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महिलाओं के हक़ में हुए फैसले और योजनाएं (Government decisions and policies in favor of women)

महिलाओं के हक़

महिलाओं के हक़

देश की आधी आबादी की मदद और प्रगति के लिए समय-समय पर सरकार की ओर से भी कई योजनाएं लागू की जाती रहती हैं.

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना
ग़रीब महिलाओं की मदद के उद्देश्य से मई 2016 में इस योजना की शुरुआत हुई. सरकार की योजना 5 करोड़ बीपीएल परिवारों को धुएं से मुक्ति दिलाने की है. चूल्हे पर खाना बनाने से महिलाओं की सेहत को बहुत हानि पहुंचती है. सरकार की इस योजना के तहत ग़रीब परिवारों को फ्री में सिलेंडर, चूल्हा व रेग्युलेटर मुहैया कराया जाता है.

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान
ग़रीब प्रेग्नेंट महिलाओं की मदद के उद्देशय से सरकार ने जुलाई 2016 में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की शुरुआत की. इस योजना के तहत हर महीने की 9 तारीख़ को प्रेग्नेंट महिलाओं को मुफ़्त स्वास्थ्य जांच और ज़रूरी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी. इस योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चे के जन्म के समय महिलाओं की मृत्यु दर को कम करना, प्रेग्नेंट महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और सुरक्षित डिलीवरी है.

 

महिला उद्यमियों के लिए सरकार की योजनाएं 

देश में महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से पिछले कुछ समय से सरकार और बैंक कई योजनाएं लागू कर रहे हैं, ताकि देश की आधी आबादी बिज़नेस में भी बराबरी का दज़ार्र् पा सके.

सरकार की मुद्रा स्कीम
ये योजना किसी भी बैंक में मिल सकती है. सरकार ने ये योजना ख़ासकर अनऑर्गनाइज़्ड सेक्टर (असंगठित क्षेत्र) की महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाया है. इस स्कीम के तहत माइक्रो इंडस्ट्री चलानेवालों को बैंक 50 हज़ार से 10 हज़ार रुपए तक का लोन देता है. इस स्कीम के तहत लोन के लिए डिप्लोमा, डिग्री होल्डर होने की ज़रूरत नहीं होती, साथ ही लोन के लिए गारंटर भी ज़रूरी नहीं है.

स्टार्टअप इंडिया
युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हाल ही में सरकार द्वारा लॉन्च की गई स्टार्टअप स्कीम में भी महिलाओं के हितों का ध्यान रखा गया है. इसके तहत महिलाओं और अनुसूचित जाति को स्टार्टअप में मदद के लिए अलग से फंड की व्यवस्था की जाएगी.

वैभव लक्ष्मी
महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा ङ्गवैभव लक्ष्मीफ स्कीम चला रहा है. इसके तहत लोन लेने के लिए महिलाओं को बैंक में अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट जमा करनी होगी, जिससे बैंक आसानी से लोन मुहैया करा सके. महिला को एक गारंटर देना होता है. इस स्कीम के तहत महिलाएं घर का सामान भी लोन से ख़रीद सकती हैं.

वी शक्ति
महिला कारोबारियों की मदद के लिए विजया बैंक ङ्गवी शक्तिफ स्कीम चला रहा है. इस स्कीम का लाभ उठाने के लिए इस बैंक में अकाउंट होना ज़रूरी है. इसके बाद 18 साल या इससे अधिक उम्र की महिलाएं आसानी से लोन के लिए अप्लाई कर सकती हैं. इस स्कीम के तहत लोन लेकर महिलाएं टेलरिंग, कैटरिंग, कैंटीन, अचार व मसाला बनाने जैसे काम शुरू कर सकती हैं.

सिंड महिला शक्ति
सिंडिकेट बैंक की इस स्कीम के तहत हर साल हज़ारों महिला कारोबारियों को लोन दिया जाता है. इसके तहत बैंक 5 करोड़ का लोन कम ब्याज़ दर पर देता है. इतना ही नहीं बैंक लोन के साथ ही क्रेडिट कार्ड की भी सुविधा देता है. ये लोन 7 से लेकर 10 साल तक के लिए दिया जाता है.

वुमन सेविंग
महिला कारोबारियों की संख्या बढ़ाने के लिए एचडीएफसी भी अहम् भूमिका निभा रहा है. साथ ही ये बैंक महिला कस्टमर्स को ईज़ी शॉप एडवांटेज कार्ड की सुविधा भी दे रहा है.

स्त्री शक्ति पैकेज
देश का सबसे बड़ा बैंक एसबीआई (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) महिला कारोबारियों को ङ्गस्त्री शक्तिफ पैकेज देता है. इस स्कीम के तहत महिलाओं को 2 लाख रुपए से अधिक लोन लेने पर 0.5 फीसदी कम ब्याज़ देना होता है. 5 लाख रुपए तक के लोन के लिए कोई कोलैटरल सिक्योरिटी की ज़रूरत नहीं होती.

महिलाओं के हक़

महिलाओं के हक़ में हुए फैसले

2016 में महिलाओं के हक़ में कई ़फैसले हुए, जिससे समाज में उनकी स्थिति मज़बूत बनाने में मदद मिलेगी.

बेटी बन सकती है घर की मुखिया

2016 की शुरुआत में दिल्ली हाईकोर्ट ने महिलाओं के हक़ में एक अहम् फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि घर के मुखिया व उसकी पत्नी की मौत के बाद अगर घर में उनकी बड़ी बेटी है, तो वह भी परिवार की मुखिया हो सकती है. एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि संयुक्त हिंदू परिवार का सबसे बड़ा पुरुष अगर कर्ता हो सकता है, तो एक महिला क्यों नहीं? हिंदू एक्ट में वर्ष 2005 में हुए संशोधन के अनुसार जब संयुक्त हिंदू परिवार की संपत्ति में महिलाओं का बराबर का हक़ है, तो उसी संपत्ति के प्रबंध में उनका हक़ क्यों न हो? कानून के तहत महिला को कर्ता (मुखिया) बनाने के लिए कोई रोक नहीं है.

महिलाओं को मिली हाजी अली दरगाह में प्रवेश की अनुमति

लंबी लड़ाई के बाद आख़िरकार महिलाओं को मुंबई के हाजी अली दरगाह में प्रवेश की इजाज़त मिल गई. पिछले साल के अंत में बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि अब महिलाओं को दरगाह में मजार के भीतर तक जाने की अनुमति होगी. पहले महिलाएं स़िर्फ बाहर तक ही जा पाती थीं, उन्हें अंदर मजार तक जाने की अनुमति नहीं थी. बॉम्बे हाईकोर्ट में इस भेदभाव के ख़िलाफ़ 2014 में एक जनहित याचिका दायर कर मांग की गई थी कि जहां तक पुरुष जा सकते हैं, वहां तक औरतों को जाने की अनुमति क्यों नहीं है? इस मामले में महिलाओं के हक़ में ़फैसला देते हुए कोर्ट ने कहा कि संविधान में महिलाओं और पुरुषों को बराबरी का दर्ज़ा है. जब पुरुषों को दरगाह के अंदर जाने की इजाज़त है, तो महिलाओं को भी होनी चाहिए. इससे पहले महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के शनि शिंगणापुर में भी महिलाओं को चबूतरे पर जल चढ़ाने की इजाज़त मिल चुकी है. इस मुद्दे पर भूमाता ब्रिगेड द्वारा किए गए आंदोलन के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने महिलाओं के हक़ में फैसला दिया. इसे महिलाओं की बहुत बड़ी जीत माना जा सकता है, क्योंकि मंदिर के चबूतरे पर 400 साल से महिलाओं को जाने की इजाज़त नहीं थी.

मैटर्निटी बिल से आसान होगी कामकाजी महिलाओं की राह

अगस्त 2016 कामकाजी महिलाओं के लिए अच्छी ख़बर लाया. राज्यसभा में मैटर्निटी बेनीफिट बिल को मंज़ूरी मिल गई. मातृत्व अवकाश को 12 हफ़्ते से बढ़ाकर 26 हफ़्ते करनेवाला विधेयक मंज़ूर हो गया. हालांकि अभी तक ये विधेयक क़ानून नहीं बन पाया है. यदि ये बिल क़ानून बन जाता है, तो अवकाश बढ़ने के साथ ही कामकाजी महिलाओं को और भी कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी.

