साइबर क्राइम- कहीं आप तो नहीं अगला शिकार? (Cyber Crime)

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इंटरनेट क्रांति की बदौलत एक क्लिक पर सारी दुनिया सिमट गई है. दोस्तों-रिश्तेदारों से चैटिंग से लेकर ख़रीददारी, बैंकिंग ट्रांजेक्शन… सब कुछ बस, एक क्लिक पर हो जाता है, मगर दुनिया को समेटता ये इंटरनेट कभी आपकी दुनिया भी बदल सकता है. सोशल साइट्स पर की गई ज़रा-सी मस्ती भारी पड़ सकती है. तेज़ी से बढ़ते साइबर क्राइम के ख़तरे के बावजूद ज़्यादातर लोग इसे हल्के में ही लेते हैं. साइबर क्राइम यानी इंटरनेट की दुनिया का ये अनदेखा-अनजाना दुश्मन आपको कितनी हानि पहुंचा सकता है? इसकी पड़ताल करती पेश है, हमारी ख़ास रिपोर्ट.
अनसोशल होते सोशल साइट्स

मुंबई की 35 वर्षीया मोनिका शर्मा (बदला हुआ नाम) के साथ सोशल साइट पर जो हुआ उसे जानने के बाद शायद एकबारगी आप भी ख़ुद को इससे दूर रखने की सोच लें. दरअसल, किसी ने मोनिका का फेसबुक (एफबी) अकाउंट हैक कर लिया और उनके नाम से उनके ऐसे
दोस्तों-रिश्तेदारों को मैसेज करने लगा जिनसे मोनिका शायद ही कभी बात करती थी. मोनिका कहती हैं, “कुछ फैमिली प्रॉब्लम्स की वजह से मैं काफ़ी दिनों से एफबी अकाउंट चेक नहीं कर पाई. क़रीब 15 दिन बाद जब मैंने लॉगिन किया, तो मेरे एक कॉलेज फ्रेंड के अजीब से मैसेज ने मेरे होश उड़ा दिए. उन मैसेज को देखकर लग रहा था कि मेरी उससे लंबी बातचीत हुई है. जब मैंने उसे बताया कि मैंने उससे बात नहीं की, तो वो मानने को तैयार ही नहीं हुआ और उसने वो पूरा चैट मुझे भेजा जिसमें किसी ने मेरे नाम से उससे बात की थी. वो चैट इतना अश्‍लील था कि देखकर मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई. यदि मेरे पति समझदार नहीं होते तो उस चैट को देखकर तो हमारा रिश्ता टूट ही जाता. मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि सोशल मीडिया पर मेरे साथ ऐसा कुछ हो सकता है. इस वाक़ये के बाद मैं बहुत परेशान और डिप्रेस्ड हो गई. अब मैंने अपना न स़िर्फ फेसबुक अकाउंट डिलीट कर दिया है, बल्कि हर तरह के सोशल मीडिया से दूरी बना ली है. हालांकि ये आसान नहीं है, आज सोशल मीडिया साइट्स जैसे हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं, उनसे दूर रहने पर लगता है जैसे मैं दुनिया से कट गई हूं, मगर इस हादसे ने मुझे इस क़दर डरा दिया है कि शायद अब मैं दोबारा सोशल साइट्स से न जुड़ पाऊं.”
सोशल मीडिया पर साइबर क्राइम की शिकार होने वाली मोनिका कोई पहली शख़्स नहीं हैं, कई लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं. इसकी वजह से कुछ को अपने रिश्ते, तो कुछ को ज़िंदगी से भी हाथ धोना पड़ा है. 2007 में अदनान नाम के एक 17 साल के लड़के का उसके ऑर्कुट अकाउंट वाले दोस्तों ने अपहरण करके उसे मौत के घाट उतार दिया था. दरअसल, अदनान (मुंबई के एक बिज़नेसमैन का बेटा) ने ऑर्कुट पर कुछ ग़लत लोगों से दोस्ती कर ली थी. सोशल साइट्स के ज़रिए होने वाले अपराधों की तादाद दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. कभी किसी महिला की फोटे से छेड़खानी की जाती है, तो कभी उसे अश्‍लील मैसेज भेजकर परेशान किया जाता है. बावजूद इसके हम इन साइट्स का इस्तेमाल करते समय सुरक्षा मानकों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं.

महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले साइबर अपराध

साइबर क्राइम का दायरा बहुत बड़ा है. इसके निशाने पर कभी कोई कंपनी होती है, कभी कोई देश, तो कभी महिलाएं. महिलाओं को टारगेट करने वाले साइबर क्राइम निम्न हैं.

