Anniversary

कल दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की शादी की पहली सालगिरह है. दीपवीर अपनी फर्स्ट एनीवर्सरी को यादगार बनाने का कोई मौक़ा नहीं चूक रहे. रणवीर तो स्मार्ट दिखने के लिए अपने चेहरे को इस कदर ग्लो कर रहे हैं कि दीपिका ने उनकी क्लोइंग सेशन की तस्वीर तक शेयर की और मज़ेदार कमेंट भी किया.

 Deepika Padukone And Ranveer Singh

आज दीपिका और रणवीर दोनों ही अपने परिवार के साथ सबसे पहले तिरुपति बालाजी के लिए रवाना होंगे. वहां पर वे पद्यावती मंदिर के भी दर्शन करेंगे. इसके बाद जोड़ा परिवार सहित अमृतसर में स्वर्ण मंदिर जाएंगे और आशीर्वाद लेंगे. वैसे भी इन दिनों गोल्डन टेेंपल की आभा देखते ही बन रही है, क्योंकि गुरुनानक देव जी का 550 वां प्रकाश पर्व सब जगह की तरह यहां पर भी ख़ूब धूमधाम से मनाया गया था. दीपवीर का प्यार और साथ हमेशा ही उनके साथ-साथ सभी को ख़ुशियों से भर देता है. दोनों की जोड़ी देख ऐसा लगता है रब ने बड़ी ़फुर्सत से इस जोड़ी को बनाया है.

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उनकी शादी भी मानो कल ही बात लगती है, जब पिछले साल 14-15 नवंबर को इटली के लेक कोमो में कोंकणी व सिंधी रीति-रिवाज़ के साथ शादी हुई थी. फिल्म इंडस्ट्री की अब तक की सबसे ख़ास व यादगार शादियों में से एक था दीपवीर का विवाह. उनकी मैरिज को एक साल कब बीत गया पता ही नहीं चला. सच, सफल फिल्में, जैसे- रामलीला, बाजीराव मस्तानी, पद्मावत की यह आदर्श जोड़ी फिल्मी पर्दे के साथ-साथ जीवन के पर्दे पर भी प्यारी व ज़बर्दस्त जोड़ी है. दोनों का प्यार व साथ यूं ही बना रहे… सालगिरह की ढेर सारी बधाइयां…

 

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शादी-ब्याह के अलावा अभिनय के दृष्टिकोण से भी पति-पत्नी दोनों ही एक-दूसरे को टक्कर दे रहे हैं. दीपिका एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मीजी के जीवन पर आधारित छपाक फिल्म कर रही हैं. इसकी तस्वीरें, शूटिंग सभी को देखते-सुनते इसके बेहतरीन होने का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. उस पर निर्देशिका मेघना गुलज़ार जैसी सधी हुई शख़्सियत हो, तो सोने पे सुहागा. वहीं रणवीर अपनी फिल्म एटीथ्री जो भारत द्वारा साल 1983 में पहली बार वेस्टइंडीज़ को फाइनल में हराकर जीती गई वर्ल्ड कप पर आधारित है. उस समय कपिल देव भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान थे. 83 फिल्म में रणवीर सिंह कपिल देव की भूमिका निभा रहे हैं. इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत भी की है. कल उन्होंने कपिल देव के फेवरेट शॉट नटराज को रिक्रिएशन करके उसकी तस्वीर भी शेयर की थी, जिसे लोगों ने ख़ूब पसंद किया था. फिल्म की तस्वीरें, लोगों व क्रिकेर्ट्स के रिस्पॉन्स को देखते हुए इसके लाजवाब होने का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. उस पर कपिल देव की पत्नी की भूमिका में रणवीर सिंह की बेटर हाफ यानी दीपिका पादुकोण ही फिल्म में उनकी पत्नी की भूमिका निभा रही हैं यानी ऑफ और ऑन स्क्रिन दोनों में दीपवीर की जोड़ी हिट ही नहीं, बल्कि सुपरहिट है. हैप्पी वेडिंग एनीवर्सरी!…

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आज़ाद हिंद फौज बनाकर पूरी दुनिया को अपनी साहस और बल का परिचय देनेवाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस को उनकी जयंती पर मेरी सहेली की ओर से शत-शत नमन! पिता चाहते थे कि बेटा अफसर बने, लेकिन नेताजी को अंगे्रज़ों की ग़ुलामी करना मंज़ूर नहीं था, इसीलिए बना ली अपनी ही सेना और नाम रखा आज़ाद हिंद फौज.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पिता बेटे को आईसीएस (भारतीय सिविल सेवा) का अफसर बनाना चाहते थे. इसकी तैयारी के लिए सुभाष लंदन चले गए. 1920 में सुभाष ने आईसीएस की परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया, लेकिन अंग्रेज़ों की ग़ुलामी करना उन्हें मंज़ूर नहीं था और उन्होंने आज़ाद हिंद फौज का गठन कर अंग्रेज़ों से लोहा लेने की ठान ली.

