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Personal Problems: पति-पत्नी दोनों का ब्लड ग्रुप एक होने पर क्या समस्या हो सकती है? (Will Having The Same Blood Group Cause Problems In Future?)

मैं 35 वर्षीया महिला हूं. मेरी समस्या यह है कि मैं हर घंटे में टॉयलेट जाती हूं, रात में भी कम से कम 4-5 बार टॉयलेट जाना पड़ता है. कई बार मैंने यूरिन टेस्ट भी करवाया, लेकिन रिपोर्ट नॉर्मल आई. मैं बहुत परेशान हूं. कृपया, उपाय बताएं?
– बरखा माणिक, शिलांग.

आपको ‘ओवरएक्टिव ब्लैडर’ यानी बार-बार पेशाब जाने की समस्या हो सकती है. इसके लिए आपको यूरोडायनेमिक टेस्ट कराने होंगे, जो मूत्र संबंधी बीमारियों के लिए कराए जाते हैं. आप किसी यूरोलॉजिस्ट या गायनाकोलॉजिस्ट से संपर्क करें, जो बार-बार पेशाब जाने और ब्लैडर में होनेवाली गड़बड़ी के बारे में आपको सही जानकारी देंगे और उसका इलाज करेंगे. यदि दवाओं से आपको आराम नहीं होता तो बोटोक्स इंजेक्शन या सर्जरी के द्वारा भी इसका इलाज किया जा सकता है.

यह भी पढ़ें: Personal Problems: प्रेग्नेंसी में किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? (Do’s And Don’ts For A Safer Pregnancy)

Personal Problems

मैं 25 वर्षीया युवती हूं. मेरी शादी होनेवाली है. मेरे मंगेतर का और मेरा ब्लड ग्रुप एक ही है. क्या पति-पत्नी दोनों का ब्लड ग्रुप समान होने पर भविष्य में किसी तरह की समस्या हो सकती है?
– मीनल सक्सेना, लखनऊ.

ज़रूरी नहीं कि आपका और आपके मंगेतर का ब्लड ग्रुप समान है, तो आपकी शादीशुदा ज़िंदगी में किसी तरह की कोई समस्या हो. कुछ केसेस में, यदि महिलाओं का ब्लड ग्रुप ‘आरएच’ निगेटिव है और पति का पॉज़िटिव तो प्रेग्नेंसी के समय कुछ समस्या हो सकती है, विशेष रूप से पहली प्रेग्नेंसी के बाद. पहली प्रेग्नेंसी के दौरान यदि बच्चे का ब्लड ग्रुप पॉ़ज़ीटिव है, तो डिलीवरी के समय उसके ब्लड सेल्स मां के ब्लड स्ट्रीम में प्रवेश कर जाते हैं. ऐसा मां के शरीर में एंटीबॉडीज़ के प्रोडक्शन के कारण होता है. अगली प्रेग्नेंसी में ये एंटीबॉडीज़ मां के शरीर से बच्चे में पास हो सकती हैं और उसके ब्लड सेल्स को नष्ट कर सकती हैं, जिससे बच्चे के विकास में बाधा आ सकती है और उसकी जान को ख़तरा भी हो सकता है. इसलिए सावधानी के तौर पर हर महिला को प्रत्येक डिलीवरी के 72 घंटे के अंदर एंटी डी इंजेक्शन लेना चाहिए, जिससे ‘आरएच’ पॉ़ज़िटिव ब्लड सेल्स और एंटीबॉडीज़ फ़ॉरमेशन को बेअसर किया जा सके. एबॉर्शन और प्रेग्नेंसी की स्थिति में यह इंजेक्शन लेना ज़रूरी है. इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान कराए जानेवाले ब्लड टेस्ट मेंे एंटीबॉडी लेवल टेस्ट किया जाता है.

यह भी पढ़ें: Personal Problems: 3-4 महीनों के बाद पीरियड्स आते हैं (Why My Periods Are 3-4 Months Late?)

Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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आर्ट ऑफ ईटिंग राइट: सही खाना और कैलोरीज़ गिनना एक-दूसरे के विपरीत है- रुजुता दिवेकर (Indian Food Wisdom And The Art Of Eating Right By Rujuta Diwekar)

Rujuta Diwekar
आर्ट ऑफ ईटिंग राइट: सही खाना और कैलोरीज़ गिनना एक-दूसरे के विपरीत है- रुजुता दिवेकर (Indian Food Wisdom And The Art Of Eating Right By Rujuta Diwekar)

वेटलॉस को लेकर बहुत-से मिथ्स हैं. जब तक इन्हें दूर कहीं करेंगे, ग़लतियों करते रहेंगे. इस विषय पर जानीमानी स्पोर्ट्स साइंस और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट रुजुता दिवेकर ने बहुत कुछ बताया और लोगों को सही मार्गदर्शन दिया है. रुजुता दिवेकर न स़िर्फ भारत बल्कि विश्‍व के सबसे अधिक फॉलो किए जानेवाले न्यूट्रिशनिस्ट्स में से एक हैं. वो बेस्ट सेलिंग ऑथर भी हैं और हेल्थ व वेलनेस पर बेहतरीन स्पीकर भी. यही वजह है कि उन्हें एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएनटेरोलॉजी द्वारा न्यूट्रिशन अवॉर्ड से भी नवाज़ा जा चुका है.
जी हां, हम अक्सर डायटिंग और वेटलॉस का मतलब यही समझते हैं कि कैलोरीज़ गिन-गिनकर खाओ और कम खाओ. बहुत-सी चीज़ें न खाओ, जबकि यह सोच ही ग़लत है. सही खाना और सही एक्सरसाइज़ ही आपको सही रिज़ल्ट दे सकते हैं. यही नहीं हर किसी की ज़रूरत व शरीर अलग होता है. अगर कोई डायबिटीज़ या हार्ट पेशेंट है तो उसका खान-पान अलग होगा.

