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कोविड महामारी ने हमारे जीवन को काफ़ी बदल दिया है. भले ही लॉकडाउन के कई सकारात्मक पहलू हैं, जैसे- परिवारों को एक साथ समय बिताने का मौक़ा मिला और हम अपने दोस्तों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों के साथ सामाजिक रूप से अधिक सक्रिय हुए. हमें प्रकृति का सबसे अच्छा दृश्य भी देखने मिला, हमने इनडोर शौक का भरपूर आनंद लिया. लेकिन दूसरी तरफ़ स्कूलों के बंद होने, क्लासमेट से आमने-सामने बातचीत न कर पाने, डिजिटल क्लासेस शुरू होने और नए वर्चुअल स्कूल के मापदंडों को अपनाने के भार की वजह से बच्चों की पढ़ाई का भी बेहद नुक़सान हुआ. यह बच्चों के लिए कई चुनौतियां लेकर आया, जिसकी वजह से कुछ बच्चों में अचानक एग्रेसिवनेस और ग़ुस्सा आना एक आम भावनात्मक प्रतिक्रिया यूं कहें समस्या सी बन गई. आइए, इस विषय पर डॉ. विक्रम गगनेजा, जो नई दिल्ली के एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट पीडियाट्रिक्स हैं, से मिली महत्वपूर्ण जानकारियां द्वारा इसे समझें.

यह हम सभी जानते हैं कि कोविड-19 ने दुनियाभर में खलबली मचा दी है. साथ ही इसने बच्चों और परिवारों के जीवन को भी काफ़ी हद तक बदल दिया है. यदि बच्चों के माता-पिता घर से काम कर रहे हैं या वे आवश्यक सेवा या फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं, तो दोनों ही स्थितियों में वे ज़्यादातर समय अपने काम में व्यस्त रहते हैं. इससे बच्चे के जीवन में अधिक समस्याएं भी उत्पन्न हो रही हैं. बच्चों सहित हम सभी के लिए यह चिंताजनक स्थिति है, जिसका सामना हमने पहले कभी नहीं किया था.
घर पर बच्चों को मीडिया के माध्यम से सभी प्रकार की जानकारियां मिल रही हैं. बच्चों ने अपने दैनिक जीवन में वायरस के व्यापक असर को महसूस किया है. कोविड-19 से प्रेरित इस नई जीवनशैली में बच्चों का ग़ुस्सा होना स्वाभाविक है. लेकिन यह भी सच है कि ग़ुस्सा केवल स्वाभाविक नहीं, बल्कि स्वस्थ प्रतिक्रिया है, पर यह लंबे समय तक रहे और मन शांत न हो, तो यह एक गंभीर समस्या बन सकती है.

बच्चों के ग़ुस्से, चिड़चिड़ापन और आक्रामकता के कई कारण होते हैं…
निराशा एक प्रमुख कारण है. जब बच्चे को वह नहीं मिलता है, जो वह चाहता है, तो उसके व्यवहार में बदलाव आने लगता है.
एक अनुमान के अनुसार, जेनेटिक्स और अन्य जैविक कारक ग़ुस्से/आक्रामकता में अहम भूमिका निभाते हैं. इसमें माहौल का भी योगदान है.
बच्चों में ग़ुस्से की समस्याओं को संभालने के लिए माता-पिता को पहले ग़ुस्से की वजह को समझना होगा. इसके लिए उन्हें बच्चों को धैर्यपूर्वक सुनना बेहद ज़रूरी है.

बच्चे अपनी परेशानियों को कैसे व्यक्त करते हैं?
इस सन्दर्भ में प्रख्यात मनोचिकित्सक एलिसाबेथ कुब्लर-रॉस ने एक मॉडल विकसित किया है, जो बच्चों की मानसिक स्थिति को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकता है. इसमें परेशानी या दुख के पांच सामान्य अवस्थाओं के बारे में बताया गया है. ये कोविड-19 के दरमियान हमारे लिए उपयोगी मार्गदर्शक का काम कर सकता है. इन्हें समझकर बच्चों की चिंता और क्रोध की समस्या का सामना करने में मदद मिल सकती है.

