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फिल्म समीक्षाः धुरंधरः द रिवेंज- आदित्य धर+रणवीर सिंह का दूसरा धमाका.. घायल है, घातक भी है… (Movie Review: Dhurandhar: The Revenge)

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आदित्य धर का एक बार फिर 'धुरंधर: द रिवेंज' के रूप में धमाका हर तरफ़ तहलका मचा रहा है. धुरंधर की ही कहानी को आगे बढ़ाते हुए एक अलग तरह का ही माहौल क्रिएट किया है निर्देशक आदित्य धर ने. रणवीर सिंह ने अपना दमखम क्या ख़ूब दिखाया है. धुरंधर का यह घायल बब्बर शेर वाकई में बेहद घातक रहा है पूरी फिल्म में.

क़रीब चार घंटे की धुरंधर 2 बांधे रखती है. छह चैप्टर में गुज़रती मूवी हर चैप्टर में लुभाती, थरथराती और हैरान करती है. आईएसआई, अंडरवर्ल्ड के गुर्गे, भारत के उत्तर प्रदेश, पंजाब तक को लेकर ड्रग्स, तमाम नशीली दवाइयां, हथियार, नकली नोटों की तस्करी को लाजवाब अंदाज़ में दिखाया गया है. दाऊद इब्राहिम, अतीक अहमद जैसे गुनहगारों की कमर तोड़ने मे कोई कसर नहीं छोड़ी गई है. उस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी की नोट बंदी भी इन अपराधियों में खलबली मचा देती है.

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अंत में रणवीर और अर्जुन रामपाल की लड़ाई उसकी विभत्सता देखते ही बनती है. ऐसे-ऐसे ख़तरनाक, अविश्‍वसनीय फाइट सीन्स को देख रूह तक कांप जाती है. सच में, फाइट मास्टर के कल्पना शक्ति की दाद देनी होगी.

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संजय दत्त खूंखारता दिखाते हुए हल्का-फुल्का मनोरंजन भी ख़ूब करते हैं. एक सीन में यामी गौतम का आना आंखों को सुकून देता है. सारा अर्जुन को पहले के मुक़ाबले इस पार्ट में कम मौक़े मिले, पर उन्होंने अपनी अदायगी से प्रभावित किया है. आर. माधवन और मानव गोहिल की जोड़ी एक बार फिर रंग जमाती है. किंतु पूरी फिल्म में रणवीर सिंह का दबदबा हावी रहा है.

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धुरंधर 2 के सभी कलाकारों ने अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है, फिर चाहे वो रणवीर सिंह हो या छोटे से क़िरदार में गौरव गेरा. हर किसी को निर्देशक ने पूरी फुटेज दी है. रणवीर सिंह ने जसकीरत सिंह रंगी/हमजा की भूमिका में इस तरह से रच-बस गए कि आप उन्हें उससे अलग करके देख ही नहीं सकते. बहन को लेकर प्रतिशोध लेना हो या सभी दुश्मनों का ख़ात्मा करना रणवीर हर जगह बेहद ख़तरनाक दिखे हैं. भावुक दृश्यों में भी उनकी आंखें और भाव-भंगिमाएं इमोशनल कर देती हैं. क्या आप जानते हैं, रणवीर के दादा सुंदर सिंह भावनानी और दादी चांद बर्क १९४७ में कराची से मुंबई आ गए थे. उनकी दादी भी अभिनेत्री रही‌ थीं.

संजय दत्त, अर्जुन रामपाल, दानिश पंडोर, राकेश बेदी, आर. माधवन, सारा अर्जुन, गौरव गेरा, मानव गोहिल, दानिश इकबाल, यामी गौतम, उदयबीर संधु, सुविंदर पाल, सलीम सिद्दीकी, भाषा सुंबली, हितिका बाली, सौम्या टंडन सभी ने अपने अभिनय के जलवे दिखाए और वाहवाही लूटी. कथा-पटकथा, गीत-संगीत, सिनेमैटोग्राफी ने ख़ूब रंग जमाया है.

शाश्‍वत सचदेव का संगीत पर्दे पर गूंजता और रंग जमाता है. पूरी फिल्म में गानों के साथ-साथ बैकग्राउंड म्यूज़िक रोमांचित करती है. ख़ासकर संजय दत्त की दहशत गर्दी में पृष्ठभूमि में उनका तम्मा तम्मा लोगे... गाना खून-ख़राबा और डर के माहौल में भी चेहरे पर मुस्कुराहट ला देता है.

निर्देशक आदित्य धर की जितनी तारीफ़ की जाए कम है. उन्होंने हर दृश्य पर बेहद बारीक़ी से ध्यान दिया है फिर चाहे वो हिंदुस्तान, पाकिस्तान, दुबई, अफगानिस्तान व अन्य विदेशी सरजमीं ही क्यों न हो. भारतीय जासूसी एजेंसी रॉ की गोपनीयता, उनके सीक्रेट टास्क, काम करने का तरीक़ा, देख-जान कर अपने इन वीरों पर गर्व होता है. 'बलिदान' टीम की ट्रेनिंग में‌ सभी की मेहनत-लगन बेमिसाल है.

फिल्म की कहानी आदित्य धर ने लिखी है, वे इसके निर्माता-निर्देशक भी हैं. उनके साथ ज्योति देशपांडे और लोकेश धर भी प्रोडयूसर के रूप में जुड़े हैं. पटकथा की भूमिका ओजस गौतम व शिवकुमार वी. पानीकेर ने लिखी है. विकास नौलखा ने क्या ख़ूब सिनेमैटोग्राफी की भूमिका निभाई है. लेकिन संपादक शिवकुमार वी. पानीकेर चाहते तो फिल्म को थोड़ी छोटी कर सकते थे. तीन घंटे पचास मिनट की फिल्म एक ऐसी मैराथन भी लगती है, जिसमें कुछेक उकता भी सकते हैं. क़रीब चार घंटे तक सीट पर बने रहना हर किसी के बस की बात नहीं है. परंतु इसके बावजूद डायरेक्टर आदित्य का उम्दा निर्देशन एक पल के लिए कहीं भी बोर होने नहीं देता. हां, अंत का एक सरप्राइज़ हर किसी को चौंकाता और हैरान करता है, जिसे जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

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जियो स्टूडियो और बी62 स्टूडियो के बैनर तले बनी 'धुरंधरः द रिवेंज' यह स्पाई थ्रिलर हक़ीक़त में भारत के दुश्मनों से क्या ख़ूब प्रतिशोध लेती है, देखने क़ाबिल है. हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम में भी फिल्म को रिलीज किया गया है.

फिल्म की पूरी टीम को बधाई और भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं!

- ऊषा गुप्ता

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Photo Courtesy: Social Media

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