क्या है सही खाना और सही डायट प्लान?
– लोकल फूड खाएं. आप जहां रहते हैं, वहां के वातावरण व लाइफस्टाइल के हिसाब से खाना आपको अधिक सूट करता है. भारत में रहकर यदि आप विदेशी फल व सब्ज़ियां खाएंगे, तो आपको उतना लाभ नहीं मिलेगा, जितना भारतीय फल व सब्ज़ियां खाने से मिलेगा.
– मौसमी चीज़ें खाएं. मौसमी फल व सब्ज़ियां खाने से हिचकें नहीं.
– अपने हाथों से बनाकर हेल्दी खाना खाएं.
– अपनी ज़रूरतों व आसपास के वातावरण के अनुसार अपना डायट प्लान बनाएं.
– हर किसी का शरीर अलग होता है, क्योंकि उनके रहन-सहन का तरीक़ा, उनका स्ट्रेस लेवल, उनकी ईटिंग हैबिट्स, डायट पैटर्न आदि भी अलग होता है.
– ऐसे में उनके सभी बातों को ध्यान में रखते हुए सही डायट प्लान और एक्सरसाइज़ प्लान सिलेक्ट करना ज़रूरी है.
– आपको एक्सपर्ट बता पाएंगे कि आपके लिए क्या सही है.
– बिना सोचे-समझे खाना कम कर देने से फ़ायदे की जगह नुक़सान हो सकता है. हो सकता है सही पोषण न मिलने पर कमज़ोरी आ जाए. बेतहर होगा पूरी सजगता व सही जानकारी के आधार पर ही डायट व एक्सरसाइज़ करें.

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कैलोरीज़ नहीं, प्राण गिनें…
जहां एक तरफ़ वेस्टर्न कल्चर ने हमें कैलोरीज़ गिनना सिखाया है, वहीं हमारी सांस्कृतिक धरोहर ने हमें प्राणों यानी प्राणिक वैल्यू का महत्व बताया है. पेड़, पौधों और फसलों को प्राण कहां से मिलता है- हवा, पानी, सूर्य और मिट्टी में जो पोषक तत्व हैं उससे. जब उन्हें यह सही मात्रा में नहीं मिलेगा, तो ज़ाहिर है वो बीमार होंगे. ठीक इसी तरह हमें भी यदि ज़रूरी तत्व सही मात्रा में नहीं मिलेंगे, तो हम भी बीमार होंगे. प्राण क्या है? वो जीने का तत्व यानी जीने की ऊर्जा है. लेकिन यह ऊर्जा पश्‍चिम के शब्द एनर्जी से बिल्कुल अलग है. उनके लिए एनर्जी कैलोरीज़ होती हैं, जिन्हें गिनना ज़रूरी है, जबकि प्राण वो जीवनी शक्ति है, जो आपको संतुलित ऊर्जावान, ताज़ा व हल्का महसूस कराती है. इस वीडियो से आप इसे बेहतर तरी़के से समझ सकते हैं और हेल्दी लाइफ की ओर बढ़ सकते हैं.

सौजन्य: https://www.rujutadiwekar.com

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Personal Problems: बेटी को यूरिन पास करते समय बहुत तकलीफ़ होती है (Child Pain When Urinating)

मेरी एक साल की बेटी है, जो यूरिन पास करते समय बहुत रोती है. जन्म के समय से ही उसकी मूत्रनली बहुत संकीर्ण है. पेडियाट्रिशियन को दिखाया तो उसने गायनाकोलॉजिस्ट से संपर्क करने को कहा. क्या करूं, समझ में नहीं आ रहा?
– रीता पॉल, जैसलमेर

आपकी बेटी को लेबियल फ्यूज़न की समस्या हो सकती है. लेबियल फ्यूज़न में योनि के बाहर की जननेन्द्रियां आपस में चिपकी रहती हैं. ये जननेन्द्रियां मां के शरीर में ज़्यादा हार्मोंस होने के कारण आपस में चिपक जाती हैं और पेशाब का रास्ता ब्लॉक हो जाता है. इसके लिए आप गायनाकोलॉजिस्ट से संपर्क करें. आपकी बेटी की जांच करने के बाद वह एस्ट्रोजन (हार्मोन) क्रीम लगाने के लिए देंगी. अगर क्रीम लगाने से समस्या हल नहीं होती है, तो हो सकता है सर्जरी करवानी पड़े.

Child Pain When Urinating

मैं 25 वर्षीया महिला हूं और मेरा 3 साल का बच्चा है. मेरी सहेली ने मुझे कुछ ऐसे नए कॉन्ट्रासेप्टिव्स के बारे में बताया है, जिन्हें माह में एक बार योनि में इंसर्ट किया जा सकता है. कृपया, मुझे इनके बारे में कुछ जानकारी दें? क्योंकि मैं हमेशा ही योनि में पिल्स रखना भूल जाती हूं.
– काजल बडोनी, हरिद्वार

आजकल मार्केट में ऐसे कई नए कॉन्ट्रासेप्टिव्स मिल जाते हैं, जिन्हें आप आसानी से योनि में इंसर्ट कर सकती हैं, जैसे- नुवा रिंग. अन्य ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव्स की तरह यह भी एक हार्मोनल कॉन्ट्रासेप्टिव है, जिसे आप योनि में 3 सप्ताह के लिए रख सकती हैं और चौथे सप्ताह पीरियड के लिए उसे निकाल सकती हैं. इसे भी दूसरे वेजाइनल रिंग्स की तरह इंसर्ट किया जाता है. लेकिन इस कॉन्ट्रासेप्टिव का इस्तेमाल करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें. वह आपको इंसर्ट करने का तरीक़ा बताएंगी कि उसे किस तरह वेजाइना में इंसर्ट करें. यदि इंटरकोर्स के दौरान नुवा रिंग निकल जाती है, तो उसे ठंडे पानी से साफ़ करके दोबारा इंसर्ट कर सकती हैं.