घरेलू हिंसा क़ानून से जुड़ा सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

देश की सर्वोच्च अदालत ने घरेलू हिंसा क़ानून में अहम् बदलाव किया है. कोर्ट ने घरेलू हिंसा क़ानून की धारा 2 (क्यू) से ‘वयस्क पुरुष’ शब्द हटाकर ‘वयस्क पुरुष’ शब्द कर दिया है. इस बदलाव से घरेलू हिंसा क़ानून के तहत पुरुषों के साथ-साथ अब महिलाओं पर भी मुक़दमा किया जा सकता है. ‘वयस्क पुरुष’ शब्द के कारण घरेलू हिंसा के अनेक मामलों में परिवार की महिलाओं व नाबालिग सदस्यों के अपराध में शामिल होने के बावजूद उन पर कार्यवाही नहीं हो पाती थी. कोर्ट का ये फ़ैसला घरेलू हिंसा पर लगाम कसने के लिए काफ़ी हद तक काम करेगा.

अब अविवाहित महिलाओं को भी होगा अबॉर्शन का हक़

महिलाओं के हक़ में जल्द ही स्वास्थ्य मंत्रालय एक ऐसा क़दम उठाने जा रही है, जिसमें अविवाहित व सिंगल महिलाओं को भी अबॉर्शन का क़ानूनी हक़ मिलेगा. अभी तक स़िर्फ विवाहित महिलाओं को ही अनवॉन्टेड प्रेग्नेंसी टर्मिनेट करवाने की अनुमति है, लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय के नए क़दम के तहत सिंगल/अविवाहित महिलाओं को भी ङ्गगर्भ निरोधक गोलियों के असफल रहनेफ व ङ्गअनचाहे गर्भफ की स्थिति में अबॉर्शन के लिए क़ानूनी मान्यता मिल जाएगी. नया क़ानून स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी ऐक्ट में संशोधन के लिए की गई सिफ़ारिशों का नतीजा होगा.

 

चर्चित मुद्दे

सरोगेसी बिल
पिछले साल सरोगेसी नियमन विधेयक को कैबिनेट से मंज़ूरी मिलने के बाद इसे लोकसभा में पेश किया गया, मगर हंगामे के कारण बिल पास नहीं हो पाया. यदि इसे लोकसभा की मंज़ूरी मिल जाती है, तो नए क़ानून के तहत कमर्शियल सरोगेसी पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी, मगर इससे ज़रूरतमंद दंपत्तियों की मुश्किलें भी बहुत बढ़ जाएंगी. सरोगेसी विधेयक में कई ऐसी बातें हैं, जिससे संतान की चाह रखनेवाले दंपत्तियों के लिए सरोगेट मदर ढूंढ़ना मुश्किल हो जाएगा. नए क़ानून के तहत दंपति अपने किसी नज़दीकी रिश्तेदार को ही सरोगेट मदर बना सकते हैं, जो बहुत मुश्किल काम है. इसके अलावा शादी के पांच साल बाद ही सरोगेसी की इजाज़त मिलने जैसे कई मुद्दों की वजह से सरोगेसी बिल को कुछ लोग सही नहीं ठहरा रहे.

तीन तलाक़ का मुद्दा
मुस्लिम महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए पिछले काफ़ी समय से सरकार तीन तलाक़ वाले शरीयत क़ानून का विरोध कर रही है. मुस्लिम महिलाएं भी इस क़ानून के ख़िलाफ़ हैं और इसे निरस्त कराना चाहती हैं, मगर मुस्लिम धर्म गुरु किसी क़ीमत पर तीन तलाक़ को ख़त्म नहीं करना चाहते. इस मुद्दे पर पिछले कई महीनों से लंबी बहस चल रही है, मगर कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया. हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने थोड़ी राहत देते हुए अपने फैसले में कहा कि कोई भी पर्सनल लॉ संविधान से बड़ा नहीं हो सकता है. तीन तलाक़ का नियम महिलाओं के हितों का हनन है. कोर्ट ने कहा कि कुरान पाक भी तीन तलाक़ के क़ानून को सही नहीं मानता.

– कंचन सिंह

बादाम के हेल्थ बेनिफिट्स (Health benefits of almond)

Health benefits of almond

Health benefits of almond

स्वस्थ और सुंदर दिखने के लिए प्रतिदिन बादाम का सेवन ज़रूर करें. प्रोटीन और ऑयल से भरपूर बादाम को चाहे जिस रूप में खाएं, ये फ़ायदा ही पहुंचाता है. बादाम खाने से दिमाग़ तेज़ होता है, यो तो आपने कई बार सुना होगा और अपने बच्चों के दिमाग़ के विकास के लिए रोज़ाना बादाम देती भी होंगी, लेकिन क्या आप जानती हैं कि दिमाग़ तेज़ करने के साथ ही बादाम के कई और हेल्थ बेनिफिट्स हैं (Health benefits of almond).

हार्ट अटैक से राहत
सप्ताह में पांच दिन बादाम खाने वालों को हार्ट अटैक का ख़तरा कम हो जाता है. तो अगर आप भी फैमिली को बीमारियों से दूर रखना चाहती हैं, तो रोज़ाना बादाम खिलाएं.

दिमाग़ तेज़ होता है
नाश्ते की टेबल पर बादाम का बाउल आपके पूरे परिवार के लिए फ़ायदेमंद है. नाश्ते के बाद बादाम खाने से दिमाग़ तेज़ होता है. रातभर पानी में भिगोने के बाद सुबह बादाम को छीलकर पीस लें और दूध के साथ लें. इससे याददाश्त तेज़ होगी. बच्चों को नियमित रूप से पिलाएं.

सेहत सुधरती है
दिनभर खाने के बाद भी क्या आपका बच्चा दुबला है या फिर वो कुछ खाता ही नहीं? दोनों दशा में बच्चे की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है. नियमित रूप से 4-5 बादाम को घिसकर दूध के साथ लेने से शारीरिक दुर्बलता दूर होती है. तो अपने बच्चों को रोज़ाना दूध के साथ बादाम दें और उनकी सेहत बनाएं.

चक्कर से मुक्ति
क्या आपको ट्रेन, बस, ऑफिस घर कहीं भी चक्कर आ जाता है? अगर हां, तो बादाम खाने से आपकी ये बीमारी दूर हो सकती है. बादाम में थायमीन नामक विटामिन पाया जाता है, जो चक्कर से बचाव करता है.

कोलेस्ट्रॉल को कम करता है
नियमित रूप से बादाम का सेवन करने सेकोलेस्ट्रॉल लेवल कम होता है. यह शरीर में चर्बी जमा नहीं होने देता और आपको फिट एंड फाइन रखता है.

हड्डियों को मज़बूत करता है
रोज़ाना बादाम खाने से आपकी हड्डियां मज़बूत होती हैं. इसके साथ ही दांत भी स्वस्थ रहते हैं. बच्चों में अमूमन दांत की समस्या होती है. उनकी समस्या को दूर करने के लिए रोज़ सुबह स्कूल जाने से पहले उन्हें बादाम खिलाएं.

बच्चों को कैसे मिले बादाम का पोषण?
बहुत से बच्चों को बादाम खाने में अच्छा नहीं लगता. वो काजू तो बड़े चाव से खा लेते हैं, लेकिन बादाम के समय वो आपसे ना-नुकुर करते हैं. बच्चों को कैसे खिलाएं बादाम ताकि बादाम का पोषण उनको मिले? आइए, जानते हैं.

  • अगर बच्चे को बादाम खाना अच्छा नहीं लगता, तो बादाम को पीसकर आटे में मिलाएं. इसी आटे की रोटी/परांठे बनाकर बच्चों को खिलाने से बादाम का पूरा पोषण मिलेगा.
  • बादाम के तेल में सब्ज़ी बनाकर बच्चे को खिलाएं.
  • बादाम मिल्क भी बेहतर ज़रिया है. प्लेन, वेनीला और चॉकलेट प्लेवर में भी बादाम मिल्क मिलता है.
  • बादाम को बादाम ऑयल में हल्का सा नमक लगाकर फ्राई करके भी बच्चों को खिला सकती हैं.
  • बादाम का छिलका निकालकर पीस लें. अब इस पाउडर को दूध में मिलाकर बच्चों को पिलाएं. इससे उन्हें पता भी नहीं चलेगा कि वो बादाम खा रहे हैं और उसका पोषण भी उन्हें मिल जाएगा.

कैसे करें स्टोर?
बादाम को एयर टाइट कंटेनर में बंद करके कूल डार्क प्लेस में रखें. बेहतर होगा अगर आप इसे अपनी फ्रिज में रखें. एयर टाइट कंटेनर में बंद करके फ्रिज में रखने पर दो साल तक बादाम का उपयोग आप कर सकती हैं.

