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विराट-अनुष्का की मेहंदी की तस्वीरें (Virushka: mehandi ceremony- exclusive pictures)

 

विराट-अनुष्का की मेहंदी की तस्वीरें (Virushka: mehandi ceremony- exclusive pictures)

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विराट कोहली और अनुष्का ने इटली में लिए सात फेरे (Officially Married: Congratulations Virat & Anushka)


विराट-अनुष्का की शादी का इंतज़ार सभी को था और अब ये इंतज़ार हुआ ख़त्म, क्योंकि दिनों अब हो गए हैं officially married! इटली में दोनों ने शादी कर ली और अनुष्का बन गईं मिसेज़ कोहली! हमारी तरफ़ से इस cute couple को ढेरों बधाई!

देखें उनकी शादी की पहली तस्वीरें

 

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शादी से पहले हर बात की हिदायत, तो सेक्स एजुकेशन से परहेज़ क्यों? (Sex Education: Why We Should Talk About Sex Before Marriage)

Sex Education Sex Before Marriage

Sex Education Sex Before Marriage

शादी से पहले हर बात की हिदायत, तो सेक्स एजुकेशन से परहेज़ क्यों? (Sex Education: Why We Should Talk About Sex Before Marriage)

ससुराल में जाकर सबका मन जीत लेना… धीरे-धीरे मीठी आवाज़ में सबसे बात करना… ज़ोर से मत हंसना और न ही ऊंची आवाज़ में बात करना… घर के कामकाज में हाथ बंटाना… इस तरह की तमाम हिदायतें उस लड़की को ज़रूर दी जाती हैं, जिसकी शादी होनेवाली होती है… यह हर घर में आम है, लेकिन क्या कभी इस बात पर हम ग़ौर करते हैं कि इतनी हिदायतों के बीच सेक्स को लेकर हम बेटी को या बेटे को कितना एजुकेट करते हैं? नहीं न? क्योंकि इस स्तर पर बात करना तो दूर, हम सोचते भी नहीं. हमें यह ज़रूरी ही नहीं लगता. वैसे भी सेक्स (Sex) को लेकर आज भी हम उतना खुलकर बात नहीं करते. हमारे समाज में आज भी सेक्स को गंदा या ग़लत ही माना जाता है, लेकिन बात जब शादी-ब्याह की हो, तब भी हम इसे ज़रूरी क्यों नहीं मानते? 

ये किस तरह का समाज है?
  • क्या यह समाज का दोगलापन नहीं है कि हमारे यहां शादी को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है और शादी का जो सबसे महत्वपूर्ण आधार है, उस पर ही बात करने से परहेज़ भी किया जाता है.
  • शादी के बाद गुड न्यूज़ की सबको जल्दी रहती है, लेकिन उससे पहले सेक्स से जुड़ी ज़रूरी बातें बताना किसी को ज़रूरी नहीं लगता.
  • जनसंख्या तेज़ी से बढ़ रही है यानी सेक्स करने से किसी को परहेज़ नहीं, लेकिन इस पर एजुकेट करना बेहद शर्मनाक माना जाता है.
  • टीवी कमर्शियल्स में कंडोम, कॉन्ट्रासेप्शन या फिर इससे जुड़ी चीज़ें दिखाए जाने पर परिवार के लोग इस कदर शर्मिंदगी महसूस करते हैं, जैसे यह कोई आपराधिक या शर्मनाक बात हो.
क्या होते हैं दुष्परिणाम?
  • सेक्स एजुकेशन की कमी के चलते सेक्स को लेकर कोई जागरूकता हमारे समाज में नहीं है.
  • नए शादीशुदा जोड़े भी उतना ही जान पाते हैं, जितना उनके यार-दोस्त उन्हें बताते-समझाते हैं.
  • किस तरह से सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ से बचाव करना चाहिए, किस तरह से फैमिली प्लानिंग और कॉन्ट्रासेप्शन का इस्तेमाल करना चाहिए, पर्सनल हाइजीन का क्या महत्व है… इस तरह की तमाम बातों पर किसी का ध्यान नहीं जाता है.
  • यही वजह है कि अधिकांश लड़कियां सेक्स को लेकर एक फैंटसी में जीती हैं और सुहागरात को किसी फिल्मी सीन की तरह देखती हैं. लेकिन जब उनका सामना हक़ीक़त से होता है, तो उनके सपने बिखर जाते हैं.
  • बात स़िर्फ लड़कियों की ही नहीं, लड़कों को भी यह सीख नहीं दी जाती कि पहली रात को सेक्स करना ज़रूरी नहीं. सबसे ज़रूरी होता है एक-दूसरे को कंफर्टेबल महसूस कराना, क्योंकि सेक्स एक क्रिया नहीं, भावना है और आपके रिश्ते की नींव का महत्वपूर्ण आधार भी.
  • हमारे यहां दोस्तों की बातें या फिर पोर्नोग्राफी ही सेक्स एजुकेशन का सबसे बड़ा आधार व ज़रिया होती है, जिससे बहुत ही ग़लत जानकारियां हासिल कर कपल्स अपनी-अपनी सोच के साथ एक-दूसरे के क़रीब आते हैं.
  • इसके अलावा अधिकांश लड़कियों को बचपन से यही सिखाया जाता है कि सेक्स बेहद शर्मनाक और गंदी चीज़ होती है, जिससे वो शादी के बाद भी स़िर्फ पति की इच्छा मानकर इस क्रिया को अंजाम देती हैं. वो न तो अपनी चाहतें बयां कर पाती हैं और न ही अपनी सोच. यहां तक कि वो पति को सहयोग भी नहीं दे पातीं, क्योंकि यहां उनके चरित्र से जोड़कर इसे देखा-परखा जाता है.

