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नई दुल्हन ससुराल में पहली बार कौन-सी रेसिपी बनाए? (Best Recipe Ideas For Your First Dish As A Bride)

Best Recipe Ideas, First Dish, Bride

शादी के बाद ससुराल वालों को जिस बात का सबसे ज़्यादा इंतज़ार होता है, वो है नई दुल्हन की पहली रसोई… और दुल्हन के लिए ये सबसे ज़्यादा चैलेंजिंग काम होता है. ससुराल में सबकी तारी़फें पाने के लिए दुल्हन पहली बार क्या और कैसे बनाए? जानने के लिए हमने बात की कुकिंग एक्सपर्ट अनीता मंत्री से.

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नया घर, नए लोग, नया किचन… नए माहौल में ख़ुद को एडजस्ट करने में नई दुल्हन को थोड़ा व़क्त लगता है. उस पर दुल्हन की पहली रसोई पर सबकी नज़र होती है और यही ससुराल में उसकी परीक्षा की घड़ी होती है. ससुराल में किचन क्वीन कहलाने के लिए यदि आप पहले से थोड़ी तैयारी कर लेती हैं, तो ये काम आसान हो सकता है.

सबकी पसंद-नापसंद का ध्यान रखें
नई दुल्हन के लिए सबसे ज़रूरी ये है कि वो पहले परिवार के सदस्यों की पसंद-नापसंद को समझ ले. भोजन कभी अच्छा या बुरा नहीं होता, हर इंसान की पसंद-नापसंद अलग होती है. अगर हम चाय की बात करें, तो किसी को कड़क चाय पसंद है तो किसी को लाइट, किसी को कम शक्कर तो किसी को ज़्यादा, किसी को दूध ज़्यादा चाहिए तो किसी को कम, कोई अदरक वाली चाय पीता है तो कोई मसाले वाली… इसलिए चाय बनाना सीखना ज़रूरी नहीं है, परिवार के लोगों का स्वाद पहचानना ज़रूरी है.

परिवार के टेस्ट को समझें
हर परिवार की खाने-पीने आदतें अलग होती हैं. कोई कम तेल-मसाले वाला भोजन पसंद करता है, तो किसी को तला-भुना खाना चाहिए. कहीं नई-नई डिशेज़ ट्राई की जाती हैं, तो कहीं पारंपरिक खाना पसंद किया जाता है. कहीं वेज, कहीं नॉनवेज, कहीं जैन खाना, तो कहीं प्याज़-लहसुन… हर घर की पसंद अलग होती है. अत: ससुराल में सबसे पहले वहां के लोगों का स्वाद समझने की कोशिश करें. इसके लिए सबसे पहले बिना किसी संकोच के सास के साथ किचन में खड़े रहकर परिवार के स्वाद को समझें.

मायके से ले जाएं मसाला किट
स्वाद की तरह ही हर घर के मसाले भी अलग होते हैं. कहीं मिर्च अधिक तीखी होती है तो कहीं धनिया मोटा पिसा होता है. हींग की ख़ुशबू भी कम-ज़्यादा होती है. ऐसे में जब आप किचन में खाना बनाने जाती हैं, तो मसाले उसी मात्रा में डालती हैं, जैसा आप मायके में डाला करती थीं, लेकिन यहां के मसाले वहां से अलग हो सकते हैं, जिसके कारण खाना कम अच्छा बन सकता है. अतः ससुराल में पहला खाना टेस्टी बनाने के लिए मेकअप किट की तरह ही एक छोटा मसालों का किट भी साथ ले जाएं ताकि आपका अंदाज़ा सही रहे. धीरे-धीरे आप उस घर के मसालों का अंदाज़ा लगाना सीख जाएंगी और उनकी पसंद का खाना बनाने लगेंगी.

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ससुराल में क्या बनाएं पहली बार?
ससुराल में पहली बार कोई ऐसी डिश बनाएं जो कॉमन हो और जिसका स्वाद हर उम्र के लोगों को पसंद आता हो. साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि वो डिश आप पहले भी बना चुकी हों. यदि आप कोई नई या यूनीक डिश ट्राई करेंगी तो ज़रूरी नहीं कि वो परिवार के लोगों को पसंद आए ही. अचानक बहुत अलग स्वाद शायद उन्हें अच्छा न लगे. अत: ससुराल वालों की पसंद को ध्यान में रखते हुए ही पहली डिश का चुनाव करें.

