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रिश्ते में बर्दाश्त न करें ये 10 बातें (10 Things Never Adjust In A Relationship)

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रिश्ते में बर्दाश्त न करें ये 10 बातें (10 Things Never Adjust In A Relationship)
माना रिश्ते का मतलब ही होता है एक-दूसरे के साथ एडजेस्ट करना और कुछ बातों को बर्दाश्त भी करना. अपनों से प्यार बनाए रखने के लिए भी यह ज़रूरी है. लेकिन कभी-कभार बात स्वाभिमान की आ जाती है और एक हद से बाहर चली जाती है, तो कुछ बातें हैं, जिन्हें बर्दाश्त नहीं करने में ही समझदारी है, वरना पार्टनर आपको कैज़ुअली लेने लगेगा और आपका सम्मान भी नहीं करेगा. कौन-सी हैं ये बातें, आपके लिए जानना ज़रूरी है.

1. एब्यूज़

यह ज़रूरी नहीं कि एब्यूज़ यानी शोषण स़िर्फ शारीरिक ही होता है. यह कई स्तर पर हो सकता है, मौखिक, भावनात्मक, मानसिक, आर्थिक आदि. यदि आपको यह महसूस हो रहा है कि रिश्ते में आपका शोषण हो रहा है, पार्टनर या कोई भी आपको भावनात्मक स्तर पर सपोर्ट नहीं कर रहा, मानसिक यातनाएं दी जा रही हैं, बेवजह गाली-गलौज की जा रही है या आर्थिक स्तर पर परेशान किया जा रहा है, तो बर्दाश्त करने से बेहतर होगा बात करें. अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाएं और सामनेवाले को समझाएं कि वो जाने-अंजाने ग़लत कर रहा है.

2. वॉयलेंस

डोमेस्टिक वॉयलेंस वैसे भी अपराध है, फिर भी महिलाएं रिश्ते को बचाए रखने के लिए इसे बर्दाश्त करती हैं. लोगों से इसे छिपाती भी हैं, लेकिन एक स्तर पर जाकर यह सामनेवाली की आदत हो जाती है कि हर छोटी-बड़ी बात पर वो आप पर हाथ उठाना अपना हक़ समझने लगता है. बेहतर होगा देर होने से पहले सतर्क और सजग हो जाएं. हिंसा की किसी भी रिश्ते में कोई जगह नहीं है. यही बात पुरुषों पर भी लागू होती है, क्योंकि कई पुरुष भी रिश्ते में हिंसा व प्रताड़ना के शिकार होते हैं, उन्हें भी यह डर लगता है कि समाज उनकी बात पर भरोसा नहीं करेगा, लेकिन बेहतर होगा आप भी अपने हक़ के लिए लड़ें और ग़लत बातों को बर्दाश्त न करें.

3. डिसरिस्पेक्ट

आपसे उम्मीद की जाती है कि आप अपने पार्टनर को इज़्ज़त दें, लेकिन बदले में आपको सम्मान व समान दर्जा नहीं मिलता, तो तकलीफ़ होना लाज़िमी है. हो सकता है, अंजाने में ऐसा हो रहा हो, तो सही रास्ता यही है कि अपने पार्टनर से इस बारे में बात करें, ताकि वो आपके पक्ष को समझ सके और आपको कैज़ुअली न ले. लोगों व रिश्तेदारों के सामने उल्टा-सीधा न कहे. आपको सम्मान व समान दर्जा दे.

4. ग़ैरज़िम्मेदारी

भले ही यह छोटी-सी बात लग रही हो, लेकिन इसके परिणाम रिश्ते के लिए भी गंभीर हो सकते हैं. यदि एक पार्टनर भी ग़ैरज़िम्मेदार है, तो इसकी सज़ा पूरे परिवार को भुगतनी पड़ती है. ग़ैरज़िम्मेदाराना व्यवहार हर जगह तकलीफ़ देता है और दूसरों का वर्कलोड भी बढ़ा देता है. धीरे-धीरे दूसरे पार्टनर को इस व्यवहार से खीझ होने लगती है और रिश्तों में दूरियां आने लगती हैं. कोशिश करें अपने पार्टनर को समझाने की. बेहतर होगा काम व ज़िम्मेदारियां बांट लें, ताकि वो टाल न सके. बीच-बीच में ड्यूटीज़ बदल लें, जिससे बोरियत भी न हो.

