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सफल अरेंज मैरिज के एक्सक्लूसिव 15 मंत्र (15 Exclusive Relationship Mantra For Successful Arrange Marriage)

दादी-नानी या माता-पिता के समय की अरेंज मैरिज की सफलता का फ़ॉर्मूला आज के दौर में फिट नहीं बैठता. मॉडर्न युग में क्या हैं सफल अरेंज मैरिज के मंत्र, आइए जानते हैं. कहते हैं शादियां स्वर्ग में तय होती हैं और हर किसी के लिए कोई न कोई जीवनसाथी ज़रूर होता है. पर आज की युवापीढ़ी इस कथन में अधिक विश्‍वास नहीं करती. वह तो लव मैरिज को अधिक महत्व देती है. लेकिन मेट्रो सिटीज़ व खुले विचारोंवाले परिवारों को छोड़ दें, तो आज भी ज़्यादातर शादियां अरेंज ही होती हैं और वैवाहिक जीवन भी सफल होता है. तो आइए, सफल अरेंज मैरिज के इन मंत्रों को जानें.

Relationship Mantra

1. शादी को सफल बनाने का मूल मंत्र है- प्यार, विश्‍वास, समझौता और सामंजस्य. धीरे-धीरे एक-दूसरे को समझें, एडजस्ट होने के लिए व़क़्त और स्पेस दें. फिर देखें, किस तरह रिश्तों में मज़बूती आती है.

2. अरेंज मैरिज में दोनों पार्टनर एक-दूसरे के लिए अजनबी होते हैं. अतः घबराहट होना स्वाभाविक है. यदि आप भी ऐसा महसूस करती हैं, तो कारण जानने की कोशिश करें. कई बार किसी अनजान व्यक्ति के साथ रहने की कल्पना, नए परिवार के साथ तालमेल बैठाने का डर, वहां के तौर-तरीक़ों की चिंता आदि से मन डरता है. मन की घबराहट को पार्टनर के साथ शेयर करें. उसके ज़रिए परिवार के बारे में जानने की कोशिश करें. पार्टनर के साथ सहज हो जाने पर परिवार के साथ सामंजस्य बैठाने में परेशानी नहीं होगी.

3. अरेंज मैरिज का अर्थ है- ज़्यादा ज़िम्मेदारियां और ज़्यादा अपेक्षाएं. दोनों ही पार्टनर्स पर उन सारी बातों पर खरा उतरने का दबाव रहता है. दबाव ज़रूर लें, लेकिन इतना नहीं कि आपसी तालमेल ही गड़बड़ाने लगे.

4. जरूरी नहीं कि पार्टनर को आपकी हर पसंद-नापसंद में रुचि हो या आप दोनों के विचार एक जैसे हों. कभी-कभी विपरीत स्वभाववाले पार्टनर्स भी बहुत ख़ुश रहते हैं.

5. हो सकता है नए परिवार की सोच आपके जीवन मूल्यों को सही न माने और आपको लगातार बताया जाए कि इस परिवार में ऐसा ही होता है. निश्‍चय ही ऐसे माहौल में आप परेशान हो जाएं, घुटन भी हो, पर रिलैक्स! शादी में सामंजस्य व अनुकूलता भी होती है. ऐसी स्थिति में पार्टनर से सही शब्दों के चुनाव के साथ सौम्य लहजे में बात करें. उन्हें अपनी उलझन बताएं, ताकि परिवार के किसी भी सदस्य को नाराज़ किए बिना समस्या का हल निकल आए.

6. शुरू-शुरू में पार्टनर या परिवार के सदस्यों की किसी भी बात, कमेंट या व्यवहार को दिल पर न लें. न ही जैसे को तैसा वाली पॉलिसी अपनाएं, बल्कि जो लोग परेशानियां पैदा करते हैं, उनसे संभलकर रहें. सूझबूझ से स्थिति को संभालें. निश्‍चय ही ऐसा व्यवहार आप दोनों को ख़ुशियां देगा. एक-दूसरे के क़रीब लाएगा.

7. परिवार में होनेवाली हर छोटी-छोटी बात की शिकायत पार्टनर से न करें, न ही बात-बात पर आंसू बहाएं. याद रहे, वो भी आपकी तरह ही ज़्यादा नहीं, तो थोड़ी-बहुत दुविधा से गुज़र रहा है.

