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पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले मेडिकल चेकअप करवाना चाहिए? (Do I Need Pre Pregnancy Checkups?)

Need Pre Pregnancy Checkups
मैं 35 वर्षीया शादीशुदा महिला हूं और मुझे बेटा भी है. मैं एक स्वस्थ महिला हूं और मुझे कोई बुरी आदत भी नहीं है. अगर मुझे दूसरा बच्चा चाहिए, तो क्या मुझे कंप्लीट मेडिकल चेकअप की ज़रूरत है?
– रंजना शिंदे, पुणे.

प्रेग्नेंसी के दौरान मां व बच्चे दोनों की अच्छी सेहत के लिए मां का स्वस्थ होना बहुत ज़रूरी है. प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले सभी ज़रूरी टेस्ट्स करवाएं. रेग्युलर हेल्थ चेकअप में ब्लड टेस्ट ज़रूर करवाएं. इससे थायरॉइड, डायबिटीज़ और ओबेसिटी जैसी बीमारियों का पता उनके शुरुआती दौर में ही चल जाता है. थायरॉइड के कारण जहां कंसीव करने में परेशानी होती है, वहीं डायबिटीज़ व ओबेसिटी से प्रेग्नेंसी के दौरान द़िक्क़तें आ सकती हैं. अगर कंसीव करने से पहले इनका पता चल जाए, तो सही तरी़के से इलाज किया जा सकता है और प्रेग्नेंसी में कोई प्रॉब्लम नहीं आती. प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले किसी अच्छे गायनाकोलॉजिस्ट को मिलें.

 Need Pre Pregnancy Checkups
मेरी बेटी की उम्र 15 साल है. पीरियड्स के दौरान उसे बहुत दर्द होता है. क्या उसे इलाज की ज़रूरत है? क्या उसे किसी डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
– ममता शाह, सूरत.

दर्दयुक्त माहवारी आपकी बेटी की सेहत के साथ-साथ उसकी पढ़ाई-लिखाई व पर्सनल लाइफ को भी प्रभावित कर सकती है. अगर इसके कारण वह अपनी लाइफ नॉर्मल तरी़के से जी नहीं पा रही है, तो आपको ज़रूर उसका इलाज कराना चाहिए. यह कई कारणों से हो सकता है, इसलिए सबसे पहले किसी एक्सपर्ट डॉक्टर से उसका चेकअप कराएं. वो उसे सोनोग्राफी करवाने की सलाह दे सकते हैं. पूरा चेकअप हो जाने के बाद डॉक्टर आपको कुछ पेनकिलर्स या ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स लेने की सलाह दे सकते हैं.

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यह भी पढ़ें: पर्सनल प्रॉब्लम्स: गर्भधारण नहीं कर पा रही हूं, क्या मुझमें कोई प्रॉब्लम है?

 

 डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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पर्सनल प्रॉब्लम्स: पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द होता है (Possible Reasons For Painful Periods)

Reasons For Painful Periods
मैं 24 वर्षीया अविवाहित युवती हूं. हर महीने पीरियड्स के दौरान मुझे असहनीय दर्द होता है और मेरी रूटीन एकदम से बिगड़ जाती है. कृपया, कोई उचित मार्गदर्शन करें.
– नूपुर सेन, दिल्ली.

पीरियड्स के शुरुआती दिनों में दर्द नहीं होता, लेकिन कुछ सालों बाद दर्द शुरू हो जाता है. यह ओव्यूलेशन के कारण होता है. पीरियड्स के पहले दिन ज़्यादा दर्द होता है, पर धीरे-धीरे दर्द कम होने लगता है. आपके दर्द का कारण एंडोमेट्रियोसिस भी हो सकता है. सामान्य एंडोमेट्रियोसिस की स्थिति में दवा से आसानी से इलाज हो जाता है, लेकिन गंभीर एंडोमेट्रियोसिस के मामले में आपको लैप्रोस्कोपिक सर्जरी करवानी पड़ सकती है.

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Reasons For Painful Periods

कई सालों पहले फायब्रॉइड्स के कारण मुझे अपना यूटरस निकलवाना पड़ा था. अब जब भी खांसती हूं या किसी काम के लिए ज़ोर लगाती हूं, तो वेजाइना बाहर की तरफ़ आ जाता है. मुझे क्या करना चाहिए?
 – रचना जाधव, पुणे.

आपके द्वारा बताए गए लक्षणों से लगता है कि आपको वॉल्ट प्रोलैप्स है. यूटरस निकलवाने के बाद कभी-कभी इस तरह की समस्या सामने आ जाती है. इसके लिए आपको वेजाइनल या लैप्रोस्कोपिक सर्जरी करवानी पड़ेगी. इस विषय में अधिक जानकारी के लिए जल्द से जल्द अपने डॉक्टर से संपर्क करें.

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डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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पर्सनल प्रॉब्लम्स: पीरियड्स पोस्टपोन कैसे करूं? (How Can I Postpone My Periods?)

How Can I Postpone My Periods
मैं ट्रैवेलिंग पर जानेवाली हूं, इसलिए अपने पीरियड्स प्रीपोन या पोस्टपोन करना चाहती हूं. पिछले 4 सालों से मैं बर्थ कंट्रोल पिल्स ले रही हूं और मेरा पीरियड साइकल 30-32 दिनों का है. ऐसे में मुझे क्या करना चाहिए?
– रंजना कुमार, नई दिल्ली.

पीरियड्स प्रीपोन करने की बजाय पोस्टपोन करना ज़्यादा अच्छा होगा. जैसा कि आपने बताया कि आप बर्थ कंट्रोल पिल्स लेती हैं, तो 7 दिन का जो पिल फ्री वीक का ब्रेक होता है, उसे नज़रअंदाज़ करें और बिना किसी ब्रेक के आप अपनी पिल्स लगातार लेती रहें. पिल्स बंद करते ही कुछ ही दिनों में आपके पीरियड्स आ जाएंगे. बेहतर होगा कि अपने गायनाकोलॉजिस्ट सेे मिलें, वो आपको बेहतर गाइड कर पाएंगे.