5. इग्नोरेंस

आपकी बातों को तवज्जो न देना, महत्वपूर्ण निर्णयों में आपकी राय ही न लेना, आपके कुछ भी कहने पर बात को इग्नोर कर देना या यह कह देना कि तुमको क्या पता इस बारे में… यदि आप यह शुरू से ही बर्दाश्त करते आ रहे हैं, तो संभल जाइए, क्योंकि आगे चलकर आपको अपना अस्तित्व ही रिश्ते में महत्वहीन लगने लगेगा. आपको पार्टनर से बात करनी होगी कि आप इग्नोर्ड फील करते/करती हैं. न स़िर्फ बातें, बल्कि आपकी प्रेज़ेंस को भी यदि इग्नोर किया जाता है, आपको समय नहीं दिया जाता, आपके सुख-दुख के बारे में जानने की कोई ज़रूरत नहीं समझता, तो बर्दाश्त करने की बजाय बात करें.

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6. ज़बर्दस्ती

यह ज़बर्दस्ती किसी भी मामले में हो सकती है और अगर यह सेक्स में है, तब तो आपको और भी सतर्क हो जाना चाहिए. रिश्ते में दोनों की भावनाओं और इच्छाओं का सम्मान बेहद ज़रूरी है. यदि आप अपने पार्टनर का सम्मान करते हैं, तो पार्टनर से भी उम्मीद करते होंगे, वो भी उतना ही सम्मान आपको दे. लेकिन जब ऐसा नहीं होता और एक ही पार्टनर हमेशा अपनी इच्छाएं थोपता चला जाता है, तो यह ज़बर्दस्ती घुटन पैदा करती है. घुटने से बेहतर है कम्यूनिकेट करें.

7. अननेचुरल सेक्स

सेक्स हर शादी का अहम् अंग होता है, लेकिन कुछ पुरुष अपने पार्टनर पर अननेचुरल सेक्स के लिए दबाव डालते हैं. दरअसल, वो पोर्न फिल्मों को अपना आदर्श मानते हैं और अपने पार्टनर से उसी तरह के प्रदर्शन की चाह रखते हैं. भारत में एनल सेक्स और ओरल सेक्स ग़ैरक़ानूनी है और अगर आपका पार्टनर कंफर्टेबल नहीं है, तो उस पर दबाव न डालना ही बेहतर होगा. सेक्स में दोनों का सहज रहना ज़रूरी है. यदि कोई समस्या है, तो विशेषज्ञ की राय ली जा सकती है, आप काउंसलर के पास भी जाकर अपनी सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के तरी़के जान सकते हैं.

8. इमोशनल ब्लैक मेलिंग

कई महिलाओं की आदत होती है कि वो अपनी बात मनवाने के लिए इमोशनल ब्लैक मेलिंग का सहारा लेती हैं. वो या तो बच्चों को हथियार बनाती हैं या फिर सेक्स के समय पति पर दबाव डालती हैं. पति न माने, तो सेक्स से मना कर देती हैं. इस तरह की बातें आपको थोड़े समय के लिए भले ही फ़ायदा पहुंचाती हों, पर आगे चलकर आपके रिश्ते को कमज़ोर बनाती हैं.

9. दूसरों की दख़लअंदाज़ी

अक्सर ऐसा होता है कि हम अपने पार्टनर पर भरोसा न करके कई बार दूसरों पर ज़्यादा भरोसा करते हैं. उनसे सलाह-मशविरा लेते हैं और अपने सीक्रेट्स और पर्सनल बातें भी उनसे शेयर कर लेते हैं. जबकि कई बार दूसरे भी बेवजह अपनी राय देने चले आते हैं. बेहतर होगा कि अपनी निजी बातों को निजी ही रहने दिया जाए. दूसरों का हस्तक्षेप कई बार परिस्थितियों को और भी जटिल कर देता है. अगर कोई समस्या है या आपसी मतभेद है, तो ख़ुद ही आगे बढ़कर पार्टनर से बात करें, न कि किसी अन्य व्यक्ति के पास अपनी समस्या लेकर जाएं.

10. बेईमानी/एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर/शक

रिश्ते का दूसरा नाम ही लॉयल्टी है. ऐसे में बेईमानी बर्दाश्त कैसे की जा सकती है. हां, कभी कोई भूल हो जाए या इंसान भटक जाए, तो माफ़ कर देना ही एकमात्र रास्ता होता है, लेकिन यदि कोई आपके भरोसे का नाजायज़ फ़ायदा उठाता रहे और आप आंखें मूंद लें यह सोचकर कि रिश्ता टूट जाएगा, तो यह ख़ुद के साथ बेईमानी होगी. बेहतर होगा किसी निर्णय पर पहुंचे. बात करें, समस्या का हल निकालें, लेकिन ख़ुद को न ठगें. वरना पार्टनर आपको हल्के में लेगा. उसकी यह सोच बन जाएगी कि मैं चाहे जो भी करूं, उसे बर्दाश्त कर लिया जाएगा, क्योंकि मेरे बिना उसका गुज़ारा नहीं हो सकेगा. बेहतर होगा, पार्टनर के इस भ्रम को तोड़ें और ख़ुद को भी भ्रमित होने से रोकें. इसी तरह से शक्की पार्टनर के साथ रहना भी बेहद तकलीफ़देह होता है. हर बात पर शक, टोका-टाकी करना रिश्ते में चिड़चिड़ापन पैदा कर देता है. शक करने से बेहतर है कि अपने मन के वहम को बात करके दूर कर लें.

