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Exclusive Interview: जग जिस पर हंसता है, इतिहास वही रचता है… रेसलर संग्राम सिंह (When The World Says ‘Give UP’ Hope Whispers, Try It One More Time: Wrestler Sangram Singh)

Wrestler Sangram Singh Interview

मैंने सूरज को कैद किया था आंखों में, मैंने चांद उगाया था हथेली पर… स्याह रातें जब अंधेरा बिखेर रही थीं, मैंने उम्मीद का चिराग़ जलाया था अपनी पलकों पर… थककर रुक जाता, तो वहीं टूट जाता… रास्ता बदल देता, तो हर ख़्वाब पीछे छूट जाता… चलता रहा मैं कांटों पर भी, रुक न सका मैं उलझी हुई राहों पर भी… अपने पैरों की बेड़ियों को तोड़ दिया जब मैंने, सारी दुनिया ने कहा, हर नाउम्मीदी को बड़े जिगर से पीछे छोड़ दिया मैंने… लोग कहते थे लड़ना छोड़ दे, यही तेरी नियति है प्यारे… मैंने कहा, जो लड़ने से डर जाए, वो इंसान नहीं, जो नियति से हार जाए, वो संग्राम नहीं… क्या कोई सोच सकता है कि बचपन के आठ साल व्हील चेयर पर गुज़ारने के बाद कोई बंदा पहलवानी की दुनिया को अपने दम पर इस क़दर जीत सकता है कि आज बड़े अदब और सम्मान से उसका नाम लिया जाता है. उसे दुनिया का सर्वश्रेष्ठ पहलवान कहा जाता है… जी हां, हम बात कर रहें हैं रेसलर संग्राम सिंह (Wrestler Sangram Singh) की. क्या था उनका संघर्ष और कैसे लड़े वो अपनी नियति से, आइए उन्हीं से पूछते हैं…

Wrestler Sangram Singh Interview

आपको बचपन में आर्थराइटिस था लेकिन वहाँ से लेकर वर्ल्ड के बेस्ट रेस्लर बनने तक की जर्नी कैसी रही आपकी?

बचपन में मुझे रूमैटॉइड आर्थराइटिस हुआ था. जब मैं 3 साल का था, तो पैरों में दर्द हुआ और फिर पैरों में गांठ-सी बन गई. चूंकि मैं हरियाणा के रोहतक डिस्ट्रिक्ट के मदीना गांव से हूं, तो मेरे पैरेंट्स भी बहुत ही सिंपल हैं और उस समय इतनी जानकारी नहीं थी, सुविधाएं नहीं थीं और न ही इतने पैसे थे, सो मुझे कभी इस डॉक्टर को दिखाया, तो कभी किसी दूसरे को. इसी में इतना समय निकल गया कि जब बड़े हॉस्पिटल में डॉक्टर्स को दिखाया गया, तो उन्होंने सीधेतौर पर कह दिया कि यह बीमारी तो मेरी मौत के साथ ही ख़त्म होगी. लेकिन मेरी मां ने हिम्मत नहीं हारी और कुछ मेरी भी इच्छाशक्ति थी कि 8 साल तक व्हील चेयर पर रहने के बाद आज मैं रेसलर हूं.
दरसअल मेरे बड़े भाई स्टेट लेवल के रेसलर थे, तो मैंने भी टूर्नामेंट यानी दंगल के बारे में सुना कि उन्हें घी-दूध सब मिलता है, तो मैं उसके साथ दंगल देखने गया. दंगल देखकर मुझे न जाने क्यों यह महसूस हुआ कि काश मैं भी रेसलर बन सकता. फिर अपने दोस्त को कहा कि मुझे अखाड़े में लेकर चल. वहां गया, तो सब मुझे देखकर मेरा मज़ाक उड़ाने लगे. अखाड़े के उस्ताद ने भी मुझसे पूछा कि आप क्या करना चाहते हो, तो मैंने अपने मन की बात कही कि मैं भी रेसलर बनना चाहता हूं. मेरी बात सुनकर उन्होंने भी यही कहा कि अगर भी आप बन गए, तो सब बन जाएंगे… खंडहर देखकर इमारत का पता चल जाता है… इत्यादि बातें… न जाने क्या कुछ नहीं कहा उन्होंने मुझे.
लेकिन मेरी मां ने गिवअप नहीं किया और न मैंने हिम्मत हारी. आप सोच सकते हैं कि गांव में नेचर कॉल के लिए भी बाहर जाना पड़ता था, हमारे पास व्हील चेयर तक के पैसे नहीं होते थे… मैं सुबह उठ तो जाता था, आंखें खुल जाती थीं, लेकिन मेरी बॉडी मूव नहीं होती थी. 8 साल तक बिस्तर पर पड़े रहना आसान नहीं था, क्योंकि यह बीमारी मेरे शरीर में फैलती जा रही थी. हर जॉइंट में आ गई थी. यहां तक कि मैं अपना मुंह भी खोलता था, तो मुझे दर्द होता था. मैं हर रोज़ जीने की एक नई कोशिश करता था, अपने पैरों पर खड़े होने के लिए संघर्ष करता था… मेरा यही मानना है कि यदि इंसान हिम्मत न हारे, तो नामुमकिन कुछ भी नहीं… मुझे प्रोफेशनल रेसलिंग में वर्ल्ड के बेस्ट रेसलर का टाइटल मिला, तो मैं यही कहूंगा कि जग जिस पर हंसता है, इतिहास वही रचता है.
यही वजह है कि अपने इस संघर्ष को मैं भूलता नहीं और मैं उन बच्चों की हर तरह से मदद करने की कोशिश करता हूं, जो इस बीमारी से पीड़ित हैं. उनकी पढ़ाई-लिखाई, रोज़ी-रोटी के लिए मुझसे जो बन पड़ता है, मैं ज़रूर करने की कोशिश करता हूं. दरअसल, हम स़िर्फ एक ज़रिया हैं, भगवान ही सब कुछ करता है.