इंकार…
इसकी शुरुआत इन्कार के साथ होती है, जिसे नज़रअंदाज़ करने, भ्रम, सदमे और डर जैसी प्रतिक्रियाओं से समझा जा सकता है.
बच्चे स्कूल बंद होने और नई जीवनशैली में ऑनलाइन कक्षाओं के कारण परेशान और भ्रमित हो सकते हैं.
सोशल डिस्टैंसिंग उन्हें दोस्तों से मिलने और उनके साथ खेलने से वंचित करता है.
ऐसे में इस वायरस को दोष देकर बच्चों को मना लेना, पैरेंट्स के लिए मुश्किलभरा होता है.

ग़ुस्सा करना…
यह दूसरा चरण है. इसे निराशा और चिंता से समझा जा सकता है. इस अवस्था में अब तक दबी हुई भावनाएं बाहर आती हैं.
कोविड-19 के परिणामस्वरूप बच्चे अपने दोस्तों और शिक्षकों से उपेक्षित महसूस कर सकते हैं.
उन्हें अपनी ज़िंदगी में सुरक्षा और नियंत्रण का अभाव महसूस हो सकता है.
घर या परिवार में ठीक से समर्थन न मिलने से बच्चे कमज़ोर पड़ सकते है, क्योंकि वे स्कूलों और दोस्तों को अधिक सहायक पाते हैं.
बच्चों के पास बड़ों की तुलना में ज़िंदगी में कठिन परिस्थितियों से निपटने का अनुभव नहीं होता है, इसलिए वे अपने मानसिक तनाव को अक्सर अकड़न, बिस्तर गीला करने, सोने में कठिनाई, अंगूठा चूसने, ग़ुस्सा दिखाने, नखरे करने और ध्यान केंद्रित करने में व्यक्त करते हैं.

सौदेबाज़ी…
बच्चे इस नई परिस्थिति जिसने उनकी ज़िंदगी को कई तरीक़ों से प्रभावित करना शुरू कर दिया है को लेकर अपने माता-पिता से सौदेबाज़ी करने की कोशिश करते हैं.
उदाहरण के लिए वे ब्लैकमेल करते हैं कि यदि आप उन्हें अपने दोस्तों के साथ खेलने की अनुमति देते हैं, तो ही वे अपने हाथ सैनिटाइज़ करेंगे या अपने हाथों को बार-बार धोएंगे.

डिप्रेशन…
यह एक गंभीर स्थिति है और यह चौथी अवस्था है. यह बेबसी की भावना है.
हमें इस स्थिति पर काफ़ी कड़ी नज़र रखनी होगी. इस स्तिथि में बच्चा अपने माता-पिता या भाई-बहनों के साथ घुलने-मिलने से बचने की, मनोरंजन या खेल खेलने से बचने और हमेशा दूर भागने की कोशिश कर सकता है.

सुरक्षा…
पांचवीं स्थिति को सुरक्षा की भावना से समझा जा सकता है. इसके साथ बच्चों को नई दिनचर्या, सच्चाई और जीवन की स्थिति के महत्व का एहसास होता है.

