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कहीं आप भी टॉयलेट में फोन तो नहीं यूज़ करते? पड़ सकते हैं बीमार (Don’t Take Your Phone To The Bathroom)

mobile phone use in bathroom

कहीं आप भी अक्सर बाथरूम में अपना मोबाइल फोन तो नहीं ले जाते हैं. अगर ऐसा है तो सावधान हो जाइए, क्योंकि बाथरूम में फोन ले जाना आपकी सेहत के लिए ख़तरनाक हो सकता है.  

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एनल्स ऑफ क्लिनिक माइक्रोबायोलॉजी में छपी हुई एक स्टडी में ये बात सामने आई है कि 95 फ़ीसदी हेल्थ केयर वर्क्स के मोबाइल फोन पर बैक्टीरिया के जमा होने के प्रमाण पाए गए हैं. ऐसे बैक्टीरिया से गंभीर इंफेक्शन हो सकता है.

कई लोगों दिन भर के बिज़ी शेड्यूल में अक्सर न्यूज़ या मैसेजेस नहीं पढ़ पाते हैं. ऐसे में घर जाकर आराम से बाथरूम में बैठकर फोन चेक करते हैं. पर ऐसा करके वो जाने अनजाने में कई बीमारियों को दावत दे बैठते हैं.

रेस्टरूम में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस फोन पर चिपक जाते हैं. जो फिर हर उस जगह फैलते हैं, जहां-जहां आप फोन को रखते हैं, जैसे- आपकी जेब में, पर्स में, हाथ में. इसके अलावा जितनी बार आप अपना फोन मैसेज टाइप करने के लिए इस्तेमाल करते हैं, उतनी बार ये बैक्टीरिया आपके कीपैड पर चिपक जाते हैं. एक रिसर्च के मुताबिक़ मोबाइल इस्तेमाल करने वाला हर व्यक्ति अपने फोन को एक दिन में कम से कम 2600 बार टच करता है यानी ढेर सारा इंफेक्शन.

ये हैं ज़्यादा ख़तरे में

इन लोगों को ख़ास ख़्याल रखने की ज़रूरत है.

  • डायबिटिक 
  • कीमोथेरेपी लेने वाले
  • जिसे गंभीर बीमारी हो
  • किसी प्रकार का ट्रीटमेंट लेने वाले मरीज़

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इन बातों का ख़्याल रखें

अगर आप फोन से होने वाली इन बीमारियों को रिस्क को कम करना चाहते हैं, तो इन बातों का ख़ास ख़्याल रखें.

  • फोन टॉयलेट में न ले जाएं.
  • बाथरूम यूज़ करने के बाद या टॉयलेट से आने का बाद हाथ अच्छी तरह से हैंड वॉश से धो लें.
  • बाथरूम की सफ़ाई के बाद भी सीधे फोन को टच न करें. हाथों को अच्छी तरह से धोकर ही फोन यूज़ करें.
  • अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करें.
  • फोन और स्क्रीन का फोन के बनाए गए स्पेशल क्लींज़र से ही क्लीन करें.

टॉयलेट सीट से ज़्यादा बैक्टीरिया

यूनिवर्सिटी ऑफ एरिज़ोना ने भी अपनी रिसर्च में पाया है कि फोन पर टॉयलेट सीट से 10 गुना ज़्यादा बैक्टीरिया पाए जाते हैं.

डायबिटिक महिलाओं की उम्र बढ़ाएगी कॉफी और चाय (Coffee And Tea Could Keep Diabetic Woman living longer)

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यूं तो कैफीनयुक्त पेय का सेवन कम ही करने की सलाह दी जाती है. लेकिन हाल ही में हुए एक रिसर्च में दावा किया गया है कि कॉफी महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद होती है. पुर्तगल में हुए एक रिसर्च में वैज्ञानिकों ने ये दावा किया गया है कि डायबिटिक महिलाएं अगर कॉफी का सेवन करें, तो वो लंबी ज़िंदगी जी सकती हैं. लिस्बन में हुए स्टडी ऑफ डायबिटिज़ एनुअल मीटिंग में इस रिसर्च को प्रेज़ेंट किया गया.

साल 1999 से 2010 तक में 3000 लोगों की लिस्ट बनाई गई, जिसमें उन लोगों को शामिल किया गया, जिनकी मौत कैफीन और डायबिटीज़ की वजह से हुई थी. रिसर्च में पाया गया कि जो डायबिटिक महिलाएं रोज़ाना एक कप कॉफी यानी 100एमजी कैफीन का सेवन करती हैं उनमें कैफीन का सेवन न करने वाली डायबिटिक महिलाओं के मुकाबले मौत का ख़तरा 51% तक कम हो जाता है. जबकि जो महिलाएं 2 कप कॉफी पीती हैं, उनमें मौत का ख़तरा 66% तक कम हो जाता है. इस रिसर्च में शामिल डायबिटिक पुरुषों पर इसका कोई असर नहीं दिखा.

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जो महिलाएं चाय का सेवन अधिक करती हैं, उनमें कैंसर का ख़तरा 80 फीसदी तक कम पाया गया. रिसर्चस का कहना है कि इस दिशा में अभई और रिसर्च करना बाकी है. लेकिन कैफीन की वजह से डायबिटिक महिलाओं की उम्र में इज़ाफा हुआ है ये बात तो तय है.

वेट लॉस टिप ऑफ द डे: 15 आसान-असरदार टिप्स भी घटाते हैं वज़न (Weight Loss Tip Of The Day: 15 Easy Diet Tips For Weight Loss)

Easy Diet Tips

Easy Diet Tips

15 आसान-असरदार टिप्स घटाते हैं वज़न
1. वर्किंग वुमन ऑफिस से आने के बाद इतनी थक जाती हैं कि अक्सर वही बनाती हैं जिसमें ज़्यादा मेहनत ना लगे. ऐसे में हरी सब्ज़ियां घर में बहुत कम ही बन पाती हैं. इससे बचने के लिए छुट्टी हेल्दी फल व सब्ज़ियों को काटकर फ्रिज में रख दें.
2. भुने चने, मुरमुरे, पॉपकॉर्न, ब्राउन ब्रेड आदि हमेशा फि्र्ज में रखें, ताकि भूख लगने पर भी आप हेल्दी खा सकें.
3. ऑफिस में टिफिन के अलावा ताज़े फल, दही, ड्राईफ्रूट्स, फैट-फ्री स्नैक्स आदि भी साथ ले जाएं, ताकि भूख लगने पर आप जंक फूड खाने से बच सकें.
4. सूप, सलाद, स्प्राउट्स, फ्रूट्स आदि स्लो टु ईट फूड माने जाते हैं. इनका सेवन हम धीरे-धीरे करते हैं, जिससे संतुष्टि मिलती है और हम ज़्यादा खाने से बच जाते हैं.
5. मूंग दाल चीला, बेसन का चीला, ऑमलेट आदि बनाने के लिए नॉन-स्टिक तवे का इस्तेमाल करें, इससे तेल कम इस्तेमाल होता है और आप हेल्दी डायट ले पाती हैं.