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आज की बिज़ी लाइफस्टाइल में फिटनेस कितनी महत्वपूर्ण है? और आप अपनी फ़िट्नेस के लिए क्या कुछ ख़ास करते हैं?

फिटनेस के लिए आप कहीं भी समझौता नहीं कर सकते और न करना चाहिए. ख़ासतौर से आज की बिज़ी लाइफस्टाइल में. यह एक ऐसा इंवेस्टमेंट है कि कोई भी मुझसे पूछे, तो यही कहूंगा कि अपने शरीर में इंवेस्ट करो रोज़ाना, चाहे एक घंटा, दो घंटा या जब भी, जितना भी टाइम मिले, आपको अपने शरीर में इंवेस्टमेंट करना चाहिए, क्योंकि शेयर मार्केट हो या आपका बिज़नेस हो, वो आपको धोखा दे सकता है, लेकिन यह शरीर धोखा नहीं देगा. मैं फिटनेस के लिए हर रोज़ 3 घंटे वर्कआउट करता ही हूं, चाहे कितना ही बिज़ी क्यों न होऊं. कोशिश करता हूं अलग-अलग चीज़ें करने की, जो मैं 15 साल की उम्र में नहीं कर पाता था, वो वर्कआउट मैं आज करता हूं. रेसलिंग भी करता हूं. युवाओं को मोटिवेशनल स्पीच भी देता हूं, टीवी शोज़ करता हूं, फिल्म भी कर रहा हूं. तो हर चीज़ बैलेंस करने की कोशिश करता हूं. 5-6 घंटे सोता हूं.

अपने डाइयट कि बारे में बताइए…

मैं प्योर वेजीटेरियन हूं. मेरा यही मानना है कि यदि ज़िंदगी में आपको सच में स्ट्रॉन्ग बनना है, आगे बढ़ना है, तो खाओ कम, काम ज़्यादा करो. एक और दिलचस्प बात ज़रूर करना चाहूंगा, हालांकि मैं किसी की बुराई नहीं करना चाहूंगा, लेकिन जैसे हम जिम में जाते हैं, तो ट्रेनर डरा देते हैं कि अरे, आपका वज़न इतना है, तो आपको तो इतने ग्राम प्रोटीन खाना है… आप 70 किलो के हैं, तो और ज़्यादा प्रोटीन खाओ… सब वहम की बातें हैं. आप ख़ुद अपने डायट का ध्यान रखो, हेल्दी खाओ. पानी पीओ. सूखी रोटी और प्याज़ में भी इतनी ताकत और विटामिन होते हैं, जितना किसी बड़े होटल के खाने में भी नहीं होंगे. हर रोज़ वर्कआउट करो, ख़ुश रहो. अच्छी हेल्थ का यही फॉर्मूला है कि खाना भूख से कम, पानी डबल, वर्कआउट ट्रिप्पल और हंसना चार गुना.
मैं सुबह दलिया खाता हूं. आंवला-एलोवीरा का जूस लेता हूं. अश्‍वगंधा, शहद, गुड़, दूध, रोटी, दाल-सब्ज़ी और घी. यह सभी चीज़ें संतुलित रूप से खाता हूं. आजकल एक मूवी के लिए वज़न कम कर रहा हूं. 20 किलो वज़न कम किया है, इसलिए संतुलन ज़रूरी है.

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रेसलिंग को आज इंडिया में किस मुक़ाम पर देखते हैं?

रेसलिंग आज इंडिया में क्रिकेट बाद नंबर 2 स्पोर्ट है, जबकि क्रिकेट में तो प्रोफेशनलिज़्म बहुत पहले से था, लेकिन अब यह अन्य स्पोर्ट्स में भी आ रहा है. इसी तरह रेसलिंग भी आगे बढ़ रहा है, लोग भी काफ़ी जागरूक हुए हैं. सुविधाएं भी बढ़ी हैं. एक समय था, जब इतनी जागरूकता और फैसिलीटीज़ नहीं थीं, लेकिन अब वैसा नहीं है. हमें मेडल्स भी मिलते रहे हैं. जब किसी और स्पोर्ट्स में ऑलिंपिक्स या अन्य टूर्नामेंट में हमें मेडल्स नहीं मिल रहे थे, तब रेसलिंग ही थी, जहां हमें मेडल्स मिले. इसके बाद अब तो बहुत-से स्पार्ट्स हैं, जो आगे बढ़ रहे हैं. कुल मिलाकर रेसलिंग को आज बेहद सम्मान मिलने लगा है और यह आगे और बढ़ेगा.

आपने हाल ही में के डी जाधव चैंपियनशिप शुरुआत की उसके विषय में बताइए?

के डी जाधव जी जैसा कोई दूसरा नहीं हुआ देश में. वे बेहद सम्मानित हैं और उनका दर्जा बहुत ऊंचा है. वे पहले भारतीय थे, जिन्होंने कुश्ती में हमें ओलिंपिक मेडल दिलाया था. मैं चाहता हूं कि लोग उनके बारे में और जानें, ताकि युवाओं को प्रेरणा मिले, इसलिए मैं दिल से चाहता था कि उनके लिए कुछ कर सकूं, तो यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी उन्हें.