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How Can I Postpone My Periods

मैं 16 वर्षीया लड़की हूं. मेरी बाकी सहेलियों की तरह मुझे पीरियड्स नहीं आते, जबकि 14 साल की उम्र से ही हर महीने मुझे पेटदर्द होता है. अल्ट्रासाउंड से पता चला है कि मेरे गर्भाशय और योनि में खून जमा है. डॉक्टर के मुताबिक़ पीरियड्स के लिए मुझे एक छोटा-सा ऑपरेशन करवाना होगा. क्या ऐसा होता है?
– प्रगति सिन्हा, रायपुर.

आमतौर पर 11 से 14 साल के बीच लड़कियों के पीरियड्स आ जाते हैं, पर आपकी जो स्थिति है उसे हेमाटोकोल्पोस और हेमाटोमेत्रा कहते हैं, जिसमें ब्लड वेजाइना और यूटरस में जमा होता रहता है. आपकी वेजाइनल ओपनिंग बंद है, जिसके कारण ब्लड वेजाइना और यूटरस में जमा हो रहा है. जैसा कि आपने बताया कि 14 साल की उम्र से ही आपको हर महीने दर्द होता है, पर पीरियड्स नहीं होते, दरअसल तभी से आपके पीरियड्स शुरू हो गए हैं, पर वेजाइनल ओपनिंग के बंद होने के कारण ब्लड बाहर नहीं निकल पाया. आपको डरने की कोई ज़रूरत नहीं. बस, एक छोटे-से ऑपरेशन से सब ठीक हो जाएगा और आपके पीरियड्स नॉर्मल हो जाएंगे.

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डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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पर्सनल प्रॉब्लम्स: एग फ्रीज़िंग की प्रक्रिया में कितना वक्त लगता है? (What Is The Process For Egg Freezing?)

What Is The Process For Egg Freezing
मैं 32 वर्षीया कामकाजी व तलाक़शुदा महिला हूं. मुझे बच्चों का बहुत शौक़ है, इसलिए दोबारा घर बसाकर मां बनना चाहती हूं, पर इसमें कितना व़क्त लगेगा मुझे भी नहीं पता, इसलिए अपने एग्स को फ्रीज़ करके रखना चाहती हूं. क्या मुझे बता सकती हैं कि एग फ्रीज़िंग की प्रक्रिया में कितना व़क्त लगता है?
– रजनी ठाकुर, पुणे.

एग फ्रीज़िंग की प्रक्रिया में लगभग एक महीने का व़क्त लगता है, जिसमें पहले 2 हफ़्ते मेडिकेशन और अगले 2 हफ़्ते एग्स रिट्रिवल में लगते हैं. पहले 10-12 दिन मेडिकेशन में जाते हैं, जिसके दौरान 4-5 बार अल्ट्रासाउंड भी किया जाता है. दो हफ़्ते बाद जब आपके एग्स मैच्योर हो जाते हैं और ओवरीज़ इसके लिए तैयार हो जाती हैं, तब डॉक्टर रिट्रिवल की प्रक्रिया शुरू करते हैं. इसके लिए आपको एक दिन की छुट्टी लेनी पड़ेगी, ताकि रिट्रिवल के बाद आप बेड रेस्ट ले सकें. आमतौर पर डॉक्टर यह प्रक्रिया वीकेंड पर रखते हैं, ताकि पेशेंट को आराम मिल सके.

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What Is The Process For Egg Freezing

मैं 29 वर्षीया कामकाजी महिला हूं. पिछले कई सालों से पीरियड्स के दौरान मुझे काफ़ी दर्द होता था, तो मैं पेनकिलर ले लेती थी. पर जब ज़्यादा तकलीफ़ बढ़ी, तो गायनाकोलॉजिस्ट को दिखाया. उन्होंने चेकअप करके बताया कि मुझे एंडोमेटिरियोसिस है. यह क्या है, कृपया मेरा मार्गदर्शन करें.
– मनीषा राजभर, पटना.

यूट्रस की अंदरूनी लाइनिंग के टिश्यूज़ को एंडोमेट्रियम कहते हैं. जब ये टिश्यूज़ यूट्र्स के बाहर ओवरीज़ या पेल्विक एरिया में चले जाते हैं, तब उस अवस्था को एंडोमेटिरियोसिस कहते हैं. इसके सही कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है. आमतौर पर यह 25-40 की उम्र की महिलाओं में होता है. इसके कारण महिलाओं को पेड़ू में और पीरियड्स के दौरान काफ़ी दर्द होता है. यह एक वंशानुगत समस्या है. ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स के सेवन से इसके होने की संभावना कम हो जाती है.

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पर्सनल प्रॉब्लम्स: बहुत जल्दी क्यों थक जाती हूं मैं? (Why Do I Get Tired Very Soon?)

Why Do I Get Tired Very Soon During Periods
मैं 23 वर्षीया कॉलेज स्टूडेंट हूं. मेरे पीरियड्स अनियमित हैं और मेरा वज़न भी काफ़ी बढ़ गया है. इसके अलावा कुछ भी करने पर मैं बहुत जल्दी थक जाती हूं. मुझे क्या करना चाहिए? कृपया, मेरा मार्गदर्शन करें.
– ख़ुशी अग्रवाल, अजमेर.

हमारी बदलती लाइफस्टाइल का ही नतीजा है कि आजकल लोगों का वज़न पहले के मुक़ाबले ज़्यादा तेज़ी से बढ़ने लगा है. बढ़ते हुए वज़न के कारण शरीर में हार्मोंस अनियंत्रित हो सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप अनियमित माहवारी, शरीर पर अधिक बाल आना, चेहरे पर कील-मुंहासे और बालों का गिरना जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं. मैं आपको यही सलाह दूंगी कि आप रोज़ाना आधा-एक घंटा एक्सरसाइज़, योगा व प्राणायाम करें और जंक फूड कम से कम खाएं. अनियमित माहवारी की समस्या को दूर करने के लिए किसी अच्छे गायनाकोलॉजिस्ट से मिलें.