पैरेंट्स के लिए गाइडलाइंस

  • बच्चों को समझाएं कि ग़ुस्से पर काबू न कर पाने कारण उन्हें मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से नुक़सान पहुंच सकता है.
  • यदि ज़रूरत पड़े, तो बच्चों के साथ उनकी चिंता और नाराज़गी दूर करने के लिए प्लानिंग करें.
  • माता-पिता को सहानुभूति भी विकसित करनी होगी, जिसका अर्थ है बच्चों के हालात समझने की क्षमता.
  • तर्कसंगत सोच के साथ सहानुभूति, सहिष्णुता और धैर्य विकसित करें और साथ ही ग़ुस्से को नियंत्रित करके संयम के साथ यह स्वीकारें कि सभी समस्याओं को तुरंत हल नहीं किया जा सकता है.
  • इससे पहले चरण में ग़ुस्से की बारंबारता और तीव्रता को कम करने में मदद मिलती है.
  • उन चीज़ों की लिस्ट बनाएं, जिससे बच्चे को ग़ुस्सा आता है.
  • फिर बच्चे को इसका रिकॉर्ड रखते हुए साप्ताहिक प्रदर्शन का विश्लेषण करने के लिए कहें.
  • समय-समय पर बच्चे के प्रशंसनीय प्रदर्शन के लिए इनाम भी दें. इससे उनका प्रोत्साहन बना रहेगा.
  • विभिन्न तरीक़ों से भी बच्चे को शांत किया जा सकता है, जैसे- अपने ग़ुस्से से ध्यान हटाकर रचनात्मक चीज़ों में ध्यान लगाना, शारीरिक गतिविधियां, योगाभ्यास, 10-100 तक की गिनती या अपने सकारात्मक पहलुओं के बारे में सोचना आदि.
  • बच्चों को इस कोरोना महामारी और लोगों पर इसके हानिकारक प्रभावों के बारे में सही जानकारी दें. इससे उन्हें ग़लत सूचना और बढ़ती चिंताओं की वजह से होनेवाली समस्याओं से बचने में मदद मिलेगी.
  • दरअसल, बच्चों की दैनिक दिनचर्या में अप्रत्याशित रूप से रुकावट आने से वे ख़ुद को ठगा-सा महसूस करते हैं. इसी मानसिकता के कारण उनके व्यवहार में बदलाव आता है.
  • बच्चों को उनके कुछ रोज़मर्रा के कार्य ख़ुद करने दें. इससे उन्हें तनाव का सामना करने में भी मदद मिलेगी.
  • बच्चों से बहुत ज़्यादा अपेक्षाएं न रखें.
  • बच्चों का दिमाग़ बहुत फ्लेक्सिबल होता है और प्रियजन के समर्थन से वे किसी भी मुश्किल हालात और जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना आसानी से कर सकते हैं
  • हमें उन्हें साथ देने और जब भी वे मदद मांगे, तो उनका मार्गदर्शन करने के लिए तैयार रहना है.
  • उनके आसपास प्यार, केयर और सुखद माहौल बनाने की ज़रूरत है.
  • उन्हें सुरक्षित महसूस कराना चाहिए.
  • अगर हम उन्हें अपनी भावनाओं को सहजता से व्यक्त करने की सहूलियत देते हैं, तो उनका तनाव, चिंता और ग़ुस्सा दूर हो जाएगा.
  • उन्हें रचनात्मक गतिविधियों, जैसे- ड्राॅइंग, पत्रिका में लिखना, गाने, डांस करने, क्राफ्ट या फोटोग्राफी के माध्यम से ख़ुद को व्यक्त करने की सुविधा दें.
    माता-पिता सदा यह याद रखें कि आप मुस्कुराएंगे, तो आपके बच्चे आपके साथ मुस्कुराएंगे… और अगर आप उन्हें ग़ुस्सा दिखाएंगे, तो यही आपको अनजाने में ही प्रतिउत्तर में मिलेगा.

ऊषा गुप्ता

Child Anger

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सलमान ख़ान के ग़ुस्से से सभी वाक़िफ़ हैं. उनके ग़ुस्से का शिकार उनकी गर्लफ़्रेंड से लेकर मीडिया तक हुई है. ऐश के साथ जब वो रिश्ते में थे तब भी शराब पीकर उनसे मारपीट व उन्हें परेशान करने की खबरें आती रहती थीं और मीडिया से हाथापाई, रिपोर्टर को धक्का देना, कैमरा तोड़ना, हिट एंड रन जैसी हरकतें भी सबने देखीं. उन पर काफ़ी केस भी चले, कुछ में क्लीन चिट मिली तो कुछ में लोग उन्हें दोशी मानते हैं. ऐसे में उन्हें बिगड़ैल होने का तमग़ा बहुत पहले ही फैंस ने दे दिया था. हालाँकि अब सलमान काफ़ी बदल चुके हैं. वो चैरिटी करते हैं और काफ़ी सोशल वर्क भी करके लोगों को प्रेरित करते हैं, लेकिन यह भी सच है कीं जितना सलमान अपनी फिटनेस को लेकर जाने जाते हैं उतना ही अपने ग़ुस्से के लिए भी.

Salman Khan

शाहरुख़ ख़ान का नाम इस लिस्ट me चौंकाने वाला ज़रूर है लेकिन कम वो भी नहीं. रोमांस के बादशाह का ग़ुस्सा भी सबने देखा है. सलमान ख़ान से उन्होंने पंगा लिया, शिरीष कुंदर को थप्पड़ जड़ दिया. आमिर ख़ान से भी उनकी नहीं पटती और IPL के दौरान ग्राउंड स्टाफ़ व सुरक्षा कर्मियों से शराब के नशे में हाथापाई पे उतर आना, यह सब साबित करते हैं कि शाहरुख़ के जितने फैंस हैं उतने ही पंगे भी हैं.