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इंडियन रेसलर्स कितने प्रोफेशनल हैं अगर विदेशी प्लेयर्स से कम्पेयर करें तो…

हम काफ़ी प्रोफेशनल हैं और अब तो हम किसी भी तरह से विदेशी प्लेयर्स से पीछे नहीं हैं. चाहे टेकनीक हो या फिटनेस- हर स्तर पर हम उन्हें तगड़ा कॉम्पटीशन दे रहे हैं और भारतीय पहलवान तो अब दुनियाभर में नाम कमा रहे हैं, सारा जग उनका लोहा मान चुका है.

यहां सुविधाएं कैसी हैं? क्या बदलाव आने चाहिए?

सुविधाएं बहुत अच्छी हैं. प्रशासन की तरफ़ से भी बहुत गंभीरता से लिया जाता है हर चीज़ को, इसलिए पहले जो द़िक्क़तें हुआ करती थीं, वा अब नहीं हैं. बदलाव तो यही है कि हम और बेहतर करें, आगे बढ़ें. जो ग़रीब बच्चे हैं, जिनमें हुनर है, उन्हें ज़रूर बेहतर सुविधाएं दी जानी चाहिए, ताकि वे बेहतर स्पोर्ट्समैन बन सकें. अब तो महिलाएं भी ख़ूब नाम कमा रही हैं रेसलिंग में भी और अन्य खेलों में भी. तो बस, उन्हें बढ़ावा मिलना चाहिए. हम भी अपने स्तर पर प्रयास करते ही हैं.

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आप मोटिवेशनल स्पीकर और स्पोर्ट्स सायकोलॉजिस्ट भी हैं, तो फैंस और आम लोगों को कोई संदेश देना चाहेंगे?

मैं यही कहना चाहूंगा कि जीवन में कभी भी निराश मत होना. उम्मीद का दामन कभी मत छोड़ना. अपने प्रयास हमेशा जारी रखना. मंज़िल ज़रूर मिलेगी. मैं भी अगर अपनी कोशिशें छोड़ देता, मेरी मां भी थक-हरकर नाउम्मीद हो जाती, तो कभी अपनी मंज़िल तक नहीं पहुंचता. बाकी तो ऊपरवाले का साथ और चाहनेवालों की दुआएं तो हौसला देती ही हैं. फैंस ने मुझे काफ़ी प्यार दिया, मैं भी अपनी तरफ़ से जितना संभव हो सके, करने की कोशिश हमेशा करता रहा हूं और करता रहूंगा.

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स्ट्रेस दूर करने के लिए क्या करते हैं?

स्ट्रेस को दूर करने का सबसे बेहतरीन ज़रिया है वर्कआउट. मैं दुखी होता हूं, तो वर्कआउट करता हूं, ख़ुश होता हूं, तो भी वर्कआउट करता हूं. स्ट्रेस को दूर करने का सिंपल सा उपाय है, यहां सब कुछ टेम्प्रेरी है. चाहे दुख हो, तकलीफ़ हो, स्ट्रेस हो… यहां तक कि ख़ुशियां भी टेम्प्रेरी ही हैं. तो जब सब कुछ टेम्प्रेरी है, तो यहां किस चीज़ के लिए दुखी होना, उदास होना. मैं स़िर्फ 500 लेकर मुंबई आया था और आज भगवान की दया से इतना कुछ कर रहा हूं, लेकिन मैं अगर आज भी वापस जाता हूं, तो भी बहुत ख़ुश रहूंगा, क्योंकि इतने लोगों का प्यार मिला, सब कुछ मिला, तो दुख किस बात का. मैं अब यहां हूं, तो ढेर सारे बच्चों की मदद का ज़रिया बन रहा हूं, क्योंकि मैं भी तो उस जगह से आया हूं, जहां रनिंग करते समय पैरों में जूते नहीं होते थे, बस का किराया नहीं होता था, 20 कि.मी. पैदल चलता था नंगे पैर. क्योंकि एक जोड़ा जूते-चप्पल होते थे, जो टूट जाते थे. आज मालिक का दिया हुआ सब है, तो किस बात की शिकायत और किस बात का स्ट्रेस. मैं तो आप सबसे भी यही कहूंगा कि जो नहीं है, उसका स्ट्रेस न लो, जो है, उसके लिए ईश्‍वर को धन्यवाद कहो और ख़ुश रहो.

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आज की लाइफस्टाइल में कैसे पॉज़िटिव और फ़िट रहा जाए उसके लिए आपके स्पेशल टिप्स?

आज की लाइफस्टाइल में फिट और पॉज़िटिव रहने के लिए थोड़ा-सा अपनी लाइफ में डिसिप्लिन लाओ. शेड्यूल बनाओ, घर का खाना खाओ. फैमिली के साथ समय बिताओ. अपने पैरेंट्स के साथ, भाई-बहन, दोस्तों के साथ, पार्टनर के साथ हंसों, खेलो, शेयर करो. माता-पिता का आशीर्वाद लो. छोटी-सी ये ज़िंदगी है, पता नहीं कल क्या हो, कल किसने देखा और ज़िंदगी में किसी को भी कम मत आंको. कहते हैं न कि बंद घड़ी भी दिन में दो बार सही समय दिखाती है. एक प्यारी-सी तितली को देखा है आपने कभी, कितनी रंग-बिरंगी, कितनी चमक होती है उसमें, जबकि उसकी ज़िंदगी बहुत छोटी होती है, फिर भी वो अपने रंगों से लोगों को आकर्षित करते ख़ुशियां देती है. तो हमें ज़िंदगी में किस बात का तनाव? हमें तो इतना कुछ मिला है, बस उसकी कद्र करने का हुनर आना चाहिए. हमेशा ख़ुश रहो, नए-नए अवसरों को क्रिएट करने का प्रयास करो. अगर आज नहीं हुआ, तो कल होगा, कल नहीं, तो परसों हो जाएगा… कहां जाएगा यार, सारी चीज़ें यहीं तो हैं. कई बार आख़िरी चाभी ताला खोल देती है. तो प्रयास जारी रखो.

