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भगवान शिव के 108 नाम और उनका अर्थ जानना हर शिवभक्त के लिए ज़रूरी है. देवों के देव महादेव के अनेक रूप हैं और उनके हर रूप का अलग नाम है. सोमवार के दिन जब भगवान शिव की उपासना करें, तो शिव के 108 नाम जरूर जपें. भगवान शिव के 108 नाम जपने से पहले आपको यदि उनके हर नाम का अर्थ पता हो, तो आप भगवान शिव के हर रूप को भलीभांति समझ सकेंगे. हर शिवभक्त को भगवान शिव के 108 नाम और उनका अर्थ मालूम होना ही चाहिए इसलिए हम आपको बता रहे हैं भगवान शिव के 108 नाम और उनका अर्थ.

Names Of Lord Shiva With Meanings

 

भगवान शिव के 108 नाम और उनका अर्थ

1. शिव – कल्याण स्वरूप
2. महेश्वर – माया के अधीश्वर
3. शम्भू – आनंद स्वरूप वाले
4. पिनाकी – पिनाक धनुष धारण करने वाले
5. शशिशेखर – चंद्रमा धारण करने वाले
6. वामदेव – अत्यंत सुंदर स्वरूप वाले
7. विरूपाक्ष – विचित्र अथवा तीन आंख वाले
8. कपर्दी – जटा धारण करने वाले
9. नीललोहित – नीले और लाल रंग वाले
10. शंकर – सबका कल्याण करने वाले
11. शूलपाणी – हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले
12. खटवांगी – खटिया का एक पाया रखने वाले
13. विष्णुवल्लभ – भगवान विष्णु के अति प्रिय
14. शिपिविष्ट – सितुहा में प्रवेश करने वाले
15. अंबिकानाथ – देवी भगवती के पति
16. श्रीकण्ठ – सुंदर कण्ठ वाले
17. भक्तवत्सल – भक्तों को अत्यंत स्नेह करने वाले
18. भव – संसार के रूप में प्रकट होने वाले
19. शर्व – कष्टों को नष्ट करने वाले
20. त्रिलोकेश – तीनों लोकों के स्वामी
21. शितिकण्ठ – सफेद कण्ठ वाले
22. शिवाप्रिय – पार्वती के प्रिय
23. उग्र – अत्यंत उग्र रूप वाले
24. कपाली – कपाल धारण करने वाले
25. कामारी – कामदेव के शत्रु, अंधकार को हरने वाले
26. सुरसूदन – अंधक दैत्य को मारने वाले
27. गंगाधर – गंगा को जटाओं में धारण करने वाले
28. ललाटाक्ष – माथे पर आंख धारण किए हुए
29. महाकाल – कालों के भी काल
30. कृपानिधि – करुणा की खान
31. भीम – भयंकर या रुद्र रूप वाले
32. परशुहस्त – हाथ में फरसा धारण करने वाले
33. मृगपाणी – हाथ में हिरण धारण करने वाले
34. जटाधर – जटा रखने वाले
35. कैलाशवासी – कैलाश पर निवास करने वाले
36. कवची – कवच धारण करने वाले
37. कठोर – अत्यंत मजबूत देह वाले
38. त्रिपुरांतक – त्रिपुरासुर का विनाश करने वाले
39. वृषांक – बैल-चिह्न की ध्वजा वाले
40. वृषभारूढ़ – बैल पर सवार होने वाले
41. भस्मोद्धूलितविग्रह – भस्म लगाने वाले
42. सामप्रिय – सामगान से प्रेम करने वाले
43. स्वरमयी – सातों स्वरों में निवास करने वाले
44. त्रयीमूर्ति – वेद रूपी विग्रह करने वाले
45. अनीश्वर – जो स्वयं ही सबके स्वामी है
46. सर्वज्ञ – सब कुछ जानने वाले
47. परमात्मा – सब आत्माओं में सर्वोच्च
48. सोमसूर्याग्निलोचन – चंद्र, सूर्य और अग्निरूपी आंख वाले
49. हवि – आहुति रूपी द्रव्य वाले
50. यज्ञमय – यज्ञ स्वरूप वाले
51. सोम – उमा के सहित रूप वाले
52. पंचवक्त्र – पांच मुख वाले
53. सदाशिव – नित्य कल्याण रूप वाले
54. विश्वेश्वर – विश्व के ईश्वर
55. वीरभद्र – वीर तथा शांत स्वरूप वाले
56. गणनाथ – गणों के स्वामी
57. प्रजापति – प्रजा का पालन- पोषण करने वाले
58. हिरण्यरेता – स्वर्ण तेज वाले
59. दुर्धुर्ष – किसी से न हारने वाले
60. गिरीश – पर्वतों के स्वामी
61. गिरिश्वर – कैलाश पर्वत पर रहने वाले
62. अनघ – पापरहित या पुण्य आत्मा
63. भुजंगभूषण – सांपों व नागों के आभूषण धारण करने वाले
64. भर्ग – पापों का नाश करने वाले
65. गिरिधन्वा – मेरू पर्वत को धनुष बनाने वाले
66. गिरिप्रिय – पर्वत को प्रेम करने वाले
67. कृत्तिवासा – गजचर्म पहनने वाले
68. पुराराति – पुरों का नाश करने वाले
69. भगवान् – सर्वसमर्थ ऐश्वर्य संपन्न
70. प्रमथाधिप – प्रथम गणों के अधिपति
71. मृत्युंजय – मृत्यु को जीतने वाले
72. सूक्ष्मतनु – सूक्ष्म शरीर वाले
73. जगद्व्यापी – जगत में व्याप्त होकर रहने वाले
74. जगद्गुरू – जगत के गुरु
75. व्योमकेश – आकाश रूपी बाल वाले
76. महासेनजनक – कार्तिकेय के पिता
77. चारुविक्रम – सुन्दर पराक्रम वाले
78. रूद्र – उग्र रूप वाले
79. भूतपति – भूतप्रेत व पंचभूतों के स्वामी
80. स्थाणु – स्पंदन रहित कूटस्थ रूप वाले
81. अहिर्बुध्न्य – कुण्डलिनी- धारण करने वाले
82. दिगम्बर – नग्न, आकाश रूपी वस्त्र वाले
83. अष्टमूर्ति – आठ रूप वाले
84. अनेकात्मा – अनेक आत्मा वाले
85. सात्त्विक – सत्व गुण वाले
86. शुद्धविग्रह – दिव्यमूर्ति वाले
87. शाश्वत – नित्य रहने वाले
88. खण्डपरशु – टूटा हुआ फरसा धारण करने वाले
89. अज – जन्म रहित
90. पाशविमोचन – बंधन से छुड़ाने वाले
91. मृड – सुखस्वरूप वाले
92. पशुपति – पशुओं के स्वामी
93. देव – स्वयं प्रकाश रूप
94. महादेव – देवों के देव
95. अव्यय – खर्च होने पर भी न घटने वाले
96. हरि – विष्णु समरूपी
97. पूषदन्तभित् – पूषा के दांत उखाड़ने वाले
98. अव्यग्र – व्यथित न होने वाले
99. दक्षाध्वरहर – दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाले
100. हर – पापों को हरने वाले
101. भगनेत्रभिद् – भग देवता की आंख फोड़ने वाले
102. अव्यक्त – इंद्रियों के सामने प्रकट न होने वाले
103. सहस्राक्ष – अनंत आँख वाले
104. सहस्रपाद – अनंत पैर वाले
105. अपवर्गप्रद – मोक्ष देने वाले
106. अनंत – देशकाल वस्तु रूपी परिच्छेद से रहित
107. तारक – तारने वाले
108. परमेश्वर – प्रथम ईश्वर

