Tag Archives: periods

पर्सनल प्रॉब्लम्स: सेक्स के दौरान वेजाइनल ब्लीडिंग के क्या कारण हो सकते हैं? (Causes Of Vaginal Bleeding During Sex)

Vaginal Bleeding, During Sex
मैं 27 वर्षीया शादीशुदा महिला हूं. पिछले कुछ हफ़्तों से सेक्स के दौरान मुझे वेजाइनल ब्लीडिंग होती है. इसका क्या कारण हो सकता है? क्या मुझे डॉक्टर को मिलना चाहिए.
– युक्ता कौल, नोएडा.

बिल्कुल, आपको तुरंत किसी गायनाकोलॉजिस्ट को कंसल्ट करना चाहिए. डॉक्टर आपकी जांच करेंगे कि कहीं वेजाइना या सर्विक्स में कोई सूजन या बढ़ोतरी तो नहीं है. इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे- इंफेक्शन्स, ड्राई वेजाइना, सेक्सुअल अराउज़ल के व़क्त बार्थोलिन ग्लैंड में लुब्रिकेशन की कमी, वेजाइना या सर्विक्स का प्री कैंसर आदि. इसलिए सबसे ज़रूरी है कि आप जल्द से जल्द किसी गायनाकोलॉजिस्ट को मिलें, ताकि वो ब्लीडिंग का कारण पता कर सके.

यह भी पढ़ें: क्या पीरियड्स न आना प्रेग्नेंसी की निशानी है?

 Vaginal Bleeding, During Sex
यह भी पढ़ें: वेजाइनल डिस्चार्ज का क्या कारण हो सकता है?
मेरी कज़िन 16 साल की है और 13 साल की उम्र से ही उसके पीरियड्स शुरू हो गए थे, पर पिछले एक साल से उसके पीरियड्स अनियमित हैं. क्या यह सामान्य है?
– प्रिया सेठी, बरेली.

आमतौर पर 12 से 14 साल की उम्र में लड़कियों के पीरियड्स शुरू हो जाते हैं, पर पीरियड्स को नियमित होने में कुछ साल लग जाते हैं. इस अवस्था को हाइपोथैलामिक पिट्यूटरी ओवेरियन एक्सिस डिस्फंक्शन कहते हैं. इस उम्र में ज़्यादातर लड़कियां अपने वज़न को लेकर काफ़ी सचेत रहती हैं, इसलिए अंडरवेट और ओवरवेट दोनों ही तरह की लड़कियों के पीरियड्स पर इसका प्रभाव पड़ता है. इसके अलावा अगर कोई बहुत ज़्यादा एक्सरसाइज़ करती है या उसे पॉलिसिस्टिक ओवरीज़ या थायरॉइड जैसे हार्मोनल प्रॉब्लम्स हैं, तो भी उसके पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं.

यह भी पढ़ें:  शारीरिक संबंध के बाद १-२ दिन तक ब्लीडिंग क्यों होती है?

 

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

 

 

 

पर्सनल प्रॉब्लम्स: दूसरे बच्चे के लिए क्या एहतियात बरतनी चाहिए? (Second Baby Planning & Precaution Tips)

Second Baby, Planning, Precaution Tips
मेरी उम्र 34 और मेरे पति की 36 है. हमारा 7 साल का एक बेटा है. दूसरे बच्चे के लिए हमें क्या एहतियात बरतनी चाहिए?
– अदिती श्रीवास्तव, मेरठ.

अगर आप दूसरे बच्चे के बारे में सोच रही हैं, तो बिल्कुल भी देर न करें, क्योंकि जल्द ही आप 35 की होनेवाली हैं. अगर आप किसी तरह के प्रीकॉशन्स ले रही हैं, तो तुरंत बंद कर दें और फॉलिक एसिड टैबलेट्स लेना शुरू कर दें. अगर आपको डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर या थायरॉइड जैसी कोई समस्या है, तो सबसे पहले किसी अच्छे डॉक्टर से मिलकर तसल्ली कर लें कि आपका शरीर गर्भधारण के लिए तैयार है. अगर नेचुरल तरी़के से आप 3-6 महीने के भीतर गर्भधारण करने में असक्षम हैं, तो आपको किसी गाइनाकोलॉजिस्ट से मिलना होगा.

पर्सनल प्रॉब्लम्स: दूसरे बच्चे के लिए क्या एहतियात बरतनी चाहिए? (Second Baby Planning & Precaution Tips)
मैं 24 साल की युवती हूं. पीरियड्स के दौरान मुझे व्हाइट डिस्चार्ज होता है, जिससे बदबू आती है और खुजली भी होती है. मुझे क्या करना चाहिए?
– धरा पंडित, श्रीनगर.

पीरियड्स के दौरान व्हाइट डिस्चार्ज दिखना मुश्किल है. हो सकता है, सैनिटरी पैड्स के कारण जलन व खुजली हो रही हो. खुजली और वेजाइनल डिस्चार्ज का कारण वेजाइना में बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन हो सकता है. इसके लिए गाइनाकोलॉजिस्ट आपको 3-6 दिनों के लिए वेजाइनल टैबलेट्स, एंटी फंगल मेडिसिन्स, एंटी बायोटिक्स या कोई क्रीम दे सकते हैं. ध्यान रहे कि हमेशा कॉटन की अंडरवेयर्स ही पहनें और मेडिकेटेड पेरिनियल वॉशेज़ (प्राइवेट पार्ट के लिए इस्तेमाल होनेवाले लिक्विड वॉशेज़) से दूर रहें.

 

 

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

 

 

पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या पीरियड्स न आना प्रेग्नेंसी की निशानी है? (Missed Periods This Month, Am I Pregnant?)

Missed Periods
मैं 25 वर्षीया शादीशुदा महिला हूं. मेरे पति को गर्भनिरोधक (Contraceptives) का इस्तेमाल करना पसंद नहीं. इस महीने मेरे पीरियड्स (Periods) नहीं आए. क्या मैं प्रेग्नेंट (Pregnant) हूं?
– शांति वर्मा, सूरत.

सेक्स के दौरान कोई न कोई गर्भनिरोधक ज़रूर इस्तेमाल करना चाहिए. ऐसा न करने से आप अनचाही प्रेग्नेंसी या सेक्सुअली ट्रांसफर होनेवाले इंफेक्शन्स की शिकार हो सकती हैं. ऐसी स्थिति में प्रेग्नेंसी का पता लगाने के लिए आपको यूरिन प्रेग्नेंसी टेस्ट करना चाहिए. अगर फिर भी आपको कोई संदेह है, तो आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए. आप डॉक्टर से गर्भनिरोधक के बेहतर विकल्पों के बारे में जानकारी हासिल कर सकती हैं. किसी भी तरह के गर्भनिरोधक के साथ संबंध स्थापित करते समय हमेशा कंडोम का इस्तेमाल करें, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति सामने न आए.