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6. दलिया, ब्राउन राइस आदि को बनाते समय उसमें ढेर सारी सब्ज़ियां मिला दें.
7. यदि पार्टी में जा रही हैं तो घर से निकलने से पहले हेल्दी स्नैक्स खा लें. इससे आप पार्टी में ओवर ईटिंग से बच जाएंगी.
8. इसी तरह शादी-ब्याह में ज़रूरी नहीं कि सारी चीज़ें खाई ही जाएं, स़िर्फ अपनी पसंद की चीज़ ही खाएं वो भी कम मात्रा में.
9. होटल में भी सारी चीज़ें इसलिए चट न कर जाएं कि उसमें आपके पैसे लगे हैं. यदि खाना बहुत बच गया है तो बेहतर होगा उसे पैक करा के घर ले जाएं.
10. अपने लंच व डिनर में पत्तेदार सब्ज़ियां जैसे चौलाई, शलजम के पत्ते, मूली के पत्ते, सरसों के पत्ते, बंदगोभी, पालक, लेट्यूस आदि शामिल करें. इनमें कई तरह के विटामिन्स होते हैं और वसा रहित होने के कारण ये नो कैलोरी में गिने जाते हैं.

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11. डार्क कलर के फल व सब्ज़ियों में एंटी एजिंग तत्व होते हैं, इनके सेवन से आप बढ़ती उम्र के संकेतों को आसानी से रोक सकती हैं. अतः अपने डेली डायट प्लान में पपीता, तरबूज, अनार, गाजर, शिमला मिर्च, टमाटर आदि को ज़रूर शामिल करें.
12. डायटिंग के दौरान होने वाली क्रेविंग रोकने के लिए कुछ खाने से पहले सूप, फ्रेश जूस, नारियल पानी, हर्बल टी पीएं. ये हेल्दी होते हैं और क्रेविंग से राहत भी दिलाते हैं.
13. क्रेविंग को रोकने का एक आसान तरीक़ा है ब्रश करना. जी हां, जब भी क्रेविंग बढ़े, तो टूथब्रश से दांत साफ़ करें, भूख ख़त्म हो जाएगी.
14. दिन में 4-5 बार थोड़ा-थोड़ा खाएं. इससे आपका वज़न भी कंट्रोल में रहेगा और आप अपनी भूख पर नियंत्रण रख पाएंगी.
15. सुबह के नाश्ते में एग व्हाइट खाना बेहतरीन विकल्प है. इसमें प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है जिससे थोड़ा खाकर भी शरीर को पर्याप्त पोषण मिलता है.

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वेट लॉस टिप ऑफ द डे: क्या है वज़न और कैलोरी का संबंध? (Weight Loss Tip Of The Day: How To Lose Weight Fast)

How To Lose Weight

How To Lose Weight

क्या है वज़न और कैलोरी का संबंध?
आमतौर पर देखा गया है कि बहुत से लोग मोटापा कम करने के लिए स़िर्फ सूप या सलाद का सेवन करते हैं, लेकिन यह तरीक़ा सही नहीं है. इन तरीक़ों से फ़ायदे की जगह नुक़सान ही होता है. वज़न कम करने के लिए आहार में कैलोरी कम करना बहुत ज़रूरी है, परंतु इस तरह नहीं.

10 दिनों में 1 किलो वज़न घटाएं
किसी भी व्यक्ति को एक किलो वज़न कम करने के लिए लगभग 7800 कैलोरी बर्न करने की ज़रूरत होती है, लेकिन यह एक दिन में नहीं किया जा सकता. इसके लिए सही प्लानिंग और उसे फॉलो करने की ज़रूरत है. आहार और व्यायाम की सही प्लानिंग से आसानी से वज़न कम किया जा सकता है.

कैसे करें प्लानिंग?
यदि आपको दिनभर में 2200 कैलोरीज़ की ज़रूरत है और आपको अपना वज़न कम करना है, तो ऐसी स्थिति में आपको 1700 कैलोरी वाला आहार प्रतिदिन लेना होगा. साथ ही हल्का व्यायाम भी करें, जैसे पैदल चलना, हल्के डांस व एरोबिक्स. इस तरह आपके पैदल चलने से 5 कैलोरी 1 मिनट व एरोबिक्स में 6-7 कैलोरी प्रति मिनट बर्न होगी. इस तरह आप आधा घंटा यानी 30 मिनट पैदल चलें, तो आपकी लगभग 120 कैलोरी बर्न होगी तथा एरोबिक्स से लगभग 200 कैलोरी बर्न होगी. इस तरह एक घंटे में 320 कैलोरी बर्न की जा सकती है. खाने में हमने पहले ही 500 कैलोरी कम की थी. इस तरह कुल 500+300= 800 कैलोरी हम एक दिन में बर्न कर सकते हैं. इस तरह दस दिनों में 8000 कैलोरी बर्न होंगी, परिणामस्वरूप एक किलो वज़न घट जाएगा.

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ब्यूटी फूड
* हेल्दी स्किन पाने के लिए अपनी डायट में ओमेगा-3 एसिड शामिल करें. मछली, अखरोट, अलसी आदि में ओमेगा-3 पाया जाता है.
* रोज़ाना अनन्नास का रस पीने से मोटापा कम होता है और स्किन ग्लो करती है.
* करेला भले ही खाने में टेस्टी न हो, लेकिन ये त्वचा के लिए बहुत फ़ायदेमंद होता है. करेले के सेवन से त्वचा में निखार आता है.
* चौलाई का रस पीने से रक्त की अशुद्धियां ख़त्म होती हैं. शरीर से विशाक्त तत्व बाहर निकलते हैं और मुंहासों से भी राहत मिलती है.

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ब्यूटी फूड
* बालों को लॉन्ग एंड स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए खाने में प्रोटीन से भरपूर सोयाबीन, अंडे, बींस, दही, कम वसा वाले चीज़ आदि शामिल करें.
* यदि बाल जल्दी ऑयली हो जाते हैं और ड्रैंड्रफ की समस्या है तो एक ग्लास पानी में नींबू का रस मिलाएं और सुबह खाली पेट पीएं.
* बालों का झड़ना रोकने के लिए रोज़ाना एक छोटा कप अंकुरित मूंग दाल, काले चने, फल, पत्तेदार सब्ज़ियां और सलाद तथा दही शामिल करें. जल्दी ही बालों का झड़ना थम जाएगा.

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वेट लॉस टिप ऑफ द डे (Weight Loss Tip Of The Day)

Weight Loss Tip

Weight Loss Tip

घर के कामों से वज़न घटाएं
* पोंछा लगाते समय 30 मिनट में 145 कैलोरी खर्च होती है जो ट्रेडमिल पर 15 मिनट दौड़ने के बराबर है.
* कपड़े धोते समय 60 मिनट में 85 कैलोरी बर्न होती है जो 100 सिटअप करने के बराबर है.
* खाना बनाते समय 60 मिनट में 150 कैलोरी खर्च होती है जो 15 मिनट एरोबिक्स करने के बराबर है.
* डस्टिंग करते समय 30 मिनट में 180 कैलोरी खर्च होती है जो 15 मिनट तक साइकिल चलाने के बराबर है.
* गार्डनिंग करते समय 60 मिनट में 250 कैलोरी बर्न होती है जो 25 मिनट सीढ़ी चढ़ने-उतरने के बराबर है.
* बिस्तर लगाते समय 15 मिनट में 66 कैलोरी बर्न होती है जो डेढ़ कि.मी. पैदल चलने के बराबर है.