* ईमेल भेजकर हैरास (उत्पीड़ित) करना. इसमें बदमाशी, धोखा और धमकी देना शामिल है. ऐसा अक्सर फर्ज़ी आईडी से किया जाता है.

* साइबर स्टॉकिंग नए तरह का अपराध है. स्टॉकिंग का मतलब होता है छिपकर पीछा करना. साइबर स्टॉकिंग में विक्टिम (पीड़ित) को मैसेज    भेजकर, चैट रूम में प्रवेश करके और ढेर सारे ईमेल भेजकर उसे परेशान किया जाता है.

* अश्‍लील फोटो, मैग्ज़ीन, वेबसाइट आदि बनाकर महिलाओं को मेल करना.

* ईमेल स्पूफिंग- किसी दूसरे व्यक्ति के ईमेल का इस्तेमाल करते हुए ग़लत मकसद से दूसरों को ईमेल भेजना इसके तहत आता है. इस तरह के ईमेल  के ज़रिए अक्सर पुरुष अपनी अश्‍लील फोटो महिलाओं को भेजते हैं, उनकी सुंदरता की तारीफ़ करते हैं, उन्हें डेट पर चलने के लिए कहते हैं, यहां तक  कि उनसे सर्विस चार्ज भी पूछते हैं.

* इनके अलावा एमएमएस और चैट के माध्यम से अश्‍लील संदेश भेजे जाते हैं, जिसमें कई बार पीड़ित महिला का चेहरा किसी अश्‍लील ड्रेस वाली  महिला की फोटो पर होता है, तो कभी न्यूड फोटो पर उनका चेहरा रहता है.

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साइबर क्राइम का निशाना बनते बच्चे

हाल ही में मुंबई में सोशल साइट के ज़रिए ठगी का एक मामला प्रकाश में आया, जिसमें 14 साल की एक लड़की से 10 लाख रुपए ठगे गए. इस केस में 18 साल के एक लड़के ने एफबी (फेसबुक) पर फर्ज़ी अकाउंट बनाकर लड़की से दोस्ती की और उसे अपने जाल में फंसा लिया. उसके ख़ूबसूरत चेहरे और चिकनी-चुपड़ी बातों में आकर लड़की ने उसे घर वालों से चुराकर 10 लाख रुपए दे दिए. अपनी तरह का ये कोई पहला मामला नहीं है. अक्सर एफबी पर धोखाधड़ी के मामले सामने आते रहते हैं.
दिल्ली की 15 वर्षीया छात्रा पूजा को उसके दोस्त आदित्य ने जब फोन करके पूछा कि वो उसे भद्दे मैसेज और लिंक क्यों भेज रही है, तो पूजा को कुछ समझ नहीं आया, क्योंकि वो काफ़ी समय से अपना एफबी यूज़ नहीं कर रही थी. फिर उसने फेसबुक लॉगिन करके अपना नाम सर्च किया तो उस नाम से 2-3 प्रोफाइल बने थे, जिसमें बक़ायदा उसकी फोटो भी लगी थी. साफ़ था, किसी ने उसकी आइडेंटटी चुराकर उसका ग़लत इस्तेमाल किया था.
दरअसल, आजकल टीनएजर्स धड़ल्ले से सोशल साइट्स का इस्तेमाल करके अपनी फोटो से लेकर निजी जानकारी और राय दोस्तों से शेयर करते हैं, लेकिन ये सब करते समय वो सिक्योरिटी सिस्टम को भूल जाते हैं, जिससे कोई भी हैकर आसानी से उनकी डिटेल्स चुराकर उसका ग़लत इस्तेमाल करने लगता है. इन दिनों चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़ी चीज़ें भी नेट पर बहुत उपलब्ध हैं. चाइल्ड पोर्नोग्राफी के तहत बच्चों को बहला-फुसलाकर ऑनलाइन संबंधों के लिए तैयार करना, फिर उनके साथ संबंध बनाना या बच्चों से जुड़ी यौन गतिविधियों को रिकॉर्ड करना, एमएमएस बनाना और दूसरों को भेजना आदि इसके तहत आता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, सोशल साइट्स के ख़तरों से बच्चों को बचाने के लिए पैरेंट्स को चाहिए कि उन्हें सही उम्र से पहले स्मार्टफोन, इंटरनेट आदि से दूर रखें. इसके अलावा पैरेंट्स और बच्चे के बीच बॉन्डिंग बेहद ज़रूरी है ताकि वो अपनी हर अच्छी-बुरी बात आपसे शेयर करें. बच्चों के साथ अपराध बढ़ने का एक कारण ये भी है कि वो साइट्स के एथिक्स को फॉलो नहीं करते, जैसे एफबी पर अकाउंट ओपन करने के लिए एज लिमिट है जिसे कोई फॉलो नहीं कर रहा. बच्चों की ज़िंदगी में जिस तेज़ी से इंटरनेट की पैठ बढ़ती जा रही है, उसे देखते हुए पैरेंट्स को सतर्क रहने की ज़रूरत है.