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कीर्तन और आरती (Kirtan And Aarti) में ताली (Clapping) बजाना हमारी धार्मिक मान्यता है. हम जब भी किसी मंदिर में जाते हैं या जब भी हमारे घर में पूजा होती है, तो कीर्तन और आरती में हम ताली ज़रूर बजाते हैं. आख़िर कीर्तन और आरती में ताली क्यों बजाते हैं? कीर्तन और आरती में ताली बजाने का क्या महत्व है? यदि ऐसे ही सवाल आपके मन में भी अक्सर आते हैं, तो यहां हम आपको बता रहे हैं कीर्तन और आरती में ताली बजाने के धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व.

Health Benefits Of Clapping While Aarti

 

कीर्तन और आरती में ताली बजाने का धार्मिक महत्व
हमारे देश में प्राचीनकाल से मंदिरों में पूजा, आरती, भजन-कीर्तन आदि में ताली बजाने की परंपरा रही है. चाहे हमारे घर में पूजा हो रही हो या हम किसी में मंदिर में गए हों, भजन-कीर्तन व आरती शुरू होते ही हम सब एक साथ मिलकर ताली बजाते हैं. हम सब ऐसा इसलिए करते हैं, क्योंकि हम अपने पूर्वजों को ऐसा करते देखते आए हैं. हमारे देश में प्राचीनकाल से ऐसी मान्यता है कि ताली बजाकर प्रभु का नाम भजने से सारे पाप दूर हो जाते हैं. ताली बजाने को सहज योग माना जाता है, यदि आप नियमित रूप से रोज़ाना ऐसा करते हैं, तो फिर आपको हठयोग की आवश्यकता नहीं है.