यह भी पढ़ें:  कंडोम के इस्तेमाल से प्राइवेट पार्ट में खुजली व जलन क्यों होती है?

Missed Periods
मैं 50 वर्षीया महिला हूं. आजकल पीरियड्स (Periods) के दौरान मुझे हैवी ब्लीडिंग और बहुत दर्द होता है, जबकि पहले ऐसा नहीं होता था. मेरी सहेलियां कहती हैं कि यह मेनोपॉज़ (Menopause) के कारण है. क्या मुझे डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
– रजनी सोनी, पटना.

पीड़ादायक हैवी ब्लीडिंग का आम कारण फायब्रॉइड्स है. ये कैंसरयुक्त नहीं होते, पर आपकी जैसी स्थिति में इनका इलाज करवाना ज़रूरी है. मेनोपॉज़ के कारण माहवारी अनियमित होना, अधिक रक्तस्राव होना आम बात है, पर इसमें कभी इतना दर्द नहीं होता. हैवी ब्लीडिंग के कारण कहीं आप एनीमिया की शिकार न हो जाएं, इसलिए आयरन सप्लीमेंट्स लेना शुरू कर दें. आपको किसी अच्छे गाइनाकोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए. वो आपको प्रोजेस्टेरॉन टैबलेट्स या हिस्टेरेक्टॉमी की सलाह दे सकते हैं. आजकल नया हार्मोन डिलीवरी सिस्टम आया है, जिसे मिरेना इंट्रा युटेराइन सिस्टम कहते हैं. अगर आप हिस्टेरेक्टॉमी नहीं कराना चाहतीं, तो इसका चुनाव कर
सकती हैं.

यह भी पढ़ें: शारीरिक संबंध के बाद १-२ दिन तक ब्लीडिंग क्यों होती है?

 

 

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

महिलाओं की ऐसी ही अन्य पर्सनल प्रॉब्लम्स पढ़ें

पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या कॉपर टी निकलवाने के तुरंत बाद फर्टिलिटी लौट आती है? (How Long After IUD Removal Can I Get Pregnant?)

Pregnant, copper t
मैं 32 वर्षीया महिला हूं व मेरा 4 साल का बच्चा है. डिलीवरी के छह महीने बाद से ही मैं इंट्रायूटेराइन डिवाइस कॉपर टी इस्तेमाल कर रही हूं. मैं यह जानना चाहती हूं कि क्या कॉपर टी निकलवाने के तुरंत बाद मेरी फर्टिलिटी लौट आएगी या फिर मुझे कंसीव करने में बहुत ज़्यादा समय लगेगा?
– जयश्री मिश्रा, राजकोट.

आपको बता दें कि इंट्रायूटेराइन डिवाइस कॉपर टी निकलवाने के तुरंत बाद ही आपकी फर्टिलिटी वापस आ जाएगी, जबकि हार्मोंसवाले गर्भनिरोधक साधनों का इस्तेमाल करनेवाली महिलाओं के साथ ऐसा नहीं होता. उनकी फर्टिलिटी लौटने में 3 से 6 महीने का समय लगता है, इसलिए अपने पति से इस बारे में बात करें और जब आप प्रेग्नेंसी के लिए तैयार हों, तभी कॉपर टी निकलवाएं.

यह भी पढ़ें: वेजाइनल डिस्चार्ज का क्या कारण हो सकता है?

 

Pregnant, copper t
मैं 50 वर्षीया महिला हूं और पिछले साल ही मेरे पीरियड्स बंद हुए हैं. पिछले दो महीने से मुझे अक्सर योनि में खुजली व डिस्चार्ज हो रहा है. क्या मुझे डॉक्टर से मिलना पड़ेगा?
– तुलिका कमानी, हैदराबाद.

आपका मेनोपॉज़ हो चुका है और आपके द्वारा बताए लक्षणों से लग रहा है कि आपको इंफेक्शन है. सबसे पहले आपको चेकअप कराना पड़ेगा, ताकि पता चल सके कि आपको किस तरह का इंफेक्शन है, जिससे सही इलाज किया जा सके. इसके अलावा आपको पैप स्मियर टेस्ट और ब्लड शुगर चेकअप (फास्टिंग और पोस्ट लंच) ज़रूर कराना चाहिए.

यह भी पढ़ें: कंडोम के इस्तेमाल से प्राइवेट पार्ट में खुजली व जलन क्यों होती है?

 

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

महिलाओं की ऐसी ही अन्य पर्सनल प्रॉब्लम्स पढ़ें

 

बड़े होते बच्चों को ज़रूर बताएं ये बातें (Important Things Growing Children Should Know)

Bade hote bachche final

यौवन को छू लेने की हसरत… बड़ों-सा बड़ा बनने की चाहत… कभी घंटों आईने में ख़ुद को निहारना… कभी छोटी-सी ही बात पर बिगड़ जाना… कभी धड़कनों का अचानक बेक़ाबू हो जाना, कभी बेपरवाह-सा जीने का मज़ा लेना… दोस्तों की संगत, अदाओं में अजीब-सी रंगत… हर बात पर ढेरों सवाल और कभी सवालों के बेतुके-से जवाब… कुछ अलग ही होता है इस उम्र का हिसाब…

जी हां, थोड़ी मासूमियत, थोड़ी नादानी, थोड़ा अल्हड़पन और बहुत-सी अपरिपक्वता… कुछ ऐसी ही होती है किशोरावस्था. कई सवाल मन में आते हैं, कई आशंकाएं होती हैं, असमंजस भी होता है, शंकाएं भी होती हैं… कुल मिलाकर कंफ्यूज़न की स्टेज व दौर से गुज़र रहे होते हैं इस उम्र में बच्चे. ऐसे में सही पैरेंटिंग से आप अपने बच्चों की ज़रूर मदद कर सकते हैं. उन्हें सही उम्र में उचित मार्गदर्शन देकर और उनके मन में सवालों के पनपने से पहले ही उनके जवाब व हल देकर. तो हर पैरेंट्स के लिए ज़रूरी है कि वो अपने बड़े होते बच्चों को कुछ बातें ज़रूर बताएं.

शरीर में होनेवाले बदलाव: किशोरावस्था की ओर बढ़ते बच्चों के शरीर में बहुत-से बदलाव होते हैं. अचानक शरीर में आ रहे इन परिवर्तनों से बच्चे घबरा जाते हैं. उनके मन में भी ढेर सारे प्रश्‍न उठते हैं. उन्हें बार-बार यह एश्योरेंस चाहिए होता है कि वे सामान्य हैं. ऐसे में पैरेंट्स की ज़िम्मेदारी बनती है कि उन्हें यह महसूस कराएं कि ये तमाम बदलाव सामान्य हैं. आप भी जब उनकी उम्र में थे, तो इन्हीं बदलावों से गुज़रे थे.