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जानें वज़न बढ़ने की वजहें
वज़न बढ़ने की वजहें कई हैं, लेकिन व़क्त रहते यदि मोटापे पर कंट्रोल नहीं किया गया, तो कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं इसलिए सबसे पहले वज़न बढ़ने की वजहों को जानना ज़रूरी है.

लाइफ स्टाइल
आधुनिक जीवनशैली ने सुख-सुविधाएं तो बहुत दी हैं, लेकिन उन सुविधाओं का लाभ उठाते हुए लोग शारीरिक श्रम करना ही भूल गए हैं. थोड़ी दूर भी जाना हो तो गाड़ी से ही जाएंगे, पहली मंज़िल पर जाने के लिए भी लिफ्ट का इस्तेमाल करेंगे, दिनभर एसी रूम में आरामकुर्सी से चिपके रहेंगे… लोगों की इन आरामपसंद आदतों ने उन्हें बड़ी-बड़ी बीमारियां दे दी हैं.
आसान है समाधान
बिज़ी दिनचर्या में भी समय निकालकर फिज़िकल एक्सरसाइज़ करना बहुत ज़रूरी है. सही डायट और एक्सरसाइज़ से फिट रहना मुश्किल काम नहीं है. अपनी लाइफ स्टाइल में बदलाव लाकर कोई भी फिट और हेल्दी रह सकता है.

जंक फूड
जंक फूड हमारी ज़िंदगी में इस क़दर शामिल हो गया है कि इसके बिना हम किसी भी सेलिब्रेशन की कल्पना भी नहीं कर सकते और जंक फूड की यही लत मोटापा बढ़ा देती है. बड़े ही नहीं बच्चे भी जंक फूड के आदी हो गए हैं. बड़ों की देखादेखी में अक्सर बच्चे भी पिज़्ज़ा, बर्गर, कोल्ड ड्रिंक आदि जंक फूड की डिमांड करने लगते हैं.
आसान है समाधान
आज के दौर में जंक फूड से पूरी तरह बचना तो मुमकिन नहीं, लेकिन उनमें भी हेल्दी ऑप्शन अपनाए जा सकते हैं. साथ ही जंक फूड के लिए हफ्ते या महीने में एक-दो दिन फिक्स कर लें और स़िर्फ उसी समय जंक फूड खाएं.

समय की कमी
महानगरों में ज़्यादातर पति-पत्नी दोनों नौकरीपेशा होते हैं, ऐसे में समय की कमी के कारण वो रेडी टु ईट खाने को प्राथमिकता देते हैं. समय के अभाव ने फास्ट फूड और दो मिनट में बन जाने वाली चीज़ों की डिमांड बढ़ा दी है और इन्हीं चीज़ों से मोटापा बढ़ने लगता है.
आसान है समाधान
कम समय में हेल्दी खाना बनाया जा सकता है जैसे- सूप, सलाद, ओट्स, दलिया आदि. वर्किंग कपल थोड़ी-सी प्लानिंग करके हेल्दी डायट अपना सकते हैं.

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स्ट्रेस
जी हां, तनाव भी वज़न बढ़ने की एक बड़ी वजह है. तनाव में अक्सर हम ज़्यादा खाते हैं और तनाव के समय मीठा खाने का मन करता है, जिससे मोठापा ज़्यादा बढ़ता है.
आसान है समाधान
जब भी लगे कि आप तनाव महसूस कर रही हैं, तो एक ग्लास पानी पी लें. साथ ही तनावमुक्त होने के लिए एक्सरसाइज़ करें, जैसे- गहसी सांसें लें, मसल रिलैक्शेसन तकनीक अपनाएं या कोई जोक बुक पढ़ें.

नींद की कमी
रात में देर से सोने और सुबह जल्दी उठ जाने से भी मोटापा बढ़ता है. ऐसा करने से रात में खाया हुआ खाना पच नहीं पाता. साथ ही इंसोम्निया (अनिद्रा), डिप्रेशन आदि के शिकार भी हो सकते हैं.
आसान है समाधान
अपना हर काम समय पर पूरा करने की कोशिश करें ताकि आप समय पर सो सकें और पर्याप्त नींद ले सकें. रोज़ाना 7-8 घंटे की नींद बेहद ज़रूरी है.

खाने का शौक
खाने के शौकीन लोग अक्सर भरे-पूरे शरीर वाले होते हैं, क्योंकि उनका खाने पर कोई कंट्रोल नहीं होता. फिर आगे चलकर खाने का ये शौक उन्हें इतना भारी पड़ता है कि उन्हें कई हेल्थ प्रॉब्लम्स होने लगती हैं.
आसान है समाधान
खाने का शौक होना अच्छी बात है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि जब जो जी में आया खा लिया. यदि आप खाने की शौकीन हैं और अक्सर ज़रूरत से ज़्यादा खा लेती हैं, तो अपने शौक की भरपाई एक्सरसाइज़ करके करें. इससे आपका शौक भी बना रहेगा और आप फिट भी बनी रहेंगी.

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वेट लॉस टिप ऑफ द डे (Weight Loss Tip Of The Day)

* शाम को भूख लगने पर भरपेट पपीता खाएं. इसमें कैलोरी कम और फाइबर ज़्यादा होता है.
* रात के खाने में रागी की रोटी खाएं. इसमें भरपूर मात्रा में न्यूट्रिएंट्स होते हैं और कैलोरी बहुत कम होती है.
* दालचीनी, लाल मिर्च, कालीमिर्च, अदरक, सरसों आदि मसाले वज़न घटाने में सहायक हैं इसलिए इनका सेवन भी कर सकती हैं.
* पपीता, अनन्नास, सेब, अमरूद, अंगूर, पीच आदि फल भी वज़न कम करने में सहायक हैं.

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किस समय क्या खाएं?
डायटिंग का पहला मंत्र है दिनभर में थोड़ा-थोड़ा खाना. इससे भूख भी नहीं लगती और वज़न भी कम होता है इसलिए पूरे दिनभर में 5 बार खाएं. साथ ही यह भी देखें कि आप किस समय क्या खा रही हैं.

सुबह का नाश्ता
अंकुरित अनाज, गाय का दूध, अंडे, नट्स आदि को अपने सुबह के नाश्ते में शामिल करें. इडली, डोसा, पोहा आदि भी ले सकती हैं.

मिड मील
नाश्ता व दोपहर के खाने के बीच में जब थोड़ी भूख होती है, उस समय मौसमी फल खाने चाहिए. ये आपको एनर्जी के साथ-साथ विटामिन्स और मिनरल्स भी प्रदान करते हैं, जिससे रोग-प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ती है. फलों के नियमित सेवन से आपको कम कैलोरी में सभी न्यूट्रीएंट्स मिल जाते हैं और ये वज़न कम करने में मददगार होते हैं.