Shahrukh Khan

गोविंदा भले ही बेहद टैलेंटेड हों, बेस्ट डांसर हों, बेस्ट कमेडियन हों, भले ही लोग उन्हें हीरो नंबर वन मानते हों लेकिन उनके बिगड़े बोल और हरकतें उन्हें एरोगेंट बनाती हैं. उन्होंने भरी भीड़ में अपने एक फ़ैन को तमाचा जड़ दिया था. ये मामला वर्ष 2008 का जब गोविंदा मनी है तो हनी है फिल्म की शूटिंग कर रहे थे. गोविंदा की इस हरकत की हर तरफ़ आलोचना हुई थी.

Govinda

राम गोपाल वर्मा ने बड़ी हिट्स दी हैं और उतनी ही बड़ी फ्लॉप्स भी. रामू अपने एरोगेंट नेचर के लिए काफ़ी मशहूर हैं. पूरी इंडस्ट्री उनके घमंड और बेवजह पंगे लेने के स्वभाव से परेशान है. उनके ट्वीट्स पर भी बहुत बवाल होते हैं. उन्होंने टाइगर श्रोफ की फिट बॉडी पर भी ट्वीट किया कि वो बिकिनी बेब ज़्यादा लग रहे हैं. जिनसे उनका कोई लेना देना नहीं होता ये उनसे भी उलझ पड़ते हैं. इनका एक क़िस्सा मशहूर है जब 2009 में बैंगलूरू एयरपोर्ट लाउंज में इंडियन क्रिकेट टीम के कैप्टन महेंद्र सिंह धोनी उनके पास आए थे तो रामू ने उन्हें ना सिर्फ़ उन्हें पहचाना नाहीं बल्कि उन्हें कोई स्ट्रगलिंग एक्टर समझ कर अपनी फोटोज़ अपने दफ़्तर में भेजने को कहकर टाल दिया. बाद में रामू का बयान भी आया कि मुझे क्रिकेट की ज़्यादा समझ नहीं इसलिए धोनी को नहीं पहचाना. अब भला इतना घमंडी तो बड़ा हीरो भी नहीं जितने राम गोपाल वर्मा हैं.

Ramgopal Varma

शिरीष कुंदर फ़राह खान के पति के तौर पे ज़्यादा जाने जाते हैं और दूसरे वो अपने घमंडी और ग़ुस्सैल स्वभाव के चलते इंडस्ट्री में किसी के दिल में जगह नहीं बना पाए. यही वजह है कि कभी शाहरुख़ खान उन्हें तमाचा जड़ते हैं तो कभी संजय दत्त उन्हें पंच करते हैं.

farah khan

साजिद खान अपने ओवर कॉन्फ़िडेंस और एरोगेंस के लिए काफ़ी मशहूर हैं. वो खुद कहते हैं कि हेडलाइंस के लिए मैं विवादित बयान देता हूं. यही नहीं वो अक्सर शो होस्ट करने व रियालिटी शो में भी लोगों का बुरी तरह मज़ाक़ बनाते हैं जिसको लेकर एक घटना सबसे ज़्यादा लोगों को याद है. 2009 में एक अवार्ड फंक्शन के दौरान साजिद शो होस्ट कर रहे थे और आशुतोष गवारिकर को अवार्ड लेने के लिए स्टेज पर बुलाया गया. आशुतोष ने अपनी स्पीच में कहा कि उन्हें यह क़तई पसंद नहीं कि लोग सेलेब्स का मज़ाक़ उड़ाने को मनोरंजन समझते हैं. लोग मेहनत करके नाम कमाते हैं पर कुछ लोग मनोरंजन के नाम पर उनका मज़ाक़ उड़ाते हैं. साजिद ने जब टोका तो आशुतोष ने उन्हें shut up यानी मुंह बंद रखने को कहा aur कहा कि बीच में ना टोकें, इसके बाद फ़राह खान ने स्टेज पे आ के पूरा मामला सम्भाला. लेकिन साजिद ने बाद में कहा कि मैं एंटरटेनर हूं और लोगों का मनोरंजन करता रहूंगा, किसी में दम नहीं जो साजिद खान को shut up बोले या मुंह बंद करा सके. साजिद हमेशा ही अपने बड़बोलेपन को लेकर विवादों में रहते हैं.