प्यूबर्टी: प्यूबिक हेयर, आवाज़ में बदलाव, चेहरे पर अचानक ढेर सारे पिंपल्स, क़द का बढ़ना, हार्मोंस में परिवर्तन आदि के कारणों को बड़े होते बच्चे समझ नहीं पाते. हालांकि आज के इंटरनेट के युग में बहुत-सी चीज़ों के बारे में बच्चे पहले से ही जान ज़रूर लेते हैं, लेकिन वे उन्हें ठीक से समझ नहीं पाते. यहां पैरेंट्स के लिए सबसे ज़रूरी यह है कि आप इंतज़ार न करें कि बच्चा आकर आपसे सवाल करे. बेहतर होगा कि समय से पहले ही आप उन्हें बातचीत के दौरान या अन्य तरीक़ों से इन चीज़ों के बारे में एजुकेट करते रहें. इससे बच्चे मानसिक रूप से तैयार रहेंगे और ग़लत जगहों से जानकारी इकट्ठा नहीं करेंगे.

मासिक धर्म: अगर आप इस इंतज़ार में हैं कि जब बच्ची को पीरियड्स शुरू होंगे, तब इस बारे में उसे बताएंगी, तो आप ग़लत हैं. अगर आपकी बेटी को इस विषय में कोई भी जानकारी नहीं होगी, तो अचानक पीरियड्स होने पर ब्लड देखकर वो घबरा सकती है. बेहतर होगा कि उसे इस बात का अंदाज़ा पहले से हो कि पीरियड्स होना एक नेचुरल क्रिया है, जो एक उम्र के बाद हर लड़की को होता है और इसमें घबराने जैसी कोई बात ही नहीं है.

आकर्षण: टीनएज में हार्मोनल बदलावों के कारण अपोज़िट सेक्स के प्रति आकर्षण भी सहज ही उत्पन्न हो जाता है. आज भी हमारे देश में अधिकतर स्कूलों में सेक्स एजुकेशन नहीं दी जाती, लेकिन दूसरी तरफ़ पारिवारिक माहौल भी ऐसा ही होता है कि सेक्स शब्द को ही बुरा समझा जाता है. यही वजह है कि बच्चे न कुछ पूछ पाते हैं, न समझ पाते हैं और कुंठित हो जाते हैं. इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं, जैसे- वे ग़लत संगत में पड़ सकते हैं, भविष्य में सेक्स को लेकर विकृत मानसिकता बन सकती है, ग़लत काम कर सकते हैं. बेहतर होगा कि बच्चों को समझाएं कि आप जब उनकी उम्र के थे, तो आपको भी अपने क्लास की कोई लड़की/लड़का पसंद आया करता था, यह बहुत ही नॉर्मल है. लेकिन इस अट्रैक्शन को किस तरह से पॉज़ीटिविटी में बदला जाए, इसके टिप्स देने ज़रूरी हैं, जैसे-
* अगर कोई पसंद आ रहा है, तो उससे दोस्ती करने में, बातचीत करने में कोई बुराई नहीं है.
* लड़के-लड़की अच्छे दोस्त बन सकते हैं. एक-दूसरे की मदद भी कर सकते हैं.
* बच्चों को बताएं कि यह उम्र पढ़ाई और हेल्दी कॉम्पटीशन की है.

एसटीडी: सेक्सुअली ट्रांसमीटेड डिसीज़ के बारे में भी इस उम्र में ही बच्चों को बता देना और आगाह करना भी पैरेंट्स का फ़र्ज़ है. बच्चे इस उम्र में एक्सपेरिमेंट करते ही हैं, ख़ासतौर से सेक्स को लेकर अपनी जिज्ञासाओं को शांत करने या उनके जवाब ढूंढ़ने के लिए वे बहुत ही उत्सुक रहते हैं. ऐसे में उन्हें सतर्क करना पैरेंट्स के लिए बेहद ज़रूरी है. बच्चों को एसटीडी, उससे जुड़े गंभीर परिणाम व उससे बचने के तरीक़ों के बारे में बताएं. इसी तरह आप उन्हें मास्टरबेशन के बारे में भी एजुकेट करें.
टीनएज प्रेग्नेंसी: आजकल एक्सपोज़र के चलते न स़िर्फ प्यूबर्टी जल्दी होने लगी है, बल्कि बच्चे सेक्स में भी जल्दी एंगेज होने लगे हैं. उन्हें सेक्स में जल्दी एंगेज होने के दुष्परिणामों के बारे में बताएं. किस तरह से ये चीज़ें सेहत, पढ़ाई और भविष्य को नुक़सान पहुंचा सकती हैं, इससे संबंधित लेख वगैरह पढ़ने को दे सकते हैं. टीनएज प्रेग्नेंसी के रेट्स और उससे होनेवाली समस्याओं से संबंधित आर्टिकल्स के ज़रिए भी आप बच्चों को एजुकेट व गाइड कर सकते हैं.

एडिक्शन्स: एक्सपेरिमेंट की इस उम्र में ऐसा नहीं है कि बच्चे स़िर्फ सेक्स को लेकर ही एक्सपेरिमेंट करते हैं, वो सिगरेट-शराब और बाकी चीज़ों की तरफ़ भी आकर्षित होते हैं. आप अगर बच्चों के रोल मॉडल बनना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने व्यवहार को नियंत्रित रखना होगा. साथ ही अपने बच्चों को व्यसनों से होनेवाले सेहत व पैसों के नुक़सान के विषय में समझाना होगा. उनके दोस्तों व संगत पर भी ध्यान देना होगा और अनुशासन के महत्व पर ज़ोर देना होगा.

कम्यूनिकेशन व विश्‍वास: चाहे बच्चों से कितनी भी बड़ी ग़लती हो जाए, उनमें यह कॉन्फिडेंस जगाएं कि वो अपनी ग़लती स्वीकार करें और आपसे आकर बात करें. बच्चों को आप यह भरोसा दिलाएं कि आप हर क़दम पर उनके साथ हैं, उन्हें सपोर्ट करने के लिए. अगर उनसे कोई ग़लत क़दम उठ भी जाता है, तो भी घबराने की बजाय वो आपसे शेयर करें. बच्चों को रिलेशनशिप में कम्यूनिकेशन व विश्‍वास के महत्व का एहसास दिलाएं. आप उनसे कह सकते हैं कि न स़िर्फ उनकी उम्र में, बल्कि किसी भी उम्र में किसी से भी ग़लतियां हो सकती हैं. कोई भी परफेक्ट नहीं होता, इसलिए अपराधबोध महसूस न करके कम्यूनिकेट करें.