दोपहर का खाना
इसमें ज्वारी, बाजरा, नाचनी से बनी रोटी का समावेश करें. हरी सब्ज़ियां व सभी प्रकार की दालों का भी समावेश किया जाना चाहिए. साथ ही सलाद भी खाएं. कैलोरीज़ कम करने के लिए रोटी में घी न लगाएं. सब्ज़ियों व दाल में भी कम घी/तेल का तड़का लगाएं. मसाले जैसे हल्दी, कालीमिर्च, हींग आदि के प्रयोग से भोजन को स्वादिष्ट बनाया जा सकता है. इन मसालों से शरीर का मेटाबॉलिज़्म भी बढ़ता है, जिससे वज़न कम होने में मदद मिलती है.

शाम का नाश्ता
इस समय नारियल पानी, छाछ या दही लिया जा सकता है. भूने हुए चने, ब्राउन ब्रेड सैंडविच, फ्रूट आदि भी ले सकती हैं.

रात का खाना
रात को हल्का खाना जैसे- सूप, सलाद, खिचड़ी आदि लेने से वज़न कम होता है. रात के खाने और सोने में लगभग 3 घंटे का अंतर होना चाहिए.

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वेट लॉस टिप ऑफ द डे (Weightloss Tip Of The Day)

Weight loss Tip Of The Day

how to loose weight

  • खाना खाने से आधा घंटा पहले पानी पीएं.
  • जी हां, रिसर्च में यह साबित हुआ है कि पानी पीने से मेटाबॉलिज़्म फास्ट होता है और कैलोरीज़ फास्ट बर्न होती है.
  • खाने से आधा घंटा पहले आधा लिटर पानी पीने से आप कम कैलोरीज़ कंज़्यूम करते हैं और 44% अधिक वेट लूज़ कर पाते हैं.
  • पानी आपको हाइड्रेटेड रखता है.
  • काने से पहले पानी पीने से आप ओवरईटिंग से भी बच जाते हैं, क्योंकि अक्सर ऐसा देखा गया है कि हमें भूख महसूस होती है, लेकिन पानी पीने के बाद वो भूख कम हो जाती है.

 

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  • आप सुबह-सुबह भी गुनगुना पानी पी सकते हैं. यह भी मेटाबॉलिज़्म को फास्ट करता है.
  • गुनगुने पानी में शहद और नींबू का रस भी मिला सकते हैं.
  • इसके अलावा अगर आपको कुछ ऑयली या जंक फूड खाने की क्रेविंग हो रही है, तो वो खाने के बाद आप एक या आधा कप गर्म पानी घूंट-घूंट करके पीएं, इससे फैट्स जमा नहीं होगा और जंक फूड खाने से जो एक्स्ट्रा कैलोरीज़ आपने कंज़्यूम कर ली है, उसका भी असर नहीं होगा. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप अक्सर ऐसा करें. जंक फूड जितना संभव हो अवॉइड ही करें.

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वेट लॉस टिप ऑफ द डे (Weight Loss Tips Of The Day)

  • 1 ग्लास पानी में 2 टीस्पून ऐप्पल साइडर विनेगर और 1/4 टीस्पून दालचीनी पाउडर मिलाकर घोल लें और दिन में 2 बार पीए.
  • 1 ग्लास पानी में 2 टीस्पून शहद और 2 टीस्पून ऐप्पल साइड विनेगर मिलाकर घोल लें. नियमित रूप से पीने से वज़न कम होता है.
  • इस सिंपल टिप से करें वेट लॉस: 3 टीस्पून नींबू का रस, 1-1 टीस्पून शहद और काली मिर्च पाउडर को 1 ग्लास पानी में मिलाकर रोज़ सुबह खाली पेट पीएं. यह 3 महीने तक करें.
  • इसके अलावा रेग्युलर एक्सरसाइज़, योगा और मेडिटेशन भी करें, तो दुगुना लाभ होगा.
  • अपने डायट में हेल्दी चीज़ें शामिल करें.
  • जंक व ऑयली फुड से दूर रहें.
  • देशी घी को ज़रूर अपने डायट में शामिल करें, क्योंकि यह हेल्दी फैट्स बढ़ाता है. लेकिन बहुत ज़्यादा सेवन करने से बचें.
  • आप अपने भोजन में नींबू को नियमित रूप से शामिल करें. सलाद पर नींबू का रस निचोड़ें या फिर खाने के बाद लाइम शॉट लें.
  • इसी तरह से कालीमिर्च पाउडर को भी आप सलाद पर बुरकें.
  • शहद भी हेल्दी है और वेटलॉस में बेहद फ़ायदेमंद है.
  • भूखे रहने से बचें, अक्सर लोग जल्द से जल्द वेटलॉस के चक्कर में खाना-पीना छोड़ देते हैं, लेकिन ऐसा न करें. इससे कमज़ोरी बढ़ेगी और फैट्स भी कम नहीं होगा.
  • रियलिस्टिक गोल सेट करें. 1 हफ़्ते में 5 किलो कम करने की कोशिश न करें, 1 महीने में 1 किलो भी कम हुआ, तो भी फ़ायदेमंद है.

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सही खाना ही नहीं, सही समय पर खाना भी है ज़रूरी (Healthy Eating: Are You Eating At The Right Time?)

Healthy Eating

अक्सर हम सोचते हैं कि हमें हेल्दी फूड (Healthy Food) खाना चाहिए और जब भी मौका मिलता है, तो हम हेल्दी फूड खाने से पीछे नहीं हटते, लेकिन उस व़क्त हम शायद ही यह सोचते हैं कि भले ही हम हेल्दी फूड खा रहे हैं, लेकिन क्या यह समय उसे खाने के लिए सही है? जी हां, स़िर्फ सही खाना ही नहीं, सही समय (Right Time) पर खाना भी उतना ही ज़रूरी है, वरना कितना भी हेल्दी फूड हो, उसका असर उल्टा भी पड़ सकता है.

Healthy Eating

दही (Curd)
गर्मी के मौसम में दही खाना बहुत फ़ायदेमंद होता है. ये पेट को ठंडा रखता है, लेकिन रात को दही नहीं खाना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार, रात में दही खाने से कफ़ के साथ ही पेट से जुड़ी अन्य परेशानियां भी हो सकती हैं.
क्या है सही समय?
दोपहर के समय दही खाना बेस्ट है. दही को ग़लती से भी गरम करके खाने की भूल न करें.