 

श्वेता सिंह

वेट लॉस टिप ऑफ द डे: 10 हेल्दी वेट लॉस टिप्स (Weight Loss Tip Of The Day: 10 Healthy Weight Loss Tips)

ACT & REACT! अगर आप सेल्फ डिफेंस सीखना चाहती हैं, तो अक्षय और ताप्सी का ये ख़ास मैसेज बिल्कुल मिस न करें (Akshay Kumar and Taapsee Pannu give self defense classes to women)

सेल्फ डिफेंस

सेल्फ डिफेंस

आपके बॉडी पार्ट्स ही आपके सबसे बड़े हथियार है. कोहनी मारें और छेड़ने वाले को मुंहतोड़ जवाब दें. जी हां, ये दमदार मैसेज दे रहे हैं अक्षय कुमार और ताप्सी पन्नू. इंटरनेशनल वुमेन्स डे के मौक़े पर अक्षय और ताप्सी एक ख़ास वीडियो लेकर आए हैं, जिसमें ताप्सी ये सिखा रही हैं कि लड़कियों को छेड़ने वालों को सबक कैसे सिखाया जाए. इस वीडियो में ताप्सी अक्षय के साथ मिलकर बता रही हैं कि जब कोई पुरुष किसी महिला पर हमला करता है, तो उसका मुकाबला कैसे करें.

1 मिनट 24 सेकेंड के वीडियो में ताप्सी ने कह रही हैं, “ख़तरा क़ीमती चीज़ों को होता है, जैसे की लड़कियां, औरतें. हम सब से ज़्यादा क़ीमती भला और क्या है. ख़तरा कहीं भी मिल सकता है, जैसे- रोड़, पार्क, बस, ट्रेन. कोई कहीं भी छू देता है, कुछ भी बोल देता है. पर अब हम चुप नहीं रहेंगे. अब हम जवाब देंगे.”

ताप्सी ने कोहनी मार तकनीक सिखाकर महिलाओं से कहा, “जब कोई छेड़े या बॉडी पार्ट्स को छुए, तो फ्रीज़ न हों, बल्कि रिएक्ट करें, चिल्लाएं, हेल्प के लिए बुलाएं, कुछ नहीं समझ न आए तो पत्थर उठा कर मारो या भाग जाओ, कुछ तो करो. आपके बॉडी पार्ट्स ही आपके सबसे बड़े हथियार हैं, जैसे की आप उसको लात मार सकते हो, कोहनी मार सकते हो. मेरी फेवरेट तो कोहनी है, एक बार जो कोहनी लग जाए ना तो बंदा वापस नहीं उठता है.”

कोहनी मार तकनीक सिखाने के लिए ताप्सी अक्षय कुमार को बुलाती हैं और बताती हैं कि कैसे ख़ुद की सुरक्षा करें. देखे ये वीडियो, ये बहुत काम आ सकता है आपके.

सुपर वुमन या ज़िम्मेदारियों का बोझ (Why women want to be a superwomen?)

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सुपर वुमन ये शब्द सुनकर एकबारगी तो बहुत अच्छा लगता है, लेकिन क्या वाक़ई ये हमारे लिए ख़िताब है या फिर ज़िम्मेदारियों का बोझ मात्र. क्या है सुपर वुमन की असल ज़िंदगी?

 

“मेरी वाइफ किसी सुपर वुमन से कम नहीं, वो कंपनी में एग्ज़क्यूटिव है. ऑफिस के साथ ही वो मेरे घर और बच्चों को भी बख़ूबी मैनेज कर लेती है.” पत्नी की तारीफ़ में दोस्तों के सामने ऐसे कसीदे पढ़ने वाले पतियों की कमी नहीं है, लेकिन समाज में वर्किंग पत्नी का गुणगान करने वाले ऐसे पति घर के अंदर आते ही रंग बदल लेते हैं. दफ्तर से थकी-हारी आई पत्नी का किचन में हाथ बंटाना ये अपनी शान के ख़िलाफ़ समझते हैं. हालांकि कुछ ऐसे पति ज़रूर हैं जो घर के काम में पत्नी की मदद कर वाक़ई उन्हें सुपर वुमन का एहसास दिलाते हैं, लेकिन ऐसे समझदार पतियों की संख्या सीमित है. ज़्यादातर पुरुष पत्नी की तारीफ़ करके ही अपनी ज़िम्मेदारियों की इतिश्री मान लेते हैं. उन्हें लगता है उनके तारीफ़ भरे शब्द से पत्नी की ज़िम्मेदारी कम हो जाएगी. उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं होता कि सुपर वुमन की कसौटी पर खरा उतरने के लिए उनकी पत्नी किस मानसिक अवसाद व आंतरिक कशमकश की स्थिति से गुज़र रही होती हैं. ऑफिस से आने के बाद वो भी थक जाती है, उसे भी थोड़ा आराम चाहिए इस ख़्याल से पति की फरमाइशें कभी कम नहीं होती.

सुपरवुमन/सुपर मॉम की कश्मकश
सुपर वुमन कहलाने वाली आजकल की ज़्यादातर कामकाजी महिलाएं दोहरे तनाव का सामना कर रही हैं. हर समय जहां उनपर पर अपने कार्यक्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ करने का दबाव रहता है, वहीं बच्चों को समय न दे पाने की गिल्ट उन्हें अंदर ही अंदर सताती रहती है. बच्चों के साथ समय न बिता पाना, घर का काम ठीक तरह से न कर पाने, पति व परिवार की अपेक्षाओं पर खरा न उतर पाने के कारण वो ख़ुद को दोषी समझने लगती हैं. घर और ऑफिस दोनों जगह अपना सौ फीसदी देने के चक्कर में वो भयंकर तनाव का तो शिकार हो ही रही हैंं, साथ ही अपनी सेहत से भी समझौता कर रही हैं.

बच्चे और किचन
आप कोई छोटी-मोटी नौकरी करती हैं या फिर किसी कंपनी की सीईओ ही क्यों न हो, लेकिन घर पहुंचकर होम मेकर के रोल में आना ही पड़ता है. आख़िर किचन और बच्चों की ज़िम्मेदारी महिलाओं के ही कंधे पर क्यों होती है? वर्किंग पत्नी की चाह रखने वाले पुरुष आख़िर क्यों नहीं किचन और बच्चों की देखभाल की ज़िम्मेदारी में अपनी पत्नी का हाथ बंटा देते हैं? अधिकतर पुरुषों का जवाब होता है ये हमारा काम नहीं है. बरसों पुरानी रूढियों से चिपके ऐसे पुरुष दोहरा मानदंड अपनाते हैं यानी जब बाहर काम की बात आती है तो ये तथाकथित मॉर्डन बनकर पत्नी के बाहर काम करने का समर्थन करते हैं, लेकिन जब बात घर के काम की हो तो ये पुरुष प्रधान समाज वाला रुख़ अख़्तियार कर लेते हैं.

वर्किंग चाहिए, मगर बराबरी नहीं
इक्कीसवी सदी के युवाओं को पत्नी वर्किंग तो चाहिए, लेकिन अपनी शर्तों पर यानी पत्नी की सैलरी और ओहदा उनसे ऊंचा न हो, यदि ऐसा हो जाए तो उनके अहं को ठेस पहुंच जाती है और वो पत्नी को मगरूर समझने लगते हैं. बात-बात पर खरी-खोटी सुनाना, बे बात झगड़ा बढ़ाकर उन्हें दोषी ठहराने का एक मौक़ा भी नहीं जाने देते. ऐसे में अपनी क़ामयाबी ही महिलाओं को कुंठित कर देती है.

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हर जगह ख़ुद को साबित करना
21वीं सदी की महिलाओं को ऑफिस में अपना टारगेट अचीव करने से लेकर बच्चों की पढ़ाई और घर के काम की चिंता के बीच अपने बालों को कलर करने और फेशियल की भी चिंता सताती रहती है. दरअसल, ऑफिस में प्रेजेंटेबल दिखने की समय की मांग को देखते हुए उन्हें न स़िर्फ घर, बल्कि ख़ुद को भी मेंटेन करना पड़ता है. अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इतनी सारी ज़िम्मेदारियों के बीच ख़ुद के लिए समय निकालना इन महिलाओं के लिए कितना मुश्किल होता है. हर जगह ख़ुद को परफेक्ट साबित करने की कोशिश में आज की महिलाएं डिप्रेशन का शिकार होती जा रही हैं.
शिकागों की एक शोधकर्ता ने 10 साल तक भारतीय महिलाओं पर शोध के बाद ये नतीजा निकाला की लगभग 72 फीसदी महिलाएं गहरे अवसाद का शिकार हो रही हैं. शोधकर्ता के मुताबिक, तनाव का सबसे बड़ा कारण परिवार ख़ुद है. देखा जाए तो शोध की बात सौ फीसदी सच है एक मीडिल क्लास फैमिली की महिला ऑफिस से थकी-हारी जब घर पहुंचती है, तो उसे कोई एक ग्लास पानी तक नहीं पूछता, लेकिन काम और फरमाइशों की फेहरिस्त तैयार रहती है. सास कहती है मेरी लिए खाने में कम मसाले वाली सब्ज़ी बनाना, तो बच्चों को कुछ मीठा चाहिए रहता है और पतिदेव को नॉनवेज… अभी इतने लोगों की फरमाइश पूरी ही होती है कि उसे सुबह नाश्ते में क्या बनेगा कि चिंता भी सताने लगती है साथ ही कल ऑफिस में प्रेजेंटेशन देना है उसकी भी टेंशन. इतने तनाव व ज़िम्मेदारियों के बीच महिलाओं को अपनी पसंद-नापसंद के बारे में सोचने तक की ़फुर्सत नहीं रहती.