क्या है क़ानून?

भारत में साल 2000 में सूचना तकनीक अधिनियम (आईटी एक्ट) पारित हुआ, जिसमें बाद में 2008 में कुछ संशोधन किए गए.

* आईटी एक्ट की धारा 66 ए के तहत कंप्यूटर और अन्य संचार माध्यमों के ज़रिए ऐसे संदेश भेजने की मनाही है जिससे किसी को परेशानी हो, उसका अपमान हो, उसे ख़तरा हो या उस व्यक्ति को मानसिक चोट पहुंचे, आपराधिक उकसावा मिले या दुर्भावना या शत्रुता की भावना से प्रेरित हो.

* इसका उल्लंघन करने पर 3 साल तक की सज़ा या जुर्माना हो सकता है.

* इस अपराध में आसानी से जमानत मिल जाती है.

* आईटी एक्ट 2008 (संशोधित) की धारा 67 बी के तहत चाइल्ड पोर्नोग्राफी के अपराध के लिए 5 साल की जेल या 10 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान  है.

एहतियाती क़दम

आज के ज़माने में ख़ुद को और बच्चों को साइबर वर्ल्ड से पूरी तरह दूर रखना नामुमक़िन है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर आप साइबर अपराधियों का निशाना बनने से बच सकते हैं.

* सोशल साइट्स का इस्तेमाल करते समय बहुत ज़रूरी है कि आप उसके सिक्योरिटी सिस्टम को एक्टिवेट करें, किसी भी अनजान शख़्स की फ्रेंड  रिक्वेस्ट को एक्सेप्ट न करें.

* किसी के बेहुदा मैसेज का जवाब न दें. अपनी फोटो व पर्सनल डिटेल को रिस्ट्रिक्ट कर दें ताकि आपके गिने-चुने दोस्तों को छोड़कर कोई अन्य व्यक्ति  उस तक न पहुंच सके.

* ऑनलाइन निजी जानकारी (फोन नंबर, बैंक डिटेल आदि) किसी से शेयर न करें

* उत्तेजक स्क्रीन नाम या ईमेल एड्रेस का इस्तेमाल न करें.

* किसी अनजान शख़्स से ऑनलाइन फ्लर्ट या बहसबाज़ी न करें.

* अपना पासवर्ड किसी से शेयर न करें.

* एक अच्छे एंटी वायरस प्रोग्राम का इस्तेमाल करें.

* अपनी पूरी बातचीत को कंप्यूटर पर सेव रखें.

* ऑनलाइन लॉटरी जीतने वाले ईमेल का जवाब न दें.

* कोई अनजान शख़्स इंटरव्यू, नौकरी या कोई गिफ्ट देने के बहाने यदि आपकी बैंक डिटेल्स मांगता है, तो ऐसे ईमेल का भी जवाब न दें.

* समय-समय पर पासवर्ड बदलते रहें.

* सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर दोस्तों की संख्या सीमित रखें.

* सोशल साइट्स पर पर्सनल फोटो अपलोड करने से बचें.

* यदि आपके कंप्यूटर में वेबकैम लगा है तो ध्यान रखें कि इस्तेमाल न होने पर उसे अनप्लग कर दें.

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अपराध साबित करना मुश्किल

साइबर क्राइम सेल के पूर्व प्रभारी संकल्प राय मानते हैं कि साइबर अपराधियों के लिए क़ानून तो है, मगर उनके अपराध को साबित करना थोड़ा मुश्किल काम होता है. सोशल साइट्स पर वो आपके नाम से ही कई अकाउंट खोल लेते हैं और बक़ायदा आपकी फोटो भी अपलोड कर देते हैं. सोशल साइट्स पर आपको प्रधानमंत्री से लेकर बॉलीवुड स्टार्स तक के कई फर्ज़ी अकाउंट मिल जाएंगे.