– विजयलक्ष्मी

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पुनर्विवाह के बाद कैसे करें एडजस्टमेंट ? (Remarriage adjustments)

Remarriage adjustments

यूं तो समझौते (Remarriage adjustments) की नींव पर कई रिश्ते निभाए जाते हैं, जिनमें से एक अहम् शादी भी है. पर जब पहली शादी असफल हो जाए या किसी अन्य कारण से पुनर्विवाह की नौबत आ जाए तो रिश्ते को निभाने के लिए दोनों पक्षों को काफ़ी एडजस्टमेंट करने पड़ते हैं. ऐसे में ज़रूरी है सफल वैवाहिक जीवन के लिए कुछ ख़ास पहलुओं पर ग़ौर करना. आइए, उन पर एक नज़र डालते हैं.

Remarriage adjustments

अपने दो साल के कड़वे, त्रासदीपूर्ण और दर्द भरे दांपत्य जीवन से हताश अनुभव को अंत में जब तलाक़ मिल गया तो उसने राहत की सांस ली. लगा जैसे काल कोठरी में रहने के बाद उसे आज़ादी मिल गई और वह भी अब खुली हवा में सांस ले सकती है. शादी से उसका विश्‍वास उठ चुका था. अब बस वह अपनी नौकरी के साथ अकेले ख़ुश रहना चाहती थी, लेकिन साल बीतते-बीतते उसे तन्हाई खलने लगी. इसी बीच उसके मनमोहक व्यक्तित्व से प्रभावित हो कई पुरुषों ने उसे पुनर्विवाह के लिए प्रपोज़ किया. माता-पिता ने भी बहुत समझाया, लेकिन वह अपनी अतीत की पीड़ादायक यादों से उबर नहीं पा रही थी. कहीं इस विवाह के बाद भी वैसा ही हुआ तो? पहली शादी में भी तो शुरू-शुरू में सब कुछ ठीक चल रहा था. लेकिन कुछ दिनों बाद ही सब कुछ बिखरने-सा लगा था. सहेलियां समझातीं कि सब पुरुष एक से नहीं होते और न ही सब जगह परिस्थितियां एक-सी होती हैं. लेकिन आख़िर क्या गारंटी कि इस दूसरी शादी में फिर से वही सारी परेशानियां न हों.

आसमां और भी हैं
कुछ लोग तो अकेले ही जीवन गुज़ारना पसंद करते हैं और वे कमोबेश अपने फैसले से संतुष्ट भी रहते हैं. किंतु कुछ के लिए बिना किसी साथी के जीवन गुज़ारना कठिन हो जाता है और वे फिर से घर बसाना चाहते हैं. प्रसिद्ध लेखिका शोभा डे ने अपनी पुस्तक स्पाउस में लिखा है- ‘ज़िंदगी में सबको दूसरा मौक़ा ज़रूर मिलना चाहिए और जब यह सामने हो तो इसे फौरन ले लेना चाहिए.’ वास्तव में यदि एक बार विवाह असफल होता है अथवा असमय ही जीवनसाथी का साथ छूट जाता है तो प्रत्येक व्यक्ति को हक़ है कि वह दुबारा विवाह करके नये सिरे से ज़िंदगी शुरू करे.

पुनर्विवाह से पहले ज़रूरी है प्लानिंग
यों तो विवाह नाम ही समझौते यानी कि एडजस्टमेंट का है, किन्तु पुनर्विवाह में ये बातें अधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं, क्योंकि पहली बार विवाह करने पर जहां एक-दूसरे की बहुत-सी कमियां तथा अवगुण दांपत्य के शुरुआती खुमार, दैहिक आकर्षण तथा सेक्स के नये-नये अनुभवों के बीच काफ़ी हद तक दब जाती हैं अथवा अनदेखी कर दी जाती हैं, वहीं पुनर्विवाह के मामले में इस तरह की गुंजाइश कम ही रहती है.

दोबारा विवाह करते समय पहले विवाह के कड़वे अनुभव अथवा उससे जुड़ी यादें उन्हें अक्सर पूर्वाग्राही बना देती हैं और वे अपने साथी की प्रत्येक गतिविधि को संदेह के घेरे में रखने लगते हैं. अत: यदि आप दोबारा घर बसाने जा रही हैं तो अपने भावी वैवाहिक जीवन की सफलता के लिए पहले से कुछ प्लानिंग ज़रूरी है.