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नो सेक्स एजुकेशन का मतलब नो सेक्स नहीं है…
  • यह तो हम सभी जानते हैं कि सेक्स एजुकेशन नहीं मिलने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति सेक्स नहीं करेगा, लेकिन इसका यह मतलब ज़रूर है कि वो सेक्स को लेकर कम संवेदनशील होगा, कम जानकार होगा और सेक्स के प्रति उसमें भ्रांतियां अधिक होंगी.
  • सेक्स एजुकेशन न होने का मतलब यह भी है कि यौन शोषण के मामले अधिक होंगे.
  • यह मान लेते हैं और शोध भी इसी ओर इशारा करते हैं कि लगभग 70-80% पैरेंट्स सेक्स एजुकेशन के लिहाज़ से भी बच्चों से सेक्स पर बात ही नहीं करते, लेकिन एडल्ट होने के बाद, शादी से पहले तो कम से कम उन्हें इस विषय पर ज़रूर बात करनी चाहिए, ताकि उनकी शादी की नींव मज़बूत हो.
  • बच्ची को यह तो सिखाया जाता है कि पति को ख़ुश रखना ही तेरा फ़र्ज़ है, लेकिन उसे यह नहीं बताया जाता कि अपनी सेक्सुअल हेल्थ के प्रति सतर्कता बरतना भी ज़रूरी है.
  • कॉन्ट्रासेप्शन क्यों और कितना ज़रूरी है, मेडिकल टेस्ट्स कितने ज़रूरी हैं, इस विषय पर पति से बात करना कितना ज़रूरी है… ये तमाम बातें कभी किसी नई-नवेली दुल्हन को नहीं सिखाई जातीं और न ही दूल्हे को भी इस संदर्भ में एजुकेट किया जाता है.
  • उन्हें इस विषय पर बात करने से भी डर लगता है कि कहीं उन्हें चरित्रहीन न समझ लिया जाए या उनके बारे में कोई राय न कायम कर ली जाए.
  • यही वजह है कि सेक्सुअल हाइजीन को लेकर देश की शहरी महिलाएं तक बहुत पिछड़ी हुई हैं.
  • नई-नवेली दुल्हन के वर्जिनिटी टेस्ट को लेकर जितनी जागरूकता हमारा समाज दिखाता है, क्या उतनी ही जागरूकता लड़के की सेक्सुअल एक्टिविटीज़, सेक्सुअल हेल्थ और सेक्सुअल जानकारी के प्रति दर्शाई जाती है?

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प्रोफेशनल की लें मदद
  • यदि पैरेंट्स से सेक्स एजुकेशन नहीं मिली, तो कपल्स को चाहिए प्रोफेशनल की मदद लें.
  • काउंसलर के पास जाएं. प मन में छिपे डर, भ्रांतियों और आशंकाओं पर खुलकर आपस में बात करें.
  • पैरेंट्स की मानें, तो उनका यही तर्क होता है कि हमें तो किसी ने नहीं दी सेक्स एजुकेशन, फिर भी हमारी ज़िंदगी बेहतर है, लेकिन समय के साथ-साथ बहुत कुछ बदला है, आज एक्सपोज़र ज़्यादा है, सेक्स को लेकर सवाल ज़्यादा हैं, डर ज़्यादा हैं, भ्रांतियां ज़्यादा हैं.
  • समय के साथ बदलाव होना ज़रूरी है, हमारी सोच में भी और हमारे तरीक़ों में भी.
  • कपल्स शादी से पहले ख़ुद भी बात कर सकते हैं और उन्हें जो सही लगे, वो ऐक्शन ले सकते हैं, ताकि उनकी शादीशुदा ज़िंदगी बेहतर हो और उनका जीवन ख़ुशहाल. प पैरेंट्स भी यह ख़्याल रखें कि संस्कारों के साथ-साथ सेक्स एजुकेशन भी उतनी ही ज़रूरी है, ताकि आपकी बेटी का जीवन बेहतर हो.
  • दूसरी ओर ससुरालपक्ष को भी जानना ज़रूरी है कि नई दुल्हन से उम्मीदें, अपेक्षाएं करना, उसे ज़िम्मेदरियां देना, उसके कर्त्तव्यों की जानकारी देना तो ठीक है, साथ ही अपने बेटे को बेडरूम एटीकेट्स और सेक्स एटीकेट्स की जानकारी देनी भी उतनी ही ज़रूरी है, क्योंकि यह आख़िर उसकी बेहतरी के लिए ही है.

 

– गीता शर्मा

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कहीं आपने मिस तो नहीं कर दी भुवनेश्‍वर कुमार की शादी और रिसेप्शन की ये पिक्चर्स? (Reception Pictures Of Bhuvneshwar Kumar & Nupur)

wedding & Reception Pictures Of Cricketer Bhuvneshwar Kumar

क्रिकेटर (Cricketer) भुवनेश्‍वर कुमार (Bhuvneshwar Kumar) की हाल ही में शादी हुई. भुवी ने अपनी बचपन की दोस्त नुपूर (Nupur Nagar) से शादी रचाई और अगर आपने उनकी शादी (Wedding) और रिसेप्शन (Reception) की ये ख़ूबसूरत पिक्चर्स (Pictures) मिस कर दी हैं, तो निराश होने की बात नहीं. हम आपके लिए लाए हैं उनकी मैरिज और पोस्ट मैरिज पिक्चर्स.