मर्द हूं काम क्यों करूं
हमारी मेल डॉमिनेटिंग सोसाइटी भले ही महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने का राग अलापे, लेकिन वास्त में उन्हें बराबरी का हक़ नहीं मिला है. अगर मिला होता तो रसोई से लेकर बच्चे और बुजुर्गों की देखभाल तक की सारी ज़िम्मेदारी अकेले उसे ही नहीं उठानी पड़ती. दरअसल, कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो हमारे देश में ज़्यादातर पुरुषों की सोच यही है कि मैं मर्द हूं, भला मैं क्यों काम करूं घर का काम तो औरतों के जिम्मे है. ऐसी सोच स़िर्फ कम पढ़े-लिखे युवक ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षित और प्रतिष्ठित नौकरी करने वाले पुरुषों की सोच भी ऐसी ही है.

मस्टीटास्किंग के नाम पर
महिलाएं तो मल्टीटास्किंग होती हैं, ये कहकर बड़े प्यार से उन्हें हर काम का जिम्मा सौंप दिया जाता है. कई बार तो महिलाएं भी इस मुग़ालते में कि पुरुष उनके हुनर व क्षमता की तारीफ़ कर रहे हैं ख़ुद को उनकी कसौटी पर खरा उतारने की कोशिश करती रहती हैं यानी सुपर वुमन बनने का हर संभव प्रयास करती हैं. सवाल ये है कि आख़िर महिलाओं को ही क्यों सुपर वुमन बनने की ज़रूरत महसूस होती है? पुरुष क्यों नहीं सुपर मैन बन जाते हैं. हमेशा ही ख़ुद को महिलाओं से श्रेष्ठ मानने वाले पुरुष क्यों नहीं उनसे मल्टीटास्किंग का गुण सीखकर उनकी तरह ही दोहरी, तीहरी ज़िम्मेदारी निभाते हैं? शायद इसलिए क्योंकि उन्हें दशकों से आराम की लत जो लग गई है जो काम पहले वो महिलाओं को डरा-धमाकाकर करते थे वही अब प्यार व तारीफ़ भरे शब्दों के तीर चलाकर कर रहे हैं.

बदलती तस्वीर
यूरोपिए देशों में हाउस हसबैंड का कॉन्सेप्ट है, यानी पुरुष घर पर रहकर परिवार व बच्चों की देखभाल की ज़िम्मेदारी उठाते हैं और महिलाएं आर्थिक मोर्चा संभालती हैं, लेकिन हमारे देश में इस तरह के कॉन्सेप्ट को समाज पचा नहीं पाएगा.

– कंचन सिंह

महिलाओं के लिए टॉप 3 सेफ डेस्टिनेशन (Top 3 safe Destination for women)

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घर-ऑफिस की ज़िम्मेदारियों से कुछ दिनों के लिए ब्रेक लीजिए और अकेले ही निकल पड़िए रोमांचक ट्रिप पर. आपके सुहाने सफ़र में किसी तरह की रुकावट न आए, इसलिए हम बता रहे हैं कुछ ऐसे डेस्टिनेशन्स जो हैं आपके लिए पूरी तरह से महफूज़ और रोमांचक.

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ज्युरिक, स्विट्ज़रलैंड

फिल्म दिल वाले दुल्हनियां ले जाएंगे की सिमरन की तरह आप भी अगर अपनी सहेलियों के साथ कोई ट्रिप प्लान करना चाहती हैं, तो ज़्युरिक से बेहतरीन जगह कोई हो ही नहीं सकती. रोमांस और प्रकृति की अनुपम छटा से भरपूर ज़्युरिक आपको बहुत पसंद आएगा. ज़्युरिक स्विट्ज़रलैंड का फायनांशियल सेंटर है. ये स्विट्ज़रलैंड के बड़े शहरों में से एक है.

कैसे जाएं?
देश के सभी बड़े महानगरों से आप ज़्युरिक एयरपोर्ट के लिए उड़ान भर सकती हैं.

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मुख्य आकर्षण
ज़्युरिक लेक
लिंडेनहॉफ हिल
ब्लैक फॉरेस्ट एंड राइन फॉल
ज़्युरिक ओपेरा हाउस
बोटैनिकल गार्डन

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स्मार्ट आइडिया
ज़्युरिक की नाइट लाइफ आपको
रोमांच से भर देगी. रात में अपनी सहेलियों के साथ ज़्युरिक
 की नाइट लाइफ का आनंद ज़रूर लें.

क्या आप जानती हैं?
ज़्युरिक में अपराध, चोरी, महिलाओं के
साथ होनेवाली छेड़छाड़ आदि न के बराबर है.
ये जगह आपके लिए पूरी तरह सुरक्षित है.

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यह भी पढ़ें: न्यू ईयर सेलिब्रेशन: नहीं बना कोई प्लान, ऐसे करें एंजॉय

न्यूयॉर्क, USA

एक रिसर्च से पता चला है कि न्यूयॉर्क पूरे अमेरिका में तीसरा सबसे सुरक्षित शहर है, इसलिए आपकी ट्रैवलिंग के लिए ये जगह बिल्कुल सेफ है. लेटेस्ट फैशन ट्रेंड और दुनियाभर के पर्यटकों के फैशन मंत्र से रू-ब-रू होना चाहती हैं, तो न्यूयॉर्क दिल खोलकर आपका स्वागत करता है. कला प्रेमियों के लिए भी न्यूयॉर्क बेहतरीन जगह है.

कैसे जाएं?
जॉन एफ केनेडी इंटरनेशनल एयरपोर्ट न्यूयॉर्क जाने के लिए नज़दीकी एयरपोर्ट है. एयरपोर्ट से आप लोकल वेहिकल से शहर घूम सकती हैं.

मुख्य आकर्षण
स्टैचू ऑफ लिबर्टी- सेंट्रल पार्क
एम्पायर स्टेट बिल्डिंग
टाइम्स स्न्वेयर
मेट्रोपॉलिटन म्यूज़ियम ऑफ आर्ट
9/11 मेमोरियल

स्मार्ट आइडिया
रात में ब्रूकलिन ब्रिज पर चहलक़दमी ज़रूर करें.
इससे आपको आनंद का अनुभव होगा.
इस ब्रिज को कई हिंदी फिल्मों में दिखाया गया है.

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क्वींसटाउन, न्यूज़ीलैंड

झीलों और ख़ूबसूरत फूलों का शहर क्वींसटाउन आपको बेहद पसंद आएगा. यदि आप प्रकृति प्रेमी हैं तो आपको क्वींसटाउन से प्यार हो जाएगा. यहां आकर आपको ऐसा लगेगा कि घंटों बैठकर प्रकृति का सौंदर्य निहारें. रोमांच पसंद करनेवालों के लिए भी ये बेहतरीन जगह है. तो देर किस बात की, उठाइए बैग और निकल पड़िए क्वींसटाउन की सैर पर.

कैसे जाएं?
क्वींसटाउन इंटरनेशनल एयरपोर्ट दुनिया के सभी देशों से जुड़ा है. दिल्ली, मुंबई, चेन्नई आदि महानगरों से आप सीधे क्वींसटाउन एयरपोर्ट पहुंच सकती हैं. उसके बाद लोकल वेहिकल से आप पूरा शहर घूम सकती हैं.

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मुख्य आकर्षण
मिलफोर्ड साउंड
द रिमार्केबल्स
लेक वकाटिपु
कोर्नेट पीक
स्काईसिटी क्वींसटाउन

स्मार्ट आइडिया
मखमली फूलों पर चलने का
अनोखा अनुभव करना चाहती हैं,
तो क्वींसटाउन गार्डन ज़रूर जाएं.