 Why Do I Get Tired Very Soon During Periods
मेरी उम्र 29 साल है और हाल ही में मेरा लगातार दूसरा मिसकैरेज हो गया, जो दो महीने का था. क्या इसका यह मतलब है कि भविष्य में मैं कभी हेल्दी बच्चे को जन्म नहीं दे पाऊंगी?
– श्यामली राव, नागपुर.

ये बड़े दुर्भाग्य की बात है कि आजकल गर्भपात के मामले बहुत तेज़ी से बढ़े हैं और यह एक आम बात हो गई है. लगातार तीसरी बार गर्भपात की आशंका बहुत ही कम होती है. इसका कारण पैरेंट्स में किसी जेनेटिक समस्या का होना भी हो सकता है. इसलिए सबसे पहले किसी अच्छे गायनाकोलॉजिस्ट को मिलकर गर्भपात के कारणों को जानने के लिए सारे ज़रूरी टेस्ट्स कराएं. सही कारण पता चलते ही तुरंत इलाज कराएं. आप सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें. भविष्य में आप जल्दी ही एक हेल्दी बच्चे को जन्म देंगी.

 

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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यह भी पढ़ें: पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या गर्भनिरोधक गोलियों से ब्रेस्ट कैंसर की संभावना बढ़ जाती है?

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पर्सनल प्रॉब्लम्स: पीरियड्स के पहले ब्रेस्ट्स में गाँठ कहीं कैंसर तो नहीं? (Can A Cyst In The Breast Before Periods Turn Into Cancer?)

Cyst In The Breast
मैं 18 वर्षीया युवती हूं. हर महीने पीरियड्स के पहले मेरे ब्रेस्ट्स में बहुत दर्द होता है और गांठ भी आ जाती है, जिसके लिए मुझे पेनकिलर लेनी पड़ती है. पर पीरियड्स के बाद न दर्द रहता है और न ही कोई गांठ. मुझे गायनाकोलॉजिस्ट के पास जाने में डर लग रहा है. कहीं ये कैंसर तो नहीं?
– कशिश शुक्ला, इंदौर.

हर महीने चलनेवाले इस चक्र को साइकलिकल मस्ताल्गिया कहते हैं. पीरियड्स के सेकंड हाफ में प्रोजेस्टेरॉन हार्मोन के कारण शरीर में वॉटर रिटेंशन बढ़ जाता है, जिसके कारण ब्रेस्ट्स में भारीपन और दर्द होता है. यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जो ज़्यादातर महिलाएं महसूस करती हैं. पर अगर दर्द ज़्यादा है, तो डॉक्टर को दिखाएं. आत्मसंतुष्टि के लिए एक बार डॉक्टर से ब्रेस्ट चेकअप ज़रूर करवाएं.

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 Cyst In The Breast
मेरी शादी को तीन साल हो गए हैं, पर अभी तक मैं कंसीव नहीं कर पाई हूं. हम दोनों ने सारे टेस्ट्स करवाए, पर मेरे पति का स्पर्म काउंट कम है, इसलिए डॉक्टर ने तीन महीने की दवा दी है. क्या यह 1-2 महीने में नहीं हो सकता?
– सुमन मिश्रा, मेरठ.

स्पर्म की कमी पुरुषों में आम समस्या है. दवाई का नियमित सेवन, किसी तरह का ट्रॉमा या इंफेक्शन, कोई सर्जरी, डायबिटीज़, कीमो थेरेपी या रेडियो थेरेपी आदि स्पर्म काउंट कम होने के कारण हैं. इस स्थिति को ओलिगो स्पर्मिना कहते हैं. दरअसल, स्पर्म का साइकल 72-90 दिनों का होता है, जिसमें स्पर्म मैच्योर होते हैं. इसीलिए आपके डॉक्टर ने 3 महीने की दवा दी है. 3 महीने बाद टेस्ट ज़रूर करवाएं.

यह भी पढ़ें: पर्सनल प्रॉब्लम्स: सेक्स के दौरान वेजाइनल ब्लीडिंग के क्या कारण हो सकते हैं?

 

 

डॉ. राजश्री कुमार
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यह भी पढ़ें: पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या पीरियड्स न आना प्रेग्नेंसी की निशानी है?

पर्सनल प्रॉब्लम्स: सेक्स के दौरान वेजाइनल ब्लीडिंग के क्या कारण हो सकते हैं? (Causes Of Vaginal Bleeding During Sex)

Vaginal Bleeding, During Sex
मैं 27 वर्षीया शादीशुदा महिला हूं. पिछले कुछ हफ़्तों से सेक्स के दौरान मुझे वेजाइनल ब्लीडिंग होती है. इसका क्या कारण हो सकता है? क्या मुझे डॉक्टर को मिलना चाहिए.
– युक्ता कौल, नोएडा.

बिल्कुल, आपको तुरंत किसी गायनाकोलॉजिस्ट को कंसल्ट करना चाहिए. डॉक्टर आपकी जांच करेंगे कि कहीं वेजाइना या सर्विक्स में कोई सूजन या बढ़ोतरी तो नहीं है. इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे- इंफेक्शन्स, ड्राई वेजाइना, सेक्सुअल अराउज़ल के व़क्त बार्थोलिन ग्लैंड में लुब्रिकेशन की कमी, वेजाइना या सर्विक्स का प्री कैंसर आदि. इसलिए सबसे ज़रूरी है कि आप जल्द से जल्द किसी गायनाकोलॉजिस्ट को मिलें, ताकि वो ब्लीडिंग का कारण पता कर सके.

यह भी पढ़ें: क्या पीरियड्स न आना प्रेग्नेंसी की निशानी है?