wedding & Reception Pictures Of Cricketer Bhuvneshwar Kumar

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wedding & Reception Pictures Of Cricketer Bhuvneshwar Kumar

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wedding & Reception Pictures Of Cricketer Bhuvneshwar Kumar

wedding & Reception Pictures Of Cricketer Bhuvneshwar Kumar

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ज़हीर-सागरिका की शादी के रिसेप्शन में जमकर नाचे विराट-अनुष्का… (Zaheer-Sagarika Wedding Reception: Virat & Anushka Burn The Dance Floor)

Virat kohli, Anushka sharma Burn The Dance Floor

 Virat kohli, Anushka sharma Burn The Dance Floor

ज़हीर-सागरिका की शादी के रिसेप्शन में जमकर नाचे विराट-अनुष्का… (Zaheer-Sagarika Wedding Reception: Virat & Anushka Burn The Dance Floor)
  • ज़हीर और सागरिका आजकल हॉट कपल हैं, क्योंकि हाल ही में इनकी शादी हुई और शादी के फंक्शन्स अभी तक चल ही रहे हैं.
  • सोमवार को हुए इनकी शादी के रिसेप्शन में सभी क्रिकेट और बॉलीवुड के सितारों ने शामिल होकर चार चांद लगा दिए, वहीं सेंटर ऑफ अटैक्शन बने लव बर्ड्स विराट और अनुष्का, जो ख़ूब नाचे.
  • आप भी देखें वीडियोज़ और पिक्चर्स और एंजॉय करें.

 Virat kohli, Anushka sharma Burn The Dance Floor

 Virat kohli, Anushka sharma Burn The Dance Floor

 Virat kohli, Anushka sharma Burn The Dance Floor

 Virat kohli, Anushka sharma Burn The Dance Floor

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बेहतर करियर के लिए समझदारी से चुनें लाइफ पार्टनर (Choose Your Spouse Wisely For Better Career)

Spouse Wisely For Better Career

ज़िंदगी इत्तेफ़ाक नहीं है… हमारे फैसले, हमारी राय, हमारी सोच और हमारे निर्णय हमारी ज़िंदगी को दिशा देते हैं. हो सकता है कुछ चीज़ें हमारे मन के हिसाब से न हों, लेकिन सवाल यह है कि हमने कितना प्रयास किया? अक्सर शादी के निर्णय में हम और ख़ासतौर से लड़कियां अपनी सारी सोच और तमाम ख़्वाहिशों को ताक पर रख देती हैं, जबकि यही वो व़क्त होता है, जब हमें सबसे ज़्यादा सोच-समझकर फैसला लेने की ज़रूरत होती है, क्योंकि एक ज़िम्मेदार व समझदार पति आपकी ज़िंदगी को सही दिशा दे सकता है, जबकि एक ग़लत निर्णय आपको उम्रभर का पछतावा भी दे सकता है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या और किस तरह से सिलेक्ट करें आप अपना लाइफ पार्टनर, ताकि आपको परिवार व शादी के बाद अपने अच्छे-ख़ासे सफल करियर को यूं ही अलविदा न कहना पड़े.

क्या करें?

  • सबसे पहले आपको ख़ुद यह सोचना होगा कि आप क्या करना चाहती हैं? श्र अपनी प्राथमिकताएं तय करें.
  • डबल माइंड में न रहें.श्र आख़िर यह आपकी ज़िंदगी है, तो आपको ही यह निर्णय लेना होगा कि आपको क्या करना है.
  • अक्सर लड़कियां या तो ख़ुद यह सोच लेती हैं या फिर उनके परिवार की तरफ़ से उनको यह समझा दिया जाता है कि शादी के बाद देखा जाएगा, फ़िलहाल तो शादी हो जाए, यह ज़रूरी है.
  • ऐसे में लड़कियों पर भी दबाव होता है कि वो अपने होनेवाले पति से साफ़-साफ़ बात नहीं कर पातीं, क्योंकि उन्हें ससुरालपक्ष की नाराज़गी का डर रहता है.
  • अगर आप करियर ओरिएंटेड हैं और शादी के बाद भी करियर छोड़ना नहीं चाहतीं, तो सबसे बेहतर है कि अपने होनेवाले पति से इस बारे में खुलकर बात करें.
  • इससे आपको उनकी सोच व राय का भी अंदाज़ा हो जाएगा.श्र आपके लिए निर्णय लेना भी आसान हो जाएगा कि अब आपको किस चीज़ को प्राथमिकता देनी है.
  • आपकी राय भी महत्वपूर्ण है, आपका करियर भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना आपके पति का, इसलिए आपको अपनी बात बिना किसी संकोच के कहने की हिम्मत जुटानी ही होगी.

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क्या-क्या पूछें होनेवाले पार्टनर से?

  • आपके करियर को कितना महत्व देते हैं?
  • शादी के बाद आपके करियर को बढ़ावा देने के लिए उनकी तरफ़ से क्या मदद होगी?
  • क्या घरेलू ज़िम्मेदारियों में आपका हाथ बंटाएंगे?श्र घर के कामों में आपकी कितनी मदद करेंगे?
  • महिलाओं के प्रति और ख़ासतौर से कामकाजी महिलाओं के प्रति उनकी क्या राय है?
  • फैमिली बढ़ने के बाद भी क्या वो आपके करियर को उतना ही महत्वपूर्ण समझेंगे?
  • परिवार के लोग यदि नौकरी छोड़ने के लिए कहेंगे, तो वो आपको किस तरह से और किस हद तक सपोर्ट करेंगे?
  • बच्चे की ज़िम्मेदारी में किस तरह से आपको सपोर्ट करेंगे… आदि… इत्यादि… ये तमाम सवाल आपको बेझिझक पूछने होंगे, ताकि आगे चलकर आपको अपने करियर को लेकर किसी तरह का समझौता न करना पड़े.
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कितना कॉम्प्रोमाइज़ करें, कितना नहीं?