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Health Benefits Of Clapping

कीर्तन और आरती में ताली बजाने का वैज्ञानिक महत्व
डॉक्टर्स का कहना है कि हमारे हाथों में एक्यूप्रेशर प्वाइंट्स अधिक होते हैं. ताली बजाने के दौरान हथेलियों के एक्यूप्रेशर प्वाइंट्स पर अच्छा दबाव पड़ता है, जिससे हृदयरोग, फेफड़ों की बीमारियां जैसे अनेक रोगों में लाभ पहुंचता है और शरीर निरोगी बनता है. ताली बजाना एक तरह का व्यायाम है. इससे रक्तसंचार की रुकावट दूर होती है और रक्त का शुद्धिकरण होता है. स्वस्थ और निरोगी रहने के लिए भी ताली बजाना फ़ायदेमंद है इसलिए आप भी कीर्तन और आरती में ताली बजाने को अपना रोज़ का नियम बना लें. इससे आपको मानसिक शांति मिलेगी, ऊर्जा मिलेगी और आप हमेशा स्वस्थ रहेंगे.

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पुराने रोग से छुटकारा पाने के उपाय जानने के लिए देखें वीडियो:

 

 

 

मैं शिव हूँ, Main Shiv Hun

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। (Main Shiv Hun… Main Shiv Hun… Main Shiv Hun)

विभत्स हूँ… विभोर हूँ…
मैं समाधी में ही चूर हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

घनघोर अँधेरा ओढ़ के…
मैं जन जीवन से दूर हूँ…
श्मशान में हूँ नाचता…
मैं मृत्यु का ग़ुरूर हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

साम – दाम तुम्हीं रखो…
मैं दंड में सम्पूर्ण हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

चीर आया चरम में…
मार आया “मैं” को मैं…
“मैं” , “मैं” नहीं…
”मैं” भय नहीं…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

जो सिर्फ तू है सोचता…
केवल वो मैं नहीं…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

मैं काल का कपाल हूँ…
मैं मूल की चिंघाड़ हूँ…
मैं मग्न…मैं चिर मग्न हूँ…
मैं एकांत में उजाड़ हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

मैं आग हूँ…
मैं राख हूँ…
मैं पवित्र राष हूँ…
मैं पंख हूँ…
मैं श्वाश हूँ…
मैं ही हाड़ माँस हूँ…
मैं ही आदि अनन्त हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

मुझमें कोई छल नहीं…
तेरा कोई कल नहीं…
मौत के ही गर्भ में…
ज़िंदगी के पास हूँ…
अंधकार का आकार हूँ…
प्रकाश का मैं प्रकार हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

मैं कल नहीं मैं काल हूँ…
वैकुण्ठ या पाताल नहीं…
मैं मोक्ष का भी सार हूँ…
मैं पवित्र रोष हूँ…
मैं ही तो अघोर हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

शिवरात्रि की शुभकामनाएं आप सभी को

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लक्ष्मी जी की आरती (Aarti- Lakshmi Ma)

Aarti godess Lakshmi ji maa

जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥
जय लक्ष्मी माता…

ब्रह्माणी रूद्राणी कमला, तू ही है जगमाता ।
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥
जय लक्ष्मी माता…

दुर्गा रूप निरंजन, सुख सम्पति दाता ।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता ॥
जय लक्ष्मी माता…

तू ही है पाताल बसन्ती, तू ही है शुभ दाता ।
कर्म प्रभाव प्रकाशक, भवनिधि से त्राता ॥
जय लक्ष्मी माता…

जिस घर थारो वासो, तेहि में गुण आता ।
कर न सके सोई कर ले, मन नहीं धड़काता ॥
जय लक्ष्मी माता…

तुम बिन यज्ञ न होवे, वस्त्र न कोई पाता ।
खान पान को वैभव, सब तुमसे आता ॥
जय लक्ष्मी माता…

शुभ गुण सुंदर मुक्तता, क्षीर निधि जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता ॥
जय लक्ष्मी माता…

आरती लक्ष्मी जी की, जो कोई नर गाता ।
उर आनन्द अति उपजे, पाप उतर जाता ॥
जय लक्ष्मी माता…

स्थिर चर जगत बचावे, शुभ कर्म नर लाता ।
राम प्रताप मैया की शुभ दृष्टि चाहता ॥
जय लक्ष्मी माता…

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श्री गणेश जी की आरती 

Aarti lord ganesh ji

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।

माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

जय…

हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।

लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा ॥ जय…

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।

कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥

जय..