 Vaginal Bleeding, During Sex
यह भी पढ़ें: वेजाइनल डिस्चार्ज का क्या कारण हो सकता है?
मेरी कज़िन 16 साल की है और 13 साल की उम्र से ही उसके पीरियड्स शुरू हो गए थे, पर पिछले एक साल से उसके पीरियड्स अनियमित हैं. क्या यह सामान्य है?
– प्रिया सेठी, बरेली.

आमतौर पर 12 से 14 साल की उम्र में लड़कियों के पीरियड्स शुरू हो जाते हैं, पर पीरियड्स को नियमित होने में कुछ साल लग जाते हैं. इस अवस्था को हाइपोथैलामिक पिट्यूटरी ओवेरियन एक्सिस डिस्फंक्शन कहते हैं. इस उम्र में ज़्यादातर लड़कियां अपने वज़न को लेकर काफ़ी सचेत रहती हैं, इसलिए अंडरवेट और ओवरवेट दोनों ही तरह की लड़कियों के पीरियड्स पर इसका प्रभाव पड़ता है. इसके अलावा अगर कोई बहुत ज़्यादा एक्सरसाइज़ करती है या उसे पॉलिसिस्टिक ओवरीज़ या थायरॉइड जैसे हार्मोनल प्रॉब्लम्स हैं, तो भी उसके पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं.

यह भी पढ़ें:  शारीरिक संबंध के बाद १-२ दिन तक ब्लीडिंग क्यों होती है?

 

डॉ. राजश्री कुमार
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पर्सनल प्रॉब्लम्स: दूसरे बच्चे के लिए क्या एहतियात बरतनी चाहिए? (Second Baby Planning & Precaution Tips)

Second Baby, Planning, Precaution Tips
मेरी उम्र 34 और मेरे पति की 36 है. हमारा 7 साल का एक बेटा है. दूसरे बच्चे के लिए हमें क्या एहतियात बरतनी चाहिए?
– अदिती श्रीवास्तव, मेरठ.

अगर आप दूसरे बच्चे के बारे में सोच रही हैं, तो बिल्कुल भी देर न करें, क्योंकि जल्द ही आप 35 की होनेवाली हैं. अगर आप किसी तरह के प्रीकॉशन्स ले रही हैं, तो तुरंत बंद कर दें और फॉलिक एसिड टैबलेट्स लेना शुरू कर दें. अगर आपको डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर या थायरॉइड जैसी कोई समस्या है, तो सबसे पहले किसी अच्छे डॉक्टर से मिलकर तसल्ली कर लें कि आपका शरीर गर्भधारण के लिए तैयार है. अगर नेचुरल तरी़के से आप 3-6 महीने के भीतर गर्भधारण करने में असक्षम हैं, तो आपको किसी गाइनाकोलॉजिस्ट से मिलना होगा.

पर्सनल प्रॉब्लम्स: दूसरे बच्चे के लिए क्या एहतियात बरतनी चाहिए? (Second Baby Planning & Precaution Tips)
मैं 24 साल की युवती हूं. पीरियड्स के दौरान मुझे व्हाइट डिस्चार्ज होता है, जिससे बदबू आती है और खुजली भी होती है. मुझे क्या करना चाहिए?
– धरा पंडित, श्रीनगर.

पीरियड्स के दौरान व्हाइट डिस्चार्ज दिखना मुश्किल है. हो सकता है, सैनिटरी पैड्स के कारण जलन व खुजली हो रही हो. खुजली और वेजाइनल डिस्चार्ज का कारण वेजाइना में बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन हो सकता है. इसके लिए गाइनाकोलॉजिस्ट आपको 3-6 दिनों के लिए वेजाइनल टैबलेट्स, एंटी फंगल मेडिसिन्स, एंटी बायोटिक्स या कोई क्रीम दे सकते हैं. ध्यान रहे कि हमेशा कॉटन की अंडरवेयर्स ही पहनें और मेडिकेटेड पेरिनियल वॉशेज़ (प्राइवेट पार्ट के लिए इस्तेमाल होनेवाले लिक्विड वॉशेज़) से दूर रहें.

 

 

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पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या पीरियड्स न आना प्रेग्नेंसी की निशानी है? (Missed Periods This Month, Am I Pregnant?)

Missed Periods
मैं 25 वर्षीया शादीशुदा महिला हूं. मेरे पति को गर्भनिरोधक (Contraceptives) का इस्तेमाल करना पसंद नहीं. इस महीने मेरे पीरियड्स (Periods) नहीं आए. क्या मैं प्रेग्नेंट (Pregnant) हूं?
– शांति वर्मा, सूरत.

सेक्स के दौरान कोई न कोई गर्भनिरोधक ज़रूर इस्तेमाल करना चाहिए. ऐसा न करने से आप अनचाही प्रेग्नेंसी या सेक्सुअली ट्रांसफर होनेवाले इंफेक्शन्स की शिकार हो सकती हैं. ऐसी स्थिति में प्रेग्नेंसी का पता लगाने के लिए आपको यूरिन प्रेग्नेंसी टेस्ट करना चाहिए. अगर फिर भी आपको कोई संदेह है, तो आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए. आप डॉक्टर से गर्भनिरोधक के बेहतर विकल्पों के बारे में जानकारी हासिल कर सकती हैं. किसी भी तरह के गर्भनिरोधक के साथ संबंध स्थापित करते समय हमेशा कंडोम का इस्तेमाल करें, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति सामने न आए.

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Missed Periods
मैं 50 वर्षीया महिला हूं. आजकल पीरियड्स (Periods) के दौरान मुझे हैवी ब्लीडिंग और बहुत दर्द होता है, जबकि पहले ऐसा नहीं होता था. मेरी सहेलियां कहती हैं कि यह मेनोपॉज़ (Menopause) के कारण है. क्या मुझे डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
– रजनी सोनी, पटना.