  • बातचीत के बाद आपको स्वयं यह अंदाज़ा हो जाएगा कि आपका होनेवाला पार्टनर आपकी बातों से कितना सहमत है.
  • आपको यह भी पता लग जाएगा कि शादी के बाद आपकी क्या चुनौतियां होंगी.
  • आपको कितना कॉम्प्रोमाइज़ करना पड़ेगा और आपकी कितनी बातों को समर्थन दिया जाएगा.
  • इसी के अनुसार आप अपनी प्राथमिकताएं तय कर सकती हैं. आप प्लानिंग कर सकती हैं कि आपको कितना बदलना है और किस तरह से बदलना है, ताकि  आपको करियर से भी समझौता न करना पड़े और परिवार को भी व़क्त दे सकें.

क्या कहते हैं आंकड़े?

  • सर्वे बताते हैं कि 48% महिलाएं अपने रियर को बीच में ही छोड़ देती हैं, ताकि वो अपने परिवार को समय दे सकें.
  • यदि ये महिलाएं काम करती रहें, तो भारत का जीडीपी 2% तक ऊपर जा सकता है.
  • जबकि पूरे एशिया की बात करें, तो 21% महिलाएं अपने करियर को बीच में छोड़ देती हैं.
  • इसी तरह से 43% उच्च शिक्षित महिलाएं बच्चों की परवरिश की ख़ातिर कुछ समय के लिए अपना करियर छोड़ देती हैं.
  • यही नहीं, विदेशों में भी यह आंकड़ा काफ़ी ज़्यादा है.

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कारण क्या है?

  • दरअसल, महिलाएं परिवार के प्रति अधिक ज़िम्मेदारी महसूस करती हैं.
  • न स़िर्फ ज़िम्मेदारी, विशेषज्ञ बताते हैं कि उनमें अपराधबोध की भावना भी पुरुषों के मुक़ाबले अधिक होती है.
  • उन्हें लगता है कि बच्चों और परिवार को उनकी अधिक ज़रूरत है.
  • परिवार को समय न दे पाने की चिंता व गिल्ट उन्हें अधिक होता है.
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बदलाव ही रास्ता है…

  • बदलाव हो रहा है. लड़कियों की सोच भी बदल रही है और वो भी अब अपने करियर को गंभीरता से लेने लगी हैं.
  • लेकिन ज़रूरत है समाज व लड़कियों के माइंडसेट को बदलने की, जहां उन्हें यह साफ़तौर पर निर्णय लेना होगा कि उन्हें परिवार और करियर दोनों ही चाहिए.
  • इस सकारात्मक सोच के साथ यदि वो आगे बढ़ेंगी, तो यक़ीनन दोनों के बीच सामंजस्य बेहतर तरी़के से बैठा पाएंगी.
  • अपने हक़ के लिए और सही बात के लिए उन्हें बोलना होगा और बोलने का सबसे सही व़क्त शादी से पहले ही है.
  • शादी से पहले ही उन्हें अपनी राय साफ़ करनी होगी और उन्हें ख़ुद भी यह तय करना होगा कि वो क्या चाहती हैं.
  • आख़िर उन्हें भी अपनी ज़िंदगी व अपने करियर से जुड़े फैसले लेने का पूरा-पूरा हक़ है, तो स़िर्फ त्याग या बलिदान जैसे शब्दों का बोझ वो अकेले ही क्यों ढोएं.
  • बेहतर होगा अपने होनेवाले लाइफ पार्टनर को जांचें, परखें और समझदारी से काम लें, क्योंकि एक समझदार लाइफ पार्टनर के साथ ही बेहतर ज़िंदगी और बेहतर करियर की संभावनाएं मौजूद होंगी.

 

– विजयलक्ष्मी

 

August Born: प्यार ही नहीं, शादी में भी बेहद विश्‍वास रखते हैं अगस्त में जन्मे लोग (What Your Birth Month Says About Your Love Life)

August Born

August Born

प्यार ही नहीं, शादी में भी बेहद विश्‍वास रखते हैं अगस्त (August) में जन्मे लोग

  • इन्हें कैज़ुअल रिलेशनशिप्स पसंद नहीं होतीं.
  • ये शादी की परंपरा पर बेहद विश्‍वास करते हैं.
  • इनकी सबसे बड़ी ख़ासियत यही होती है कि ये अपने पार्टनर की कमियों को नज़रअंदाज़ करके स़िर्फ उनकी ख़ूबियों पर ध्यान देते हैं.
  • इन्हें रोमांस बहुत पसंद होता है.
  • ये अपने पार्टनर के प्रति बहुत ईमानदार होते हैं, साथ ही पार्टनर से भी उसी ऑनेस्टी की अपेक्षा रखते हैं.

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  • बेडरूम में कोई इन्हें समझाए, यह इन्हें पसंद नहीं आता.
  • ये इस बात पर भी ध्यान देते हैं कि उनके पार्टनर में वो सब कुछ है, जो ये चाहते हैं. अगर ऐसा नहीं है, तो इन्हें उनसे अलग होकर कोई दूसरा साथी तलाशने में भी देर नहीं लगती.
  • प्यार और सेक्स के मामले में ये थोड़ा ईगोइस्ट होते हैं.
  • सेक्स व प्यार के मामले में ये या तो एकदम ही सेलफिश हो सकते हैं या फिर ये बेहद उदार होते हैं. यानी इनके व्यक्तित्व में ये विरोधाभास हो सकता है.