– श्वेता सिंह 

 

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Wow! अब महिलाओं को फ्लाइट में भी मिलेगा रिज़र्वेशन (Wow! Air India to reserve seats for women)

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नया साल महिलाओं के लिए सौगात भरा रहा है. ऑनलाइन गैस पर छूट के बाद अब हवाई यात्रा में भी महिलाओं को रिज़र्वेशन मिलेगा. जी हां, सही सुन रही हैं आप. भले ही दूसरे क्षेत्र में आपको कोटा मिले न मिले, लेकिन देश की सरकारी विमान कंपनी एयर इंडिया आपके लिए ख़ास न्यूज़ लेकर आई है. आइए, देखते हैं कि क्या है ये ख़बर.

अब से आपके लिए एयर इंडिया की सभी घरेलू उड़ानों पर 6 सीट का रिज़र्वेशन होगा. एयर इंडिया की ओर से आई ख़बर के मुताबिक़ फ्लाइट की आगे की 6 सीटें महिलाओं के लिए बुक रहेंगी.

स्पेशियस होती हैं ये सीटें
अगर आपने अभी तक फ्लाइट में सफ़र नहीं किया है, तो हम आपको बता दें कि आगे की सीटों के सामने जगह ज़्यादा होती है. इसके लिए स्पेशल बुकिंग करानी होती है, लेकिन अब से ये स्पेशियस सीट आपको बिना ज़्यादा पैसे दिए ही मिल जाएगी, क्योंकि आपके लिए आगे की 6 सीटें रिज़र्व्ड होंगी. तो सोचिए मत बुक कीजिए कोई फ्लाइट और आनंद लीजिए इस रिज़र्वेशन का.

सुविधा और सुरक्षा
अकेली महिलाओं के सफ़र को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए ये आगे की 6 सीटें रिज़र्वेशन के लिए रखी गई हैं. आमतौर पर कई बार ऐसा होता है जब आसपास के सह यात्रियों से महिलाएं असहज महसूस करती हैं. इस तरह की कई घटनाएं सामने आती रही हैं. अब से आपको ऐसा महसूस नहीं होगा.

श्वेता सिंह 

गोल्डन ईयर 2016: महिला खिलाड़ियों के नाम रहा ये साल (Golden year 2016 : it was for Indian women player)

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साल 2016 भारतीय खेल जगत के लिए गोल्डन ईयर साबित हुआ. इस साल भारतीय खिलाड़ियों ने ज़बर्दस्त प्रदर्शन किया. वैसे पुरुष खिलाड़ियों से ज़्यादा महिला खिलाड़ियों ने इस साल कमाल दिखाया. रियो ओलिंपिक में तिरंगे के मान-सम्मान को बनाए रखने की बात हो या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का लोहा मनवाने का जज़्बा, इस साल भारतीय महिलाएं विश्‍व खेल जगत में भारत का मस्तक ऊंचा रखने में अपने साथी पुरुष खिलाड़ियों से कहीं आगे रहीं. भारत को इस साल रियो में स़िर्फ दो पदक मिले और ये दोनों पदक देश को महिला खिलाड़ियों ने ही दिलाए.

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पी वी सिंधु
बैडमिंटन में पी. वी. सिंधु ने पहली बार देश को सिल्वर मेडल दिलाया. वह किसी भी ओलिंपिक स्पर्धा में रजत पदक जीतनेवाली देश की पहली महिला खिलाड़ी भी बन गईं.

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साक्षी मलिक
जब रियो में एक-एक करके भारतीय खिलाड़ी देश को निराश कर रहे थे और गेम से बाहर हो रहे थे, तब देश की इस बेटी साक्षी मलिक ने देश की झोली में पहला पदक डाला. साक्षी ने कुश्ती में कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया. कुश्ती में ओलिंपिक में पदक जीतनेवाली साक्षी देश की पहली महिला पहलवान बनीं.

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सानिया मिर्ज़ा
2016 भारतीय टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा के नाम रहा. इस साल उनकी उपलब्धियों ने उन्हें पद्म भूषण सम्मान दिलाया. इतना ही नहीं टाइम मैगज़ीन ने सानिया को 2016 की 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया. इस साल ऑस्ट्रेलियन ओपन का महिला डबल खिताब भी सानिया ने जीता. सानिया की रैंकिंग भी नंबर 1 है. यह भारत के लिए गौरव बढ़ानेवाली बात है. इसके पहले किसी भी भारतीय टेनिस खिलाड़ी को नंबर 1 की रैंकिंग नहीं मिली.

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स्मृति मंधाना
भारत में क्रिकेट का नाम लेते ही केवल पुरुष खिलाड़ी ही दिमाग़ में आते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम की बल्लेबाज़ स्मृति मंधाना ने साल 2016 में बढ़िया प्रदर्शन करते हुए देश का मान बढ़ाया. शायद इसीलिए आईसीसी ने उन्हें 2016 की अपनी बेस्ट इलेवन में भी चुना. ऐसा करनेवाली वह इकलौती भारतीय महिला खिलाड़ी हैं.

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अदिती अशोक
भारत की उभरती हुई गोल्फर अदिति अशोक के लिए साल 2016 यादगार रहा. अदिति को महिला यूरोपीय टूर की साल की उभरती हुई खिलाड़ी भी चुना गया. इस दौरान वह टूर पर अपने पहले साल में लगातार दो खिताब जीतने वाली पहली भारतीय भी बनी. अदिति महिला इंडियन ओपन जीतकर यूरोपीय लेडीज़ टूर प्रतियोगिता जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी.

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दीपा करमाकर
ओलिंपिक में देश को जिमनास्ट में रिप्रेज़ेंट करनेवाली दीपा पहली भारतीय महिला खिलाड़ी थीं. फाइनल में पहुंचकर दीपा ने लोगों का दिल जीतने के साथ-साथ चौथी पोज़ीशन भी हासिल की. भले ही दीपा कोई मेडल नहीं जीत पाईं, लेकिन देश का गौरव बढ़ा गईं. ओलिंपिक में 52 साल बाद कोई भारतीय जिमनास्ट फाइनल तक पहुंचने में सफल रहा. वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला जिमनास्ट भी बनीं.

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दीपा मलिक
रियो में पैरालिंपिक गेम्स में देश को गोल्ड दिलानेवाली कोई और नहीं, बल्कि दीपा मलिक थीं. गोला फेंक प्रतियोगिता में दीपा ने देश की झोली में स्वर्ण पदक डाला. भारत के लिए पैरालिंपिक में पदक जीतनेवाली पहली महिला खिलाड़ी बनीं.

– श्वेता सिंह 

नौकरी के मामले में शादीशुदा महिलाएं हैं आगे, मगर बेटे को लेकर नहीं बदली सोच (More married women than single women are working)

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आमतौर पर आज भी ये धारणा है कि शादी के बाद महिलाओं का करियर ख़त्म हो जाता है, मगर 2011 की जनगणना रिपोर्ट में जो आंकड़े सामने आए हैं, वो तो कुछ और ही कहानी बयां करते हैं. इसके मुताबिक, नौकरी के मामले में शादीशुदा महिलाएं सिंगल महिलाओं से कहीं आगे हैं.

नौकरी में मारी बाज़ी
शादी के बाद घर-परिवार की ज़िम्मेदारियों के साथ प्रोफेशनल लाइफ मैनेज करना आसान नहीं होता, रसोई के साथ ही ऑफिस की कुर्सी संभालना वर्किंग महिलाओं के लिए किसी जंग से कम नहीं और वो ये जंग लड़ना बख़ूबी जानती हैं. 2011 की जनगणना रिपोर्ट भी इस बात की तस्दीक करती है. इसके मुताबिक, नौकरी के मामले में सिंगल और विवाहित महिलाओं में काफ़ी अंतर है. जहां 41 प्रतिशत विवाहित महिलाएं नौकरीपेशा हैं, वहीं स़िर्फ 27 प्रतिशत अविवाहित महिलाएं ही वर्किंग हैं.

