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फिल्म रिव्यू: एक मां की इमोशनल जर्नी है ‘मॉम’ (Movie Review: Mom)

Movie Review: Mom

फिल्म- मॉम

स्टारकास्ट- श्रीदेवी, नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, अक्षय खन्ना, अदनान सिद्दिकी, सजल अली, अभिमन्यु सिंह

निर्देशक- रवि उद्यावर

रेटिंग- 3.5/5

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मॉम पूरी तरह से श्रीदेवी की फिल्म है. मॉम के रोल में श्रीदेवी के अलावा किसी और अभिनेत्री की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. मॉम की कहानी एक संजीदा विषय पर बनी है. इस फिल्म के साथ श्रीदेवी ने 300 फिल्मों के आंकड़े को छू लिया है. आइए, जानते हैं कैसी है मॉम.

कहानी

मॉम की कहानी है एक मां और उसके बदले की. कहानी शुरू होती है बायोलॉजी की टीचर देवकी (श्रीदेवी) के साथ. देवकी के स्कूल में उसकी सौतेली बेटी आर्या (सजल अली) भी पढ़ती है. आर्या अपनी मां से बिल्कुल प्यार नहीं करती, लेकिन उसकी मां उससे बहुत प्यार करती है. आर्या के स्कूल में पढ़ने वाला एक लड़का मोहित, आर्या को अश्लील मैसेजेस भेज कर परेशान करता है. जब इस बात का पता देवकी को चलता है, तो वह उसे सज़ा देती है. मोहित बदला लेने के लिए एक दिन आर्या को किडनैप कर लेता है और उसका रेप करके सड़क पर फेंक देता है. पुलिस ऑफिसर मैथ्यू फ्रांसिस (अक्षय खन्ना) इस केस की तहकीकात करते हैं. कोर्ट केस में सबूतों के अभाव में मोहित केस जीत जाता है. लेकिन एक मां को ये फैसला नागवार गुज़रता है, वो डिटेक्टिव दयाशंकर (नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी) की मदद लेती है.यहां से शुरू होता है एक मां का बदला.

यूएसपी

फिल्म की कहानी भले ही नई नहीं हो, लेकिन उसे दिखाने का अंदाज़ बहुत ही अलग है. नए डायरेक्टर रवि उद्यावर का निर्देशन काबिले तारीफ़ है. श्रीदेवी की जितनी तारीफ़ की जाए, उतनी कम है. एक मां का अपने बच्चे के लिए इमोशन और फिर उसकी बेटी का रेप करने वालों के लिए ग़ुस्सा, ये सब देखकर आप एक बार फिर श्रीदेवी के अभिनय के फैन हो जाएेंगे. नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का लुक और उनकी ऐक्टिंग देखने के बाद इस बात का एहसास होता है कि फिल्म में अपने अभिनय की छाप छोड़ने के लिए बड़े-बड़े डायलॉग्स या ज़्यादा फ्रेम्स की ज़रूरत नहीं होती है. एक छोटा-सा रोल करके भी आप पूरी फिल्म अपने नाम कर सकते हैं. पाकिस्तानी ऐक्ट्रेस सजल अली और अदनान सिद्दीकी का अभिनय भी लाजवाब है.

देखने जाएं या नहीं

ज़रूर देखने जाएं ये फिल्म. श्रीदेवी की ऐक्टिंग मिस नहीं कर सकते आप. नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को एक नए अंदाज़ में देखने का मौक़ा बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिए. इस वीकेंड एक अच्छी और दमदार मैसेज वाली फिल्म आपका इंतज़ार कर रही है.

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WOW! शाहरुख खान ने सलमान खान को गिफ्ट की कार! (Shahrukh Khan gifts Salman Khan a luxurious car)

Salman-Khan-Shah-Rukh-Khan (1)शाहरुख खान और सलमान खान बेस्ट फ्रेंड्स बन गए हैं, ये बात तो अब हर कोई जानता है! अब दोनों अपनी अस दोस्ती को बड़ी शिद्दत से निभा भी रहे हैं. हाल ही में शाहरुख को सलमान की फिल्म ट्यूबलाइट में कैमियो करते देखा गया था. अब सलमान भी शाहरुख के लिए यही करने वाले हैं. आनंद एल राय की फिल्म में शाहरुख मेन लीड में हैं. सलमान इसी फिल्म के एक गाने में शाहरुख के साथ डांस करते नज़र आएंगे. बिज़ी सलमान ने अपने बिज़ी शेड्यूल से वक़्त निकाला और पहुंच गए शाहरुख के साथ शूट करने.

