक्सर वही बनाती हैं जिसमें ज़्यादा मेहनत ना लगे. ऐसे में हरी सब्ज़ियां घर में बहुत कम ही बन पाती हैं. इससे बचने के लिए छुट्टी हेल्दी फल व सब्ज़ियों को काटकर फ्रिज में रख दें.
2. भुने चने, मुरमुरे, पॉपकॉर्न, ब्राउन ब्रेड आदि हमेशा फि्र्ज में रखें, ताकि भूख लगने पर भी आप हेल्दी खा सकें.
3. ऑफिस में टिफिन के अलावा ताज़े फल, दही, ड्राईफ्रूट्स, फैट-फ्री स्नैक्स आदि भी साथ ले जाएं, ताकि भूख लगने पर आप जंक फूड खाने से बच सकें.
4. सूप, सलाद, स्प्राउट्स, फ्रूट्स आदि स्लो टु ईट फूड माने जाते हैं. इनका सेवन हम धीरे-धीरे करते हैं, जिससे संतुष्टि मिलती है और हम ज़्यादा खाने से बच जाते हैं.
5. मूंग दाल चीला, बेसन का चीला, ऑमलेट आदि बनाने के लिए नॉन-स्टिक तवे का इस्तेमाल करें, इससे तेल कम इस्तेमाल होता है और आप हेल्दी डायट ले पाती हैं.

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6. दलिया, ब्राउन राइस आदि को बनाते समय उसमें ढेर सारी सब्ज़ियां मिला दें.
7. यदि पार्टी में जा रही हैं तो घर से निकलने से पहले हेल्दी स्नैक्स खा लें. इससे आप पार्टी में ओवर ईटिंग से बच जाएंगी.
8. इसी तरह शादी-ब्याह में ज़रूरी नहीं कि सारी चीज़ें खाई ही जाएं, स़िर्फ अपनी पसंद की चीज़ ही खाएं वो भी कम मात्रा में.
9. होटल में भी सारी चीज़ें इसलिए चट न कर जाएं कि उसमें आपके पैसे लगे हैं. यदि खाना बहुत बच गया है तो बेहतर होगा उसे पैक करा के घर ले जाएं.
10. अपने लंच व डिनर में पत्तेदार सब्ज़ियां जैसे चौलाई, शलजम के पत्ते, मूली के पत्ते, सरसों के पत्ते, बंदगोभी, पालक, लेट्यूस आदि शामिल करें. इनमें कई तरह के विटामिन्स होते हैं और वसा रहित होने के कारण ये नो कैलोरी में गिने जाते हैं.

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11. डार्क कलर के फल व सब्ज़ियों में एंटी एजिंग तत्व होते हैं, इनके सेवन से आप बढ़ती उम्र के संकेतों को आसानी से रोक सकती हैं. अतः अपने डेली डायट प्लान में पपीता, तरबूज, अनार, गाजर, शिमला मिर्च, टमाटर आदि को ज़रूर शामिल करें.
12. डायटिंग के दौरान होने वाली क्रेविंग रोकने के लिए कुछ खाने से पहले सूप, फ्रेश जूस, नारियल पानी, हर्बल टी पीएं. ये हेल्दी होते हैं और क्रेविंग से राहत भी दिलाते हैं.
13. क्रेविंग को रोकने का एक आसान तरीक़ा है ब्रश करना. जी हां, जब भी क्रेविंग बढ़े, तो टूथब्रश से दांत साफ़ करें, भूख ख़त्म हो जाएगी.
14. दिन में 4-5 बार थोड़ा-थोड़ा खाएं. इससे आपका वज़न भी कंट्रोल में रहेगा और आप अपनी भूख पर नियंत्रण रख पाएंगी.
15. सुबह के नाश्ते में एग व्हाइट खाना बेहतरीन विकल्प है. इसमें प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है जिससे थोड़ा खाकर भी शरीर को पर्याप्त पोषण मिलता है.