स्मार्ट कुकिंग टिप्स
* डिशेज का चुनाव मौसम के अनुसार करें. तेज़ गर्मी में आपका बनाया गरम-गरम टेस्टी सूप उतना मज़ा नहीं देगा जितना साधारण छाछ या लस्सी देगी. गर्मी में मॉकटेल्स, दही वड़ा, ठंडी में सूप, हलवा, बरसात में पकौड़े इस तरह डिशेज का चुनाव करें.
* परिवार के सभी सदस्यों की आवश्यकताएं अलग-अलग होती हैं, जैसे- बुज़ुर्गों को सादा भोजन और बच्चों को नई-नई चटपटी रेसिपीज़ पसंद आती हैं. अतः रोज़ के खाने में सभी की ज़रूरतों का ख़्याल रखें.
* खाने का प्रेज़ेंटेशन अच्छा हो इसका पूरा ख़्याल रखें. परोसते समय सलीके से थोड़ा-थोड़ा परोसें. सलाद सजाएं. एक जैसे बर्तनों का इस्तेमाल करें.
* मेनू का चुनाव करते समय रंगों का ख़ास ख़्याल रखें, जैसे- एक सब्ज़ी हरी हो तो दूसरी पीली, स़फेद या लाल रंग की हो. किसी में टमाटर डालें तो किसी में मूंगफली दाना. इस तरह की थाली सुंदर लगती है और हेल्दी भी होती है.
* खाना बनाते समय खड़े और ताज़े मसालों का इस्तेमाल करें. इनका स्वाद ज़्यादा अच्छा होता है.
* जो चीज़ें आपकी सास न बनाती हों उन्हें अवश्य सीख कर जाएं, जैसे- केक, मेक्सिकन, इटालियन, पिज़ा, पास्ता, बर्गर आदि. इससे ससुराल में आपकी अलग पहचान बनेगी.

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इन बातों का ध्यान रखें:
* यदि आपको घर में बनी कोई चीज़ पसंद न आई हो, तो उसकी बुराई न करें. इससे परिवार वालों को बुरा लग सकता है.
* सास के खाने की अपनी मां से तुलना कभी न करें.
* इसी तरह बात-बात में अपने मायके के खाने की तारीफ़ न करें. आपका ऐसा करना भी ससुराल वालों को बुरा लग सकता है.
* ससुराल में किचन में जो भी सामग्री है उसमें मीन-मेख न निकालें.
* मेहमानों के आने पर डिशेज का चुनाव अपनी नहीं उनकी पसंद के अनुसार करें.

क्यों ख़ास होता है मां के हाथ का खाना?
दुनिया में लगभग 80% लोगों को मां के हाथों से बना खाना पसंद है. तो क्या सभी मांएं अच्छा खाना बनाती हैं और पत्नियां नहीं? क्या वो मां किसी की पत्नी नहीं होती? क्या महिलाएं बच्चों को अलग और पति व परिवार को अलग-अलग खाना खिलाती हैं? यदि नहीं, तो मां के हाथों का जादू पत्नी के या बहू के हाथों में क्यों नहीं होता?
ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि बच्चा मां के हाथों का बना खाना खाकर बड़ा होता है. उसे उस स्वाद की आदत हो चुकी होती है इसलिए उसे उम्रभर वह स्वाद अच्छा लगता है. अतः कभी भी सास से अपनी तुलना करने की कोशिश न करें और ससुराल में अपनी अलग पहचान बनाएं.

30+ ब्राइडल फैशन टिप्स: दुल्हन किस फंक्शन में क्या पहने? (30+ Latest Fashion Trends Indian Brides Must Try This Wedding Season)

Latest Fashion Trends, Indian Brides

ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में भारतीय शादियों पर भी ग्लोबल इफेक्ट नज़र आने लगा है. डेस्टिनेशन वेडिंग, थीम वेडिंग, रिज़ॉर्ट वेडिंग जैसे नए-नए कॉन्सेप्ट शादियों को नया रूप दे रहे हैं. जब शादियां ही मॉडर्न अंदाज़ में होने लगी हैं, तो ब्राइडल फैशन पीछे कैसे रह सकता है. आइए, हम आपको बताते हैं ब्राइडल फैशन के न्यू ट्रेंड्स. शादी का दिन ज़िंदगी का ख़ास दिन होता है और इस दिन हर लड़की सबसे ख़ूबसूरत नज़र आना चाहती है. आप तक ब्राइडल फैशन के लेटेस्ट ट्रेंड्स पहुंचाने के लिए हमने बात की कुछ फैशन एक्सपर्ट्स से. आइए, उन्हीं से जानते हैं न्यू फैशन ट्रेंड्स.

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फैशन एक्सपर्ट श्रुति संचेति के अनुसार:
आजकल ब्राइडल फैशन में फ्यूज़न वेयर का ट्रेंड बहुत बढ़ गया है. दुल्हन टिपिकल आउटफिट नहीं पहनना चाहतीं, वो ब्राइडल वेयर को भी नए अंदाज़ में पहनना चाहती हैं. आजकल ज़्यादातर लोग डेस्टिनेशन वेडिंग पसंद करने लगे हैं इसलिए वेन्यू के हिसाब से दूल्हा-दुल्हन के कपड़े तैयार किए जा रहे हैं. पहले स़िर्फ अपर क्लास में इस तरह की शादियां देखी जाती थीं, लेकिन अब मिडल क्लास लोग भी अपनी शादी को स्पेशल और यादगार बनाने के लिए कुछ न कुछ स्पेशल थीम रखना चाहते हैं. लोग अब शहर से बाहर शादी का वेन्यू रखना चाहते हैं और अपने शहर में भी शादी करते हैं, तो ओपन स्पेस में अपने हिसाब से थीम डिसाइड करते हैं, इसीलिए दूल्हा-दुल्हन के कपड़ों में भी काफ़ी बदलाव आने लगा है. शादी के लिए शॉपिंग करते समय दुल्हन को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:

