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हिमा दास की गोल्डन दौड़… (Hima Das Wins Fourth International Gold Medal In 15 Days)

विदेश में 15 दिनों में चार गोल्ड मेडल जीत देश का नाम किया रौशन…

भारत की उड़नपरी असम की स्टार धाविका हिमा दास (Hima Das) ने पंद्रह दिनों में चार गोल्ड मेडल (Gold Medal) जीतकर देश का नाम दुनियाभर में रौशन कर दिया. उन्होंने न केवल ख़ुद को, बल्कि देश को कई बार गौरवान्वित होने का मौक़ा दिया. टैलेंटेड यंग स्प्रिंटर ने विदेश में चार अलग-अलग प्रतियोगिता में 200 मीटर की दौड़ में चार स्वर्ण पदक जीतकर अपने हुनर का लोहा मनवाया.

Hima Das

स्वर्णिम सफ़र

* इसी महीने यानी जुलाई की दो तारीख़ को पोलैंड के पोज़नान एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स में हिमा दास ने 200 मीटर के रेस में 23.65 सेकंड समय लेते हुए अपना साल 2019 का पहला गोल्ड मेडल जीता.

* जीत के सिलसिले को बरक़रार रखते हुए आठ जुलाई को कुंटो एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 23.97 सेकंड का समय निकालकर उन्होंने दूसरा स्वर्ण पदक भी जीत लिया.

* उनके जीतने का जुनून इस कदर चरम पर था कि 14 जुलाई को हुए क्लांदो मेमोरियल एथलेटिक्स टूर्नामेंट के 200 मीटर के ही रेस में 23.43 सेकंड में पूरा करते हुए हिमा ने जीत की व गोल्ड की हैट्रिक मारी.

* अपने ज़बर्दस्त दौड़ को जारी रखते हुए उन्होंने चेक गणराज्य में 17 जुलाई को हुए टाबोर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में एक बार फिर 200 मीटर की दौड़ में गोल्ड पर बाजी मारी. अपने चौथे गोल्ड को हासिल करने के लिए उन्होंने मात्र 23.25 सेकंड का समय लिया, जो उनके नेशनल रिकॉर्ड के काफ़ी क़रीब रहा. गौर करनेवाली बात यह है कि इसी दौड़ में भारत की ही धाविका वी. के विसमाया ने 23.43 सेकंड का समय लेते हुए रजत पदक जीता. खिलाड़ियों को बहुत-बहुत बधाई!

अचीवमेंट्स

* हिमा दास वर्ल्ड जूनियर चैंपियन हैं.

* 400 मीटर के रेस में नेशनल रिकॉर्ड होल्डर हैं और उनका सर्वश्रेष्ठ समय 23.10 है, जो अभी तक जीते चारों पदक में वे इसके क़रीब भी नहीं पहुंच पाई हैं.

* वे आईएएएफ वर्ल्ड अंडर 20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर रेस टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीतनेवाली पहली भारतीय महिला एथलिट हैं.

* 400 मीटर के रेस में भी 51.46 सेकंड का समय लेकर सोने के तमगे पर उन्होंने कब्ज़ा जमाया.

* हिमा ने हाल ही में गुवाहाटी में हुए इंटर स्टेट चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीता.

* साल 2018 में जकार्ता में हुए 18 वें एशियन गेम्स में 400 मीटर में नेशनल रिकॉर्ड तोड़ते हुए सिल्वर मेडल जीता था.

* एक तरफ़ जहां हिमा दास का राज्य असम बाढ़ के कहर से जूझ रहा हैे, तो दूसरी तरफ़ अपनी मेहनत-लगन और मज़बूत इरादों के साथ हिमा असम व भारत का नाम रौशन कर रही हैं.

* उन्होंने अपनी आधी तनख़्वाह भी बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए दी है.

* पीठदर्द की समस्या से जूझने के बावजूद दिनोंदिन हिमा बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं. वेलडन!

सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

* 100 मीटर में 11.74 सेकंड

* 200 मीटर में 23.10 सेकंड

* 400 मीटर में 50.79 सेकंड

* 4द400 मीटर रिले में 3.33.61 में.

पर्सनल लाइफ

* हिमा दास का जन्म 9 जनवरी, 2000 को असम के नगांव जिले के कांधूलिमारी गांव में हुआ था.

* माता-पिता जोनाली व रोनजीत दास की चावल की खेती है.

* वे चार भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं.

* हिमा स्कूल के दिनों में लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थीं और इसी में अपना करियर बनना चाहती थीं.

* जवाहर नवोदय स्कूल के पीटी टीचर शमशुल हक की सलाह पर उन्होंने दौड़ना शुरू किया.

* ट्रैक एंड फील्ड की इस प्रतिभावान खिलाड़ी के कोच निपोन दास हैं.

* वे ढिंग एक्सप्रेस के नाम से मशहूर हैं.

भविष्य में होनेवाली अन्य प्रतियोगिता के लिए मेरी सहेली की ओर से ढेर सारी शुभकामनाएं! ऑल द बेस्ट!

– ऊषा गुप्ता

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एशियन गेम्स- जीत का सिलसिला यूं ही रहे बरकरार (Asian Games- Well Done Indian Team)

एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन रहा. खिलाड़ियों ने बेहतरीन उपलब्धियां हासिल कीं, ख़ासकर जिग्सन जॉनसन, स्वप्ना बर्मन, विकास कृष्ण, विनेश फोगाट, दुती चंद, हिमा दास, पीवी सिंधु आदि का दमदार प्रदर्शन रहा. यह एशियन गेम्स भारत का अब तक का सबसे कामयाब एशियन गेम्स रहा है. सभी खिलाड़ियों ने अपना सौ प्रतिशत दिया.

Asian Games

यह खिलाड़ियों की मेहनत लगन और जीत का जज़्बा ही था कि हर दिन पदक जीतने का सिलसिला चलता रहा. कुश्ती, बैडमिंटन, जैवलिन थ्रो, लॉन्ग जंप, नौकायान, घुड़सवारी, दौड़ आदि में खिलाड़ियों ने कई कीर्तिमान स्थापित किए. इसमें कोई दो राय नहीं कि इस प्रतियोगिता में महिलाओं का काफ़ी दबदबा रहा. पहली बार इस प्रतियोगिता में ब्रिज खेल में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड अपने नाम किया.
उम्मीद के अनुकूल प्रदर्शन ना करने के बावजूद कबड्डी में महिला/पुरुष की टीम ने सिल्वर, हॉकी में महिलाओं ने सिल्वर और पुरुष टीम ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता.
भले ही हम कुछ पदक जीतने से चूक गए, पर इसके बावजूद सभी भारतीय खिलाड़ियों ने लाजवाब खेल का नजारा पेश किया. पदकों के हिसाब से भी इस बार हमारा प्रदर्शन उम्दा रहा. सभी खिलाड़ियों को हमारी ढेर सारी शुभकामनाएं और बधाइयां. साथ ही इसी तरह आनेवाली हर प्रतियोगिताओं में वे अपना लाजवाब प्रदर्शन करते रहें, इसके लिए ऑल द बेस्ट! देशवासियों को सभी खिलाड़ियों पर नाज है. हमारे लिए प्रत्येक भारतीय खिलाड़ी विजेता है!

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कुछ उपलब्धियों की झलकियांं

स्वप्ना/अरपिंदर ने रचा इतिहास
जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में हर रोज़ भारतीय खिलाड़ियोंं ने उपलब्धियां दर्ज कराई. हेप्टाथलोन में स्वप्ना बर्मन ने और ट्रिपल जंप में अरपिंदर सिंह ने तो इतिहास रच दिया. दोनों ही खिलाड़ियों को बहुत-बहुत बधाई. 48 सालों में पहली बार देश को ट्रिपल जंप में स्वर्ण पदक हासिल हुआ. मनिका बत्रा व अचंता शरत कमल ने मिक्स्ड टेबल टेनिस में कांस्य पदक जीता. चीन को सेमीफाइनल में हराकर महिला हॉकी टीम बीस साल में पहली बार हॉकी के फाइनल में पहुंची थी.