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सुहागन स्त्रियां मांग में सिंदूर क्यों भरती हैं? (Why Indian Women Put Sindoor In Their Maang?)

Sindoor

हमारे देश में सुहागन स्त्रियों के लिए मांग भरना अनिवार्य माना जाता है. शादी के समय भी मांग भरने की रस्म को ख़ास महत्व दिया जाता है. मांग भरने से न स़िर्फ महिलाओं की ख़ूबसूरती निखरती है, बल्कि इसके कई अन्य लाभ भी हैं. आइए, जानते हैं सुहागन स्त्रियों के मांग भरने के धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व.

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धार्मिक मान्यता
* हमारे देश में सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना जाता है इसलिए शादी के समय वर सिंदूर से वधू की मांग भरता है.
* सिंदूर सुहागन स्त्रियों के शृंगार में महत्वपूर्ण स्थान रखता है इसलिए शादी के बाद लगभग सभी महिलाएं मांग में सिंदूर भरती हैं.

वैज्ञानिक महत्व
* सिंदूर में पारा जैसी धातु की अधिकता होती है, जिससे चेहरे पर जल्दी झुर्रियां नहीं पड़तीं यानी सिंदूर लगाने से महिलाओं के चेहरे पर बढ़ती उम्र के संकेत जल्दी नज़र नहीं आते और उनका चेहरा ख़ूबसूरत नज़र आता है.
* इसके साथ ही सिंदूर लगाने से स्त्री के शरीर में स्थित वैद्युतिक उत्तेजना नियंत्रित रहती है.

शादी से पहले ज़रूर पूछें ये 6 Important फाइनेंशियल सवाल(6 Most Important Money Talk You Need to Have Before Marriage)

Money Talk Before Marriagerelationship

शादी जीवन का सबसे अहम् फैसला होता है, जहां नए लोग, नए घर के साथ ही वैवाहिक ज़िंदगी के रूप में लड़कियों के लिए जीवन की एक नई शुरुआत भी होती है. उन्होंने भले ही अपना करियर बना लिया हो, आत्मनिर्भर हो गई हों, पर विवाह से पहले, उनके मन में भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को लेकर कई सवालों की कशमकश चलती रहती है. आइए जानते हैं, शादी से पहले मन में आनेवाले फ़ाइनेंशियल लाइफ़ (Money Talk Before Marriage) से जुड़े 6 महत्वपूर्ण सवालों के बारे में.

Money Talk Before Marriage
ज्वॉइंट अकाउंट खुलवाएं या अलग?

– शादी से पहले लड़कियों को सबसे ज़्यादा जो सवाल परेशान करता है, वह यह कि शादी के बाद दोनों ही अपना अलग-अलग सेविंग अकाउंट खोलें या ज्वॉइंट अकाउंट रखें.
– ज्वॉइंट अकाउंट की तरफ़ लड़कियों का झुकाव ़ज़्यादा होता है, क्योंकि वे सोचती हैं कि जब सब कुछ एक है, तो अकाउंट भी एक ही होना चाहिए.
– इसमें सबसे बड़ा फ़ायदा यह होता है कि यदि कभी अचानक पैसे की ज़रूरत पड़ जाए और दोनों में से एक व्यक्ति बाहर गया हो, तो दूसरे के साइन से पैसे निकाले जा सकते हैं और काम नहीं रुकता.
– लेकिन कई बार इसमें पैसों के हिसाब में गड़बड़ी होने से संबंधों में दरार आने का ख़तरा भी होता है.
– ऐसे में समझदारी इसी में है कि ज्वॉइंट अकाउंट खुलवाने के साथ-साथ, ख़ुद का एक अलग सेविंग अकाउंट भी खुलवाएं.
– यदि आप कामकाजी हैं, तो सैलरी का कुछ हिस्सा उसमें जमा कर सकती हैं, पर यदि हाउसवाइफ़ हैं, तो घर ख़र्च से की गई कुछ बचत उसमें जमा कर सकती हैं और ज़रूरत के वक़्त निकाल सकती हैं.
– ध्यान रहे कि अकाउंट का नॉमिनी जीवनसाथी को ही बनाएं.

उधार या लोन शेयर करूं या नहीं?

– शादी के बाद भावनात्मक रूप से भले ही ङ्गतेरे दुख अब मेरेफ की क़समें ली गई हों, पर जब उधार या लोन चुकाने की बारी आती है, तो कई बार सोच बदल जाती है.
– ऐसे में ख़ुद से सवाल करें कि क्या आप पार्टनर के ख़र्च को अपने अकाउंट से देने के लिए आर्थिक रूप से समर्थ या
तैयार हैं?
– यदि आप जवाब ङ्गहांफ चुनती हैं, तो आपको अपना इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो फिर से बनाना चाहिए.
– साथ ही यह भी देखना होगा कि आपका यह निर्णय आपके लक्ष्य को और आपके सपनों को प्रभावित न करे.

उत्तरदायित्व की ज़िम्मेदारी लें या नहीं?

– कई लोग उत्तरदायित्वों की ज़िम्मेदारी हंसी-ख़ुशी ले लेते हैं, तो कई लोग मुकर जाते हैं और ज़्यादातर लोग बीच का रास्ता चुनते हैं. ये सब बातें हमारी लाइफ़स्टाइल, परवरिश और मनी मैटर्स पर निर्भर करती हैं.