लेकिन असली ख़बर ये नहीं, बल्कि कुछ और है. जब सलमान सेट पर पहुंचे तब वहां उनका इंतज़ार कर रही थी एक लग्ज़री कार, जो शाहरुख ले आए थे सलमान के लिए. जब शाहरुख को ये पता चला कि सलमान ने उनकी फिल्म के लिए अपनी फिल्म की शूटिंग आगे बढ़ा दी, तब उन्होंने भी दोस्ती का फ़र्ज़ निभाते हुए सलमान को गिफ्ट कर दी एक कार.

यह भी पढ़ें: ‘बिग बॉस 9’ की एक्स कंटेस्टेंट मंदाना करीमी ने पति के खिलाफ़ घरेलू हिंसा का केस कराया दर्ज़ 

ख़बरें हैं कि जो कार शाहरुख ने सलमान को दी है वो नई लॉन्च हुई है और किसी के पास अब तक नहीं है. ऐसे में ये एक्सक्लूसिव गिफ्ट देखकर सलमान ख़ुश होने के साथ-साथ काफ़ी सरप्राइज़ भी हो गए.

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Fresh! आ गए बादशाह! अजय देवगन की फिल्म ‘बादशाहो’ का दमदार पोस्टर रिलीज़ (‘Baadshaho’ Teaser Poster Out)

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आ गए बादशाह! अजय देवगन की फिल्म बादशाहो का नया पोस्टर रिलीज किया गया है. बादशाहो के इस नए पोस्टर में अजय देवगन का एक्शन अवतार सामने आया है. इस पोस्टर में अजय देवगन के दोनों हाथों में गन है और चेहरा स्कार्फ से ढंका हुआ है. फिल्म की कहानी साल 1975 के दौरान लगी इमर्जेंसी पर आधारित है. पोस्टर को देखकर फैन्स फिल्म का और भी बेसब्री से इंतजार करने लगे है. अजय देवगन ने फिल्म का नया पोस्टर ट्विटर पर भी शेयर किया है. फिल्म को मिलन लुथरिया ने डायरेक्ट किया है, अजय और मिलन वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई में एक साथ काम कर चुके हैं.

एक्शन थ्रिलर फिल्म बादशाहो में अजय देवगन के साथ इमरान हाशमी, ईशा गुप्ता, इलियाना डिक्रूज़ और विद्दुत जामवाल भी नज़र आएंगे.

पोस्टर को देखकर फिल्म में होने वाले ज़बरदस्त एक्शन का अंदाजा लगाया जा सकता है.

 

 

OMG! बाहुबली 2 ने पहले ही दिन कमाए 100 करोड़, बनाया नया रिकॉर्ड (Baahubali 2 Broke Records Earned 100 Crore On First Day)

बाहुबली 2

बाहुबली 2

बाहुबली 2 ने पहले ही दिन कर दी है सुल्तान और दंगल जैसी फिल्मों की छुट्टी. एक ही दिन में बाहुबली 2 ने कर ली है 100 करोड़ की कमाई कर ली है. फिल्म के हिंदी वर्जन ने ही 35 से 40 करोड़ के बीच कमा लिए हैं. फिल्म समीक्षकों ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर दी है. शुक्रवार के दिन ही लगभग हर थिएटर को 95 फ़ीसदी ऑडियंस मिली थी. सबसे बड़ी बात ये फिल्म किसी फेस्टिवल पर रिलीज़ नहीं हुई है, फिर भी एक दिन में 100 करोड़ कमा कर बाहुबली 2 ने रिकॉर्ड बना दिया है.

यह भी पढ़ें: रिलीज़ हो गई बाहुबली 2: द कंक्लूजन, कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? मिल गया इसका जवाब

बाहुबली: द बिगनिंग 180 करोड़ में बनी थी और लगभग 600 करोड़ की कमाई फिल्म ने की थी. बाहुबली 2- द कंक्लूज़न की लागत 250 करोड़ की और जिस तरह से पहले दिन ही ये फिल्म 100 करोड़ के क्लब में पहुंची है, उसे देखकर यही लगता है कि ये फिल्म और भी बड़े रिकॉर्ड्स बना सकती है.

रिलीज़ हो गई बाहुबली 2: द कंक्लूजन, कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? मिल गया इसका जवाब (Movie Review: Baahubali 2: The Conclusion)