8. प्यार एक ऐसी भावना है, जो हर मुश्किल को आसान बना देती है. अरेंज मैरिज में भी कभी तो देखते ही प्यार हो जाता है और कभी साथ चलते-चलते प्यार हो जाता है, वो भी ऐसा कि जीवन के हर आंधी-तूफ़ान से जूझने की ताक़त बन जाता है. प्यार देंगे, तो प्यार मिलेगा भी.

9. प्यार की नींव है विश्‍वास. पार्टनर पर विश्‍वास करें और उनके भरोसे को भी बनाए रखें. धैर्य से काम लें. पार्टनर या परिवार के सदस्यों की ग़लतियों के प्रति क्षमाशील बनें. जो बीज हम बोते हैं, वही फल हमें मिलता है.

10. शादी एक कमिटमेंट है, जहां आप अपनी बेफ़िक़्र दुनिया से निकलकर ज़िम्मेदारी, कमिटमेंट, त्याग, समझौतों के भंवर में घूमते रहते हैं. लेकिन यही बातें विवाह को मज़बूत बनाती हैं.

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Relationship Mantra

11. हो सकता है आप अपने नए परिवार के मुक़ाबले आर्थिक रूप से ज़्यादा संपन्न परिवार से हों, ज़्यादा स्मार्ट या हर तरह से बेहतर हों. लेकिन याद रहे, शादी किसी मुक़ाबले का प्लेटफॉर्म नहीं है. अतः तुलनात्मक विचारधारा को आड़े न लाएं. अब यह परिवार आपका है, इसे बेहतर बनाने में सहयोग दें.

12. रिश्तों को मज़बूत करने के लिए संवाद सबसे मुख्य है. कभी भी अपने पार्टनर से झूठ न बोलें. एक झूठ आपको मुसीबत में डाल सकता है. एक बार आपका झूठ पकड़ा गया, तो फिर से वह विश्‍वास पाना असंभव हो जाता है.

13. विवाह की सफलता के लिए दोनों परिवारों को जोड़कर रखना भी आपका व आपके पार्टनर का काम है. यह तभी संभव है जब दोनों परिवारों के प्रति स्नेह व आदर का समान भाव हो.

14. रिश्तों को बनाए रखने में मुस्कुराहट बड़ा काम करती है. आप ख़ुद भी आनंदित होते हैं और दूसरों का मन भी जीत लेते हैं.

15. इन सारी बातों के अलावा कुछेक व्यक्तिगत बातें भी हो सकती हैं, जिन्हें अपने ढंग से सुलझाकर विवाह को सफल बनाया जा सकता है.

– प्रसून भार्गव

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क्या होता है जब प्रेमिका बनती है पत्नी? (After Effects Of Love Cum Arrange Marriage)

शादी (Marriage) से पहले की दुनिया किसी भी लड़के-लड़की के लिए किसी हसीन ख़्वाब से कम नहीं होती है. तब उनका दिल केवल सतरंगी सपने ही देखना चाहता है. हक़ीक़त का सामना करने की चाह उनके मन में होती ही नहीं. उस समय तो साथी से वे जितनी बार भी मिलते हैं, वह ख़ास ही लगता है. न तो तब उसमें कोई कमी नज़र आती है और न ही उसके असली रूप से रू-ब-रू होने का मौक़ा मिलता है, क्योंकि जब भी वे दोनों एक-दूसरे से मिलते हैं, तो अच्छे होने का आवरण ओढ़े रहते हैं.

 Love Cum Arrange Marriage

वैसे भी शादी से पहले प्रेमी-प्रेमिका एक-दूसरे से कम समय के लिए ही मिल पाते हैं, पर शादी के बाद दोनों साथ में अधिक समय बिताते हैं, तो कुछ भी छिपा पाना असंभव हो जाता है और सारी परतें एक-एक करके खुल जाती हैं. इसलिए दोनों को लगता है कि शादी के बाद उनका साथी बदल गया है. एक-दूसरे को जानने-समझने का अवसर शादी के बाद ही उन्हें मिल पाता है. शादी से पहले की बेफ़िक्री और मौज-मस्ती पर ज़िम्मेदारियों का बोझ आ पड़ता है.