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वेट लॉस टिप ऑफ द डे: क्या है वज़न और कैलोरी का संबंध? (Weight Loss Tip Of The Day: How To Lose Weight Fast)

How To Lose Weight

How To Lose Weight

क्या है वज़न और कैलोरी का संबंध?
आमतौर पर देखा गया है कि बहुत से लोग मोटापा कम करने के लिए स़िर्फ सूप या सलाद का सेवन करते हैं, लेकिन यह तरीक़ा सही नहीं है. इन तरीक़ों से फ़ायदे की जगह नुक़सान ही होता है. वज़न कम करने के लिए आहार में कैलोरी कम करना बहुत ज़रूरी है, परंतु इस तरह नहीं.

10 दिनों में 1 किलो वज़न घटाएं
किसी भी व्यक्ति को एक किलो वज़न कम करने के लिए लगभग 7800 कैलोरी बर्न करने की ज़रूरत होती है, लेकिन यह एक दिन में नहीं किया जा सकता. इसके लिए सही प्लानिंग और उसे फॉलो करने की ज़रूरत है. आहार और व्यायाम की सही प्लानिंग से आसानी से वज़न कम किया जा सकता है.

कैसे करें प्लानिंग?
यदि आपको दिनभर में 2200 कैलोरीज़ की ज़रूरत है और आपको अपना वज़न कम करना है, तो ऐसी स्थिति में आपको 1700 कैलोरी वाला आहार प्रतिदिन लेना होगा. साथ ही हल्का व्यायाम भी करें, जैसे पैदल चलना, हल्के डांस व एरोबिक्स. इस तरह आपके पैदल चलने से 5 कैलोरी 1 मिनट व एरोबिक्स में 6-7 कैलोरी प्रति मिनट बर्न होगी. इस तरह आप आधा घंटा यानी 30 मिनट पैदल चलें, तो आपकी लगभग 120 कैलोरी बर्न होगी तथा एरोबिक्स से लगभग 200 कैलोरी बर्न होगी. इस तरह एक घंटे में 320 कैलोरी बर्न की जा सकती है. खाने में हमने पहले ही 500 कैलोरी कम की थी. इस तरह कुल 500+300= 800 कैलोरी हम एक दिन में बर्न कर सकते हैं. इस तरह दस दिनों में 8000 कैलोरी बर्न होंगी, परिणामस्वरूप एक किलो वज़न घट जाएगा.

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ब्यूटी फूड
* हेल्दी स्किन पाने के लिए अपनी डायट में ओमेगा-3 एसिड शामिल करें. मछली, अखरोट, अलसी आदि में ओमेगा-3 पाया जाता है.
* रोज़ाना अनन्नास का रस पीने से मोटापा कम होता है और स्किन ग्लो करती है.
* करेला भले ही खाने में टेस्टी न हो, लेकिन ये त्वचा के लिए बहुत फ़ायदेमंद होता है. करेले के सेवन से त्वचा में निखार आता है.
* चौलाई का रस पीने से रक्त की अशुद्धियां ख़त्म होती हैं. शरीर से विशाक्त तत्व बाहर निकलते हैं और मुंहासों से भी राहत मिलती है.

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ब्यूटी फूड
* बालों को लॉन्ग एंड स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए खाने में प्रोटीन से भरपूर सोयाबीन, अंडे, बींस, दही, कम वसा वाले चीज़ आदि शामिल करें.
* यदि बाल जल्दी ऑयली हो जाते हैं और ड्रैंड्रफ की समस्या है तो एक ग्लास पानी में नींबू का रस मिलाएं और सुबह खाली पेट पीएं.
* बालों का झड़ना रोकने के लिए रोज़ाना एक छोटा कप अंकुरित मूंग दाल, काले चने, फल, पत्तेदार सब्ज़ियां और सलाद तथा दही शामिल करें. जल्दी ही बालों का झड़ना थम जाएगा.

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वेट लॉस टिप ऑफ द डे (Weight Loss Tip Of The Day)

Weight Loss Tip

Weight Loss Tip

घर के कामों से वज़न घटाएं
* पोंछा लगाते समय 30 मिनट में 145 कैलोरी खर्च होती है जो ट्रेडमिल पर 15 मिनट दौड़ने के बराबर है.
* कपड़े धोते समय 60 मिनट में 85 कैलोरी बर्न होती है जो 100 सिटअप करने के बराबर है.
* खाना बनाते समय 60 मिनट में 150 कैलोरी खर्च होती है जो 15 मिनट एरोबिक्स करने के बराबर है.
* डस्टिंग करते समय 30 मिनट में 180 कैलोरी खर्च होती है जो 15 मिनट तक साइकिल चलाने के बराबर है.
* गार्डनिंग करते समय 60 मिनट में 250 कैलोरी बर्न होती है जो 25 मिनट सीढ़ी चढ़ने-उतरने के बराबर है.
* बिस्तर लगाते समय 15 मिनट में 66 कैलोरी बर्न होती है जो डेढ़ कि.मी. पैदल चलने के बराबर है.