कैसे करें बच्चों को एजुकेट?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि कहना आसान है कि बच्चों को इन बातों के बारे में बताएं, लेकिन दरअसल पैरेंट्स के मन में कई तरह की दुविधाएं होती हैं. इस विषय पर विस्तार से हमें बता रही हैं सायकोथेरेपिस्ट डॉ. चित्रा मुंशी-
* आपकी बातचीत बहुत ही कैज़ुअल होनी चाहिए. आप कॉन्फिडेंट रहें और कोई अलग-सा माहौल बनाकर बात न करें, जिससे आप के साथ-साथ बच्चे भी असहज महसूस करें.
* बच्चों को उनके बॉडी डेवलपमेंट के बारे में इस तरह से बताएं कि जिस तरह तुम बड़े हो रहे हो, हाइट बढ़ रही है, उसी तरह बॉडी ऑर्गन्स भी धीरे-धीरे बड़े होते हैं.
* इसी तरह लड़कों को नाइटफॉल के बारे में समझाना चाहिए कि बॉडी में जो चीज़ एक्सेस हो जाती है, उसे बॉडी बाहर फेंक देती है. इसमें घबराने की कोई बात नहीं. तो 10 साल के बच्चों के लिए सेक्स एजुकेशन यही और इसी तरह से होनी चाहिए.
* यह ज़रूरी है कि बच्चों को प्यूबर्टी से पहले ही मानसिक रूप से धीरे-धीरे इस विषय पर तैयार किया जाए, लेकिन आजकल प्यूबर्टी जल्दी होने लगी है. बच्चियों को छठी कक्षा में ही पीरियड्स होने लगे हैं, तो ऐसे में क्या उन्हें पांचवीं क्लास से ही सेक्स एजुकेशन देनी शुरू करनी चाहिए? जबकि यह उम्र बहुत कम होगी सेक्स एजुकेशन के लिए.
* इसलिए यह ध्यान रखना भी बेहद ज़रूरी है कि बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार ही एजुकेट करें यानी बताने का तरीक़ा ‘एज फ्रेंडली’ होना चाहिए.
* बेटी को आप अगर यह बताएंगे कि पीरिड्स में ख़ून निकलता है, तो वह डर जाएगी. आप उसे यह कहें कि हमारे शरीर में बहुत से टॉक्सिन्स होते हैं, जिनका बाहर निकलना ज़रूरी भी है और नेचुरल भी. शरीर में ऐसे कई ग़ैरज़रूरी विषैले तत्व होते हैं, जिन्हें बॉडी ख़ुद बाहर निकाल देती है, ताकि हम हेल्दी रह सकें. आप उन्हें उदाहरण देकर समझा सकते हैं कि जिस तरह अगर आंखों में कचरा चला जाए, तो उसका बाहर निकलना ज़रूरी होता है, इसी तरह शरीर के अंदर भी अलग-अलग ऑर्गन्स में कचरा जम जाता है, जो समय-समय पर बाहर निकलता है. साथ ही बच्ची को यह भी बताएं कि जो बाहर निकलता है, वो दरअसल ब्लड नहीं होता, वो अनवॉन्टेड चीज़ है, जिसका बाहर निकलना हेल्दी रहने के लिए ज़रूरी है.
* फिज़िकल अट्रैक्शन के बारे में भी ज़रूर बताएं कि यह नॉर्मल है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वो इंटिमेट हो जाएं. बच्चे इस उम्र में एक्सपेरिमेंट करते ही हैं और शायद उन्हें पता ही नहीं चलता कि कब वो सीमाएं तोड़कर ग़लत क़दम उठा लेते हैं. यह भी उन्हें अच्छी तरह से समझाएं. बेहतर होगा इंटरनेट के इस्तेमाल के समय आप साथ बैठें, बहुत ज़्यादा बच्चों को घर पर अकेला न छोड़ें.
* बच्चों को एजुकेट करने का पहला क़दम व बेहतर तरीक़ा होगा कि उन्हें क़िताबें, लेख व अच्छी पत्रिकाओं के ज़रिए समझाना शुरू करें और फिर उन विषयों पर आप बात करके उनकी शंकाएं और मन में उठ रहे सवाल व दुविधाओं को दूर करें.
* सबसे ज़रूरी है कि अगर आप रोल मॉडल नहीं बन सकते, तो बच्चों को हिदायतें न ही दें. आपको देखकर ही बच्चे अनुशासन सीखेंगे. आप अगर ख़ुद सिगरेट-शराब पीते हैं, घंटों नेट पर, फोन या टीवी पर समय व्यतीत करते हैं, तो बच्चों को आपकी कही बातें मात्र लेक्चर ही लगेंगी.

पैरेंट्स यह भी जानें

* अक्सर पैरेंट्स इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि क्या मांएं बेटियों को और पिता बेटों को इस बारे में बता सकते हैं या मां भी बेटे को और पिता भी बेटी को एजुकेट कर सकते हैं. जबकि यह एक बेहतर तरीक़ा है कि अपोज़िट सेक्स के होने के बाद भी पैरेंट्स बच्चों से इस पर बात करें. इससे वो समझ सकेंगे कि एडल्ट्स के लिए यह सामान्य बात है कि स्त्री-पुरुष के शरीर के विषयों में वो सब कुछ जानते हैं और इसमें हिचकने की कोई बात नहीं है.
* क्या लड़कियों को लड़कों के विषय में और लड़कों को लड़कियों के विषय में भी एजुकेट करना सही होगा, यह भी एक सवाल पैरेंट्स के मन में आता है? जवाब यही है कि क्यों नहीं? बच्चों को अपने शरीर के प्रति जितना कम कॉन्शियस और जितना अधिक नॉलेजेबल बनाएंगे, उतना ही उनका मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. लड़के-लड़कियों दोनों को पता होना चाहिए कि प्यूबर्टी सबके लिए सामान्य बात है, यह नेचुरल प्रोसेस है, जिससे सबको गुज़रना पड़ता है. इससे दोनों में एक-दूसरे के प्रति अधिक समानता की भावना, अधिक संवेदनशीलता व अधिक सम्मान भी पनपेगा.
* बच्चों से कभी भी सीबीआई की तरह इंटरोगेट न करें, बल्कि उनमें दिलचस्पी दिखाएं. अपनी दिनचर्या उन्हें बताएं और फिर बातों-बातों में उनकी दिनचर्या, दोस्तों का हाल, पढ़ाई, खेल, मूवीज़ आदि के बारे में पूछें. इससे रिश्ते सहज होंगे और शेयरिंग ज़्यादा से ज़्यादा होगी.
* बच्चों के दोस्तों को भी घर पर कभी डिनर, पार्टी या लंच पर आमंत्रित करें. इससे आपको अंदाज़ा होगा कि बच्चों के दोस्त कौन-कौन हैं और किस तरह की संगत में बच्चे दिनभर रहते हैं.
* बढ़ते बच्चों में बहुत जल्दबाज़ी होती है ख़ुद को परिपक्व व ज़िम्मेदार दिखाने की, क्योंकि वो चाहते हैं कि लोग उन्हें गंभीरता से लें. आप अपने बच्चों पर भरोसा जताकर उन्हें कुछ ज़िम्मेदारियां ज़रूर सौंपे. ऐसे में उनका आत्मविश्‍वास बढ़ेगा और वो ख़ुद को महत्वपूर्ण समझकर और भी परिपक्वता व ज़िम्मेदारी से काम लेंगे.

