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पहला अफेयर: एक ख़ूबसूरत रिश्ता (Pahla Affair: Ek Khoobsurat Rishta)

Pyaar Ki Kahaniya

पहला अफेयर: एक ख़ूबसूरत रिश्ता (Pahla Affair: Ek Khoobsurat Rishta)

रात के अंधेरे में शून्य में ताकती निगाहें… रेलगाड़ी के पहियों की आवाज़ें… जाने क्यों आज मिलकर स्मृतियों में दबी पड़ी हुई परतों को उधेड़कर चलचित्र की भांति चलने लगी थी और विक्रम का मन अपने अतीत को लेकर सोचने लगा… इस दुनिया में कोई ऐसा भी था, जो उसके दर्द को हमेशा उससे पहले ही महसूस कर लेता था. दुनिया में विक्रम ने स़िर्फ उसे ही चाहा और उसके सिवा उसने किसी और की तरफ़ मुड़कर भी नहीं देखा. श्रुति नाम था उसका. दुनिया में सबसे ख़ूबसूरत रिश्ता दोस्ती का होता है और उनका आपस में ऐसा ही रिश्ता था और यह दोस्ती की मिठास में डूबा हुआ था. उनकी वफ़ाएं हमेशा एक-दूसरे के साथ थीं.

श्रुति के साथ कॉलेज में विक्रम का यह तीसरा वर्ष था. हर वर्ष की तरह इस साल भी उनके कॉलेज में वार्षिक समारोह का बड़ा शानदार आयोजन किया जा रहा था, जिसमें उन दोनों को भी भाग लेना था. लेकिन इस बार एक हास्य नाटक में दोनों को 60-65 वर्ष के उम्र के फूफा-फूफी का क़िरदार निभाना था, जिसे करने के लिए कॉलेज में कोई और तैयार नहीं था.

यही वजह थी कि दोनों को अपनी सबसे प्रिय क्लास टीचर सुश्री लता मायकेल के विशेष अनुरोध पर यह रोल करना पड़ा. नाटक के समय दोनों ने अपने रोल्स को इस तरह जीवंत कर दिया था कि पूरे कॉलेज में उनकी चर्चा होने लगी. फिर जब उनकी क्लास के छात्र-छात्राएं श्रुति को ‘फूफी’ कहकर पुकारने लगे, तो इससे नाराज़ होकर श्रुति ने टीचर से इसकी शिकायत कर दी. टीचर ने क्लास के सभी स्टूडेंट्स की परेड ली और सबको आदेश दिया कि जो भी श्रुति को ‘फूफी’ कहते हैं, अपनी-अपनी जगह पर खड़े हो जाएं. इस पर विक्रम को छोड़कर सभी खड़े हो गए.

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टीचर ने पूछा, “विक्रम, तुम श्रुति को ‘फूफी’ कहकर नहीं चिढ़ाते, क्यों?” तब विक्रम ने जवाब दिया, “क्योंकि मैं ‘फूफा’ बना था.” इस पर पूरी क्लास ठहाका लगाकर हंस पड़ी. पूरा रूम ठहाकों से गूंज रहा था और अचानक श्रुति का गुलाबी चेहरा मारे शर्म के लाल होता चला गया… और फिर श्रुति की हालत देख विक्रम मन ही मन शर्मिंदा हुआ. वो अपनी प्रिय दोस्त का सम्मान भी करता था. दोनों में कभी भी किसी भी बात को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ था. एक-दूसरे पर उनका अटूट विश्‍वास था.

उन दोनों के परिवार भी मध्यमवर्गीय थे… आज दोपहर में विक्रम की मां ने उसे फोन पर बताया था कि श्रुति के घरवाले श्रुति का रिश्ता लेकर कल उनके घर आनेवाले हैं. अर्थात् उनकी यह दोस्ती अब प्यार व शादी में बदलनेवाली है. इससे पहले विक्रम ने कभी सोचा ही कहां था कि वह श्रुति ही होगी, जो एक दिन उसकी जीवनसंगिनी बनेगी.

अचानक रेलगाड़ी के ब्रेक लगने से उसकी तंद्रा भंग हुई… उसका शहर आ गया था…

शायद प्यार का फूल तो कहीं पनप चुका था… जिसे दोनों दोस्ती की गहरी भावना के बीच महसूस नहीं कर पाए थे, लेकिन दूसरों ने उन्हें इसका एहसास दिला दिया था… उनके पहले प्यार को मंज़िल मिल रही थी, इससे ख़ूबसूरत रिश्ता और क्या हो सकता था.

– प्रांशु राजवानी

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पहला अफेयर: उड़ती हवा का वो झोंका जीना सिखा गया (Pahla Affair: Udti Hawa Ka Wo Jhonka Jeena Sikha Gaya)

Pyar Ki Kahani
पहला अफेयर: उड़ती हवा का वो झोंका जीना सिखा गया (Pahla Affair: Udti Hawa Ka Wo Jhonka Jeena Sikha Gaya)

 

उससे मेरी मुलाक़ात तब हुई, जब मैं जीवन में निराशा के दौर से गुज़र रही थी. मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता नहीं मिली, मेरे सपने चकनाचूर हो गए. एक डॉक्टर की बेटी को ही मेडिकल में एडमिशन नहीं मिले, तो लोग क्या कहेंगे, यही सोचकर जीवन को समाप्त करने के लिए अस्पताल की छठी मंज़िल पर चढ़ गई. कूदने के लिए जैसे ही कदम बढ़ाया, एक आवाज़ से टकराई, “कोहरे की गाढ़ी चादर अगर सूरज को कुछ देर ढक लेती है, तो न कोहरा महान बनता है और न ही सूरज की शक्ति क्षीण होती है. कुदरत ने सभी को अवसर दिए हैं और वह आज़माइश भी करती है, लेकिन हक़ीक़त तो हक़ीक़त है, दुख-सुख, अच्छे-बुरे… ज़िंदगी जैसी भी मिले, उसके हर लम्हे को एंजॉय करो.”

“कौन हो तुम?”

“एक हवा का झोंका.”

जवाब देकर वह चला गया, पर मेरे दिल पर दस्तक दे गया. आत्महत्या का ख़्याल तो जाने कहां गुम हो गया, रातभर उसके बारे में सोचती रही. उसके ख़्यालों में खोई हुई रात गुज़री. दूसरे दिन वह स़फेद कोट पहनकर मरीज़ों को हिदायत दे रहा था… “दवाई समय पर खाओ, ऐसे एक्सरसाइज़ करना… खाने में ये खाना समझे…”

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पापा ने शायद नया डॉक्टर अपॉइंट किया है. उसकी आवाज़ में दीवानगी घुली हुई थी, जो मुझे दीवाना बनाकर उसकी तरफ़ खींच रही थी. दिन हो या रात, क्लीनिक में उनके हाथ बंटाने के बहाने मैं वहां बनी रहती. वो अपरिचित कभी मुझे ड्रेसिंग करता मिलता, कभी किसी बच्चे के साथ खेलता हुआ, कभी किसी बुज़ुर्ग के साथ किसी चुटकुले पर हंसता हुआ या तितली के पीछे भागता दिखाई देता. एक ऐसा ज़िंदादिल इंसान, जो अपने चारों ओर हंसी की चादर ओढ़े रहता. उससे भला दिल कैसे न लगता. उसने ज़िंदगी के प्रति मेरा नज़रिया ही बदल दिया था. उसने ही असफलता को सफलता में बदलने की सलाह दी और इस बार मैं सफल हो गई.

उस दिन पापा ने पूछ ही लिया इस परिवर्तन के पीछे क्या राज़ है? मैंने भी दिल का हाल पापा को बता दिया. पापा एकदम गंभीर हो गए. फिर बोले, “मैं भी बहुत ख़ुश होता ऐसा दामाद पाकर, पर मेरे बच्चे, वो कैंसर पेशेंट है. ख़ुश रहने के लिए वह कभी बच्चा, कभी डॉक्टर और न जाने क्या-क्या रूप धरता है. उसके जीवन के कुछ ही दिन शेष हैं.”

मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई. मैं जिसे डॉक्टर समझती थी, वो मरीज़ निकला. मेरे प्यार की इतनी कम उम्र, अभी-अभी तो सीखा था कि… मैं क्या करूं यही सोच रही थी कि ख़बर मिली हवा का झोंका अब नहीं रहा. मैं टूट गई. तेहरवीं की रस्म पर पापा मुझे उसके घर ले गए, उसकी तस्वीर पर स़फेद फूलों की माला चढ़ी हुई थी. वह तस्वीर में भी खिलखिला रहा था. ऐसा लगा जैसे मुझे कह रहा हो कि इस मासूम खिलखिलाहट में मेरे प्यार को हमेशा अपने मन और जीवन में संभालकर रखना और यूं ही चहचहाते रहना. उस रोज़ मैंने अपने दामन में प्यार की मीठी ख़ुशबू को ताउम्र के लिए समेट लिया.

20 वर्ष गुज़र गए. आज भी उसके लबों की मुस्कुराहट मेरे मन में बसी है. उसकी हंसी को उसी के अंदाज़ में डॉक्टर बनकर दूसरों के जीवन में बिखेरने की कोशिश में हूं. जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव आए, पर उसके द्वारा सुझाया गया हल जीवन में पतवार बन गया. ओ उड़ती हवा के झोंके, तुम्हारी कमी को कोई पूरा न कर सका, पर मैंने जीवन के हर लम्हे में तुम्हें पा लिया.