बाहुबली 2

फिल्म- बाहुबली 2: द कंक्लूजन

स्टारकास्ट- प्रभास, राणा दग्गुबाती, अनुष्का शेट्टी, तमन्ना भाटिया, राम्या कृष्णन

निर्देशक- एस एस राजामौली

रेटिंग- 4.5 स्टार

बाहुबली 2

आख़िरकार एक लंबे इंतज़ार के बाद एस एस राजामौली की फिल्म बाहुबली 2: द कंक्लूजन रिलीज़ हो ही गई. तमिल, तेलुगू, हिन्दी और मलयालम इन चार भाषाओं मे रिलीज़ हुई इस फिल्म को लेकर हर को उत्सुक है, क्योंकि यही वो फिल्म है जिसमें छुपा है उस सवाल का जवाब, जिसका हर किसी को इंतज़ार था. कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? इसका जवाब आपको फिल्म के सेकंड हाफ में मिलेगा. कमाल का स्क्रीनप्ले और हॉलीवुड स्तर की इस फिल्म की कहानी हम आपको नहीं बता सकते हैं, लेकिन इतना ज़रूर कह सकते हैं कि फिल्म इतनी शानदार है कि अगर आप ये फिल्म नहीं देखते, तो यकीनन एक बेहतरीन फिल्म मिस कर जाएंगे आप. फिल्म का आख़िरी के 15 मिनट आपकी सांसें रोक देगा, इतना ज़बरदस्त ऐक्शन शायद ही आपने पहले किसी बॉलीवुड फिल्म में देखा होगा.

देवसेना यानी अनुष्का शेट्टी को अब तक आपने एक छोटे से रोल में बेड़ियों में जकड़े देखा था, लेकिन बाहुबली 2 में वे कई ख़तरनाक़ ऐक्शन सीन्स करती नज़र आ रही हैं. तमन्ना भाटिया ने भी अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है.

अब बात बाहुबली और भल्लालदेव यानी प्रभास और राणा दग्गुबाती की, एक बार दोनों दमदार, पहले से ज़्यादा फिट नज़र आ रहे हैं. राम्या भी अपने किरदार में बेहतरीन लग रही हैं. फिल्म का वीएफएक्स हॉलीवुड लेवल का है. एडिटिंग से लेकर बैकग्राउंड स्कोर, सिनेमेटोग्राफी, फिल्म का संगीत सब कुछ परफेक्ट है.

FILM REVIEW: एक बार देखी जा सकती है ‘द गाज़ी अटैक’ (MOVIE REVIEW: The Ghazi Attack)

The Ghazi Attack Review

फिल्म- द गाज़ी अटैक (The Ghazi Attack)

स्टारकास्ट- राणा दग्गुबाती, ताप्सी पन्नु, के के मेनन, अतुल कुलकर्णी, ओमपुरी.

निर्देशक- संकल्प रेड्डी

रेटिंग- 3 स्टारThe Ghazi Attack Review

कहानी

द गाज़ी अटैक भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध पर आधारित है. समंदर में हुए इस युद्ध के बारे में कम ही लोग जानते हैं. फिल्म की शुरुआत होती है बिग बी की आवाज़ से, जो इस लड़ाई के बारे में जानकारी देते हैं. कहानी साल 1971 में जब भारतीय नौसेना के सबसे दमदार आईएनएस विक्रांत को नुक़सान पहुंचाने के लिए पाकिस्तान समुद्र के रास्ते अपनी पनडुब्बी ‘गाज़ी’ को भेजता है. नौसेना चीफ़ वी पी नंदा (ओमपुरी) ‘सर्च लैंड’ ऑपरेशन का गठन करते हैं, जिसकी ज़िम्मेदारी सौंपी जाती है एस 21 पनडुब्बी के कप्तान रणविजय सिंह (के के मेनन) और लेफ्टिनेंट कमांडर अर्जुन (राणा डग्गुबाती) को. कैसे ये लोग मिलकर पाकिस्तान की पनडुब्बी का नामोनिशां मिटा देते है, इसी पर आधारित है ये फिल्म.

फिल्म की यूएसपी

फिल्म की कहानी ही इस फिल्म की यूएसपी है, क्योंकि ये एक ऐसे युद्ध पर बनी है, जिसके बारे में लोग ज़्यादा जानते नहीं है, इसलिए कहानी में दिलचस्पी बनी रहती है. संकल्प रेड्डी का डायरेक्शन भी अच्छा है. फिल्म में कोई गाना नहीं है और बिल्कुल सही भी है, क्योंकि फिल्म में किसी गाने के लिए कोई जगह नहीं है.

के के मेनन और ओमपुरी जैसे टैलेंटेड ऐक्टर्स की ऐक्टिंग फिल्म को बांधे हुए रखती है. राणा डग्गुबाती भी अपने रोल के साथ न्याय कर रहे हैं. फिल्म में ताप्सी का रोल भले ही छोटा है, लेकिन दमदार है, ताप्सी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वो अच्छी ऐक्ट्रेस हैं.

देखने जाएं या नहीं?

ज़रूर जाएं, एक बार ये फिल्म देखी जा सकती है. आपकी जेब पर बिल्कुल भारी नहीं पड़ेगी द गाज़ी अटैक.