– गीता शर्मा

 

अधिक पैरेंटिंग टिप्स के लिए यहां क्लिक करेंः Parenting Guide 

पर्सनल प्रॉब्लम्स: मुझे हमेशा कमज़ोरी क्यों महसूस होती है? ( Why Am I Tired All The Time?)

Personal Problems, कमज़ोरी
मैं 21 वर्षीया छात्रा हूं. मुझे हमेशा कमज़ोरी महसूस होती है. ब्लड टेस्ट में हीमोग्लोबिन कम आया है और गायनाकोलॉजिस्ट ने हैवी ब्लीडिंग को इसका कारण बताया, साथ ही पीरियड्स के 5वें दिन से 3 हफ़्तों के लिए हार्मोनल पिल्स लेने की सलाह दी है. क्या यह ज़रूरी है? कृपया, मार्गदर्शन करें.
– रेखा खोसला, नोएडा.

मैं समझ सकती हूं कि इस उम्र में हार्मोनल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स लेने की सलाह को लेकर आप परेशान हैं. दरअसल, हार्मोनल पिल्स के ज़रिए एक आर्टिफिशियल साइकल तैयार होता है, जिससे आपको ब्लीडिंग कम होती है. पीरियड्स के 5वें दिन से पिल्स लेने के कारण शुरुआत से ही आपके हार्मोंस दब जाते हैं. क्योंकि आपका हीमोग्लोबिन भी कम है, इसलिए दवाओं के साथ-साथ यह ध्यान देना भी ज़रूरी है कि आपको बेवजह हैवी ब्लीडिंग तो नहीं हो रही.

यह भी पढ़ें: शारीरिक संबंध के बाद १-२ दिन तक ब्लीडिंग क्यों होती है?

Personal Problems, कमज़ोरी
मैं 35 वर्षीया दो बच्चों की मां हूं. हम तीसरा बच्चा नहीं चाहते थे, पर चूंकि मैंने कंसीव कर लिया था, इसलिए एबॉर्शन करवाना पड़ा. एबॉर्शन के तुरंत बाद डॉक्टर ने गर्भनिरोधक इस्तेमाल करने की सलाह दी. पर अगर इनका इस्तेमाल मैं कुछ दिनों बाद करूं, तो क्या इस बीच कंसीव करने की संभावना है?
– कुसुम जोशी, जबलपुर.

एबॉर्शन के 10-12 दिनों बाद ही महिलाओं में ओव्यूलेशन शुरू हो जाता है, इसलिए अगर आपको बच्चे नहीं चाहिए, तो तुरंत किसी गर्भनिरोधक का इस्तेमाल शुरू कर दें.
बार-बार एबॉर्शन से पेल्विक इंफेक्शन, एब्नॉर्मल डिस्चार्ज और पेट में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए तुरंत किसी गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करें.

यह भी पढ़ें: क्या गर्भाशय का न होना मुमकिन है?
 

कमज़ोरी व थकान को दूर भगाएं

  • अपने खानपान पर ध्यान रखें. रोज़ाना सही समय और सही मात्रा में खाएं. ओवर ईटिंग से बचें.
  • अपने फैमिली डॉक्टर से सलाह लें कि आपके लिए क्या खाना सही है और क्या नहीं. ज़रूरी नहीं कि आपकी मनपसंद चीज़ आपके शरीर के प्रवृत्ति के उनकूल हो.
  • रोज़ाना ध्यान, प्राणायाम व हल्की एक्सरसाइज़ को अपने रूटीन में शामिल करें.
  • बेवजह स्ट्रेस न लें. छोटी सी छोटी समस्या को बड़ा न बनाएं.
  • उम्र के अनुसार सभी ज़रूरी टेस्ट्स करवाते रहें, ताकि कोई भी परेशानी शुरुआती स्थिति में ही पता चल जाए.
  • परिवार के साथ ज़्यादा से ज़्यादा क्वालिटी टाइम बिताएं.
  • हमेशा ख़ुश रहें और दूसरों को भी ख़ुश रखें.
rajeshree-kumar-167x250

 

 डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

 

महिलाओं की ऐसी ही अन्य पर्सनल प्रॉब्लम्स पढ़ें

लड़कियों के पीरियड्स के बारे में वरुण धवन ने कही ये ज़रूरी बात (Don’t let periods shut girls out of schools- Varun Dhawan)

वरुण धवन
वरुण धवनवरुण धवन अपनी राय किसी न किसी मुद्दे पर रखते रहते हैं. इस बार उन्होंने एक ऐसे मुद्दे को उठाया है, जिसकी तरफ़ कम लोगों का ही ध्यान जाता है.
 इस बार उन्होंने स्कूल गर्ल्स के लिए ऐसी बात कही है, जो काबिले तारीफ़ है.
वरुण ने ट्वीट करते हुए कहा कि हर 5 में से 1 लड़की को अपना स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है. पीरियड्स की वजह किसी लड़की को अपना स्कूल न छोड़ना पड़े और उन्हें स्कूल भेजा जाए, ये अपील वरुण ने सभी से की है.
वरुण ने अपने ट्वीट के साथ एक फोटो भी शेयर की है और लिखा, “लड़कियों को फिर से स्कूल भेजने में हेल्प करें. मैंने अपना काम किया अब आपकी बारी है.”
वरुण की ये सोच यक़ीनन उन लोगों की आख़ें खोलेगी, जो अपनी छोटी सोच के चलते लड़कियों को पीरियड्स होने के बाद स्कूल छोड़ने पर मजबूर करते हैं.

 

पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या शादी से पहले गायनाकोलॉजिस्ट से मिलना ज़रूरी है? (Should I see a gynecologist before my marriage?)

gynecologist problems

मैं 26 वर्षीया युवती हूं और छह महीने बाद मेरी शादी होनेवाली है. आज तक मैं कभी गायनाकोलॉजिस्ट (Gynecologist) से नहीं मिली, पर मेरी सहेलियों का कहना है कि शादी से पहले मुझे एक बार गायनाकोलॉजिस्ट से ज़रूर मिलना चाहिए. आप क्या सलाह देंगी? मुझे क्या करना चाहिए? 

 

– स्नेहा यादव, इंदौर.

मैं समझ सकती हूं कि आपको थोड़ा अजीब लग रहा होगा, क्योंकि आप आज तक कभी किसी गायनाकोलॉजिस्ट (gynecologist) से नहीं मिली हैं, पर इसके लिए आपको ज़्यादा संकोच करने की ज़रूरत नहीं. आमतौर पर ज़्यादातर कपल्स शादी से पहले काउंसलिंग के लिए गायनाकोलॉजिस्ट से मिलते हैं. उनसे मिलकर आप गर्भनिरोध के ऑप्शन्स के बारे में जानकारी व सलाह ले सकती हैं. इसके अलावा आप उनसे फैमिली प्लानिंग या उससे जुड़ी अपनी ग़लतफ़हमियां दूर कर सकती हैं. प्रेग्नेंसी से जुड़े किसी अन्य विषय पर भी आप गायनाकोलॉजिस्ट से सलाह ले सकती हैं.

