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जानिए सीने में जलन के लक्षण, कारण, उपचार और परहेज (Heartburn Causes, Symptoms, Diagnosis, Treatment and Prevention)

सीने (Chest) में जलन (Burning) व दर्द (Pain), खट्टी डकार आना, उल्टी और पेट में भारीपन महसूस होना जैसी समस्याएं हार्टबर्न (Heartburn) की ओर इशारा करती हैं. हार्टबर्न को मेडिकल भाषा में गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिज़ीज़ (Gastroesophageal Reflux Disease) (जीईआरडी) कहा जाता है. हालांकि कई बार लोग इसके लक्षणों को हृदय से संबंधित परेशानियों से जोड़कर देखते हैं, लेकिन सही मायने में हार्टबर्न का हृदय की परेशानियों से कोई संबंध नहीं है. हार्टबर्न वैसे तो कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं है, लेकिन इसे नज़रअंदाज़ भी नहीं किया जा सकता. चलिए जानते हैं, आख़िर किन वजहों से होता है हार्टबर्न और कैसे इससे निजात मिल सकती है?

Heartburn

क्या है हार्टबर्न?
हार्टबर्न की समस्या पेट में बनने वाले एसिड की वजह से होती है. अगर आप एक ही बार में आवश्कता से अधिक भोजन करते हैं, तो आपके पेट और इसोफेगस (भोजन नली) के बीच एक वाल्व द्वार बन जाता है. जब यह वाल्व पेट में बनने वाले एसिड को इसोफेगस की तरफ़ धकेलता है तो हार्टबर्न की परेशानी शुरू हो जाती है. ऐसी स्थिति में कई बार मरीज़ को सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगती है. हालांकि यह अपेक्षाकृत मामूली स्थिति होती है, जिसे एंटीएसिड दवाओं से कंट्रोल किया जा सकता है या फिर खान-पान की आदतों में सुधार लाकर भी इस स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है.

Heartburn prevention
कारण
हार्टबर्न की समस्या आमतौर पर अपच से जुड़ी होती है और इसके लिए हमारे खान-पान में शामिल कई चीज़ें ज़िम्मेदार हो सकती हैं, जैसे
1. मसालेदार भोजनप प्याज़ का सेवन
2. खट्टे व अम्लीय पदार्थप टमाटर से निर्मित चीज़ें
3. ऑयली और फ्राइड फूड अत्यधित वसा वाली चीज़ें
4. पुदीने का उपयोगप चॉकलेट का सेवन प अल्कोहल
5. कार्बोनेटेड ड्रिंक्सप कॉफी या कैफीन युक्त पेय पदार्थप मोटापा
6. गर्भावस्था
डॉक्टर से कब मिलें?
अगर हार्टबर्न की समस्या कभी-कभी हो तो इससे स्वास्थ्य को कोई गंभीर ख़तरा नहीं होता है, लेकिन अगर आपको बार-बार सीने में दर्द या जलन की समस्या हो रही है तो इसे नज़रअंदाज़ न करें. इसके अलावा निम्न लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से संपर्क करें.
1. हफ़्ते में दो से अधिक बार हार्टबर्न होने पर.
2. अगर दवा लेने के बावजूद इसके लक्षण कम न हों.
3. खाद्य पदार्थों को खाने या निगलने में कठिनाई होने पर.
4. लगातार उल्टी और मितली जैसा महसूस होने पर.
5. भूख न लगने या खाने में दिक्कत होने व वज़न घटने पर.