– शोभा रानी गोयल

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पहला अफेयर: तुमसा कोई न मिला (Pahla Affair: Tumsa Koi Na Mila)

Pyar Ki Kahani

पहला अफेयर: तुमसा कोई न मिला (Pahla Affair: Tumsa Koi Na Mila)

वो ख़्वाब था बिखर गया, ख़्याल था मिला नहीं, मगर ये दिल को क्या हुआ… ये क्यों बुझा, पता नहीं… हरेक दिन उदास दिन, तमाम शब उदासियां… किसी से क्या बिछड़ गए कि जैसे कुछ बचा नहीं… जीवन से पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद भी यादों की रहगुज़र पर जलता एक दीया है पहला प्यार, जिसकी झिलमिलाती यादों में कसक होती है, जो तन्हाई में दिल को उदास कर देती है, तो महफिल में भी नज़रें किसी को तलाशने लगती हैं. सब होने के बाद भी कुछ खोने का एहसास होता है. वो जज़्बात, जिन्हें इज़हार की मोहलत न मिली, जहां नज़रों ने नज़रों की ज़ुबां से दिल की बात सुन ली, लेकिन जब दिलों के फैसले दिमाग से किए जाते हैं, तो जुदाई ही मिलती है.

वो बीएससी करके कोचिंग में टीचर थे और मैं बारहवीं की स्टूडेंट, जो फिज़िक्स की प्रॉब्लम सॉल्व करना तो सीख गई, लेकिन दर्दे दिल में उलझकर रह गई. फिर तो जो समझ में आता था, उन्हें देखकर वो भी भूल जाया करती थी. कोचिंग के फेयरवेल पार्टी में उनका सुनाया वो शेर शायद उनके दिल की सदा थी. कुछ ऐसा था उन आंखों में कि मैंने कोचिंग जाना छोड़ दिया और घर पर ही परीक्षा की तैयारी करने लगी. सब ने बहुत समझाया कि परीक्षा तो हो जाने दो, लेकिन मैंने ना कर दिया. आखिरी पेपर के बाद कुछ इरादा करके मैं कोचिंग गई. वहां जाने पर पता चला कि वो तो शाखे-दिल पर गुलों की बहार की आस दिखाकर मुझे तन्हा छोड़कर जा चुके हैं. क्यों? कोई जवाब नहीं.

व़क्त अपनी रफ्तार से चलता रहा. विवाह, परिवार, सर्विस… इन सबके बीच कुछ खो देने का गम उतना ज़्यादा नहीं था, क्योंकि उसे पाया ही कब था. लेकिन फिर भी एक बार मिलने की ख़्वाहिश थी. लगता था महफिल में, मेले में कभी वो मेरे सामने आ जाएंगे. स्कूल में जब भी विदाई पार्टी होती, मुझे वो आखिरी मुलाकात याद आती.

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लेकिन गुज़रा व़क्त इस तरह सामने आ जाएगा, मैंने कभी सोचा न था. स्कूल में नए लेक्चरार से परिचय कराने के लिए प्रिंसिपल ने पूरे स्टाफ को बुलाया. पूरे 12 साल बाद उन्हें देखा था. आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था. वही ग्रेसफुल चेहरा, आंखों में चमक, ठहरा हुआ प्रभावी अंदाज़… नज़रें हटाना मुशिकल था, कहीं फिर खो न जाएं. गुस्सा था या डर, मैं उनके सामने आने से कतराने लगी. लेकिन एक स्कूल में होते हुए ऐसा नामुमकिन था. एक दिन पता चला कि अभी तक उन्होंने शादी नहीं की. क्यों? किसकी खातिर? जानना चाहती थी, लेकिन हम सब एक मर्यादा में बंधे थे.

शिक्षक दिवस पर छात्रों की फरमाइश पर उन्होंने कुछ शेर और गजल सुनाई- कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता… वे कभी दिल के करीब थे. इसलिए उनके दर्द को मैं महसूस कर सकती थी. लेकिन कुछ सवालों के जवाब अभी पाने बाकी थे. अब हम दोस्त बन चुके थे.

“आपने शादी क्यों नहीं की?” एक बार फिर मैं पूछ बैठी.

“तुमसा कोई न मिला.” दिल की बात बताने में बिल्कुल भी नहीं झिझके थे.

“तो चोरों की तरह क्यों चले गए थे?”

“सब कुछ हमारे चाहने से नहीं होता. तक़दीर का फैसला हमें मानना पड़ता है.”

“कायरता को मजबूरी ना कहिए.” मैं गुस्से में बोली.

“तुम जानना चाहती हो, तो सुनो, तुम्हारे भैया मेरे दोस्त थे, फिर भी उनको सच्चाई बताकर तुम्हारा हाथ मांगा था, लेकिन उन्होंने जवाब दिय- ये तुम्हारी मर्ज़ी तक ही ठीक है, यदि मेरी बहन ने हां की, तो उसे गोली मार दूंगा, क्योंकि टीचर का दर्जा हर हाल में सम्मानीय होता है. अगर इस तरह शादियां होने लगीं, तो माहौल ही बिगड़ जाएगा. मैं उनको समझाने में नाकाम रहा, इसलिए खामोशी से चला गया. लेकिन फिर कोई और इस दिल में जगह न बना पाया.”

उनके शब्दों में उनकी बेबसी झलक रही थी, लेकिन अब मैंने उनका जहां मुकम्मल कराने का इरादा कर लिया था. अपनी मर्ज़ी उन्हें बता दी है. ज़िंदगी की ख़ुशियों पर उनका भी हक है. मुझे उम्मीद है कि इस दोस्ती के रिश्ते की वो लाज रखेंगे और इस शादी के लिए ना नहीं कहेंगे. बस, आप सभी की दुआओं की ज़रूरत है.

– शहाना सिद्दीकी

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सुष्मिता सेन की फोटो पर क्यूट रेस्पॉन्स देने से ख़ुद को नहीं रोक पाए रोहमन… क्या अब भी है प्यार? (Sushmita Sen’s Pic With A Baby Evokes A Cute Response from Rohman)

Sushmita Sen’s Pic With A Baby

सुष्मिता सेन की फोटो पर क्यूट रेस्पॉन्स देने से ख़ुद को नहीं रोक पाए रोहमन… क्या अब भी है प्यार? (Sushmita Sen’s Pic With A Baby Evokes A Cute Response from Rohman)

सुष्मिता सेन (Sushmita Sen) और रोहमन शॉल (Rohman Shawl) के बीच अब भी है प्यार? हॉट कपल के रूप में जाने जानेवाले सुष्मिता सेन और रोहमन के बीच पिछले दिनों ब्रेकअप की ख़बर काफ़ी चर्चा में थी. रोहमन की इंस्टाग्राम स्टोरीज़ ने सनसनी फैला दी थी और यह ख़बर जंगल में आग की तरह पूरी इंडस्ट्री और मीडिया में फैल गई थी.

लेकिन शुक्रवार को रोहमन की इंस्टाग्राम स्टोरी कुछ और ही बयां कर रही थी. इसमें रोहमन ने सुष्मिता के लिए प्यार और उनके साथ घर बसाने का क्यूट-सा मैसेज दिया था. रोहमन की इसी स्टोरी को सुष्मिता ने भी अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर पोस्ट किया, जिससे तो यही लग रहा है कि प्यार अभ भी बाकी है.

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Sushmita Sen

इसके अलावा सुष्मिता ने अपनी एक पिक्चर भी शेयर की है, जिसमें वो एक छोटी-सी बेबी के साथ फ्लाइट में नज़र आ रही हैं, उनकी इस पिक्चर पर भी रोहमन से आठ घंटे पहले ही कमेंट किया है कि- माय बेबी विद ए बेबी!

तो प्यार में तो लड़ाई-झगड़ते होते रहते हैं, बस फैंस यही दुआ करते हैं कि ये हॉट कपल यूं ही हॉट बना रहे. हाल ही में सुष्मिता ने एक इंटरव्यू में भी अपने और रोहमन के पहले इंटरेक्शन की बात कही थी कि उनकी मुलाक़ात इंस्टाग्राम पर ही हुई थी और किस तरह से अंजाने में सुष ने रोहमन का मैसेज ओपन कर लिया था और उसके बाद बातों और डेट्स का सिलसिला शुरू हुआ.

 

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बॉडी पर भी दिखते हैं ब्रेकअप के साइड इफेक्ट्स (How Your Body Reacts To A Breakup?)

Breakup Effects
बॉडी पर भी दिखते हैं ब्रेकअप के साइड इफेक्ट्स (How Your Body Reacts To A Breakup?)

शरीर में दर्द होने पर जैसे आप कोई काम सही ढंग से नहीं कर पाते हैं, ठीक वैसे ही दिल के टूटने पर भी दिल सही तरह से काम नहीं कर पाता है. ब्रेकअप का संबंध केवल भावनाओं से ही नहीं होता, शरीर से भी होता है, इसलिए ब्रेकअप (Breakup) के दौरान जब व्यक्ति बुरी तरह से आहत होता है, तो उसका दुष्प्रभाव (Side Effects) मन के साथ-साथ शरीर पर भी इस प्रकार से दिखाई देने लगता है-

आंखों में सूजन: जब दिल दुखी होता है, तो आंखों में आंसू आना लाज़िमी है. लोग पूरी-पूरी रात रोते रहते हैं, जिसके कारण अगले दिन आंखों में सूजन आ जाती है. यहां पर एक दिलचस्प बात बता दें कि ब्रेकअप, तलाक़ या किसी अन्य बात से आहत होने के बाद रोने पर जो आंसू निकलते हैं, वो केवल वॉटरी होते हैं, उनमें नमक की मात्रा बहुत कम होती है, जबकि चोट लगने या अन्य किसी कारण से रोने पर निकलनेवाले आंसुओं में नमक की मात्रा अधिक होती है. दूसरे शब्दों में कहा जाए, तो जब कोई भावनात्मक रूप से आहत होकर रोता है, तो उसकी आंखों में अधिक सूजन आती है.