किस फंक्शन में क्या पहनें?
* सगाई के लिए ऐसा आउटफिट सिलेक्ट करें, जिसमें आप यंग और ख़ूबसूरत नज़र आएं. इसके लिए पीच, पिंक, ऑलिव, एक्वा जैसे पेस्टल कलर की अनारकली ड्रेस या साड़ी पहनें. सगाई में हैवी लहंगा न पहनें तो अच्छा है.
* संगीत में लॉन्ग अनारकली, लॉन्ग स्कर्ट या घाघरा पहन सकती हैं, क्योंकि डांस करते समय घेर वाले आउटफिट दुल्हन पर अच्छे लगते हैं.
* मेहंदी फंक्शन में धोती पैंट के साथ स्लीव लेस या शॉर्ट स्लीव वाला टॉप पहन सकती हैं या फिर क्रॉप टॉप के साथ एंकल लेंथ स्कर्ट पहन सकती हैं, क्योंकि इसमें दुपट्टा संभालने की भी ज़रूरत नहीं है. इन ड्रेसेज़ में आपकी मेहंदी भी खराब नहीं होगी और आप डांस भी कर सकेंगी.
* कॉकटेल पार्टी या बैचलर पार्टी में केप के साथ धोती पैंट या जैकेट के साथ लॉन्ग स्कर्ट पहन सकती हैं.
* फेरे के समय ट्रेडिशनल आउटफिट पहनें, जैसे साड़ी, लहंगा-चोली आदि. इस समय पूजा होती है इसलिए पारंपरिक कपड़े ही अच्छे लगते हैं.
* रिसेप्शन के लिए थीम के हिसाब से कपड़े सिलेक्ट करें. यदि आपका रिसेप्शन फॉर्मल है, तो क्लासी साड़ी, गाउन, लहंगा-चोली पहन सकती हैं, लेकिन इनफॉर्मल रिसेप्शन है, तो कोई भी इंडो-वेस्टर्न ड्रेस पहन सकती हैं.

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स्मार्ट शॉपिंग आइडियाज़
फैशन एक्सपर्ट श्रुति संचेति के अनुसार दुल्हन के लिए शॉपिंग करते समय थोड़ी तैयारी कर लेनी ज़रूरी है:
* आमतौर पर भारतीय महिलाओं की लोवर बॉडी हैवी होती है, लेकिन कमर पतली होती है, इसलिए उन्हें एम्पायर लाइन गाउन या अनारकली सिलेक्ट करना चाहिए. इससे कमर तक का हिस्सा पतला नज़र आता है और लोवर बॉडी घेरे में छुप जाती है, जिससे मोटापे का पता नहीं चलता.
* अगर आपकी बॉडी परफेक्ट शेप में नहीं है तो बहुत फिटेड ड्रेस न पहनें. साथ ही ऐसा ब्लाउज़ या गाउन न सिलेक्ट करें जिसमें स्किन ज़्यादा दिखे, जैसे- बैकलेस, हॉल्टर नेक, वन शोल्डर आदि. ऐसे कपड़े में आप ज़्यादा मोटी नज़र आएंगी.
* भारतीय महिलाओं का स्किन टोन इतना अच्छा होता है कि उन पर लगभग सारे कलर अच्छे लगते हैं इसलिए शादी की शॉपिंग करते समय रंगों का खुलकर इस्तेमाल करें. ब्राइडल वेयर के लिए आप रेड, रस्ट, बर्न्ट ऑरेंज, यलो, लाइलैक, पिंक आदि कलर ट्राई कर सकती हैं.
* हां, फेरे के समय ट्रेडिशनल आउटफिट ज़रूर पहनें. आजकल एक तरह से जैसे ट्रक्सटाइल मूवमेंट चल रहा है. इन दिनों दुल्हन शादी के दिन अपनी मां, नानी, दादी की शादी की साड़ी या कोई पारंपरिक शादी का जोड़ा पहनना पसंद कर रही हैं. आप भी किसी पारंपरिक हैंडलूम, जैसे बनारसी, पटोला, घरचोला आदि की साड़ी को मॉडर्न ब्लाउज़ के साथ पहन सकती हैं.