पीड़ादायक हैवी ब्लीडिंग का आम कारण फायब्रॉइड्स है. ये कैंसरयुक्त नहीं होते, पर आपकी जैसी स्थिति में इनका इलाज करवाना ज़रूरी है. मेनोपॉज़ के कारण माहवारी अनियमित होना, अधिक रक्तस्राव होना आम बात है, पर इसमें कभी इतना दर्द नहीं होता. हैवी ब्लीडिंग के कारण कहीं आप एनीमिया की शिकार न हो जाएं, इसलिए आयरन सप्लीमेंट्स लेना शुरू कर दें. आपको किसी अच्छे गाइनाकोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए. वो आपको प्रोजेस्टेरॉन टैबलेट्स या हिस्टेरेक्टॉमी की सलाह दे सकते हैं. आजकल नया हार्मोन डिलीवरी सिस्टम आया है, जिसे मिरेना इंट्रा युटेराइन सिस्टम कहते हैं. अगर आप हिस्टेरेक्टॉमी नहीं कराना चाहतीं, तो इसका चुनाव कर
सकती हैं.

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डॉ. राजश्री कुमार
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पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या कॉपर टी निकलवाने के तुरंत बाद फर्टिलिटी लौट आती है? (How Long After IUD Removal Can I Get Pregnant?)

Pregnant, copper t
मैं 32 वर्षीया महिला हूं व मेरा 4 साल का बच्चा है. डिलीवरी के छह महीने बाद से ही मैं इंट्रायूटेराइन डिवाइस कॉपर टी इस्तेमाल कर रही हूं. मैं यह जानना चाहती हूं कि क्या कॉपर टी निकलवाने के तुरंत बाद मेरी फर्टिलिटी लौट आएगी या फिर मुझे कंसीव करने में बहुत ज़्यादा समय लगेगा?
– जयश्री मिश्रा, राजकोट.

आपको बता दें कि इंट्रायूटेराइन डिवाइस कॉपर टी निकलवाने के तुरंत बाद ही आपकी फर्टिलिटी वापस आ जाएगी, जबकि हार्मोंसवाले गर्भनिरोधक साधनों का इस्तेमाल करनेवाली महिलाओं के साथ ऐसा नहीं होता. उनकी फर्टिलिटी लौटने में 3 से 6 महीने का समय लगता है, इसलिए अपने पति से इस बारे में बात करें और जब आप प्रेग्नेंसी के लिए तैयार हों, तभी कॉपर टी निकलवाएं.

यह भी पढ़ें: वेजाइनल डिस्चार्ज का क्या कारण हो सकता है?

 

Pregnant, copper t
मैं 50 वर्षीया महिला हूं और पिछले साल ही मेरे पीरियड्स बंद हुए हैं. पिछले दो महीने से मुझे अक्सर योनि में खुजली व डिस्चार्ज हो रहा है. क्या मुझे डॉक्टर से मिलना पड़ेगा?
– तुलिका कमानी, हैदराबाद.

आपका मेनोपॉज़ हो चुका है और आपके द्वारा बताए लक्षणों से लग रहा है कि आपको इंफेक्शन है. सबसे पहले आपको चेकअप कराना पड़ेगा, ताकि पता चल सके कि आपको किस तरह का इंफेक्शन है, जिससे सही इलाज किया जा सके. इसके अलावा आपको पैप स्मियर टेस्ट और ब्लड शुगर चेकअप (फास्टिंग और पोस्ट लंच) ज़रूर कराना चाहिए.

यह भी पढ़ें: कंडोम के इस्तेमाल से प्राइवेट पार्ट में खुजली व जलन क्यों होती है?

 

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बड़े होते बच्चों को ज़रूर बताएं ये बातें (Important Things Growing Children Should Know)

Bade hote bachche final

यौवन को छू लेने की हसरत… बड़ों-सा बड़ा बनने की चाहत… कभी घंटों आईने में ख़ुद को निहारना… कभी छोटी-सी ही बात पर बिगड़ जाना… कभी धड़कनों का अचानक बेक़ाबू हो जाना, कभी बेपरवाह-सा जीने का मज़ा लेना… दोस्तों की संगत, अदाओं में अजीब-सी रंगत… हर बात पर ढेरों सवाल और कभी सवालों के बेतुके-से जवाब… कुछ अलग ही होता है इस उम्र का हिसाब…

जी हां, थोड़ी मासूमियत, थोड़ी नादानी, थोड़ा अल्हड़पन और बहुत-सी अपरिपक्वता… कुछ ऐसी ही होती है किशोरावस्था. कई सवाल मन में आते हैं, कई आशंकाएं होती हैं, असमंजस भी होता है, शंकाएं भी होती हैं… कुल मिलाकर कंफ्यूज़न की स्टेज व दौर से गुज़र रहे होते हैं इस उम्र में बच्चे. ऐसे में सही पैरेंटिंग से आप अपने बच्चों की ज़रूर मदद कर सकते हैं. उन्हें सही उम्र में उचित मार्गदर्शन देकर और उनके मन में सवालों के पनपने से पहले ही उनके जवाब व हल देकर. तो हर पैरेंट्स के लिए ज़रूरी है कि वो अपने बड़े होते बच्चों को कुछ बातें ज़रूर बताएं.

शरीर में होनेवाले बदलाव: किशोरावस्था की ओर बढ़ते बच्चों के शरीर में बहुत-से बदलाव होते हैं. अचानक शरीर में आ रहे इन परिवर्तनों से बच्चे घबरा जाते हैं. उनके मन में भी ढेर सारे प्रश्‍न उठते हैं. उन्हें बार-बार यह एश्योरेंस चाहिए होता है कि वे सामान्य हैं. ऐसे में पैरेंट्स की ज़िम्मेदारी बनती है कि उन्हें यह महसूस कराएं कि ये तमाम बदलाव सामान्य हैं. आप भी जब उनकी उम्र में थे, तो इन्हीं बदलावों से गुज़रे थे.