– यदि दोनों पार्टनर्स उत्तरदायित्वों के मामले में एकमत नहीं होते, तो भविष्य में कई अहम् निर्णय लेने में उन्हें समस्याएं आ सकती हैं, जैसे- कार के लिए लोन, बच्चों की पढ़ाई के लिए लोन, रिटायरमेंट के लिए निवेश या दूसरा घर ख़रीदने के लिए निवेश आदि.
– बेहतर होगा कि इन सब बातों के बारे में अच्छी तरह सोच-समझकर आपस में डिसकस करें और अपनी ज़िम्मेदारी उठाएं.

क्या पति-पत्नी दोनों का इंश्योरेंस करवाना चाहिए?

– अक्सर पति के लाइफ़ इंश्योरेंस को अधिक महत्व दिया जाता है.
– लेकिन इस बात का भी ख़्याल रखें कि पत्नी भी सभी चीज़ों में बराबर की हिस्सेदार होती है. अतः उसकी ज़िंदगी को सुरक्षित बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
– इसलिए एक सही इंश्योरेंस पॉलिसी लेना बहुत ज़रूरी होता है.

क्या हेल्थ पॉलिसी या मेडिक्लेम करवाना चाहिए?

– शादी के तुरंत बाद हेल्थ पॉलिसी अवश्य लें.
– जितनी जल्दी यानी कम उम्र में पॉलिसी लेंगे, प्रीमियम उतना ही कम देना पड़ेगा.
– इसके अलावा पत्नी की मेडिक्लेम पॉलिसी भी ली जा सकती है. इससे मेटरनिटी और मेडिकल संबंधी ख़र्च भी आसानी से कवर हो जाते हैं.

क्या हर जगह पार्टनर को नॉमिनी बनाना होगा या वसीयत बदलनी होगी?

– शादी के बाद काफ़ी वक़्त तो घूमने-फिरने, मौज-मस्ती में निकल जाता है और नॉमिनीवाली बात याद ही नहीं रहती.
– इन बातों में देरी न करें. ऑफ़िस के प्रॉविडेंट फंड, बैंक अकाउंट्स और अन्य इनवेस्टमेंट वाली जगहों पर, जहां पहले आपने परिवार के किसी अन्य सदस्य को नॉमिनी बनाया है, उपयुक्त जगहों पर बदलकर पार्टनर का नाम डलवा दें.
– कई बार नॉमिनी बदलने में होनेवाली देरी अनेक परेशानियों को जन्म दे सकती है.
– यदि कभी कोई दुर्घटना घट जाए, तो पत्नी को पैसे नहीं मिल पाते, जिसकी वह हक़दार है. अतः इस काम को प्राथमिकता देते हुए पहले करें.
– यदि दूसरा विवाह है, तो यह सोचना होगा कि पहले विवाह से हुए बच्चों को उनका हक़ मिल सके और नए फैमिली मेंबर्स के साथ भी अन्याय न हो. अतः हरेक निर्णय सोच-समझकर लें.
बेहतर होगा कि मन में उठ रहे हर सवाल का जवाब पहले ख़ुद से मांगें और फिर खुले दिल से पार्टनर के साथ डिसकस करें और तभी अपनी फ़ाइनेंशियल प्लानिंग करें.

 

20 Tips: शादी से पहले करें शादी के बाद की तैयारियां (20 Smart Pre Marriage Preparations For Couples)

क्यों नहीं निभ रही शादियां? (Why Marriages Are Breaking?)

शादि

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सात जन्मों का बंधन कही जाने वाली शादी की उम्र दिन-प्रति-दिन घटती जा रही है. अग्नि को साक्षी मानकर मरते दम तक साथ निभाने की कसमें खाने वाले कपल्स अब कुछ साल भी साथ नहीं रह पाते. आज के मॉडर्न युग में जिस तेज़ी से तलाक़ के मामले बढ़ रहे हैं, उससे शादी के अस्तित्व पर ही संकट मंडराता नज़र आ रहा है. आख़िर युवाओं के लिए शादी निभाना इतना मुश्किल क्यों होता जा रहा है? पेश है ख़ास रिपोर्ट.

 

कमज़ोर होते रिश्ते
गांवों के मुक़ाबले महानगरों में तलाक़ के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं. एक सर्वे के अनुसार, 1960 में सालभर में जहां तलाक़ के एक या दो मामले ही आते थे, वहीं 1990 तक ये आंकड़ा 1000 को पार कर गया. 2005 में फैमिली कोर्ट में तलाक़ के 7 हज़ार से भी ज़्यादा मामले दर्ज़ थे. ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में हर साल तलाक़ के 8-9 हज़ार केस दर्ज़ हो रहे हैं, वहीं मुंबई में ये तादाद क़रीब 5 हज़ार है. जीवनसाथी डॉट कॉम के एक सर्वे के मुताबिक, तलाक़ लेने वालों में 25-35 साल के कपल्स की संख्या ज़्यादा है. मैरिज काउंसलर डॉ. राजीव आनंद के मुताबिक, “आजकल के युवा शादी को कमिटमेंट की बजाय कन्वीनियंट (सुविधाजनक) रिलेशनशिप मानते हैं. जब तक सहजता से रिश्ता चलता है वो चलाते हैं और जब उन्हें असुविधा महसूस होने लगती है, तो बिना किसी गिल्ट के झट से रिश्ता तोड़ देते हैं.” कुछ जानकार टूटते रिश्तों के लिए शहरों में तलाक़शुदा महिलाओं को मिल रही स्वीकार्यता को भी ज़िम्मेदार मानते हैं. साइकोलॉजिस्ट मीता दोषी कहती हैं, “तलाक़ को अब लोग कलंक नहीं मानते. पहले तलाक़शुदा महिलाओं को घर तोड़ने वाली कहकर आस-पड़ोस वाले और नाते-रिश्तेदार ताने मारते थे. इतना ही नहीं, माता-पिता भी तलाक़शुदा बेटी को अपनाने से कतराते थे, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. तलाक़शुदा महिलाएं अब समाज से नज़रें चुराकर नहीं, बल्कि गर्व से सिर उठाकर जी रही हैं.”