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Go Go Go Golmaal! लॉजिक नहीं मैजिक होगा ‘गोलमाल अगेन’ में, देखें ट्रेलर (Golmaal Again Official Trailer Out)

Golmaal Again Official Trailer

इस दिवाली लॉजिक नहीं सिर्फ़ मैजिक होगा फिल्म गोलमाल अगेन से. गोलमाल की सीरिज़ की चौथी फिल्म गोलमाल अगेन में रोहित शेट्टी की पुरानी टीम में शामिल हुए हैं दो नए चेहरे परिणीति चोपड़ा और तब्बू. अजय देवगन, अरशद वारसी, तुषार कपूर, श्रेयस तलपड़े और कुनाल खेमू एक बार फिर साथ हैं. फिल्म के पोस्टर पर इस बार इन सबके अलावा नींबू मिर्च भी नज़र आ रहा है. अंदाज़ा लग ही गया होगा आपको, ये नींबू मिर्च भूतों को दूर भगाने के लिए लगाया गया है. रोहित की इस फिल्म में कॉमेडी के साथ-साथ भूत भी होंगे.

देखें फिल्म का ये मज़ेदार ट्रेलर.

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WOW! स्पेस में जाने के लिए NASA में ट्रेनिंग ले रहे हैं सुशांत सिंह राजपूत! (Sushant Singh Rajput to Play Astronaut in his next Film Chanda Mama Door Ke)

Sushant Singh Rajput to Play Astronaut

Sushant Singh Rajput to Play Astronaut

सुशांत सिंह राजपूत अब आंतरिक्ष में जाने के लिए तैयार हैं. सुशांत इसके लिए नासा में ख़ास ट्रेनिंग भी ले रहे हैं. एस्ट्रोनॉट बनने की ये तैयारी सुशांत कर रहे हैं अपनी अगली फिल्म चंदा मामा दूर के लिए, जो कि एक साइंस फिक्शन फिल्म होगी. आइफा अटेंड करने के बाद सुशांत न्यूयॉर्क से सीधे वाशिंगटन डीसी चले गए, जहां नासा में वो आंतरिक्ष यात्री बनने की बारीक़ियां सीख रहे हैं.

Sushant Singh Rajput to Play Astronaut

नासा से कुछ तस्वीरें भी सुशांत ने टि्वटर पर पोस्ट की थी. एक तस्वीर में वो आंतरिक्ष यात्री की ड्रेस में नज़र आ रहे हैं, तो वबीं एक पिक्चर में उन्होंने हाथों में टॉय रॉकेट थाम रखा है.

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Pictures! सना खान की बैकलेस ड्रेस की वजह से शरमा गए सलमान खान, ऐसे लगाया गले

Sushant Singh Rajput to Play Astronaut

ख़बरे हैं कि फिल्म में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और आर माधवन भी होंगे. चंदा मामा दूर के अगले साल 26 जनवरी पर रिलीज़ होगी.Sushant Singh Rajput to Play Astronaut

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फिल्म रिव्यू: एक मां की इमोशनल जर्नी है ‘मॉम’ (Movie Review: Mom)

Movie Review: Mom

फिल्म- मॉम

स्टारकास्ट- श्रीदेवी, नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, अक्षय खन्ना, अदनान सिद्दिकी, सजल अली, अभिमन्यु सिंह

निर्देशक- रवि उद्यावर

रेटिंग- 3.5/5

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मॉम पूरी तरह से श्रीदेवी की फिल्म है. मॉम के रोल में श्रीदेवी के अलावा किसी और अभिनेत्री की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. मॉम की कहानी एक संजीदा विषय पर बनी है. इस फिल्म के साथ श्रीदेवी ने 300 फिल्मों के आंकड़े को छू लिया है. आइए, जानते हैं कैसी है मॉम.

कहानी

मॉम की कहानी है एक मां और उसके बदले की. कहानी शुरू होती है बायोलॉजी की टीचर देवकी (श्रीदेवी) के साथ. देवकी के स्कूल में उसकी सौतेली बेटी आर्या (सजल अली) भी पढ़ती है. आर्या अपनी मां से बिल्कुल प्यार नहीं करती, लेकिन उसकी मां उससे बहुत प्यार करती है. आर्या के स्कूल में पढ़ने वाला एक लड़का मोहित, आर्या को अश्लील मैसेजेस भेज कर परेशान करता है. जब इस बात का पता देवकी को चलता है, तो वह उसे सज़ा देती है. मोहित बदला लेने के लिए एक दिन आर्या को किडनैप कर लेता है और उसका रेप करके सड़क पर फेंक देता है. पुलिस ऑफिसर मैथ्यू फ्रांसिस (अक्षय खन्ना) इस केस की तहकीकात करते हैं. कोर्ट केस में सबूतों के अभाव में मोहित केस जीत जाता है. लेकिन एक मां को ये फैसला नागवार गुज़रता है, वो डिटेक्टिव दयाशंकर (नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी) की मदद लेती है.यहां से शुरू होता है एक मां का बदला.