साइकोलॉजिस्ट की राय

बच्चों और महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले साइबर अपराध, जैसे- साइबर बुलिंग, हैरासमेंट, ईमेल स्पूफिंग, चैट आदि के ज़रिए उत्पीड़न का शिकार होने पर वो अपमानित महसूस करते हैं, उनके मन में फोबिया बैठ जाता है जिससे वो इंटरनेट के इस्तेमाल से डरने लगते हैं. ख़ासकर बच्चों के मामले में बात डिप्रेशन और सुसाइड तक भी पहुंच जाती है. सोशल मीडिया बुरा नहीं है, लेकिन इसका इस्तेमाल सावधानी से करना ज़रूरी है. जिस तरह गैस ऑन करने के बाद उसे बंद करना ज़रूरी होता है, वैसे ही कंप्यूटर/लैपटॉप और स्मार्ट फोन इस्तेमाल करने के बाद लॉग आउट ज़रूर करें. मैंने अक्सर देखा है कि लोग फोन पर लॉग आउट नहीं करते, जो बहुत ग़लत है.

– मोना बक्षी, साइकोलॉजिस्ट

एक्सपर्ट स्पीक

साइबर बुलिंग का शिकार होने पर सबसे पहले सोशल नेटवर्किंग कंपनी को सूचित करें. साथ ही केस दर्ज करवाने के लिए आपके पास उस एसएमएस का इलेक्ट्रॉनिक सबूत होना चाहिए. यदि आपके पास ये सबूत नहीं भी है, तो संबंधित सोशल साइट्स वो मुहैया करवा सकती है. ऐसे मामलों में सोशल नेटवर्किंग कंपनियों की ज़िम्मेदारी होती है कि वो अदालत या पुलिस के सबूत मांगने पर उनकी मदद करें और ऐसा न करने पर अदालत कंपनी के खिलाफ़ मुकदमा दर्ज कर सकती है.

– संकल्प राय, पूर्व प्रभारी, साइबर क्राइम सेल (रायपुर)

सेलिब्रिटी भी नहीं महफूज़

आए दिन सेलिब्रिटीज़ की फोटो से छेड़छाड़ का मामला सामने आता रहता है. इतना ही नहीं, इनके नाम से कई फर्ज़ी आईडी भी बनी रहती हैं. हाल ही में एक्ट्रेस एवलिन शर्मा ने एक इंटरटेनमेंट साइट पर उनसे जुड़ी ग़लत जानकारी वेबसाइट पर पब्लिश करने के लिए केस दर्ज करवाया है. कुछ दिनों पहले अमिताभ बच्चन के दामाद निखिल नंदा का ईमेल और फेसबुक अकाउंट भी हैक हो गया था. इससे पहले करण जौहर, महेश भट्ट, अरबाज़ ख़ान, सयाली भगत, सोनम कपूर जैसे सितारों का ट्विटर अकाउंट भी हैक हो चुका है.

सोशल साइट एडिक्शन

कुछ लोगों को जैसे सिगरेट-शराब का नशा होता है, वैसे ही सोशल साइट भी एक नशा है. लोगों की ज़िंदगी में इन सोशल साइट्स का दख़ल इस कदर बढ़ चुका है कि इनसे दूर रहने पर उन्हें लगता है जैसे उन्होंने कुछ मिस कर दिया है. कुछ लोग जब तक अपना एफबी अकाउंट चेक नहीं कर लेते, उनकी फोटो को कितने लाइक मिले हैं, उनके दोस्तों ने क्या अपडेट किए हैं आदि देख नहीं लेते, उन्हें चैन नहीं पड़ता. अपनी फोटो पर मिले कमेंट ब्यूटीफुल, अमेज़िंग, सेक्सी आदि से उत्साहित होकर कुछ महिलाएं हर दिन अपनी फोटो अपडेट करती रहती हैं. उन्हें इस बात का इल्म तक नहीं होता कि कोई उनकी फोटो से छेड़खानी करके उनकी ज़िंदगी में तूफ़ान खड़ा कर सकता है. सोशल मीडिया से जुड़े अपराधों का एक प्रमुख कारण है लोगों द्वारा अपनी निजी ज़िंदगी के हर पल सोशल साइट्स पर अपडेट करना, जिसकी बदौलत अपराधी आसानी से ऐसे लोगों को अपना निशाना बना लेते हैं.

क्या है साइबर क्राइम?

इंटरनेट के माध्यम से होने वाले अपराध साइबर क्राइम की कैटेगरी में आते हैं, जैसे- इंटरनेट से क्रेडिट कार्ड की चोरी, ब्लैक मेलिंग, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क फ्रॉड, पोर्नोग्राफी, बैंक डिटेल या अन्य अकाउंट हैक करना, किसी सॉफ्टवेयर के ज़रिए वायरस भेजना, किसी को आपत्तिजनक/धमकी भरे मैसेज भेजना आदि. साइबर क्राइम का दायरा बहुत बड़ा है. ऐसे अपराध से निपटने के लिए साइबर क्राइम सेल बनाया गया है.

– कंचन सिंह