यह भी पढ़ें: Personal Problems: 3-4 महीनों के बाद पीरियड्स आते हैं (Why My Periods Are 3-4 Months Late?)

Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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Personal Problems: सामान्य पीरियड्स किसे कहते हैं? (What Is A Normal Menstrual Period?)

मैं 19 वर्षीया कॉलेज स्टूडेंट हूं. मैं यह जानना चाहती हूं कि सामान्य पीरियड्स किसे कहते हैं. इसकी क्या परिभाषा है? कृपया, मार्गदर्शन करें.
– आस्था चहल, गंगटोक. 

यह बताना बहुत ही मुश्किल है कि सामान्य पीरियड्स क्या है, क्योंकि हर महिला का शरीर अलग होता है और उसकी ब्लीडिंग और लक्षण दूसरों से अलग होते हैं, इसलिए इसे परिभाषित करना आसान नहीं है. कुछ बातों का ध्यान रखकर आप कह सकती हैं कि आपके पीरियड्स असामान्य हैं, जैसे- किसी महीने पीरियड्स न आना, अचानक अत्यधिक रक्तस्राव होना, लंबे समय तक ब्लीडिंग का होना आदि. अगर आपके साथ ऐसा हो रहा हो, तो आप अपनी गायनाकोलॉजिस्ट से संपर्क करें. वो आपका चेकअप करके बताएंगी कि गर्भाशय से संबंधित कोई समस्या तो नहीं. साथ ही उसका सही इलाज भी करेंगी. पीरियड्स का साइकल 28 दिनों का ही होता है, यह एक मिथ्या है. बढ़ती उम्र के साथ हर महिला के साइकल में भी बदलाव होते रहते हैं.

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Normal Menstrual Period

मैं 26 वर्षीया शादीशुदा महिला हूं. मैं रोज़ाना अपने वेजाइना को साफ़ करती हूं, फिर भी एक गंध-सी आती है. क्या यह सामान्य है? 
– मधुमिता गौर, उज्जैन.

हेल्दी वेजाइना की अपनी एक गंध होती है, लेकिन वो बुरी नहीं होती. अगर आपको लगता है कि यह गंध गंदी या बदबूदार है, तो यह किसी तरह का वेजाइनल इंफेक्शन हो सकता है. ध्यान दें कि आपका खानपान भी वेजाइना की गंध को प्रभावित करता है. इसके अलावा बहुत ज़्यादा कैफीन, अल्कोहल या स्मोकिंग भी वेजाइना की गंध को प्रभावित करती है. अगर आपको गंध से कोई द़िक्क़त हो रही है, तो अपनी डॉक्टर से मिलें. वो आपको इस बारे में अच्छी तरह से गाइड करेंगी और अगर कोई इंफेक्शन हुआ, तो ट्रीटमेंट भी आसानी से हो जाएगा.

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Personal Problems: क्या फिज़िकल एक्ज़ामिनेशन से सेक्सुअल एक्टिविटी का पता लग सकता है? (Can A Doctor Tell If You Are Sexually Active?)

मैं एक कॉलेज स्टूडेंट हूं. मैं यह जानना चाहती हूं कि हैवी पीरियड्स किसे कहते हैैं? क्या दिन में कई पैड्स बदलना हैवी पीरियड्स कहलाता है?
– रेणु चौहान, नागपुर.

दिनभर में कई सैनीटरी पैड्स बदलने का मतलब यह नहीं कि आपके पीरियड्स हैवी हैं. हो सकता है, ऐसा आप हाइजीन के लिहाज़ से करती हों. पीरियड्स को तभी हैवी या असामान्य कह सकते हैं, जब यह आपके रोज़मर्रा की ज़िंदगी में खलल डालता हो. अगर आप कॉलेज या ऑफिस नहीं जा पा रही हैं और रोज़ाना के काम अपने आप नहीं कर पा रही हैं, तो यह हैवी कहलाता है. ऐसे में आपको डॉक्टर को मिलना होगा. वैसे हैवी पीरियड्स का कारण थायरॉइड भी हो सकता है, इसलिए बेहतर होगा कि डॉक्टर से इस बारे में बात करें.

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Sexually Active

मैं 28 वर्षीया वर्किंग वुमन हूं. अभी मुझे फिज़िकल एक्ज़ामिनेशन के लिए डॉक्टर के पास जाना है. क्या डॉक्टर शारीरिक जांच करके पता लगा सकते हैं कि मैं सेक्सुअली एक्टिव हूं? दरअसल, डॉक्टर हमारे फैमिली फ्रेंड हैं और मैं नहीं चाहती कि मेरे पैरेंट्स को पता चले कि मैं सेक्सुअली एक्टिव हूं.
– रागिनी, नई दिल्ली.

यह बहुत मुश्किल है या यूं कहें कि नामुमकिन है, क्योंकि स़िर्फ फिज़िकल एक्ज़ामिनेशन से कोई डॉक्टर पूरे दावे के साथ यह नहीं बता सकता. वर्जिनिटी के लिए जिस हाइमन की बात की जाती है, कुछ महिलाओं में तो यह जन्म से ही नहीं होता. इसके अलावा फिज़िकल एक्टिविटी के कारण बहुतों का हाइमन सेक्स से पहले ही फट जाता है. सही तो यही होगा कि आप अपने डॉक्टर से कुछ न छिपाएं, क्योंकि वो आपको किसी भी तरह के इंफेक्शन से बचा सकते हैं. अगर आप उन्हें सच बता देंगी, तो वो उस नज़रिए से एक्ज़ामिनेशन करेंगे और आप भविष्य में होनेवाली किसी हेल्थ प्रॉब्लम से बच सकती हैं.

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Personal Problems: बिकनी लाइन के आस-पास फुंसियों के लिए क्या करूं? (How To Get Rid Of Bikini Boils?)