यूएसपी

फिल्म की कहानी भले ही नई नहीं हो, लेकिन उसे दिखाने का अंदाज़ बहुत ही अलग है. नए डायरेक्टर रवि उद्यावर का निर्देशन काबिले तारीफ़ है. श्रीदेवी की जितनी तारीफ़ की जाए, उतनी कम है. एक मां का अपने बच्चे के लिए इमोशन और फिर उसकी बेटी का रेप करने वालों के लिए ग़ुस्सा, ये सब देखकर आप एक बार फिर श्रीदेवी के अभिनय के फैन हो जाएेंगे. नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का लुक और उनकी ऐक्टिंग देखने के बाद इस बात का एहसास होता है कि फिल्म में अपने अभिनय की छाप छोड़ने के लिए बड़े-बड़े डायलॉग्स या ज़्यादा फ्रेम्स की ज़रूरत नहीं होती है. एक छोटा-सा रोल करके भी आप पूरी फिल्म अपने नाम कर सकते हैं. पाकिस्तानी ऐक्ट्रेस सजल अली और अदनान सिद्दीकी का अभिनय भी लाजवाब है.

देखने जाएं या नहीं

ज़रूर देखने जाएं ये फिल्म. श्रीदेवी की ऐक्टिंग मिस नहीं कर सकते आप. नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को एक नए अंदाज़ में देखने का मौक़ा बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिए. इस वीकेंड एक अच्छी और दमदार मैसेज वाली फिल्म आपका इंतज़ार कर रही है.

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WOW! शाहरुख खान ने सलमान खान को गिफ्ट की कार! (Shahrukh Khan gifts Salman Khan a luxurious car)

Salman-Khan-Shah-Rukh-Khan (1)शाहरुख खान और सलमान खान बेस्ट फ्रेंड्स बन गए हैं, ये बात तो अब हर कोई जानता है! अब दोनों अपनी अस दोस्ती को बड़ी शिद्दत से निभा भी रहे हैं. हाल ही में शाहरुख को सलमान की फिल्म ट्यूबलाइट में कैमियो करते देखा गया था. अब सलमान भी शाहरुख के लिए यही करने वाले हैं. आनंद एल राय की फिल्म में शाहरुख मेन लीड में हैं. सलमान इसी फिल्म के एक गाने में शाहरुख के साथ डांस करते नज़र आएंगे. बिज़ी सलमान ने अपने बिज़ी शेड्यूल से वक़्त निकाला और पहुंच गए शाहरुख के साथ शूट करने.

लेकिन असली ख़बर ये नहीं, बल्कि कुछ और है. जब सलमान सेट पर पहुंचे तब वहां उनका इंतज़ार कर रही थी एक लग्ज़री कार, जो शाहरुख ले आए थे सलमान के लिए. जब शाहरुख को ये पता चला कि सलमान ने उनकी फिल्म के लिए अपनी फिल्म की शूटिंग आगे बढ़ा दी, तब उन्होंने भी दोस्ती का फ़र्ज़ निभाते हुए सलमान को गिफ्ट कर दी एक कार.

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ख़बरें हैं कि जो कार शाहरुख ने सलमान को दी है वो नई लॉन्च हुई है और किसी के पास अब तक नहीं है. ऐसे में ये एक्सक्लूसिव गिफ्ट देखकर सलमान ख़ुश होने के साथ-साथ काफ़ी सरप्राइज़ भी हो गए.

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Fresh! आ गए बादशाह! अजय देवगन की फिल्म ‘बादशाहो’ का दमदार पोस्टर रिलीज़ (‘Baadshaho’ Teaser Poster Out)

Baadshaho

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आ गए बादशाह! अजय देवगन की फिल्म बादशाहो का नया पोस्टर रिलीज किया गया है. बादशाहो के इस नए पोस्टर में अजय देवगन का एक्शन अवतार सामने आया है. इस पोस्टर में अजय देवगन के दोनों हाथों में गन है और चेहरा स्कार्फ से ढंका हुआ है. फिल्म की कहानी साल 1975 के दौरान लगी इमर्जेंसी पर आधारित है. पोस्टर को देखकर फैन्स फिल्म का और भी बेसब्री से इंतजार करने लगे है. अजय देवगन ने फिल्म का नया पोस्टर ट्विटर पर भी शेयर किया है. फिल्म को मिलन लुथरिया ने डायरेक्ट किया है, अजय और मिलन वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई में एक साथ काम कर चुके हैं.

एक्शन थ्रिलर फिल्म बादशाहो में अजय देवगन के साथ इमरान हाशमी, ईशा गुप्ता, इलियाना डिक्रूज़ और विद्दुत जामवाल भी नज़र आएंगे.

पोस्टर को देखकर फिल्म में होने वाले ज़बरदस्त एक्शन का अंदाजा लगाया जा सकता है.

 

 

OMG! बाहुबली 2 ने पहले ही दिन कमाए 100 करोड़, बनाया नया रिकॉर्ड (Baahubali 2 Broke Records Earned 100 Crore On First Day)

बाहुबली 2

बाहुबली 2

बाहुबली 2 ने पहले ही दिन कर दी है सुल्तान और दंगल जैसी फिल्मों की छुट्टी. एक ही दिन में बाहुबली 2 ने कर ली है 100 करोड़ की कमाई कर ली है. फिल्म के हिंदी वर्जन ने ही 35 से 40 करोड़ के बीच कमा लिए हैं. फिल्म समीक्षकों ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर दी है. शुक्रवार के दिन ही लगभग हर थिएटर को 95 फ़ीसदी ऑडियंस मिली थी. सबसे बड़ी बात ये फिल्म किसी फेस्टिवल पर रिलीज़ नहीं हुई है, फिर भी एक दिन में 100 करोड़ कमा कर बाहुबली 2 ने रिकॉर्ड बना दिया है.

