कहानी- मम्मी बस... (Short Story- Mummy Bas...)

“डॉक्टर मैं उसे बहुत प्यार करती हूं.”
“हां ज़रूर, पर एक बच्ची, एक इंसान की तरह नहीं, अपनी सबसे महंगी गुड़िया की तरह, जिसे आप उसके पिता से भी नहीं बांट पातीं. इससे बच्ची अपने पिता को आपके सामने खुलकर प्यार भी नहीं कर सकती. मिसेज स्वामी आप जैसी मांएं मैं ह़फ़्ते में चार-पांच देख रहा हूं. 

कहानी- पराई ज़मीन पर उगे पेड़ (Short Story- Parai Zamin Par Uge Ped)

“ज़मीन तो अपनी जगह पड़ी रहती है, हवा में उड़ते बीज आकर उस पर गिर जाते हैं. भावनाओं की बारिश में बीज कब अंकुरित हो जाते हैं, ज़मीन को पता ही नहीं चलता.”
अमृत के जवाब पर सामनेवाले ने फिर से सवाल किया, “तो कसूर हवा का है, जो बीजों को उड़ाकर ज़मीन पर गिरा देती है, ये भी नहीं देखती कि किस पेड़ के बीज हैं और किसकी ज़मीन है.”