akbar Birbal story

बीरबल की तेज़ बुद्धि और बादशाह अकबर का उनके प्रति विशेष स्नेह देख कई लोग ईर्ष्या करते थे बीरबल से. एक दिन दरबार में बादशाह अकबर बीरबल की तारीफ़ कर रहे थे, तो बादशाह ने देखा कि एक दरबारी खुश नहीं था, उन्होंने कारण पूछा, तो उस मंत्री ने कहा कि महाराज, माना बीरबल बड़ा ही तेज़ बुद्धि वाला है, लेकिन वो खुद को इतना ही होशियार समझता है और इतना ही अक्लमंद है वो, तो उसे कहिए कि वो आपके लिए बैल का दूध लेकर आए.

बादशाह ने पहले तो कहा कि भला बैल का दूध कैसे हो सकता है? फिर उस मंत्री ने कहा कि ये तो बीरबल जैसे होशियार व्यक्ति के लिए बड़ी चुनौती नहीं है, तो अकबर ने भी बीरबल की अक्लमंदी की परीक्षा लेने की सोची. अकबर बोले- बीरबल, क्या तुम मानते हो कि दुनिया में कोई कार्य असंभव नहीं?

बिल्कुल हुज़ूर, बीरबल ने कहा.

ठीक है, तो क्या तुम हमें बैल का दूध लाकर दे सकते हो?

बीरबल के पास हां कहने के अलावा कोई चारा नहीं था, लेकिन वो गहरी चिंता में थे कि आख़िर कैसे वो इस चुनौती को पूरा करें. घर आकर उन्होंने अपनी पत्नी व पुत्री से भी इसकी चर्चा की.

Akbar-Birbal Story
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रात हुई और बीरबल की पुत्री अकबर के महल के पीछे स्थित कुएं पर गई और पीट-पीटकर कपड़े धोने लगी. कपड़े पीटने की आवाज़ सुनकर बादशाह की नींद खुल गई. खिड़की से देखा कि कोई लड़की कुएं पर कपड़े धो रही है.

अकबर ने सिपाही को भेजा और उस लड़की से पूछा- इतनी रात गए कपड़े क्यों धो रही हो बच्ची?

बीरबल की पुत्री बोली, महाराज, मेरी माता घर पर नहीं है. वे कुछ महीनों से मायके में हैं. उनकी अनुपस्थिति में आज मेरे पिता ने एक बच्चे को जन्म दिया. दिन-भर मुझे उनकी सेवा-पानी करनी पड़ी इसलिए समय नहीं मिला, तो अब कपड़े धोने रात को यहां आई हूं!

लड़की की बात सुन अकबर को ग़ुस्सा आ गया और उन्होंने कहा- नादान लड़की, आदमी बच्चे पैदा करते हैं क्या? इसलिए जो सच है वो बता, तुझे माफ़ी मिल जाएगी, वर्ना सज़ा भुगतने के लिए तैयार रहना.

लड़की ने कहा, यही सच है. क्यों नहीं करते आदमी बच्चे पैदा, ज़रूर करते हैं हुज़ूर! जब बैल दूध दे सकता है, तो आदमी भी बच्चे पैदा कर सकते हैं.

ये सुनते ही अकबर का ग़ुस्सा ठंडा पड़ गया और उन्होंने पूछा- तुम हो कौन?

इतने में ही पेड़ के पीछे छिपे बीरबल ने सामने आकर कहा- ये मेरी पुत्री है महाराज.

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ओह, तो ये सब तुमने किया? बादशाह ने कहा.

ज़ी हुज़ूर, माफ़ी चाहता हूं पर और कोई रास्ता भी नहीं था अपनी बात समझाने का.

एक बार फिर अकबर ने बीरबल की अक्लमंदी और चतुराई का लोहा माना और अगले दिन दरबारियों को पूरा क़िस्सा सुनाते हुए बीरबल की खूब प्रशंसा की और उनकी पुत्री की भी, साथ ही इनाम भी दिया, जिसे देख बीरबल से ईर्ष्या रखनेवालों के मुंह लटक गए और वो जलभुन कर रह गए!

सीख: ऐसी कोई समस्या या सवाल नहीं जिसका हल या समाधान नहीं, बस शांत मन से अपने दिमाग़ का सही इस्तेमाल करने की ज़रूरत है, जिससे जलनेवाले चारों खाने चित्त हो जाएंगे और आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे!