मैं 40 वर्षीया महिला हूं. मेरे बिकनी लाइन के आसपास कुछ फुंसियां हो गई हैं, जबकि मैं अपने यौनांगों की साफ़-सफ़ाई का पूरा ध्यान रखती हूं. एंटीसेप्टिक सोल्यूशन से साफ़ करती हूं और रेग्यूलर शेव भी करती हूं. फिर भी फुंसियां हो जाती हैं. कोई उपाय बताएं.
– विनीता पांडे, दिल्ली.

बिकनी एरिया में शेव करते समय शायद कुछ कट लग जाने से आपको इंफेक्शन हो गया है. इसलिए बालों को हटाने के लिए शेविंग की बजाय कैंची से कट करें. नहाते समय यौनांगों की सफ़ाई के लिए माइल्ड एंटीसेप्टिक सोल्यूशन का इस्तेमाल करें. कॉटन के अंडर गार्मेंट्स पहनें. अगर फिर भी ये फुंसियां ठीक नहीं होती हैं और ज़्यादा दर्द होता है, तो गायनाकोलॉजिस्ट से संपर्क करें. वो आपको एंटीबायोटिक गोलियां और कोई क्रीम या लोशन देंगे.

यह भी पढ़ें: Personal Problems: क्या मेनोपॉज़ के बाद ब्लीडिंग सामान्य है? (Is Postmenopausal Bleeding Normal?)

Bikini Boils

मेरी उम्र 42 साल है. मेरे दोनों ब्रेस्ट में बहुत दर्द होता है. कभी-कभी तो गांठ-सी भी महसूस होती है. आजकल मैंने ब्रेस्ट कैंसर के बारे में बहुत सुना है. मुझे डर है कि कहीं मुझे भी तो ब्रेस्ट कैंसर नहीं हैं?
– नेहा देसाई, झांसी.

अच्छा होगा कि आप ब्रेस्ट सर्जन या गायनाकोलॉजिस्ट से अपना चेकअप कराएं, जो आपकी मेमोग्राफ़ी और सोनो मेमोग्राफ़ी कराएंगी. जांच के बाद सारी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. अमूमन 40 साल के बाद सभी महिलाओं को मेमोग्राफ़ी करानी चाहिए. हर महीने अपना सेल्फ़ ब्रेस्ट एग्ज़ामिनेशन करते रहना चाहिए. शीशे के सामने ख़ड़े होकर अपने वक्षों की सुडौलता, निप्पल का लेवलव कलर, स्किन के कलर को अच्छी तरह से चेक करें. ले़फ़्ट हैंड से राइट ब्रेस्ट को और राइट हैंड से ले़फ़्ट ब्रेस्ट को दबाएं. कहीं कोई गांठ तो महसूस नहीं हो रही है. कई बार पीरियड्स बंद होने के एक सप्ताह बाद और मेनोपॉज़ के बाद माह में एक बार ब्रेस्ट में दर्द होता है. हर महिला को 3-5 साल में मेमोग्राफ़ी कराते रहना चाहिए.

यह भी पढ़ें: Personal Problems: कहीं मैं प्रेग्नेंट तो नहीं हो गई? (Am I Pregnant?)

Dr. Rajshree Kumar

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Personal Problems: क्या दोबारा मेरी डिलीवरी सिज़ेरियन ही होगी? (Do I Have To Go Through Cesarean Delivery Again?)

मैं 28 वर्षीया महिला हूं. मुझे 7 महीने का गर्भ है. कुछ दिन पहले मुझे ब्लीडिंग हुई थी. तब डॉक्टर ने बताया कि मेरा प्लासेंटा भ्रूण के मुंह के बहुत पास है और दोबारा भी ब्लीडिंग हो सकती है. कृपया, ब्लीडिंग को रोकने का कोई उपाय बताएं. क्या मेरी डिलीवरी सिज़ेरियन होगी? मेरी पहली डिलीवरी भी सिज़ेरियन थी.
– निष्ठा गांधी, अजमेर.

ऐसा लगता है कि आपका प्लासेंटा कमज़ोर है. यूटेरस के निचले भाग के खिंचने और कमज़ोर होने के कारण ब्लीडिंग होती है. प्रेग्नेंसी के आख़िरी तीन महीने में ऐसा होता है और इसके खिंचाव व कमज़ोर होने का कारण है प्लासेंटा का कमज़ोर होना. अगर ब्लीडिंग होती है, तो आपको तुरंत अपने गायनाकोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए. आपकी कंडीशन को देखते हुए ब्लीडिंग को रोकने के लिए वे आपकी डिलीवरी सिज़ेरियन भी कर सकते हैं.

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Cesarean Delivery

मेरी उम्र 22 वर्ष है. कुछ दिनों से मेरे प्राइवेट पार्ट के पास कुछ रैशेज़ हो गए हैं और बहुत खुजली व जलन भी होती है. मुझे उठने-बैठने में भी बहुत परेशानी होती है. कृपया, कोई उपाय बताएं.
– महक पॉल, मुंबई.

इसके लिए आप गायनाकोलॉजिस्ट या डर्मेटोलॉजिस्ट से संपर्क करें. लेकिन आपने यह नहीं लिखा कि क्या आप सेक्सुअली एक्टिव हैं? हो सकता है आपको हर्पिस इं़़फेक्शन हो? आपको तुरंत इसका उपचार कराना चाहिए. हर्पीस दो तरह का होता है, पहला- एचएसवी-1 और दूसरा- एचएसवी-2. ज़्यादातर लोगों में एचएसवी-2 के कारण यौनांग हर्पिस होता है. इंफेक्शन होने पर मलाशय और उसके आसपास की जगह पर एक या एक से अधिक फफोले हो जाते हैं और फफोले फूटने पर घाव भी हो जाते हैं. एचएसवी-2 इंफेक्शन से पीड़ित व्यक्ति (पुरुष/स्त्री) से शारीरिक संबंध बनाने पर दूसरे व्यक्ति को भी एचएसवी-2 इंफेक्शन हो सकता है. इस रोग से बचने का तरीक़ा है- यौन संपर्क से बचना. यदि सेक्स करना चाहते हैं तो कंडोम का इस्तेमाल ज़रूर करें.

