गुरु

गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवो महेश्‍वरः

गुरुः साक्षात परब्रह्म तस्मै श्रीगुरुवे नमः

  • आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरुपूर्णिमा कहते हैं. इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है.
  • इस दिन गुरुओं की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.
  • इसी दिन संस्कृत के प्रकांड विद्वान और चारों वेदों व महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन भी है. वेदों की रचना के कारण उन्हें वेद व्यास भी कहा जाता है.
  • गु का अर्थ अंधकार और रु का अर्थ प्रकाश. गुरु यानी अंधकार से प्रकाश की ओर ले जानेवाला.
  • धर्मग्रंथों के अनुसार, इस दिन जो शिष्य अपने गुरु का आशीर्वाद पा लेता है, उसका जीवन सफल हो जाता है.

यह भी पढ़ें: श्रावण मास में ऐसे करें शिव को प्रसन्न- पूरी होगी हर मनोकामना (How To Worship Lord Shiva During Shravan Month?)

  • देशभर में गुरुपूर्णिमा बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. प्राचीनकाल में गुरुकुल में शिष्य इस दिन गुरु की पूजा करते थे और उन्हें अपने सामर्थ्य अनुसार भेंट देते थे.
  • आज भी स्कूल-कॉलेज, संगीत, कला से जुड़े विद्यार्थी अपने गुरुओं को इस दिन सम्मानित करते हैं.
  • मंदिरों में भी पूजा-पाठ होता है. पवित्र नदियों मेंं स्नान किया जाता है. भंडारे-मेले आदि लगते हैं.
  • इस दिन व्यासजी के ग्रंथों का अध्ययन-मनन करना चाहिए.
  • गुरुपूर्णिमा के दिन गुरु (शिक्षक) ही नहीं, बल्कि अपने माता-पिता, बड़े-बुज़ुर्गों का भी आशीर्वाद लेना चाहिए.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी.. 

देशवासियों को गुरु पूर्णिमा की ढेरों शुभकामनाएं. जीवन को सार्थक बनानेवाले गुरुओं के प्रति सम्मान प्रकट करने का आज विशेष दिन है. इस अवसर पर सभी गुरुजनों को मेरा सादर नमन! 🙏

ऊषा गुप्ता