– प्रियंका सिंह

‘काबिल’ की स्क्रिनिंग पर भी सुज़ैन ने दिया ऋतिक का साथ (Sussanne Khan joins Hrithik Roshan on Kaabil screening)

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सुज़ैन खान पहुंची काबिल ऋतिक रोशन से मिलने. जी हां, इन दिनों ऋतिक और सुज़ैन को जब भी मौक़ा मिलता है, दोनों एक-दूसरे को कंपनी देने पहुंच जाते हैं. अभी कुछ दिनों पहले ऋतिक के बर्थ डे पर दोनों ने साथ अच्छा टाइम बिताया, तो वहीं अब वो अपने दोनों बच्चों के साथ ऋतिक और यामी गौतम स्टारर फिल्म काबिल की स्पेशल स्क्रिनिंग पर पहुंचीं. सुज़ैन ने ऋतिक को गले लगाकर इस फिल्म के लिए बधाई भी दी.

Eternal sunshine of the spotless mind… so so so proud of you.. ???❤? #kaabil #sacrecoeur

A photo posted by Sussanne Khan (@suzkr) on

सुज़ैन और ऋतिक भले ही अलग हो गए हों, लेकिन एक अच्छे दोस्त की तरह वो हमेशा उन्हें सपोर्ट करती हैं. देखें तस्वीरें.

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Finally! जब मिल बैठेंगे तीन यार! (Akshay Kumar, Salman Khan and Karan Johar to come together for a film)

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एक बार फिर मिल बैठेंगे तीन यार, सलमान खान, अक्षय कुमार और करण जौहर साथ होंगे एक ही फिल्म में. तीनों इतने एक्साइटेड थे साथ में काम करने को लेकर कि तीनों ने ही अपनी ख़ुशी टि्वटर पर जता दी.

अक्षय कुमार ने लिखा, “सलमान और करन जैसे दोस्तों के साथ एक फिल्म में साथ काम कर रहा हूं. 2018 में रिलीज़ होने वाली इस फिल्म में मैं मुख्य भूमिका में हूं.”

Coming together for a film produced by friends, @beingsalmankhan and @karanjohar, starring me! Out in 2018.

A photo posted by Akshay Kumar (@akshaykumar) on

सलमान और अक्षय मुझसे शादी करोगी और जानेमन जैसी फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं.
सलमान ने भी ट्वीट करते हुए कहा, “एक ऐसी फिल्म के लिए हाथ मिलाया है, जिसमें अक्षय हीरो हैं और इसे मैं करन के साथ प्रोड्यूस कर रहा हूं.”

करण सलमान के साथ कुछ कुछ होता है में काम कर चुके हैं. उन्होंने ने भी ट्वीट में कहा, “एक अच्छा अनुभव होता है, जब दोस्त एक ख़ास फिल्म के लिए साथ आते हैं.”

चलिए ये तीनों तो बेहद एक्साइटेड हैं साथ काम करने के लिए, तभी साल 2018 में रिलीज़ होने वाली फिल्म को लेकर तीनों इतनी बातें कर रहे हैं. यक़ीनन इन तीनों के फैन्स भी बेताब होंगे इस तीनों को एक फिल्म में साथ देखने के लिए.

असली दंगल की रियल धाकड़ छोरी रितु फोगट (Wrestling Is My Identity- Ritu Phogat)

Dangal
कुछ दायरों को पार करना इतना सहज भी नहीं होता, लेकिन उनसे परे जाकर, जब सारे जहां को जीतने का जज़्बा दिल में घर कर जाता है, तो हर बंदिश को तोड़ना आसान लगने लगता है. कुछ ऐसी ही बंदिशों को तोड़कर दुनिया को अपने अस्तित्व का लोहा मनवाया है फोगट सिस्टर्स ने. महावीर सिंह फोगट ने अपनी बेटियों को दुनिया से लड़ने का हौसला दिया और उनकी बेटियों ने उनका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया. यही वजह है कि महावीरजी से प्रभावित होकर कुश्ती जैसे विषय पर दंगल फिल्म बन रही है.
पहलवानी एक ऐसा क्षेत्र है, जहां मर्दों का ही दख़ल माना जाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में गीता, बबीता, रितु, विनेश से लेकर साक्षी मलिक तक ने पहलवानी के जो दांव दिखाए हैं, उससे दुनिया स्तब्ध है. कुश्ती, पहलवानी, दंगल, महिलाओं का इसमें दख़ल… इन तमाम विषयों पर महावीर फोगट की बेटी रितु फोगट क्या कहती हैं, आइए जानते हैं-

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आपके पिताजी पर फिल्म बन रही है, क्या ख़ास व अलग महसूस कर रही हैं?
ज़ाहिर है कि अच्छा लग रहा है. हमारे पापा ने हमें बहुत हौसला दिया है. हमारे परिवार को कुश्ती को और ख़ासतौर से लड़कियों को इस क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए जो भी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं, उनसे गर्व महसूस होता है. इसके अलावा इस फिल्म में बाप-बेटी के रिश्ते को जिस तरह से दर्शाया जाएगा, वो भी काबिले तारीफ़ है. इससे बेटियों को काफ़ी हौसला भी मिलेगा और हमारे समाज में बेटियों के प्रति जो भी नकारात्मक सोच है, उसमें ज़रूर बदलाव आएगा. हम जैसे स्पोर्ट्स पर्सन के लिए आख़िर दंगल यानी कुश्ती ही पहचान है.