बेटे के प्रति नहीं बदली सोच
नौकरी के मामले में जनगणना के आंकड़े जहां विवाहित महिलाओं के सकारात्मक विकास को बयां करते हैं, वहीं स़िर्फ बेटे की चाहत लिंगभेद की तरफ़ इशारा करते हैं. आमतौर पर वर्किंग महिलाएं एक ही बच्चा चाहती हैं, क्योंकि करियर और घर के साथ बच्चों की परवरिश बहुत मुश्किल होती है. साथ ही आर्थिक बोझ भी बढ़ता है, मगर हैरानी वाली बात तो ये है कि एक बच्चे के रूप में वो बेटे की ही चाहत रखती हैं, जो पितृसत्ता की तरफ इशारा करता है. यानी करियर में आगे होने के बावजूद बेटे के प्रति परंपरावादी सोच में बदलाव नहीं आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, विवाहित महिलाओं की इस सोच की वजह से लिंगानुपात में कमी दर्ज की जा रही है. ये हमारे देश की विडंबना ही है कि तमाम प्रयासों के बावजूद ‘बेटा ही तो वंश बढ़ाएगा’ वाली सोच बदली नहीं है. हां, कुछ परिवार अपवाद ज़रूर हैं.

अविवाहित महिलाएं नौकरी में पीछे क्यों?
रिपोर्ट के अनुसार, 15-49 उम्र समूह में स़िर्फ 27 फीसदी अविवाहित महिलाएं ही कामकाजी हैं. जानकारों का कहना है कि ज़्यादातर अविवाहित लड़कियों को उनका परिवार नौकरी करने की इजाज़त नहीं देता है. कुछ लड़कियां कॉलेज में पढ़ रही होती हैं. जानकारों के अनुसार, सामान्य तौर पर भारतीय मानसिकता होती है कि अविवाहित महिलाओं को घर की दहलीज नहीं पार करनी चाहिए.

ग्रामीण और शहरी महिलाओं में फर्क़
रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है. इसके मुताबिक़, ग्रामीण इलाकों में जहां क़रीब 50 फीसदी विवाहित महिलाएं कामकाजी है, वहीं शहरों में स़िर्फ 22 प्रतिशत शादीशुदा महिलाएं ही वर्किंग है, साथ ही उनकी प्रजनन दर में भी कमी आई है. शहरों में लिंगानुपात भी घटा है.
शहरों में कामकाजी महिलाओं को औसतन दो बच्चे हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में ये आंकड़ा 3 से 4 का है.

– कंचन सिंह

निर्भया… दरिंदगी के 4 साल, अब भी नहीं बदले हैं हालात (Nirbhaya case: nothing has changed in 4 years)

Women Safety Tips

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पूरे देश को झकझोर कर रख देनेवाले निर्भया रेप कांड को आज 4 साल पूरे हो गए हैं. 16 दिसंबर 2012 की काली रात को चलती बस में मासूम निर्भया के साथ हुई दरिंदगी ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया, मगर दिल दहला देने वाली इस घटना के इतने साल बाद भी क्या महिलाओं की सुरक्षा की दिशा में ठोस प्रयास हुए हैं? क्या महिलाएं अब ख़ुद को सुरक्षित महसूस करती हैं? क्या बिना डर के रात के अंधेरे में वो अकेली कहीं आ-जा सकती हैं? देर रात बेटी के आने पर क्या माता-पिता बेफिक्र रहते हैं? इन सारे सवालों का जवाब ‘नहीं’ है.

कहां हैं आरोपी?
निर्भया रेेप कांड के 6 गुनहगारों में से एक पहले ही सुसाइड कर चुका है और नाबालिग आरोपी 3 साल की मामूली सज़ा के बाद जेल से छूट चुका है. बाकी 4 गुनहगारों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हो रही है. चारों ने दिल्ली हाईकोर्ट के मौत की सज़ा के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है. 2012 में इस घटना के ख़िलाफ़ पूरा देश एकजुट दिखा था, मगर लगता है अब लोगों की याददाश्त पर समय की धूल जम चुकी है. निर्भया के माता-पिता हर सुनवाई पर कोर्ट के चक्कर लगाते हैं, इस उम्मीद के साथ कि उनकी बेटी को शायद अब इंसाफ मिल पाए.

निर्भाया रेप कांड के बाद सरकार ने ये क़दम उठाए थे
* बलात्कार विरोधी विधेयक पारित करके रेप और गैंगरेप के लिए अधिकतम आजीवन कारावास की सज़ा का प्रावधान किया गया.
* यदि कोई आरोपी दोबारा ऐसा अपराध करता है, तो उसे मृत्युदंड का प्रावधान किया गया.
* चार साल पहले केंद्र ने 1000 करोड़ रुपए से ‘निर्भया फंड’ बनाया था.
* अब यह फंड 4 हजार करोड़ का हो चुका है. पर इसका 10% भी इस्तेमाल नहीं हुआ है.

अपराधियों के मन में सज़ा का ख़ौफ़ पैदा कर पाने में क्यों नाकाम है क़ानून?
स़िर्फ राजधानी दिल्ली ही महिलाओं के लिए असुरक्षित है ऐसा नहीं है, देश के तक़रीबन हर शहर, गांव-कस्बों में महिलाओं/बच्चियों के सेक्सुअल एब्यूज़ की ख़बरें आती रहती हैं और इन अपराधों में अभी तक किसी भी गुनहगार को ऐसी सख़्त सज़ा नहीं मिल पाई है, जो अन्य अपराधियों के लिए सबक बने या जिससे उनके मन में क़ानून का डर पैदा हो. नेशनल क्राइम ब्यूरो के आंकड़ों से साफ़ पता चलता है कि 16 दिसंबर की घटना के बाद भी कुछ बदला नहीं है.

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नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक साल 2015 में भी देश की राजधानी दिल्ली में रोज़ 6 बलात्कार और 15 मोलेस्टेशन के केस दर्ज होते रहे.

NCRB के मुताबिक भारत में हर साल हुए इतने रेप:
2011- 24,206
2012- 24,923
2013- 33,707
2014- 37,000
2015- 34,651

आवाज़ उठाना है ज़रूरी
आमतौर पर महिलाएं ऐसे मामलों में जल्दी आवाज़ नहीं उठा पातीं, वो डरती हैं. ख़ासतौर पर अपने ही घर व रिश्तेदारों द्वारा सेक्सुअली एब्यूज़ होने पर अक्सर उन्हें चुप रहने की सलाह दी जाती है, जो ग़लत है. यदि बेटी मां से कहती है कि फलां चाचा/मामा या व्यक्ति ने मुझे गंदी निगाह से देखा, ग़लत तरी़के से छुआ, कुछ कमेंट किया… तो उससे ये न कहें, ‘छोड़ो न बेटी’, बल्कि उसकी बात को गंभीरता से सुनें और उसे विरोध करना सिखाएं. उसमें इतनी हिम्मत और आत्मविश्‍वास जगाएं कि यदि कोई भीड़ में उसके साथ छेड़खानी करने की कोशिश करे, तो वो चिल्लाकर उसका विरोध कर सके. यदि आज आप एक व्यक्ति द्वारा की गई ग़लत हरकत को बर्दाश्त करती हैं, तो कल को चार और लोगों की हिम्मत बढ़ जाएगी, लेकिन आप यदि उसी वक़्त विरोध करती हैं, तो दोबारा कोई ऐसा करने से पहले 10 बार सोचेगा ज़रूर. अपने ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा को रोकने के लिए बहुत ज़रूरी है कि महिलाएं अपनी चुप्पी तोड़ें.

Women Safety Tips
ख़ुद करें अपनी हिफाज़त
अपनी सुरक्षा सुनिश्‍चित करने के लिए ख़ुद महिलाओं को भी पहल करनी होगी. सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग के साथ ही हर समय अलर्ट व जागरूक भी रहना होगा. अपनी सेफ्टी के लिए इन बातों का ख़्याल रखें.

* सड़क पर चलते समय अपनी ही धुन में न रहें, अपने आसपास की चीज़ों व लोगों पर नज़र रखें.

* अपने परिवार वालों और क़रीबी दोस्तों को इस बात की जानकारी अवश्य दें कि आप कहां और किसके साथ हैं.

* महिलाओं के लिए सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग भी ज़रूरी है.

* कहते हैं, महिलाओं का सिक्स्थ सेंस (छठी इंद्रिय) बहुत स्ट्रॉन्ग होती है. अतः आपको किसी व्यक्ति की हरकत या बातचीत के तरी़के पर यदि किसी  तरह का संदेह होता है, तो उस व्यक्ति से दूर रहें. संभव हो, तो वहां से चली जाएं.

* रास्ते में किसी भी अनजान शख़्स से भले ही वो कितना भी सभ्य दिखे, लिफ्ट लेने की ग़लती न करें.

* रात में रास्ते से कोई भी कैब लेने की बजाय टैक्सी स्टैंड से ही कैब लें. ऑटो भी प्री-पेड बूथ से लें, तो अच्छा रहेगा.

* यदि बस से जाना हो, तो ऐसी बस में न चढ़ें, जिसमें स़िर्फ ड्राइवर व कंडक्टर हों. 4-5 लोग हों तो, भी बस में न चढ़ें. कई बार ये लोग ड्राइवर-कंडक्टर  के दोस्त या जानकार ही होते हैं.