sajid khan

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How To Deal With Aggressive Wife

ग़ुस्सा आना इंसानी स्वभाव का हिस्सा है. हम में से हर किसी को कभी न कभी, किसी न किसी बात पर ग़ुस्सा आता ही है. लेकिन जब यही ग़ुस्सा स्वभाव ही बन जाए, तो रिश्तों पर असर डालता है. पति-पत्नी के रिश्ते में भी कई बार ऐसा देखा गया है कि किसी एक का मिज़ाज ज़्यादा गर्म होता है, ऐसे में रिश्ते में सामंजस्य बनाए रखने के लिए दूसरे पार्टनर (How To Deal With Aggressive Wife) पर यह ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है कि वो अपने ग़ुस्सैल पार्टनर का साथ समझदारी से निभाए.

ग़ुस्से से निपटना एक चुनौती है, विशेषकर जब वो वैवाहिक जीवन में दरार उत्पन्न करने की वजह बन रहा हो. पत्नी अगर ग़ुस्सैल है, तो भी उसके साथ निभाना पड़ेगा ही, इसके लिए ज़रूरी है कि कुछ ख़ास बातों का ख़्याल रखा जाए, ताकि उसके साथ निभाना आसान हो जाए और आपके रिश्तों में कटुता भी न आए.

जानने का प्रयास करें कि किस बात से वह नाराज़ होती है- पति-पत्नी का एक-दूसरे के स्वभाव को जानना बेहद ज़रूरी है. पत्नी हर बात पर तो क्रोधित नहीं होती होगी, ज़ाहिर है बिना वजह कोई नहीं भड़कता. उन बातों और स्थितियों पर ग़ौर करें और उनका आकलन करें, जिनसे आपकी पत्नी को ग़ुस्सा आता है. अगर उन्हें समझ लिया जाए और ऐसी स्थिति उत्पन्न होने से बचाया जा सके, तो पत्नी के ग़ुस्से से सामना करने से बचा जा सकता है.

अपने व्यवहार को चेक करते रहें- हो सकता है आपकी कुछ ऐसी आदतें और व्यवहार हों, जो उसे नापसंद हो. आपके लिए उन आदतों व व्यवहार को बदलना बेशक मुमकिन न हो, पर पत्नी के सामने वे काम या बातें न ही करें, जिनसे उसके अंदर खीझ पैदा होती हो.
ग़लती मान लें- ग़लतियां सबसे होती हैं, पत्नी चाह रही है कि आप अपनी ग़लती मान लें, तो इसमें बुराई ही क्या है? इस तरह उसे भी अच्छा लगेगा और आपको भी उसके क्रोध से जल्दी छुटकारा मिल जाएगा. जब भी बात ग़लती की हो, तो अपने ईगो को एक तरफ़ रख दें. बात तुरंत संभल जाएगी.

How To Deal With Aggressive Wife

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उसकी बात सुनें- वह शायद इसलिए क्रोधित हो रही हो कि कोई भी उसकी बात सुनने को तैयार नहीं है. न ऑफिस में बॉस, न घर में बच्चे और न ही आप. इस दुनिया में अनेक लोग इसी वजह से डिप्रेशन में रहते हैं कि उन्हें सुनने-समझनेवाला कोई नहीं है. जब वह क्रोधित हो, तो उसकी स्थिति व मानसिक अवस्था को समझकर ही उसकी बात सुन लें.

शांत होने का समय दें- जब आपको लगे कि आपकी पत्नी को ग़ुस्सा आ रहा है, तो कोई प्रतिक्रिया या उसे चुप कराने की कोशिश करने की बजाय उसे शांत होने का व़क्त दें. बीच में बोलने या उसे बुरा कहने से बात और बढ़ेगी ही. हो सकता है आप उसकी बात न सुनते हों, इसलिए उसे अधिक ग़ुस्सा आता हो. वह जो भी कहना चाहती है, अगर आप उसे वह कहने का मौक़ा दें, उसकी बातों को ध्यान से सुनें, उसकी राय को महत्व दें, तो हो सकता है उसे क्रोध का सहारा न लेना पड़े. उसे स्पेस दें, ताकि उसे अपनी ग़लतियों का एहसास हो और हो सकता है, वह आपसे आकर ‘सॉरी’ भी कह दे.