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बाहुबली: द बिगनिंग 180 करोड़ में बनी थी और लगभग 600 करोड़ की कमाई फिल्म ने की थी. बाहुबली 2- द कंक्लूज़न की लागत 250 करोड़ की और जिस तरह से पहले दिन ही ये फिल्म 100 करोड़ के क्लब में पहुंची है, उसे देखकर यही लगता है कि ये फिल्म और भी बड़े रिकॉर्ड्स बना सकती है.

रिलीज़ हो गई बाहुबली 2: द कंक्लूजन, कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? मिल गया इसका जवाब (Movie Review: Baahubali 2: The Conclusion)

बाहुबली 2

फिल्म- बाहुबली 2: द कंक्लूजन

स्टारकास्ट- प्रभास, राणा दग्गुबाती, अनुष्का शेट्टी, तमन्ना भाटिया, राम्या कृष्णन

निर्देशक- एस एस राजामौली

रेटिंग- 4.5 स्टार

बाहुबली 2

आख़िरकार एक लंबे इंतज़ार के बाद एस एस राजामौली की फिल्म बाहुबली 2: द कंक्लूजन रिलीज़ हो ही गई. तमिल, तेलुगू, हिन्दी और मलयालम इन चार भाषाओं मे रिलीज़ हुई इस फिल्म को लेकर हर को उत्सुक है, क्योंकि यही वो फिल्म है जिसमें छुपा है उस सवाल का जवाब, जिसका हर किसी को इंतज़ार था. कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? इसका जवाब आपको फिल्म के सेकंड हाफ में मिलेगा. कमाल का स्क्रीनप्ले और हॉलीवुड स्तर की इस फिल्म की कहानी हम आपको नहीं बता सकते हैं, लेकिन इतना ज़रूर कह सकते हैं कि फिल्म इतनी शानदार है कि अगर आप ये फिल्म नहीं देखते, तो यकीनन एक बेहतरीन फिल्म मिस कर जाएंगे आप. फिल्म का आख़िरी के 15 मिनट आपकी सांसें रोक देगा, इतना ज़बरदस्त ऐक्शन शायद ही आपने पहले किसी बॉलीवुड फिल्म में देखा होगा.

देवसेना यानी अनुष्का शेट्टी को अब तक आपने एक छोटे से रोल में बेड़ियों में जकड़े देखा था, लेकिन बाहुबली 2 में वे कई ख़तरनाक़ ऐक्शन सीन्स करती नज़र आ रही हैं. तमन्ना भाटिया ने भी अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है.

अब बात बाहुबली और भल्लालदेव यानी प्रभास और राणा दग्गुबाती की, एक बार दोनों दमदार, पहले से ज़्यादा फिट नज़र आ रहे हैं. राम्या भी अपने किरदार में बेहतरीन लग रही हैं. फिल्म का वीएफएक्स हॉलीवुड लेवल का है. एडिटिंग से लेकर बैकग्राउंड स्कोर, सिनेमेटोग्राफी, फिल्म का संगीत सब कुछ परफेक्ट है.

FILM REVIEW: एक बार देखी जा सकती है ‘द गाज़ी अटैक’ (MOVIE REVIEW: The Ghazi Attack)

The Ghazi Attack Review

फिल्म- द गाज़ी अटैक (The Ghazi Attack)

स्टारकास्ट- राणा दग्गुबाती, ताप्सी पन्नु, के के मेनन, अतुल कुलकर्णी, ओमपुरी.

निर्देशक- संकल्प रेड्डी

रेटिंग- 3 स्टारThe Ghazi Attack Review

कहानी

द गाज़ी अटैक भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध पर आधारित है. समंदर में हुए इस युद्ध के बारे में कम ही लोग जानते हैं. फिल्म की शुरुआत होती है बिग बी की आवाज़ से, जो इस लड़ाई के बारे में जानकारी देते हैं. कहानी साल 1971 में जब भारतीय नौसेना के सबसे दमदार आईएनएस विक्रांत को नुक़सान पहुंचाने के लिए पाकिस्तान समुद्र के रास्ते अपनी पनडुब्बी ‘गाज़ी’ को भेजता है. नौसेना चीफ़ वी पी नंदा (ओमपुरी) ‘सर्च लैंड’ ऑपरेशन का गठन करते हैं, जिसकी ज़िम्मेदारी सौंपी जाती है एस 21 पनडुब्बी के कप्तान रणविजय सिंह (के के मेनन) और लेफ्टिनेंट कमांडर अर्जुन (राणा डग्गुबाती) को. कैसे ये लोग मिलकर पाकिस्तान की पनडुब्बी का नामोनिशां मिटा देते है, इसी पर आधारित है ये फिल्म.

फिल्म की यूएसपी

फिल्म की कहानी ही इस फिल्म की यूएसपी है, क्योंकि ये एक ऐसे युद्ध पर बनी है, जिसके बारे में लोग ज़्यादा जानते नहीं है, इसलिए कहानी में दिलचस्पी बनी रहती है. संकल्प रेड्डी का डायरेक्शन भी अच्छा है. फिल्म में कोई गाना नहीं है और बिल्कुल सही भी है, क्योंकि फिल्म में किसी गाने के लिए कोई जगह नहीं है.