* ऑटो/कैब से जा रही हैं, तो आपको रास्ते की जानकारी होनी चाहिए. जिस इलाके में आपको जाना है, उसके बारे में जान लें और रोड मैप अपने पास  रखें या अपने स्मार्ट फोन में गूगल मैप का इस्तेमाल करें.

* ऑटो या टैक्सी का नंबर अपने मोबाइल में टेक्स्ट के रूप में तैयार रखें. थोड़ी भी गड़बड़ी लगे, तो अपने किसी दोस्त या जानकार को नंबर एसएमएस  कर दें.

* आजकल कई सेफ्टी ऐप्स भी मौजूद हैं, जिसे आप अपने स्मार्टफोन पर डाउलोड करके ख़ुद को प्रोटेक्ट कर सकती हैं. अपने स्मार्टफोन पर ये आप ये  ऐप्स डाउनलोड कर सकती हैं – Safetipin, Raksha – women safety alert, Himmat, Women safety, Smart 24×7, Shake2Safety, bSafe.

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कार चलाते समय रहें सावधान

* गाड़ी में सेंट्रल लॉक लगाकर ड्राइव करें. एसी है तो शीशे चढ़ाकर रखें. यदि न हो, तो खिड़की लॉक करके रखें. बस, एक ही शीशा खोलें.

* गाड़ी में तेज़ म्यूज़िक न चलाएं. ड्राइव करते समय फोन पर बात न करें.

* रात के व़क्त बेसमेंट में कार पार्क करने से बचें. वहां मोबाइल काम करना बंद कर सकता है. गाड़ी रोशनी वाली जगह पर पार्क करें.

* यदि सड़क पर अचानक कार ख़राब हो जाए, तो सबसे पहले अपने घरवालों या किसी ऐसे दोस्त/जानकार को फोन करके अपनी स्थिति के बारे में  बताएं, जो पास में रहता हो. तुरंत कार हेल्पलाइन को बुलाएं. ये नंबर हमेशा मोबाइल में होना चाहिए.

* अगर कोई कार या बाइक लगाकर, पेड़ आदि गिराकर या फिर एक्सीडेंट का बहाना बनाकर आपका रास्ता रोक ले, तो घबराकर गाड़ी से उतरें नहीं.  खिड़की-दरवाज़े लॉक करके कार में ही बैठी रहें और पुलिस को कॉल करें. यदि सामने वाला उतरकर आपकी कार की तरफ़ आने लगे, तो जल्दी से  कार रिवर्स करके भगा लें.

हिफ़ाज़त के हथियार
अपने पास हमेशा कुछ ऐसी चीज़ें रखें, जिससे अचानक अपराधी से सामना होने पर आप उस पर हमला करके ख़ुद को बचा सकें.

* हमलावर की आंखों पर डियोड्रेंट स्प्रे करें.

* अपने पास पेपर स्प्रे (मिर्च का स्प्रे) रखें. इसे हमलावर की आंखों पर स्प्रे करें.

* पर्स में नेल फाइलर, नेलकटर, पेपर कटर आदि रखें.

* पर्स भी आपका हथियार बन सकता है. पर्स को घुमाकर कसकर हमलावर के मुंह पर मारें.

* यदि आपने हाई हील सैंडल पहन रखी हैं, तो उनसे हमलावर के चेहरे पर ज़ोर से मारें.

* बेल्ट से भी ज़ोरदार वार किया जा सकता है.

– कंचन सिंह

Cricket: Women’s T20 एशिया कप2016- पाकिस्तान को रौंदकर भारत ने दर्ज की जीत! (Women’s aisa cup final- India defeated Pakistan)

Cricket: Women’s T20 एशिया कप 2016 में भारत ने कमाल कर दिया. फ़ाइनल में पाकिस्तान को हराकर बड़ी जीत अपने नाम की.

ग़ौरतलब है कि पूरी सिरीज़ में भारत ने हार का मुँह नहीं देखा और फ़ाइनल में भी अपने उत्कृष्ट खेल से सबका दिल जीत लिया!

भारत ने 17 रनों से आसान जीत दर्ज की. भारत की ओर से कैप्टन मिताली राज ने 65 गेंदों में नाबाद 73 रन बनाए.

इस जीत के लिए पूरी टीम को बधाई!

– गीता शर्मा

आख़िरकार हाजी अली दरगाह में महिलाओं को प्रवेश मिला (Women Re-Enter Mumbai’s Haji Ali Dargah After 5 Years)

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लंबी कानूनी लड़ाई, विरोध प्रदर्शनों लंबे साल के इंतज़ार के बाद आख़िरकार मंगलवार को 80 महिलाओं के एक समूह ने मुंबई के बहुचर्चित हाजी अली दरगाह की मुख्य मज़ार में प्रवेश किया और दरगाह तक पहुंच कर महिलाओं ने वहां चादर चढ़ाने की रस्म भी मुकम्मिल की.

 भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की सहसंस्थापक नूरजहां एस नियाज़ ने कहा, “आज हमने बड़ी लड़ाई जीत ली. अब महिलाएं हाजी अली दरगाह में पुरुषों की तरह चादर चढ़ा सकेंगी. हमने पुलिस या दरगाह ट्रस्ट को सूचित नहीं किया है. हम लोगों ने मत्था टेका और बाहर आ गए.”

 सुश्री नियाज़ ने कहा कि महिलाओं ने मंगलवार को दरगाह पर फूल और चादरें चढ़ाईं और शांति की दुआ की. उन्होंने कहा, “यह समानता, लैंगिक भेदभाव ख़त्म करने और हमारे संवैधानिक अधिकारों को समाप्त करने की लड़ाई थी. हम ख़ुश हैं कि अब महिलाओं और पुरुषों को पवित्र गर्भगृह में प्रवेश का समान अधिकार मिला.”

 पूरे देश की क़रीब 80 महिलाओं के एक समूह ने दोपहर बाद क़रीब तीन बजे मुंबई के वरली तट के निकट एक छोटे से टापू पर स्थित हाजी अली दरगाह में प्रवेश किया. इस बार उन्हें हाजी अली दरगाह ट्रस्ट की ओर से किसी तरह का विरोध का सामना नहीं करना पड़ा. सर्वोच्च न्यायालय ने 24 अक्टूबर को महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार के आधार पर अपने फैसले में महिलाओं को दरगाह में प्रवेश की अनुमति दी थी। इसके बाद हाजी अली दरगाह ट्रस्ट ने संकेत दिया था कि उनकी ओर से दरगाह में आने वाली महिलाओं का विरोध नहीं किया जाएगा. हालांकि एहतियात के तौर पर पुलिस ने तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर रखी थी.

दरगाह के ट्रस्टी सुहैल खांडवानी ने कहा कि दरगाह में प्रवेश के लिए महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार बना दिए गए हैं और किसी को भी पीर की मज़ार छूने की इजाज़त नहीं दी जाएगी. नई व्यवस्था के तहत पुरुषों और महिलाओं को दरगाह में जाने का समान अधिकार होगा और सभी श्रद्धालु मज़ार से करीब दो मीटर की दूरी से दुआ कर सकेंगे.

 जून 2012 तक महिलाओं को मुस्लिम संत सैयद पीर हाजी अली शाह बुखारी की मज़ार के गर्भगृह तक प्रवेश की अनुमति थी, लेकिन उसके बाद गर्भगृह में महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी. वर्ष 2014 में भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन और कई अन्य ने हाजी अली दरगाह के इस कदम को अदालत में चुनौती दी थी.

 बॉम्बे हाईकोर्ट ने 26 अगस्त को हाजी अली दरगाह में महिलाओं को मज़ार तक जाने की परमिशन दी थी। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट की ओर से दरगाह में पुरुषों की ही तरह महिलाओं को भी जाने की इजाजत देने का फ़ैसला सुनाया गया था।

 इससे पहले महाराष्ट्र में शनि शिंगणापुर मंदिर में सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई के आंदोलन के बाद महिलाओं को शनि मंदिर में प्रवेश मिला था.  तृप्ति ने मुंबई स्थित हाजी अली दरगाह में भी महिलाओं को प्रवेश मिलने के लिए आंदोलन किया था. इस आंदोलन का बड़ा विरोध भी हुआ था। इससे पहले महिलाओं को दरगाह में मज़ार तक जाने की इजाज़त नहीं थी.