एक लड़की होने के नाते कितना मुश्किल था कुश्ती जैसे प्रोफेशन को अपनाना?
सच कहूूं तो मुझे इतनी मुश्किल नहीं हुई, क्योंकि हमारे पापा ने कोई मुश्किल आने ही नहीं दी. अगर समाज व परिवार के तानों की भी बात हो, तो उन्होंने सब कुछ ख़ुद सुना, ख़ुद झेला, ताकि हम पर कोई आंच न आए. सबसे वो ख़ुद लड़े. साथ में मेरी बड़ी बहनें भी थीं, तो उनका भी सपोर्ट था मुझे.

अगर बात करें दंगल मूवी की, तो आमिर ख़ान को मिस्टर परफेक्शनिस्ट कहते हैं, आपके परिवार के साथ उन्होंने किस तरह समय बिताया और उनका कमिटमेंट देखकर आपको कैसा लगा?
उनसे पहली बार जब मुलाक़ात हुई, तो यह लगा ही नहीं कि हम इतने बड़े स्टार से मिल रहे हैं. बहुत ही सहज और सिंपल हैं. अपने काम के प्रति ग़ज़ब का समर्पण है उनमें. हालांकि हम तो ज़्यादा नहीं मिले उनसे, पापा के साथ ही अधिक बातचीत होती थी, लेकिन जितनी बार भी मिले, हमें उनकी सहजता ने बहुत प्रभावित किया, क्योंकि हमें वो बेहद कंफर्टेबल महसूस करवाते थे.

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रेसलिंग जैसे खेल को बतौर प्रोफेशन चुनना कितना टफ होता है और कितने अनुशासन व ट्रेनिंग की ज़रूरत होती है?
ट्रेनिंग व अनुशासन बहुत ही ज़रूरी है और सच कहूं, तो पापा बहुत ही स्ट्रिक्ट होते हैं ट्रेनिंग के टाइम पर. सुबह 3.30 बजे उठना, एक्सरसाइज़ और प्रैक्टिस करना इतना थका देता है कि कभी-कभी उठने की भी हिम्मत नहीं रहती. लेकिन यह ज़रूरी है, ताकि हमें अपना स्टैमिना पता रहे और हम उसे बढ़ा सकें.

डायट और फिटनेस के लिए क्या ख़ास करना पड़ता है?
डायट तो नॉर्मल ही रहती है, जैसे- दूध, बादाम, रोटी… लेकिन टूर्नामेंट वगैरह से पहले थोड़ा कंट्रोल करना पड़ता है, जिसमें ऑयली, फैटी व स्वीट्स को अवॉइड करते हैं.

अपनी हॉबीज़ के बारे में बताइए?
मुझे तो कोई ख़ास शौक़ नहीं है, बस कुश्ती ही मेरा शौक़ भी है और जुनून भी. हां, खाली समय में पंजाबी गाने सुनती हूं या फिर कभी-कभार ताश भी खेल लेती हूं.

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उन लड़कियों से क्या कुछ कहना चाहेंगी, जो इस क्षेत्र में या अन्य खेलों में अपना भविष्य तलाशने की चाह रखती हैं?
चाहे किसी भी क्षेत्र में हों या कोई भी हो, लगन व मेहनत का कोई पर्याय नहीं है. सबमें टैलेंट होता ही है, लेकिन उस टैलेंट को मंज़िल तभी मिलती है, जब आप मेहनत और लगन से अपने लक्ष्य को पाने में जुटते हैं.

कोई सपना, जो रोज़ देखती हैं या कोई अधूरी ख़्वाहिश?
एक ही ख़्वाहिश है- ओलिंपिक्स में गोल्ड!

अन्य खेलों के मुकाबले आप रेसलिंग को कहां देखती हैं?
यह सही है कि रेसलिंग को अब काफ़ी बढ़ावा मिल रहा है, लेकिन यदि अन्य खेलों की तरह पहले से ही इसे थोड़ा और गंभीरता से लिया जाता, तो इसमें अपना करियर बनाने की चाह रखनेवाली लड़कियों को काफ़ी प्रोत्साहन मिलता. लेकिन देर आए, दुरुस्त आए.