सीने में दर्द: क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि जब भी आप किसी बे्रकअप और तलाक़ जैसी गंभीर बात से आहत होते हैं, तो आपको ऐसा महूसस होता है, जैसे- सिर घूम रहा है, चक्कर आ रहा है, सांस लेने में तकलीफ़ हो रही है, सीने में हवा पूरी तरह से नहीं पहुंच रही है, जिसके कारण बेचैनी महसूस होती है. इसका कारण है कि भावनात्मक पीड़ा होने के साथ सीने में शारीरिक पीड़ा भी महसूस होती है. कई बार तो ऐसा दर्द महसूस होता है जैसे किसी ने छाती में मुक्का मारा हो या फिर छाती में भारीपन-सा महसूस होता है.

नींद न आना: ब्रेकअप के बाद अधिकतर लोग नींद न आने की समस्या से परेशान रहते हैं, जिसका कारण प्यार में नाकाम होना है. परिणामस्वरूप तनाव बढ़ने लगता है. तनाव बढ़ने के कारण कार्टिसोल का उत्पादन शरीर में बढ़ने लगता है और बॉडी क्लॉक पर भी बुरा असर पड़ता है. इन्हीं कारणों से ब्रेकअप के समय लोगों को नींद नहीं आती है.

मांसपेशियों में दर्द: यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में हुए एक शोध के अनुसार, बेक्रअप के बाद मांसपेशियों में सूजन आ सकती है, सिरदर्द बढ़ सकता है और गर्दन में अकड़न आ सकती है. कई बार पैर भी इतने स्थिर (स्टिफ) हो जाते हैं कि सीढ़ियां चढ़ना दूभर हो जाता है. यहां तक कि थोड़ी दूर पैदल चलना भी मुश्किल होता है. इसके अतिरिक्त इस शोध में यह भी साबित हुआ है कि 23% तलाक़शुदा लोगों को कुछ दिन तक चलने में परेशानी हो रही थी और कुछ लोगों को मांसपेशियों में दर्द हो रहा था.

पाचन तंत्र में गड़बड़ी: ब्रेकअप के बाद मांसपेशियों में दर्द हो सकता है, जिसके कारण शरीर में मौजूद कार्टिसोल हार्मोन की सप्लाई पाचन संबंधी अंगों की तऱफ़ डायवर्ट हो जाती है. जब कार्टिसोल की सप्लाई पाचन संबंधी अंगों की तरफ़ ज़रूरत से ज़्यादा होती है, तो भूख कम होना, डायरिया और पेट में मरोड़ जैसी समस्याएं होती हैं. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में हुए एक शोध के अनुसार, जब आप ब्रेकअप के दौर से गुज़र रहे होते हैं, तो आपका मस्तिष्क भूख मिटानेवाले हार्मोन का उत्पादन अधिक करता है.

वज़न बढ़ना: कुछ लोग जब तनावग्रस्त होते हैं, तो उनका वज़न धीरे-धीरे बढ़ने लगता है. इसका कारण है कि तनावग्रस्त होने पर उनके शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील होने लगती हैं और शरीर इसकी क्षतिपूर्ति करने के लिए अधिक इंसुलिन का उत्पादन करने लगता है. परिणामस्वरूप शरीर में शुगर फैट के रूप में एकत्रित होने लगता है और उनका वज़न धीरे-धीरे बढ़ने लगता है. जब वे ब्रेकअप से आहत होते हैं, तो उस समय उनका मन शुगर और फैटवाली चीज़ें खाने का करता है और इन चीज़ों को खाने से वज़न बढ़ता है.

मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव: एक्सपर्टस का मानना है कि जब आप किसी अपने को खो देते हैं, तो दिल में दर्द के साथ-साथ मस्तिष्क पर भी उसका असर पड़ता है. यानी कि दिल के बुरी तरह से आहत होने पर मस्तिष्क में भी तकलीफ़ होती है.

स्किन संबंधी समस्याएं: ब्रेकअप के बाद तनाव होता ही है. तनाव होने पर शरीर में स्ट्रेस हार्मोन का स्तर काफ़ी बढ़ जाता है, जिसके कारण त्वचा की चमक ख़त्म हो जाती है. अगर आप पहले से ही मुंहासे, सोरायसिस और एग्ज़ीमा जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं से परेशान हैं, तो बे्रकअप के बाद आपकी त्वचा की रंगत और भी ख़राब होने लगती है.

दिल संबंधी परेशानियां: कार्डियोलॉजिस्ट्स का मानना है कि ब्रेकअप के समय व्यक्ति भावनात्मक रूप से टूटा हुआ होता है, इसलिए उस व़क्त उसे हार्ट संबंधी तकलीफ़ या दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा अधिक होता है. इसका कारण है कि ब्रेकअप के दौरान व्यक्ति के शरीर में एंड्रेनालाइन का स्तर बढ़ा हुआ होता है.

इम्यूनिटी कमज़ोर होना: ब्रेकअप के दौरान अक्सर मन में नकारात्मक ख़्याल आते हैं. इन नकारात्मक ख़्यालों के कारण अवसाद, अकेलापन, तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ता है, जिसके कारण इम्यून सिस्टम कमज़ोर पड़ने लगता है और व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ता है.

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Breakup Effects

ब्रेकअप से जुड़े कुछ तथ्य
  • ब्रेकअप के दौरान महिलाएं भावनात्मक रूप से अधिक आहत होती हैं, लेकिन उनकी तुलना में पुरुषों को नॉर्मल होने में अधिक समय लगता है, क्योंकि वे अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं करते.
  • ब्रेकअप से पहले व्यक्ति अपने रिश्ते के प्रति जितना प्रतिबद्ध होता है, रिश्ता टूटने के बाद उसमें बदलाव की संभावना भी उतनी अधिक होती है. यानी बे्रकअप के बाद व्यक्ति अपने आप को पूरी तरह से बदला हुआ महसूस करता है.
  • सोशल मीडिया रिश्तों टूटने, मानसिक व शारीरिक शोषण और तलाक़ का एक प्रमुख कारण बन गया है.

 

ब्रेकअप के बाद कैसे करें अपनी बॉडी को हील?
  1. ब्रेकअप के बाद सबसे पहले अपना फिज़िकल चेकअप कराएं. फिज़िकल चेकअप के दौरान डॉक्टर से पूछें- ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर कितना है? क्या शरीर में रक्तसंचार सुचारू रूप से हो रहा है? कई बार तनाव और अवसाद के कारण इस तरह की समस्याएं हो सकती हैं.
  2. अगर आप किसी भावनात्मक समस्या से परेशान हैं, तो उसे भी अपने डॉक्टर से शेयर करें और उससे निबटने के तरी़के पूछें.
  3. अकेलेपन, अवसाद और तनाव से छुटकारा पाने के लिए किसी अच्छे स्पा में जाकर बॉडी मसाज कराएं. बॉडी मसाज से माइंड और बॉडी दोनों रिलैक्स होती हैं.
  4. ब्रेकअप के बाद बॉडी मसाज कराने से शारीरिक व मानसिक शांति मिलती है. मांसपेशियों का दर्द, सिरदर्द और तनाव दूर होता है. अच्छी नींद आती है और एकाग्रता बढ़ती है.
  5. नकारात्मक विचारों को दूर करने के लिए प्रकृति के क़रीब जाएं.
  6. ब्रेकअप में खाना-पीना छोड़ने की बजाय अपनी डायट पर ध्यान दें और हेल्दी फूड हैबिट्स फॉलो करें.
  7. ब्रेकअप के बाद शरीर में होनेवाले साइड इफेक्ट्स को दूर करने के लिए वर्कआउट करें. वर्कआउट और एक्सरसाइज़ करने से एंड्रॉर्फिन हार्मोन रिलीज़ होता है, जो तनाव और अवसाद को दूर करता है.
  8. योग और प्राणायाम करके अपने अशांत मन को शांत करने का प्रयास करें.
  9. अपने बीते हुए कल को भुलाने के लिए ख़ुद को व्यस्त करें, जैसे- अच्छी किताबें पढ़ें, सकारात्मक सोचवाले दोस्तों के साथ समय बिताएं.
  10. मन और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए डांस, साइकिलिंग, स्विमिंग, फिटनेस क्लास और स्पोर्ट्स खेलें.

– पूनम नागेंद्र शर्मा

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पहला अफेयर: कहीं दूर मैं, कहीं दूर तुम… (Pahla Affair: Kahin Door Main, Kahin Door Tum)

Pyaar Ki Kahaniya

पहला अफेयर: कहीं दूर मैं, कहीं दूर तुम… (Pahla Affair: Kahin Door Main, Kahin Door Tum)

प्रेम, प्यार, रोमांस, इश्क़, मुहब्बत… चाहत से लबरेज़ ये शब्द सुनते ही आंखों में अपने आप कई सपने पलने लगते हैं… गालों पर हया की एक लालिमा-सी छा जाती है… मुझे भी इस इश्क़ के रोग ने छू लिया था. 23 साल की थी मैं. नई-नई नौकरी लगी थी. मेरे साथ ही मेरे सहपाठी अभिनव ने भी जॉइन किया था. अभिनव के विभाग में ही उसका एक

शर्मीला-सा दोस्त था पल्लव. अभिनव से मेरा काफ़ी दोस्ताना व्यवहार था, उसी बीच पल्लव का मुझे चुपचाप देखना, आंखें झुकाकर बातें करना और बहुत ही सली़के से व्यवहार करना बेहद भाने लगा था. पल्लव की यही बातें मुझे बार-बार अभिनव के विभाग की ओर जाने को मजबूर कर देती थीं.