नवरात्रि पर विशेष: आरती... मां अम्बे की
नवरात्रि पर विशेष: आरती… मां अम्बे की (Navratri Special: Ma Ambe Ki Aarti)

मां अम्बे की आरती

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुम को निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी. ॐ जय अम्बे…

मांग सिंदूर विराजत टीको मृगमद को
उज्जवल से दो नैना चन्द्र बदन नीको. ॐ जय अम्बे…

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजे
रक्त पुष्प दल माला कंठन पर साजे. ॐ जय अम्बे…

केहरि वाहन राजत खड़्ग खप्पर धारी
सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुखहारी. ॐ जय अम्बे…

कानन कुण्डल शोभित नासग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर राजत सम ज्योति. ॐ जय अम्बे…

शुम्भ निशुम्भ विडारे महिषासुर धाती
धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती. ॐ जय अम्बे…

चण्ड – मुंड संहारे सोणित बीज हरे
मधु कैटभ दोऊ मारे सुर भयहीन करे.ॐ जय अम्बे…

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी
आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी. ॐ जय अम्बे…

चौसठ योगिनी मंगल गावत नृत्य करत भैरु
बाजत ताल मृदंगा और बाजत डमरु. ॐ जय अम्बे…

तुम ही जग की माता तुम ही हो भर्ता
भक्तन की दुःख हरता सुख सम्पत्ति कर्ताॐ जय अम्बे…

भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी
मन वांछित फ़ल पावत सेवत नर-नारी. ॐ जय अम्बे…

कंचन थार विराजत अगर कपूर बाती
श्रीमालकेतु में राजत कोटि रत्न ज्योति. ॐ जय अम्बे…

श्री अम्बे जी की आरती जो कोई नर गावे
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपत्ति पावे. ॐ जय अम्बे…

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Ganesh Chaturthi Special: Bhajan & Aarti
जय गणेश देवा

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा
माता जाकी पारवती, पिता महादेवा…

एकदन्त, दयावन्त, चारभुजाधारी,
माथे पर सिन्दूर सोहे, मूसे की सवारी
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा…

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा
माता जाकी पारवती, पिता महादेवा ..

अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया,
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा,
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ..

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा .
माता जाकी पारवती, पिता महादेवा ..

सुख करता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची

सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची
नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची
सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची
कंठी झलके माल मुकताफळांची

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
जय देव जय देव

रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा
हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा
रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
जय देव जय देव

लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना
सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना
दास रामाचा वाट पाहे सदना
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
जय देव जय देव

शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुख को
दोन्दिल लाल बिराजे सूत गौरिहर को
हाथ लिए गुड लड्डू साई सुरवर को
महिमा कहे ना जाय लागत हूँ पद को

जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव

अष्ट सिधि दासी संकट को बैरी
विघन विनाशन मंगल मूरत अधिकारी
कोटि सूरज प्रकाश ऐसे छबी तेरी
गंडस्थल मद्मस्तक झूल शशि बहरी

जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव

भावभगत से कोई शरणागत आवे
संतति संपत्ति सबही भरपूर पावे
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे
गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव

 

जन्माष्टमी स्पेशल: कृष्ण भजन

जन्माष्टमी स्पेशल: कृष्ण भजन (Janmashtmi Special: Krishna Bhajan)

हे आनंद उमंग भयो जय हो नन्द लाल की

नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल कीहे ब्रज में आनंद भयो  जय यशोदा लाल की
नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल कीहे आनंद उमंग भयो जय हो नन्द लाल की
गोकुल में आनंद भयो जय कन्हैया लाल कीजय यशोदा लाल की जय हो नन्द लाल की
हाथी, घोड़ा, पालकी जय कन्हैया लाल कीजय हो नन्द लाल की जय यशोदा लाल की
हाथी, घोड़ा, पालकी जय कन्हैया लाल की

हे आनंद उमंग भयो जय कन्हैया लाल की

हे कोटि ब्रह्माण्ड के अधिपति लाल की
हाथी, घोड़ा, पालकी जय कन्हैया लाल की

हे गौऐं चराने आये जय हो पशुपाल की
नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की