आर्थिक स्वतंत्रता
डॉ. आनंद का मानना है, “महिलाओं की आत्मनिर्भरता से भी उनके रिश्तों की लय बिगड़ गई है. आर्थिक रूप से मज़बूत होने की वजह से उन्हें लगता है कि जब वो अकेले सब कुछ मैनेज कर सकती हैं, तो घुटन भरे रिश्ते को ढोने की भला क्या ज़रूरत है? दिलचस्प बात ये है कि पुरुषों को कमाऊ पत्नी तो चाहिए, लेकिन उसे वे ख़ुद से ऊपर उठता नहीं देख सकते. पत्नी के सामने अपना रुतबा कम होता देख पुरुषों के अहं को ठेस पहुंचती है और यही ठेस उनकी शादीशुदा ज़िंदगी में दरार डाल देती है.” कुछ ऐसी ही राय साइकोलॉजिस्ट मीता दोषी की भी है. उनके मुताबिक, “आजकल महिलाएं इंडिपेंडेंट हो गई हैं, आर्थिक रूप से वो किसी पर निर्भर नहीं हैं. ऐसे में पति से अलग होने का ़फैसला करने पर उन्हें इस बात का डर नहीं रहता कि अलग होने के बाद उनका ख़र्च कैसे चलेगा? बच्चों का पालन-पोषण कैसे होगा या समाज क्या कहेगा?” पहले ज़्यादातर महिलाएं मजबूरी में खोखले हो चुके रिश्तों का बोझ भी ढोती रहती थीं. शहरों में तलाक़ के बढ़ते मामलों का एक बड़ा कारण डबल इनकम नो किड्स का बढ़ता चलन भी है. आजकल के ज़्यादातर दंपति करियर की ख़ातिर अकेले रहना पसंद करते हैं. ऐसे में तलाक़ की स्थिति में उन्हें ये डर भी नहीं रहता कि उनके अलग होने पर बच्चों पर क्या असर पड़ेगा?

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साथ व़क्त न बिताना
बिज़ी लाइफस्टाइल के कारण पति-पत्नी के पास एक-दूसरे के लिए व़क्त ही नहीं रहता. कभी-कभी तो हफ्तों-महीनों तक वे एक-दूसरे से सुकून से बात तक नहीं कर पाते. ऐसे में उनके लिए एक-दूसरे को समझना मुश्किल हो जाता है, जिससे उनमें भावनात्मक दूरियां बढ़ने लगती हैं और रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच जाता है. औरतों से बहुत ज़्यादा उम्मीद की जाती है. पहले वो चुपचाप सब कुछ सह लेती थीं, लेकिन अब वो हिम्मत करके बोल रही हैं. जब बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है, तो वो रिश्ता ख़त्म करने में ही भलाई समझती हैं. वैसे भी जिस रिश्ते में तिल-तिलकर रोज़ मरना हो उसे तोड़ देना ही बेहतर है.

कपल्स ख़ुद की आइडेंटिटी को ज़्यादा महत्व देने लगे हैं. रिश्ता टूटने के लिए कोई एक ज़िम्मेदार नहीं होता, ताली दोनों हाथों से बजती है. हो सकता है, एक 70 फ़ीसदी ज़िम्मेदार हो तो दूसरा 30 फ़ीसदी ही हो, लेकिन ग़लती दोनों की होती है.

– मीता दोषी, साइकोलॉजिस्ट

समाज व परिवार का सीमित दायरा
डॉ. आनंद कहते हैं, “आजकल किसी भी कपल की ज़िंदगी में समाज और परिवार का रोल सीमित हो गया है, जिससे उनके बीच की छोटी-मोटी अनबन या झगड़ों को सुलझाने वाला कोई नहीं रहता. मनमुटाव की स्थिति में कपल्स अपना धैर्य खो देते हैं और तुरंत अलग होने का ़फैसला कर लेते हैं. आजकल के युवा बेस्ट पार्टनर चाहते हैं, जो हर चीज़ में परफेक्ट हो, लेकिन वो पार्टनर की मदद कर उसे किसी काम में परफेक्ट बनाने की ज़हमत नहीं उठाते. रिश्ते टूटने की एक बड़ी वजह धैर्य की कमी है, जिससे कुछ समय बाद कपल्स का एक-दूसरे के प्रति प्यार व आकर्षण कम हो जाता है, यही वजह है कि लव मैरिज करने वाले भी आसानी से तलाक़ ले रहे हैं.”