  • सबसे पहले अपने मन में यह बात बैठा लें कि पऱफेक्ट मैरिज अथवा पऱफेक्ट जीवनसाथी जैसी कोई चीज़ दुनिया में नहीं होती. कोई भी शादी चाहे वह कितनी भी अच्छी और कितनी भी सफल क्यों न हो, कमियों और दोषों से रहित नहीं होती.
  • अधिकतर पुनर्विवाह स्वेच्छा से न करके ज़रूरत अथवा मजबूरीवश किए जाते हैं, अत: विवाह से पहले ये अवश्य जांच लें कि आप एक-दूसरे की ज़रूरतों पर खरा उतरने के योग्य हैं अथवा नहीं, मसलन- यदि आप नि:सन्तान हैं और किसी बच्चे के पिता से शादी करने जा रही हैं तो अपनी मां की भूमिका के लिए अपने आपको तैयार पाती हैं या नहीं.
  • आप जिससे शादी करने जा रही हैं, उनके भी बच्चे हैं और आपके भी हैं तो एक-दूसरे के बच्चों की सहमति लेना ज़रूरी है.
  • आप जिनसे विवाह करने जा रही हैं, वे तलाक़शुदा हैं तो पहले विवाह की असफलता के कारणों की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें. यदि पति की कमियों की वजह से पत्नी ने तलाक़ की पहल की है तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए. यदि पत्नी की कमियों की वजह से पति ने तलाक़ लिया है तो आप उनकी पूर्व पत्नी की कमियों के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लें. देखिए, कहीं आप में भी वही सब कमियां तो नहीं.
  • यदि आप दोनों तलाक़शुदा हैं तो एक-दूसरे के तलाक़ की काग़ज़ी कार्यवाही की पूरी जांच-पड़ताल अवश्य कर लें. क़ानून के दायरे में हर पहलू जायज़ हो तभी विवाह की सहमति दें.

कैसे बैठाएं तालमेल पुनर्विवाह के बाद
यह सच है कि दूसरी शादी को क़ामयाब बनाने के लिये बहुत मेहनत तथा गंभीरता से प्रयास करने पड़ते हैं, क्योंकि पुनर्विवाह में स़िर्फ दो व्यक्ति ही नहीं जुड़ते, बल्कि उनके साथ उनका पहला वैवाहिक अतीत भी जुड़ता है. अत: वैवाहिक जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत ठोस धरातल पर करने के लिए आपको बहुत समझदारी से काम लेना होगा.

  • कहावत है कि दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है, अत: यदि आप तलाक़शुदा हैं तो अपनी पिछली असफलताओं से सबक लेकर नई ज़िन्दगी में बहुत संभल-संभल कर क़दम रखना होगा.
  • एक-दूसरे के पहले विवाह की असफलताओं के कारणों को जानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करें. पिछली ग़लतियों को फिर से दोहराने की भूल न करें.
  • यदि आप विधवा अथवा विधुर हैं तो ध्यान रहे कि आपके वर्तमान जीवन के बीच आपका अतीत कहीं भी न आए. हालांकि यह भी मुश्किल है कि जिस साथी के साथ आपने जीवन के इतने साल गुज़ारे हैं, उनका ज़िक्र भी न आए. किन्तु यदि ऐसा होता है तो एक-दूसरे की यादों के प्रति सम्मान तथा सद्भावना बनाए रखें. यदि आपका पहला दांपत्य जीवन सुखमय था तो उन सफल नुस्ख़ों का प्रयोग अपने वर्तमान जीवन में अवश्य करें.
  • पुनर्विवाह के समय यदि एक-दूसरे के बच्चे भी हैं तो परस्पर एक-दूसरे के बच्चों को समझने और स्वीकार करने का समय दें. एकदम से उनसे एक ईमानदार मां अथवा पिता की भूमिका की उम्मीद न पालें.
  • एक विवाह टूटने अथवा जीवनसाथी छूटने से व्यक्ति की दैहिक मांगों में कोई कमी आना ज़रूरी नहीं. अत: सेक्स के मामले में कोई पूर्वाग्रह न पालें और दूसरे की इच्छा का पर्याप्त ध्यान रखें.
  • अधिकांशत: पुनर्विवाह कंडीशनल होते हैं, अत: सेक्स को लेकर अधिक डिमांडिग होने से भी बचें. पुनर्विवाह को लेकर कोई अपराधबोध न पालें और अपने आपको बेचारा बनाकर न पेश करें. आत्मविश्‍वास और एक-दूसरे पर विश्‍वास बनाए रखें.
    अब आपके सामने एक नई और ख़ूबसूरत दुनिया बांहें पसारे खड़ी है, उसका स्वागत करें और जीवन का आनन्द उठाएं.

– गीता

 

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