सामने आता है असली रूप

विवाह के बाद अगर बारिश में भीगने से बीमार होने का डर सताने लगता है, तो एक-दूसरे को कोर्टशिप के समान फूल, बुके, गिफ्ट आदि देना फ़िज़ूलख़र्ची लगने लगती है. शादी होते ही उन्हें अपने इस रिश्ते को संभालने का एहसास घेर लेता है, जबकि पहले तो यह ख़्याल तक नहीं आता कि संबंध टूट गया, तो क्या होगा, क्योंकि तब किसी तरह की वचनबद्धता से वे बंधे नहीं होते हैं, स़िर्फ एक रोमांचक दौर का आनंद उठा रहे होते हैं.

अपोलो हॉस्पिटल के मनोवैज्ञानिक डॉ. संदीप वोहरा के अनुसार, डेटिंग के दौरान प्रेमी-प्रेमिका को हर चीज़ में रोमांच व एक्साइटमेंट नज़र आता है. उनके अंदर नयापन हासिल करने की चाह भी रहती है. उस समय उन्हें एक-दूसरे का व्यवहार कभी खटकता भी हो, तो भी वे प्यार में डूबे होने के कारण उसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं. हालांकि हक़ीक़त तो यह है कि दोनों की कोशिश ही यह रहती है कि साथी पर उनका अच्छा प्रभाव पड़े, इसलिए जिस तरह वे अपने सजने-संवरने पर ध्यान देते हैं, वैसे ही अपनी बातों में मिठास घोले रहने का प्रयत्न करते हैं. लेकिन विवाह के बाद हमेशा ही अच्छे बने रहना संभव नहीं हो पाता है, बल्कि नज़दीकियां उन्हें अपना असली स्वभाव सामने लाने पर विवश कर देती हैं और फिर शुरू हो जाता है, तानों-उलाहनों व एक-दूसरे को बदलने व अपनी इच्छा थोपने का दौर.

प्रसिद्ध नृत्यांगना शोवाना नारायण कहती हैं, “बहुत ही कम कपल इस बात को समझते हैं कि जब प्रेमी-प्रेमिका पति-पत्नी बन जाते हैं, तो बहुत-सी चीज़ें बदल जाती हैं. यह समझना आवश्यक है कि जीवन केवल फूलों की बगिया ही नहीं है, उसमें कांटे भी होते हैं. वैसे भी हमेशा रोमांस करते रहने से बोरियत पैदा होने लगती है, इसलिए बहुत ही ईमानदारी से अपने साथी को वह जैसा है, उस रूप में उसे अपना लेना चाहिए.”

उम्मीदों पर खरा न उतरना

प्रेमी-प्रेमिका शादी होते ही एक-दूसरे को अपनी सुविधा व पसंद के अनुसार बदलने में जुट जाते हैं. जब साथी उनकी उम्मीदों व अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता, तो तनाव उन्हें घेर लेता है और वे एक-दूसरे पर दोषारोपण करने लगते हैं.

डॉ. वोहरा कहते हैं कि जब पति प्रेमिका से पत्नी बनी की तुलना करने लगता है, तो उसे लगता है कि वह ऐसी तो नहीं थी. पहले उसकी जिन बातों पर वह फ़िदा रहता था, अब उनको लेकर ही वह नाराज़ रहने लगता है. वैसे भी पति बनते ही उसके अंदर पत्नी पर अधिकार जमाने की भावना जन्म ले लेती है. वह किससे बात करती है, किससे मिलती है, सब जानने की उत्सुकता उसको एक प्रहरी बनने को उकसाती है. ऐसे में जब वह उसकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती, तो मन-मुटाव उत्पन्न होते देर नहीं लगती. फिर तो सारा रोमांस केवल बीते दिनों की याद बनकर रह जाता है.

टेलर मेड भूमिका

अधिकार भावना के आते ही पति पार्टनर को अपने हिसाब से चलने के लिए बाध्य करने लगता है. डेटिंग के समय साथी को प्रभावित करने की कोशिश भी लगभग समाप्त हो जाती है. पहले उनके अंदर स़िर्फ प्रेमी या प्रेमिका को अपना बनाने की चाह होती है और वे अपने मन में गढ़ी साथी की कल्पनाओं के आधार पर ही व्यवहार करते हैं. अपनी अपेक्षाओं के अनुसार वह साथी की छवि बना लेते हैं, लेकिन शादी होते ही वह छवि जब टूटती है, तो वे मानने लगते हैं कि उनका पार्टनर बदल गया है.

