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एसिडिटी व गैस से छुटकारा पाने के 5 चमत्कारी घरेलू नुस्ख़े (5 Best Home Remedies To Get Rid Of Acidity And Gas)

एसिडिटी व गैस (Acidity And Gas) से छुटकारा पाने के 5 चमत्कारी घरेलू नुस्ख़े (Home Remedies) आज़माकर देखिए, आपको मिनटों में एसिडिटी व गैस से राहत मिल जाएगी. दादीमां के घरेलू नुस्ख़े बहुत ही आसान और असरदार हैं. यदि आप भी अक्सर एसिडिटी व गैस से परोशान रहते हैं, तो एसिडिटी व गैस से छुटकारा पाने के 5 चमत्कारी घरेलू नुस्ख़े ज़रूर आपके बहुत काम आएंगे.

Home Remedies for Acidity

क्यों होती है एसिडिटी?
इसे अम्लपित्त भी कहते हैं. इसमें आमाशय में एसिड ज़्यादा बनता है. इससे भोजन ठीक से पचता नहीं. उससे जो अन्न रस बनता है, वह अम्ल में बदल जाता है. इससे पाचन संबंधी कई विकार पैदा हो जाते हैं. लंबे समय तक ऐसी स्थिति बने रहने से अम्लपित्त नामक रोग हो जाता है. यह रोग वातावरण में आर्द्रता के कारण होता है, इसलिए यह बरसात में ज़्यादा होता है. इसके अतिरिक्त तेज़ मिर्च-मसाले वाले पदार्थ, खट्टे-चटपटे खाद्य पदार्थों के ज़्यादा सेवन से भी अम्लरस ज़्यादा बनने लगता है. चाय, कॉफी, सिगरेट, शराब आदि के ज़्यादा सेवन से भी अम्लता बढ़ जाती है.एसिडिटी होने पर पेट, छाती व गले में जलन होती है, खट्टी डकारें आती हैं. डकार के साथ-साथ गले में खट्टा व तीखा पानी भी आ जाता है. कभी-कभी उल्टी भी हो जाती है. अम्लपित्त में अपच, कब्ज़ व दस्त की भी शिकायत होती है.

क्यों होती है पेट में गैस?
पेट में गैस एक आम समस्या बनती जा रही है. आमतौर पर पाचन संबंधी गडबड़ी से पेट में गैस बनने लगती है. यह किसी अन्य रोग का लक्षण भी हो सकता है. अनियमित भोजन और नींद से पेट में गैस होती है. तनाव, भय, क्रोध, द्वेष व चिंता में रहने, चाय-कॉफी, धूम्रपान, लंबे समय तक भूखे रहने, मसाला व तैलीय भोजन से भी गैस बनने लगती है. पेट में गैस होने पर खुलकर भूख नहीं लगती. पेट में हवा भरी लगती है. पेट व पीठ में हल्का दर्द होता है, दस्त साफ़ नहीं होती या शौच सूख जाता है, डकारें ज़्यादा आती हैं, थकावट व आलस्य घेरे रहते हैं.

एसिडिटी व गैस से छुटकारा पाने के 5 चमत्कारी घरेलू नुस्ख़े जानने के लिए देखें वीडियो:

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एसिडिटी व गैस से छुटकारा पाने के 5 अन्य घरेलू नुस्ख़े:
1) 1 चम्मच अजवायन में चौथाई चम्मच नींबू का रस मिलाकर चाटें. गैस शीघ्र शांत होगी.
2) एसिडिटी से छुटकारा पाने के लिए अदरक के रस में थोड़ा-सा सेंधा नमक और भुना हुआ जीरा डालकर सेवन करें और ऊपर से आधा ग्लास छाछ पीएं.
3) 1 ग्लास गर्म दूध में 2 चम्मच एरंडी का तेल डालकर पीएं. ऐसा करने से गैस से तुरंत लाभ होगा.
4) चोकर सहित आटे की रोटी खाने से एसिडिटी और गैस में फायदा होता है.
5) 1 ग्लास गन्ने का रस गरम करके उसमें नींबू रस और थोड़ा-सा सेंधा नमक डालकर दिन में कम से कम 2 बार पीएं. ऐसा करने से गैस से राहत मिलती है.

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जब पेट में बनता है एसिड, तो क्या खाएं, क्या नहीं? (What to Eat When You Have an Acidic Stomach)

आजकल लोग स्वाद पाने के लालच में सेहत को नज़रअंदाज़ करने लगे हैं और घर के बने हेल्दी खाने की बजाय बाहर की तली-भुनी, मसालेदार और फास्ट फूड जैसी चीज़ों को प्राथमिकता देने लगे हैं. इसके विपरीत कई लोग ऐसे भी हैं जो इन चीज़ों को जमकर खाने के बाद डायटिंग करने लग जाते हैं, ताकि मोटापा उन पर हावी न हो सके. इसका नतीजा यह होता है कि पेट में अचानक से एसिड की मात्रा बढ़ने लगती है और अम्लपित्त यानी एसिडिटी के अलावा कई समस्याएं हो जाती हैं. चलिए नज़र डालते हैं इससे होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं पर.