आनंद से बोलो सब जय हो ब्रज लाल की
हाथी, घोड़ा, पालकी जय कन्हैया लाल की

जय हो ब्रज लाल की
पावन प्रतिपाल की
हे नन्द के आनंद भयो
जय हो नन्द लाल की

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तेरे लाला ने माटी खाई जसोदा सुन माई

तेरे लाला ने माटी खाई जसोदा सुन माई।

अद्भुत खेल सखन संग खेलो, छोटो सो माटी को ढेलो, तुरत श्याम ने मुख में मेलो, याने गटक गटक गटकाई॥

दूध दही को कबहुँ न नाटी, क्यों लाला तेने खाई माटी,जसोदा समझावे ले सांटी, याने नेक दया नही आई॥

मुख के माँही आंगुली मेली, निकल पडी माटी की ढेली।भीर भई सखियन की भेली, याने देखे लोग लुगाई॥

मोहन को मुखडो खुलवायो, तीन लोक वामे दरसायो । तब विश्वास यसोदाहिं आयो, यो तो पूरण ब्रह्म कन्हाई॥

ऐसो रस नाहि माखन में, मेवा मिसरी नही दाखन में । जो रस ब्रज रज के चाखन में, याने मुक्ति की मुक्ति कराई॥

या रज को सुर नर मुनि तरसे, बडभागी जन नित उठ परसें । जाकी लगन लगी रहे हरि से, यह तो घासीराम कथ गई॥

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मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। (Main Shiv Hun… Main Shiv Hun… Main Shiv Hun)

Shiva

विभत्स हूँ… विभोर हूँ…
मैं समाधी में ही चूर हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

घनघोर अँधेरा ओढ़ के…
मैं जन जीवन से दूर हूँ…
श्मशान में हूँ नाचता…
मैं मृत्यु का ग़ुरूर हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

साम – दाम तुम्हीं रखो…
मैं दंड में सम्पूर्ण हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

चीर आया चरम में…
मार आया “मैं” को मैं…
“मैं” , “मैं” नहीं…
”मैं” भय नहीं…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

जो सिर्फ तू है सोचता…
केवल वो मैं नहीं…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

मैं काल का कपाल हूँ…
मैं मूल की चिंघाड़ हूँ…
मैं मग्न…मैं चिर मग्न हूँ…
मैं एकांत में उजाड़ हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

मैं आग हूँ…
मैं राख हूँ…
मैं पवित्र राष हूँ…
मैं पंख हूँ…
मैं श्वाश हूँ…
मैं ही हाड़ माँस हूँ…
मैं ही आदि अनन्त हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

मुझमें कोई छल नहीं…
तेरा कोई कल नहीं…
मौत के ही गर्भ में…
ज़िंदगी के पास हूँ…
अंधकार का आकार हूँ…
प्रकाश का मैं प्रकार हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

मैं कल नहीं मैं काल हूँ…
वैकुण्ठ या पाताल नहीं…
मैं मोक्ष का भी सार हूँ…
मैं पवित्र रोष हूँ…
मैं ही तो अघोर हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।
शिवरात्रि की शुभकामनाये आप सभी को

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Jai-Maa-Vaibhav-Laxmi
जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥
जय लक्ष्मी माता…

ब्रह्माणी रूद्राणी कमला, तू ही है जगमाता ।
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥
जय लक्ष्मी माता…

दुर्गा रूप निरंजन, सुख सम्पति दाता ।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता ॥
जय लक्ष्मी माता…

तू ही है पाताल बसन्ती, तू ही है शुभ दाता ।
कर्म प्रभाव प्रकाशक, भवनिधि से त्राता ॥
जय लक्ष्मी माता…

जिस घर थारो वासो, तेहि में गुण आता ।
कर न सके सोई कर ले, मन नहीं धड़काता ॥
जय लक्ष्मी माता…

तुम बिन यज्ञ न होवे, वस्त्र न कोई पाता ।
खान पान को वैभव, सब तुमसे आता ॥
जय लक्ष्मी माता…

शुभ गुण सुंदर मुक्तता, क्षीर निधि जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता ॥
जय लक्ष्मी माता…

आरती लक्ष्मी जी की, जो कोई नर गाता ।
उर आनन्द अति उपजे, पाप उतर जाता ॥
जय लक्ष्मी माता…

स्थिर चर जगत बचावे, शुभ कर्म नर लाता ।
राम प्रताप मैया की शुभ दृष्टि चाहता ॥
जय लक्ष्मी माता…