* बाकी फंक्शन में फ्यूज़न वेयर या वेडिंग थीम के हिसाब से ही कपड़े सिलेक्ट करें.
* ज्वेलरी में भी आजकल दुल्हन घर की पुरानी पारंपरिक ज्वेलरी पहनना पसंद करती हैं. आप भी पाशा, माथापट्टी, नथ, हाथफूल आदि पहन सकती हैं.
* आजकल लड़कियां अपनी शादी को एंजॉय करना चाहती हैं इसलिए ऐसा आउटफिट नहीं पहनना चाहतीं, जो कंफर्टेबल न हो. 15-20 किलो का लहंगा और उसके साथ हैवी ज्वलेरी पहनकर दुल्हन कंफर्टेबल नहीं रह सकती इसलिए आप भी लाइट वेट कपड़े सिलेक्ट करें, जो मॉडर्न भी हों और कंफर्टेबल भी.
* क्रॉप टॉप विद स्कर्ट, लॉन्ग जैकेट के साथ एम्ब्रॉयडर्ड पलाज़ो, कॉकटेल साड़ी, धोती पैंट्स के साथ केप्स, गाउन, मैक्सी अनारकली, साड़ी के साथ लॉन्ग जैकेट या केप्स पहनना स्मार्ट आइडिया है.
* आजकल लड़कियां काफ़ी प्रैक्टिकल हो गई हैं, वो शादी के लिए ऐसे कपड़े ख़रीदना चाहती हैं, जिन्हें वो बाद में भी पहन सकें, जैसे- एम्ब्रॉयडर्ड केप को आप वेडिंग लहंगा के साथ भी पहन सकती हैं और बाद में पार्टी में जीन्स के साथ भी पहन सकती हैं. इसी तरह पलाज़ो, कॉर्सेट, जैकेट, स्कर्ट आदि को शादी के बाद भी पहना जा सकता है.
* पहले शादियों में रेड, पिंक, ऑरेंज जैसे टिपिकल कलर्स ही पहने जाते थे, लेकिन अब मैटालिक कलर जैसे गन मैटल, रोज़ गोल्ड, सिल्वर, ब्लू, ग्रीन आदि कलर्स भी पहने जाने लगे हैं, आप भी इन्हें ट्राई कर सकती हैं.
* आजकल ब्राइडल वेयर में पेस्टल कलर्स जैसे- पीच, आयवरी, लाइलैक आदि काफ़ी पसंद किए जा रहे हैं. ये दुल्हन को यंग और फ्रेश लुक देते हैं.
* हैवी एम्ब्रॉयडरी जैसे ज़रदोज़ी आदि की बजाय आजकल डेलिकेट एम्बॉयडरी, वोवन फ्रैब्रिक आदि ज़्यादा पसंद किए जा रहे हैं. बहुत भरे हुए वेडिंग ड्रेस आजकल पसंद नहीं किए जा रहे हैं.
* हेयर-मेकअप में भी आजकल बहुत एक्सपेरिमेंट किए जा रहे हैं. पहले जूड़ा, चोटी बनाकर उसके ऊपर दुल्हन चुनरी पहन लेती थीं. बड़ी-सी लाल बिंदी और लाल लिपस्टिक लगा लेती थी, लेकिन अब आउटफिट के हिसाब से हेयर और मेकअप भी बदलता रहता है, जैसे- एक लुक में दुल्हन के बालों को कर्ल कराया है, तो दूसरे में स्ट्रेट रखती हैं. हेयर स्टाइल की तरह ही मेकअप भी बदलता रहता है. डे और नाइट लुक के हिसाब से कपड़े, ज्वेलरी, मेकअप, हेयर स्टाइल आदि डिसाइड किया जाता है.
* छोटे शहरों में भी लड़कियां कॉकटेल पार्टी या रिसेप्शन में लहंगा या टिपिकल साड़ी की बजाय गाउन, साड़ी गाउन या मैक्सी अनारकली ड्रेस आदि ही पहनना पसंद करती हैं.