आख़िर मेरी क़िस्मत भी रंग लाई और पल्लव का ट्रांसफर मेरे ही विभाग में हो गया. बेहद ख़ुश थी मैं, हद तो तब हो गई, जब हम दोनों को एक ही प्रोजेक्ट पर काम करने का मौक़ा मिला. अब धीरे-धीरे हमें क़रीब आने का मौक़ा मिला. दोस्ती गहरी हुई और फिर ये दोस्ती प्यार में बदल ही गई. पल्लव ने भी अपने प्यार का इज़हार इशारों-इशारों में कर ही दिया. हां, हमने आपस में कोई वादे नहीं किए थे, पर हमारे प्यार को मंज़िल मिलेगी, यह विश्‍वास हम दोनों को ही था.

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लेकिन नियति पर कब किसी का ज़ोर चला है. मैंने विभागीय परीक्षा दी थी और उसके लिए भी पल्लव ने ही मुझे प्रोत्साहन दिया था. हमने साथ-साथ तैयारी की. दुर्भाग्यवश पल्लव परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाया और मैं पास हो गई थी. विभाग में रिक्त पद होने के कारण मेरा अधिकारी पद पर चयन हो गया था. अगली विभागीय परीक्षा को अभी समय था, मैंने पल्लव का हौसला बढ़ाया, लेकिन अब कार्यक्षेत्र में हमारे बीच दूरी बढ़ गई थी और धीरे-धीरे ये दूरियां हमारे संबंधों में भी बढ़ने लगी थीं. मैंने कई कोशिशें कीं, लेकिन पल्लव के मन में हीनभावना ने घर कर लिया था. वो मुझसे नज़रें चुराने लगा था. दूरी बनाए रखने के प्रयास करने लगा था. कुछ पूछती तो यही कहता कि मैं तुम्हारे लायक ही नहीं.

शायद पल्लव जान-बूझकर मुझसे दूर जाना चाहता था. मेरे सामने दूसरी लड़कियों से बातें करता… मेरा सामना तक नहीं करता था अब वो. मैंने फिर कोशिश की, तो उसने कहा, “मैं चाहता हूं तुम मुझे भूल जाओ, मुझसे घृणा करो, क्योंकि मेरा-तुम्हारा कोई मुक़ाबला नहीं. तुम्हें मुझसे बेहतर जीवनसाथी मिलेगा.”

ख़ैर, घर पर भी मेरी शादी की बातें होने लगी थीं और फिर मैंने भी पल्लव के लिए कोशिशें करनी बंद कर दीं, क्योंकि उसने ख़ुद मुझसे दूर जाने का निर्णय कर लिया था. मेरी शादी हो गई. पति के रूप में बेहद शालीन और प्यार करनेवाला साथी ज़रूर मिला, लेकिन मेरा पहला प्यार तो पल्लव था. कुछ समय बाद पता चला कि पल्लव के पिताजी ने काफ़ी दहेज लेकर एक लड़की से उसकी शादी कर दी. मेरा पहला प्यार दम तोड़ चुका था.

कई वर्षों बाद किसी समारोह में अचानक हमारा आमना-सामना हुआ. साधारण-सी औपचारिक बात के बाद हम दोनों अपनी-अपनी राह
चल दिए…

यूं ही अपने-अपने सफ़र में गुम… कहीं दूर मैं, कहीं दूर तुम… मेरा पहला प्यार स़िर्फ एक छोटे-से मेल ईगो की बलि चढ़ गया था, काश! पल्लव तुमने अपना वो झूठा ईगो छोड़ दिया होता… काश!… लेकिन अब कोई फ़ायदा नहीं यह सोचने का, क्योंकि नियति को यही मंज़ूर था!

– अलका कुलश्रेष्ठ

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पहला अफेयर: ऐसा प्यार कहां? (Pahla Affair: Aisa Pyar Kahan)

 Kahani

पहला अफेयर: ऐसा प्यार कहां? (Pahla Affair: Aisa Pyar Kahan)

कहते हैं, जोड़ियां स्वर्ग में ही तय हो जाती हैं. ईश्‍वर सबके लिए एक जीवनसाथी चुनकर भेजते हैं. पर क्या हमारा सच्चा जीवनसाथी वह होता है, जिसके साथ हम अपना पूरा जीवन बिता देते हैं या फिर वह जिसे कभी हमने अपने लिए चुना था और आज भी दिल में उसके लिए एक ख़ास जगह है? विपुलजी से मैं विद्यालय के शिक्षक पद के नियुक्तिवाले दिन मिली थी, जिसमें मेरा चुनाव अंग्रेज़ी और विपुलजी का चुनाव गणित के शिक्षक के रूप में हुआ था.

जेपीएससी की परीक्षा की तैयारी के लिए गणित में मैं विपुलजी से मदद लिया करती थी. उनकी कुशाग्र बुद्धि और गणित के प्रति समर्पण ने मुझे उनका दीवाना ना दिया. रोज़ मैं विद्यालय समय से पहले पहुंच जाती और स्टाफ रूम में दरवाज़ के पासवाली कुर्सी पर बैठ उनका इंतज़ार करती.

विपुलजी मेरी भावनाओं को काफ़ी पहले समझ चुके थे. एक दिन सबकी नज़र बचाकर मुझे एक लाल गुलाब थमाकर तेज़ कदमों से वो बाहर निकल गए. मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा. अब मेरा ध्यान बच्चों को पढ़ाने में कम और उनकी एक झलक पाने में ज़्यादा लगा रहता.

लेकिन हम अपने प्यार को बाकी शिक्षकों की नज़र से ज़्यादा दिनों तक छिपा नहीं पाए. जब प्रधानाध्यापक को इसकी ख़बर मिली, तो उन्होंने मेरे और विपुलजी समेत सभी शिक्षकों को अपने कमरे में बुलाया और विद्यालय के अध्यापकों द्वारा पालन किए जानेवाले शिष्टाचार के बारे में लंबा-चौड़ा भाषण दिया.

अगले दिन मैं फुफेरी बहन की शादी के लिए एक सप्ताह का अवकाश लेकर चली गई. जब वापस आई, तो पता चला कि विपुलजी दो दिन पहले ही विद्यालय छोड़ चुके हैं.

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मैं सातवें आसमान से सीधे ज़मीन पर आ गिरी. ऐसा लगा मानो शीतल हवाओं की जगह तेज़ आंधियों ने ले ली है. मैं अगले ही दिन उनके घर गई, तो पता चला कि वो आगे की पढ़ाई के लिए बैंगलुरू चले गए हैं. मैं उनसे बात करना चाहती थी, उन्हें समझाना चाहती थी, पर उन्होंने मुझे एक मौका तक नहीं दिया.

काफ़ी मुश्किल से अपने अंदर उमड़ रहे आंसुओं के सैलाब को रोककर बाहर निकली,तो उनके छोटे भाई ने मुझे एक बंद लिफ़ाफ़ा दिया और कहा कि भैया ने आपको देने के लिए कहा था. इसमें गणित के कुछ फॉर्मूले हैं. मैंने घर जाकर वो लिफ़ाफ़ा खोला, तो उसमें गणित के फॉर्मूलों की एक मोटी कॉपी मिली. मुझे उन पर बहुत गुस्सा आया और मैंने कॉपी एक तरफ़ पटक दी. जैसे ही कॉपी पटकी, उसमें से एक चिट्टी गिरी. वो विपुलजी का ख़त था, जिसमें लिखा था- मेरी प्यारी संचिता, मैं जानता हूं कि तुम्हें मुझ पर गुस्सा आ रहा होगा कि इस तरह बिना कुछ कहे-सुने मैं चला आया, लेकिन तुम भी यह अच्छी तरह जानती हो कि हम दोनों में ही वो हिम्मत नहीं कि हम समाज के बंधनों को तोड़कर शादी कर सकें.

मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से तुम्हारी किसी तरह की बदनामी हो, क्योंकि समाज लड़की के माथे पर लगा हल्का-सा दाग़ भी किसी को भूलने नहीं देता. शायद अब और नहीं लिख पाऊंगा. बस ये समझ लो कि मैं परिस्थितियों को समझते हुए आगे बढ़ने या पीछे हटने में विश्‍वास रखता हूं. उम्मीद है, तुम मुझे समझ पाओगी.

उस समय तो मुझे विपुलजी पर बहुत गुस्सा आया और ख़ुद पर तरस, लेकिन आज समझ गई हूं कि वो सही थे. मैं जो आज इज़्ज़त की ज़िंदगी जी रही हूं, वो विपुलजी की ही दी हुई है. मैं आज अपने पति और बच्चों के साथ ख़ुश हूं और इसमें विपुलजी का बहुत बड़ा त्याग व योगदान है.