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लताजी की हालत गंभीर… (Lata Mangeshkar In ICU)

लेजेंड सिंगर लता मंगेशकरजी को सांस लेने मेंं तकलीफ़ होने के कारण आईसीयू में भर्ती किया गया है. वे मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में हैं. कल रात से उन्हें सांस लेने में द़िक्क़त होने लगी, जिसके कारण उन्हें तुरंत अस्पताल में लाया गया.

 Lata Mangeshkar
पिछले ही महीने 28 सितंबर को लताजी ने अपना नब्बे वां जन्मदिन मनाया था. तब सभी सेलिब्रिटीज़ ने उन्हें बधाइयां और ढेर सारी शुभकामनाएं दी थीं. ख़ासकर अमिताभ बच्चन और सचिन तेंदुलकर ने तो दिल को छू लेनेवाले वीडियो संदेश सोशल मीडिया पर उन्हें जन्मदिन की मुबारकबाद देते हुए शेयर किए थे, जिसे लोगों ने बेहद पसंद दिया.
लताजी ने अब तक क़रीब एक हज़ार से अधिक गाने गाए हैं. उन्हें साल 2001 में भारत रत्न से भी सम्मानित किया जा चुका है. उन्होंने लगभग 36 भाषाओं में अपनी आवाज़ दी है.
पिछले दिनों अपने सोशल अकाउंट से उन्होंने पानीपत फिल्म में गोपिका बाई का क़िरदार निभा रही पद्मिनी कोल्हापुरे की तारीफ़ भी की थी.
उनकी अच्छे सेहत की दुआ करते हैं. आशा है, वे जल्द ही स्वस्थ होकर हो जाएंगी. गेट वेल सून…

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Personal Problems: क्या मेनोपॉज़ के बाद ब्लीडिंग सामान्य है? (Is Postmenopausal Bleeding Normal?)

मेरी मां 59 वर्षीया हैं. जब वो 53 साल की थीं, तभी उनका मेनोपॉज़ हो गया था, लेकिन पिछले हफ़्ते वो कहने लगीं कि उनके पीरियड्स वापस आ गए हैं, वो भी पूरे छह साल बाद. क्या यह सामान्य है?
– संगीता शर्मा, राजकोट.

मेनोपॉज़ के बाद ब्लीडिंग सामान्य नहीं है. आपकी मां को तुरंत चेकअप कराके पता करना होगा कि ब्लीडिंग कहां से हो रही है, मसलन वेजाइना, सर्विक्स, यूटेरस या फिर वल्वा से. इस तरह की ब्लीडिंग के कई कारण हो सकते हैं. यहां तक कि ऐसे मामलों में इंडोमेट्रियल कैंसर का भी ख़तरा हो सकता है, इसलिए बिना किसी तरह की देरी किए आप फ़ौरन उनका चेकअप करवाएं.

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 Postmenopausal Bleeding

एक महीने पहले जब मेरी डिलीवरी हुई थी, तब डॉक्टर ने छह हफ़्ते बाद आकर फॉलोअप चेकअप कराने और बच्चे के वैक्सीन्स शुरू करने की बात कही थी. पर हाल ही में मैंने वैक्सीन्स के कारण ऑटिज़्म के बारे में सुना है, इसलिए मैं अपने बच्चे को वैक्सीन्स नहीं दिलवाना चाहती. क्या ऐसा करना सही होगा?
– राजकुमारी चौहान, वाराणसी.

बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए वैक्सीन यानी टीकाकरण बहुत ज़रूरी है. टीके की बदौलत हमने चेचक जैसी महामारी को ख़त्म कर दिया है और पोलियो में भी काफ़ी अच्छी सफलता मिल रही है. अगर टीके के कारण आपका बच्चा बीमारियों से बच सकता है, तो फिर आप उसे इससे वंचित क्यों रखना चाहती हैं. बल्कि आपके बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए यह सबसे बेहतरीन निवेश है. पूरी दुनिया में जब से टीकाकरण शुरू हुआ है, तब से टीबी, टिटनस, पोलियो, चेचक, डिप्थीरिया, कंठमाला का रोग और हेपाटाइटिस बी जैसी गंभीर बीमारियों के मामलों में काफ़ी कमी आई है.

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सोरायसिस से पीड़ित हैं! यात्रा के दौरान रखें इन बातों का ख्‍याल (Travel Guide: Easy Tips For Traveling With Psoriasis)

Psoriasis

सोरायसिस से पीड़ित हैं! यात्रा के दौरान रखें इन बातों का ख्‍याल (Travel Guide: Easy Tips For Traveling With Psoriasis)

हरी-भरी वादियों, बर्फ से ढंके पहाड़ों और सूरज की रोशनी से भरपूर, सुनहरे समुद्रतटों पर जाने का मजा ही कुछ और है, लेकिन यदि आपको सोरायसिस हो तो? ऐसे लोगों को यात्रा करने के दौरान असहजता हो सकती है. यदि वे मामूली से लेकर गंभीर प्रकार के सोरायसिस से ग्रस्‍त हैं. खासकर लंबी यात्रा में.सोरायसिस एक स्व-प्रतिरक्षित रोग है, जिसमें त्वचा की नई कोशिकाएं सामान्य की तुलना में अधिक तेजी से विकसित होती हैं.