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स्मार्ट टिप:
शादी के दिन भले ही आप मॉडर्न कपड़े पहनें, आपकी वेडिंग ड्रेस का लुक भले ही ग्लोबल हो, लेकिन उसकी एम्ब्रॉयडरी, फैब्रिक आदि इंडियन हो, जैसे आप ट्रेडिशनल एम्ब्रॉयडरी वाला मॉडर्न गाउन पहन सकती हैं. बनारसी साड़ी के साथ मॉडर्न जैकेट पहन सकती हैं. आपकी ड्रेस का लुक-फील ट्रेडिशनल होना चाहिए, ताकि आप भारतीय दुल्हन नज़र आएं.

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फैशन डिज़ाइनर आसिफ मर्चेंट के अनुसार:
आजकल दुल्हन हर फंक्शन के लिए अलग लुक चाहती हैं इसलिए शादी की शॉपिंग बहुत सोच-समझकर करती हैं. टिपिकल ब्राइडल वेयर पहनने की बजाय दुल्हन मॉडर्न लुक चाहती हैं. आसिफ मर्चेंट ने हमें ब्राइडल फैशन के कुछ ख़ास टिप्स बताए:

* ब्राइडल वेयर में इन दिनों रेड, मरून जैसे टिपिकल कलर की बजाय पीच, पिंक, ऑलिव, वाइन, लाइलैक जैसे पेस्टल कलर पसंद किए जा रहे हैं.
* हां, फेरे के समय हर दुल्हन ट्रेडिशनल लहंगा या साड़ी ही पहनना चाहती है, लेकिन बाकी फंक्शन के लिए अब बहुत एक्सपेरिमेंट किए जा रहे हैं. दुल्हन अब बाकी फंक्शन में वेस्टर्न टच वाले कपड़े पहनना पसंद कर रही हैं, जैसे- गाउन, जैकेट, गरारा, शरारा, स्कर्ट, क्रॉप टॉप आदि.
* फ्लेयर्ड लहंगा रॉयल लुक देता है इसलिए दुल्हन के लहंगे में घेरा ज़्यादा रखा जाता है. हां, लहंगे में कैन-कैन का इस्तेमाल तभी करें जब आप उसे मैनेज कर सकें, वरना कंफर्टेबल लहंगा सिलेक्ट करें. फेरे के समय कैन-कैन से दुल्हन को उठने-बैठने में तकलीफ़ हो सकती है.
* लहंगे का वज़न इतना ज़्यादा न हो कि आप उसे मैनेज न कर सकें.
* साड़ी के साथ भी आप बहुत एक्सपेरिमेंट कर सकती हैं. साड़ी के ऊपर अनारकली ब्लाउज़ पहन सकती हैं, इसमें घेरा ट्रांसपेरेंट होता है और स्लिट भी होती है, जिससे साड़ी और अनारकली दोनों की ख़ूबसूरती निखर कर आती है. ये कॉम्बिनेशन बहुत अच्छा लगता है.
* साड़ी के साथ केप, जैकेट भी पहन सकती हैं. गाउन साड़ी भी पहन सकती हैं.
* ब्लाउज़ में पावर स्लीव, फुल स्लीव, रफल्स स्लीव का प्रयोग कर सकती हैं. ब्लाउज़ की लंबाई ज़्यादा भी रख सकती हैं.
* आजकल दुल्हन के जोड़े के लिए क्रिस्टल, सीक्वेंस, बीड्स आदि वर्क पसंद किए जा रहे हैं. साथ ही थ्रीडी इफेक्ट, ब्रॉड शोल्डर लुक आदि एक्सपेरिमेंट भी किए जा रहे हैं.
* भारतीय दुल्हन को वेस्ट कट वाला फ्लेयर्ड गाउन सिलेक्ट करना चाहिए, क्योंकि ज़्यादातर भारतीय महिलाओं की लोवर बॉडी हैवी होती है. ऐसे गाउन में ऊपर से बॉडी पतली नज़र आती है और नीचे की बॉडी फ्लेयर में छुप जाती है. ऐसे गाउन के साथ हील्स पहनकर आप लंबी भी नज़र आएंगी.
* यदि आपका कॉम्प्लेक्शन डार्क है तो पीच, यलो, स्किन कलर जैसे शेड न पहनें. आप आयवरी, गोल्ड जैसे मॉडर्न कलर ट्राई कर सकती हैं.
* मेहंदी फंक्शन में पलाज़ो या गरारा पहनें. इन्हें मैनेज करना आसान होता है. शॉर्ट स्लीव के कपड़े पहनें, ताकि मेहंदी लगाना आसान हो जाए और आप भी फ्री रहें. इसी तरह अटैच्ड दुपट्टा वाला आउटफिट पहनें. जैकेट के साथ स्कर्ट भी पहन सकती हैं.
* ब्राइडल वेयर में आजकल प्लेन स्कर्ट के साथ लंबा एम्बेलिश्ड जैकेट फैशन में है, आप भी ये कॉम्बिनेशन ट्राई कर सकती हैं.
* यदि आप स्लिम हैं तो फिश टेल लुक भी ट्राई कर सकती हैं. साथ ही वन शोल्डर, ऑफ शोल्डर, फ्री फ्लोवी गाउन भी ट्राई कर सकती हैं.
* इन दिनों कॉस्ट्यूम ज्वेलरी का ट्रेंड है यानी दुल्हन आउटफिट के हिसाब से ज्वेलरी पहनती हैं. लॉन्ग ईयररिंग, कफ, कॉकटेल रिंग जैसी क्लासी ज्वेलरी पसंद की जा रही हैं.

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फैशन डिज़ाइनर गौरांग शाह के अनुसार:
ब्राइडल वेयर में आजकल वोवन हेरिटेज लहंगा और साड़ी काफ़ी पसंद किए जा रहे हैं यानी हाथ की कारीगरी को ज़्यादा पसंद किया जा रहा है. पैठणी, बांधनी, कांजीवरम, बनारसी आदि एक बार फिर फैशन में हैं. इन दिनों दुल्हन अपनी शादी के दिन पारंपरिक भारतीय परिधान पहनना चाहती हैं.
* कंफर्ट और फंक्शन को ध्यान में रखते हुए शादी के आउटफिट ख़रीदें, जैसे संगीत के लिए हैवी लहंगा न ख़रीदें, वरना आपको डांस करने में दिक्कत होगी.
* भारतीय साड़ी को 100 से भी अधिक तरी़के से पहना जा सकता है. आजकल साड़ी को लहंगा, अनारकली, कुर्ता आदि के साथ पहनकर कंटेंप्रेरी लुक दिया जा रहा है.
* डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए शॉपिंग करते समय मौसम और थीम को ध्यान में रखते हुए कपड़े ख़रीदें. थीम वेडिंग के लिए भी कंफर्ट को ज़रूर ध्यान में रखें, वरना आप अपनी शादी को एंजॉय नहीं कर पाएंगी.
* यदि आप अपनी शादी में पारंपरिक भारतीय कपड़े पहनना चाहती हैं तो मेहंदी फंक्शन के लिए ब्राइट कलर का कलमकारी वर्क वाला अनारकली, कॉकटेल पार्टी के लिए खादी जामदानी का क्लासी और एलिगेंट आउटफिट, संगीत के लिए पाटन पटोला, फेरे के लिए कांजीवरम, पैठणी, बनारसी साड़ी, रिसेप्शन के लिए ऑर्गेंज़ा, कांजीवरम लहंगा-चोली पहन सकती हैं.