दूध (Milk)
हड्डियों को मज़बूत बनाने के लिए दूध बहुत ज़रूरी है, मगर इसे कब पीना चाहिए, इसे लेकर हर किसी की राय अलग-अलग है. कुछ लोग सुबह नाश्ते के व़क्त दूध पीते हैं, तो कुछ रात को सोने के पहले. वैसे कभी भी सुबह खाली पेट दूध नहीं पीना चाहिए, इससे एसिडिटी की समस्या हो सकती है.
क्या है सही समय?
विशेषज्ञों के मुताबिक़, अगर सुबह में दूध का सेवन किया जाए, तो ये आपको पूरे दिन एनर्जेटिक रखता है, जबकि रात में दूध पीने से दिमाग़ शांत रहता है और नींद भी अच्छी आती है. आयुर्वेद में दूध पीने का सही समय रात में ही बताया गया है.

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चावल (Rice)
आमतौर पर लोगों को लगता है कि चावल खाने से वज़न बढ़ता है, जबकि ये पूरा सच नहीं है. चावल में कार्बोहाइड्रेट होता है, जो शरीर के लिए ज़रूरी है. हां, इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए. कुछ लोगों को ये भी लगता है कि दोपहर में चावल खाना फिर भी ठीक है, मगर रात में नहीं खाना चाहिए, क्योंकि ये आसानी से डाइजेस्ट नहीं होता.
क्या है सही समय?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, रात में ही चावल खाना चाहिए, मगर बहुत कम मात्रा में. इससे ये आसानी से पच भी जाता है और आपको रात को अच्छी नींद आती है, जबकि दोपहर में चावल अवॉइड करना चाहिए, क्योंकि इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है, जिससे काम के समय आपको नींद आने लगती है.

शक्कर
चाय या दूध में बहुत ज़्यादा शक्कर नहीं डालनी चाहिए, मगर इसका ये मतलब नहीं है कि आप शक्कर खाना पूरी तरह से बंद कर दें. थोड़ी शक्कर खानी भी ज़रूरी है.
क्या है सही समय?
शक्कर को दिन में खाना सही होता है, क्योंकि इंसुलिन शुगर को असरदार तरी़के से एब्जॉर्व कर लेता है और ये आसानी से पच जाती है, जबकि रात में शक्कर खाने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है और आपको ठीक से नींद नहीं आती, तो अगर रात को खाने के बाद आपको मीठा खाने की आदत है, तो इसे बदल लीजिए.

दाल और बींस (Pulses, Lentils, Legumes)
प्रोटीन से भरपूर दाल और बींस को भी डायट में शामिल करना ज़रूरी है, मगर इसे खाने का सही समय भी पता होना चाहिए. रात के समय दाल और बींस खाना ठीक नहीं होता, क्योंकि ये आसानी से डाइजेस्ट नहीं होते और फिर पेट में गैस बनने लगती है.
क्या है सही समय?
सुबह और दोपहर के समय इसे खाना अच्छा होता है, क्योंकि तब ये आसानी से पच जाते हैं और गैस की समस्या नहीं होती.

Healthy Eating

जानें इन फ्रूट्स (Fruits) को खाने का राइट टाइम

सभी तरह के फल सेहत के लिए अच्छे होते हैं, मगर इन्हें सही समय पर खाना चाहिए.

सेब (Apple)
विटामिन, मिनरल और फाइबर से भरपूर सेब में कोलेस्ट्रॉल बिल्कुल नहीं होता. ये बहुत हेल्दी होता है, तभी तो कहते हैं, ङ्गएन एप्पल अ डे कीप्स द डॉक्टर अवेफ. मगर क्या आप जानते हैं कि बेहतर रिज़ल्ट के लिए सेब कब खाना चाहिए?
क्या है सही समय?
खाली पेट एप्पल खाने से बॉडी से सारे हानिकारक टॉक्सिन निकल जाते हैं. इससे एनर्जी मिलती है और वज़न भी नहीं बढ़ता.

ऑरेंज (Orange)
विटामिन सी से भरपूर संतरे में विटामिन ए, बी कॉम्प्लेक्स, फ्लेवोनॉयड, अमीनो एसिड, कैल्शियम, आयोडीन, फॉस्फोरस, सोडियम, मैगनीज़ आदि की भी भरपूर मात्रा होती है. रोज़ाना दो संतरा खाने से सर्दी, कोलेस्ट्रॉल, किडनी में स्टोन और कोलन कैंसर का ख़तरा कम हो जाता है.
क्या है सही समय?
संतरे को सुबह खाली पेट और रात में न खाएं. इसे हमेशा दोपहर के समय खाएं. खाना खाने के 1 घंटा पहले या बाद में संतरा खाना फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि खाना खाने से पहले खाने पर भूख बढ़ती है और बाद में खाने से डाइजेशन ठीक रहता है.

अंगूर (Grapes)
गर्मियों में अंगूर या अंगूर का जूस पीना बहुत फ़ायदेमंद होता है. इससे बॉडी को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है और शरीर में पानी की कमी भी नहीं होती. अंगूर विटामिन्स का बेस्ट स्रोत है.
क्या है सही समय?
सुबह खाली पेट अंगूर खाना बहुत लाभदायक होता है. इसके अलावा धूप में जाने से कुछ देर पहले या धूप से आने के कुछ देर बाद ही अंगूर खाएं. अंगूर खाने के तुरंत बाद खाना न खाएं.

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मौसंबी (Sweet Lime)
कैल्शियम, फास्फोरस आदि पोषक तत्वों से भरपूर मौसंबी सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद होती है. अक्सर पेशेंट को इसका जूस पीने की सलाह दी जाती है. गर्मियों में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए मौसंबी का
जूस पीएं.
क्या है सही समय?
दोपहर के समय मौसंबी का सेवन करना लाभदायक होता है. धूप में जाने से कुछ देर पहले या धूप से आने के कुछ देर बाद मौसंबी खाना या उसका जूस पीना फ़ायदेमंद होता है.

केला (Banana)
विटामिन्स, मिनरल्स, पौटैशियम, ज़िंक, आयरन, कार्बोहाइड्रेट से भरपूर केला बेहतरीन फल है. इसे खाने से कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है.
क्या है सही समय?
अगर आप एक्सरसाइज़ करते हैं, तो एक्सरसाइज़ के बाद केला खाएं, इससे तुरंत एनर्जी मिलती है. दोपहर में भी केला खा सकते हैं, क्योंकि इसे खाने के बाद देर तक पेट भरा होने का एहसास होता है. रात को सोने से पहले केला न खाएं, क्योंकि इससे सर्दी हो सकती है.

तरबूज़ (Watermelon)
इसे बेस्ट समर फ्रूट कहा जा सकता है. इसमें 92 प्रतिशत पानी होता है, जो गर्मियों में आपकी बॉडी में पानी की कमी नहीं होने देता. तरबूज़ खाने से इम्यून सिस्टम भी ठीक रहता है.
क्या है सही समय?
तरबूज़ दिन में कभी भी खा सकते हैं, मगर इसे खाने के बाद एक घंटे तक पानी न पीएं. तरबूज़ को बहुत देर तक काटकर न रखें.