मनोवैज्ञानिक स्मिता शाह का मानना है कि जिस इंसान को बहुत ज़्यादा ग़ुस्सा आता है या जो एकदम भड़क उठता है, वह उतनी ही जल्दी शांत भी हो जाता है. इसलिए अगर किसी बात पर आपकी पत्नी का पारा गरम हो गया है, तो उसे शांत होने का समय दें. हालांकि ऐसा करना मुश्किल है, पर कोशिश करें कि उस समय आपके चेहरे पर एक मुस्कान बनी रहे. फिर देखिए कैसे आपकी पत्नी शांत हो जाएगी! हो सकता है कि वह शर्मिंदगी भी महूसस करे.

धैर्य बनाए रखें- अपनी ग़ुस्सैल पत्नी के साथ निभाने के लिए आपको धैर्य बनाए रखना होगा. आपको कई बार इस बात की हैरानी भी होगी कि आख़िर इतनी छोटी-सी बात पर पत्नी को ग़ुस्सा क्यों आया या वह इस तरह से रिएक्ट क्यों कर रही है. लेकिन ऐसे में उसे रोकने या टोकने का मतलब होगा उसके ग़ुस्से को और बढ़ाना. बेहतर यही होगा कि अपना धैर्य न खोएं. हो सके तो उसके सामने से हट जाएं या दूसरे कमरे में चले जाएं. इससे कम से कम आपकी सहनशीलता तो आपका साथ नहीं छोड़ेगी.

घर से बाहर चले जाएं- अगर वह बेहद ग़ुस्से में हो, तो अच्छा यही होगा कि आप घर से बाहर चले जाएं. जब तक आप वापस लौटेंगे, वह शांत हो चुकी होगी. पर अगर उसे किसी और पर ग़ुस्सा आ रहा है, तो आप दोनों ही वॉक पर चले जाएं. इससे उसे और आप दोनों को ही रिलैक्स होने में मदद मिलेगी. आमतौर पर पत्नी को यह बात अच्छी लगती है कि उसका पति उसे सपोर्ट कर रहा है. अगर आपकी पत्नी किसी मुद्दे पर ग़लत भी हो, तो ग़ुस्से के व़क्त उसकी आंखें खोलने का या बहस करने का प्रयास न करें, बल्कि सही व़क्त का इंतज़ार करें. अगर उसे लगता है कि उसका पति उसे सपोर्ट कर रहा है, तो उसे बहुत तसल्ली होगी और उसके हार्मोंस भी संतुलित होंगे, जिससे उसे अपने क्रोध पर नियंत्रण करने में मदद मिलेगी.

इमोशनली स्ट्रॉन्ग बनें- ग़ुस्सैल पत्नी को क़ाबू में रखने और उसके साथ निभाने के लिए आपका चुप रहना बहुत ज़रूरी है. इसके लिए आपका भावनात्मक रूप से मज़बूत होना आवश्यक है. अगर आप ऐसा कर पाते हैं, तो उसे एहसास दिला सकते हैं कि उसका क्रोधित होना सिवाय ऊर्जा को ज़ाया करने के और कुछ नहीं है. लेकिन अगर वह आपको भी ग़ुस्सा दिलाने में क़ामयाब हो जाती है, तो इसका सीधा-सा अर्थ है कि उसका आपके इमोशंस पर कंट्रोल है.
मनोवैज्ञानिक आभा यादव के अनुसार, “बेहतर होगा कि उसे इमोशंस पर कंट्रोल करने की सलाह देने की बजाय अपना मुंह बंद रखें और निरंतर मुस्कुराते रहें. हो सकता है शुरू-शुरू में आपका मुस्कुराना उसे और ग़ुस्सा दिला दे, क्योंकि उसे लग सकता है कि आप उसका मज़ाक उड़ा रहे हैं या उसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, पर धीरे-धीरे आपकी यही बात उसे ग़ुस्से पर क़ाबू रखने को मजबूर कर देगी.

– सुमन बाजपेयी

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