 – कमला बडोनी

फोटो सौजन्य: नरगिस

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सोशल मीडिया पर एक्टिव लड़कियों को बहू बनाने से क्यों कतराते हैं लोग? (How Social Media Affects Girls Marriage)

How Social Media Affects Girls Marriage

सोशल मीडिया के साइड इफेक्ट्स का असर न स़िर्फ बच्चों की पढ़ाई, लोगों के काम के परफॉर्मेंस, फैमिली लाइफ आदि पर पड़ा है, बल्कि इसका असर अब शादियों पर भी पड़ने लगा है. शादी का रिश्ता पक्का करते समय अब लड़कियों के लुक्स, एजुकेशन, फैमिली बैकग्राउंड आदि के अलावा ये भी देखा जाने लगा है कि वो सोशल मीडिया पर कितनी एक्टिव है.

How Social Media Affects Girls Marriage

आजकल डिजिटल मीडिया का लोगों पर इस कदर हैंगओवर हो गया है कि किसी भी इंसान के बारे में कुछ भी पता करना हो, तो लोग सबसे पहले उसके सोशल अकाउंट्स खंखालने लगते हैं. फ्रेंडशिप, बिज़नेस, जॉब… यहां तक कि अब शादी फिक्स होने से पहले लड़का-लड़की के सोशल अकांउट्स की तलाशी ली जाने लगी है. ख़ास बात ये है कि जो लड़कियां सोशल साइट्स पर ज़्यादा एक्टिव रहती हैं, लोग उन्हें अपने घर की बहू नहीं बनाना चाहते. उनके मन में उस लड़की को लेकर कई शंकाएं रहती हैं. क्या हैं ये शंकाएं? आइए, जानते हैं.

धोखाधड़ी से बचना चाहते हैं
हमारे देश में आज भी ज़्यादातर शादियां अरेंज ही होती हैं, जिसमें लड़का-लड़की की रज़ामंदी के साथ ही परिवार के लोगों का राज़ी होना भी उतना ही ज़रूरी होता है. हां, समय के साथ ये बदलाव ज़रूर आया है कि अब लोग बेटा या बेटी की शादी फिक्स होने से पहले लड़का या लड़की के बारे अच्छी तरह जांच-पड़ताल कर लेते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है तलाक़ के बढ़ते आंकड़े और शादियों में बढ़ती धोखाधड़ी. यही वजह है कि लोग अब स़िर्फ बाहरी दिखावे पर नहीं जाते और शादी के लिए हां करने से पहले पूरी तसल्ली कर लेना चाहते हैं.

लोगों का डर लाजमी है
देश की पहली महिला जासूस रजनी पंडित कहती हैं, हमारे पास ऐसे कई केसेस आते हैं जहां लड़के वाले लड़की का कैरेक्टर, शौक, फ्रेंड सर्कल आदि के बारे में पता करने के लिए उसका सोशल अकाउंट चेक करने को कहते हैं. लोग जानना चाहते हैं कि जिस लड़की से वो अपने बेटे की शादी करने जा रहे हैं, उसकी लाइफ स्टाइल कैसी है. क्या वो उनके घर में फिट हो पाएगी? ज़्यादातर लोग सोशल मीडिया पर जैसे दिखाई देते हैं, असल में वैसे होते नहीं है इसलिए हमें बहुत ध्यान से जांच-परख करनी पड़ती है. कई बार तो हमें फ्रॉड अकाउंट बानकर लड़की को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर उसके बारे में पता करना पड़ता है. लड़के वाले ही नहीं, लड़की वाले भी अपने होने वाले दामाद के बारे में सबकुछ पहले ही जाने लेना चाहते हैं. साइबर क्राइम के बढ़ते आंकड़े भी लोगों को ऐसा करने के लिए मजबूर करते हैं.

देखने का नज़रिया अलग है
कई बार लोगों का देखने का नज़रिया भी अलग होता है. लोग लड़कियों की हर गतिविधि को शक की नज़र से देखते हैं. एक मल्टी नेशनल कंपनी में कार्यरत प्रिया शर्मा (परिवर्तित नाम) ने बताया, सोशल साइट्स पर मेरी अधिकतर फोटोग्राफ्स मेरी बेस्ट फ्रेंड के साथ होती हैं. हम मस्ती-मज़ाक के मूड में अलग-अलग पोज़ में फोटो खिंचवाकर पोस्ट करते रहते हैं. जब मेरे लिए शादी का रिश्ता आया, तो लड़का मुझे पसंद आया और लड़के को भी मैं पसंद थी. हम दोनों एक-दूसरे से मिलने लगे, फोन पर बातें करने लगे, सोशल मीडिया पर भी हम फ्रेंड बन गए. फिर मेरा सोशल अकाउंट देखकर उसने मुझे शक की निगाह से देखते हुए पूछा, तुम अपनी बेस्ट फ्रेंड के साथ कुछ ज़्यादा ही क्लोज़ हो, तुम दोनों के बीच सब नॉर्मल है ना? उसकी बातें सुनकर मैं हैरान रह गई. लड़कों के साथ दोस्ती करने पर तो लड़कियों पर तरह-तरह के इल्ज़ाम लगते ही हैं, मुझ पर तो लड़की के साथ दोस्ती करने पर भी शक किया गया. जब लोगों के देखने का नज़रिया ही ग़लत हो, तो आप क्या कर सकते हैं.

