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विरोध प्रदर्शन करने वालों पर अनुपम खेर का तीखा प्रहार!.. (Anupam Kher’s sharp attack on the protesters!..)

हमारे देश में पिछले कई समय से जाने कितनी बातों को लेकर धरना, विरोध प्रदर्शन, उपद्रव का तांडव होता आ रहा है. एक ख़ास तबके ने इसे सरकार के विरोध करने से लेकर.. न्याय पाने तक को लेकर इसे ग़लत ही सही सॉफ्ट टार्गेट के रूप में अख़्तियार कर लिया है. इसमें देश के बवाल मचाने वाले लोग तो हैं ही उस पर विदेशी ग़लत ताक़तें भी सहयोग दे रही हैं.
माना विरोध करना हर किसी का अधिकार है, लेकिन इसे सही ढंग से करना भी ज़रूरी है. इन्हीं सब को देखते हुए अभिनेता अनुपम खेर ने इन विरोधी व उपद्रवी लोगों को आड़े हाथ लिया. उन्होंने अपने सोशल मीडिया के इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो साझा करते हुए अपने दिल की बात कही. एक तरह से उन्होंने राजनीतिज्ञ से लेकर अपने आपको सो कॉल्ड देश का हितैशी समझने वाले, हुड़दंग मचाने वाले जमात पर करारा तमाचा जड़ा है.

इन दिनों अनुपम खेर अमेरिका और कनाडा में अपने नाटक ‘जाने पहचाने अनजाने’ को लेकर 18 शहरों की यात्रा पर हैं. व्यस्त शैड्यूल के बावजूद विरोध प्रदर्शनों का गोरखधंधा देख उनके दिल को ठेस लगी और वे इस कदर आहत व भावुक हो गए कि उन्होंने जनता जर्नादन को संबोधित करते हुए अपना संदेश हर उस शख़्स को दिया है, जो देश को लेकर संवेदनशील है, जिसे भारतीय होने पर गर्व है. जो देश के विकास को देखकर ख़ुश है. आइए जानते है अनुपम खेर के दिल की बात उनकी ज़ुबानी. वे कहते हैं-

https://www.instagram.com/reel/Dee01fsucYl/?exln=N2c2YXprb2tidXpu

कभी-कभी बोलना बहुत ज़रूरी होता है. भले ही आपकी बात कुछ लोगों को पसंद न आए. दूसरों के बीच लोकप्रिय होने से ज़्यादा ज़रूरी है अपनी नज़रों में सही बने रहना. जब आपकी अंतरात्मा कहती है कि बोलना चाहिए, तो चुप रहना मुश्किल हो जाता है. और वही मैं कर रहा हूं.

पिछले कुछ दिनों से विदेश में रहते हुए मैं भारत में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को देख रहा हूं. इनके पीछे की कहानी क्या है? इनका मक़सद क्या है? इनमें कितना सत्य है और कितना षडयंत्र? इन सवालों पर मैंने जो सोचा और महसूस किया है, वही इस वीडियो में आपके सामने रख रहा हूं.

मेरा मानना है कि अगर विरोध करने वालों के पक्ष में लोग अपनी बात रख रहे हैं, तो उन लोगों का बोलना भी उतना ही ज़रूरी है, जो मानते हैं कि प्रधानमंत्री बहुत अच्छा काम कर रहे हैं. मैं भी उन लोगों में हूं, जिन्हें प्रधानमंत्री के लिए इस्तेमाल किए गए अपशब्द चुभते हैं. वे हमारे देश के प्रधानमंत्री हैं. उम्र में बड़े हैं और मेरे विचार में देश का नेतृत्व अच्छी तरह कर रहे हैं.

असहमति और आलोचना अपनी जगह हैं. लेकिन अपनी बात रखने के लिए अपशब्दों की ज़रूरत क्यों पड़े? शांति चाहने वालों की भी आवाज़ है. उनका भी अपना नज़रिया है. और उसे सामने रखना ज़रूरी है. यह वीडियो उसी भावना के साथ साझा कर रहा हूं. यह मेरी सोच है, मेरी बात है और मेरी अंतरात्मा की आवाज़ है. जय हिंद!

वाकई यह अनुपम खेर की ही नहीं, हर उस हिंदुस्तानी की आवाज़ है, जो भारत के आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी के कार्यों से ख़ुश हैं. जो जानते हैं कि मोदीजी ने देश के साथ-साथ दुनियाभर में भारत के आन-बान-शान को किस कदर बढ़ाया है. सच में, अब व़क्त आ गया है कि आप प्रधानमंत्री के विरोधियों को करारा जवाब देते हुए उनके बारे में अपनी मन की बात खुलकर कहें. आख़िरकार हमने उन्हें चुना है, फिर बाहरी टुटपंजिए लोग कैसे उनको लेकर गुस्ताख़ियां कर सकते हैं.

लोकतंत्र, संविधान कहने की आज़ादी देता है, परंतु इस कदर ओक्षी हरकतें कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. आख़िर ये मुट्ठीभर विकृत मानसिकता वाले लोग किस साजिश को अंजाम देना चाहते हैं, इसे हम सभी को जानना और समझना होगा. साथ ही अपनी आवाज़, जनता की आवाज़ को इस कदर बुलंद करना होगा कि भविष्य में कोई भी पप्पू टाइप के लोग ऐसी हिमाकत करने से पहले दस बार सोेचें. शेष फिर…
– ऊषा गुप्ता

Photo Courtesy: Social Media

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