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जानें वज़न बढ़ने की वजहें
वज़न बढ़ने की वजहें कई हैं, लेकिन व़क्त रहते यदि मोटापे पर कंट्रोल नहीं किया गया, तो कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं इसलिए सबसे पहले वज़न बढ़ने की वजहों को जानना ज़रूरी है.

लाइफ स्टाइल
आधुनिक जीवनशैली ने सुख-सुविधाएं तो बहुत दी हैं, लेकिन उन सुविधाओं का लाभ उठाते हुए लोग शारीरिक श्रम करना ही भूल गए हैं. थोड़ी दूर भी जाना हो तो गाड़ी से ही जाएंगे, पहली मंज़िल पर जाने के लिए भी लिफ्ट का इस्तेमाल करेंगे, दिनभर एसी रूम में आरामकुर्सी से चिपके रहेंगे… लोगों की इन आरामपसंद आदतों ने उन्हें बड़ी-बड़ी बीमारियां दे दी हैं.
आसान है समाधान
बिज़ी दिनचर्या में भी समय निकालकर फिज़िकल एक्सरसाइज़ करना बहुत ज़रूरी है. सही डायट और एक्सरसाइज़ से फिट रहना मुश्किल काम नहीं है. अपनी लाइफ स्टाइल में बदलाव लाकर कोई भी फिट और हेल्दी रह सकता है.

जंक फूड
जंक फूड हमारी ज़िंदगी में इस क़दर शामिल हो गया है कि इसके बिना हम किसी भी सेलिब्रेशन की कल्पना भी नहीं कर सकते और जंक फूड की यही लत मोटापा बढ़ा देती है. बड़े ही नहीं बच्चे भी जंक फूड के आदी हो गए हैं. बड़ों की देखादेखी में अक्सर बच्चे भी पिज़्ज़ा, बर्गर, कोल्ड ड्रिंक आदि जंक फूड की डिमांड करने लगते हैं.
आसान है समाधान
आज के दौर में जंक फूड से पूरी तरह बचना तो मुमकिन नहीं, लेकिन उनमें भी हेल्दी ऑप्शन अपनाए जा सकते हैं. साथ ही जंक फूड के लिए हफ्ते या महीने में एक-दो दिन फिक्स कर लें और स़िर्फ उसी समय जंक फूड खाएं.

समय की कमी
महानगरों में ज़्यादातर पति-पत्नी दोनों नौकरीपेशा होते हैं, ऐसे में समय की कमी के कारण वो रेडी टु ईट खाने को प्राथमिकता देते हैं. समय के अभाव ने फास्ट फूड और दो मिनट में बन जाने वाली चीज़ों की डिमांड बढ़ा दी है और इन्हीं चीज़ों से मोटापा बढ़ने लगता है.
आसान है समाधान
कम समय में हेल्दी खाना बनाया जा सकता है जैसे- सूप, सलाद, ओट्स, दलिया आदि. वर्किंग कपल थोड़ी-सी प्लानिंग करके हेल्दी डायट अपना सकते हैं.

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स्ट्रेस
जी हां, तनाव भी वज़न बढ़ने की एक बड़ी वजह है. तनाव में अक्सर हम ज़्यादा खाते हैं और तनाव के समय मीठा खाने का मन करता है, जिससे मोठापा ज़्यादा बढ़ता है.
आसान है समाधान
जब भी लगे कि आप तनाव महसूस कर रही हैं, तो एक ग्लास पानी पी लें. साथ ही तनावमुक्त होने के लिए एक्सरसाइज़ करें, जैसे- गहसी सांसें लें, मसल रिलैक्शेसन तकनीक अपनाएं या कोई जोक बुक पढ़ें.