आमतौर पर हमारा शरीर पुरानी कोशिकाओं की जगह भरने के लिये प्रत्येक 10 से 30 दिन में त्वचा की नई कोशिकाएं बनाता है. सोरायसिस में त्वचा की नई कोशिकाएं 3 से 4 दिन में ही बन जाती हैं और शरीर को पुरानी कोशिकाएं हटाने का समय नहीं मिलता है. इससे त्वचा की सतह पर परत आ जाती है और त्वचा शुष्क, खुजली वाली, पपड़ीदार दिखाई देने लगती है और उस पर लाल चकत्ते या चमकीली परत आ जाती है.

सोरायसिस से पीड़ित लोगों को यदि बिना किसी परेशानी के एक आरामदायक यात्रा का आनंद उठाना है तो उन्‍हें बस पहले से योजना बनाना जरूरी है. चिकित्सा विशेषज्ञों ने संकेत दिया है कि सोरायसिस से पीड़ित लोगों के लिये यात्रा सम्बंधी कोई विशेष मनाही नहीं हैं, उनके लिए हल्की धूप वाला मौसम ठंडे और शुष्क मौसम की तुलना में बेहतर रहता है.  डॉ. शेहनाज़ अरसीवाला, त्वचा रोग विशेषज्ञ, सैफी हॉस्पिटल एवं प्रिंस अली खान हॉस्पिटल और मेडिकल डायरेक्टर, रीन्यूडर्म सेंटर स्किन हेयर लेजर्स एंड एस्थेटिक्स सोरायसिस से पीड़ित लोगों के लिये यात्रा सम्बंधी कुछ उपयोगी टिप्स दे रही हैं, जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए.

 

  1. सबसे पहले योजना बनाएं : चाहे आप छोटी यात्रा पर जा रहे हों या फिर लंबे समय के लिए, आपको दो सप्ताह पहले से तैयारी आरम्‍भ कर देनी चाहिए. ठहरने के दौरान की गतिविधियों को निश्चित करना और यात्रा के लिये आवश्यक चीजों को रखना अच्छा होता है. इन चीजों में आपकी दवाएं भी शामिल हैं और वे आपके सामान में सरलता से शामिल होनी चाहिए. यात्रा के दौरान अपनी भोजन सम्बंधी आदतों का नियमित ध्यान रखें और शराब से बचें. इस बारे में आपके त्वचा रोग विशेषज्ञ बेहतर सलाह दे सकते हैं. तनाव से सोरियासिस की पीड़ा बढ़ जाती है, इसलिये अपने यात्राक्रम की पहले से योजना बनाकर आप अंतिम मिनट की परेशानियों से बच सकते हैं. सोरियासिस के रोगियों को यात्रा पर जाने से पहले खूब आराम करने और अपनी त्वचा को अधिक से अधिक नम रखने की सलाह भी दी जाती है.

 

  1. अपने त्वचा रोग विशेषज्ञ के पास अवश्य जाएं: छुट्टियों पर जाने से पहले यह सुनिश्चित करना अच्छा होता है कि आपकी त्वचा की स्थिति अच्छी हो, इसलिए यात्रा की योजना बनाने से पहले अपने त्वचा रोग विशेषज्ञ के पास जाना महत्वपूर्ण है. सुनिश्चित करें कि आपकी दवाओं के सभी पर्चे व्यवस्थित हों और लिखित पर्चों की प्रति भी मांगें, ताकि यात्रा के समय जरूरत पड़ने पर वे काम आ सकें. यदि आपको बायोलॉजिक्स के इंजेक्शन लगते हैं, तो इसके बारे में अपने त्वचा रोग विशेषज्ञ से पूरी जानकारी प्राप्‍त कर लें. इस जानकारी में वह महत्वपूर्ण वर्णन भी होना चाहिये, जो आपकी यात्रा के स्थान पर वहाँ के त्वचा रोग विशेषज्ञ से मदद लेने में काम आ सके.

 

  1. पैकिंग सावधानी से करें और जरूरी सामान व्‍यवस्थित रखें : आपके गंतव्य के लिये उपयुक्त कपड़े, जूते और अन्य चीजें रखें. उदाहरण के लिए यदि आप गर्म, आर्द्र क्षेत्र में जा रहे हैं, तो हल्के, ढीले, पसीने को बाहर निकालने वाले कपड़े रखें. यदि आप ठंडे स्थान पर जा रहे हैं, तो टोपी, दस्ताने और स्कार्फ रखें, ताकि आपकी त्वचा सुरक्षित रहे. त्वचा रोग विशेषज्ञ द्वारा बताए गए मेडिकैटेड शैम्पू, मॉइश्चराइजर और साबुन या क्लींजर रखें और उनके द्वारा बताया गया सनस्क्रीन ले जाना कतई न भूलें. यात्रा के समय दवाएं लेना न भूलें. किसी भी तरह के दर्द से बचने के लिये अच्छी नींद लें.

 

  1. संक्रमण के जोखिम से बचें: कुछ प्रकार के संक्रमण सोरियासिस की पीड़ा बढ़ा सकते हैं. अपने त्वचा रोग विशेषज्ञ के निर्देशानुसार उपचार के क्रम में रक्त की आवश्यक जांचें करवाएं. इससे यह सुनिश्चित होगा कि आपको संक्रमण का जोखिम नहीं है. यात्रा के दौरान स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करें और वायरल संक्रमण वाले व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें. स्वच्छ रहने के लिए अपने हाथ धोएं और त्वचा रोग विशेषज्ञ द्वारा बताए गए सैनिटाइजर का उपयोग करें. शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा होना भी बहुत जरूरी है.

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ब्लड डोनेशन से जुड़े मिथ्स…! (Myths About Blood Donation)

Myths About Blood Donation

ब्लड डोनेशन से जुड़े मिथ्स…! (Myths About Blood Donation)

रक्तदान को जीवनदान कहा जाता है, लेकिन आज भी इसे लेकर लोग बहुत उत्साहित नज़र नहीं आते, कारण- रक्तदान को लेकर बहुत-सी ग़लतफ़हमियां आज भी बनी हुई हैं. क्या हैं वो ग़लतफ़हमियां यह जानना ज़रूरी है, ताकि लोगों के मन से भ्रांतियां दूर हों और रक्तदान को लेकर वो अधिक उत्साहित हों.