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आपकी बहनें आपको किस तरह से इंस्पायर करती हैं? क्या आप सबके बीच आपस में कोई कॉम्पटीशन की भावना है या इतने सारे स्टार्स एक ही परिवार में हैं, तो अपनी अलग पहचान बनाना चुनौतीपूर्ण लगता है?
जी नहीं, ऐसा कुछ भी नहीं है. मेरे पापा और सिस्टर्स ने हमेशा मुझे सपोर्ट किया है, उन्हीं को देखकर सीखा है सब. हम सब एक दूसरे का सपोर्ट सिस्टम हैं, परिवार से ही तो हौसला मिलता है.

फिल्हाल दंगल मूवी रिलीज़ हो चुकी है और लोगों द्वारा काफ़ी पसंद भी की जा रही है… रितु ने भी अपना स्पेशल रिव्यू सोशल मीडिया पर शेयर किया है…

– गीता शर्मा

Film Review: शुरू हो गया ‘दंगल’! धाकड़ है आमिर और उनकी छोरियां! (Movie Review: Dangal)

Dangal Review

फिल्म- दंगल

स्टारकास्ट- आमिर खान, सांक्षी तवर, फातिमा सना शेख, सान्या मल्होत्रा, ज़ायरा वसीम, सुहानी भटनागर

निर्देशक- नितेश तिवारी

रेटिंग- 4 स्टार

Dangal Review

”मेडलिस्ट पेड़ पर नहीं उगते, उन्हें बनाना पड़ता है…प्यार से, मेहनत से, लगन से….” बस कुछ इसी डायलॉग की तरह दंगल को भी बनाया गया है, प्यार से, मेहनत से और लगन से. ये मेहनत आपको पर्दे पर नज़र भी आएगी. ये फिल्म आपको पलकें झपकाने का भी मौक़ा नहीं देगी. आइए, जानते हैं कि क्यों दंगल जैसी फिल्म आपको देखनी ज़रूरी है.

कहानी

म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के? इसी कॉन्सेप्ट पर है ये फिल्म. हरियाणा के पहलवान महावीर सिंह फोगट के जीवन पर आधारित है दंगल. गोल्ड मेडल न जीत पाने का अधूरा सपना अपने बेटे में देखने वाले महावीर सिंह फोगट (आमिर खान) बेटे के इंतज़ार में चार बेटियों के पिता बन जाते हैं. उन्हें गोल्ड पाने का सपना अब धुंधला होता नज़र आने लगता है, लेकिन तभी उनकी रुकी ज़िंदगी में आता है एक बड़ा बदलाव, जब उनकी बेटियां गीता (ज़ायरा वसीम) और बबीता (सुहानी भटनागर) एक लड़के को पीट देती हैं. इसके बाद ही महावीर सिंह अपनी बेटियों को कुश्ती के गुर सिखाकर उन्हें रेसलिंग के रिंग में उतारते हैं और गोल्ड का सपना पूरा होता है.

फिल्म की यूएसपी

फिल्म की यूएसपी की बात करें, तो एक्सप्रेशन से लेकर डायलॉग्स और गानों से लेकर हर सीन तक सब कुछ परफेक्ट है. इस फिल्म से आप ख़ुद को कनेक्ट कर पाएंगे. फिल्म के कुछ सीन्स, ख़ासकर कुश्ती के कई सीन्स तो ऐसे हैं, जो कुछ सेकंड के लिए आपकी सांसें रोक देंगे.

दूसरी ख़ास बात ये है कि जिन दर्शकों को कुश्ती के दांव-पेंच और रूल्स नहीं पता हैं, उनके लिए डायरेक्टर ने फिल्म में कुछ प्वॉइंट्स क्लियर कर दिए हैं, ताकि फिल्म में दिखाई गई कुश्ती के अहम् दृश्यों को वो सही ढंग से समझ सकें.

दमदार ऐक्टिंग

हर एक किरदार फिल्म में अपनी ऐक्टिंग के साथ न्याय करता नज़र आएगा. सबसे पहले बात आमिर खान की. आमिर क्यों मिस्टर परफेक्शनिस्ट हैं इसका जवाब आपको मिलेगा इस फिल्म में. पहलवान महावीर सिंह फोगट के रोल में आमिर कमाल के लग रहे हैं. आमिर का बढ़ा हुआ वज़न देखकर और उनकी बोली सुनकर आप कुछ देर के लिए भूल जाएंगे कि ये आमिर हैं, आपको लगेगा आप वाकई हरियाणा के किसी पहलवान को देख रहे हैं.

गीता और बबीता के बचपन के रोल में ज़ायरा वसीम और सुहानी भटनागर, तो वहीं बड़े होने के बाद के रोल में फातिमा सना शेख और सान्या मल्होत्रा ने ज़बरदस्त काम किया है और अपने धाकड़ अंदाज़ से लोगों का दिल जीत लिया है.

साक्षी तंवर अच्छी ऐक्ट्रेस हैं, ये हर कोई जानता है और इस फिल्म में भी उन्होंने ये साबित कर दिया है.