Acidic Stomach

पेट फूलना
पेट में जब एसिड की मात्रा बढ़ जाती है तो पेट फूलने की समस्या होने लगती है. अगर आपको बार-बार ऐसा महसूस होने लगे कि आपके पेट में गैस बन रही है या आपका पेट फूल रहा है तो इसका सीधा अर्थ ये है कि आपके पेट में एसिड की मात्रा बढ़ गई है. इस स्थिति में आपको ठंडी चीज़ें खानी चाहिए.

एसिड रिफ्लक्स

Acidic Stomach
ज़्यादा देर तक ख़ाली पेट रहने से एसिड रिफ्लक्स की समस्या होती है. दरअसल, जब देर तक पेट ख़ाली रहता है तो एन्ज़ाइम्स और एसिड पेट के खाने को हज़म नहीं होने देते हैं और एसिड बनने लगता है. ऐसे में लोअर इसोफेगल स्पिंचर (एलईएस) ठीक से काम नहीं करता और पेट के ऊपरी भाग में तेज़ जलन महसूस होती है.

डकार आना
आपने भी कभी न कभी अपने आस-पास कुछ लोगों को बार-बार डकार लेते हुए देखा होगा. दरअसल, जिन लोगों की आहार नलिका व पेट में एसिड की मात्रा बढ़ने लगती है और सीने में जलन की शिकायत होती है, तब उन्हें डकार आने लगती है.

पेट का अल्सर
पेट में एसिड की मात्रा बढ़ने पर आपको पेट का अल्सर जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. पेट में अल्सर होना स़िर्फ तकलीफ़देह ही नहीं, बल्कि बेहद ख़तरनाक भी साबित हो सकता है. इस समस्या का पता चलते ही इसका इलाज कराना चाहिए, अन्यथा यह आंतों में कैंसर के ख़तरे को बढ़ा सकता है.

हार्टबर्न
पेट में एसिड की मात्रा बढ़ जाने पर हार्टबर्न की समस्या होने लगती है. हार्टबर्न होने पर सीने के निचले हिस्से में जलन, पेट व सीने में दर्द और गैस की शिक़ायत हो सकती है. अगर आप घर का खाना कम और बाहर का ज़्यादा खाते हैं तो आपको यह समस्या हो सकती है.

क्या खाएं?
अगर आप भी इस तरह की किसी समस्या से पीड़ित हैं तो आपको अपने खान-पान की आदतों में सुधार लाने की आवश्यकता है. हर 2-3 घंटे में कुछ न कुछ हेल्दी खाएं, ताकि पेट में एसिड की मात्रा बढ़ने न पाए.

हरी सब्ज़ियां – अपने आहार में गाजर, पत्तागोभी, शिमला मिर्च और हरी पत्तेदार सब्ज़ियों को शामिल करें. बेहतर होगा कि इन्हें अधिक तेल-मसाले में पकाने की बजाय उबाल कर खाएं.

डेयरी प्रोडक्ट्स – गाय का दूध, घी, कॉटेज चीज़, बकरी का दूध, दही जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करें. इनके सेवन से सेहत ठीक रहती है और एसिड की समस्या भी नहीं होती है.

फ्रेश फ्रूट्स – ताज़े-रसीले फलों को अपने आहार में शामिल करें. फलों के सेवन से पेट में एसिड की मात्रा नहीं बढ़ती और पेट से जुड़ी कोई समस्या भी नहीं होती है.

अनाज और फलियां – अनाज में फाइबर होता है और हाई फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को खाने से पेट में बढ़ा हुआ एसिड कम होने लगता है. इसके अलावा फलियां, जैसे-ब्लैक बीन्स, काबुली चना, राजमा, मूंग और सोयाबीन्स आदि का सेवन करें.

क्या न खाएं?
रेड मीट – अगर आपको एसिड रिफ्लक्स की समस्या है तो रेड मीट खाने से बचें, अन्यथा पेट में एसिड की मात्रा बढ़ सकती है.

कॉफी – कॉफी में मौजूद कैफीन पेट में एसिड को बढ़ाने का काम करता है, इसलिए बेहतर यही होगा कि इसका सेवन कम से कम करें.

प्रोसेस्ड मीट – इस तरह के खाद्य पदार्थ पाचन तंत्र के लिए ख़राब होते हैं, ख़ासकर उन लोगों के लिए जिन्हें एसिड रिफ्लक्स की समस्या है.

मसाले – स्पाइसी मसालों का सेवन करने से एसिड की समस्या बढ़ सकती है और यह गैस्ट्रिक म्युकोसा के लिए भी उलझन पैदा कर सकता है.

तली – भुनी चीज़ें- इस तरह के खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट से जुड़ी समस्याओं के बढ़ने की संभावना होती है और एसिड रिफ्लक्स की दिक्कत होने लगती है.

रिफाइंड आटा – प्रोसेस्ड ब्रेड व बेकरी प्रोडक्ट्स में रिफाइंड फ्लोरस्कैन होता है, जो स्वास्थ्य के लिए नुक़सानदेह है. इसके सेवन से पेट में अल्सर और गैस्ट्राइटिस होने का ख़तरा होता है.

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