1. रक्तदान आपको कमज़ोर बनाता है.
अक्सर लोग सोचते हैं कि रक्तदान करने के बाद उनमें कमज़ोरी आ जाएगी और उनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाएगी.
लेकिन यह सोच ग़लत है. रक्तदान के बाद कुछ ही दिनों में रेड ब्लड सेल्स यानी लाल रक्त कण सामान्य संख्या में पहुंच जाते हैं. व्हाइट ब्लड सेल्स को थोड़ा ज़्यादा समय लगता है, लेकिन यदि शरीर को यह सिग्नल मिले कि वो ख़तरे में है, तो यह प्रक्रिया और भी तेज़ हो जाती है.

2. रक्तदान की प्रक्रिया काफ़ी तकलीफ़देह व दर्दनाक होती है.
जी नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. स़िर्फ सुई चुभनेभर का दर्द ज़रूर होता है, लेकिन रक्तदान के बाद आपके हाथ का वह भाग एक-दो दिन में ही सामान्य हो जाता है, जहां से सुई भीतर जाती है.

3. महिलाओं को ब्लड डोनेशन नहीं करना चाहिए.
अक्सर लोगों की यह धारणा होती है कि महिलाएं मासिक स्राव से गुज़रती हैं, इसलिए उन्हें रक्तदान नहीं करना चाहिए. कुछ लोग यह भी मानते हैं कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर कम होता है, इसलिए उन्हें रक्तदान से दूर रहना चाहिए, वरना वे अधिक कमज़ोर हो सकती हैं. हक़ीक़त यह है कि रक्तदान का लिंग से कोई लेना-देना नहीं होता. जिस तरह से पुरुषों पर रक्तदान असर करता है, महिलाओं को भी उसी तरह प्रभावित करता है. महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर प्राकृतिक रूप से कम ही होता है, इसलिए उन्हें रक्तदान से कोई कमज़ोरी नहीं होगी. हां, यदि वे गर्भवती हों, स्तनपान करा रही हों, किसी बीमारी या समस्या के चलते वे एनिमिक हों, तो उन्हें रक्तदान नहीं करना चाहिए.

4. रक्तदान करनेवाले को जानलेवा इंफेक्शन्स का ख़तरा अधिक होता है.
रक्तदान के समय संक्रमण का डर भी बड़ी वजह है लोगों को रक्तदान से रोकने की. लेकिन रक्तदान के समय नई सुई का ही इस्तेमाल होता है और आप स्वयं भी जागरूक रहेंगे, तो ऐसा कोई ख़तरा नहीं होगा, इसलिए बेझिझक रक्तदान करें.

5. रक्तदान के बाद एक-दो दिन का आराम ज़रूरी होता है.
ऐसा कोई नियम नहीं है और न ही इसकी ज़रूरत है. आप रक्तदान के फ़ौरन बाद ही अपने काम पर लौट सकते हैं, बशर्ते आपने रक्तदान के बाद भरपूर पानी या जूस वगैरह पिया हो, ताकि शरीर में पानी की आपूर्ति हो जाए. हां, रक्तदान के बाद 24 घंटों तक अल्कोहल व तेज़ धूप से बचना चाहिए.

6. अगर आप स्मोक करते हैं, तो आप रक्तदान नहीं कर सकते.
भले ही आप स्मोकर हों, पर आप ब्लड डोनेट कर सकते हैं. हां, ब्लड डोनेशन के बाद तीन घंटे तक स्मोक न करें और डोनेशन से एक दिन पहले शराब का सेवन भी न करें.

7. रक्तदान बहुत ही समय लेनेवाली प्रक्रिया है.
ब्लड डोनेशन में 45 मिनट से एक घंटे तक का समय लगता है, जिसमें ब्लड डोनेशन की प्रक्रिया मात्र 10-12 मिनट की ही होती है, लेकिन फॉर्म भरना और डोनेशन के बाद रिफ्रेशमेंट वगैरह मिलाकर 45 मिनट से एक घंटे तक का ही समय लगता है.

8. दुबले-पतले लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
आपका वज़न 50 किलो से अधिक हो और आपकी आयु 18 वर्ष या अधिक हो, तो आप रक्तदान कर सकते हैं.

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Blood Donation Myths

9. उच्च रक्तचापवाले रक्तदान नहीं कर सकते.
ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. यदि आपका रक्तचाप 180 और 100 है, तो भी आप रक्तदान कर सकते हैं. यह रक्तचाप हालांकि अधिक है, लेकिन यह आपको रक्तदान से नहीं रोक सकता. यहां तक कि रक्तचाप की दवाइयां भी इस प्रक्रिया में अवरोध नहीं बनतीं.

10. डायबिटीज़ से ग्रसित लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
अगर आप इंसुलिन जैसे सप्लीमेंट्स लेते हैं, तो ही रक्तदान नहीं कर सकते, लेकिन यदि आप पिल्स लेते हैं और लाइफस्टाइल के ज़रिए डायबिटीज़ नियंत्रित करते हैं, तो आप रक्तदान ज़रूर कर सकते हैं. जिन्हें हृदय रोग हों और जो टाइप 2 डायबिटीज़ की वजह से ब्लड प्रेशर से ग्रसित हों, वे किन्हीं असाधारण परिस्थितियों में रक्तदान न कर पाएं, लेकिन बाक़ी कोई वजह नहीं जो आपको रक्तदान से रोके.