– ज्योति प्रसाद

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इन डेली डोज़ेस से बढ़ाएं रिश्तों की इम्यूनिटी (Daily Doses To A Healthy Relationship)

रिश्तों (Relationships) को बेहतर बनाए रखने का कोई लिखा-पढ़ा फॉर्मूला तो नहीं है, क्योंकि हर इंसान और हर किसी की सोच अलग होती है. पर हां, कुछ बातें ज़रूरी होती हैं, जिनसे आपके रिश्ते बेहतर होंगे, उनमें नई उमंग और ऊर्जा जागेगी, जिससे उनकी इम्यूनिटी तो बढ़ेगी ही, साथ ही आप दोनों का प्यार व अपनापन भी बरक़रार रहेगा. तो क्या हैं वो डेली डोज़ेस (Daily Doses), जो आपके रिश्ते को बनाएंगे इम्यून, आइए जानें.

 Relationship Dose
थोड़ी आज़ादी दें

रिश्तों में एक-दूसरे को कंट्रोल करने की कोशिश कभी न करें. इससे घुटन होने लगती है. हमेशा एक-दूसरे को स्पेस दें और इतना विश्‍वास बनाएं कि पार्टनर बिना हिचके सब कुछ शेयर कर सके. हर बात पर टोकना, हर बात पर सवाल या हर बार यह अपेक्षा कि आप जैसा चाहें, पार्टनर वैसा ही करे और आपके अनुसार ही ढले… यह सोच ग़लत है. उसके अलग व्यक्तित्व को मानें और सम्मान दें.

गेम्स न खेलें, मैनुपुलेशन से बचें

बहुत से रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स भी आपको कहते मिलेंगे कि पावर गेम्स खेलें, ऐसा करें, तो पार्टनर कंट्रोल में रहेगा, वैसा करेंगे, तो दिन-रात आपको ही याद करेगा. ऐसा कभी न करें. अगर आप जान-बूझकर पार्टनर को इग्नोर कर रहे हैं, ताकि उनका अटेंशन पा सकें, तो यह ग़लत है. हो सकता है, थोड़े समय के लिए आपको पार्टनर का अटेंशन मिल जाए, लेकिन लंबे समय तक यह करेंगे, तो पार्टनर की दिलचस्पी आप में कम हो जाएगी. रिश्ते में ठंडापन व ग़लतफ़हमियां बढ़ेंगी.

पार्टनर की ख़ुशियों को भी सम्मान दें

भले ही आप एक-दूसरे से कितना ही प्यार करते हों, पर प्यार के साथ एक-दूसरे को सम्मान भी दें और ख़ासतौर से पार्टनर की ख़ुशियों का भी ख़्याल रखें. कभी-कभी अपनी ख़ुशियों को छोड़कर पार्टनर की ख़ुशी के लिए कुछ करने में बुराई नहीं. इससे आपके रिश्ते की इम्यूनिटी ही बढ़ेगी. पार्टनर को भी लगेगा कि आपको उनकी फ़िक्र है और जब उनकी बारी आएगी त्याग या समर्पण की, तो वो भी आपकी ख़ुशियों का ख़्याल रखने से पीछे नहीं हटेंगे. दूसरी तरफ़ पार्टनर की ख़ुशी व उसके सम्मान के लिए नकारात्मक बातों और चीज़ों पर से ध्यान हटाएं. जी हां, यदि पार्टनर की कोई आदत या बात आपको पसंद नहीं, तो बार-बार उसे टोकने या बदलने को कहने की बजाय उसे अवॉइड करें या फिर प्यार से अलग तरह से कहें. यह सोचें कि कोई भी परफेक्ट नहीं होता, आप भी नहीं हैं, तो फिर पार्टनर से इतने परफेक्शन की उम्मीद क्यों? बेहतर होगा पार्टनर की अच्छी आदतों और बातों को तवज्जो दें, उसकी प्रशंसा करें, उसे मोटिवेट करें. ये बातें आपके रिश्ते को इम्यून करेंगी.

मर्यादा तय करें

यह आप दोनों के व आपके रिश्ते के सम्मान को बनाए रखने के लिए भी ज़रूरी है. आप अपने पार्टनर को यह समझाएं कि उनकी किन बातों को आप स्वीकार कर सकते हैं और किन बातों को नहीं. पर यह बात झगड़े के दौरान न कहें. आपस में बैठकर बात करें. आराम से बोलें, आवाज़ का वॉल्यूम कम रखकर बात करें. ग़ुस्से में बात बिगड़ सकती है. एक बार पार्टनर समझ जाएंगे कि उन्हें क्या नहीं करना है, तो वो आगे से ध्यान रखेंगे.

अपनी ग़लती मानें

ग़लती किसी से भी हो सकती है. अगर आपकी ग़लती पकड़ी गई है या न भी पकड़ी गई हो, तो भी जहां आपको महसूस हो कि आप ग़लत हैं, उसे स्वीकार लें. बेवजह का ईगो रिश्तों को ख़त्म कर देता है. सॉरी बोलने में कोई छोटा नहीं हो जाता.

दिन की शुरुआत सकारात्मकता से करें

आपकी पॉज़िटिविटी पार्टनर को भी बढ़ावा देगी. सुबह-सुबह हड़बड़ाहट में ग़ुस्सा करने से काम नहीं संभलेगा. बेहतर होगा कि उन क्षणों को भी सकारात्मकता से स्वीकारें और धैर्य से मुस्कुराते हुए काम करें. इससे आप दोनों का ही मूड दिनभर रिफ्रेश रहेगा.

पार्टनर को इग्नोर न करें

भले ही आपके रिश्ते को कितना ही समय हो गया हो, पर इग्नोरेंस किसी को भी बर्दाश्त नहीं होगा. काम के बीच पार्टनर को न भूल जाएं. बीच-बीच में कॉल या मैसेज करके हालचाल या हल्की-फुल्की बातचीत करें. रोमांटिक बातें करें, छेड़छाड़ करें. यह डेली डोज़ आपको कनेक्टेड रखेगा.

सरप्राइज़ दें

यह ज़रूरी नहीं कि स्पेशल ओकेज़न पर ही सरप्राइज़ प्लान किया जाए, बल्कि सरप्राइज़ प्लान करके आप उस दिन को स्पेशल बना सकते हैं और अपने पार्टनर को स्पेशल फील करा सकते हैं. आप कोई गिफ्ट ले जाएं, जो आपका पार्टनर बहुत समय से लेना चाह रहा हो या आप मूवी टिकट्स ले आएं, डिनर प्लान करें… आप अपनी क्रिएटिविटी के अनुसार कोई भी सरप्राइज़ प्लान कर सकते हैं. उन बातों को याद करें या उनकी चर्चा करें, जो आपको एक-दूसरे में अच्छी लगती हैं: पुरानी या कोई नई याद, कुछ खट्टी-मीठी बातें, अपनी पहली मुलाक़ात या शादी का अल्बम… इनमें से कोई भी चीज़ आपके रिश्ते को इंस्टेंट फ्रेशनेस देती है. रिश्ते की इम्यूनिटी के लिए बहुत ज़रूरी है कि प्यारभरे ये डोज़ भी समय-समय पर एक-दूसरे को आप देते रहें.

माफ़ करना सीखें

पार्टनर की ग़लतियों पर बार-बार उसे शर्मिंदगी महसूस कराना रिश्ते को कमज़ोर करता है. बेहतर होगा पुरानी बातों को भूलकर आगे बढ़ा जाए. माफ़ करना सीखें. हर किसी से ग़लती हो सकती है, ऐसे में माफ़ करने से ही रिश्ते बेहतर होते हैं, ग़लतियों को याद करके या याद दिलाकर रिश्तों को इम्यून नहीं किया जा सकता.

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Couple Goals
पार्टनर की पसंद को महत्व दें

कुछ चीज़ें जो आपके लिए उन्हें अच्छी लगती हों, वो करें, जैसे- उनकी पसंद का कलर पहनें, उनकी पसंद का टीवी प्रोग्राम उनके साथ देखें या उनकी पसंद का खाना बनाएं.

कुछ चीज़ें साथ-साथ प्लान करें

एक साथ वॉक पर जाएं, जॉगिंग करें या स्विमिंग, डांस क्लास आदि जॉइन करें. इससे साथ में क्वालिटी टाइम बिता सकेंगे और उन पलों को ज़्यादा एंजॉय कर सकेंगे. आप किचन में भी मिलकर कुछ स्पेशल बना सकते हैं.

स़िर्फ पार्टनर के लिए टाइम निकालें

आज काम जल्दी हो गया, इसलिए जल्दी घर आ गया/गई, आज आउटडोर मीटिंग कैंसल हो गई, तो समय से पहले घर पहुंच गए… इन कारणों के अलावा एक दिन ऐसा करें कि हाफ डे लें स़िर्फ अपने पार्टनर के लिए और उसे कहें कि तुम्हारी याद आ रही थी, इसलिए हाफ डे लेकर आ गया. अगर दोनों वर्किंग हैं, तो पार्टनर के साथ प्लान करें. लीव लेकर पूरा दिन घर पर अकेले एक-दूसरे के साथ बिताएं.

शॉर्ट हॉलीडेज़ प्लान करें

लंबी छुट्टी पर जाना संभव नहीं, कोई बात नहीं. वीकेंड पर एक-दो दिन की अतिरिक्त छुट्टियां लेकर आसपास ही कहीं रिज़ॉर्ट में जाएं. यह आपके रिश्ते को नई ताज़गी व ऊर्जा देगी.

बहुत सारे सवाल न करें

बात-बात पर सवाल या टोकना किसी को भी पसंद नहीं आता, ऐसे में यदि आपके मन में कुछ आशंकाएं हैं भी, तो समय आने पर उनका जवाब मांगें. एक साथ रोज़ाना ढेर सारे सवाल पार्टनर को आपसे दूर ले जाएंगे. उन्हें लगेगा कि आपको उन पर भरोसा ही नहीं है.