यह भी पढ़ें: क्या गर्भाशय का न होना मुमकिन है?

 gynecologist problems
मैं 50 वर्षीया महिला हूं और पिछले साल ही मेरे पीरियड्स बंद हुए हैं. पिछले दो महीने से मुझे अक्सर योनि में खुजली व डिस्चार्ज हो रहा है. क्या मुझे डॉक्टर से मिलना पड़ेगा?
– तुलिका कमानी, हैदराबाद.

 

आपका मेनोपॉज़ हो चुका है और आपके द्वारा बताए लक्षणों से लग रहा है कि आपको इंफेक्शन है. सबसे पहले आपको चेकअप कराना पड़ेगा, ताकि पता चल सके कि आपको किस तरह का इंफेक्शन है, जिससे सही इलाज किया जा सके. इसके अलावा आपको पैप स्मियर टेस्ट और ब्लड शुगर चेकअप (फास्टिंग और पोस्ट लंच) ज़रूर कराना चाहिए.

यह भी पढ़ें: क्या गर्भधारण के लिए फॉलिक एसिड की सलाह सही है?

यूरिनरी इंफेक्शन्स के लिए होम रेमेडीज़   

बहुत-सी महिलाओं में यह एक आम समस्या है. संकोच व लिहाज के कारण अक्सर महिलाएं इसे छिपा लेती हैं, ऐसे में ये होम रेमेडीज़ उनके लिए काफ़ी कारगर सिद्ध होंगी.
– इसमें भरपूर पानी पीना आपके लिए बहुत लाभदायक होगा, इसलिए ख़ूब पानी पीएं.
– ककड़ी जैसे पानी से भरपूर फ्रूट्स को अपने डायट में शामिल करें.
– अदरक की चाय आपको इससे राहत दिलाएगी.
– गर्म पानी की थैली से सेंक करें.
– दो कप पानी में 1 टेबलस्पून पार्सले की सूूखी पत्तियों को उबालकर उसका पानी पीएं.

यह भी पढ़ें: बार-बार वेजाइनल इंफेक्शन क्यों होता है?

rajeshree-kumar-167x250
डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected] 

 

महिलाओं की ऐसी ही अन्य पर्सनल प्रॉब्लम्स पढ़ें

 

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

पर्सनल प्रॉब्लम्स: कैसे पता चलेगा कि मुझे अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा है? (How to Determine if I suffer from Heavy Menstrual Bleeding?)

Heavy Menstrual Bleeding

मैं 29 वर्षीया युवती हूं. हाल ही में मैंने ध्यान दिया कि पिछले साल की तुलना में इस साल पीरियड्स के दौरान मुझे बहुत ज़्यादा रक्तस्राव (Bleeding) हो रहा है. पहले मेरे पीरियड्स स़िर्फ 4 दिनों तक रहते थे, पर अब 6 दिनों तक रहते हैं. आमतौर पर कितना ब्लड लॉस सामान्य होता है? और मुझे कैसे पता चलेगा कि मुझे अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) हो रहा है? 

– श्‍वेता मोरे, पुणे.

पीरियड्स के दौरान आमतौर पर महिलाओं को 40 मि.ली. तक ब्लड लॉस होता है, जो 20 मि.ली. से 80 मि.ली. तक भी हो सकता है. अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) के बारे में जानने का सबसे आसान तरीक़ा यह देखना है कि रक्तस्राव के दौरान ब्लड क्लॉट (खून के थक्के) निकलते हैं या नहीं, क्योंकि अगर पीरियड्स के दौरान ब्लड क्लॉट्स ज़्यादा आ रहे हैं और आपको कमज़ोरी महसूस हो रही है, तो समझ जाएं कि आपको अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा है. ऐसे में आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए.

यह भी पढ़ें: शारीरिक संबंध के बाद १-२ दिन तक ब्लीडिंग क्यों होती है?

Heavy Menstrual Bleeding
मैं 32 वर्षीया महिला हूं व मेरा 4 साल का बच्चा है. डिलीवरी के छह महीने बाद से ही मैं इंट्रायूटेराइन डिवाइस कॉपर टी इस्तेमाल कर रही हूं. मैं यह जानना चाहती हूं कि क्या कॉपर टी निकलवाने के तुरंत बाद मेरी फर्टिलिटी लौट आएगी या फिर मुझे कंसीव करने में बहुत ज़्यादा समय लगेगा?

– जयश्री मिश्रा, राजकोट.

आपको बता दें कि इंट्रायूटेराइन डिवाइस कॉपर टी निकलवाने के तुरंत बाद ही आपकी फर्टिलिटी वापस आ जाएगी, जबकि हार्मोंसवाले गर्भनिरोधक साधनों का इस्तेमाल करनेवाली महिलाओं के साथ ऐसा नहीं होता. उनकी फर्टिलिटी लौटने में 3 से 6 महीने का समय लगता है, इसलिए अपने पति से इस बारे में बात करें और जब आप प्रेग्नेंसी के लिए तैयार हों, तभी कॉपर टी निकलवाएं.

यह भी पढ़ें: आख़िर क्यों नहीं घटता मोटापा

हैवी ब्लीडिंग के लिए होम रेमेडीज़ 

  • हैवी ब्लीडिंग से राहत के लिए ठंडा सेंक करें. कॉटन के कपड़े में बर्फ के टुकड़े लपेटकर १५-२०  मिनट  सेंक करें. अगर चाहें, तो 4 घंटे बाद
    रिपीट करें.
  • एप्पल साइडर विनेगर शरीर से टॉक्सिन्स को निकालकर हार्मोंस को संतुलित करता है. 1 ग्लास पानी में 1-2 टेबलस्पून एप्पल साइडर विनेगर
    मिलाकर दिन में 3 बार लें.
  • 2 कप पानी में 1 टीस्पून साबूत धनिया डालकर उबालें. जब पानी आधा रह जाए, तब उसमें थोड़ा-सा शहद मिलाकर रख लें. इसे गुनगुना ही पीरियड्स
    के दौरान 2-3 बार पीएं.
 यह भी पढ़ें: फैलोपियन ट्यूब्स न होने पर भी क्या मैं मां बन सकती हूं?
rajeshree-kumar-167x250
डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected] 

 

 

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या कीमोथेरेपी से पति इंफर्टाइल हो सकते हैं? ( Does Chemotherapy affects fertility in men?)