Healthy Eating
इन्हें भी खाएं सही समय पर
  • अखरोट (Walnuts) को रात को सोते समय स्नैक के रूप में खाएं, इससे अच्छी नींद आएगी.
  • अंजीर (Fig) और खुबानी को सुबह खाने से शरीर का मेटाबॉलिज्म (Metabolism) बढ़ता है और पेट को गर्मी मिलती है. अतः इसे सुबह ही खाएं. रात में इन्हें खाने से गैस की समस्या हो सकती है.
  •  चीज़ (Cheese) भी सुबह खाएं, क्योंकि इसे डाइजेस्ट (Digest) होने में समय लगता है और इससे वज़न भी जल्दी बढ़ता है.
  •  कॉफी सुबह के समय पीएं. इससे एनर्जी मिलती है और नींद गायब हो जाती है. रात को कॉफी पीने की ग़लती न करें.

– कंचन सिंह

वेट लॉस टिप ऑफ द डे: 15 ईज़ी वेट लॉस टिप्स (Weight Loss Tip Of The Day: 15 Easy Weight Loss Tips)

 

वर्ल्ड मिल्क डे पर जानें दूध के फ़ायदे और नुक़सान के बारे में (World Milk Day!)

Health Benefits of Milk

Health Benefits of Milk

आज 17वां वर्ल्ड मिल्क डे (World Milk Day) मनाया जा रहा है, इस मौक़े पर आइए जानते हैं दूध के कुछ फ़ायदे और नुक़सान (Health Benefits of Milk)

के बारे में.

दूध के फ़ायदे :

  • मांसपेशियां मज़बूत होती हैं.
  • गर्म दूध शारीरिक तनाव को दूर करने का एक कारगर उपाय है.
  • यदि आप अनिद्रा से परेशान हैं तो रोज रात को एक ग्लास गर्म दूध पीएं.
  • गुड के साथ गर्म दूध का सेवन करने से शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं. इससे त्वचा में निखार आता है और वज़न भी कंट्रोल में रहता है.
  •  ठंडे दूध में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है. एक ग्लास ठंडा दूध आपको दिन भर एेक्टिव रखने में सहायक है.
  • केला और दूध का सेवन साथ में करने से शरीर को प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, फाइबर का पोषण मिलता है. इसके सेवन से शरीर को तीन दिन की ऊर्जा एक ही दिन में ही मिल जाती है.
  • एक ग्लास गुनगुने दूध में एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से बांझपन और नपुंसकता की परेशानियों से राहत मिलती है.
  • एक ग्लास दूध में पिसा हुआ बादाम मिलाकर पीने से दिल, दिमाग़, त्वचा और आंखों को फ़ायदा होता है.

दूध के नुक़सान:

दूध के यदि फ़ायदे हैं तो कुछ नुक़सान भी हैं –

  • दूध में लैक्टोज होने के कारण इसके अधिक सेवन से डायजेशन से संबंधित परेशानियां हो सकती हैं.
  • दूध एक तरफ जहां कब्ज़ से राहत दिलाने में फ़ायदेमंद है, वहीं दूध का सेवन दस्त, गैस, पेटदर्द जैसी परेशानियां हो सकती है.
  • कुछ बच्चों को दूध में पाए जानेवाला कैसीन प्रोटीन पचता नहीं है, जिसके कारण बच्चों की सेहत को ख़तरा रहता है.

सबसे पहला विश्व दुग्ध दिवस (World Milk Day) १ जून २००१ के दिन मनाया गया था. इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य है दूध से संबंधित लाभ और हानि की तरफ़ सबका ध्यान आकर्षित करना और दूध उद्योग से जुडी सभी गतिविधियों का प्रचार-प्रसार करना.

Watch: देखें करीना कपूर खान का पोस्ट प्रेग्नेंसी वेट लॉस वर्कआउट (Kareena Kapoor Khan’s Post Pregnancy workout with bestie Amrita Arora)

Kareena Kapoor Workout

Screen-Shot- (1)

करीना कपूर खान इन दिनों ख़ूब वर्कआउट कर रही हैं. पोस्ट प्रेग्नेंसी वज़न को कम करने के लिए करीना डायट से लेकर वर्कआउट तक सब कुछ कर रही हैं. इस बार जिम में करीना को ज्वाइन किया उनकी बेस्ट फ्रेंड अमृता अरोरा खान ने. अमृता ने इंस्टाग्राम पर हेवी वर्कआउट करते हुए 3 वीडियोज़ पोस्ट किए हैं. दोनों केटबेल स्क्वैट्स, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, रोप ट्रेनिंग और कोर वर्कआउट करते नज़र आए. डिलीवरी के बाद करीना अपना ज़्यादा टाइम जिम में बिताती हैं. स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के अलावा वो योग भी कर रही हैं. जल्द ही करीना वीरे दी वेडिंग फिल्म में नज़र आएंगी. देखें वीडियो.

Kill that core ! @ithinkfitness #andthenweyak

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Kettle bell squats ….burnnnnnn ????‍♀️????‍♀️ #andthenweyak

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वर्कआउट के बाद रिलैक्स करते हुए करीना और अमृता.

Donezo !!!H2o and a good stretch ….bring it onnnnn ??? @ithinkfitness. #andthenweyak

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वर्ल्ड थायरॉइड डे: क्या आप भी हैं थायरॉइड से परेशान? (Are you Suffering From Thyroid?)