पार्टनर के परिवारवालों को भी सम्मान दें

अपने पैरेंट्स के लिए हम जो सम्मान चाहते हैं, वही सम्मान पार्टनर के पैरेंट्स को भी दें. इससे आप दोनों की बॉन्डिंग और बेहतर होगी. हमेशा घरवालों की शिकायत करने से बचें. अगर कोई समस्या है भी, तो आराम से बैठकर सुलझाने की कोशिश करें.

सेक्स लाइफ को रिफ्रेश करें

सेक्स को रूटीन न बनने दें. यह शादीशुदा ज़िंदगी का महत्वपूर्ण अंग है. इसे नज़रअंदाज़ करना भारी पड़ सकता है. अपनी सेक्स लाइफ में ताज़गी बनाए रखने के लिए कुछ न कुछ नया ट्राई करते रहें. चाहें, तो जगह चेंज करके देखें, नई पोज़ीशन्स ट्राई करें. एक-दूसरे को हॉट मसाज दें. रूम का लुक चेंज करें.

हर बात को शिकायत के अंदाज़ में न कहें

किसी की भी लाइफ परफेक्ट नहीं होती, लेकिन छोटी-छोटी चीज़ों में ख़ुशियां ढूंढ़ी जा सकती हैं. आपके पास भले ही बड़ी गाड़ी न हो, पर प्यार करनेवाला पार्टनर तो है. हर चीज़ का सकारात्मक पहलू देखें और

बात-बात पर शिकायत न करें. न ही रोना रोते रहें कि मेरे पास ये नहीं है, मुझे ज़िंदगी में कुछ नहीं मिला… आदि.

इमोशनल ब्लैकमेलिंग से बचें

सेक्स के समय शर्त रखना या बच्चों के नाम पर इमोशनल ब्लैकमेल करना बंद कर दें. इससे भले ही पार्टनर उस व़क्त आपकी बात मान लेगा, लेकिन उसकी नज़रों में आपका सम्मान कम होता जाएगा और वो आपसे दूर जाने लगेगा. रिश्ते की इम्यूनिटी के लिए इस ग़लती को फ़ौरन सुधार लें.

– विजयलक्ष्मी

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पहला अफेयर: यादों के रंग… (Pahla Affair: Yaadon Ke Rang)

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पहला अफेयर: यादों के रंग… (Pahla Affair: Yaadon Ke Rang)

वो उम्र ही लड़कपन की थी, जिनमें कुछ मधुर यादें, सुखद एहसास के क्षण समाये हुए थे, जिसकी याद आज भी मेरे होंठों पर मुस्कुराहट ले आती है. बात उन दिनों की है, जब मेरा कॉलेज ख़त्म हुआ था. छुट्टियां चल रही थीं. पापा ने घर में पेंट करवाने का विचार किया. मेरी होम डेकोरेशन में अच्छी नॉलेज होने के कारण घर को रेनोवेट कराने की ज़िम्मेदारी मुझे दी गई. कलर, पेंट के डिब्बों व ब्रश के साथ मज़दूरों ने घर में काम करना शुरू किया.

सहसा एक आवाज़ सुनाई दी, “एक ग्लास पानी मिलेगा.” एक मधुर-सी आवाज़ कानों में घुल गई. मैं उसे एकटक देखती रह गई. वह शख़्स मेरी ही उम्र का था. बड़ा ही आकर्षक व्यक्तित्व, नीली आंखें. उसका चलना, बैठना, उसकी हर बात मुझे लुभाती. उसकी बड़ी पलकें विशेषकर उसकी नीली आंखें मुझे उसकी ओर खींच ले गईं. फिर तो न जाने चाय-पानी के बहाने मैं उस कमरे में कितनी बार ही चक्कर लगा आती, जहां वह अपना काम कर रहा था. जब वह ब्रश चला रहा होता, मैं ख़ामोश-सी उसे देखती रहती.

धीरे-धीरे मेरी दीवानगी एक तरफ़ा प्यार में कब बदली, मैं जान भी न सकी. कई बार मैंने अपने आपको मन ही मन डांटा भी था कि एक पेंट करनेवाले मज़दूर के प्रति इतना आकर्षण क्यों? पर न जाने क्या था, मैं चाहकर भी रुक नहीं पाती. उसकी उन नीली आंखों में न जाने कैसी कशिश थी कि मैं डूबती ही चली गई. पहले-पहले तो वो सकुचाया-सा रहता, फिर धीरे-धीरे बात करने लगा था. उसकी बोलती आंखें दिल में नए ख़्वाब जगातीं. जब भी वह दिखाई नहीं देता, मैं बेचैन हो उठती. उस दिन वो काम पर नहीं आया था. वह प्रतियोगी परीक्षा देने गया है, इसकी जानकारी पेंट करनेवाले मज़दूरों के हेड ने दी.

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तो जनाब पढ़ते भी हैं. “क्या लाल-पीले रंगों के बीच काले अक्षर समझ में आते हैं?” अगले दिन जब मैंने पूछा, तो तुरंत जवाब मिला, “क्यों नहीं.’ काले अक्षर ही नहीं, मैं बहुत-सी बातें भी समझता हूं.” तो क्या वह मेरे अंदर उमड़ती भावनाओं को भी समझता है? घर की पेंटिंग का काम लगभग पूरा हो चुका था. मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा कि अब मैं तो उसे नहीं देख पाऊंगी. जाते व़क्त उसने मुझे एक काग़ज़ की पर्ची दी, जिस पर लिखा था…‘ प्यार अपने आप में एक अनोखा एहसास है. ये वो अफ़साना है जो ख़ुद-ब-ख़ुद बयां होता है. यह जीवन का सबसे प्यारा समय है.

आप बहुत अच्छी हैं. कोई व्यक्ति आप से प्रभावित हुए बगैर नहीं रह सकता, पर आज की हक़ीक़त यही है कि हमारे बीच बहुत-से फासले हैं… परिवार के, जाति के, अमीरी-ग़रीबी के, जिनसे पार पाना नामुमकिन है. ज़िम्मेदारियों से लदा मेरा व्यक्तित्व है. मैं चाहकर भी तुम्हारी मंज़िल नहीं बन सकता.’ मेरा पहला प्यार, जिसकी क़िस्मत में अधूरा रहना लिखा था, अधूरा ही रह गया.

वो चला गया हमेशा के लिए. मैं उसे भीगी आंखों से देखती रह गई थी. न रोक सकती थी, न ही किसी से कुछ कह सकती थी. जिस सच्चाई से वह रू-ब-रू कराकर गया था, उसे तो मैं भी नहीं बदल सकती थी. मैं जिस आसमान में उड़ रही थी, वहां से उतरकर ज़मीन पर आ गई. व़क्त रुकता नहीं, ज़िंदगी थमती नहीं. ये वो मुक़ाम नहीं था, जहां मैं ठहर जाती. पर उसकी नीली आंखें जब-जब मेरे ज़ेहन में याद बनकर उमड़तीं, तो मेरी आंखें सजल हो जातीं. बड़ी बेनूर थी ये रूह मेरी, तुम्हारे आने से पहले, तुम्हारी यादों की कशिश ने रंग भर दिए इसमें ज़िंदगी के. अब तक ख़ामोश पड़ा था दिल का आंगन, तुम्हारी आहटों की ख़ुशबू ने इसमें मुहब्बत के फूल खिला दिए. लफ़्ज़ों को जैसे वजह मिल गई बोलने की. यही मेरा जहां है, यही मेरी कहानी.

– शोभा रानी गोयल

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पहला अफेयर: ख़ूबसूरत बहाना..(Pahla Affair: Khoobsurat Bahana)

Pahla Affair

पहला अफेयर: ख़ूबसूरत बहाना… (Pahla Affair: Khoobsurat Bahana)

बैंक में मेरी छवि एक शर्मीले स्वभाव वाले अफसर की थी. अपने केबिन में एकांत में अकाउंट के आंकड़ों में उलझे रहना ही मुझे भाता था. घर पर भी मैं कम ही बोलता था. मेरी अंतर्मुखी प्रवृत्ति देख भाभी अक्सर कहतीं, “देवरजी ऐसे अकेले-अकेले मौनी बाबा बनकर रहोगे, तो कौन तुम्हें अपनी लड़की देगा? संन्यासी बनने का इरादा है क्या?”

मैं भी हर बार की तरह हंसकर यही कहता, “क्या करूं भाभी लड़कियों के सामने बड़ा ही संकोच होता है.”

कुछ दिनों बाद दिवाली थी. भइया-भाभी ने मुझे दीदी को लाने उनकी ससुराल भेज दिया. दीदी की ससुराल में काफ़ी आवभगत हुई. खाना खाने के दौरान ही एक मधुर आवाज़ कानों में पड़ी, “आप तो कुछ खा ही नहीं रहे, एक रोटी और लीजिए ना.” मैंने देखा तो दीदी की ननद मानिंदी हौले-हौले मुस्कुरा रही थी. उसकी सौम्य मुस्कुराहट में न जाने क्या बात थी, मैं उसे देखता ही रह गया. आंखें मिलीं और मेरे दिल में पहली बार अजीब-सी हलचल हुई. अब मैं मानिंदी की एक झलक पाने को ही बेताब रहता. उसकी खिलखिलाती हंसी और उसकी मासूमियत में अजीब-सी कशिश थी.