यह भी पढ़ें: अकबर-बीरबल की कहानी: हथेली पर बाल क्यों नहीं उगते? (Akbar-Birbal Story: Why Is There No Hair On The Palm?)

एक दिन बादशाह अकबर के दरबार की कार्यवाही चल रही थी कि अचानक बादशाह को न जाने क्या सूझी और वो बीरबल के मज़े लेने की सोचने लगे. उन्होंने बीरबल से मसखरी में एक टेढ़ा सवाल पूछा कि बीरबल, बताओ ज़रा कि हथेली पर बाल क्यों नहीं उगते?

सवाल सुनते ही बीरबल की समझ में आ गया कि बादशाह मजाक करना चाहते हैं और उनके मज़े लेना चाहते हैं.

बीरबल फ़ौरन जवाब न देकर सोच में डूबे हुए थे कि बादशाह ने उनको टोका- आज क्या बात है बीरबल, वैसे तो तुम हर सवाल का जवाब तपाक से दे देते हो. आज क्या हो गया?

बीरबल ने शांत मन से कहा- कुछ नहीं हुआ जहांपनाह! मैं तो ये सोच रहा था कि किसकी हथेली पर?

अकबर अपनी हथेली दिखाते हुए बोले कि हमारी हथेली पर बीरबल.

Akbar Aur Birbal Ki Kahani
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बीरबल समझाते हुए बोले- हुज़ूर! आपकी हथेली पर बाल कैसे उगेंगे? आप दिन भर अपने हाथों से उपहार वितरित करते रहते हैं. लगातार घर्षण की वजह से आपकी हथेली पर बाल उगना मुमकिन नहीं.

ठीक है बीरबल, चलो मान लेते हैं, मगर तुम्हारी हथेली पर भी बाल नहीं है. उसका क्या कारण है? अकबर ने सोचा आज बीरबल को पूरी तरह चकरा ही देंगे और उसके खूब मज़े लेंगे.

अकबर के सवाल सुनकर दरबारियों के भी कान खड़े हो गए और उनको भी लगने लगा कि बीरबल आज बुरे फंसे और वो अब अकबर के सवाल का जवाब नहीं दे पाएंगे.

इतने में ही बीरबल ने कहा कि जहांपनाह मेरी हथेली पर बाल इसलिए नहीं क्योंकि मैं हमेशा आपसे इनाम लेता रहता हूं, तो भला मेरी हथेली पर बाल कैसे रहेंगे?

बादशाह यहीं नहीं रुके, तपाक से तीसरा सवाल कर बैठे- हमारी और तुम्हारी बात को जाने दो. हम इनाम देते हैं और तुम लेते रहते हो इसलिए हमारी हथेलियों पर बाल नहीं, लेकिन इन दरबारियों का क्या? ये तो हमसे हमेशा ईनाम नहीं लेते. ऐसे में इनकी हथेलियों पर बाल क्यों नहीं हैं?

सभी दरबारियों को लगा कि इस सवाल पर अब बीरबल फंस गए, आज उनकी हार निश्चित है, वो मन ही मन खुश हो रहे थे कि बीरबल का जवाब हाज़िर था- हुज़ूर! आप ईनाम देते रहते हैं और मैं ईनाम लेता रहता हूं और इसे देख ये सभी दरबारी ईर्ष्या में हाथ मलते रह जाते हैं, इसलिए इनकी हथेली पर भी बाल नहीं है.

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बीरबल वैसे भी अपनी तेज़ बुद्धि, हाज़िरजवाबी और वाक्पटुता के लिए प्रसिद्ध थे. हर बार की तरह इस बार भी बीरबल ने यह साबित कर दिखाया और बीरबल के जवाब से अकबर ख़ुशी से ठहाका लगा उठे, वहीं बाक़ी दरबारी फिर हाथ मलते रह गए.

सीख: ऐसा कोई सवाल नहीं और ऐसी कोई समस्या नहीं, जिसका हल नहीं हो. बस अपनी बुद्धि को हमेशा तेज़ और मन को साफ़ रखें. हाज़िरजवाबी के लिए दिमागी रूप से सतर्क होना बेहद ज़रूरी है. कभी भी कठिन से कठिन प्रश्न देख बिना कोशिश किए हथियार न डालें!

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