11. रक्तदान के बाद स्पोर्ट्स या फिज़िकल एक्टीविटीज़ नहीं कर सकते.
यह मात्र एक भ्रांति है. रक्तदान के एक घंटे बाद ही आपकी ज़िंदगी पूरी तरह से सामान्य हो जाती है. यदि आप खेल-कूद के शौकीन हैं या किसी स्पोर्ट्स एक्टीविटी में हिस्सा लेना चाहते हैं, तो जिस दिन ब्लड डोनेट किया, उसी दिन आप हिस्सा ले सकते हैं या मनपसंद खेल खेल सकते हैं.

12. दवा खानेवाला व्यक्ति रक्तदान नहीं कर सकता.
आमतौर पर लोगों की यही धारणा होती है कि यदि आप किसी दवा का सेवन कर रहे हैं, तो रक्तदान नहीं कर सकते, लेकिन सच तो यह है कि अधिकांश दवाएं आपको रक्तदान से नहीं रोकतीं. अगर आप सर्दी-ज़ुकाम की दवा, कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स, विटामिन या न्यूट्रिएंट सप्लीमेंट, पेनकिलर, पैरासिटामॉल, एंटैसिड या एंटी एलर्जिक दवाएं ले रहे हैं, तो आप रक्तदान कर सकते हैं. हां, अगर आप एंटीबायोटिक्स का सेवन कर रहे हैं, तो आपको कोर्स पूरा होने के बाद 72 घंटे इंतज़ार करना होगा. यदि आप किसी मानसिक समस्या की दवा ले रहे हैं, तो अपने सायकिएट्रिस्ट से पूछकर ही रक्तदान करें.

13. सीज़नल एलर्जी से ग्रसित लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
सर्दी-ज़ुकाम जैसी सीज़नल एलर्जी आपको रक्तदान से नहीं रोकतीं. आप बेझिझक रक्तदान कर सकते हैं.

14. बहुत जल्दी-जल्दी रक्तदान नहीं करना चाहिए, वरना शरीर कमज़ोर हो जाएगा.
एक स्वस्थ व्यक्ति साल में चार बार रक्तदान कर सकता है. हर तीन महीने के अंतराल पर आप रक्तदान कर सकते हैं, इसलिए यह भ्रम मन से निकाल दें कि आप कमज़ोर हो जाएंगे.

15. हाई कोलेस्ट्रॉलवाले रक्तदान नहीं कर सकते.
यदि आप हाई कोलेस्ट्रॉल की दवाएं भी ले रहे हैं, तब भी रक्तदान कर सकते हैं.

16. रक्तदान से मोटापा बढ़ता है.
रक्तदान से वज़न नहीं बढ़ता, लेकिन कुछ लोग रक्तदान के बाद मानसिक तौर पर यह मान लेते हैं कि वो कमज़ोर हो गए और उन्हें अधिक पोषण की ज़रूरत है. ऐसे में वो अधिक खाने लगते हैं और एक्सरसाइज़ या शारीरिक गतिविधियां घटा देते हैं, जिससे उनका वज़न बढ़ सकता है. तो सीधे तौर पर यह मोटापे से नहीं जुड़ा है.

कौन रक्तदान नहीं कौन रक्तदान नहीं कर सकता?
  • 60 वर्ष से अधिक व 18 वर्ष से कम आयु के लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
  • गर्भवती स्त्रियां.
  • स्तनपान करानेवाली मांएं.
  • अगर आपने व्रत रखा है, तो रक्तदान नहीं कर सकते, क्योंकि रक्तदान से चार घंटे पहले अच्छा भोजन करना बेहतर होता है.
  • अल्कोहल के सेवन के बाद.
  • इंसुलिन लेनेवाले डायबिटीज़ के रोगी.

– गीता शर्मा

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Personal Problems: 3-4 महीनों के बाद पीरियड्स आते हैं (Why My Periods Are 3-4 Months Late?)

मैं 18 वर्ष की हूं. शुरू से ही मुझे अनियमित माहवारी की समस्या है. कभी-कभी 3-4 महीनों के बाद माहवारी आती है. इन दिनों मेरे चेहरे पर ख़ूब सारे बाल भी हो गए हैं. ऐसा क्यों हो रहा है? कृपया, सलाह दें.
– नुपूर बबेरवाल, हरियाणा.

पीरियड शुरू होने के एक-दो साल बाद तक कई लड़कियों को अनियमित पीरियड की समस्या होती है, लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे पीरियड नियमित होने लगता है. यदि आपका पीरियड शुरू में नियमित था और अब अनियमित है, तो आपको हार्मोनल प्रॉब्लम हो सकती है. हो सकता है कि आपको पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम हो. इस समस्या में अनियमित माहवारी, चेहरे पर बाल, एक्ने और वज़न बढ़ने जैसे लक्षण होते हैं. समस्या के बारे में जानने के लिए आपको सोनोेग्राफ़ी व हार्मोनल टेस्ट करवा लेने चाहिए. दवाइयों से भी इस समस्या का निदान हो सकता है.

Periods 3-4 Months Late

मैं 30 वर्षीया हूं और मेरी शादी को तीन साल हो गए हैं. मैं गर्भधारण की कोशिश कर रही हूं, लेकिन सफल नहीं हो पा रही हूं. मैं बहुत चिंतित हूं. मुझे क्या करना चाहिए, जिससे मैं मां
बन सकूं?
– हर्षा कुलकर्णी, नागपुर.

सबसे पहले तो आप किसी अच्छे गायनाकोलॉजिस्ट से मिलें और समस्या जानने के लिए टेस्ट करवाएं. पति के वीर्य की भी जांच करवाएं. आपको ब्लड, हार्मोन्स का टेस्ट व सोनोग्राफ़ी करवाने की ज़रूरत है. गर्भाशय का एक्स-रे करवाने से आपको यह पता चल जाएगा कि आपके फेलोपियन ट्यूब्स सामान्य हैं या नहीं. यह जांच हीस्टीरोस्कोपी व लेप्रोस्कोपी द्वारा संभव है. सारी जांच कराने के बाद ही समस्या का पता चल सकता है और उसी के अनुसार इलाज हो सकता है.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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