प्यार व विश्‍वास में कमी
आई लव यू बोल देना ही इस बात का सबूत नहीं कि पति-पत्नी के प्यार की डोर मज़बूत है. महानगरों में जहां वर्किंग कपल्स की तादाद दिनोंदिन बढ़ती जा रही है, उनके बीच प्यार व विश्‍वास उतना ही कम होता जा रहा है. घर लेट से आने या फोन न उठाने पर पति-पत्नी दोनों को ही लगने लगता है कि पार्टनर का किसी और से संबंध है इसलिए वो उन्हें नज़रअंदाज़ कर रहा है. फिर शक़ का यही बीज उनके रिश्तों को खोखला कर देता है. कई कपल्स तो अपने साथी की हर हरकत पर नज़र रखने के लिए उनके पीछे जासूस लगाने से भी नहीं हिचकिचाते. विश्‍वास ही शादी की बुनियाद है, अगर बुनियाद ही कमज़ोर हो जाए, तो शादी टिक पाना मुश्किल हो जाता है.

पहले जहां पति-पत्नी का रोल तय होता था, वहीं अब महिलाओं की भूमिका बदल रही है. उन्हें पहले से ज़्यादा अधिकार प्राप्त हैं और ये बात पुरुषों को हज़म नहीं हो रही. इसके अलावा आर्थिक, भावनात्मक और शारीरिक (सेक्सुअल) पहलू भी रिश्ता टूटने के लिए ज़िम्मेदार है. कपल्स को ढेर सारी उम्मीदें रखने की बजाय एक-दूसरे के अलग व्यक्तित्व को स्वीकारना चाहिए. शादी निभाने के लिए भव्य शादी समारोह की नहीं,
बल्कि समझदारी की ज़रूरत है.

– चित्रा सावंत, मीडिया प्रोफेशनल

बहुत ज़्यादा अपेक्षाएं
डॉ. माधुरी सिंह के मुताबिक, “महिलाएं शादी निभाने की कोशिश करती हैं. कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो वर्किंग वुमन के प्रति नज़रिए में कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है. आज भी पुरुष ऐसी बीवी चाहते हैं, जो अच्छी दिखती हो, अच्छा कमाती हो और जो उनके घर-परिवार को भी अच्छी तरह संभाल सके, यानी पत्नी उनकी हर कसौटी पर खरी उतरे, जो संभव नहीं है.” आजकल पुरुषों को ही नहीं, बल्कि महिलाओं को भी अपने साथी से बहुत-सी उम्मीदें रहती हैं, जैसे- पति अच्छा दिखे, अच्छा कमाए, उसकी हर बात सुने, उसके माता-पिता का ज़्यादा ध्यान रखे आदि. साइकोलॉजिस्ट दोषी कहती हैं, “आजकल कपल्स की शादी से अपेक्षाएं बहुत बढ़ गई हैं. एक-दूसरे से की गई ये अपेक्षाएं जब पूरी नहीं होतीं तो पति-पत्नी के रिश्ते में दूरियां आने लगती हैं और धीरे-धीरे ये दूरियां इस क़दर बढ़ जाती हैं कि उनके रास्ते ही अलग हो जाते हैं.”

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दोनों ज़िम्मेदार
तलाक़ के लिए हर बार पति ही ज़िम्मेदार हो, ये ज़रूरी नहीं. 3 साल पहले लव मैरिज करने वाले मुंबई के दिनेश इन दिनों अकेले हैं. दिनेश कहते हैं, “मैं अपने माता-पिता का इकलौता बेटा हूं. शादी के बाद मेरी पत्नी को बेवजह न जाने क्यों मेरे पैरेंट्स से परेशानी होने लगी. वो चाहती थी कि मैं अपने मां-बाप को छोड़कर उसके साथ दूसरे फ्लैट में रहूं, जो संभव नहीं था. मैं अपने बूढ़े माता-पिता को अकेला नहीं छोड़ सकता, ये कहने पर वो मुझे ही छोड़कर चली गई और तलाक़ का नोटिस भेज दिया.”

तलाक क़ानून
हमारे देश में तलाक़ लेना आसान नहीं है. इसके लिए लंबी क़ानूनी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है, जिसमें सालों लग जाते हैं. हालांकि पिछले साल कैबिनेट ने हिंदू मैरिज एक्ट में कुछ संशोधन करके इसे आसान बनाने की कोशिश की है यानी अब पति-पत्नी यदि स्वेच्छा से अलग होना चाहें, तो ऐसे मामलों को अधिक समय तक लंबित नहीं रखा जाएगा. अदालत को ऐसे मामलों को जल्द से जल्द निपटाना होगा. पहले तलाक़ की अर्ज़ी देने के बाद पति-पत्नी को सुलह के लिए 6 महीने की समय सीमा दी जाती थी, लेकिन अब ये बाध्यता ख़त्म हो चुकी है. फिर भी अदालत को सही लगे, तो वो कपल्स को सुलह के लिए कुछ व़क्त दे सकती है.


– कंचन सिंह

स्टार रेस्लर योगेश्वर दत्त बंधे शादी के बंधन में (Star Wrestler Yogeshwar Dutt Ties knot with Sheetal)

Yogeshwar Dutt

भारत के स्टार रेस्लर योगेश्वर दत्त (Yogeshwar dutt) सोमवार 16 जनवरी को शादी के बंधन में बंध गए. उन्होंने कॉन्ग्रेस लीडर जय भगवान शर्मा की बेटी शीतल संग सात फेरे लिए. शादी के सूट में ख़ूब जंच रहे थे पहलवान जी और उनकी बेटर हाफ़ शीतल भी लग रही थीं बेहद प्यारी. हमारी तरफ़ से इस प्यारी और ख़ूबसूरत जोड़ी को शादी की शुभकामनायें! आइए आपको दिखाते हैं शादी की इक्स्क्लूसिव तस्वीरें.

Yogeshwar Dutt

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– गीता शर्मा