Heartburn Causes
करें परहेज़ 
अपने डायट और लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव करके आप हार्टबर्न की समस्या से आसानी से निजात पा सकते हैं. अगर आप हार्टबर्न की समस्या को बढ़ाने वाले कारणों के बारे में जानते हैं तो उनसे बचने की कोशिश करें. इसके अलावा अपने डेली रूटीन में कुछ तरीक़ों को अपनाकर आप इस समस्या को कंट्रोल कर सकते हैं.
 न करें अम्लीय पदार्थों का सेवन
खट्टे फल, टमाटर, प्याज़, फैटी फूड और कैफीन जैसी चीज़ों का सेवन करने से एसिडिटी की समस्या हो सकती है और इन चीज़ों का अत्यधिक सेवन हार्टबर्न का कारण भी बन सकता है. इसलिए बेहतर यही होगा कि आप इन चीज़ों का सेवन बहुत सोच-समझकर करें.
भोजन को अच्छे से चबाएं
खाना खाते समय इस बात का विशेष ख़्याल रखना चाहिए कि हर एक निवाले को ठीक तरह से चबाकर खाया जाए, क्योंकि जो लोग बिना चबाए खाने को जल्दबाज़ी में खाते हैं उनमें पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं. आगे चलकर ये समस्याएं हार्टबर्न का कारण बनती हैं. इनके अलावा कम पानी पीने से भी सीने में जलन हो सकती है.

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शराब और सिगरेट से तौबा 
स्मोकिंग करना और शराब का अत्यधिक सेवन करना हार्टबर्न की समस्या को जन्म देता है. इतना ही नहीं, यह पाचनतंत्र और शरीर के आंतरिक अंगों को प्रभावित कर अन्य गंभीर रोगों को भी जन्म दे सकता है. ऐसे में बेहतर यही होगा कि आप शराब और सिगरेट से दूरी बना लें.
अत्यधिक तनाव से बचें
हार्टबर्न के प्रमुख कारणों में से एक कारण तनाव भी है. अत्यधिक तनाव लेने की आदत या फिर डिप्रेशन आपको हार्टबर्न की समस्या दे सकता है, इसलिए तनाव मुक्त रहने के लिए योग करें और मेडिटेशन का सहारा लें. टाइट कपड़े न पहनेंअत्यधिक फिटिंग वाले टाइट कपड़े पहनने से हार्टबर्न की समस्या हो सकती है. टाइट कपड़ों के चलते कई बार पेट में बनने वाला एसिड फिर से भोजन नली में प्रवेश कर जाता है, जिसके कारण हार्टबर्न हो सकता है और आप सीने में जलन महसूस कर सकते हैं.
ग़ौर करें इन बातों पर
1. कई बार लोग हार्ट अटैक के लक्षणों को भी हार्टबर्न समझने की ग़लती कर बैठते हैं और समय पर इलाज नहीं कराते, जिसके चलते वो मौत के शिकार हो जाते हैं.
2.कुछ डकारों के बाद अगर स्थिति सुधर जाती है तो कोई बात नहीं, अन्यथा यह सुनिश्‍चित ज़रूर करें कि सीने में दर्द आपको पेट में गैस के कारण था या किसी और वजह से.
3. सीने में अगर असहजता बकरार रहे तो समय गवाएं बगैर तत्काल किसी डॉक्टर से संपर्क करें, वरना आगे चलकर स्थिति और भी गंभीर हो सकती है.
4 . एंटी एसिड दवा लेने के 20 मिनट बाद भी आराम न मिले तो यह हार्ट अटैक का लक्षण हो सकता है. ऐसे में मरीज़ को ईसीजी कराने के लिए तत्काल किसी नज़दीकी अस्पताल जाना चाहिए.
5. एसिड इनडाइजेशन के कारण सीने में होने वाले दर्द को कई लोग हार्ट अटैक समझकर भ्रमित हो जाते हैं. ऐसे में किसी कार्डियोलॉजिस्ट से मिलकर यह सुनिश्‍चित करें कि आपमें दिखाई देने वाले लक्षण गंभीर तो नहीं हैं.

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जानें आख़िर कितनी देर तक जीवित रहते हैं शुक्राणु ( How Long does Sperms Survive)

How Long does Sperms Survive

गर्भधारण करना एक बेहद जटिल प्रक्रिया है. कुछ तो आसानी से गर्भवती हो जाती हैं, तो कुछ को महीनों तक अपने ओवुलेशन पर नज़र रखनी पड़ती है. लेकिन प्रेग्नेंसी के लिए सिर्फ़ महिला का शरीर ज़िम्मेदार नहीं होता. महिला के शरीर में पुरुष का शुक्राणु कितने समय तक जीवित रहता है, इससे भी काफ़ी फ़र्क़ पड़ता है. शुक्राणुओं की यात्रा और जीवनकाल (How Long does Sperms Survive) के बारे में मोनिका अग्रवाल विस्तार से जानकारी दे रही हैं.

