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मॉइश्‍चराइज़र से जुड़ी सच्चाई, जो आपको जाननी चाहिए ( Myths And Facts Related To moisturizer)

Myths And Facts, moisturizer

रेशम-सी त्वचा आख़िर कौन नहीं चाहता, लेकिन इसके लिए ज़रूरी है आप अपनी त्वचा नियमित रूप से मॉइश्‍चराइज़ करें और उन ग़लतफ़हमियों से बचें, जो आपकी त्वचा की ख़ूबसूरती छीन लेती हैं. मॉइश्‍चराइज़र से जुड़ी ऐसी ही कुछ ग़लतफ़हमियों का ज़िक्र हम कर रहे हैं, ताकि आप उनकी सच्चाई जानें और आपकी त्वचा भी बने रेशम-सी कोमल.

Myths And Facts, moisturizer
मिथ: स़िर्फ ड्राई स्किनवालों को ही मॉइश्‍चराइज़र की ज़रूरत होती है.
फैक्ट: सभी को मॉइश्‍चराइज़र की ज़रूरत होती है. हमारी स्किन निरंतर डैमेज होती रहती है और मॉइश्‍चराइज़र्स स्किन को रिपेयर करने का काम करते हैं. नहाने के फ़ौरन बाद मॉइश्‍चराइज़र अप्लाई करें.

मिथ: ऑयली स्किन और जिन्हें पिंपल्स जल्दी होते हैं, उन्हें मॉइश्‍चराइज़र से दूर रहना चाहिए, वरना समस्या और बढ़ेगी.
फैक्ट: अपनी स्किन टाइप के अनुसार मॉइश्‍चराइज़र चुनें, तो समस्या नहीं होगी. ऑयली स्किन के लिए सबसे बेहतरीन मॉइश्‍चराइज़र वो होगा, जिसमें एलोवीरा प्रमुख तत्व के रूप में मौजूद हो.

मिथ: शरीर के अलग-अलग हिस्सों के लिए अलग-अलग मॉइश्‍चराइज़र की ज़रूरत होती है.
फैक्ट: आप एक ही मॉइश्‍चराइज़र पूरे शरीर पर लगा सकती हैं. नहाने के फ़ौरन बाद जब त्वचा हल्की गीली व नमीयुक्त होती है, तभी मॉइश्‍चराइज़र लगाएं. इससे त्वचा हाइड्रेट होगी और मॉइश्‍चर लॉक हो जाएगा.

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मिथ: अगर मॉइश्‍चराइज़र एसपीएफ युक्त है, तो सनप्रोटेक्शन की ज़रूरत नहीं.
फैक्ट: मॉइश्‍चराइज़र में भले ही एसपीएफ हो, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि आपको सनस्क्रीन की ज़रूरत ही नहीं. सनस्क्रीन लगाना बहुत ज़रूरी है.

मिथ: सारे मॉइश्‍चराइज़र्स एक ही तरह के होते हैं.
फैक्ट: सभी मॉइश्‍चराइज़र्स अलग होते हैं. उनमें मौजूद तत्व, बेस लोशन और परफ्यूम्स के आधार पर उन्हें अलग किया जा सकता है. आप लेबल को चेक करके अपनी ज़रूरत व स्किन टाइप के अनुसार मॉइश्‍चराइज़र सिलेक्ट कर सकती हैं.

मिथ: दिन में एक ही बार मॉइश्‍चराइज़र अप्लाई करना होता है, बेहतर होगा रात को करें.
फैक्ट: दिन में कम से कम दो बार तो मॉइश्‍चराइज़र अप्लाई करना ही चाहिए. नहाने के बाद भी और सोने से पहले भी. जिनकी स्किन बेहद ड्राई है, उन्हें तो जब-जब ज़रूरत महसूस हो, मॉइश्‍चराइज़र अप्लाई करना चाहिए. रात को आप पेट्रोलियम जेली का भी इस्तेमाल कर सकती हैं. पैरों व ख़ासतौर से एड़ियों को सॉफ्ट रखने के लिए मॉइश्‍चराइज़र या पेट्रोलियम जेली लगाने के बाद जुराबें पहनकर सोएं.

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मिथ: मॉइश्‍चराइज़िंग क्रीम जितनी गाढ़ी होगी, उतने ही बेहतर तरी़के से हाइड्रेट करेगी.
फैक्ट: अलग-अलग फॉर्मूलेशन्स अलग-अलग तरह की स्किन को सूट करते हैं. थिक क्रीम्स बहुत ही ड्राई स्किन को सूट करती हैं, जबकि लोशन्स लगभग हर स्किन टाइप के लिए ठीक होते हैं. ऑयली स्किन के लिए जेल्स ही बेहतर होते हैं. तो जब भी आप मॉइश्‍चराइज़र लेने जाएं, इन बातों को ध्यान में रखकर ही लें.

मिथ: गर्म पानी से नहाना ड्राई स्किन को नेचुरली मॉइश्‍चराइज़ करता है.
फैक्ट: सच्चाई इससे बिल्कुल विपरीत है. गर्म पानी त्वचा की प्राकृतिक नमी को छीन लेता है. बेहतर होगा कि बहुत अधिक गर्म पानी की जगह गुनगुने पानी से नहाएं.