के के मेनन और ओमपुरी जैसे टैलेंटेड ऐक्टर्स की ऐक्टिंग फिल्म को बांधे हुए रखती है. राणा डग्गुबाती भी अपने रोल के साथ न्याय कर रहे हैं. फिल्म में ताप्सी का रोल भले ही छोटा है, लेकिन दमदार है, ताप्सी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वो अच्छी ऐक्ट्रेस हैं.

देखने जाएं या नहीं?

ज़रूर जाएं, एक बार ये फिल्म देखी जा सकती है. आपकी जेब पर बिल्कुल भारी नहीं पड़ेगी द गाज़ी अटैक.

– प्रियंका सिंह

‘काबिल’ की स्क्रिनिंग पर भी सुज़ैन ने दिया ऋतिक का साथ (Sussanne Khan joins Hrithik Roshan on Kaabil screening)

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सुज़ैन खान पहुंची काबिल ऋतिक रोशन से मिलने. जी हां, इन दिनों ऋतिक और सुज़ैन को जब भी मौक़ा मिलता है, दोनों एक-दूसरे को कंपनी देने पहुंच जाते हैं. अभी कुछ दिनों पहले ऋतिक के बर्थ डे पर दोनों ने साथ अच्छा टाइम बिताया, तो वहीं अब वो अपने दोनों बच्चों के साथ ऋतिक और यामी गौतम स्टारर फिल्म काबिल की स्पेशल स्क्रिनिंग पर पहुंचीं. सुज़ैन ने ऋतिक को गले लगाकर इस फिल्म के लिए बधाई भी दी.

Eternal sunshine of the spotless mind… so so so proud of you.. ???❤? #kaabil #sacrecoeur

A photo posted by Sussanne Khan (@suzkr) on

सुज़ैन और ऋतिक भले ही अलग हो गए हों, लेकिन एक अच्छे दोस्त की तरह वो हमेशा उन्हें सपोर्ट करती हैं. देखें तस्वीरें.

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Finally! जब मिल बैठेंगे तीन यार! (Akshay Kumar, Salman Khan and Karan Johar to come together for a film)

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एक बार फिर मिल बैठेंगे तीन यार, सलमान खान, अक्षय कुमार और करण जौहर साथ होंगे एक ही फिल्म में. तीनों इतने एक्साइटेड थे साथ में काम करने को लेकर कि तीनों ने ही अपनी ख़ुशी टि्वटर पर जता दी.

अक्षय कुमार ने लिखा, “सलमान और करन जैसे दोस्तों के साथ एक फिल्म में साथ काम कर रहा हूं. 2018 में रिलीज़ होने वाली इस फिल्म में मैं मुख्य भूमिका में हूं.”

Coming together for a film produced by friends, @beingsalmankhan and @karanjohar, starring me! Out in 2018.

A photo posted by Akshay Kumar (@akshaykumar) on

सलमान और अक्षय मुझसे शादी करोगी और जानेमन जैसी फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं.
सलमान ने भी ट्वीट करते हुए कहा, “एक ऐसी फिल्म के लिए हाथ मिलाया है, जिसमें अक्षय हीरो हैं और इसे मैं करन के साथ प्रोड्यूस कर रहा हूं.”

करण सलमान के साथ कुछ कुछ होता है में काम कर चुके हैं. उन्होंने ने भी ट्वीट में कहा, “एक अच्छा अनुभव होता है, जब दोस्त एक ख़ास फिल्म के लिए साथ आते हैं.”

चलिए ये तीनों तो बेहद एक्साइटेड हैं साथ काम करने के लिए, तभी साल 2018 में रिलीज़ होने वाली फिल्म को लेकर तीनों इतनी बातें कर रहे हैं. यक़ीनन इन तीनों के फैन्स भी बेताब होंगे इस तीनों को एक फिल्म में साथ देखने के लिए.

असली दंगल की रियल धाकड़ छोरी रितु फोगट (Wrestling Is My Identity- Ritu Phogat)

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कुछ दायरों को पार करना इतना सहज भी नहीं होता, लेकिन उनसे परे जाकर, जब सारे जहां को जीतने का जज़्बा दिल में घर कर जाता है, तो हर बंदिश को तोड़ना आसान लगने लगता है. कुछ ऐसी ही बंदिशों को तोड़कर दुनिया को अपने अस्तित्व का लोहा मनवाया है फोगट सिस्टर्स ने. महावीर सिंह फोगट ने अपनी बेटियों को दुनिया से लड़ने का हौसला दिया और उनकी बेटियों ने उनका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया. यही वजह है कि महावीरजी से प्रभावित होकर कुश्ती जैसे विषय पर दंगल फिल्म बन रही है.
पहलवानी एक ऐसा क्षेत्र है, जहां मर्दों का ही दख़ल माना जाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में गीता, बबीता, रितु, विनेश से लेकर साक्षी मलिक तक ने पहलवानी के जो दांव दिखाए हैं, उससे दुनिया स्तब्ध है. कुश्ती, पहलवानी, दंगल, महिलाओं का इसमें दख़ल… इन तमाम विषयों पर महावीर फोगट की बेटी रितु फोगट क्या कहती हैं, आइए जानते हैं-

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आपके पिताजी पर फिल्म बन रही है, क्या ख़ास व अलग महसूस कर रही हैं?
ज़ाहिर है कि अच्छा लग रहा है. हमारे पापा ने हमें बहुत हौसला दिया है. हमारे परिवार को कुश्ती को और ख़ासतौर से लड़कियों को इस क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए जो भी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं, उनसे गर्व महसूस होता है. इसके अलावा इस फिल्म में बाप-बेटी के रिश्ते को जिस तरह से दर्शाया जाएगा, वो भी काबिले तारीफ़ है. इससे बेटियों को काफ़ी हौसला भी मिलेगा और हमारे समाज में बेटियों के प्रति जो भी नकारात्मक सोच है, उसमें ज़रूर बदलाव आएगा. हम जैसे स्पोर्ट्स पर्सन के लिए आख़िर दंगल यानी कुश्ती ही पहचान है.