Chemotherapy, fertility in men

मेरे पति की उम्र 33 साल है, पर हाल ही में हमें पता चला कि उन्हें नॉन हॉकिंग्स लिंफोमा नामक कैंसर है, जिसके लिए उन्हें कीमोथेरेपी (chemotherapy) करानी पड़ेगी. हमारा एक ही बच्चा है, इसलिए डॉक्टर ने पति के स्पर्म और फर्टिलाइज़्ड एग फ्रीज़ करके रखने की सलाह दी है. हम बहुत दुविधा में हैं, क्या करें? क्या कीमोथेरेपी से पति इंफर्टाइल हो जाएंगे?

– सलोनी बांदेकर, नागपुर.

नॉन हॉकिंग्स लिंफोमा के मामलों में कीमोथेरेपी काफ़ी असरदार साबित होती है. पहले हम कपल्स को ऐसी सलाह नहीं दे सकते थे, पर एडवांस होती टेक्नोलॉजी ने यह मुमकिन कर दिया है कि कीमोथेरेपी के बाद भी आप पैरेंट बन सकते हैं. आपको यह समझना होगा कि कैंसर में कैंसरस सेल्स बड़ी तेज़ी से बढ़ते हैं और कीमोथेरेपी का काम इन तेज़ी से बढ़नेवाले सेल्स को ख़त्म करना ही है. इस प्रक्रिया में हेल्दी सेल्स को भी नुक़सान पहुंचता है, जिससे डायरिया, गले में ख़राश, बालों का झड़ना और इंफर्टिलिटी जैसे साइड इफेक्ट्स भी देखने को मिलते हैं. कीमोथेरेपी स्पर्म को भी नुक़सान पहुंचाती है, इसीलिए आपके डॉक्टर ने ऐसी सलाह दी है.

यह भी पढ़ें: क्या एबॉर्शन के बाद कंसीव करने में समस्या आती है?

chemotherapy

मैं 17 साल की कॉलेज स्टूडेंट हूं. 13 साल की उम्र में मेरे पीरियड्स शुरू हो गए थे, पर कभी नियमित रूप से पीरियड्स आए नहीं. पिछले दो साल में स़िर्फ दो बार पीरियड्स आए हैं. डॉक्टर का कहना है कि इस उम्र में ऐसा होना सामान्य है, पर मेरी सभी सहेलियों के पीरियड्स नियमित हैं, इसलिए मुझे चिंता हो रही है. कृपया, मार्गदर्शन करें.

– रूपल मेहता, सूरत.

आमतौर पर पीरियड्स शुरू होने के दो साल तक अनियमित रहते हैं. कभी-कभार तो डेढ़ या दो महीने बाद पीरियड्स आते हैं, पर ज़्यादातर मामलों में 2 साल के बाद पीरियड्स नियमित हो जाते हैं, जबकि आपके मामले में ऐसा नहीं हुआ. आपको डरने की ज़रूरत नहीं. डॉक्टर से मिलकर आपको जनरल चेकअप के साथ-साथ कुछ ब्लड टेस्ट्स कराने होंगे, ताकि किसी भी तरह के हार्मोनल इश्यूज़ के बारे में पता चल सके. हो सकता है, इसका कारण थायरॉइड या पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिसीज़ हो, पर आप घबराएं नहीं, क्योंकि हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए तुलना न करें, बल्कि डॉक्टर से मिलें.

यह भी पढ़ें: 10 मॉर्निंग हेल्दी टिप्स: यूं करें दिन की शुरुआत

अनियमित पीरियड्स के लिए होम रेमेडीज़

– एक कप पानी में अदरक का छोटा टुकड़ा उबालें. स्वाद के लिए इसमें शक्कर या शहद मिला लें. इसे दिन में तीन बार, खाने के बाद लें.
– पीरियड्स अनियमित हो गए हों, तो रोज़ रात को एक कप दूध में आधा टीस्पून दालचीनी पाउडर मिला लें या फिर पुदीने की पत्तियों को सुखाकर पाउडर बना लें और 1-1 टीस्पून शहद और पुदीना मिलाकर दिन में तीन बार लें.
– एक ग्लास पानी में 2 टीस्पून सौंफ रातभर भिगोकर रखें. सुबह छानकर पी लें.
– तिल में गुड़ मिलाकर पीस लें. इस मिश्रण को रोज़ाना खाली पेट 1 टीस्पून लें.
– गुड़ पीरियड्स को नियमित करने में मदद करता है, इसलिए इसे ऐसे भी खा सकते हैं.

यह भी पढ़ें: शारीरिक संबंध के बाद १-२ दिन तक ब्लीडिंग क्यों होती है?

 rajeshree-kumar-167x250
डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected] 

 

 

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

पर्सनल प्रॉब्लम्स: एग्ज़ाम्स के व़क्त पीरियड्स अनियमित क्यों हो जाते हैं? (Personal Problems: Why do I have irregular periods during exams?)

irregular periods during exams
मेरी 16 वर्षीया भांजी के पीरियड्स (periods) वैसे तो नियमित हैं, पर अक्सर एग्ज़ाम्स के दौरान अनियमित हो जाते हैं और एग्ज़ाम्स के बाद वापस से सामान्य हो जाते हैं. क्या यह नॉर्मल है?
– विनिता मल्होत्रा, रायपुर.
परीक्षा के दौरान सभी बच्चे तनाव महसूस करते हैं, पर कुछ में उस तनाव का असर ज़्यादा दिखाई देता है. कुछ लड़कियों को तो परीक्षा के दौरान पीरियड्स (periods) ही नहीं आते, पर परीक्षा के बाद पीरियड्स अपने नियमित समय पर आने लगते हैं. दरअसल, तनाव के कारण शरीर में हार्मोंनल चेंजेज़ होते हैं, जो पीरियड्स को प्रभावित करते हैं. आपकी भांजी को इस तनाव से निपटना सीखना होगा. वो योग या एक्सरसाइज़ कर सकती है या फिर म्यूज़िक सुनकर भी ख़ुद को रिलैक्स रख सकती है. साथ ही पैरेंट्स को भी समझना होगा कि एग्ज़ाम्स के व़क्त बच्चों पर बहुत ज़्यादा दबाव न डालें.

यह भी पढ़ें: क्या एबॉर्शन के बाद कंसीव करने में समस्या आती है?

irregular periods during exams
कुछ ही महीने में मेरी दूसरी डिलीवरी है. दो साल पहले, पहली डिलीवरी के व़क्त डिलीवरी की तारीख़ के एक हफ़्ते बाद भी जब डिलीवरी नहीं हुई, तब डॉक्टर ने लेबर पेन शुरू करनेवाली दवाइयां दी थीं. मेरे डॉक्टर ने कहा है कि इस बार भी शायद मेरा लेबर पेन ख़ुद से शुरू न हो. क्या ऐसा ही होता है?
– श्रुति झा, दरभंगा.
आप अकेली नहीं हैं, जिसके साथ ऐसा हुआ है. ऐसा लगभग 7% महिलाओं के साथ होता है. चूंकि पिछली प्रेग्नेंसी के व़क्त ऐसा हुआ था, इसलिए दोबारा इसकी संभावना बनी हुई है. हालांकि हर प्रेग्नेंसी अलग होती है, फिर भी अभी आपके पास कुछ महीने हैं, डॉक्टर से संपर्क बनाए रखें.
यह भी पढ़ें: पीरियड्स में क्या है नॉर्मल, क्या है ऐब्नॉर्मल?