How Long does Sperms Survive

सेक्स के दौरान पुरुष के वीर्य से
लाखों-करोड़ों शुक्राणु बाहर निकलते हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ़ एक-दो ही ऐसे होते हैं जो महिला के अंडों के साथ मिलकर प्रजनन की प्रक्रिया को पूरा करते हैं. अधिकांश लोग स्पर्म के बारे में बहुत ज़्यादा नहीं जानते हैं, जबकि शुक्राणु से जुड़ी कई ऐसी कई बाते हैं जिसके बारे में आपको पूरी जानकारी होनी चाहिए.

महिला के शरीर के अंदर
एक बार जब शुक्राणु महिला के वेज़ाइना में चले जाते हैं तो वे शरीर में 24 से 48 घंटों तक जीवित रह सकते हैं. हालांकि बहुत से शुक्राणु महिला के शरीर में घुसते ही नष्ट हो जाते हैं.

ओवेलुशन के दौरान 3-5 दिन तक जीवित रह सकते हैं
अमेरिकन प्रेग्नेंसी एसोसिएशन के अनुसार, शुक्राणुओं को अगर अनुकूल माहौल मिले तो वे ज़्यादा समय तक जीवित रह सकते हैं. अगर जगह गर्म और नम हो तो वे 3 से 5 दिन तक जीवित रह सकते हैं. शुक्राणुओं को नम माहौल की आवश्यकता होती है. चूंकि ओवेलुशन के दौरान महिला का वेजाइना और गर्भाशय नम और गर्म होता है इसलिए उन दौरान शुक्राणु महिला के शरीर में ज़्यादा समय के लिए जीवित रहते हैं. अगर सर्विकल फ्लूइड कम हो तो शुक्राणु जल्दी मर जाते हैं.

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शरीर के बाहर
चूंकि मानव शरीर गर्म और मॉइस्ट होता है, इसलिए शुक्राणु ज़्यादा समय तक जीवित रहते हैं, लेकिन बात जब कपड़ों और अन्य जगहों की हो तो शुक्राणुओं का जीवनकाल बहुत छोटा होता है. शरीर के बाहर ये कुछ मिनटों या ज़्यादा से ज़्यादा दो घंटे तक जीवित रहते हैं. चूंकि वीर्य जल्दी सूखता है इसलिए नमी के कमी के कारण शुक्राणु मर जाते हैं.

जानें ये बातें


शुक्राणुओं की संख्याः एक स्खलन यानी इजैकुशन में अनुमानित 280 मिलियन शुक्राणु होते हैं.

कम स्पर्म काउंट और फर्टिलिटी  जब शुक्राणुओं की संख्या 10 मिलियन से कम हो जाती है, तो प्रजनन क्षमता कम हो जाती है. नैशनल इंफर्टिलिटी एसोसिएशन के अनुसार, अगर शुक्राणु की संख्या 40 मिलियन और 300 मिलियन के बीच है तो पुरुष सामान्य श्रेणी में आता है.

स्पर्म बनने में लगने वाला समयः  वैसे तो पुरुषों के अंडकोष में हमेशा शुक्राणु बनते रहते हैं, लेकिन किसी भी स्पर्म को पूरी तरह परिपक्व होने और प्रजनन के लिए पूरी तरह तैयार होने में लगभग 46 से 72 दिनों तक का समय लग जाता है.

स्वस्थ स्पर्मः जितने भी स्पर्म शरीर से बाहर निकलते हैं उनमें से सभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं होते हैं. लगभग 90% स्पर्म ख़राब होते हैं. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पुरुष में कोई कमी है बल्कि यह सामान्य बात है. वास्तव में जब ये स्पर्म अंडे की तरफ़ जाते हैं तो उस दौड़ में कई स्पर्म पीछे ही छूट जाते हैं, स़िर्फ हेल्दी स्पर्म ही अंडों तक पहुंच पाते हैं.

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