एक लड़की होने के नाते कितना मुश्किल था कुश्ती जैसे प्रोफेशन को अपनाना?
सच कहूूं तो मुझे इतनी मुश्किल नहीं हुई, क्योंकि हमारे पापा ने कोई मुश्किल आने ही नहीं दी. अगर समाज व परिवार के तानों की भी बात हो, तो उन्होंने सब कुछ ख़ुद सुना, ख़ुद झेला, ताकि हम पर कोई आंच न आए. सबसे वो ख़ुद लड़े. साथ में मेरी बड़ी बहनें भी थीं, तो उनका भी सपोर्ट था मुझे.

अगर बात करें दंगल मूवी की, तो आमिर ख़ान को मिस्टर परफेक्शनिस्ट कहते हैं, आपके परिवार के साथ उन्होंने किस तरह समय बिताया और उनका कमिटमेंट देखकर आपको कैसा लगा?
उनसे पहली बार जब मुलाक़ात हुई, तो यह लगा ही नहीं कि हम इतने बड़े स्टार से मिल रहे हैं. बहुत ही सहज और सिंपल हैं. अपने काम के प्रति ग़ज़ब का समर्पण है उनमें. हालांकि हम तो ज़्यादा नहीं मिले उनसे, पापा के साथ ही अधिक बातचीत होती थी, लेकिन जितनी बार भी मिले, हमें उनकी सहजता ने बहुत प्रभावित किया, क्योंकि हमें वो बेहद कंफर्टेबल महसूस करवाते थे.

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रेसलिंग जैसे खेल को बतौर प्रोफेशन चुनना कितना टफ होता है और कितने अनुशासन व ट्रेनिंग की ज़रूरत होती है?
ट्रेनिंग व अनुशासन बहुत ही ज़रूरी है और सच कहूं, तो पापा बहुत ही स्ट्रिक्ट होते हैं ट्रेनिंग के टाइम पर. सुबह 3.30 बजे उठना, एक्सरसाइज़ और प्रैक्टिस करना इतना थका देता है कि कभी-कभी उठने की भी हिम्मत नहीं रहती. लेकिन यह ज़रूरी है, ताकि हमें अपना स्टैमिना पता रहे और हम उसे बढ़ा सकें.

डायट और फिटनेस के लिए क्या ख़ास करना पड़ता है?
डायट तो नॉर्मल ही रहती है, जैसे- दूध, बादाम, रोटी… लेकिन टूर्नामेंट वगैरह से पहले थोड़ा कंट्रोल करना पड़ता है, जिसमें ऑयली, फैटी व स्वीट्स को अवॉइड करते हैं.

अपनी हॉबीज़ के बारे में बताइए?
मुझे तो कोई ख़ास शौक़ नहीं है, बस कुश्ती ही मेरा शौक़ भी है और जुनून भी. हां, खाली समय में पंजाबी गाने सुनती हूं या फिर कभी-कभार ताश भी खेल लेती हूं.

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उन लड़कियों से क्या कुछ कहना चाहेंगी, जो इस क्षेत्र में या अन्य खेलों में अपना भविष्य तलाशने की चाह रखती हैं?
चाहे किसी भी क्षेत्र में हों या कोई भी हो, लगन व मेहनत का कोई पर्याय नहीं है. सबमें टैलेंट होता ही है, लेकिन उस टैलेंट को मंज़िल तभी मिलती है, जब आप मेहनत और लगन से अपने लक्ष्य को पाने में जुटते हैं.

कोई सपना, जो रोज़ देखती हैं या कोई अधूरी ख़्वाहिश?
एक ही ख़्वाहिश है- ओलिंपिक्स में गोल्ड!

अन्य खेलों के मुकाबले आप रेसलिंग को कहां देखती हैं?
यह सही है कि रेसलिंग को अब काफ़ी बढ़ावा मिल रहा है, लेकिन यदि अन्य खेलों की तरह पहले से ही इसे थोड़ा और गंभीरता से लिया जाता, तो इसमें अपना करियर बनाने की चाह रखनेवाली लड़कियों को काफ़ी प्रोत्साहन मिलता. लेकिन देर आए, दुरुस्त आए.

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आपकी बहनें आपको किस तरह से इंस्पायर करती हैं? क्या आप सबके बीच आपस में कोई कॉम्पटीशन की भावना है या इतने सारे स्टार्स एक ही परिवार में हैं, तो अपनी अलग पहचान बनाना चुनौतीपूर्ण लगता है?
जी नहीं, ऐसा कुछ भी नहीं है. मेरे पापा और सिस्टर्स ने हमेशा मुझे सपोर्ट किया है, उन्हीं को देखकर सीखा है सब. हम सब एक दूसरे का सपोर्ट सिस्टम हैं, परिवार से ही तो हौसला मिलता है.

फिल्हाल दंगल मूवी रिलीज़ हो चुकी है और लोगों द्वारा काफ़ी पसंद भी की जा रही है… रितु ने भी अपना स्पेशल रिव्यू सोशल मीडिया पर शेयर किया है…

– गीता शर्मा