मैं कुछ-कुछ समझने लगा था कि शायद इसी को प्यार कहते हैं और अब मैं भी इसकी गिरफ़्त में आ चुका हूं. एक दिन मैं पानी पीने के बहाने डायनिंग रूम में आया. मानिंदी फिल्मी पत्रिका पढ़ते-पढ़ते कुछ गुनगुना रही थी, “होशवालों को ख़बर क्या, बेख़ुदी क्या चीज़ है…” दीदी ने उसे छेड़ा, “मेरा भाई है ही इतना प्यारा कि उसे देखकर लड़कियां अपने होश खो बढ़ती हैं… बस थोड़ा शर्माता है, उसे इश्क़ करना सिखाना पड़ेगा.”

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“धत् भाभी…” कहते हुए शर्माकर वह भागी और सीधे आकर मुझसे ही टकरा गई. फिर आंखें चार हुईं और उसके गालों पर हया की सुर्ख़ी उतर आई. वो फिर भागी, मैं हिरणी-सी भागती मानिंदी को देखता ही रह गया. उसकी चंचलता, चपलता और अल्हड़पन पर मैं मर मिटा.

इतने में ही दीदी ने बताया कि कल मुंबई की टिकट कंफर्म हो गई. यह सुनकर तो मैं जिसे आसमान से सीधे ज़मीन पर गिर पड़ा. मेरे होश ठिकाने आ गए थे. मानिंदी ने उदास होकर दीदी से पूछा, “भाभी आप कल चली जाएंगी?” पर न जाने क्यों मुझे ऐसा लगा जैसे उसे मेरा विरह सता रहा है. मुझे रातभर नींद नहीं आई. करवट बदलते-बदलते न जाने कब सुबह हो गई. जीजाजी और उनके परिवारवाले हमें विदा कर रहे थे. मानिंदी दूर खड़ी जुदाई की पीड़ा झेल रही थी. उसकी आंखों में साफ़ नज़र आ रहा था.

रास्ते में दीदी ने न जाने क्यों अचानक पूछा, “मानिंदी के बारे में क्या ख़्याल है?” मैं चुप ही रहा, शायद दीदी को हमारे मौन प्रेम की भनक लग चुकी थी. घर पहुंचकर भइया ने दीदी से पूछा, “सफ़र कैसा रहा?” दीदी ने मुस्कुराकर कहा, “प्रदीप से ही पूछ लो.” भाभी भी किचन से आकर बोलीं, “क्या बात है देवरजी, बदले-बदले से सरकार नज़र आ रहे हैं.” मुझे तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि यह सब क्या चल रहा है. कुछ समझ पाता इससे पहले ही दीदी ने तपाक से जवाब दिया, “बात ही कुछ ऐसी है. प्रोजेक्ट मानिंदी सफल रहा, “भइया भी फ़ौरन बोले, “तो बात चलाई जाए?”

अब मैं सब समझ चुका था कि ये सब भइया-भाभी की ही मिलीभगत थी. दीदी के ससुराल भेजना तो स़िर्फ एक बहाना था. लेकिन मुझे कोई गिला नहीं, यह बहाना इतना हसीं थी कि मुझे मेरी ज़िंदगी का सबसे ख़ूबसूरत मक़सद मिल गया था. मेरा पहला प्यार, मेरी प्यारी मानिंदी, जो कुछ ही दिनों में मेरी जीवन संगिनी भी बननेवाली थी!

– प्रदीप मेहता

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१० रोमांटिक तरीक़ों से पार्टनर को कहें आई लव यू (10 Romantic Ways To Say I Love You)

प्यार (Love)… किसी के लिए महबूब के साथ ज़िंदगी बिताने का ख़याल है, तो किसी के लिए उसके ख़याल में सारी ज़िंदगी गुज़ार देना. कोई प्यार में जीना चाहता है तो कोई जान तक निसार कर देता है. जनाब प्यार का एहसास ही कुछ ऐसा होता है. एक पल में दुनिया बदल जाती है… बदली हुई फ़िज़ां..बदली हुई रुत… बदला हुआ समा…और तो और चेहरे की रंगत भी… एक गुलाबी निखार… जो बता देता है कि आख़िर आपको प्यार हो ही गया है. लेकिन स़िर्फ प्यार होने से कुछ नहीं होता, माना कि उनसे नज़रें मिलते ही आपका दिल तेज़ी से ध़़ड़कने लगता है, पलकें झुक जाती हैं और चेहरे पर गुलाबी सुर्खी छा जाती है, लेकनि जिससे प्यार हुआ है उससे इसका इज़हार करना भी तो ज़रूरी है, क्योंकि आई लव यू (I Love You) कहना कोई आसान काम नहीं. चलिए, हम आपको बता देते हैं कि प्यार का इज़हार कैसे किया जाए.

Ways To Say I Love You

‘मैं तुम्हें प्यार करता हूं’ मात्र एक वाक्य भी बनकर रह सकता है, अगर उसे सही ढंग से कहना न आए तो! प्यार का इज़हार करने के अनगिनत तरी़के हो सकते हैं. अपने प्रिय से अपनी भावनाओं का इज़हार करते समय कभी भी शब्दों को लेकर न तो कोई कंजूसी करें, न ही स्वयं को सीमित रखें. आपके लिए आपका साथी, आपकी प्रेमिका कितनी ख़ास है, यह जतलाना न स़िर्फ रिश्तों में एक जुड़ाव पैदा करेगा, वरन् इससे जीवन में रोमांस भी बढ़ेगा और त्वचा की रंगत भी… जी हां क्योंकि ये प्यार ही तो है जो चेहरे को सुर्ख गुलाबी निखार देता है.

कुछ यूं कहें दिल की बात-

1. अपने साथी के लिए एक रोमांटिक कविता लिखें. इस बात की चिंता न करें कि उसमें शब्दों और रिद्म का मेल है या नहीं. उसमें ख़ास बात यह है कि उसे आपने लिखा है और वह आपके प्यार की सच्ची अभिव्यक्ति है.

2. आजकल मोबाइल पर एसएमएस के चलन ने प्यार के इज़हार को और भी आसान बना दिया है. अपने साथी को रोमांटिक मैसेज भेजें. हो सकता है यह आपको प्रैक्टिकल न लगे, लेकिन रिश्तों में ख़ुशबू तभी बिखरती है जब फूल खिलाएं जाएं.

3. ये ज़रूरी नहीं कि एक बार प्यार का इज़हार होने के बाद जब रिश्ता जुड़ जाए, पति-पत्नी बन जाएं तो तो फिर आई लव यू कहने की ज़रूरत ही नहीं होती. माना कि आप दोनों के बीच प्यार है, लेकिन समय-समय पर इसे जतलाना भी ज़रूरी है. माना कि हम मुहब्बत का इज़हार नहीं करते. इसका मतलब ये तो नहीं कि हम प्यार नहीं करते. यह बात प्रैक्टिकली लागू नहीं होती.

4. बेशक आप दिन-रात एक ही छत के नीचे गुज़ारते हों, लेकिन कुछ शामें घर से बाहर यह जानने के लिए गुज़ारें कि आपके प्यार की पसंद और आदतें क्या हैं. हर तरह की उलझनों और ज़िम्मेदारियों को कुछ समय के लिए झटक कर उनके साथ एक गुलाबी शाम गुज़ारें यानी उन्हें किसी रेस्तरां या क्लब में जाएं. उसकी आंखों में झांकें और उसके मनपसंद खाने का ऑर्डर देते हुए उसके नखरे उठाएं.

5. आते-जाते यों ही उसे छू लें, बालों पर हाथ फेर दें, आंखों से इशारे करें. शर्म के मारे उनका चेहरा गुलाबी न हो जाए तो कहना.

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Romantic Ways To Say I Love You

6. आप एक दिन के लिए किसी होटल में भी अपने साथी के लिए कमरा बुक करा उसे स्पा या मसाज का मज़ा लूटने का मौक़ा दे सकते हैं. कुछ घंटे टब में स्नान करते हुए बिताएं.

7. रोमांटिक फ़िल्म देखने जाएं. उन लम्हों को साथ जीएं. साथ में घर में बैठकर रोमांटिक गाने सुनें. अगर आप दोनों पढ़ने के शौक़ीन हैं, तो एक दोपहर कोई कविता की क़िताब पढ़ते हुए गुज़ारें. ह़फ़्ते में एक दिन तो कम-से-कम उनकी पसंद के फूलों जैसे- रजनीगंधा या गुलाब का बुके अवश्य लाएं, फिर देखिए उनके चेहरे पर कैसे गुलाबों-सा निखार आ जाता है.

8. अक्सर सुनने में आता है कि शादी के कुछ सालों बाद प्यार ख़त्म हो जाता है, पर सच तो यह है कि पति-पत्नी टेक इट फॉर द ग्रांटेड की तर्ज़ पर जीने के आदी हो जाते हैं. बस थोड़ा-सा नयापन, थोड़ा-सा चुलबुलापन उनकी ज़िंदगी में फिर शुरुआती दिनों का प्यार वापस ला सकता है. जगह-जगह जैसे तकिए के नीचे, ऑफ़िस बैग में, लंच बॉक्स, शर्ट की पॉकेट में ‘आई लव यू’ की स्लिप रख दें. यह बचकानापन नहीं है. इन्हें पढ़ तो नाराज़ साथी भी खिल उठेगा.

9. उसे कहें कि ‘तुम जैसे हो मैं तुम्हें उसी रूप में चाहता हूं.’,  ‘तुम्हारा साथ मुझे ख़ुशी देता है.’,  ‘तुम्हारा मेरी ज़िंदगी में आना, मेरी ख़ुशक़िस्मती है.’