हैप्पी पीरियड्स के लिए टिप्स

  • रोज़ाना कम से कम दो लीटर पानी पीएं. शरीर हाइड्रेटेड रहेगा, तो वॉटर रिटेंशन का असर कम होगा और आप अच्छा महसूस करेंगी.
  • खाने में नमक और चाय-कॉफी की मात्रा कम कर दें.
  • डार्क चॉकलेट खाएं. इसमें मौजूद तत्व शरीर में सेराटॉनिन की मात्रा बढ़ा देते हैं, जिससे चिड़चिड़ापन, थकान और मूड स्विंग्स से आपको राहत मिलती है.
  • अधिक रक्तस्राव या दर्द हो रहा हो, तो गर्म पानी की बॉटल से पेट के निचले हिस्से में सेंक करें, अच्छा लगेगा.
     
    डॉ. राजश्री कुमार
    स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
    [email protected] 

 

महिलाओं की ऐसी ही अन्य पर्सनल प्रॉब्लम्स पढ़ें

 

हेल्थ से जुड़ी और जानकारी के लिए हमारा एेप इंस्टॉल करें: Ayurvedic Home Remedies

 

पीरियड्स- गर्व से कहिए ये दाग़ अच्छे हैं (Periods- say proudly that you are in these days)

Featured

आज तो पार्टी में सब मुझे ही देखेंगे, डीजे फ्लोर पर डांस करके मैं सबको आउट कर दूंगी, मेरी ऑफ व्हाइट फ्लोरलेंथ ड्रेस मुझे अट्रैक्शन ऑफ पार्टी बना देगी… न जाने ऐसी कितनी बातें आप भी सोचती होंगी और इस सोच से ख़ुद को सातवें आसमान पर पाती होंगी, लेकिन बिना बताए डेट से पहले आकर पीरियड आपकी सारी ख़ुशियों और सपनों पर पानी फेर देता है. एक पल में ऐसा लगता है कि आप तो कहीं की नहीं रहीं. बस अब सारा प्लान फुस हो गया. आख़िर ऐसा क्यों?

दुश्मन नहीं दोस्त समझें
अगर सीरियस होना ही है, तो इस बात को लेकर होइए कि यह एक चीज़ है, जो हर माह आपके साथ होती है. तो ऐसे में इसे दुश्मन मानने की बजाय अगर दोस्त बना लें, तो कैसा रहेगा? गुड आइडिया न. यस बोर, उदास और आगे के जीवन में ख़ुशियों के पल बिखेरनेवाले पीरियड्स को अपना दुश्मन नहीं बेस्ट फ्रेंड समझें.

ये दाग़ सच में अच्छे हैं
चॉकलेट खाते हुए जब मेल्टेड चॉकलेट आपकी ड्रेस पर गिर जाती है, तब तो आप उसे बड़ी नज़ाकत से अपनी उंगली से धीरे से पोंछती हैं. कितनी लड़कियां, तो चॉकलेट का एक टुकड़ा या एक बूंद भी ज़ाया नहीं करना चाहतीं. हद तो तब हो जाती है, जब अपनी सहेलियों को ब्रैंडेट आइस्क्रीम, चॉकलेट के दाग़ दिखाकर ख़ुद का रेपो रेट बढ़ाने से पीछे नहीं हटतीं. ऐसे में अगर पीरियड्स के दाग़ लग जाते हैं, तो उन्हें छपाने या किसी के पूछने पर इतना क्या शर्माना या ख़ुद को गिल्ट फील करवाना, जैसे कि कोई पाप कर दिया हो! अपनी इस मेंटैलिटी को बदलिए. ये आप भी जानती हैं कि पीरियड्स आपकी आगे की लाइफ के लिए कितना ज़रूरी है. ऐसे में अगर दाग़ कभी लग भी जाए, तो गर्व से कहिए- यस आई एम इन पीरियड्स.

छुपाएं नहीं, बिंदास कहें
नो यार आई कान्ट कम, कहा न मैं नहीं आ सकती, मैं पूजा में नहीं बैठ सकती, जैसी आदि बातें बनाने की कोई ज़रूरत नहीं. यह आपकी लाइफ का एक अहम् हिस्सा है. इसे खुलकर एंजॉय करें. किसी तरह का बहाना बनाने की बजाय, बिंदास कहें कि मंथ का बेस्ट फेज़ चल रहा है, क्योंकि आपका पीरियड्स आ गया है.

बेफिक्र होकर हर पल को करें एंजॉय
पार्टी, फंक्शन, गेट-टु-गेदर, फैमिली गैदरिंग, जैसे आदि मौक़ों को गंवाने की बजाय खुलकर जिएं. इस पीरियड्स को हौवा न बनाएं. इस किसी तरह का इशू न बनाएं. बेफिक्र होकर अपने हर मोमेंट को जिएं.

सिंगल नहीं मिंगल रहें
क्या आप भी उन लड़कियों में से हैं, जो पीरियड्स के दौरान दूसरों से ख़ुद को अलग कर लेती हैं, घर में किसी कमरे में पड़ी रहना ज़्यादा ज़रूरी समझती हैं, तो अब ट्रेंड है बदलने का मैडम. अब तो लड़कियां पीरियड्स की फोटोज़ को सोशल साइट्स पर भी पोस्ट करने से नहीं कतरातीं. और आप हैं कि दूसरों से दूरी बना रही हैं. इट्स बैड डियर.

ख़ुद को दें स्पेशल ट्रीटमेंट
इसे महीने के वीक डेज़ कहने की बजाय स्पेशल डेज़ कहें. इन दिनों ख़ुद को जितना हो सके स्पेशल फील कराएं. जो पसंद हो, वो खाएं, पहनें, घूमने जाएं. बिना रोक-टोक के लाइफ के इन दिनों को एंजॉय करें.

तो क्या समझीं मिस ब्यटीफुल? अब से हर माह अपने उन दिनों को स्पेशल बनाकर अपनी सोच के साथ दूसरों की सोच भी बदलें. ये तो आप भी मानती होंगी कि भगवान की बनाई हर चीज़ बेहद ख़ूबसूरत होती है. ऐसे में आपने ये कैसे सोच लिया कि आपका ये नेचुरल प्रॉसेस आपको सबसे अलग-थलग रहने, ख़ुद को डाउन फील करवाने, जैसी बातों पर ज़ोर देता है. जिन महिलाओं को पीरियड्स नहीं होते, वो मां बनने के सुख से वंचित रह जाती हैं. तो फिर आप अपने इस हसीन और ख़ूबसूरत से तोह़फे की अवहेलना क्यों करती हैं.

– श्वेता सिंह