स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता सुभाष का जन्म 23 जनवरी, 1897 को ओडिशा के कटक में जानकीनाथ बोस और प्रभावती देवी के यहां हुआ था. उन्होंने तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा का नारा दिया, जो भारतीय युवाओं में एक नया जोश भर गया. सुभाष के पिता प्रतिष्ठित सरकारी वकील थे. वह बंगाल विधानसभा के सदस्य भी रह चुके हैं और ब्रिटिश सरकार ने उन्हें रायबहादुर के किताब से भी नवाज़ा था.

अंग्रेज़ी सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलन चलाने के कारण सुभाष को कुल 11 बार जेल जाना पड़ा. सबसे पहले उन्हें 16 जुलाई, 1921 को छह महीने जेल में रहने की सज़ा सुनाई गई थी. 1930 में जब सुभाष ने जेल से ही चुनाव लड़ा और वह कोलकाता के महापौर चुने गए, जिसके चलते अंग्रेज़ों को उन्हें जेल से रिहा करना पड़ा.

द्वितीय विश्‍वयुद्ध के दौरान जापान की हार के बाद सुभाष ने रूस से सहायता मांगने का विचार किया. 18 अगस्त 1945 को जब वह मंचूरिया की ओर जा रहे थे, तभी उनका विमान लापता हो गया और वह फिर कभी नजर नहीं आए. 23 अगस्त, 1945 को टोकियो रेडियो ने बताया कि सैगोन आते व़क्त 18 अगस्त, 1945 को एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें नेताजी गंभीर रूप से जल गए और ताइहोकू सैन्य अस्पताल में उन्होेंने दम तोड़ दिया. हालांकि इस घटना की पूरी तरह से कभी पुष्टि नहीं हो पाई और उसका रहस्य अभी तक बरकरार है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी को ट्विटर पर श्रद्धांजलि दी.

रवि शंकर प्रसाद ने भी ट्विटर पर सुभाष जी को नमन किया.

चंद्र बाबू नायडू ने भी नेताजी को ट्विटर पर श्रद्धांजलि दी.

नेताजी अमर हैं, उनकी कीर्ति अमर है. उन्होेंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया. ऐसे महान देशभक्त को शत-शत नमन!

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14 जनवरी 1926 में अविभाजित भारत के ढाका में एक बच्ची का जन्म हुआ. तब किसे पता था कि आगे चलकर वो नन्हीं परी महाश्‍वेता देवी बन जाएगी, जिनकी रचनाएं समाज के लिए आईने का काम करेंगी. इस महान लेखिका और समाज सेविका को मेरी सहेली की ओर से शत-शत नमन. महाश्‍वेता देवी पहले एक स्कूल में पढ़ाती थीं, लेकिन उन्हें लगा कि इससे काम नहीं चलेगा, इसलिए आगे चलकर उन्होंने पढ़ाना छोड़ दिया और अपना पूरा टाइम लेखन और समाज सेवा में लगा दिया.

महाश्वेता देवी की कलम की बेबाकी ने उन्हें समाज के एक ऐसे हिस्से का मसीहा बना दिया, जिनका अस्तित्व न के बराबर रहा. अपनी कलम से उन्होंने ग़रीबों के स्थिति का रेखाचित्र खींचा और बड़े तबके तक पहुंचाया. महाश्‍वेता को लोग मां कहकर बुलाते थे. उनकी कई ऐसी रचनाएं थीं, जिन्होंने समाज को ये सोचने पर मजबूर कर दिया. अपने अंतिम दिनों में महाश्‍वेता कई बीमारियों से परेशान थीं और अंत में जुलाई के महीने में साल 2016 में उन्होंने इस संसार को अलविदा कह दिया. भले ही वो अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी कृतियां पग-पग पर लोगों को राह दिखाती रहेंगी.

इनकी कई रचनाओं पर फ़िल्म भी बनाई गई. इनके उपन्यास रुदाली पर कल्पना लाज़मी ने रुदाली तथा हज़ार चौरासी की मां पर इसी नाम से 1998 में फिल्मकार गोविन्द निहलानी ने फ़िल्म बनाई.

महाश्वेता देवी ने आदिवासियों के लिए बहुत काम किया. इसमें बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात के आदिवासी आते थे. उन्होंने किसानों की ज़मीन को बड़े लोगों के हाथ बेचने का विरोध किया. कलम के साथ-साथ वो ख़ुद भी समाज के हर तपके लिए काम करती रहीं.

महाश्वेता देवी को 1979 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1986 में पद्मश्री, 1997 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. ज्ञानपीठ पुरस्कार इन्हें नेल्सन मंडेला के हाथों दिया गया. इस पुरस्कार में मिले 5 लाख रुपये इन्होंने बंगाल के पुरुलिया आदिवासी समिति को दे दिया था. उनकी यही आदत उन्हें लोगों में अमर कर गई.

श्वेता सिंह