क्यों देखने जाएं फिल्म?

दंगल फिल्म के लिए ये सवाल बनता ही नहीं है कि क्यों देखने जाएं फिल्म, क्योंकि इस फिल्म को देखे बगैर साल 2016 को बाय-बाय कहना सही नहीं होगा. साल 2016 की अच्छी यादों में इस फिल्म को ज़रूर शामिल करिए. दंगल न सिर्फ़ एक अच्छा मैसेज देगी, बल्कि आपकी सोच को पॉज़िटिव बना कर कभी हार न मानने का जज़्बा भी देगी.

– प्रियंका सिंह

 

अर्जुन रामपाल बने ‘डैडी’…फिल्म का मोशन पोस्टर रिलीज़ (Arjun Rampal’s ‘Daddy’ Motion Poster Is Out)

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अर्जुन रामपाल बन गए हैं डैडी. दरअसल, ये नाम है अर्जुन रामपाल की अगली फिल्म का जिसका मोशन पोस्टर उन्होंने अपने टि्वटर पर शेयर किया है. इस वीडियो में लिखा है, DADDY, THE ONLY ONE WHO DID NOT RUN.

इस क्लिप में अरुण गवली की तब की ओरिजनल पिक्चर दिखाई गई है, जो साल 1979 में आगरीपाड़ा जेल में खिंचवाई गई थी. धीरे-धीरे ये पिक्चर अर्जुन रामपाल की पिक्चर में बदल जाती है.

असीम अहलुवालिया के निर्देशन में बन रही डैडी में अर्जुन रामपाल अरुण गवली का किरदार निभा रहे हैं. इस पोस्टर में अर्जुन एकदम अरुण गवली की तरह ही नज़र आ रहे हैं. 29Arjun-Arun-Daddy

अर्जुन ने टि्वटर पर एक वीडियो भी रिलीज़ किया था, जिसमें अरुण गवली की आवाज़ थी. दरअसल ये एक इंटरव्यू का हिस्सा था. सुनिए क्या है इस वीडियो में.

अरुण गवली को डैडी कहकर भी बुलाया जाता था, इसलिए इस फिल्म का नाम डैडी रखा गया है. इस फिल्म का मोशन पोस्टर तो काफ़ी इंट्रेस्टिंग है, अब इंतज़ार है फिल्म के ट्रेलर का.

– प्रियंका सिंह

‘दंगल’ ही पहचान है- रितु फोगट (Wrestling Is My Identity- Ritu Phogat)

जब सपनों को पंख लग जाते हैं, तो आसमान की ऊंचाई मायने नहीं रखती. कुछ दायरों को पार करना इतना सहज भी नहीं होता, लेकिन उनसे परे जाकर, जब सारे जहां को जीतने का जज़्बा दिल में घर कर जाता है, तो हर बंदिश को तोड़ना आसान लगने लगता है. कुछ ऐसी ही बंदिशों को तोड़कर दुनिया को अपने अस्तित्व का लोहा मनवाया है फोगट सिस्टर्स ने. महावीर सिंह फोगट ने अपनी बेटियों को दुनिया से लड़ने का हौसला दिया और उनकी बेटियों ने उनका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया. यही वजह है कि महावीरजी से प्रभावित होकर कुश्ती जैसे विषय पर दंगल फिल्म बन रही है.
पहलवानी एक ऐसा क्षेत्र है, जहां मर्दों का ही दख़ल माना जाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में गीता, बबीता, रितु, विनेश से लेकर साक्षी मलिक तक ने पहलवानी के जो दांव दिखाए हैं, उससे दुनिया स्तब्ध है. कुश्ती, पहलवानी, दंगल, महिलाओं का इसमें दख़ल… इन तमाम विषयों पर महावीर फोगट की बेटी रितु फोगट क्या कहती हैं, आइए जानते हैं-

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आपके पिताजी पर फिल्म बन रही है, क्या ख़ास व अलग महसूस कर रही हैं?
ज़ाहिर है कि अच्छा लग रहा है. हमारे पापा ने हमें बहुत हौसला दिया है. हमारे परिवार को कुश्ती को और ख़ासतौर से लड़कियों को इस क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए जो भी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं, उनसे गर्व महसूस होता है. इसके अलावा इस फिल्म में बाप-बेटी के रिश्ते को जिस तरह से दर्शाया जाएगा, वो भी काबिले तारीफ़ है. इससे बेटियों को काफ़ी हौसला भी मिलेगा और हमारे समाज में बेटियों के प्रति जो भी नकारात्मक सोच है, उसमें ज़रूर बदलाव आएगा. हम जैसे स्पोर्ट्स पर्सन के लिए आख़िर दंगल यानी कुश्ती ही पहचान है.