ये शब्द प्यार की डोर को और मज़बूत करते हैं. कॉम्पिलमेंट देना प्यार के बंधन को मज़बूत करता है. वह चाहे रोज़ अच्छा दिखता हो, लेकिन फिर भी रोज़ उसकी प्रशंसा करना न भूलें. अगर आलोचना भी करनी हो, तो यह जताएं कि आप ऐसा इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि आपको और संवारना-निखारना चाहते हैं. क्या इससे बेहतर कोई और तरीक़ा हो सकता है प्यार करने का?

10. प्यार का इज़हार करने में स्पर्श भी एक अहम् भूमिका निभाता है. अपने साथी के साथ बैठकर उसका हाथ पकड़ें, उसे अपने सीने से लगाएं या साथ चलते हुए हाथ थाम लेना प्यार को व्यक्त करने का सबसे सहज तरीक़ा है. स्पर्श बिना कहे भी बहुत कुछ कहने की ताक़त रखता है. आपकी छुअन प्यार ही तो है और अपने प्यार का एहसास आपको उनकी हसीं गुाबी रंगत से साफ़ झलकता नज़र आएगा. – आप जिसे प्यार करते हैं, उसके साथ अधिक-से-अधिक समय बिताने की कोशिश करें. जैसे- उसके साथ कभी-कभार डेटिंग पर जाएं, लॉन्ग ड्राइव पर निकल जाएं या फिर शॉपिंग करें. अपने साथी को कुछ ऐसी चीज़ें दें, जो उसे अपने ख़ास होने का एहसास कराए और आपके रोमांटिक होने का भी. प्यार स़िर्फ ख़ूबसूरत एहसास ही नहीं, बल्कि जीने की ज़रूरत भी है. यह मन को स्वस्थ रखता है तभी तो चेहरे पर गुलाबी निखार आता है और आप रहती हैं हमेशा
जवां-जवां…

– संजीव

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पहला अफेयर: कैसा तेरा प्यार…? (Pahla Affair: Kaisa Tera Pyar)

Pyar Ki Kahani

पहला अफेयर: कैसा तेरा प्यार…? (Pahla Affair: Kaisa Tera Pyar)

वो नज़रों से प्यार करना तेरा, पर प्यार के साथ-साथ हर बात पर तक़रार करना तेरा… तेरी शरारतों से ही नहीं, तेरी बदतमीज़ियों से भी इश्क़-सा हो गया था मुझे. हसीन था मुहब्बत का वो मंज़र. चाहत से लबरेज़ वो दिन-रात… सब बेहद ख़ुशगवार था. लेकिन कहीं न कहीं कुछ तो कमी थी… मैं भी जानती थी, तुम भी जानते थे कि हम चाहते हुए भी अभी दो से एक नहीं हो सकते… हमें इंतज़ार करना होगा. वजह! न तुम्हारे पास कोई जॉब था, न ऐसा बैकग्राउंड कि हमारे परिवारवाले तैयार हो सकें. तुमने अपनी एजुकेशन भी तो पूरी नहीं की थी… उस पर तुम्हारा ज़िंदगी को जीने का अलग ही अंदाज़. बेपरवाह-सा रवैया…

“मैं न बीते कल में विश्‍वास करता हूं, न आनेवाले कल की कल्पना… मैं आज में, यथार्थ में जीता हूं और आज का सच यही है कि हम साथ हैं. फ्यूचर किसने देखा है… क्या पता कल क्या हो? उसके लिए हम आज को नहीं खो सकते…”

रौशन ये तुम्हारा नज़रिया हो सकता है, पर मेरा नहीं. मुझे फिक्र होती है आनेवाले कल की. हमारे रिश्ते के भविष्य की…

“स्मिता, तुम प्यार करती हो न मुझसे, तो कुछ न कुछ हो ही जाएगा. बस तुम साथ मत छोड़ना, वरना टूट जाऊंगा मैं… ”

पर कहीं न कहीं तो मैं टूटती जा रही थी… तुम स़िर्फ बातें ही करते हो… न कुछ करने की कोशिश है, न किसी बात को गंभीरता से लेते हो. अपने तरी़के से हर चीज़ करनी है, अपनी मर्ज़ी से ही बात करनी है… अजीब रवैया था यह.

शायद जो बदतमीज़ियां पहले मुझे तुम्हारी ओर आकर्षित करती थीं, वही अब मुझे तुमसे दूर करती जा रही थीं… हर रोज़, हर पल मन में सवाल, दुविधाएं बढ़ रही थीं… क्या तुम्हारी ज़िंदगी में और भी है कोई? क्या तुम मुझे लेकर गंभीर ही नहीं… क्या तुम स़िर्फ अपना व़क्त गुज़ार रहे हो… पता नहीं क्या-क्या और किस-किस तरह के ख़्याल!

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उस पर गौरव ने इस दुविधा को और बढ़ा दिया… “स्मिता मैं तुम्हारा अच्छा दोस्त हूं, तुम्हारा बुरा तो नहीं चाहूंगा, तुमने आख़िर उस रौशन में क्या देखा? वो किसी भी तरह से तुम्हारे लायक नहीं, वो स़िर्फ टाइमपास कर रहा है. क्यों अपना व़क्त, अपनी ज़िंदगी उसके पीछे बर्बाद कर रही हो. तुम जैसी न जाने कितनी होंगी उसकी लाइफ में. वैसे भी तुम कहती हो न कि दिनभर ऑनलाइन रहता है… क्या कभी तुमने पूछा है कि किससे बात करता है? क्या बात करता है? क्यों बात करता है? होश में आओ… ”

गौरव की बातों पर गंभीरता से ग़ौर किया, तो लगा सच तो कह रहा है. रौशन की तरफ़ से मुझे कभी यह महसूस नहीं हुआ कि उसे बहुत ज़्यादा मेरी ज़रूरत है अपनी ज़िंदगी में, शायद मैं अकेले ही, अपनी तरफ़ से इस रिश्ते को निभाए जा रही थी.

ज़रूरी नहीं कि हर समय भावनाओं में बहकर ही निर्णय लिए जाएं, कभी-कभी बहुत ज़रूरी होता है अपने स्वाभिमान के लिए कठोर निर्णय लेकर आगे बढ़ा जाए. वरना ज़िंदगी वहीं उलझकर रह जाएगी.

मैंने रौशन से बात की… “हम कब शादी करेंगे?”

“अरे स्मिता, बस थोड़ा इंतज़ार करो. जिस दिन तुम्हारे लायक हो जाऊंगा, बारात लेकर सीधे तुम्हारे घर आऊंगा…”

“…लेकिन तुम कोशिश करोगे, तभी तो किसी लायक बनोगे. तुम तो इसी ज़िंदगी में ख़ुश हो. तुमको लग रहा है, जो जैसा चल रहा है, चलने दिया जाए.”

“हां, तो इस ज़िंदगी में भी क्या बुरा है…”

तुम जिस तरह से हल्के अंदाज़ में जवाब दे रहे थे, मैं समझ गई थी कि गौरव कहीं न कहीं सही था अपनी जगह… ज़रूरी नहीं कि असल ज़िंदगी में आपको फिल्मी हीरो की तरह परफेक्ट पार्टनर ही मिले, हम अक्सर धोखा खा जाते हैं. लोगों को पहचानने में. अगर ग़लती हो गई, तो बेहतर है समय रहते उसे सुधार लिया जाए. शायद मुझसे भी ग़लती हुई थी रौशन को पहचानने में. इस ग़लती को सुधारना ज़रूरी थी.

मैंने उसे मैसेज किया- तुम मेरी ज़िंदगी का अहम् हिस्सा हो, पर मुझे कभी यह महसूस क्यों नहीं हुआ कि मैं भी तुम्हारी ज़िंदगी में उतनी ही अहमियत रखती हूं?

मेरे दोस्त, यहां तक कि मेरे घरवाले भी जानते हैं हमारे रिश्ते के बारे में, लेकिन मुझे आजतक न तुम्हारे दोस्तों के बारे में पता है, न घरवालों के बारे में… और तुम बड़ी-बड़ी बातें करते हो… मुझे नहीं लगता हमारा रिश्ता आगे बढ़ सकता है…
मुझे लगा, शायद इस बात से तो तुम्हें फ़र्क पड़ेगा… लेकिन नहीं, तुमने इसे भी बेहद हल्के अंदाज़ में लिया और तुम्हारी तरफ़ से कभी कोई कोशिश नहीं हुई मुझे रोकनी की…

जानती हूं, तुम आगे बढ़ चुके हो, पर मैंने तो सच्चे दिल से तुमसे प्यार किया था, मैं कैसे आगे बढ़ सकती थी… वहीं खड़ी हूं, उसी मोड़ पर… संभाल रही हूं ख़ुद को… पता नहीं किस उम्मीद में जी रही हूं… हम भले ही बड़ी-बड़ी बातें करते हैं कि प्रैक्टिकल होकर सोचना चाहिए, पर मैं नहीं हूं प्रैक्टिकल… प्यार और रिश्तों में कैसे कोई प्रैक्टिकल हो सकता है… पता है, लोग खेल जाते हैं दिलों से, लेकिन अपना बस नहीं इन भावनाओं पर… हां, अब इतना समझ चुकी कि तुम्हारे इंतज़ार से कुछे हासिल नहीं होगा, बस आगे बढ़ना ही एकमात्र रास्ता है… उसी रास्ते पर चलने की कोशिश में हूं, भले ही अभी लड़खड़ा रही हूं, पर धीरे-धीरे सीख जाऊंगी… संभल जाऊंगी… तुम्हारे बिना जीना सीख जाऊंगी…!

– गीता शर्मा

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