प्यूबर्टी: प्यूबिक हेयर, आवाज़ में बदलाव, चेहरे पर अचानक ढेर सारे पिंपल्स, क़द का बढ़ना, हार्मोंस में परिवर्तन आदि के कारणों को बड़े होते बच्चे समझ नहीं पाते. हालांकि आज के इंटरनेट के युग में बहुत-सी चीज़ों के बारे में बच्चे पहले से ही जान ज़रूर लेते हैं, लेकिन वे उन्हें ठीक से समझ नहीं पाते. यहां पैरेंट्स के लिए सबसे ज़रूरी यह है कि आप इंतज़ार न करें कि बच्चा आकर आपसे सवाल करे. बेहतर होगा कि समय से पहले ही आप उन्हें बातचीत के दौरान या अन्य तरीक़ों से इन चीज़ों के बारे में एजुकेट करते रहें. इससे बच्चे मानसिक रूप से तैयार रहेंगे और ग़लत जगहों से जानकारी इकट्ठा नहीं करेंगे.

मासिक धर्म: अगर आप इस इंतज़ार में हैं कि जब बच्ची को पीरियड्स शुरू होंगे, तब इस बारे में उसे बताएंगी, तो आप ग़लत हैं. अगर आपकी बेटी को इस विषय में कोई भी जानकारी नहीं होगी, तो अचानक पीरियड्स होने पर ब्लड देखकर वो घबरा सकती है. बेहतर होगा कि उसे इस बात का अंदाज़ा पहले से हो कि पीरियड्स होना एक नेचुरल क्रिया है, जो एक उम्र के बाद हर लड़की को होता है और इसमें घबराने जैसी कोई बात ही नहीं है.

आकर्षण: टीनएज में हार्मोनल बदलावों के कारण अपोज़िट सेक्स के प्रति आकर्षण भी सहज ही उत्पन्न हो जाता है. आज भी हमारे देश में अधिकतर स्कूलों में सेक्स एजुकेशन नहीं दी जाती, लेकिन दूसरी तरफ़ पारिवारिक माहौल भी ऐसा ही होता है कि सेक्स शब्द को ही बुरा समझा जाता है. यही वजह है कि बच्चे न कुछ पूछ पाते हैं, न समझ पाते हैं और कुंठित हो जाते हैं. इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं, जैसे- वे ग़लत संगत में पड़ सकते हैं, भविष्य में सेक्स को लेकर विकृत मानसिकता बन सकती है, ग़लत काम कर सकते हैं. बेहतर होगा कि बच्चों को समझाएं कि आप जब उनकी उम्र के थे, तो आपको भी अपने क्लास की कोई लड़की/लड़का पसंद आया करता था, यह बहुत ही नॉर्मल है. लेकिन इस अट्रैक्शन को किस तरह से पॉज़ीटिविटी में बदला जाए, इसके टिप्स देने ज़रूरी हैं, जैसे-
* अगर कोई पसंद आ रहा है, तो उससे दोस्ती करने में, बातचीत करने में कोई बुराई नहीं है.
* लड़के-लड़की अच्छे दोस्त बन सकते हैं. एक-दूसरे की मदद भी कर सकते हैं.
* बच्चों को बताएं कि यह उम्र पढ़ाई और हेल्दी कॉम्पटीशन की है.

एसटीडी: सेक्सुअली ट्रांसमीटेड डिसीज़ के बारे में भी इस उम्र में ही बच्चों को बता देना और आगाह करना भी पैरेंट्स का फ़र्ज़ है. बच्चे इस उम्र में एक्सपेरिमेंट करते ही हैं, ख़ासतौर से सेक्स को लेकर अपनी जिज्ञासाओं को शांत करने या उनके जवाब ढूंढ़ने के लिए वे बहुत ही उत्सुक रहते हैं. ऐसे में उन्हें सतर्क करना पैरेंट्स के लिए बेहद ज़रूरी है. बच्चों को एसटीडी, उससे जुड़े गंभीर परिणाम व उससे बचने के तरीक़ों के बारे में बताएं. इसी तरह आप उन्हें मास्टरबेशन के बारे में भी एजुकेट करें.
टीनएज प्रेग्नेंसी: आजकल एक्सपोज़र के चलते न स़िर्फ प्यूबर्टी जल्दी होने लगी है, बल्कि बच्चे सेक्स में भी जल्दी एंगेज होने लगे हैं. उन्हें सेक्स में जल्दी एंगेज होने के दुष्परिणामों के बारे में बताएं. किस तरह से ये चीज़ें सेहत, पढ़ाई और भविष्य को नुक़सान पहुंचा सकती हैं, इससे संबंधित लेख वगैरह पढ़ने को दे सकते हैं. टीनएज प्रेग्नेंसी के रेट्स और उससे होनेवाली समस्याओं से संबंधित आर्टिकल्स के ज़रिए भी आप बच्चों को एजुकेट व गाइड कर सकते हैं.

एडिक्शन्स: एक्सपेरिमेंट की इस उम्र में ऐसा नहीं है कि बच्चे स़िर्फ सेक्स को लेकर ही एक्सपेरिमेंट करते हैं, वो सिगरेट-शराब और बाकी चीज़ों की तरफ़ भी आकर्षित होते हैं. आप अगर बच्चों के रोल मॉडल बनना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने व्यवहार को नियंत्रित रखना होगा. साथ ही अपने बच्चों को व्यसनों से होनेवाले सेहत व पैसों के नुक़सान के विषय में समझाना होगा. उनके दोस्तों व संगत पर भी ध्यान देना होगा और अनुशासन के महत्व पर ज़ोर देना होगा.