हाजी अली दरगाह में पीर हाजी अली शाह बुख़ारी की कब्र है. पीर बुखारी एक सूफी संत थे, जो इस्लाम के प्रचार के लिए ईरान से भारत आए थे. ऐसा माना जाता है कि जिन सूफ़ी-संतों ने अपना जीवन धर्म के प्रचार में समर्पित कर दिया और जान क़ुर्बान कर दी, वे अमर हैं. इसलिए पीर हाजी अली शाह बुख़ारी को भी अमर माना जाता है. उनकी मौत के बाद दरगाह पर कई चमत्कारिक घटनाएं देखी जाती हैं. दरगाह मुंबई के साउथ एरिया वरली के समुद्र तट से करीब500 मीटर अंदर पानी में एक छोटे-से टापू पर स्थित है.

(एजेंसियों के इनपुट के साथ)

एक्सक्लूसिव बुनाई डिज़ाइन्स- 5 परफेक्ट डिज़ाइन्स फॉर वुमन (Exclusive Bunai Designs- 5 Perfect designs for women)

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डिज़ाइनर लुक

सामग्रीः 350 ग्राम डार्क ब्राउन, क्रीम, लाइट ब्राउन और ब्लैक रंग का ऊन, सलाइयां.

विधिः आगे-पीछे का भाग एक जैसे ही बुनें. 80-80 फं. डार्क ब्राउन रंग से डालकर 2 फं. सी. 2 उ. की रिब बुनाई में 6 सलाई का बॉर्डर बुनें. अब सीधी-उल्टी सलाई की बुनाई में 2-2 सलाई क्रीम, लाइट ब्राउन व डार्क ब्राउन से बुनें. 4 सलाई क्रीम से बुनें. अब लाइट ब्राउन, डार्क ब्राउन, क्रीम और डार्क ब्राउन की 2-2 सलाई बुनें. चित्रानुसार डिज़ाइन बनाते हुए सीधी-उल्टी सलाई की बुनाई में बुनें. 14 इंच लंबाई हो जाने पर डोरी डालने के लिए जाली बुन लें. 2 इंच 2 फं. सी., 2 उ. की बुनाई करते हुए गला बुनें.
दोनों भागों में नीचे से 8 इंच के बाद फं. उठाकर 5 इंच की मुड्ढे जैसी रिब बुनाई की पट्टी बुन लें.
स्वेटर के दोनों भागों को जोड़कर सिल लें. डोरी डालें.

 

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बहुत ठंड है

सामग्रीः 400 ग्राम ऑरेंज रंग का ऊन, थोड़ा-थोड़ा पिस्ता और लाइट ब्राउन ऊन, सलाइयां, बटन.

विधिः पीछे का भागः 125 फं. ऑरेंज रंग से डालकर 10 सलाई सीधी-उल्टी बुनें. अब इसे मोड़कर डबल कर लें. चित्रानुसार सभी रंगों से बेलवाली डिज़ाइन डालते हुए बुनें. 19 इंच बाद मुड्ढे घटाएं. 8 इंच और बुनने के बाद फं. बंद कर दें.

आगे का भागः दाएं-बाएं भाग के लिए 60-60 फं. डालकर पीछे के भाग की तरह ही बुनें. पर दोनों भागों में साथ में जेब भी बुनें. मुड्ढे घटाएं. साथ ही कॉलर के लिए किनारे पर फं. बढ़ाते जाएं. बढ़े हुए हिस्से को मोड़कर सिल दें.

आस्तीनः 50-50 फं. डालकर उल्टी धारियों का 4 इंच का बॉर्डर बुनें. आगे-पीछे की तरह बेलें डालते हुए 23 इंच लंबी आस्तीन बुनें. हर 5वीं सलाई में दोनों तरफ़ से 1-1 फं. बढ़ाते जाएं.
स्वेटर के सभी भागों को जोड़कर सिल लें. बड़े बटन लगाएं. क्रोशिया से लूप बनाएं.

 

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शॉर्ट कोट

सामग्रीः 350 ग्राम ब्लैक-ग्रे शेडेड ऊन, 50 ग्राम ब्लैक ऊन, सलाइयां, बटन.

विधि: आगे का भाग: दाएं-बाएं भाग के लिए ब्लैक रंग से 46-46 फं. डालकर साबुदाने की बुनाई में 2 इंच का बॉर्डर बुनें. अब दोनों भागों के किनारे के 6-6 बटनपट्टी के फं. हर बार साबुदाने की बुनाई में ब्लैक रंग से ही बुनें. शेष फं. ग्रे शेडेड ऊन से इस तरह बुनें- 6 फं. सी., 2 उ., 6 फं. का केबल, 2 उ., 6 सी., 1 उ., 4 का केबल, 1 उ., 6 फं. सी.. उल्टी सलाई पूरी उल्टी बुनें. 6 फं. वाली केबल 6ठी सलाई में और 4 फं. वाली केबल चौथी सलाई में पलटते हुए बुनें. 15 इंच लंबा बुनने के बाद मुड्ढे घटाएं. वी आकार में गला घटाएं. बटनपट्टी के ब्लैक फं. बढ़ाकर कॉलर का शेप दें.

पीछे का भागः 90 फं. डालकर आगे के भाग की तरह ही बुनें. लंबाई हो जाने पर कंधे जोड़ें. पीछे के फं. का भी कॉलर बुन लें.

आस्तीनः 50-50 फं. डालकर आगे-पीछे के भाग की तरह बुनें. हर 5वीं सलाई में दोनों तरफ़ से 1-1 फं. बढ़ाते जाएं. 20 इंच लंबाई हो जाने पर फं. बंद कर दें.
अलग से जेब बुनकर टांक दें. कोट के सभी भागों को जोड़कर सिल लें. बटन टांक लें.

 

4

मल्टी कलर

सामग्रीः 150 ग्राम क्रीम रंग का ऊन, 50 ग्राम मेहंदी ऊन, 50 ग्राम यलो ऊन, थोड़ा-थोड़ा स्काई ब्लू और लाल रंग का ऊन, सलाइयां.

विधिः पीछे का भाग: क्रीम रंग से 90 फं. डालकर 1 फं. सी. 1 उ. की रिब बुनाई में 2 इंच का बॉर्डर बुनें. सीधी-उल्टी सलाई की बुनाई करते हुए 18 इंच लंबा बुनें. मुड्ढे घटाएं. 24 इंच लंबाई हो जाने पर फं. बंद कर दें.

आगे का भागः क्रीम रंग से 90 फं. डालकर बॉर्डर बुनें. चित्रानुसार सभी रंगों की बर्फी बुनें. मुड्ढे व गोल गला घटाएं. कंधे जोड़कर गले के फं. उठाकर गले की पट्टी बुनें.

आस्तीन: 45-45 फं. डालकर सीधी-उल्टी सलाई की बुनाई में एक आस्तीन मेहंदी रंग और दूसरी यलो रंग से बुनें. 18 इंच लंबी आस्तीन बुनें. हर 5वीं सलाई में दोनों तरफ 1-1 फं.
बढ़ाते जाएं.
स्वेटर के सभी भागों को जोड़कर सिल लें.

 

3

क्लासिक चॉइस

सामग्रीः 300 ग्राम पेस्टल ग्रीन रंग का ऊन, सलाइयां, बटन.

विधि: आगे का भाग: दाएं-बाएं भाग के लिए 60-60 फं. डालकर साबुदाने की बुनाई में बॉर्डर बुनें. दोनों भागों में एक किनारे के बटनपट्टी के 8-8 फं. और 2 इंच स्लिट के फं. साबुदाने की बुनाई में ही बुनें. शेष फं. में बुनाई डालें. 4-4 फं. को एक-दूसरे के ऊपर से 2-2 के जोड़े में बुनेंगे. 3 बार केबल की तरह यही डिज़ाइन डालें. अब यही 4-4 फं. ऊपर की तरफ़ बर्फी जैसे शेप में बढ़ेंगे. 1 जाली, 3 सी., 1 जोड़ा, 1 जाली, 3 सी. 1 जो.- पूरी सलाई ऐसे ही बुनें. पॉकेट बुनने के लिए नीचे सीधा-उल्टा ही बुनें. पॉकेट के ऊपर से फिर बुनाई डालें. 15 इंच बाद मुड्ढे घटाएं. वी आकार में गला घटाएं. 22 इंच लंबाई हो जाने पर फं. बंद कर दें.

पीछे का भागः 110 फं. डालकर आगे के भाग की तरह बॉर्डर बुनें. अब सीधी-उल्टी सलाई की बुनाई में पूरा पीछे का भाग बुनें. मुड्ढे घटाएं.
सभी भागों को जोड़कर सिल लें. हर किनारे पर क्रोशिया से बॉर्डर बनाएं.
बटन टांकें.