कहानी- प्रभाती 1 (Story Series- Prabhati 1)

स्वयं के साथ बिताया हुआ यह एकांत मुझे बहुत प्रिय था, परंतु उस रात मैं अकेली कहां थी. वह भी तो था. ...

कहानी- प्रभाती 2 (Story Series- Prabhati 2)

काफ़ी बड़ा और हवादार कमरा था. पश्‍चिम की तरफ़ एक छोटी-सी बालकनी थी. कमरे की सजावट गृहस्वामी के ...

कहानी- प्रभाती 3 (Story Series- Prabhati 3)

तेरी यादों की ख़ुशबू से भीगा मेरा तकिया आज भी तेरी सांसों की राह तकता है तू जो सपने टांग आई थी ...

कहानी- प्रभाती 4 (Story Series- Prabhati 4)

मैं अब तक यह सोच रही थी कि शशि पर से मेरी यादों का विषम ज्वर उतर गया होगा, किंतु मैं ग़लत सोच बैठी ...