असल में विवाह होते ही वे एक टेलर मेड भूमिका निभाने को मजबूर हो जाते हैं. प्रेमिका पत्नी बनते ही एक गृहिणी का रूप ले लेती है, जिसकी वजह से उसके पूरे व्यक्तित्व में बदलाव आ जाता है. कामकाजी महिलाओं को घर के

साथ-साथ नौकरी के दायित्वों को पूरा करना होता है. ऐसे में हाथों में हाथ डाले देर रात घूमना तो संभव नहीं हो पाता है, न ही ज़िम्मेदारियां उन्हें ऐसा करने देती हैं. उन्हें एक रूटीन के साथ जीना ही होता है, फिर शादी से पहले के रोमांस के पल या घंटों एक-दूसरे की आंखों में आंखें डाले बैठे रहना बचकाना लगने लगता है.

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 Love Cum Arrange Marriage
नियंत्रण की चाह

कई बार जिस प्रेमी को पहले प्रेमिका का अलग अंदाज़ आकर्षित करता था, वही अंदाज़ नज़दीकियों के बढ़ने के साथ अखरने लगता है. ‘तुम ऐसी होगी, मैंने कभी सोचा भी नहीं था…’ जैसे जुमले पति की ज़ुबान से फिसलने लगते हैं. फिर वह साथी पर हावी होने, अपनी मनमानी जताने की कोशिश करता है. पत्नी किसी से हंसकर बात कर लेती है या घर आने में उसे देर हो जाती है, तो सवालों के साथ-साथ उस पर शक करने में भी पति को हिचकिचाहट नहीं होती. यह बदला व्यवहार शादी को युद्ध क्षेत्र में बदल देता है और उन्हें एक-दूसरे से शादी करने का अफ़सोस होने लगता है.

धीरे-धीरे ये छोटी-छोटी बातें उनके जीवन में ज़हर घोलने लगती हैं. विवाह से पहले, जो प्रेमी अपनी प्रेमिका को सिवाय मॉडर्न ड्रेसेस, स्कर्ट आदि के अलावा अन्य किसी ड्रेस में देखना पसंद तक नहीं करता था, वही पति बनते ही उसे साड़ी में एक आदर्श बहू के रूप में जब देखना चाहता है, तो प्रेमिका के लिए इस बदलाव को सहज अपनाना आसान नहीं होता है. वह सोचती है कि शादी से पहले तो कितने सपने दिखाए थे, पर अब तो वह उस पर केवल अधिकार ही जमाना चाहता है.

इन बातों पर ध्यान दें…

–     बेहतर तो यही होगा कि पति-पत्नी के रिश्ते में बंधते ही दोनों नई स्थितियों व ज़िम्मेदारियों को परिपक्वता से संभाल लें.

–     इस तरह न अपेक्षाएं रहेंगी और न ही नियंत्रण करने की चाह जन्मेगी.

–    यह सोचना कि अब उनके बीच प्यार नहीं रहा है, ग़लत है. प्यार उनके बीच तब भी बरक़रार होता है, केवल अभिव्यक्ति के तरी़के व अवसर कम हो जाते हैं.

–    परिवार बनने के साथ सोच और माहौल में बदलाव आना स्वाभाविक ही है. यह बदलाव व्यावहारिकता का प्रतीक होता है और जो कपल ऐसा नहीं करते, उन्हें बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

–     आवश्यकता है कि प्यार को बरक़रार रखते हुए अपने साथी की भावनाओं का सम्मान करें.

–     पहले अगर वह आपकी बात मान लेता था, तो कोई वजह नहीं कि शादी के बाद न माने.

–     पति-पत्नी के रिश्ते में ताज़गी व रूमानियत बनाए रखनी हो, तो ज़रूरी है कि दोनों अपने संबंधोंं में ईगो न आने दें.

–     पहले की तरह हफ़्ते में दो दिन न सही, महीने में एक बार तो खाना बाहर खाया ही जा सकता है.

–    यह सच है कि कोर्टशिप के दिनों की मस्ती बनी रहे, यह संभव नहीं है, लेकिन एक-दूसरे को बदलने या नियंत्रित करने की कोशिश करने की बजाय पति-पत्नी की भूमिका में भी भरपूर लगाव व रूमानियत को तो बनाए ही रखा जा सकता है.

– सुमन बाजपेयी

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