Thyroid

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हमारे गले में मौजूद थायरॉइड ग्लांड्स थायरॉइड हार्मोंस का निर्माण करते हैं. थायरॉइड हार्मोंस के अधिक निर्माण (ओवरप्रोडक्शन) या कम निर्माण (अंडरप्रोडक्शन) की वजह से थायरॉइड की समस्या होती है. थायरॉइड हार्मोंस हमारे शरीर के तापमान, मेटाबॉलिज़्म और हार्टबीट को नियंत्रित करते हैं.
थॉयरॉइड के असंतुलन का निश्‍चित कारण का तो पता नहीं, लेकिन तनाव, पोषण की कमी, अनुवांशिकता, ऑटोइम्यून अटैक, प्रेग्नेंसी, वातावरण में मौजूद टॉक्सिन्स आदि इसकी वजह हो सकते हैं. वर्ल्ड थायरॉइड डे के मौक़े पर आइए, जानते हैं इस बीमारी के बारे में विस्तार से.
लक्षण
चूंकि ये हार्मोंस बड़े स्तर पर काम करते हैं, तो इसका पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन इन लक्षणों के आधार पर पता लगाया जा सकता है-
थकान: अगर आप दिनभर थकान महसूस करते हैं और रातभर अच्छी नींद लेने के बाद भी सुबह ख़ुद को थका हुआ महसूस करते हैं, तो हो सकता है आपके थायरॉइड ग्लांड्स हार्मोंस का कम निर्माण कर रहे हों.
डिप्रेशन: यह भी हाइपोथायरॉइडिज़्म यानी हार्मोंस के कम स्तर का संकेत हो सकता है, क्योंकि थायरॉइड हार्मोंस का संबंध मस्तिष्क के सेरोटोनिन नामक तत्व (मोनोअमाइन न्यूरोट्रांसमीटर) से होता है. सेरोटोनिन एक बायोकेमिकल है, जो हमें अच्छा महसूस कराता है और ख़ुश रखने में सहायता करता है. थायरॉइड के कम निर्माण से सेरोटोनिन के स्तर पर भी प्रभाव पड़ता है, जिससे हम डिप्रेशन में जा सकते हैं.
चिंता: बहुत अधिक चिंतित रहना या अजीब-सी घबराहट महसूस होना हाइपरथायरॉइडिज़्म (अधिक निर्माण) से संबंधित हो सकता है. थायरॉइड हार्मोंस का स्तर जब बहुत अधिक बढ़ जाता है, तब आप रिलैक्स महसूस न करके हाइपर रहते हैं, क्योंकि आपके मेटाबॉलिज़्म को इसी तरह के सिग्नल्स मिलते हैं.
भूख, स्वाद और वज़न में परिवर्तन: हाइपरथायरॉइडिज़्म से बहुत अधिक भूख लगने लगती है, लेकिन वज़न बढ़ने की बजाय कम होता जाता है. जबकि हाइपोथायरॉइडिज़्म से स्वाद और गंध में बदलाव आता है और वज़न बढ़ सकता है.
मस्तिष्क पर प्रभाव: थायरॉइड के अधिक होने से एकाग्रता की कमी हो सकती है और इसके कम होने से याददाश्त पर विपरीत प्रभाव पड़ता है यानी आप भूलने की समस्या से परेशान हो सकते हैं और मस्तिष्क में एक रुकावट व असमंजस की स्थिति बनी रहती है. अक्सर थायरॉइड के इलाज के बाद मरीज़ काफ़ी हैरान हो जाते हैं कि पहले की अपेक्षा उनका मस्तिष्क कितना तेज़ हो गया है, क्योंकि उन्हें यह अंदाज़ा ही नहीं होता कि थायरॉइड की वजह से भी ऐसा हो सकता है.
सेक्स लाइफ: थायरॉइड हार्मोंस के कम होने पर सेक्स में दिलचस्पी कम होने लगती है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसका सीधा संबंध थायरॉइड से न होकर इसकी वजह से हो रही थकान, बढ़ता वज़न, ऊर्जा की कमी व शरीर में दर्द आदि से हो सकता है.
स्पंदन महसूस होना: हार्ट पल्पिटेशन यानी धड़कनें आप अपने गले व सीने में महसूस कर सकते हो. दिल या तो ज़ोर-ज़ोर से धड़कता हो या बीट्स मिस हो रही हो, तो यह थायरॉइड के कारण हो सकता है.
त्वचा में बदलाव: थायरॉइड के कम होने पर त्वचा ड्राई व त्वचा में खुजली भी हो सकती है. हार्मोंस की कमी से मेटाबॉलिज़्म धीमा हो सकता है, जिससे त्वचा पर भी प्रभाव पड़ता है. पसीना कम आता है, जिसकी वजह से त्वचा का मॉइश्‍चर कम हो जाता है.
कब्ज़: मेटाबॉलिज़्म प्रभावित होने से कब्ज़ की शिकायत भी हो सकती है. जबकि थायरॉइड के बढ़ जाने से दस्त की शिकायत हो सकती है.
महिलाओं में पीरियड्स की अनियमितता: थायरॉइड की कमी से पीरिड्स के बीच का अंतर बढ़ जाता है, दर्द अधिक होता है और हैवी ब्लीडिंग भी होती है. जबकि थायरॉइड की अधिकता से पीरियड्स जल्दी-जल्दी होने लगते हैं व हैवी ब्लीडिंग होती है.
मसल्स में दर्द: हाथ-पैरों में दर्द और सुन्नता थायरॉइड की कमी के कारण हो सकता है.
हाई ब्लडप्रेशर: जिन्हें थायरॉइड (कम या ज़्यादा) की समस्या है, उन्हें ब्लडप्रेशर की संभावना अपेक्षाकृत अधिक होती है. थायरॉइड की कमी से ब्लडप्रेशर बढ़ने की संभावना और भी अधिक हो जाती है.
बहुत ठंड या गर्मी लगना: बहुत अधिक ठंड लगना, जल्दी सर्दी होना थायरॉइड की कमी की निशानी भी हो सकते हैं. जबकि थायरॉइड की अधिकता से गर्मी व पसीने की समस्या हो सकती है.
आवाज़ में बदलाव: थायरॉइड में सूजन की वजह से आवाज़ में बदलाव आ सकता है.
नींद में बदलाव: हमेशा नींद आना थायरॉइड की कमी का संकेत हो सकता है, जबकि नींद न आना इसकी अधिकता की निशानी हो सकती है.
कंसीव करने में समस्या: प्रग्नेंसी में समस्या हो रही है, तो थायरॉइड भी इसकी वजह हो सकती है, क्योंकि थायरॉइड का असंतुलन ओव्यूलेशन को प्रभावित करता है.
बालों का झड़ना: न स़िर्फ सिर के बाल बल्कि आईब्रो व अन्य हिस्सों के बाल भी थायरॉइड की कमी से कम हो सकते हैं. जबकि थायरॉइड की अधिकता स़िर्फ सिर के बालों के प्रभावित करती है.
हृदय रोग व हाई कोलेस्ट्रॉल: थायरॉइड की कमी से बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है और हृदय रोग भी हो सकता है.
इलाज
हाइपरथायरॉइडिज़्म: थायरॉइड की अधिकता होने पर रेडियोआयोडीन ट्रीटमेंट (रेडियोथेरेपी का एक प्रकार), एंटी थायरॉइड मेडिकेशन और सर्जरी की जा सकती है. रेडियोआयोडीन ट्रीटमेंट में डॉक्टर आपको टैबलेट या लिक्विड दे सकते हैं, जिसमें रेडियोएक्टिव आयोडीन की भरपूर मात्रा होगी. यह टैबलेट (या लिक्विड) थायरॉइड ग्लांड्स के सेल्स को नष्ट करके और हार्मोंस के निर्माण की क्रिया को कम करके थायरॉड को नियंत्रित करती है.
कभी-कभी एक से अधिक ट्रीटमेंट की भी ज़रूरत पड़ती है. रेडियोआयोडीन ट्रीटमेंट गर्भवती व फीड करा रही महिलाओं को नहीं करवाना चाहिए. जो लोग यह ट्रीटमेंट लेते हैं, उनमें भी महिलाओं को इलाज के बाद अगले छह महीनों के लिए कंसीव नहीं करना चाहिए और पुरुषों को भी चार महीने तक इससे बचना चाहिए. कई मरीज़ इस ट्रीटमेंट के बाद हाइपोथायरॉइडिज़्म (थायरॉइड की कमी) का शिकार हो जाते हैं, इसलिए बेहतर होगा कि सतक रहें और अपना थायरॉइड टेस्ट समय-समय पर करवाते रहें.
इस ट्रीटमेंट के वैसे कोई गंभीर साइड इफेक्ट्स नहीं होते, लेकिन एक साइड इफेक्ट बेहद गंभीर होता है, जिसमें व्हाइट ब्लड सेल्स का बोनमैरो निर्माण कम हो जाता है. इसका एक लक्षण होता है गले में सूजन. यदि आपको भी इलाज के बाद यह लक्षण नज़र आए, तो बेहतर है डॉक्टरी सलाह लेकर अपना व्हाइट ब्लड सेल्स चेक करवाएं.
सर्जरी की सलाह 45 वर्ष से कम आयुवाले ऐसे लोगों को दी जाती है, जहां उनका हाइपरथायरॉइडिज़्म टॉक्सिक ट्यूमर (एडेनोमाज़- इन्हें हॉट नॉड्यूल्स भी कहते हैं) के कारण होता है. ये नॉड्यूल्स रेडियोआयोडीन ट्रीटमेंट से ठीक नहीं होते, इसलिए सर्जरी का सहारा लिया जाता है. सर्जरी के कुछ ही हफ़्तों बाद हार्मोंस का स्तर सामान्य हो जाता है, लेकिन यहां भी हार्मोंस का स्तर सामान्य से भी कम हो जाने की संभावना रहती है, तो नियमित टेस्ट ज़रूरी है.
कभी-कभी अस्थायी तौर पर भी थायरॉइड हो जाता है, जो बिना दवा के या पेनकिल्लर्स से ठीक हो जाता है.
हाइपोथायरॉइडिज़्म: थायरॉइड की कमी में थायरॉइड हार्मोन रिप्लेसमेंट द्वारा इलाज किया जाता है. हालांकि एनिमल एक्स्ट्रक्ट से हार्मोंस उपलब्द्ध होते हैं, लेकिन डॉक्टर्स सामान्यत: सिंथेटिक थायरॉइड हार्मोंस को अधिक महत्ता देते हैं. इसके साइडइफेक्ट् न के बराबर हैं, लेकिन कुछ लोग घबराहट और सीने में दर्द का अनुभव कर सकते हैं.