नौकायन टीम का संघर्ष व जीत

इंडोनेशिया के जकार्ता-पालेमंबर्ग के 18वें एशियाई खेल में जैसे-जैसे एशियन गेम्स आगे बढ़ता रहा, वैसे-वैसे भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन में भी निखार आता रहा. पहली बार रोइंग टीम ने एक स्वर्ण व दो कांस्य के साथ तीन पदक पर कब्ज़ा किया. दत्तू भोकानाल, स्वर्ण सिंह, ओमप्रकाश व सुखमीत सिंह रोइंग मैन्स टीम ने 6:17:17 के समय के साथ गोल्ड अपने नाम किया. दुष्यंत ने बीमार होने के बावजूद कांस्य पदक जीता. भगवान सिंह व रोहित ने लाइटवेट डबल स्कल्स में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता. रोइंग टीम को बधाई. रोहन बोपन्ना और दिविज शरण की जोड़ी ने डबल्स टेनिस में कज़ाकिस्तान के एलेक्सांद्र बुबलिक व डेनिस येवसेयेव को हराकर गोल्ड अपने नाम किया. अनुभवी निशानेबाज़ हीना सिद्धू ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता. ख़ुशी के साथ थोड़े ग़म भी भारत के हिस्से में आए यानी पहली बार जहां पुरुष कबड्डी टीम को कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा, वहीं महिला कबड्डी टीम ने सिल्वर मेडल जीता.

शार्दुल-अंकिता की सराहनीय जीत

जकार्ता में हर रोज़ देश के युवा खिलाड़ियों ने भी अपना दमख़म दिखाया. 15 साल के शार्दुल विहान ने डबल ट्रैप इवेंट में रजत पदक जीत देशवासियों को ख़ुश कर दिया. इसके अलावा टेनिस के एकल में अंकिता रैना ने कांस्य पदक अपने नाम किया. अंकिता से पहले साल 2006 में सानिया मिर्ज़ा ने रजत व साल 2010 में कांस्य पदक जीता था.

राही का सटीक निशाना

एशियाड खेल में भारतीय खिलाड़ी दिनोंदिन अपने बेहतरीन प्रदर्शन से सुर्खियां बटोरते रहे. 18 अगस्त-2 सितंबर तक चले इस खेल कुंभ में हर रोज़ एक नया कीर्तिमान स्थापित होता रहा. निशानेबाज़ी में राही सरनबोत ने 25 मीटर पिस्टल में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास ही रच दिया. इसके अलावा भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने हांगकांग को 26-0 से हराकर रिकॉर्ड बनाया.

* एथलेटिक्स में भारत में सबसे अधिक पदक यानी कुल १९ पदक जीते.

* मुक्केबाज़ी में अमित पंघाल के स्वर्ण पदक के साथ भारत के पदकों की संख्या कुल 69 हो गई. यह अब तक का भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है.

*  भारत ने १५ स्वर्ण, २४ रजत और ३० कांस्य के साथ ६९ पदकों पर कब्जा किया.

* १९५१ से शुरू हुए एशियाई खेलों में भारत का यह अब तक का बेस्ट परफॉर्मेंस रहा है.

इंडोनेशिया के जर्काता में हुए एशियन गेम्स में बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट, सौरभ चौधरी, लक्ष्य, संजीव राजपूत, अपूर्वी चंदेला, रवि कुमार, अभिषेक वर्मा, दिव्या काकरान के सराहनीय उपलब्धियां रहीं. वैलडन टीम इंडिया!

– ऊषा गुप्ता