कम्यूनिकेशन व विश्‍वास: चाहे बच्चों से कितनी भी बड़ी ग़लती हो जाए, उनमें यह कॉन्फिडेंस जगाएं कि वो अपनी ग़लती स्वीकार करें और आपसे आकर बात करें. बच्चों को आप यह भरोसा दिलाएं कि आप हर क़दम पर उनके साथ हैं, उन्हें सपोर्ट करने के लिए. अगर उनसे कोई ग़लत क़दम उठ भी जाता है, तो भी घबराने की बजाय वो आपसे शेयर करें. बच्चों को रिलेशनशिप में कम्यूनिकेशन व विश्‍वास के महत्व का एहसास दिलाएं. आप उनसे कह सकते हैं कि न स़िर्फ उनकी उम्र में, बल्कि किसी भी उम्र में किसी से भी ग़लतियां हो सकती हैं. कोई भी परफेक्ट नहीं होता, इसलिए अपराधबोध महसूस न करके कम्यूनिकेट करें.

कैसे करें बच्चों को एजुकेट?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि कहना आसान है कि बच्चों को इन बातों के बारे में बताएं, लेकिन दरअसल पैरेंट्स के मन में कई तरह की दुविधाएं होती हैं. इस विषय पर विस्तार से हमें बता रही हैं सायकोथेरेपिस्ट डॉ. चित्रा मुंशी-
* आपकी बातचीत बहुत ही कैज़ुअल होनी चाहिए. आप कॉन्फिडेंट रहें और कोई अलग-सा माहौल बनाकर बात न करें, जिससे आप के साथ-साथ बच्चे भी असहज महसूस करें.
* बच्चों को उनके बॉडी डेवलपमेंट के बारे में इस तरह से बताएं कि जिस तरह तुम बड़े हो रहे हो, हाइट बढ़ रही है, उसी तरह बॉडी ऑर्गन्स भी धीरे-धीरे बड़े होते हैं.
* इसी तरह लड़कों को नाइटफॉल के बारे में समझाना चाहिए कि बॉडी में जो चीज़ एक्सेस हो जाती है, उसे बॉडी बाहर फेंक देती है. इसमें घबराने की कोई बात नहीं. तो 10 साल के बच्चों के लिए सेक्स एजुकेशन यही और इसी तरह से होनी चाहिए.
* यह ज़रूरी है कि बच्चों को प्यूबर्टी से पहले ही मानसिक रूप से धीरे-धीरे इस विषय पर तैयार किया जाए, लेकिन आजकल प्यूबर्टी जल्दी होने लगी है. बच्चियों को छठी कक्षा में ही पीरियड्स होने लगे हैं, तो ऐसे में क्या उन्हें पांचवीं क्लास से ही सेक्स एजुकेशन देनी शुरू करनी चाहिए? जबकि यह उम्र बहुत कम होगी सेक्स एजुकेशन के लिए.
* इसलिए यह ध्यान रखना भी बेहद ज़रूरी है कि बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार ही एजुकेट करें यानी बताने का तरीक़ा ‘एज फ्रेंडली’ होना चाहिए.
* बेटी को आप अगर यह बताएंगे कि पीरिड्स में ख़ून निकलता है, तो वह डर जाएगी. आप उसे यह कहें कि हमारे शरीर में बहुत से टॉक्सिन्स होते हैं, जिनका बाहर निकलना ज़रूरी भी है और नेचुरल भी. शरीर में ऐसे कई ग़ैरज़रूरी विषैले तत्व होते हैं, जिन्हें बॉडी ख़ुद बाहर निकाल देती है, ताकि हम हेल्दी रह सकें. आप उन्हें उदाहरण देकर समझा सकते हैं कि जिस तरह अगर आंखों में कचरा चला जाए, तो उसका बाहर निकलना ज़रूरी होता है, इसी तरह शरीर के अंदर भी अलग-अलग ऑर्गन्स में कचरा जम जाता है, जो समय-समय पर बाहर निकलता है. साथ ही बच्ची को यह भी बताएं कि जो बाहर निकलता है, वो दरअसल ब्लड नहीं होता, वो अनवॉन्टेड चीज़ है, जिसका बाहर निकलना हेल्दी रहने के लिए ज़रूरी है.
* फिज़िकल अट्रैक्शन के बारे में भी ज़रूर बताएं कि यह नॉर्मल है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वो इंटिमेट हो जाएं. बच्चे इस उम्र में एक्सपेरिमेंट करते ही हैं और शायद उन्हें पता ही नहीं चलता कि कब वो सीमाएं तोड़कर ग़लत क़दम उठा लेते हैं. यह भी उन्हें अच्छी तरह से समझाएं. बेहतर होगा इंटरनेट के इस्तेमाल के समय आप साथ बैठें, बहुत ज़्यादा बच्चों को घर पर अकेला न छोड़ें.
* बच्चों को एजुकेट करने का पहला क़दम व बेहतर तरीक़ा होगा कि उन्हें क़िताबें, लेख व अच्छी पत्रिकाओं के ज़रिए समझाना शुरू करें और फिर उन विषयों पर आप बात करके उनकी शंकाएं और मन में उठ रहे सवाल व दुविधाओं को दूर करें.
* सबसे ज़रूरी है कि अगर आप रोल मॉडल नहीं बन सकते, तो बच्चों को हिदायतें न ही दें. आपको देखकर ही बच्चे अनुशासन सीखेंगे. आप अगर ख़ुद सिगरेट-शराब पीते हैं, घंटों नेट पर, फोन या टीवी पर समय व्यतीत करते हैं, तो बच्चों को आपकी कही बातें मात्र लेक्चर ही लगेंगी.