घरेलू उपाय
हाइपरथायरॉइडिज़्म के लिए
– ब्रोकोली में गॉइट्रोजेन्स और आइसोथायोसाइनेट्स नामक तत्व होते हैं, जो थायरॉइड के निर्माण पर अंकुश लगाते हैं. अपने थायरॉइड हर्मोंस को नियंत्रित रखने के लिए जितना अधिक हो सके सलाद के रूप में ब्रोकोली का कच्चा ही सेवन करें.
– सोया प्रोडक्ट्स भी फ़ायदेमंद है, क्योंकि यह प्रोटीन से भरपूर होते हैं. प्रोटीन थायरॉइड हार्मोंस को दूसरे बॉडी टिश्यूज़ में ट्रांसपोर्ट कर देते हैं.
– अगर आपको सोया प्रोडक्ट्स पसंद नहीं, तो नट्स, अंडे और फलियों को डायट में शामिल करें.
– ओमेगा-3 फैटी एसिड्स ज़रूरी है. यदि आपके शरीर को यह नहीं मिल रहा, तो हार्मोंस में असंतुलन होगा. आप फ्लैक्स सीड्स, अखरोट और मछलियों के सेवन से इसे प्राप्त कर सकते हैं.
– पत्तागोभी में भी भरपूर मात्रा में गॉइट्रोजेन्स होते हैं. पत्तागोभी का सलाद यानी पत्तागोभी को कच्चा खाने से अधिक लाभ मिलेगा.
– बेरीज़ को अपने डायट में शामिल करें, क्योंकि सभी प्रकार की बेरीज़- ब्लू बेरीज़, स्ट्रॉ बेरीज़, ब्लैक बेरीज़ और चेरी आदि थायरॉइड ग्लांड्स को हेल्दी रखती हैं.
– आंवला थायरॉइड को कंट्रोल करने में बेहद कारगर है. आंवला पाउडर में शहद मिलाकर रोज़ सुबह नाश्ते से पहले लें.
– प्रीज़र्वेटिव्स युक्त, अधिक शक्कर व मैदा से बने पदार्थ न खाएं, जैसे- पास्ता, व्हाइट ब्रेड

हाइपोथायरॉइडिज़्म के लिए
– कोकोनट ऑयल थायरॉइड ग्लांड्स को क्रियाशील करके हर्मोंस के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है. खाना पकाने के लिए एक्स्ट्रा वर्जिन ऑर्गैनिक कोकोनट ऑयल का इस्तेमाल करें.
– रोज़ नाश्ता करते समय दूध में 2 टेबलस्पून कोकोनट ऑयल मिक्स करके पीएं.
– एप्पल साइडर विनेगर भी थायरॉइड के असंतुलन को पूरा करने में सहायक है. यह डीटॉक्सीफाइ करता है, एसिड-एल्कलाइन बैलेंस को बनाए रखता है, हार्मोंस को संतुलित करके मैटाबॉलिज़्म को बेहतर बनाता है, वज़न नियंत्रण में रखता है.
– 2 टेबलस्पून ऑर्गैनिक एप्पल साइडर विनेगर को एक ग्लास गर्म पानी में मिलाएं. थोड़ा शहद भी मिला लें. नियमित रूप से इसका सेवन करें.
– फिश ऑयल भी थायरॉइड हार्मोंस के निर्माण में सहायक होता है.
– विटामिन डी की कमी से ऑटोइम्यून डिसीज़ हो सकती हैं, जिनमें थायरॉइड भी एक है. रोज़ सुबह 15 मिनट तक धूप का सेवन करें.
– अदरक ज़िंक, मैग्नीशियम और पोटैशियम से भरपूर होता है. यह थायरॉइड ग्लांड्स की कार्यशैली को बेहतर बनाता है. अपने खाने में या सूप में अदरक के टुकड़े डालकर इसे अपने डायट में शामिल करें या फिर अदरक को पानी में उबालकर गर्म जिंजर टी का सेवन करें. इसमें आप शहद भी मिला सकते हैं.
– विटामिन बी थायरॉइड ग्लांड्स को हेल्दी रखता है. शोधों में अक्सर पाया गया है कि जो लोग हाइपोथायरॉइडिज़्म से ग्रसित हैं, उनमें विटामिन बी12 की कमी भी पाई जाती है.
– योग व प्राणायाम से थायरॉइड हार्मोंस का स्तर सामान्य बना रहता है. हाइपर व हाइपो दोनों ही थायरॉइड में योग का फ़ायदा है, लेकिन दोनों के लिए पोज़ अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए किसी योग गुरू से पूछकर उनकी देखरेख में ही यह करें.
– हाइपरथायरॉइडिज़्म के लिए सेतुबंधासन, शिशु आसन, शवासन, मार्जरीआसन और सूर्य नमस्कार फ़ायदेमंद हैं
– हाइपोथायरॉइडिज़्म के लिए प्राणायाम- शीतली प्राणायाम, उज्जयी और नाड़ी शोधन, हर तरह की ब्रीदिंग एक्सरसाइज़, योग निद्रा व ध्यान लाभदायक है.
– लेकिन किसी भी तरह के थायरॉइड में योग व एक्सरसाइज़ बिना डॉक्टरी सलाह व बिना एक्सपर्ट की देखरेख के शुरू न करें.

– गीता शर्मा