एक लड़की होने के नाते कितना मुश्किल था कुश्ती जैसे प्रोफेशन को अपनाना?
सच कहूूं तो मुझे इतनी मुश्किल नहीं हुई, क्योंकि हमारे पापा ने कोई मुश्किल आने ही नहीं दी. अगर समाज व परिवार के तानों की भी बात हो, तो उन्होंने सब कुछ ख़ुद सुना, ख़ुद झेला, ताकि हम पर कोई आंच न आए. सबसे वो ख़ुद लड़े. साथ में मेरी बड़ी बहनें भी थीं, तो उनका भी सपोर्ट था मुझे.

अगर बात करें दंगल मूवी की, तो आमिर ख़ान को मिस्टर परफेक्शनिस्ट कहते हैं, आपके परिवार के साथ उन्होंने किस तरह समय बिताया और उनका कमिटमेंट देखकर आपको कैसा लगा?
उनसे पहली बार जब मुलाक़ात हुई, तो यह लगा ही नहीं कि हम इतने बड़े स्टार से मिल रहे हैं. बहुत ही सहज और सिंपल हैं. अपने काम के प्रति ग़ज़ब का समर्पण है उनमें. हालांकि हम तो ज़्यादा नहीं मिले उनसे, पापा के साथ ही अधिक बातचीत होती थी, लेकिन जितनी बार भी मिले, हमें उनकी सहजता ने बहुत प्रभावित किया, क्योंकि हमें वो बेहद कंफर्टेबल महसूस करवाते थे.

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रेसलिंग जैसे खेल को बतौर प्रोफेशन चुनना कितना टफ होता है और कितने अनुशासन व ट्रेनिंग की ज़रूरत होती है?
ट्रेनिंग व अनुशासन बहुत ही ज़रूरी है और सच कहूं, तो पापा बहुत ही स्ट्रिक्ट होते हैं ट्रेनिंग के टाइम पर. सुबह 3.30 बजे उठना, एक्सरसाइज़ और प्रैक्टिस करना इतना थका देता है कि कभी-कभी उठने की भी हिम्मत नहीं रहती. लेकिन यह ज़रूरी है, ताकि हमें अपना स्टैमिना पता रहे और हम उसे बढ़ा सकें.

डायट और फिटनेस के लिए क्या ख़ास करना पड़ता है?
डायट तो नॉर्मल ही रहती है, जैसे- दूध, बादाम, रोटी… लेकिन टूर्नामेंट वगैरह से पहले थोड़ा कंट्रोल करना पड़ता है, जिसमें ऑयली, फैटी व स्वीट्स को अवॉइड करते हैं.

अपनी हॉबीज़ के बारे में बताइए?
मुझे तो कोई ख़ास शौक़ नहीं है, बस कुश्ती ही मेरा शौक़ भी है और जुनून भी. हां, खाली समय में पंजाबी गाने सुनती हूं या फिर कभी-कभार ताश भी खेल लेती हूं.

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उन लड़कियों से क्या कुछ कहना चाहेंगी, जो इस क्षेत्र में या अन्य खेलों में अपना भविष्य तलाशने की चाह रखती हैं?
चाहे किसी भी क्षेत्र में हों या कोई भी हो, लगन व मेहनत का कोई पर्याय नहीं है. सबमें टैलेंट होता ही है, लेकिन उस टैलेंट को मंज़िल तभी मिलती है, जब आप मेहनत और लगन से अपने लक्ष्य को पाने में जुटते हैं.

कोई सपना, जो रोज़ देखती हैं या कोई अधूरी ख़्वाहिश?
एक ही ख़्वाहिश है- ओलिंपिक्स में गोल्ड!

अन्य खेलों के मुकाबले आप रेसलिंग को कहां देखती हैं?
यह सही है कि रेसलिंग को अब काफ़ी बढ़ावा मिल रहा है, लेकिन यदि अन्य खेलों की तरह पहले से ही इसे थोड़ा और गंभीरता से लिया जाता, तो इसमें अपना करियर बनाने की चाह रखनेवाली लड़कियों को काफ़ी प्रोत्साहन मिलता. लेकिन देर आए, दुरुस्त आए.

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आपकी बहनें आपको किस तरह से इंस्पायर करती हैं? क्या आप सबके बीच आपस में कोई कॉम्पटीशन की भावना है या इतने सारे स्टार्स एक ही परिवार में हैं, तो अपनी अलग पहचान बनाना चुनौतीपूर्ण लगता है?
जी नहीं, ऐसा कुछ भी नहीं है. मेरे पापा और सिस्टर्स ने हमेशा मुझे सपोर्ट किया है, उन्हीं को देखकर सीखा है सब. हम सब एक दूसरे का सपोर्ट सिस्टम हैं, परिवार से ही तो हौसला मिलता है.

– गीता शर्मा