पैरेंट्स यह भी जानें

* अक्सर पैरेंट्स इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि क्या मांएं बेटियों को और पिता बेटों को इस बारे में बता सकते हैं या मां भी बेटे को और पिता भी बेटी को एजुकेट कर सकते हैं. जबकि यह एक बेहतर तरीक़ा है कि अपोज़िट सेक्स के होने के बाद भी पैरेंट्स बच्चों से इस पर बात करें. इससे वो समझ सकेंगे कि एडल्ट्स के लिए यह सामान्य बात है कि स्त्री-पुरुष के शरीर के विषयों में वो सब कुछ जानते हैं और इसमें हिचकने की कोई बात नहीं है.
* क्या लड़कियों को लड़कों के विषय में और लड़कों को लड़कियों के विषय में भी एजुकेट करना सही होगा, यह भी एक सवाल पैरेंट्स के मन में आता है? जवाब यही है कि क्यों नहीं? बच्चों को अपने शरीर के प्रति जितना कम कॉन्शियस और जितना अधिक नॉलेजेबल बनाएंगे, उतना ही उनका मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. लड़के-लड़कियों दोनों को पता होना चाहिए कि प्यूबर्टी सबके लिए सामान्य बात है, यह नेचुरल प्रोसेस है, जिससे सबको गुज़रना पड़ता है. इससे दोनों में एक-दूसरे के प्रति अधिक समानता की भावना, अधिक संवेदनशीलता व अधिक सम्मान भी पनपेगा.
* बच्चों से कभी भी सीबीआई की तरह इंटरोगेट न करें, बल्कि उनमें दिलचस्पी दिखाएं. अपनी दिनचर्या उन्हें बताएं और फिर बातों-बातों में उनकी दिनचर्या, दोस्तों का हाल, पढ़ाई, खेल, मूवीज़ आदि के बारे में पूछें. इससे रिश्ते सहज होंगे और शेयरिंग ज़्यादा से ज़्यादा होगी.
* बच्चों के दोस्तों को भी घर पर कभी डिनर, पार्टी या लंच पर आमंत्रित करें. इससे आपको अंदाज़ा होगा कि बच्चों के दोस्त कौन-कौन हैं और किस तरह की संगत में बच्चे दिनभर रहते हैं.
* बढ़ते बच्चों में बहुत जल्दबाज़ी होती है ख़ुद को परिपक्व व ज़िम्मेदार दिखाने की, क्योंकि वो चाहते हैं कि लोग उन्हें गंभीरता से लें. आप अपने बच्चों पर भरोसा जताकर उन्हें कुछ ज़िम्मेदारियां ज़रूर सौंपे. ऐसे में उनका आत्मविश्‍वास बढ़ेगा और वो ख़ुद को महत्वपूर्ण समझकर और भी परिपक्वता व ज़िम्मेदारी से काम लेंगे.

– गीता शर्मा

 

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पर्सनल प्रॉब्लम्स: मुझे हमेशा कमज़ोरी क्यों महसूस होती है? ( Why Am I Tired All The Time?)

Personal Problems, कमज़ोरी
मैं 21 वर्षीया छात्रा हूं. मुझे हमेशा कमज़ोरी महसूस होती है. ब्लड टेस्ट में हीमोग्लोबिन कम आया है और गायनाकोलॉजिस्ट ने हैवी ब्लीडिंग को इसका कारण बताया, साथ ही पीरियड्स के 5वें दिन से 3 हफ़्तों के लिए हार्मोनल पिल्स लेने की सलाह दी है. क्या यह ज़रूरी है? कृपया, मार्गदर्शन करें.
– रेखा खोसला, नोएडा.

मैं समझ सकती हूं कि इस उम्र में हार्मोनल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स लेने की सलाह को लेकर आप परेशान हैं. दरअसल, हार्मोनल पिल्स के ज़रिए एक आर्टिफिशियल साइकल तैयार होता है, जिससे आपको ब्लीडिंग कम होती है. पीरियड्स के 5वें दिन से पिल्स लेने के कारण शुरुआत से ही आपके हार्मोंस दब जाते हैं. क्योंकि आपका हीमोग्लोबिन भी कम है, इसलिए दवाओं के साथ-साथ यह ध्यान देना भी ज़रूरी है कि आपको बेवजह हैवी ब्लीडिंग तो नहीं हो रही.

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Personal Problems, कमज़ोरी
मैं 35 वर्षीया दो बच्चों की मां हूं. हम तीसरा बच्चा नहीं चाहते थे, पर चूंकि मैंने कंसीव कर लिया था, इसलिए एबॉर्शन करवाना पड़ा. एबॉर्शन के तुरंत बाद डॉक्टर ने गर्भनिरोधक इस्तेमाल करने की सलाह दी. पर अगर इनका इस्तेमाल मैं कुछ दिनों बाद करूं, तो क्या इस बीच कंसीव करने की संभावना है?
– कुसुम जोशी, जबलपुर.

एबॉर्शन के 10-12 दिनों बाद ही महिलाओं में ओव्यूलेशन शुरू हो जाता है, इसलिए अगर आपको बच्चे नहीं चाहिए, तो तुरंत किसी गर्भनिरोधक का इस्तेमाल शुरू कर दें.
बार-बार एबॉर्शन से पेल्विक इंफेक्शन, एब्नॉर्मल डिस्चार्ज और पेट में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए तुरंत किसी गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करें.

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कमज़ोरी व थकान को दूर भगाएं

  • अपने खानपान पर ध्यान रखें. रोज़ाना सही समय और सही मात्रा में खाएं. ओवर ईटिंग से बचें.
  • अपने फैमिली डॉक्टर से सलाह लें कि आपके लिए क्या खाना सही है और क्या नहीं. ज़रूरी नहीं कि आपकी मनपसंद चीज़ आपके शरीर के प्रवृत्ति के उनकूल हो.
  • रोज़ाना ध्यान, प्राणायाम व हल्की एक्सरसाइज़ को अपने रूटीन में शामिल करें.
  • बेवजह स्ट्रेस न लें. छोटी सी छोटी समस्या को बड़ा न बनाएं.
  • उम्र के अनुसार सभी ज़रूरी टेस्ट्स करवाते रहें, ताकि कोई भी परेशानी शुरुआती स्थिति में ही पता चल जाए.
  • परिवार के साथ ज़्यादा से ज़्यादा क्वालिटी टाइम बिताएं.
  • हमेशा ख़ुश रहें और दूसरों को भी ख़ुश रखें.
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 डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

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