सच्चाई कुछ और होती है
डिटेक्टिव रजनी पंडित ने हमें बताया कि लगभग 90% लोग सोशल साइट्स पर जैसे नज़र आते हैं असल में वो वैसे होते नहीं हैं. लोग सोशल साइट्स पर अपनी इमेज अपनी असल ज़िंदगी से बिल्कुल अलग बनाकर रखते हैं. सोशल साइट्स पर लोग अपनी हर बात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं. कई लोग तो बोगस अकाउंट बनाकर लोगों को बेवकूफ़ भी बनाते हैं. ऐसे में लोगों का डर वाजिब है. आजकल शादियों में फ्रॉड भी बहुत हो रहे हैं. लड़कियां पैसे देखकर लड़के से शादी करती हैं और बाद में तलाक़ लेकर मोटी रकम वसूलती हैं. इसी तरह लड़के भी गरीब लड़की से शादी करके उसके सिर पर घर की सारी ज़िम्मेदारियां थोपकर ख़ुद बाहर अय्याशी करते हैं. एक बार शादी हो जाने के बाद तलाक़ के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता है, जिससे लड़का-लड़की दोनों के परिवार डिस्टर्ब हो जाते हैं. इसीलिए लोग अब पहले ही अच्छी तरह से जांच पड़ताल कर लेना चाहते हैं.

स्टेटस देखकर जज करते हैं
सोशल मीडिया पर लड़कियों का स्टेटस देखकर बिना सोचे-समझे उनके लिए राय बनाने वालों की भी कमी नहीं है. लाइफ स्टाइल ब्लॉगर मानसी मेहता (परिवर्तित नाम) कहती हैं, मैं एक लाइफ स्टाइल ब्लॉगर हूं इसलिए मुझे इवेंट्स, फैशन शो, ब्यूटी कॉन्टेस्ट आदि कवर करने होते हैं. इसके लिए मुझे ट्रैवल करना पड़ता है, हाई प्रोफाइल लोगों से मिलना पड़ता है और ख़ुद भी फैशनेबल रहना पड़ता है. मेरी शादी में इसलिए दिक्कत आ रही है कि लोगों को लगता है मेरी लाइफ स्टाइल बहुत हाई फाई है, मैं हमेशा घूमती रहती हूं इसलिए मैं घर में नहीं टिक पाउंगी.

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फेहरिस्त लंबी है
सोशल मीडिया के कारण रिश्ते टूटने के मामले कुछ कम नहीं हैं. लोग सोशल मीडिया पर एक्टिव लड़कियों को जल्दी स्वीकार नहीं पाते. उन्हें लगता है कि ऐसी लड़कियां परफेक्ट बहू नहीं बन सकती. आइए, जानते हैं कुछ ऐसे ही रिश्तों के बारे में जिनके टूटने की वजह स़िर्फ सोशल मीडिया है:

* एक आम भारतीय लड़की की तरह रिया (परिवर्तित नाम) की भी शादी फिक्स हुई. अरेंज मैरिज के सेट पैटर्न के अनुसार दोनों परिवारों की रज़ामंदी से लड़का-लड़की दोनों एक-दूसरे से मिलने लगे. लड़के ने जब लड़की का सोशल अकाउंट देखा, तो उसे लड़की के मेल फ्रेंड के साथ उसकी फोटो से ऑब्जेक्शन होने लगा. फिर वो उस पर शक करने लगा, उसे ताने देने लगा, लड़की को ये सब पसंद नहीं आया और उसने ऐसी संकीर्ण मानसिकता वाले लड़के से शादी करने के लिए मना कर दिया.
* शिवानी (परिवर्तित नाम) की अपनी एक इवेंट कंपनी है और अपने काम को प्रमोट करने के लिए उसे सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना ही पड़ता है. शिवानी के लिए जब शादी का रिश्ता आया और वो लड़के से मिली, तो लड़के ने कहा मैं बहुत रिज़र्व टाइप का इंसान हूं. मैं ऐसी लड़की से शादी नहीं कर सकूंगा, जो सोशल साइट्स पर इतनी एक्टिव रहती हो. मेरी बीवी की पोस्ट पर लोग तरह-तरह के कमेंट करें ये मैं सहन नहीं कर पाउंगा. शिवानी के सामने अपना पक्ष रखकर लड़के ने शादी के लिए मना कर दिया.
* नेहा (परिवर्तित नाम) को सेल्फी का शौक है. वो रोज़ सेल्फी लेती है और सोशल मीडिया पर पोस्ट करती है. उसके फॉलोवर्स भी बहुत हैं, जो उसकी फोटो पर हमेशा कमेंट करते हैं. जब नेहा के लिए शादी का प्रपोज़ल आया, तो लड़के वालों को नेहा बहुत पसंद आई. सगाई के बाद जब उसने अपने मंगेतर और ससुराल वालों को अपने सोशल अकाउंट में एड किया, तो लड़के वालों ने ये कहकर रिश्ता तोड़ दिया कि लड़की कुछ ज़्यादा ही तेज़ है. हमें अपने घर के लिए सीधी सादी बहू चाहिए, मॉडल नहीं.
* आकांक्षा (परिवर्तित नाम) एक संवेदनशील लड़की है. जब भी वो अपने आसपास कुछ ग़लत होता देखती है, तो अपनी भावनाओं को सोशल मीडिया पर ज़रूर व्यक्त करती है. दहेज, घरेलू हिंसा, बाल मजदूरी, बलात्कार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर लिखकर उसे संतुष्टि मिलती है. जब आकांक्षा की शादी फिक्स हुई, तो सोशल मीडिया पर उसके ससुराल वाले भी उससे जुड़ गए. ससुराल वालों को उसकी पोस्ट पसंद नहीं आती थी. आख़िरकार ससुराल वालों ने आकांक्षा को एक्टिविस्ट बताकर उसे अपने घर की बहू बनाने से इनकार कर दिया. उनका कहना था, कल को ये घर की हर बात सोशल मीडिया तक ले जाएगी, इसके घर में आने से घर की हर बात सोशल मीडिया पर वायरल हो जाएगी.