नींद की कमी
रात में देर से सोने और सुबह जल्दी उठ जाने से भी मोटापा बढ़ता है. ऐसा करने से रात में खाया हुआ खाना पच नहीं पाता. साथ ही इंसोम्निया (अनिद्रा), डिप्रेशन आदि के शिकार भी हो सकते हैं.
आसान है समाधान
अपना हर काम समय पर पूरा करने की कोशिश करें ताकि आप समय पर सो सकें और पर्याप्त नींद ले सकें. रोज़ाना 7-8 घंटे की नींद बेहद ज़रूरी है.

खाने का शौक
खाने के शौकीन लोग अक्सर भरे-पूरे शरीर वाले होते हैं, क्योंकि उनका खाने पर कोई कंट्रोल नहीं होता. फिर आगे चलकर खाने का ये शौक उन्हें इतना भारी पड़ता है कि उन्हें कई हेल्थ प्रॉब्लम्स होने लगती हैं.
आसान है समाधान
खाने का शौक होना अच्छी बात है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि जब जो जी में आया खा लिया. यदि आप खाने की शौकीन हैं और अक्सर ज़रूरत से ज़्यादा खा लेती हैं, तो अपने शौक की भरपाई एक्सरसाइज़ करके करें. इससे आपका शौक भी बना रहेगा और आप फिट भी बनी रहेंगी.

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वेट लॉस टिप ऑफ द डे (Weight Loss Tip Of The Day)

* शाम को भूख लगने पर भरपेट पपीता खाएं. इसमें कैलोरी कम और फाइबर ज़्यादा होता है.
* रात के खाने में रागी की रोटी खाएं. इसमें भरपूर मात्रा में न्यूट्रिएंट्स होते हैं और कैलोरी बहुत कम होती है.
* दालचीनी, लाल मिर्च, कालीमिर्च, अदरक, सरसों आदि मसाले वज़न घटाने में सहायक हैं इसलिए इनका सेवन भी कर सकती हैं.
* पपीता, अनन्नास, सेब, अमरूद, अंगूर, पीच आदि फल भी वज़न कम करने में सहायक हैं.

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किस समय क्या खाएं?
डायटिंग का पहला मंत्र है दिनभर में थोड़ा-थोड़ा खाना. इससे भूख भी नहीं लगती और वज़न भी कम होता है इसलिए पूरे दिनभर में 5 बार खाएं. साथ ही यह भी देखें कि आप किस समय क्या खा रही हैं.

सुबह का नाश्ता
अंकुरित अनाज, गाय का दूध, अंडे, नट्स आदि को अपने सुबह के नाश्ते में शामिल करें. इडली, डोसा, पोहा आदि भी ले सकती हैं.

मिड मील
नाश्ता व दोपहर के खाने के बीच में जब थोड़ी भूख होती है, उस समय मौसमी फल खाने चाहिए. ये आपको एनर्जी के साथ-साथ विटामिन्स और मिनरल्स भी प्रदान करते हैं, जिससे रोग-प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ती है. फलों के नियमित सेवन से आपको कम कैलोरी में सभी न्यूट्रीएंट्स मिल जाते हैं और ये वज़न कम करने में मददगार होते हैं.

दोपहर का खाना
इसमें ज्वारी, बाजरा, नाचनी से बनी रोटी का समावेश करें. हरी सब्ज़ियां व सभी प्रकार की दालों का भी समावेश किया जाना चाहिए. साथ ही सलाद भी खाएं. कैलोरीज़ कम करने के लिए रोटी में घी न लगाएं. सब्ज़ियों व दाल में भी कम घी/तेल का तड़का लगाएं. मसाले जैसे हल्दी, कालीमिर्च, हींग आदि के प्रयोग से भोजन को स्वादिष्ट बनाया जा सकता है. इन मसालों से शरीर का मेटाबॉलिज़्म भी बढ़ता है, जिससे वज़न कम होने में मदद मिलती है.

शाम का नाश्ता
इस समय नारियल पानी, छाछ या दही लिया जा सकता है. भूने हुए चने, ब्राउन ब्रेड सैंडविच, फ्रूट आदि भी ले सकती हैं.

रात का खाना
रात को हल्का खाना जैसे- सूप, सलाद, खिचड़ी आदि लेने से वज़न कम होता है. रात के खाने और सोने में लगभग 3 घंटे का अंतर होना चाहिए.

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