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जब पैरेंट्स लगाते हैं रोक
लड़कियों के सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने से उन पर तरह-तरह के इल्ज़ाम लगाए जाते हैं इसलिए कई घरों में पैरेंट्स लड़कियों को सोशल मीडिया से दूर रहने के लिए कहते हैं. ऐसे में लड़कियां ख़ुद को आउटडेटेड महसूस करने लगती हैं इसलिए वो फेक अकाउंट बनाकर सोशल मीडिया पर आ जाती हैं. ऐसी स्थिति ज़्यादा भयानक होती है, क्योंकि फेक अकाउंट वाले लड़कों की भी कमी नहीं होती. ऐसे में इन लड़कियों के फंसने की गुंजाइश ज़्यादा रहती है. अत: पैरेंट्स को चाहिए कि अपने बच्चों की गतिविधियों पर नज़र रखें, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा सख़्ती बच्चों को गुमराह कर सकती है.

ये सोशल प्रेशर का मामला है
लड़कियों को सोशल मीडिया से दूर रहने की हिदायत जहां लड़कियों के लिए अजीब स्थिति होती है, वहीं माता-पिता के लिए चिंता की वजह. हमारे देश में लोग क्या कहेंगे, ये सबसे बड़ा मुद्दा है. आप जानते हैं कि आपकी बेटी ग़लत नहीं है, फिर भी लड़के वालों को ख़ुश करने के लिए बेटी को हर समझौता करने के लिए कहा जाता है. सोशल मीडिया की अति ग़लत है, लेकिन सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाली हर लड़की पर सवाल उठाना भी सही नहीं है.

किस पोस्ट पर क्या टैग दिया जाता है?
लड़कियां सोशल साइट्स पर कितनी एक्टिव हैं और किस तरह की पोस्ट करती हैं इससे उन्हें जज किया जाता है. आइए, जानते हैं किस पोस्ट का क्या मतलब निकाला जाता है.

* यदि आप फैशनेबल कपड़े पहनती हैं, अक्सर पार्टी या डिनर की फोटो पोस्ट करती हैं, तो आप बहुत ख़र्चीली हैं. आपका मेंटेनेंस आम बहू की कैटेगरी में नहीं आता.
* यदि आप राजनीतिक या सामाजिक मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त करती हैं, तो आप एक्टिविस्ट कहलाती हैं इसलिए आप आदर्श बहू नहीं कहला सकतीं.
* यदि आप अपने पुरुष मित्रों के साथ फोटो खिंचवाती हैं और उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करती हैं, तो आपका कैरेक्टर ठीक नहीं. अच्छे घर की बहू ऐसा नहीं करती हैं.
* यदि आप अपनी हर गतिविधि को सोशल साइट पर पोस्ट करती हैं, तो आप पर टैग लगेगा कि आप घर की हर छोटी-बड़ी बात को सोशल मीडिया पर वायरल कर देंगी.
* यदि आप सोशल मीडिया पर महिलाओं के हक़ की बात करती हैं, तो आप पर ये इल्ज़ाम लग सकता है कि कल को हमें भी कोर्ट तक ले जा सकती है.
* यदि आप अपने काम को सोशल मीडिया पर प्रमोट करती हैं, तो कहा जाएगा कि काम के बाद भी फ्री नहीं रहती, घर क्या खाक संभालेगी.
*यदि सोशल मीडिया पर आपके ज़्यादा फॉलोवर्स हैं, तो कहा जाएगा कि ख़ुद को सेलिब्रिटी समझती है, घर में तो किसी को कुछ समझेगी ही नहीं.

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दोनों पक्ष करते हैं जांच-पड़ताल
ऐसा नहीं है कि शादी तय होते समय स़िर्फ लड़कियों के बारे में जानकारी हासिल की जाती है, लड़कों के बारे में भी काफी जांच-पड़ताल की जाती है.

क्या जानना चाहते हैं लड़कों के बारे में?
– लड़का कहीं नशा तो नहीं करता
– किसी और लड़की के साथ अ़फेयर तो नहीं है
– कैसे लोगों के साथ उठता-बैठता है
– लड़का अय्याश तो नहीं.
– कमाई के बारे में सच बताया है या झूठ
– प्रॉपर्टी कितनी है

क्या जानना चाहते हैं लड़की के बारे में?
– चाल-चलन कैसा है
– किसी और लड़के के साथ चक्कर तो नहीं चल रहा
– फ्रेंड सर्कल कैसा है
– जॉब के बारे में सही जानकारी दी है या नहीं
– सोशल साइट्स पर कितनी एक्टिव है
– झूठा अकाउंट बनाकर लड़कों से चैट तो नहीं करती

– कमला बडोनी

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